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लोकभवन में लगा रक्तदान एवं स्वास्थ्य शिविर, राज्यपाल पटेल ने किया उद्घाटन

राज्यपाल पटेल ने रक्तदान स्वास्थ्य शिविर का लोकभवन में किया शुभारंभ लोक भवन में आयोजित शिविर में 370 लोगों ने लिया भाग भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर सेवा संकल्प अभियान के तहत लोकभवन में आयोजित स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया। शिविर के विभिन्न काउन्टरों पर जाकर परामर्श जाँच एवं परीक्षण व्यवस्थाओं की समीक्षा की। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अपनी बोन मिनरल डेनसिटी (बी.एम.डी.) जांच कराकर शिविर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। दंत परीक्षण, फिजियोथेरेपी जाँच, बोन मिनरल डेनसिटी (बी.एम.डी.) जांच एवं नि:शुल्क स्वास्थ्य परामर्श एवं औषधि वितरण व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने रक्तदाताओं को फलो की टोकरी भेंट कर, उनके सेवा संकल्प की सराहना की। रक्तदान करने आए छात्र-छात्राओं से चर्चा की। उनका उत्साहवर्धन किया। राज्यपाल ने प्रारंभ में लोक भवन में आयोजित नि:शुल्क परामर्श, जाँच और रक्तदान शिविर का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। रक्तदान एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन गुरुवार को सुबह 10 बजे से एक बजे तक लोक भवन के सांदीपनि सभागार में किया गया था। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे। शिविर में रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन श्याम सिंह कुमरे एवं जनरल सेक्रेटरी रामेंद्र सिंह सहित चिकित्सक, विशेषज्ञ एवं अन्य संबंधित जन उपस्थित रहे। लोक भवन में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में 370 आमजन शामिल हुए। रक्तदान के लिए 109 रक्तदाताओं ने पंजीयन कराया, जिनमें चिकित्सकीय परामर्श के बाद 77 रक्तदाताओं ने रक्तदान किया। दंत परीक्षण शिविर में 74 व्यक्तियों ने जांच कराई। उन्हें उपचार संबंधी परामर्श और आवश्यक औषधियां प्रदान की गई। बी.एम.डी. जाँच शिविर 125 आमजन ने जांच कराई। जांच में 77 आमजन की हड्डियों की स्थिति सामान्य पाई गई, जबकि 45 व्यक्तियों में हड्डियों की मामूली कमजोरी ऑस्टियोपेनिया तथा 3 व्यक्तियों में ऑस्टियोपोरोसिस पाया गया। सभी को चिकित्सकीय परामर्श एवं आवश्यक औषधियां प्रदान की गईं। फिजियोथेरेपी जाँच शिविर में 62 व्यक्तियों ने भाग लिया। उनकी फिजियोथेरेपी से संबंधित समस्याओं के संबंध में चिकित्सकों द्वारा आवश्यक परामर्श एवं व्यायाम बताए गए।  

न्यायमूर्ति कोगजे ने संभाली MP हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधिपति की कमान, बने 30वें चीफ जस्टिस

राज्यपाल पटेल ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति को दिलाई शपथ न्यायमूर्ति कोगजे मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के बने 30वें मुख्य न्यायाधिपति भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे ने मध्य प्रदेश के 30 वें मुख्य न्यायाधीपति की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन गुरूवार को लोकभवन के सांदीपनि सभागार में किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित रहे। राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शपथ ग्रहण के बाद नव नियुक्त मुख्य न्यायाधिपति कोगजे को पुष्प-गुच्छ भेंट कर बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने शपथ ग्रहण समारोह का संचालन किया। उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे को नियुक्त किए जाने की अधिसूचना का वाचन किया। समारोह का प्रारंभ और समापन राष्‍ट्रीय गीत वंदे मातरम् तथा राष्‍ट्र गान जन-गण-मन के गायन के साथ हुआ। शपथ ग्रहण समारोह में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्‍द्र सिंह तोमर, उप मुख्‍यमंत्री द्वय जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्‍ल, कौशल विकास एवं रोजगार राज्‍यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्‍यक्ष अवधेश प्रताप सिंह, पूर्व राज्‍यपाल कप्‍तान सिंह सोलंकी, न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया, न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर, न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट, न्यायमूर्ति विनय सराफ, न्यायमूर्ति रमेश फड़के, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह, अपर मुख्‍य सचिव डॉ. शिवशेखर शुक्‍ला और संजय शुक्‍ल, राज्‍यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, विधायक, सांसद मध्‍यप्रदेश, गुजरात और उत्तरप्रदेश राज्‍य के उच्‍च न्‍यायालयों के न्‍यायमूर्तिगण, वरिष्‍ठ प्रशासनिक, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और आयोगों के पदाधिकारी मौजूद थे।  

