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जब सफेद झंडे के बीच हुई बातचीत, फिर भारत ने प्वाइंट 5465 पर लहराया तिरंगा; कारगिल की दिलचस्प कहानी

 कारगिल  कारगिल युद्ध का नाम आते ही दिमाग में तोपों की गर्जना, बर्फ से ढकी दुर्गम चोटियां और भारतीय सैनिकों की अदम्य वीरता की तस्वीर उभरती है. 1999 की गर्मियों में भारत और पाकिस्तान के बीच 85 दिनों तक चली इस लड़ाई ने दोनों देशों के रिश्तों का एक ऐसा अध्याय लिखा, जिसे आज भी साहस और बलिदान की मिसाल माना जाता है. 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल की ऊंचाइयों से खदेड़कर विजय हासिल की. लेकिन, इस भीषण युद्ध के बीच एक ऐसा पल भी आया, जब कुछ मिनटों के लिए बंदूकें खामोश हुईं, सफेद झंडा लहराया गया और दो दुश्मन सैनिकों ने एक-दूसरे के साथ सिगरेट और चॉकलेट शेयर की।  यह कहानी है भारतीय सेना के सेवानिवृत्त कर्नल राजिंदर कुमार शर्मा की, जो उस समय युवा लेफ्टिनेंट थे. उनके सैन्य जीवन के इस अनोखे अनुभव का जिक्र उनके बेटों द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘शूरवीर’ में किया गया है. ये सभी बातें इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने एक रिपोर्ट में छापी है।  17 हजार फीट पर आमना-सामना जून 1999 में 22 ग्रेनेडियर्स की टुकड़ी प्वाइंट 5465 की ओर बढ़ रही थी. करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर लेफ्टिनेंट राजिंदर शर्मा अपनी छोटी टीम के साथ आगे बढ़ रहे थे. तभी पास की पहाड़ी पर जमे पाकिस्तानी सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी. शर्मा ने पहले से ही रणनीतिक तैयारी कर रखी थी. उन्होंने अपने जवानों और हथियारों की ऐसी तैनाती की थी कि जवाबी हमला सीधे पाकिस्तानी बंकरों पर पड़े. कुछ ही मिनटों में भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई इतनी सटीक और तेज थी कि दुश्मन के बंकरों में अफरा-तफरी मच गई. तभी अचानक एक पाकिस्तानी बंकर के पीछे से सफेद झंडा दिखाई दिया. युद्ध के नियमों में इसका मतलब होता है कि सामने वाला पक्ष बातचीत के लिए फायरिंग रोकने की अपील कर रहा है।  जब भारतीय अफसर अकेले दुश्मन के पास पहुंच गया भारतीय सैनिकों ने अपने अधिकारी को चेताया कि पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. लेकिन लेफ्टिनेंट शर्मा ने हालात का आकलन किया और बातचीत के लिए आगे बढ़ने का फैसला किया. मुश्किल यह थी कि भारतीय दल के पास सफेद झंडा था ही नहीं. तभी लांस नायक तुला राम ने अपनी सफेद बनियान उतारी और उसे INSAS राइफल की नाल पर बांधकर अस्थायी सफेद झंडा बना दिया. इसके बाद शर्मा दुश्मन की ओर बढ़े. कुछ दूरी पर पाकिस्तानी सैनिकों ने कहा कि सिर्फ एक अधिकारी आगे आए. तब शर्मा अकेले लगभग 150 मीटर ऊपर चढ़कर पाकिस्तानी अधिकारी मेजर जावेद से मिले।  सिगरेट, चॉकलेट और सैनिकों की बातचीत मेजर जावेद ने बातचीत की शुरुआत करते हुए कहा कि उनके जवानों को भारी नुकसान हुआ है और पूछा कि भारतीय सेना ने फायरिंग क्यों की. शर्मा ने साफ जवाब दिया कि पहले गोली पाकिस्तान की ओर से चली थी, भारतीय सेना ने सिर्फ जवाब दिया. तनाव के उस माहौल में अचानक जावेद ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और शर्मा को पेश की. दोनों अधिकारियों ने कुछ मिनट तक साथ बैठकर सिगरेट पी. बातचीत के दौरान शर्मा ने स्पष्ट कहा कि यह इलाका भारतीय सीमा में है और पाकिस्तानी सैनिकों को यहां से पीछे हटना चाहिए।  मेजर जावेद ने कहा कि वह भारत का संदेश अपने मुख्यालय तक पहुंचाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि वह सिर्फ आदेशों का पालन कर रहे हैं. जवाब में शर्मा ने भी साफ कर दिया कि यदि आगे बढ़ते समय भारतीय सैनिकों पर फिर हमला हुआ तो जवाब पहले से भी ज्यादा कड़ा होगा. बातचीत खत्म होने लगी तो जावेद ने उन्हें अपनी सिगरेट का पैकेट दे दिया. बदले में शर्मा ने अपनी जेब से कैडबरी चॉकलेट बार निकाला और जावेद को दे दिया. कुछ मिनट पहले तक एक-दूसरे पर गोलियां चलाने वाले दोनों अधिकारी फिर अपनी-अपनी चौकियों की ओर लौट गए।  शाम तक फतह कर लिया प्वाइंट 5465 बातचीत खत्म होते ही भारतीय टुकड़ी ने फिर आगे बढ़ना शुरू किया. दुश्मन की गोलियों, बारूदी सुरंगों और बेहद कठिन पहाड़ी रास्तों के बीच 22 ग्रेनेडियर्स ने शाम होने से पहले प्वाइंट 5465 पर कब्जा कर लिया. यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि यह बटालियन रेगिस्तानी इलाके में युद्धाभ्यास करने वाली यूनिट थी. हैदराबाद की 40 डिग्री गर्मी से सीधे शून्य से नीचे तापमान वाले कारगिल में पहुंची इस टुकड़ी को ऊंचाई के हिसाब से खुद को ढालने का भी ज्यादा समय नहीं मिला था. इसके बावजूद जवानों ने असाधारण साहस का परिचय दिया।  चोटी पर कब्जा करने के बाद जवानों को याद आया कि उनके अधिकारी ने जीत के बाद साथ में सिगरेट पीने का वादा किया था. तब कर्नल शर्मा ने वही पाकिस्तानी सिगरेट अपने सैनिकों में बांटी. एक जवान मुस्कुराते हुए बोला, “साहब, यह तो नहीं बताया था कि जीत के बाद पाकिस्तानी सिगरेट मिलेगी।  भारत के बेटे झुकना नहीं जानते आज 60 वर्ष के हो चुके कर्नल राजिंदर कुमार शर्मा को उनकी वीरता के लिए कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र और सेना मेडल से सम्मानित किया जा चुका है. उनका मानना है कि कारगिल युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि दुनिया के लिए एक संदेश था. उनके शब्दों में- कारगिल सिर्फ एक युद्ध नहीं था, यह संदेश था कि भारत के बेटे मर सकते हैं, लेकिन कभी झुक नहीं सकते. 26 साल बाद भी अगर दुश्मन दोबारा ऐसी गलती करेगा, तो उसे फिर कारगिल जैसा जवाब मिलेगा। 

पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 42.03 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित ई-प्रवेश पोर्टल पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 30 जून 2026 तक प्रदेशभर में 5,48,778 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया है। इनमें से 4,68,539 विद्यार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन पूर्ण हो चुका है तथा 2, 93, 257 विद्यार्थियों ने विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त कर लिया है। पिछले वर्ष कि तुलना में इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्रवेश में 42.03 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष 30 जून तक 2,06,482 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 2,93,257 हो गई है। यानी एक वर्ष में 86,775 अधिक विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेकर नया रिकॉर्ड बनाया है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अपनाई गई पारदर्शी, ऑनलाइन, सरल एवं विद्यार्थी-केंद्रित प्रवेश व्यवस्था, महाविद्यालयों में समयबद्ध दस्तावेज सत्यापन तथा प्रभावी काउंसलिंग व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। विद्यार्थियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभाग ने रिक्त सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया को और अधिक सरल बना दिया है। अब जिन शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में सीटें रिक्त हैं, वहाँ इच्छुक विद्यार्थी सीधे संबंधित महाविद्यालय पहुँचकर उसी दिन पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन एवं सीट आवंटन की समस्त प्रक्रिया पूर्ण करा सकेंगे। सीट आवंटित होने के तुरंत बाद विद्यार्थी उसी दिन निर्धारित शुल्क जमा कर प्रवेश प्राप्त कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को किसी अतिरिक्त चरण अथवा प्रतीक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा और रिक्त सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया तेजी से पूर्ण हो सकेगी। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी पात्र विद्यार्थियों से आग्रह किया है कि वे अपने निकटतम शासकीय अथवा अशासकीय महाविद्यालय में उपलब्ध रिक्त सीटों की जानकारी प्राप्त कर इस विशेष सुविधा का लाभ उठाएँ तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना प्रवेश सुनिश्चित करें।  

