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MP में पानी के सफर का बदलेगा सिस्टम! क्रूज-बोट के लिए बनेगी अलग अथॉरिटी

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब पानी के रास्ते सफर का पूरा सिस्टम बदलने की तैयारी है। बड़े तालाब, नदियों और बांधों में चलने वाले क्रूज, बोट और दूसरे जल परिवहन साधनों के लिए अलग अथॉरिटी बनाई जाएगी। इसके जरिए यह तय होगा कि पानी के जहाजों का रजिस्ट्रेशन कौन करेगा, संचालन के नियम क्या होंगे और जल परिवहन की जिम्मेदारी किस विभाग के पास रहेगी। अभी राज्य में जल परिवहन का इस्तेमाल मुख्य रूप से पर्यटन गतिविधियों के लिए किया जाता है। नई व्यवस्था के बाद इसे पर्यटन से आगे ले जाकर व्यवस्थित इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट सिस्टम के रूप में विकसित करने की तैयारी है। क्रूज-बोट के लिए अलग नियम होंगे अथॉरिटी बनने के बाद क्रूज, बोट और अन्य जलयान मनमाने तरीके से संचालित नहीं होंगे। इनके संचालन और रजिस्ट्रेशन के लिए नियम तय किए जाएंगे। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि अलग-अलग जल क्षेत्रों में किस तरह के जलयान चल सकेंगे और उनकी संचालन व्यवस्था किस विभाग के अधीन होगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी अथॉरिटी के गठन और नियमों का खाका तैयार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में वित्त, परिवहन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास, विधि और पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। यानी नई व्यवस्था तैयार करते समय परिवहन के साथ पर्यटन और जल संसाधन से जुड़े पहलुओं को भी साथ रखा जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल. कौन करेगा संचालन? नई अथॉरिटी के सामने अहम काम यह तय करना होगा कि जलयानों का रजिस्ट्रेशन और संचालन किस विभाग के जिम्मे रहेगा। अलग-अलग राज्यों में इसकी व्यवस्था अलग है। उत्तर प्रदेश और असम जैसे राज्यों में परिवहन विभाग की भूमिका है, जबकि गुजरात और तटीय क्षेत्रों में मरीन विभाग इस तरह की जिम्मेदारी संभालता है। मध्यप्रदेश में किस मॉडल को अपनाया जाए, इस पर कमेटी की सिफारिश के आधार पर आगे फैसला होगा। पर्यटन से ट्रांसपोर्ट तक बढ़ेगा दायरा अभी भोपाल के बड़े तालाब समेत प्रदेश के कई जल क्षेत्रों में बोट और क्रूज मुख्य रूप से पर्यटन का हिस्सा हैं। नई अथॉरिटी का उद्देश्य केवल पर्यटकों के लिए जलयान चलाना नहीं होगा। इसके जरिए इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट को एक अलग परिवहन माध्यम के तौर पर विकसित करने की संभावनाएं भी देखी जाएंगी। इससे भविष्य में जल मार्गों का इस्तेमाल यात्री या अन्य परिवहन गतिविधियों के लिए किए जाने का रास्ता तैयार हो सकता है। दूसरे राज्यों तक भी पहुंच सकता है जल परिवहन नई व्यवस्था का दायरा मध्यप्रदेश की सीमाओं तक सीमित रखने की योजना नहीं है। अथॉरिटी बनने के बाद अंतरराज्यीय जल परिवहन की संभावनाओं पर भी काम किया जा सकता है। इसके लिए दूसरे राज्यों के साथ जल मार्गों की कनेक्टिविटी, नियम और संचालन व्यवस्था जैसे पहलुओं पर आगे रूपरेखा तैयार होगी। अब पानी पर भी बनेगा ट्रांसपोर्ट का सिस्टम मध्यप्रदेश में बड़ी नदियों और जलाशयों का नेटवर्क है। ऐसे में नई अथॉरिटी के गठन से पहली बार जल परिवहन को लेकर एक केंद्रीकृत नियामक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ेगा। क्रूज और पर्यटन बोट से शुरू होने वाली यह व्यवस्था आगे यात्री परिवहन और अंतरराज्यीय जल कनेक्टिविटी तक पहुंचती है या नहीं, यह अथॉरिटी के नियम और सरकार के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा।