निजी विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में निभाएं अहम भूमिका: राज्यपाल पटेल

हमारी ज्ञान परंपरा में व्यावहारिकता, गहनता और जीवन का दर्शन : राज्यपाल पटेल राज्यपाल भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में निजी विश्वविद्यालयों के योगदान विषय पर आयोजित कार्यशाला में हुए शामिल भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारतीय संस्कृति प्रकृति पूजक है। ब्रह्माण्ड के सूर्य, चन्द्रमा, ग्रह, नक्षत्र हमारी जीवन संस्कृति का अभिन्न अंग है। प्रकृति के पांचों तत्व वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी और नभ हमारी दैनिक दिनचर्या में शामिल है। यह महान ज्ञान परंपरा अनंत काल से शाश्वत है। इसमें व्यावहारिकता, गहनता और जीवन का गूढ़ दर्शन है। जरूरी  है कि इस अद्भुत और गौरवशाली परंपरा को वर्तमान और भावी पीढ़ी तक सार्थक रूप से पहुंचाया जाए। आयोजक इस दिशा में बेहतर पारस्परिक समन्वय के साथ चिंतन करें, शोध और अनुसंधान को बढ़ावा दें। भारतीय ज्ञान परंपरा का निरंतर समृद्धता में योगदान करें। राज्यपाल पटेल मंगलवार को मध्‍यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग और निजी विश्वविद्यालय संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने की निजी विश्वविद्यालयों के माध्यम से की गई पहल के लिए आयोजकों को बधाई और शुभकामनाएं दी। कुशाभाऊ सभागार में आयोजित कार्यशाला का आयोजन ''भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में निजी विश्वविद्यालयों के योगदान'' विषय पर किया गया था। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर परमार भी मौजूद थे। विकसित भारत के लिए सक्षम और सामर्थ्यवान पीढ़ी तैयार करें : राज्यपाल राज्यपाल पटेल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का महान स्त्रोत हमारी वैदिक,   पौराणिक और प्राचीन संस्कृति है। रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ, ज्ञान, विज्ञान और संस्कार के अद्भुत भंडार है। इन ग्रंथों के प्रत्येक पात्र प्रेम, आदर, त्याग, स्वाभिमान, सम्मान और नैतिकता के आदर्श प्रतीक है। उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों से अपेक्षा की है कि हमारी परंपरा और उसके ज्ञान तत्वों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की ज़िम्मेदारी स्वीकारें। विद्यार्थियों को समाज के गरीब, पिछड़े, वंचित और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाएं। उन्हें विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सक्षम और सामर्थ्यवान बनाएं। उन्होंने कहा कि आयोजक नियमित रूप से ऐसे आयोजनों की समीक्षा के द्वारा भविष्य की चुनौतियों और उनके समाधान के प्रयास करें। वही विद्या सार्थक, जो अज्ञान, भय और बंधन से करें मुक्त : पटेल राज्‍यपाल पटेल ने कहा कि हमारी गुरु शिष्य परंपरा में शिक्षा केवल पाठ याद करना नहीं, बल्कि चरित्र, अनुशासन, आत्म निर्भरता और कर्तव्य बोध का विकास करना था। भारतीय ज्ञान परंपरा का गौरव, ऐसी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि उस सोच में है, जिसने ज्ञान को मानव और समाज के हित से जोड़ा है। भारतीय ज्ञान परंपरा में शिक्षा की सार्थकता मनुष्य को अज्ञान, भय और बंधन से मुक्त करना और “सब सुखी हो” के लिए कार्य करना बताया है।   