1 जुलाई से लागू हुए 10 बड़े बदलाव! LPG, पेट्रोल, आधार और आपकी जेब पर सीधा असर

 नई दिल्‍ली जुलाई महीने की पहली तारीख से ही देश में कई बदलाव लागू होने वाले हैं, जिसका असर आपकी जेब पर पड़ सकता है. ये बदलाव एलपीजी से लेकर पेट्रोल-डीजल के दाम तक हैं. एलपीजी के ढरों नियम में बदलाव हो रहा है तो उम्‍मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार इसकी कीमतों में कुछ राहत दे सकती है. वहीं 1 जुलाई से पेट्रोल-डीजल से पाबंदियों को भी हटाया जा रहा है।  1. एलपीजी के नियमों में बदलाव  केंद्र सरकार ने 90 दिनों की डेडलाइन दिया था, ताकि जिनके पास एलपीजी और पीएनजी के दोनों कनेक्‍शन हैं, वो अपना LPG कनेक्‍शन सरेंडर कर दें. 30 जून को इसकी डेडलाइन खत्‍म हो रही है, जिसका मतलब है कि 1 जुलाई से आप नए एलपीजी स‍िलेंडर की बुकिंग नहीं कर पाएंगे. इसके साथ ही केवाईसी पूरा नहीं कराने वालों को भी गैस मिलने में दिक्‍कत आ सकती है. हालांकि, सरकार बुकिंग टाइम को लेकर ढील दे सकती है।  2. LPG के दाम में कटौती  मिडिल ईस्‍ट में जंग छिड़ने के बाद से एनर्जी का संकट पैदा हुआ था, जिस कारण कमर्शियल से लेकर रसोई गैस सिलेंडर के दाम में कटौती हुई थी, लेकिन अब जब जंग रुक गई है और होर्मुज से होते हुए तेल भारत आ रहे हैं तो ऐसे में सरकार से उम्‍मीद है कि LPG के दाम में कटौती कर स‍कती है।  3. आधार कार्ड अपडेट  Aadhaar बनाने वाली संस्‍था UIDAI नए महीने से आधार कार्ड अपडेट को लेकर एक खास सर्विस पेश की है, जिसके तहत अगर आप अपने आधार कार्ड पर ईमेल अपडेट करना चाहते हैं तो आप 1 जुलाई से आधार ऐप के जरिए फ्री में अपडेट कर पाएंगे. पहले इसे अपडेट करने के लिए 75 रुपये का शुल्‍क देना पड़ता था।  4. रेलवे के नियम भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों के लिए 1 जुलाई 2026 से नियम सख्‍त किए जा रहे हैं. केंद्र सरकार ने एक प्रस्‍ताव रखा है, जिसपर राष्‍ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है और इसे जल्‍द ही लॉन्‍च किया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बिना टिकट यात्रा करने वालों पर जुर्माने की राशि बढ़ाने की तैयारी चल रही है. इसके अलावा, रेलवे परिसर में स्थिति सामान्‍य रखने के लिए भी नियम सख्‍त किए जा रहे हैं।  5. ITR डेडलाइन  ITR-1 और ITR-2 फॉर्म भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ITR भरने की डेडलाइन 31 जुलाई, 2026 है. अगर आप इस समय के तहत आईटीआर फाइल नहीं करते हैं तो जुर्माने का भुगतान करना पड़ सकता है. साथ ही कुछ टैक्स सिस्टम चुनने पर रोक लग सकती है।  6. पासपोर्ट फीस  अगर आप सामान्‍य या तत्‍काल, किसी भी तरह का पासपोर्ट बनवाने जा रहे हैं तो अब ये महंगा हो सकता है, क्‍योंकि विदेश मंत्रालय ने 1 जुलाई 2026 से नॉर्मल और तत्‍काल पासपोर्ट के लिए सर्विस फीस बढ़ा दी है. इसका मतलब है कि अगर आप पासपोर्ट अप्‍लाई करते हैं तो अब पहले से ज्‍यादा पेमेंट देना पड़ सकता है।  7. क्रेडिट कार्ड के नियम  SBI कार्ड ने चुनिंदा PhonePe SBI क्रेडिट कार्ड के लिए रिवॉर्ड पॉइंट में बदलाव कर रहा है. इस नियम के तहत रिवॉर्ड पॉइंट कमाने की नई सीमाएं और उन ट्रांज़ैक्शन की एक बड़ी लिस्ट तय की गई है जिन पर रिवॉर्ड पॉइंट नहीं मिलेंगे. इसके अलावा, 1 जुलाई, 2026 से, HDFC क्रेडिट कार्ड होल्डर्स हर कैलेंडर क्वार्टर में तीन बार मुफ़्त डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज का इस्तेमाल कर सकेंगे, बशर्ते उन्होंने पिछले कैलेंडर क्वार्टर में कम से कम ₹60,000 खर्च किए हों।  8. कारें हो रहीं महंगी  जुलाई के पहले दिन से कार के दाम बढ़ सकते हैं, क्‍योंकि KIA मोटर्स समेत कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी कारों के दाम बढ़ाने जा रही हैं. किआ ने अपनी कारों की कीमतों में 2 फीसदी और Tata Motors भी ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) और EV मॉडल्स की कीमतों में 1.5% तक की कीमतों में बढ़ाने पर विचार कर रहा है।  9. पेट्रोल-डीजल के नियम  भारत में 1 जुलाई से पेट्रोल और डीजल खरीदने को लेकर एक बड़ा बदलाव हो गया है. केंद्र सरकार ने उन अस्थायी प्रतिबंधों को हटा दिया है, जिनके तहत बड़े व्यावसायिक उपभोक्ताओं (Commercial Buyers) की खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद पर सीमा तय की गई थी. अब ट्रांसपोर्ट कंपनियां, फैक्ट्रियां, इंडस्‍ट्री और अन्‍य व्‍यावसायिक कंज्‍यूमर्स पहले जैसे तेल खरीद सकते है।  10. ईपीएफओ अपडेट  सरकार ईपीएफओ 3.0 के लॉन्‍च करने पर काम कर रही है. ईपीएफओ की वेबसाइट पर 3 दिनों के लिए सभी सर्विस को बंद किया गया है. उम्‍मीद है कि इसके बाद ईपीएफओ 3.0 लॉन्‍च कर दिया जाएगा. हालांकि अभी तक कोई अधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है. अगर ईपीएफओ 3.0 लॉन्‍च होता है तो पीएफ यूजर्स UPI और एटीएम के जरिए पैसे विड्रॉल कर सकते हैं। 

देश में पहली बार 12 उद्यानिकी फसलों को एक साथ मिला GI Tag, किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी

देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को म‍िला जी आई टैग वर्ष 2030 तक उदानिकी फसलों का क्षेत्र 30 लाख हेक्टेयर तक बढ़ेगा भोपाल मध्यप्रदेश ने इतिहास बनाते हुए एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों के लिए जी आई टैग हासिल करने में सफलता हासिल की है। देश में यह पहली बार हुआ है जब एक साथ इतनी बड़ी संख्या में जीआई टैग मिला है। इनमें गुना का धनिया, नरसिंहपुर बरमान घाट का बेंगन, बैतूल गजरिया आम, खरगौरी की लाल मिर्च, मांडू की खुरसानी इमली, जबलपुर का मटर, सिवनी का सीताफल, मालवी आलू और गराड़ू, नरसिंहपुर गुड, जबलपुर सिंघाड़ा, आलीराजपुर का नूरजहां आम, बुरहानपुर का केला, इंदौरी जीरावन, रतलाम सैलाना बालम ककड़ी और छतरपुर का पान शामिल है इसके अलावा उज्जैन की इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल पानिया, मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी, अशोक नगर की खिरनी को जी आई टैग दिलवाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। कृषक कल्याण वर्ष में यह एक बड़ी उपलब्ध‍ि है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के आय को दो गुना बढ़ाने के लिए उनसे उदयानिकी फसलों की खेती से जुड़ने का आव्हान किया है। फिलहाल 28 लाख हेक्टेयर में उदयानिकी फसलों की खेती हो रही है। वर्ष 2030 तक 30 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने की कार्ययोजना बनाई गई है। कुम्भराज धनिया कुम्भराज धनिया गुना जिले में लगभग 60 वर्षों से उगाया जा रहा है। यह किस्म 85-90 दिन में पककर तैयार होती है। इसकी उपज लगभग 12-15 कुंटल प्रति हेक्टर प्राप्त होती है। इसमें लगभग 0.4 से 0.50 प्रतिशित वाष्पशील तेल है, जिसकी वजह से इसमें बहुत अच्छी खुशबू व मिठास आती है। धनिया गुना जिले से अन्य देशो को निर्यात किया जा रहा है। कुम्भराज धनिया का स्वाद दूसरे धनिया की तुलना में तेज और बेहतर है, इसका चमकीला हरा रंग, उत्तम आकृत्ति और माप तथा शानदार सुगंध है। अकेले गुना में सालाना लगभग 32,000 मीट्रिक टन धनिया का उत्पादन होता है जो पूरे देश के कुल उत्पादन का 20 से 25 प्रतिशत है। बरमान भटे नर्मदा की बालुई मिट्टी में पैदा होने वाले भटे का जायका कुछ अलग ही है। यही कारण है कि बाहर से भी लोग अक्सर अपने माध्यमों से बरमान के भटे को बुलाते है, मंडियों में बरमान के भटे की तलाश रहती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नर्मदा किनारे कम तापमान होने की वजह से यहां के भटे का स्वाद अलग रहता है। बैतूल का गजर‍िया आम बैतूल जिले में खेड़ला किला, भवरगढ़, सांवलीगढ़, शेरगढ़ और असीरगढ़ किले जो 500 साल से ज्यादा पुराने किलो में आते हैं। जो यह बताते है की बैतूल गोंड राजाओ का केंद्र था। भारत वर्ष का सर्वसुलभ एवं लगभग हर प्रान्त में आसानी से उगाया जा सकने वाला फल आम है। ताजे फल के उपयोग के अतिरिक्त आम के फलों से अनेक परिरक्षित पदार्थ बनाये जाते हैं। कच्चे आम का अचार, अमचूर आदि बनाये जाते जबकि पके आम से स्क्वैश, जूस, शर्बत, जैम, अमावट आदि बनाये जाते हैं। अधिकतर आम के बाग अवैज्ञानिक तरीके से लगाये गये हैं, इनकी उत्पादकता अत्यन्त कम है। खरगोन मिर्च खरगोन जिले की मिर्च सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है। जिले में साल दर साल मिर्च की खेती का क्षेत्रफल और उत्पादन बढ़ रहा है। सबसे बड़ी मिर्च मण्डियों में से एक यहाँ खरगोन जिले में सनावद के पास बेदिया में स्थित है। निमाड़ और मालवा क्षेत्र राज्य के सर्वाधिक मिर्च उत्पादक क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों की लाल मिर्च चीन, पाकिस्तान, मलेशिया और सऊदी अरब को निर्यात की जाती है। खुरासानी इमली मांडव की माटी का जादू ऐसा है कि जो भी यहां आया, यहीं का होकर रह गया। अलग-अलग सभ्यताओं के राजवंश हों या भेंर की वनस्पतियां, सभी यहां की मिट्टी के साथ एक हो गए। ऐसा ही एक उदाहरण अफ्रीका के शुष्क राज्य का बाओबाब है। 14 वीं शताब्दी में महमूद खिलजी के शासनकाल के दौरान मांडव लाया गया था और इसका नाम 'बाओबाब से बदलकर खुरासानी इमली कर दिया गया था। इसे एक और नाम मांडवी इमली से भी जाना जाता है। यह पेड़ ऐसा लगता है जैसे किसी ने जड़ों सहित इसको उल्टा लगा दिया हो। ऊपर और तना नीचे, पत्तियाँ केवल वर्षा ऋतु में ही बढ़ती हैं। सीताफल सिवनी जिले में 656 हेक्टेयर क्षेत्र में 6500 मीट्रिक टन से अधिक सीताफल का उत्पादन होता है। सीताफल का वजन 600 से 700 ग्राम होने के कारण इसका नाम जंब सीताफल रखा गया है। अपने विशिष्ट आकार और स्वाद के कारण इसकी प्रदेश और देश में भी अच्छी मांग है। मालवी आलू भारतीय आलू रोग प्रतिरोधकता, आकार, माप, त्वचा, रंग आदि के मामले में अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता को पूरा करता है और आलू का प्रसंस्करण इसे अधिक आर्थिक मूल्य देता है। भारत के भीतर, मध्य प्रदेश राज्य वर्तमान में आलू का पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक है। राज्य की हिस्सेदारी 6.68 प्रतिशत थी और 2014-15 से 2018-19 के बीच पांच वर्षों के लिए उत्पादन औसत 3225.95 है। मध्य प्रदेश के कई कृषि जलवायु क्षेत्रों में से, मालवा क्षेत्र मध्य प्रदेश में आलू उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. हरी मटर जबलपुर हरी मटर जबलपुर की एक लोकप्रिय सब्जी और प्रमुख रबी फसल है। ये काफी पौष्टिक भी होते हैं और इनमें उचित मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। हरी मटर या "गार्डन मटर", छोटे, गोलाकार बीज हैं जो पाएसम सटाईवम पौधे द्वारा उत्पादित फली से आते हैं। वे सैकड़ों वर्षों से मानव आहार का हिस्सा रहे हैं और दुनिया भर में खाए जाते हैं। फसल अवधि 40-60 दिन है। जिले में वर्ष 2018-19 में हरी मटर की कुल बुआई 31,360 हेक्टेयर क्षेत्र में की गयी है तथा वर्ष 2018-19 का वार्षिक उत्पादन 52,500 टन है। गराडू गराडू (हायस्कोरियालाटा) मालवा क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रमुख फसलों में से एक है। यह रतालू की विभिन्न प्रजातियों में से एक है और स्वतंत्र रूप से खेती की गई है। मालवा में गराडू एकमात्र ऐसा है जिसकी नियमित रूप से खेती की जाती है और खाई जाती है, गराडू की उत्पत्ति का केंद्र लगभग मालवा प्लेटू है और भारत का अन्य भाग भी हो सकता है। गराडू को पर्यंत रतालू के नाम से … Read more