पुराना PF नए अकाउंट में कैसे ट्रांसफर करें? जानें आसान तरीका

 नई दिल्ली नौकरी बदलते ही PF का पैसा भी आपके साथ नई कंपनी में चला जाता है, ऐसा जरूरी नहीं है. कई बार पुरानी नौकरी का PF पुराने Member ID में पड़ा रहता है और नई नौकरी का PF अलग खाते में जमा होने लगता है. ऐसे में अगर आपने कई कंपनियों में काम किया है, तो आपका PF कई खातों में बंटा हो सकता है. अच्छी बात यह है कि EPFO की ऑनलाइन सुविधा के जरिए पुराने PF खाते का बैलेंस नए खाते में ट्रांसफर किया जा सकता है।  PF ट्रांसफर करने से पहले यह देखना जरूरी है कि पुराना और नया PF खाता आपके UAN यानी Universal Account Number से जुड़ा हुआ है या नहीं. UAN के जरिए आपके अलग-अलग PF Member ID को एक ही खाते से जोड़ा जाता है. साथ ही अपनी KYC जानकारी भी जांच लें. खासकर आधार, बैंक खाते और PAN जैसी जानकारी में कोई गलती या कमी है तो उसे पहले ठीक करना बेहतर है।  घर बैठे ऐसे करें PF Transfer EPFO के Member Portal पर UAN और पासवर्ड से लॉगिन करें. इसके बाद Online Services में जाएं. यहां 'One Member – One EPF Account (Transfer Request)' का विकल्प मिलता है. EPFO के आधिकारिक FAQ में इसी विकल्प के जरिए PF ट्रांसफर की प्रक्रिया बताई गई है. इसके बाद पुराने PF खाते की जानकारी और मौजूदा PF खाते से जुड़ी जानकारी को जांचें।  ट्रांसफर के लिए पुराने खाते को चुनकर जरूरी जानकारी भरें और ऑनलाइन क्लेम सबमिट करें. EPFO की मौजूदा Revamped Form 13 व्यवस्था में सदस्य की KYC, उपलब्ध PF बैलेंस, योगदान, ट्रांसफर और ब्याज से जुड़ी जानकारी एक जगह दिखाई जाती है, जिससे ट्रांसफर क्लेम की जानकारी को जांचना आसान हो गया है।  Form 13 क्या है? PF ट्रांसफर के लिए Form 13 इस्तेमाल किया जाता है. इसका उद्देश्य पुराने PF खाते की रकम को मौजूदा PF खाते में ट्रांसफर करना है. आधिकारिक Form 13 में पुराने और मौजूदा दोनों PF खाते की जानकारी मांगी जाती है. ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद Annexure-K में ट्रांसफर से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होती है. EPFO ने नए Form 13 में Annexure-K को भी बेहतर तरीके से शामिल किया है, जिसमें टैक्स योग्य और गैर-टैक्स योग्य हिस्से की जानकारी भी दी जा सकती है।  PF ट्रांसफर करने का फायदा क्या है पुराने PF खाते का पैसा अलग-अलग जगह पड़ा रहने के बजाय मौजूदा खाते में ट्रांसफर होने से आपका PF रिकॉर्ड व्यवस्थित रहता है. इससे भविष्य में PF से जुड़ा क्लेम या निकासी करते समय पुराने खातों को अलग-अलग संभालने की जरूरत कम हो सकती है. यह भी ध्यान रखें कि PF ट्रांसफर अपने आप पेंशन की पात्रता या टैक्स छूट की गारंटी नहीं देता. पेंशन और टैक्स से जुड़े फायदे संबंधित नियमों और आपकी पात्रता पर निर्भर करते हैं।  ट्रांसफर के बाद स्टेटस देख सकते हैं ऑनलाइन ट्रांसफर रिक्वेस्ट करने के बाद EPFO पोर्टल पर Track Claim Status विकल्प के जरिए क्लेम की स्थिति देखी जा सकती है. EPFO के आधिकारिक पोर्टल पर Member Login और ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध हैं. इसलिए अगर नौकरी बदलने के बाद आपका PF पुरानी कंपनी के खाते में पड़ा है, तो उसे यूं ही छोड़ने के बजाय पहले UAN और KYC की जानकारी जांचें और जरूरत होने पर ऑनलाइन PF Transfer Request डालें। 