हमारी ज्ञान परंपरा में मानव कल्याण का महान ध्येय : राज्यपाल राज्‍यपाल पटेल ने कहा कि भारत केवल एक प्राचीन देश नहीं, ऐसी महान ज्ञान सभ्यता है, जिसका लक्ष्य सत्य, जीवन और लोक का कल्याण था। हमारी ज्ञान परंपरा में शिक्षा केवल सूचना पाना नहीं, बल्कि जीवन को समझकर मानवता के कल्याण के लिए सत्य की खोज करना था। उन्होंने कहा कि उपनिषदों में हमारी ज्ञान परंपरा की जिज्ञासा, वेदों में प्रकृति और ब्रह्मांड के प्रति सम्मान तथा हमारे दर्शन में जीवन के गहरे सवालों के चिंतन की महान विरासत मिलती है। चरक और सुश्रुत ने मानव स्वास्थ्य और चिकित्सा को व्यवस्थित ज्ञान के रूप में विकसित किया। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में शासन, अर्थनीति, कूटनीति और समाज व्यवस्था पर गहरा चिंतन मिलता है, जिसकी प्रासंगिकता सर्वकालिक है। राज्‍यपाल पटेल ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। उनका मध्‍यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. खेमसिंह डेहरिया और निजी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। भारतीय ज्ञान परम्परा केवल पाठ्यक्रम नहीं, व्यावहारिक ज्ञान का सशक्त माध्यम : उच्च शिक्षा मंत्री परमार कार्यशाला में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा केवल पाठ्यक्रम का विषय नहीं, बल्कि समाज जीवन में विद्यमान व्यावहारिक ज्ञान की समृद्ध परम्परा है। यह हमारे पूर्वजों का प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव उनकी वैज्ञानिक एवं समग्र जीवन-दृष्टि की परिचायक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा में भारतीय ज्ञान परम्परा के समृद्ध समावेश का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को भारतीय दृष्टि एवं भारतीयता से जोड़ने के प्रयासों में सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों की सक्रिय और पारस्परिक सहभागिता आवश्यक है। जरूरी है कि इसका युगानुकूल परिप्रेक्ष्य में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ शोध, अनुसंधान एवं दस्‍तावेजीकरण किया जाए। सभी निजी विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष प्रकोष्ठ गठित करें। अपने पूर्वजों के ज्ञान को सहेजें और तथ्यों के आधार पर जीवनोपयोगी पाठ्य सामग्री तैयार करें। शिक्षा संस्कृति और उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा की दिशा में मध्‍यप्रदेश की कार्य प्रणाली की सराहना की। प्रदेश को राष्ट्रीय प्रयासों में अग्रणी बताया। निजी विश्वविद्यालयों के सहयोग से भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने की पहल को अनुकरणीय कहा। मध्‍यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल ने हिन्दी ग्रंथ अकादमी द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पाठ्यक्रम सृजन और प्रकाशन प्रयासों की जानकारी दी। कार्यशाला में उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के भावी रोडमेप के लिए स्‍थानीयता और आधुनिकता का समन्वय प्रशिक्षण, शोध एवं अनुसंधान आधारित प्रमाणित पाठ्यक्रम, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा अत्यंत जरूरी है। कार्यशाला में स्वागत उद्बोधन निजी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने दिया। आभार निजी वि.वि. संघ के सचिव डॉ. अजीत सिंह पटेल ने व्यक्त किया। इस अवसर पर उच्‍च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी,  मध्‍यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सदस्य, निजी विश्वविद्यालय संघ के पदाधिकारी, शिक्षाविद् उपस्थित थे।  