प्रदेश सरकार ने बीते 9 वर्ष में गन्ना किसानों को किया 3,23,572 करोड़ रुपये का भुगतान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों के हितों की रक्षा और उनकी आर्थिक समृद्धि के क्षेत्र में नया कीर्तिमान बनाया है। प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना किसानों को 31,682 करोड़ रुपये का भुगतान किया। वहीं वर्ष 2017 से गन्ना किसानों को अब तक 3,23,572 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान किया है। देश का सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला उत्तर प्रदेश निरंतर प्रथम स्थान पर बना हुआ है।  गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के अनुसार वर्ष 1995 से 2017 तक के 22 वर्ष में किसानों को कुल 2,13,519 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, जबकि वर्तमान सरकार ने मात्र नौ वर्ष में ही इससे 1,10,053 करोड़ रुपये अधिक भुगतान करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया है। वहीं वर्ष 2007 से 2017 (10 वर्ष) में कुल 1,47,346 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, जबकि वर्ष 2017 से अब तक 3,23,572 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। मिलों ने 89.52 लाख टन चीनी का उत्पादन किया  प्रदेश में योगी सरकार की किसान हितैषी नीतियों का असर वर्तमान पेराई सत्र 2025-26 में भी दिखाई दे रहा है। इस सत्र में अब तक किसानों को 31,682 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जो कुल देय राशि का 91.64 प्रतिशत है। गन्ना उत्पादन और चीनी उद्योग के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की हैं। पेराई सत्र 2025-26 में प्रदेश की 121 संचालित चीनी मिलों ने 878.12 लाख टन गन्ने की पेराई कर 89.52 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है।  10 लाख लोगों को मिला रोजगार  मार्च 2017 से अब तक प्रदेश में 04 नई चीनी मिलों की स्थापना की गई है, जबकि 07 बंद चीनी मिलों का पुनर्संचालन किया गया है। इसके अलावा 42 निजी क्षेत्र, 01 निगम क्षेत्र और 01 सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों में क्षमता विस्तार किया गया है। इन प्रयासों से 1,28,500 टीसीडी अतिरिक्त पेराई क्षमता का सृजन हुआ है। नई औद्योगिक इकाइयों और क्षमता विस्तार के परिणामस्वरूप लगभग 10 लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है। गन्ना के क्षेत्रफल में भी हुई काफी वृद्धि  उत्तर प्रदेश में 2016-17 में प्रदेश का गन्ना क्षेत्रफल 20.54 लाख हेक्टेयर था, जो नौ वर्षों में 39.29 प्रतिशत बढ़कर 28.61 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसी अवधि में गन्ने की औसत उत्पादकता 72.38 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 83.25 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है। उन्नत गन्ना प्रजातियों, वैज्ञानिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से प्रति हेक्टेयर 10.87 टन की वृद्धि दर्ज की गई है। गन्ना किसानों की संख्या में भी बड़ी वृद्धि  गन्ना किसानों की संख्या भी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2016-17 में प्रदेश में लगभग 33 लाख गन्ना किसान थे, जिनकी संख्या वर्तमान में बढ़कर 48 लाख हो गई है यानी नौ वर्ष में 15 लाख किसानों की वृद्धि हुई है। बढ़ते क्षेत्रफल, बेहतर उत्पादकता, रिकॉर्ड भुगतान और किसानों की संख्या में वृद्धि यह दर्शाती है कि प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण गन्ना किसानों की आय में वृद्धि हुई है। इन्हीं उपलब्धियों के बल पर उत्तर प्रदेश आज देश में गन्ना उत्पादन और गन्ना मूल्य भुगतान दोनों क्षेत्रों में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित हो चुका है।

CM मोहन यादव आज सिवनी में धान महोत्सव में होंगे शामिल, किसानों को ₹2.82 करोड़ की सहायता और विकास परियोजनाओं का तोहफा