माध्यमिक कक्षाओं की पढ़ाई में आएगा बदलाव, 28 सितंबर से विशेषज्ञों का प्रशिक्षण

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा से और समृद्ध होगी माध्यमिक कक्षाओं की शिक्षण पद्धति 28 सितम्बर से राज्य स्तरीय विषय विशेषज्ञों का उन्मुखीकरण, शिक्षण में नए आयामों और नवाचारों पर होगा फोकस भोपाल  मध्यप्रदेश में कक्षा 6वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों के शिक्षण-अधिगम को नई दिशा देने के लिए माध्यमिक शिक्षकों को नई एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकों की शिक्षण पद्धति और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 की अनुशंसाओं के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा। संचालक राज्य शिक्षा केंद्र हरजिंदर सिंह ने बताया कि सत्र 2026-27 में गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण की श्रृंखला शुरू की जा रही है। प्रथम चरण 28 सितम्बर से शुरू होगा और 1 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान चयनित एसआरजी (राज्य संसाधन समूह) विषय विशेषज्ञों का चार दिवसीय राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा किया जाएगा। इस श्रृंखला के अगले चरण में राज्य से चयनित मास्टर ट्रेनर्स का 5-दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण 5 अक्टूबर से 6 नवम्बर तक संभागीय मुख्यालयों की डाइट में होगा। इसके पश्चात ब्लॉक स्तर पर कक्षा 6वीं से 8वीं तक गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान पढ़ाने वाले समस्त माध्यमिक शिक्षकों का प्रशिक्षण 12 अक्टूबर से 20 नवम्बर तक आयोजित किया जाएगा। नई पाठ्य पुस्तकों की नई एप्रोच पर होगा फोकस संचालक सिंह ने बताया कि एसआरजी उन्मुखीकरण कार्यक्रम में कक्षा 7 की नई पाठ्य पुस्तकों में अपनाई गई नई एप्रोच, गतिविधि आधारित शिक्षण तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 की अनुशंसाओं के अनुरूप प्रभावी शिक्षण पद्धतियों पर विषय विशेषज्ञों का उन्मुखीकरण किया जाएगा। इसका उद्देश्य एसआरजी को इस प्रकार तैयार करना है कि वे आगामी प्रशिक्षणों में मास्टर ट्रेनर्स एवं शिक्षकों को नई पाठ्य पुस्तकों की अवधारणा और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से समझा सकें। चार दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में विषय आधारित प्रशिक्षण के साथ शिक्षकों के समग्र व्यावसायिक विकास से जुड़े नवाचारी विषयों को भी शामिल किया गया है। इनमें जॉयफुल लर्निंग, मानसिक स्वास्थ्य, नैतिकता एवं मूल्य, आईजीओटी पोर्टल-केकेके, कौशल बोध तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषय प्रमुख हैं। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) तैयार करने की गतिविधि भी कराई जाएगी, जिससे शिक्षक कक्षा में अवधारणाओं को अधिक प्रभावी और रोचक तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचा सकें। उन्होंने बताया कि एसआरजी के राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण में राज्य शिक्षा केंद्र के विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पीपल संस्था द्वारा सहयोगी भूमिका निभाई जाएगी। शिक्षकों के प्रशिक्षण तक यह पूरी श्रृंखला नई एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकों के अनुरूप शिक्षण प्रक्रिया को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  