नई श्रम संहिताओं से श्रमिकों के अधिकार होंगे मजबूत, श्रम मंत्री पटेल का बड़ा बयान

नवीन श्रम संहिताएं श्रमिकों को अधिक से अधिक लाभ दिलाएंगी : श्रम मंत्री पटेल नियमों को सरल, व्यावहारिक और श्रमिक-केंद्रित बनाने के दिए निर्देश असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म कर्मकारों की सामाजिक सुरक्षा, डिजिटल पंजीयन और समूह बीमा पर विशेष जोर श्रमिकों की दुर्घटना की सूचना के लिए सक्रिय पोर्टल एवं टोल-फ्री हेल्पलाइन विकसित की जाएगी भोपाल  श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए नवीन श्रम संहिताओं के नियमों को बनाया जाए। नियमों की व्याख्या इस तरह हो कि आम श्रमिक भी आसानी से समझ सके। इन्हें अधिक सरल, व्यवहारिक और श्रमिक-केंद्रित बनाया जाए। यह बात पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने विकास भवन में प्रदेश की नवीन श्रम संहिताओं के प्रस्तावित राज्य नियमों की समीक्षा करते हुए कही। मंत्री पटेल ने कहा कि नई श्रम संहिताओं का उद्देश्य श्रमिकों को अधिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ श्रमिक एवं नियोक्ता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। मंत्री पटेल ने श्रमिक कल्याण मंडलों एवं विभिन्न बोर्डों की संरचना में श्रमिक क्षेत्रों में कार्य करने वाले अनुभवी कार्यकर्ताओं को भी शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने समूह बीमा योजना के नियम इस प्रकार तैयार करने पर बल दिया, जिससे असंगठित कर्मकारों को अधिकतम लाभ मिल सके। साथ ही संबल योजना का दायरा बढ़ाकर अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों को लाभान्वित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के अंशदान में सरकार अथवा नियोक्ता की सहभागिता से योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक सहज एवं प्रभावी होगा। मंत्री पटेल ने प्रस्तावित नियमों में कुछ प्रावधानों को और अधिक स्पष्ट एवं संवेदनशील बनाने पर जोर दिया। बीमा न्यायालय की कार्य प्रणाली, अर्द्धन्यायिक व्यवस्था तथा श्रमिकों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराने के विभिन्न प्रावधानों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। राष्ट्रीय फ्लोर वेज तथा न्यूनतम मजदूरी निर्धारण के संबंध में मंत्री पटेल ने कहा कि कृषि श्रमिकों की कार्यकुशलता, बाजार की वास्तविक परिस्थितियों तथा विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में प्रचलित मजदूरी दरों का समुचित अध्ययन कर व्यावहारिक निर्णय लिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रमिक हितों को ध्यान में रखते हुए मजदूरी निर्धारण की प्रक्रिया अधिक यथार्थपरक बनाई जाए। श्रमजीवी पत्रकारों के संबंध में विशेष प्रावधानों पर चर्चा करते हुए मंत्री पटेल ने कहा कि कोई भी निर्णय लेने से पहले पत्रकार संगठनों एवं उनके प्रतिनिधियों से संवाद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनकर उनके हितों के अनुरूप नियम तैयार किए जाएं। मंत्री पटेल अन्तर्राज्यीय प्रवासी कर्मकारों के ऑनलाइन पंजीयन के लिए डिजिटल पोर्टल विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। मंत्री पटेल ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों का सटीक डेटाबेस तैयार होने से उनके हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उन्होंने पंचायत सचिवों एवं नगरीय निकायों के वार्ड स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी एवं जवाबदेही भी तय करने के निर्देश दिए। श्रमिकों की दुर्घटनाओं की त्वरित सूचना एवं सहायता के लिए सक्रिय पोर्टल तथा टोल-फ्री हेल्पलाइन विकसित करने के भी निर्देश दिए गए। ट्रांसजेंडर एवं दिव्यांगजनों के लिए कार्य स्थलों पर सुलभ स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं गरिमा से संबंधित प्रावधानों को स्पष्ट रूप से शामिल करने पर भी बल दिया गया। निरीक्षक प्रणाली के स्थान पर सुविधा प्रदाता (फैसिलिटेटर) आधारित व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने पर भी चर्चा हुई। बैठक में विभाग के सचिव रघुराज राजेन्द्रन ने नवीन श्रम संहिताओं के प्रमुख प्रावधानों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित कर 4 नई श्रम संहिताएं तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य सूचना आधारित पंजीयन व्यवस्था को बढ़ावा देना, नियोक्ता एवं कर्मचारी के बीच बेहतर संबंध स्थापित करना तथा उद्योगों को सुगम कार्य वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था में तकनीक आधारित पंजीयन, संस्थानों को 24×7 संचालन की सुविधा, पृथक बीमा न्यायालय, अपील प्राधिकरण, राष्ट्रीय फ्लोर वेज, असंगठित, गिग एवं प्लेटफॉर्म कर्मकारों के सामाजिक सुरक्षा प्रावधान, फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए एक वर्ष की सेवा पर ग्रेच्युटी की पात्रता तथा श्रमजीवी पत्रकारों एवं अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिकों से संबंधित नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। बैठक में विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