सिवनी  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 1 जुलाई यानी आज  सिवनी के पॉलीटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में आयोजित धान महोत्सव में शामिल होने आ रहे हैं। इसके लिए आयोजन स्थल पर बड़े स्तर पर तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित आगमन को लेकर कलेक्टर नेहा मीना के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड, सुरक्षा, बैठक व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत, यातायात सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस आयोजन में मुख्यमंत्री किसानों को सौगात देंगे तो वहीं कृषि, श्रीअन्न संवर्धन और विकास कार्यों को समर्पित होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सिंगल क्लिक के माध्यम से कोदो एवं कुटकी उत्पादक प्रदेश के 3941 किसानों के बैंक खातों में 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपए की प्रोत्साहन राशि अंतरित करेंगे। ये राशि 1000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रदान की जा रही है, जिससे श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को आर्थिक संबल मिलेगा। विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे सीएम कलेक्टर नेहा मीना ने बताया कि, कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जिले के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी करेंगे। साथ ही, विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी किया जाएगा। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विभिन्न विभागों द्वारा लगाई जाने वाली थीम आधारित विकास प्रदर्शनी होगी। इस प्रदर्शनी में धान बुवाई के कृषि यंत्र, प्राकृतिक बीजों की प्रदर्शनी, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्राकृतिक फार्मिंग मॉडल, जीआई टैग प्राप्त सीताफल एवं मिलेट्स उत्पाद, पीएमएफएमई उत्पाद, आम की विभिन्न किस्में, स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प और मिट्टी कला उत्पाद, लघु वनोपज, स्थानीय उद्यमियों के उत्पाद तथा पोषण आहार का प्रदर्शन किया जाएगा। कृषिका ऐप की जानकारी भी किसानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। इस दिशा में अहम कदम है धान महोत्सव श्रीअन्न (मिलेट्स) पोषक तत्व से भरपूर होते हैं और इन्हें कम पानी में उगाया जा सकता है, जिससे वे जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बन गए हैं। भारत सरकार और राज्य सरकारें श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही हैं, जिनमें प्रोत्साहन राशि और बाजार लिंकेज शामिल हैं। ये पहल न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाती है, बल्कि उपभोक्ताओं को स्वस्थ खाद्य विकल्प भी प्रदान करती है। सिवनी में धान महोत्सव इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के दौरे से बढ़ी उम्मीदें मुख्यमंत्री का दौरा जिले के विकास कार्यों की समीक्षा और नई परियोजनाओं की घोषणा के लिए अहम माना जा रहा है। इन दौरों से स्थानीय प्रशासन को जनता से सीधे जुडऩे और उनकी समस्याओं को समझने का अवसर मिलता है। उम्मीद की जा रही है कि मुख्यमंत्री का सिवनी दौरा क्षेत्र में चल रही योजनाओं की प्रगति का आकलन करने और भविष्य की विकास रणनीतियों को आकार देने में सहायक होगा। यह अवसर स्थानीय जनता के लिए भी अपनी अपेक्षाएं व्यक्त करने का एक मंच प्रदान करेगा, जिससे शासन-प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित होता है। कलेक्टर ने व्यवस्थाएं परखीं मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर नेहा मीना ने कार्यक्रम स्थल पॉलिटेक्निक ग्राउंड, हेलीपैड स्थल, सेफ हाउस और सुकतरा हवाई पट्टी का निरीक्षण किया। उन्होंने इन सभी स्थानों पर चल रही तैयारियों का जायजा किया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने मंच की व्यवस्था, दर्शकों की बैठक व्यवस्था, पार्किंग स्थल, पेयजल आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम, साफ सफाई और यातायात प्रबंधन सहित अन्य आवश्यक पहलुओं का बारीकी से जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सभी तैयारियों को निर्धारित समय पर पूर्ण करने तथा प्रत्येक व्यवस्था को व्यवस्थित एवं त्रुटिरहित रखने के कड़े निर्देश दिए हैं।

El Niño Impact: 2032 तक भारत को ₹94 लाख करोड़ का आर्थिक झटका, रिपोर्ट में बड़ा दावा

नई दिल्ली अल-नीनो को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी है. अनुमान है कि नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच इसका असर सबसे ज्यादा रहेगा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को 2032 तक करीब 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 94,55,960 करोड़ रुपये) का आर्थिक नुकसान हो सकता है।  वहीं, पूरी दुनिया को 10 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की आर्थिक नुकसान  का अनुमान है. यह नुकसान केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खेती, रोजगार, एनर्जी और अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है. अल-नीनो एक ऐसी मौसमी घटना है, जो भारत में मानसून को कमजोर कर सकती है और गर्मी बढ़ा सकती है. आने वाले अल-नीनो के दौरान भी ऐसे ही हालात बनने की आशंका जताई गई है।  भारत पर क्या असर पड़ सकता है? एक इंग्लिश अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार अल-नीनो की वजह से भारत में भीषण गर्मी बढ़ सकती है और मानसून कमजोर हो सकता है. इसका सीधा असर खेती पर पड़ेगा. बारिश कम होने से फसलों का उत्पादन घट सकता है, सिंचाई की जरूरत बढ़ेगी और बिजली की मांग भी बढ़ सकती है. इससे खाद्य कीमतों और महंगाई पर भी असर पड़ने की आशंका है।  2032 तक 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान क्यों? रिसर्चर्स का कहना है कि अल-नीनो का असर केवल उसी साल तक सीमित नहीं रहता. इससे आर्थिक विकास की रफ्तार कई वर्षों तक धीमी रह सकती है. अनुमान है कि 2032 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो सकता है. वहीं, वैश्विक स्तर पर यह नुकसान 10 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक हो सकता है. वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि कुछ आर्थिक असर लंबे समय तक बने रह सकते हैं।  कृषि मंत्रालय ने शुरू की तैयारियां उधर कमजोर मॉनसून के असर से निपटने के लिए कृषि मंत्रालय ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा, "हमने उन 111 जिलों की पहचान कर ली है जहां अल नीनो का ज्यादा असर पड़ने की आशंका है. लेकिन असर 300 जिलों से ज्यादा पर पड़ने की आशंका है. हमने राज्यों को पूरी जानकारी दे दी है कि उनके यहां कौन-कौन से जिले या इलाके संवेदनशील हैं. इन सभी प्रभावित होने वाले जिलों में उन्हें खेती या रोजगार में जहां भी कमी आएगी 'जी राम जी' कानून के तहत सभी प्रभावित लोगों को रोजगार देने के लिए तैयार रहना होगा।  कृषि मंत्रालय और इंडियन कॉउन्सिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) ने मिलकर वैज्ञानिक डेटा के आधार पर 315 जिलों का आकलन किया, जहां कम वर्षा और सिंचाई की कमी का खतरा ज्यादा है क्योंकि इन 315 जिलों में मॉनसून कमजोर रहने की संभावना का अनुमान है।  केंद्रीय कृषि मंत्री ने प्रभावित होने वाले राज्यों को निर्देश दिया है कि जो पुरानी वॉटर बॉडीज है उनको समय पर ठीक कर लिया जाए. साथ ही, जितनी नई वॉटर बॉडीज बन सकती हैं बनायीं जाएं, और छोटी-छोटी वाटर बॉडीज जैसी संरचनाएं तैयार की जाएं. जल के संरक्षण से जुड़े कार्यों को 01 जुलाई से लांच होने वाले नए 'जी राम जी' कानून के तहत सर्वोच्च वरीयता दी जाए जिससे अगर बारिश कम हो तो बारिश के पानी को अच्छे से संग्रहित किया जा सके और इसका उपयोग खेती और पीने के पानी के लिए सही तरीके से हो सके।  दिल्ली में कब दस्तक देगा? यानी अगले 5 दिनों तक मॉनसून के दिल्ली या आसपास के इलाकों में पहुंचने का पूर्वानुमान नहीं है. मॉनसून के दिल्ली पहुंचने की सामान्य तारीख 27 जून है, लेकिन मॉनसून के दिल्ली पहुंचने में इस साल करीब एक हफ्ते की देरी होने की संभावना है. मौसम विभाग के एक सीनियर वैज्ञानिक के मुताबिक, एक नया सर्कुलेशन पैटर्न डेवेलोप हो रहा है जिसकी वजह से 5 दिन के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ़्तार फिर तेज़ होने की संभावना है।  जाहिर है, अगर मॉनसून ने 04 जुलाई से रफ्तार पकड़ी तो दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत के इलाकों में मॉनसून पहुंच सकता है।  क्या करना होगा?  एकस्पर्ट्स का कहना है कि सरकारों को अभी से तैयारी शुरू करनी चाहिए. इसके लिए बेहतर वेदर फोरकास्ट, समय पर चेतावनी देने वाले सिस्टम, गर्मी सहने वाली फसलों का विकास, सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश बढ़ाना जरूरी होगा. इससे अल-नीनो और क्लाइमेट चेंज दोनों के असर को कम करने में मदद मिल सकती है।  एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाला अल-नीनो केवल मौसम की घटना नहीं है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था, खेती और लोगों के जीवन पर बड़ा असर डाल सकता है. ऐसे में समय रहते तैयारी और क्लाइमेट के हिसाब से प्लानिंग बनाना फ्यूचर के नुकसान को कम करने के लिए जरूरी होगा। 