बेल्जियम से आया 308 पहियों का महाकाय ट्रक, UP में देखने उमड़ी सैकड़ों की भीड़

लखनऊ उत्तर प्रदेश के चंदौली का एक वीडयो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा, जिसमें 308 पहियों वाला महाकाय ट्रक पचपेड़वा इलाके में पहुंचा है. नेशनल हाईवे-19 पर खड़े इस विशालकाय ट्रक को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. तेज हवाओं और लगातार हो रही बारिश के बीच भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ. लोग सड़क किनारे खड़े होकर 308 पहियों वाले इस महाकाय ट्रक की तस्वीरें और वीडियो बना रहे हैं. कई लोग सेल्फी लेने के लिए सड़क के बीच तक पहुंच जा रहे हैं।   करीब 180 टन वजनी वेसल को लेकर चल रहा यह ट्रक लोगों के बीच कौतूहल पैदा कर रहा है. वहीं लोगों के उत्साह और भीड़ को देखते हुए पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद हैं, ताकि कोई अनहोनी न हो.जानकारी के मुताबिक, बेल्जियम से समुद्र के रास्ते ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचे करीब 180 टन वजनी लोहे के इस विशाल पार्ट्स को नेशनल हाईवे-19 के जरिए उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ले जाया जा रहा है।  308 पहियों वाले ट्रक को देखने पहुंचे लोग  यह ट्रक ओडिशा से झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचा है. बिहार के कैमूर जिले में पहुंचने के बाद 308 पहियों वाले इस ट्रक पर लदे विशाल लोहे के पार्ट्स का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ. इसके बाद से ही इसे 'वायरल ट्रक' के नाम से जाना जाने लगा. अब वह जहां-जहां से यह गुजर रहा है, वहां इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है. ट्रक चालक ने मीडिया से कैमरे पर बात नहीं की लेकिन ऑफ कैमरा उसने अपना नाम शाहनवाज हुसैन बताया और खुद को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले का रहने वाला बताया।  भीड़ की वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहा ट्रक उसके मुताबिक वह ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से इस विशाल लोहे के पार्ट्स को लेकर बलरामपुर की ओर जा रहा है. रास्ते में लोगों की भारी भीड़ की वजह से ट्रक को आगे बढ़ाने में काफी परेशानी हो रही है.  308 पहियों वाला यह ट्रांसपोर्टर करीब एक लीटर डीजल में 4  किलोमीटर तक का माइलेज देता है. करीब 40 से 50 लोग इसके साथ चल रहे हैं और भारी भीड़ और रास्ते की परिस्थितियों की वजह से यह ट्रक एक दिन में लगभग 10 से 20 किलोमीटर ही चल पा रहा है।  इस ट्रक को देखने पहुंचे लोगों में भी खासा उत्साह है. गाजीपुर से शक्तिनगर जा रहे त्रिलोकीनाथ ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर इस 'वायरल ट्रक' के वीडियो देखे थे और आज पहली बार इसे सामने से देखने का मौका मिला. उन्होंने परिवार के साथ ट्रक की तस्वीरें भी लीं. वहीं मुगलसराय से पहुंचे साहिल अहमद ने बताया कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर इस ट्रक को वायरल होते देखा था. मुगलसराय इलाके में ट्रक पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद वह इसे देखने पहुंचे. मौके पर काफी भीड़ मौजूद है।  