ग्रामीण विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे: मंत्री पटेल

पंचायतों को बनाए आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुखी : मंत्री पटेल ग्रामीण विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे पंचायतों के श्रेणीकरण, जल संरक्षण, डिजिटल सेवाओं और अधूरे आवासों के प्रभावी उपयोग पर दिए निर्देश पंचायत दर्पण पोर्टल पर नागरिक सेवाओं का विस्तार, बिजली-पानी बिल एवं कर भुगतान की ऑनलाइन सुविधा पर जोर विकास भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा में दिए निर्देश भोपाल ग्रामीण विकास योजनाओं का मुख्य उद्देश्य सिर्फ आधारभूत सुविधाएं देना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर, सशक्त और रोजगारोन्मुखी बनाना होगा। यह बात पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने विकास भवन में ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश देते हुए कही। मंत्री पटेल ने कहा कि ग्राम पंचायतों का श्रेणीकरण उनके वास्तविक डाटा और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर किया जाए तथा इस प्रक्रिया में पंचायतों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य केवल आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि पंचायतों को आत्मनिर्भर, सशक्त और रोजगारोन्मुखी बनाना होना चाहिए। मंत्री पटेल ने जल गंगा संवर्धन अभियान, सामुदायिक शौचालयों की स्थिति तथा वीवीजी रामजी योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए कहा कि आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए जल संरक्षण एवं भू-जल पुनर्भरण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि योजना के अंतर्गत ऐसे कार्यों का चयन किया जाए, जिनसे रिचार्जिंग सिस्टम को मजबूती मिले और जल संरक्षण के स्थायी परिणाम प्राप्त हों। सामुदायिक भवनों के रखरखाव एवं स्वच्छता के लिए उपलब्ध राशि का उपयोग उसी परिसर में किया जाए तथा आवश्यकता अनुसार उपयुक्त स्थलों का चयन किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा के दौरान मंत्री पटेल ने अधूरे आवासों की स्थिति पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिन हितग्राहियों का निधन हो चुका है और उनके आवास अधूरे हैं, ऐसे मामलों में नियमानुसार पंचायतें भवनों को पूर्ण कर उन्हें आंगनवाड़ी, सामुदायिक भवन अथवा अन्य सार्वजनिक उपयोग के लिए विकसित करने की कार्ययोजना तैयार करें। उन्होंने भूमि संबंधी समस्याओं के कारण आवास निर्माण से वंचित पात्र परिवारों के प्रकरणों का भी प्राथमिकता से निराकरण करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के अंतर्गत प्रदेश के 24 जिलों में भारत सरकार द्वारा प्राप्त 1.89 लाख आवासों के लक्ष्य के विरुद्ध शत-प्रतिशत स्वीकृतियां प्रदान की जा चुकी हैं तथा 1.44 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। आवास पूर्णता के मामले में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना में अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाते हुए बहु-स्तरीय स्वीकृति व्यवस्था के स्थान पर सहज प्रणाली विकसित की गई है, जिससे पात्र हितग्राहियों को शीघ्र लाभ मिल सके। मंत्री पटेल ने कहा कि पंचायत केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि पूरे भूगोल और स्थानीय संसाधनों की संरक्षक है। उन्होंने पंचायत क्षेत्र के वृक्षों की जियो-टैगिंग कर उनकी जिम्मेदारी तय करने तथा पंचायत का डिजिटल नक्शा नागरिक पोर्टल पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पंचायतों में बिजली एवं पानी के बिलों का डिजिटल जनरेशन तथा भुगतान व्यवस्था विकसित होने से पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी। बैठक में पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से नागरिक सेवाओं के विस्तार की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि पोर्टल पर पेमेंट गेटवे सिस्टम विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से ऑनलाइन कर भुगतान, भवन निर्माण अनुमति, ग्रामीण संपत्ति कर सहित विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। नागरिक एमपी ऑनलाइन कियोस्क के माध्यम से भी आवेदन कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त बिल जनरेशन एवं ऑडिट जैसी सुविधाओं को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। मंत्री पटेल ने निर्देश दिए कि पंचायतों में रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए तथा योजनाओं से जुड़े अधिकारियों का पर्याप्त कार्यकाल सुनिश्चित किया जाए, जिससे योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके। उन्होंने जन-जागरूकता गतिविधियों को भी गति देने पर बल दिया। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