UP Election 2027 की तैयारी तेज, दिल्ली से पहुंचेगा शीर्ष नेतृत्व, 3-4 जुलाई की बैठक पर सबकी नजर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है. प्रदेश की सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए हर राजनीतिक दल ने अपने तरकस से तीर निकालने शुरू कर दिए हैं. इसी सियासी हलचल के बीच बीजेपी ने अपनी तैयारियों को धार देने के लिए ‘मिशन मोड’ एक्टिव कर दिया है. इसी मिशन को धार देने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 3 और 4 जुलाई को लखनऊ का दौरा करने वाले हैं. राजनीतिक गलियारों में इस दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव के बाद यह शीर्ष नेतृत्व का पहला बड़ा दौरा है. जानें इसके पीछे की कहानी।  नई टीम के साथ ‘चुनावी मंत्र’ भाजपा ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों को धार देने के लिए हाल ही में प्रदेश इकाई में व्यापक फेरबदल किया है. यूपी अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में नई टीम का गठन हो चुका है, जिसमें 19 उपाध्यक्ष, आठ महासचिव और 19 सचिवों को जिम्मेदारी सौंपी गई है. अब बारी इस टीम को ‘एक्टिव मोड’ में लाने की है. जानकारों का कहना है कि नितिन नवीन अपने इस दौरे के जरिए यह परखेंगे कि नई टीम जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी है और कार्यकर्ताओं के साथ उनका तालमेल कैसा है।  3-4 जुलाई: लखनऊ में क्यों है हलचल? नितिन नवीन का दो दिवसीय लखनऊ प्रवास केवल एक औपचारिक दौरा नहीं है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, उनका मुख्य फोकस आगामी विधानसभा चुनावों के लिए रोडमैप तैयार करना है. 3 और 4 जुलाई को वे राज्य के वरिष्ठ नेताओं, क्षेत्रीय प्रभारियों और संबद्ध संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ सिलसिलेवार बैठकें करेंगे. इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी उनकी मुलाकात की संभावना है. स्पष्ट है कि पार्टी संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना उनके एजेंडे में सबसे ऊपर है।  सीएम योगी संग होगी महाबैठक लखनऊ दौरे के दौरान नितिन नबीन सिर्फ संगठन के लोगों से ही नहीं मिलेंगे. सूत्रों का कहना है कि उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी होने वाली है. इस बैठक में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर गंभीर चर्चा होगी।  संघ के पदाधिकारियों से होगी बातचीत बीजेपी के इस महामंथन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका भी बड़ी होने वाली है. मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, नितिन नबीन अपने दौरे में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात कर सकते हैं. चुनाव से पहले संघ का फीडबैक भाजपा के लिए हमेशा से बहुत मायने रखता आया है।  जमीनी कार्यकर्ताओं से लेंगे फीडबैक सिर्फ बड़े नेताओं से मुलाकात ही इस दौरे का मकसद नहीं है. नितिन नबीन क्षेत्रीय स्तर के संगठन मंत्रियों और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ भी बैठकें करेंगे. वह जानना चाहते हैं कि यूपी की जनता के बीच इस समय क्या माहौल है और विपक्ष के दांव काट ढूंढने के लिए क्या किया जाना चाहिए।  तैयार होगा जीत का महाप्लान इस पूरे दो दिवसीय दौरे का आखिरी मकसद साल 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए एक अचूक रोडमैप तैयार करना है. दिल्ली से आ रहे मुखिया यह तय करेंगे कि आने वाले महीनों में पार्टी को कौन से बड़े कार्यक्रम करने हैं। 

उज्जैन के मंदिरों की बदलेगी तस्वीर, सिंहस्थ-2028 से पहले शुरू होगा मेगा विकास अभियान