लोग ट्रक के साथ खिंचवा रहे फोटो इस्लामपुर से पहुंचे शाहजहां ने बताया कि उन्होंने अपनी जिंदगी में पहली बार 308 पहियों वाली गाड़ी पर इतना बड़ा आइटम लदा हुआ देखा है. उन्होंने इसे आकर्षण का केंद्र बताया. उनका कहना है कि उन्हें अंदाजा है कि यह किसी शुगर प्लांट से जुड़ा उपकरण हो सकता है.बारिश की वह से फिलहाल भीड़ कुछ कम हुई है, लेकिन इससे पहले बड़ी संख्या में लोग यहां मौजूद थे. लोग ट्रक के साथ सेल्फी ले रहे हैं और तस्वीरें बना रहे हैं। 

मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव पर संकट के बादल, जनगणना के चलते बढ़ सकता है इंतजार

भोपाल  मध्य प्रदेश में अगले साल प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनाव प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सियासी टाइमिंग के बीच उलझते नजर आ रहे हैं। जनगणना के कार्य के पूरा होने तक वार्डों के परिसीमन और नए नगरीय निकायों के गठन का काम अटकने के कारण चुनाव कार्यक्रम करीब छह महीने आगे खिसकने की पूरी संभावना बन रही है। परिसीमन और जनगणना का पेंच प्रदेश के कुल 413 नगरीय निकायों (जिसमें 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद शामिल हैं) में 7,679 पार्षद पदों के साथ-साथ महापौर और अध्यक्ष पदों के चुनाव होने हैं। हालांकि, इन चुनावों की राह में जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार सबसे बड़ा रोड़ा बन गया है। आबादी के नए आंकड़ों के बिना वार्डों का परिसीमन और आरक्षण तय करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसके अलावा, सरकार द्वारा कुछ ग्रामीण पंचायतों को मिलाकर नई नगर परिषद बनाने की घोषणा भी की गई है, जिस पर जनगणना पूरी होने तक विराम लग गया है। आयोग की तैयारी बनाम सरकार के अधिकार क्षेत्र     राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी ओर से तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं, जिसके तहत मतदाता सूची को अपडेट किया जा चुका है और ईवीएम की मांग का प्रस्ताव भी सरकार को भेज दिया गया है।     आयोग का स्पष्ट कहना है कि कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव कराना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है, जबकि वार्ड परिसीमन, नए निकायों का गठन और आरक्षण की पूरी प्रक्रिया राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है। प्रत्यक्ष प्रणाली और राजनीतिक समीकरण इस बार नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों के चुनाव भी प्रत्यक्ष प्रणाली से ही कराए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण के नियम के चलते परिसीमन के बाद सीटों का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। राजनीतिक दल इस चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने के बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं, लेकिन चुनाव में देरी होने से दलों की पूरी चुनावी रणनीति और टिकट वितरण के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