गुणवत्ता की निगरानी के लिए मानक मापदंड तय किए जाएं: राज्यपाल पटेल

गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड किए जाए निर्धारित : राज्यपाल पटेल  राज्यपाल ने सिकल सेल उन्मूलन अभियान की प्रगति पर हर्ष व्यक्त किया लोक भवन में जनजातीय कार्य विभाग समीक्षा बैठक हुई भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि योजनाओं की मंशा और क्रियान्वयन की व्यवहारिकता में संवेदनशीलता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन मुख्यतः तकनीकी विषय है, इसलिए हितग्राहियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। निर्माण सामग्री एवं कार्य की गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड निर्धारित किए जाए। अधिकारियों द्वारा निगरानी मापदंड के अनुसार नियमित गुणवत्ता परीक्षण करना चाहिए।       राज्यपाल पटेल लोक भवन में बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।  राज्यपाल को बैठक में पीएम-जनमन योजना अंतर्गत 9 विभागों की 11 अधोसंरचनात्मक, 7 हितग्राही मूलक योजनाओं और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 17 विभागों की 25 योजनाओं  की प्रगति की जानकारी दी गई। राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता की पहल पीएम-जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजनाएं है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य के लिए निर्धारित समय सीमा तक कार्य की रीति-नीति उचित नहीं है। रणनीति, समय सीमा से पहले कार्य पूरा करने की होनी चाहिए। नए कार्यों के क्रियान्वयन में पूर्व अनुभवों और चुनौतियों को दृष्टिगत रखते हुए कार्य योजना तैयार की जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अति पिछड़ी जनजातियों के विकास और उत्थान के प्रयासों को आवश्यकता और बहुलता की प्राथमिकता के साथ क्रियान्वयन की औपचारिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए। राज्यपाल पटेल ने प्रदेश में सिकल सेल उन्मूलन अभियान के तीव्र गति से क्रियान्वयन पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 से पूर्व वर्ष 2026 तक लक्ष्य का पूरा होना अनुमानित है। उन्होंने सभी संबंधितों को इसके लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष की आयु तक के सिकल सेल रोगी वाहक के स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे उनका भावी जीवन सुरक्षित हो जाएगा। जरूरी है कि सिकल सेल की दवाओं की उपलब्धता सदैव सुनिश्चित रहे। एलोपैथिक उपचार पद्धति के साथ ही आयुर्वेद औषधियों के उपयोग के संबंध में जन जागरण के प्रयासों की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की दवाओं के उपयोग से रक्त की उपलब्धता बढ़ने और थकान में कमी के उत्साह जनक प्रारंभिक परिणाम प्राप्त हुए है। राज्यपाल ने बैठक में जनजातीय बहुल क्षेत्रों की तहसीलवार बुनियादी सुविधाओं का मानचित्र तैयार कर प्रभावी निगरानी, जन औषधि केन्द्रों के संचालन में जनजातीय युवाओं की भागीदारी तथा विद्यालयों में छात्राओं, छात्र के पृथक शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया। समीक्षा बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, जनजातीय प्रकोष्ठ की सदस्य सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, प्रकोष्ठ के सदस्य, लोक भवन और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।  

गोंड चित्रकला को मिलेगा वैश्विक बाजार, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगे कलाकार: मंत्री पटेल