उज्जैन  सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन के प्रमुख मंदिरों के कायाकल्प की व्यापक तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासन ने सात प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए ऐसा मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसका उद्देश्य केवल सुंदरीकरण नहीं बल्कि मंदिरों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित धार्मिक परिसरों में बदलना है, ताकि श्रद्धालुओं को सहज, सुरक्षित और सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था मिल सके। उल्लेखनीय है कि ज्योतर्लिंग परिसर में महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। इसी बढ़ती धार्मिक पर्यटन गतिविधि को देखते हुए उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों के विकास की तैयारी की गई है। इन मंदिरों का होगा कायाकल्प मध्य प्रदेश सरकार से तैयार इस योजना में महाकाल ज्योतिर्लिंग के अतिरिक्त श्री कालभैरव मंदिर, श्री मंगलनाथ मंदिर, श्री सिद्धवट, श्री अंगारेश्वर मंदिर, श्री सांदीपनि आश्रम, श्री भूखी माता मंदिर और श्री नवग्रह शनि मंदिर को शामिल किया गया है। प्रत्येक मंदिर के आसपास उपलब्ध भूमि, श्रद्धालुओं की संख्या और भविष्य में बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखकर अलग-अलग विकास योजनाएं बनाई गई हैं। ये सुविधाएं होंगी विकसित योजना का सबसे बड़ा हिस्सा मंदिर परिसरों के विस्तार से जुड़ा है। असल में, कई प्रमुख मंदिरों में वर्तमान में सीमित स्थान होने के कारण पर्व और विशेष अवसरों पर भारी भीड़ से अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है। ऐसे में आवश्यकता अतिरिक्त भूमि शामिल कर इन मंदिरों में खुले और बड़े परिसर विकसित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं को लंबी कतारों और अव्यवस्थित भीड़ से राहत देने के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग मार्ग तैयार किए जाएंगे। प्रतीक्षा क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, ताकि दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम और समयबद्ध हो सके। मास्टर प्लान के अनुसार, इन मंदिरों के आसपास बड़े पार्किंग हब और फेसिलिटी सेंटर भी विकसित किए जाएंगे। इनमें शौचालय, पेयजल, प्रसाद केंद्र, विश्राम स्थल और सूचना केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। सुरक्षा पर भी विशेष फोकस मंदिरों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को भी योजना का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। मंदिर परिसरों में सीसीटीवी निगरानी, बैरिकेडिंग, नियंत्रण कक्ष और आपातकालीन निकास मार्ग विकसित किए जाएंगे, ताकि सिंहस्थ और बड़े आयोजनों के दौरान भीड़ को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्यों में मंदिरों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। निर्माण कार्यों में पारंपरिक स्थापत्य और प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।  

Delhi EV Policy 2026: ₹1 लाख तक इंसेंटिव, रोड टैक्स माफ, जानें 1 जुलाई से क्या-क्या बदलने वाला है

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नई ईवी पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। अब ये पॉलिसी एक जुलाई से दिल्ली में लागू होगी। इसके तहत ईवी गाड़ी खरदीने वाले लोगों को भारी छूट और सब्सिडी दी जाएगी। दिल्ली ईवी नीति के पहले साल में सभी इलेक्ट्रिक टू व्हीलर गाड़ी खरीदारों को 30 हजार रुपए और थ्री व्हीलर खरीदारों को 50 हजार रुपए की सब्सिडी मिलेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई दिल्ली कैबिनेट की बैठक में दिल्ली EV पॉलिसी 2026 को मंजूरी दी गई। प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए और इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए लागू की जा रही ये नीति 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी। क्या है सरकार का प्लान? नई ईवी नीति के तहत, अगले साल एक जनवरी से दिल्ली में सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो और एक अप्रैल 2028 से इलेक्ट्रिक दो पहिया वाहन ही रजिस्टर्ड किए जाएंगे। ऐसे में इस नीति के लागू होने के बाद दिल्ली में पेट्रोल और सीएनजी से चलने वाले ऑटो रिक्शा की बिक्री पर प्रतिबंध लग सकता है। इसके अलावा पेट्रोल से चलने वाले टू व्हीलर की बिक्री भी बंद हो सकती है। सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि ईवी नीति के तहत 4 साल में 15,000 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। BS-IV कार स्कैप करने पर मिलेगा एक लाख रुपए इस नीति के तहत सबसे बड़ी घोषणा BS-IV गाड़ी वाले लोगों के लिए की गई है। दिल्ली ईवी नीति के तहत अगर BS-IV कार मालिक अपनी गाड़ी को स्क्रैप करते हैं तो उन्हें सरकार की तरफ से 10 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक का इंसेंटिव दिया जाएगा। रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस भी माफ इसके अलावा ईवी गाड़ी खरदीने वाले लोगों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस पर 100 फीसदी छूट मिलेगी। यानी अगर कोई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदता है तो उसे रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इलेक्ट्रिक चार पहिया गाड़ी खरीदने वालों को ये फायदा 30 लाख रुपए तक की एक्स शोरूम कीमत वाली गाड़ियों पर मिलेगा। सरकार ने इस नीति के तहत भारी वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए भी एक बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के तहत नोटिफिकेशन जारी होने के 3 महीने के भीतर खरीदे गए पहले एक हजार N2 इलेक्ट्रिक ट्रकों नो एंट्री के समय से 10 साल की छूट मिलेगी। इसके अलावा दिल्ली में ईवी चार्जिंग स्टेशन भी तेजी से स्थापित किए जाएंगे। सरकार का चारगेट पूरी दिल्ली में 30 हजार चार्जिंग पॉइंट बनाने का है। कैसे खर्च होंगे 15 हजार करोड़? सीएम रेखा गुप्ता ने बताया उप राज्यपाल के पास फाइनल पॉलिसी भेज दी गई है। ईवी पॉलिसी के जरिए दिल्ली सरकार चार साल में 15000 करोड़ खर्च करेगी। इनमें से 7000 करोड़ सब्सिडी पर और 8000 करोड़ चार्जिंग स्टेशन बनाने और रजिस्ट्रेशन शुल्क और रोड टैक्स माफी पर खर्च होंगे।