लहसुन में छिपा कैंसर से लड़ने वाला राज! सागर यूनिवर्सिटी स्कॉलर UK में कराएगा पेटेंट

सागर वैसे तो लहसुन में कई ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. लेकिन लहसुन में पाए जाने वाले एंटी कैंसर गुण का फायदा लहसुन को सीधे खाने से नहीं मिलता. सागर यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के रिसर्च स्कॉलर मनीष कुमार मांझी ने लहसुन में ऐसे कंपाउंड की खोज की है, जो कैंसर के इलाज में कारगर साबित हुआ है. खास बात ये है कि मुंबई के ACTREC (Advanced Centre for Treatment, Research and Education in Cancer) ने इस रिसर्च पर मुहर लगाई है।  रिसर्च का स्तन कैंसर की कोशिकाओं पर टारगेटेड थेरेपी के जरिए सफल प्रयोग भी किया गया. ये कैंसर के अलावा दूसरी स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचाता है. अब बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च का यूके पेटेंट लेने की तैयारी कर रहा है. वहीं इसका मेडिसिन के रूप में उपयोग हो सके, इसलिए क्लिनिकल ट्रायल की भी तैयारी की जा रही है।  बॉयोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट की रिसर्च डॉ. हरीसिंह गौर यूनिवर्सिटी के बॉयोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के रिसर्च स्कॉलर मनीष कुमार मांझी ने रिसर्च डिपार्टमेंट के असि. प्रोफेसर डॉ सी पी उपाध्याय के मार्गदर्शन में की है. इस रिसर्च की खासियत ये है कि इसमें लहसुन के एंटी कैंसर गुणों का उपयोग कर ऐसा बसायुक्त नैनो पार्टिकल तैयार किया गया, जो टारगेट डिलीवरी के जरिए सीधा कैंसर कोशिकाओं पर काम करता है और दूसरी स्वस्थ कोशिकाओं को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता है, ये पूरी तरह से जैविक है।  रिसर्च स्कॉलर मनीष मांझी बताते हैं कि, ''स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में लहसुन का उपयोग सदियों से होता रहा है. लहसुन में कई तरह के बायोटेक कंपाउंड पाए जाते हैं. हमने उन कंपाउंड को एक्सट्रैक्ट करके उसकी एंटी कैंसर प्रॉपर्टी पर काम किया है. स्तन कैंसर की कोशिकाओं पर इसका परीक्षण किया गया, इसके काफी अच्छे परिणाम सामने आए हैं।  एंटी कैंसर गुणों से भरपूर लहसुन कई बीमारियों के इलाज में कारगर लहसुन में एंटी कैंसर गुण भी पाए जाते हैं. लेकिन जब इसे भोजन में उपयोग करते हैं, तो इसके एंटी कैंसर गुणों का फायदा शरीर को नहीं मिलता है. क्योंकि मानव शरीर लहसुन में पाए जाने वाले एंटी कैंसर कंपाउंड को अवशोषित नहीं कर पाता है. इस रिसर्च में इसी एंटी कैंसर कंपाउंड की खोज कर एक वसायुक्त नैनो पार्टिकल तैयार किया गया. जिसे टारगेट डिलीवरी के जरिए कैंसर कोशिकाओं तक पहुंचाया जाता है. ये कंपाउंड शरीर की दूसरी स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने का काम करता है।  सागर यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट की रिसर्च का मुंबई की ACTREC (Advanced Centre for Treatment, Research and Education in Cancer) में परीक्षण किया गया, जो पूरी तरह सफल पाया गया. रिसर्च स्कॉलर मनीष कुमार मांझी बताते हैं कि, ''स्तन कैंसर के लिए जो दवाएं उपयोग होती हैं, वह कैंसर के साथ-साथ शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं. लेकिन हमने नैनो टेक्नोलॉजी के जरिए लहसुन का ऑर्गेनिक कंपाउंड वाला नैनोपार्टिकल बनाया, जो ज्यादा प्रभावी है. ये शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को प्रभावित किए बिना कैंसर की कोशिकाओं पर काम करता है।  पेटेंट और क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी रिसर्च गाइड असि. प्रोफेसर डॉ. सी पी उपाध्याय बताते हैं कि, ''लहसुन काफी गुणकारी है. लेकिन इसमें ऐसे कई तत्व होते हैं, जो मानव शरीर सीधे अवशोषित नहीं कर पाता है. जिससे लहसुन के गुणों का फायदा शरीर को नहीं मिल पाता है. ऐसी स्थिति में हमारा उद्देश्य था कि हमारे पास लहसुन के बारे में जो जानकारी है, उसके आधार पर ये पता लगाएं कि लहसुन में ऐसे कौन-कौन से कंपाउंड हैं. जिस पर काम कर सकते हैं. विशेष तौर पर हमने एंटी कैंसर कंपाउंड पर काम किया, जिसमें तीन तरह के कंपाउंड मिले. लेकिन एक कंपाउंड Diallyl Disulfide मिला, जो विशेष रूप से स्तन कैंसर (Breast Cancer) और कैंसर कोशिकाओं में जहरीलेपन को बढ़ाकर उन्हें खत्म करने और कैंसर सिग्नल्स को रोकने में मदद करता है।  डॉ. उपाध्याय बताते हैं कि, ''ये कंपाउंड लहसुन में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, लेकिन शरीर में अवशोषित नहीं होने के कारण हमने इसे आइसोलेट किया और वसायुक्त नैनो पार्टिकल बनाकर उस पर Diallyl Disulfide कंपाउंड को लोड किया. मुंबई में ACTREC में इसका परीक्षण कराया,तो पाया कि ये कैंसर की कोशिकाओं पर ही काम करता है और स्तन कैंसर को बड़ी तेजी से और प्रभावित तरीके से कम करता है. अब हम इसका यूके पेटेंट लेने की तैयारी कर रहे हैं और भविष्य में इसका उपयोग मेडिसिन के तौर पर हो सके, उसके लिए भी ट्रायल की तैयारी कर रहे हैं। 