गोंड चित्रकला को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से मिलेगा वैश्विक मंच : मंत्री पटेल अमेज़न ई-कारीगर से जुड़ेंगे जनजातीय कलाकार डिंडोरी में आजीविका ग्राम संगठन और डॉट्स एंड डैशेज के बीच हुआ एमओयू भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि गोंड चित्रकला हमारे जनजातीय समाज की एक प्राचीन और गौरवशाली कला है। बुधवार को डिंडौरी जिले के कलेक्ट्रेट ऑडिटोरियम में आयोजित 'अमेज़न ई-कारीगर' मंच के शुभारंभ और समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षर समारोह को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह सहित विभाग एवं जिले के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वैश्विक पहचान और जीआई टैग पर जोर मंत्री पटेल ने कहा कि गोंडी कला आधारित उत्पादों को अमेज़न ई-कारीगर सहित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध करने से इस कला को वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी। इससे न केवल चित्रकारों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य और सम्मान मिलेगा, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी विशेष पहचान बनेगी। उन्होंने इस पुरातन और जीवंत कला को 'जीआई टैग' (GI Tag) दिलाने के लिए भी आवश्यक प्रयास करने की बात कही। आर्थिक सशक्तिकरण और कला संरक्षण के लिए ऐतिहासिक कदम गोंडी चित्रकला के प्रमुख केंद्र डिंडौरी के पाटनगढ़ ग्राम के कलाकारों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कार्यक्रम में "आजीविका ग्राम संगठन" पाटनगढ़ और "डॉट्स एंड डैशेज" संस्था के मध्य एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। ग्राम पाटनगढ़ के 157 परिवार प्रत्यक्ष रूप से इस कला से जुड़े हुए हैं, जिनमें 85 महिला और 72 पुरुष कलाकार शामिल हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक गोंडी कला का संरक्षण, संवर्धन और बाजार का विस्तार करना है। आय में 10 गुना वृद्धि और ग्रामीण उद्यमिता का लक्ष्य यह समझौता कलाकारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। 'डॉट्स एंड डैशेज' के व्यवस्थित विपणन सहयोग से वर्तमान में चित्रकार परिवारों की औसत वार्षिक आय 35 हजार रूपये से बढ़कर 70 हजार रूपये तक पहुंच गई है। अब उत्पादों को ऑनलाइन बिक्री मंचों पर उपलब्ध कराने से इनकी वैश्विक मांग बढ़ेगी, जिससे आगामी समय में कलाकारों की आय में 10 गुना तक वृद्धि होने की संभावना है। यह पहल डिंडौरी जिले में कला आधारित आजीविका का एक सफल उदाहरण स्थापित करेगी।  

सिकल सेल उन्मूलन अभियान को दें नई गति, राज्यपाल पटेल ने दिए सघन प्रयासों के निर्देश

सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों को दें सघनता : राज्यपाल पटेल प्रत्येक मंगलवार को आंगनवाड़ी केन्द्र में सिकल सेल की जानकारी दें लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं आयुष विभाग की समीक्षा भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा की 19 जून को विश्व सिकल सेल दिवस है। उन्होंने लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और आयुष विभाग को विश्व सिकल सेल दिवस के तारतम्य में सिकल सेल उन्मूलन गतिविधियों को सघनता के साथ संचालित करने के निर्देश दिये है। उन्होने कहा कि स्क्रीनिंग, उपचार, कार्ड और दवा वितरण प्रयासों के साथ ही रोग की जागरूकता के कार्यक्रम भी आयोजित किये जाने चाहिए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन के संकल्प को पूरा करने तक हमें थकना और रूकना नहीं है। इसलिए उन्मूलन और उपचार की नियमितता की जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र में विशेष निगरानी की जाना जरूरी है। राज्यपाल पटेल गुरुवार को लोक भवन में लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और आयुष विभाग के साथ चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने प्रत्येक मंगलवार को आंगनवाड़ी केन्द्र में माता और बच्चों को सिकल सेल एनीमिया के कारण, लक्षण और उपचार से संबंधित जानकारी प्रदान करने के निर्देश दिये है। उन्होंने स्वास्थ्य और आयुष विभाग के सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों पर जिलेवार चर्चा की। राज्यपाल पटेल को स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिकल सेल स्क्रीनिंग, दवा और कार्ड वितरण आदि की विस्तार से जिलेवार जानकारी दी गई। आयुष विभाग द्वारा भी जिलेवार दवाई वितरण, परामर्श, उपचार और रोगियों से सतत संवाद के द्वारा उपचार गतिविधियों की जानकारी दी गई। राज्यपाल पटेल ने आयुष विभाग को सिकल सेल उपचार प्रयासों का रोगियों से फीडबैक प्राप्त करने के निर्देश दिए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि राज्य सरकार, सिकल सेल उन्मूलन के लिए संकल्पित है। मध्यप्रदेश सिकल सेल उन्मूलन के राष्ट्रीय स्तर के प्रयासों में अग्रणी है। यह संबंधित विभागों द्वारा सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों की सही दिशा में सार्थक कार्यों का परिणाम है। उन्होंने स्वास्थ्य और आयुष विभाग के सिकल सेल उन्मूलन कार्यों और गतिविधियों की सराहना की। सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों से जुड़े सभी वरिष्ठ अधिकारियों सहित मैदानी अमले को बधाई दी। राज्यपाल को अपर मुख्य सचिव अशोक कुमार बर्णवाल ने विश्व सिकल सेल दिवस पर खंडवा जिले में प्रस्तावित कार्यक्रम के संबंध में अवगत कराया। बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन, जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं आयुष विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और लोक भवन के अधिकारी मौजूद थे।   

महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की जरूरत : राज्यपाल पटेल

महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति रहें सजग : राज्यपाल पटेल लोकभवन में लगा स्वास्थ्य शिविर  राज्यपाल ने महिलाओं को वितरित किए स्वच्छता किट भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि स्वस्थ समाज एवं परिवार के लिए महिलाओं का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। उन्होंने महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि महिलाएँ अपनी व्यस्त जीवन शैली में अपने स्वास्थ्य की चिंता करें। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए समय निकाले। संतुलित आहार, योग और व्यायाम को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। राज्यपाल पटेल सोमवार को लोक भवन में आयोजित स्वास्थ्य शिविर शुभारंभ अवसर पर संदीपनि सभागार में उपस्थित महिलाओं से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने महिलाओं को स्वच्छता किट प्रदान की। संदीपनि सभागार और सिविल डिस्पेंसरी में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों का अवलोकन किया। ज्ञातव्य है कि राज्यपाल पटेल के जन्म दिवस के अवसर पर लोक भवन में सोमवार को स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया था। अस्थिरोग संबंधी चिकित्सकीय जाँच के लिए बोन मिनरल डेनसिटी जाँच और परामर्श शिविर का सिविल डिस्पेंसरी में तथा एच.पी.व्ही. और महिला स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जागरूकता के लिए चिकित्सकीय परामर्श सत्र सांदीपनि सभागार में आयोजित किया गया था। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, उप सचिव सुनील दुबे सहित लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित थे।  

मंत्री पटेल बोले- स्वच्छ और सुरक्षित रहें नदियों के स्रोत, तभी बचेगा पर्यावरण

नदियों के उद्गम स्थलों को स्वच्छ और सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य: मंत्री पटेल अमरकंटक धाम में तीन दिवसीय ‘स्वच्छता व कुण्ड सेवा अभियान में स्वयं किया श्रमदान भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि माँ नर्मदा केवल आस्था की प्रतीक नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन और अस्तित्व का आधार हैं। हमारी नदियों के उद्गम स्थलों को स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध बनाए रखने में प्रत्येक नागरिक को अपना बहुमूल्य योगदान देना चाहिए। मंत्री पटेल ने यह विचार अमरकंटक धाम स्थित माँ नर्मदा नदी के पावन उद्गम स्थल पर 29 से 31 मई तक आयोजित इस विशेष स्वच्छता अभियान में श्रमदान के दौरान व्यक्त कियें। मंत्री पटेल ने विशेष बल देते हुए कहा कि नदियों का संरक्षण केवल धार्मिक दायित्व नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के सुरक्षित जीवन का आधार है, क्योंकि यदि आज हम जल स्रोतों और उद्गम स्थलों को संरक्षित करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियाँ जल संकट से बच सकेंगी। मंत्री पटेल ने स्वयं उपस्थित होकर जनभागीदारी के साथ सक्रिय रूप से श्रमदान किया। 'मणिनागेंद्र सिंह फाउंडेशन' एवं 'निर्विकार पथ' के सेवाभावी कार्यकर्ताओं के सहयोग से संचालित इस अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर उद्गम और कुण्ड क्षेत्र की स्वच्छता, संरक्षण तथा सेवा कार्यों में अपना योगदान दिया, जिससे यह अभियान क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। उल्लेखनीय है कि मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल लंबे समय से जल संरक्षण, जल स्रोतों के संवर्धन और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के माध्यम से पूरे प्रदेश में जल संरचनाओं के पुनर्जीवन, नदियों की स्वच्छता और जनजागरण के कार्यों को व्यापक गति मिली है। अमरकंटक में माँ नर्मदा के उद्गम स्थल पर किया गया यह श्रमदान उसी पर्यावरण-संरक्षण के संकल्प का जीवंत उदाहरण है, जो समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करेगा और जनसहभागिता से जल संरक्षण के इस प्रयास को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।