युद्ध अभ्यास 2026 में SkyStriker का सटीक वार, ऑपरेशन सिंदूर वाले ड्रोन को अमेरिका ने किया नोटिस

नई दिल्ली युद्ध अभ्यास 2026 के दौरान महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पर स्काईस्ट्राइकर लोइटिरिंग म्यूनिशन ने सटीक हमला किया. इस प्रदर्शन में उसने निर्धारित लक्ष्यों का पता लगाने, उन पर निशाना साधने और सटीक प्रहार करने की अपनी क्षमता साबित की. यह परीक्षण वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में किया गया।  अभ्यास में भारतीय और अमेरिकी सेनाएं शामिल रहीं और स्काईस्ट्राइकर ने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को रेखांकित किया. लोइटिरिंग म्यूनिशन एक ऐसा सिस्टम है जो हवा में मंडराते हुए लक्ष्य की तलाश करता है. फिर सटीक हमला करता है. स्काईस्ट्राइकर ने इस क्षमता को महाजन जैसे कठिन मैदानी इलाके में दिखाया. इससे सेनाओं को यह समझने में मदद मिली कि ड्रोन आधारित हथियार ऑपरेशन में कितने प्रभावी हो सकते हैं।  ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल इस ड्रोन के सफल परीक्षण ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के महत्व को फिर से उजागर किया. आज की सेनाएं पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ बिना चालक वाले सिस्टम पर ज्यादा भरोसा कर रही हैं. स्काईस्ट्राइकर जैसे प्लेटफॉर्म सटीक प्रभाव डालने की क्षमता रखते हैं. इससे अनावश्यक नुकसान कम होता है और लक्ष्य को ज्यादा असरदार तरीके से निपटाया जा सकता है।  युद्ध अभ्यास 2026 का मकसद दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है. स्काईस्ट्राइकर के प्रदर्शन ने दिखाया कि स्वदेशी सिस्टम अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों में भी अपनी जगह बना रहे हैं. आधुनिक युद्ध अब सिर्फ बड़े हथियारों तक सीमित नहीं रह गया. छोटी लेकिन सटीक प्रणालियां भी फैसला करने वाली साबित हो सकती हैं।  ड्रोन आधारित युद्धक्षेत्र की चुनौतियां आज के युद्धक्षेत्र में ड्रोन और बिना चालक वाले सिस्टम आम होते जा रहे हैं. सेनाएं मल्टी-डोमेन ऑपरेशन यानी जमीन, हवा और अन्य क्षेत्रों में एक साथ काम करने की तैयारी कर रही हैं. स्काईस्ट्राइकर जैसे लोइटिरिंग म्यूनिशन इन जटिल परिस्थितियों में लक्ष्य का पता लगाने और समय पर प्रहार करने में मदद करते हैं।  महाजन रेंज पर हुए परीक्षण ने वास्तविक माहौल में इसकी क्षमता को परखा. यह प्रदर्शन सिर्फ एक हथियार का परीक्षण नहीं बल्कि भविष्य की युद्ध रणनीति की झलक है. सटीक हमले की क्षमता से सैनिकों को बेहतर विकल्प मिलते हैं. दुश्मन के ठिकानों को दूर से और सुरक्षित दूरी से निशाना बनाया जा सकता है. इससे अपने सैनिकों का जोखिम भी कम होता है।  युद्ध अभ्यास 2026 में स्काईस्ट्राइकर का इस्तेमाल दोनों सेनाओं के लिए सीखने का मौका बना. अमेरिकी और भारतीय जवान एक-दूसरे की तकनीकों और तरीकों को करीब से समझ सके. स्वदेशी सिस्टम का सफल प्रदर्शन भारत की रक्षा क्षमताओं पर भरोसा बढ़ाता है. साथ ही यह दिखाता है कि देश अब आधुनिक और सटीक हथियार विकसित करने में सक्षम है।  महाजन फील्ड फायरिंग रेंज लंबे समय से बड़े अभ्यासों के लिए जानी जाती है. यहां के कठिन हालात में स्काईस्ट्राइकर का काम करना इसकी विश्वसनीयता को साबित करता है. अभ्यास के दौरान लक्ष्य का पता लगाना, ट्रैक करना और फिर सटीक प्रहार करना पूरी प्रक्रिया का हिस्सा था. यह प्रक्रिया आधुनिक युद्ध की जरूरतों से मेल खाती है।  भविष्य की दिशा स्काईस्ट्राइकर जैसे सिस्टम भविष्य के युद्ध की तस्वीर बदल रहे हैं. ड्रोन युद्धक्षेत्र में सटीकता और तेजी सबसे महत्वपूर्ण हो गई है. सेनाएं अब ऐसे हथियारों पर जोर दे रही हैं जो कम लागत में ज्यादा असर डाल सकें. स्वदेशी तकनीक का विकास भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. यह सफल परीक्षण रक्षा अनुसंधान और सेना के सहयोग को भी दर्शाता है।  जब तक नई तकनीक मैदान में साबित नहीं होती तब तक उसका असली मूल्य पता नहीं चलता. स्काईस्ट्राइकर ने महाजन में अपनी उपयोगिता दिखाई है. आने वाले समय में ऐसे और परीक्षण होने की उम्मीद है. कुल मिलाकर युद्ध अभ्यास 2026 में स्काईस्ट्राइकर का प्रदर्शन स्वदेशी क्षमता, सटीक युद्ध और आधुनिक ड्रोन तकनीक की तीनों दिशाओं को मजबूत करता है। 

मध्य प्रदेश में एक्सप्रेसवे का बड़ा नेटवर्क, भोपाल से दिल्ली-आगरा कनेक्टिविटी होगी तेज

सागर  मध्य प्रदेश के रोड प्रोजेक्ट जहां देश के दूसरे राज्यों को बेहतर कनेक्टिवटी के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं. साथ ही मध्य प्रदेश के शहरों को देश के महानगरों से जोड़ने का काम कर रहे हैं. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश में बन रहे दो एक्सप्रेस वे के चलते देश की राजधानी दिल्ली मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के करीब आ रही है. दरअसल, भोपाल ग्वालियर और ग्वालियर आगरा एक्सप्रेस वे से मध्य प्रदेश से उत्तरप्रदेश, राजस्थान और दिल्ली एनसीआर तक हाईस्पीड कनेक्टिवटी मिलने जा रही है।  भोपाल से ग्वालियर तक फोरलेन एक्सेस कंट्रोल्ड कारीडोर बनेगा, तो ग्वालियर से आगरा तक 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे बनेगा. इन दोनों एक्सप्रेस वे के कम्पलीट होने के बाद भोपाल से दिल्ली के बीच की दूरी में करीब 4 घंटे का फर्क आएगा. फिलहाल इस सफर में 11-12 घंटे लगते हैं. लेकिन इन दोनों प्रोजेक्ट के कम्पलीट होने पर 7-8 घंटे का समय लगेगा. फिलहाल इन प्रोजेक्ट के निर्माण के पहले की औपचारिकताएं पूरी हो रही हैं और एक अनुमान के मुताबिक, 2027 के अंत या 2028 की शुरूआत में इनका काम शुरू हो जाएगा।  भोपाल-ग्वालियर फोरलेन एक्सप्रेस वे भोपाल ग्वालियर फोरलेन एक्सप्रेस वे राजधानी भोपाल और ग्वालियर के बीच करीब 320 किमी का प्रोजेक्ट है. जो भोपाल के सूखी सेवनिया इलाके से शुरू होकर ब्यावरा, गुना, शिवपुरी होते हुए ग्वालियर तक पहुंचेगा. फिलहाल भोपाल से ग्वालियर का सफर तय करने में 425 किमी दूरी तय करना होती है, जो सीधे 100 किमी कम हो जाएगी और करीब 320 किमी का सफर तय करना होगा. फिलहाल भोपाल से ग्वालियर पहुंचने में 7-8 घंटे का समय लगता है, जो घटकर 5 से 6 घंटे रह जाएगा. मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) इस प्रोजेक्ट का DPR तैयार करने और टेंडर प्रक्रिया पर काम कर रहा है. एक अनुमान के मुताबिक 2027 के अंत या 2028 की शुरूआत में इसका काम शुरू हो जाएगा।  क्या कहते हैं जिम्मेदार पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह कहते हैं कि, ''ये दोनों प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को दिल्ली से शानदार कनेक्टिवटी देने का काम करेंगे. इन प्रोजेक्ट का काम पूरा होते ही मध्य प्रदेश के भोपाल, ग्वालियर सहित मुरैना, गुना, शिवपुरी, राजस्थान का धौलपुर और यूपी के आगरा मथुरा के साथ बेहतर कनेक्टिविटी होगी, जो दिल्ली एनसीआर को जोड़ने का काम करेगी।  इस प्रोजेक्ट के कारण भोपाल के उत्तरी इलाके की प्रापर्टी में उछाल आएगा.खासकर सागर विदिशा रोड़ पर सूखी सेवनिया से जहां रोड शुरू होगी, वहां रियल एस्टेट से जुड़े प्रोजेक्ट की कीमत बढ़ेगी. गुना और ग्वालियर बाॅयपास से गुजरने वाले इस फोरलेन पर लाजस्टिक कंपनियां अपने गोदाम, कोल्ड स्टोरेज चैन और ट्रक टर्मिनल जैसे प्रोजेक्ट आ रहे हैं. एक प्रोजेक्ट पर एमपीआरडीसी और एक पर एनएचएआई काम कर रहा है।  ग्वालियर-आगरा 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे ग्वालियर से आगरा को जोड़ने के लिए 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का प्रोजेक्ट प्रस्तावित है, जो ग्वालियर के सुसेरा बाॅयपास से शुरू होगा. जो राजस्थान के धौलपुर से आगरा, आगरा इनर रिंग रोड से मथुरा और मथुरा से दिल्ली एनसीआर को जोड़ देगा. इसकी लंबाई करीब 90 किमी होगी. इसकी प्रारंभिक लागत 4600 करोड़ आंकी गयी है. इस प्रोजेक्ट के लिए तीनों राज्यों में करीब 549 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी।  फिलहाल भोपाल से आगरा जाने में करीब 11-12 घंटे समय लगता है. इस सिक्स लेन प्रोजेक्ट के पूरा होने पर ये सफर 7 घंटे में पूरा जाएगा. फिलहाल इस प्रोजेक्ट के लिए तीनों राज्यों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. ये प्रोजेक्ट ग्वालियर से मुरैना और मुरैना से धौलपुर, धौलपुर से आगरा और आगरा मथुरा होते हुए दिल्ली एनसीआर से कनेक्ट किया जाएगा।   

₹250 करोड़ का चमचमाता जेट बनेगा CM का नया सफर साथी, जल्द होगी एंट्री

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार के लिए कनाडा से भोपाल आ रहा बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 विमान को लेकर हर दिन नई-नई जानकारी सामने आ रही हैं। डीजीसीए के कड़े नियमों, पायलटों की री-ट्रेनिंग और इस हाई-टेक विमान के प्रोटोकॉल को लेकर यह बात सामने आई है कि फिलहाल भारतीय पायलटों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। जमीनी स्तर पर एक्टिव रहते हैं सीएम मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मंत्रालय के वल्लभ भवन में बैठने की बजाए जमीनी स्तर पर निरीक्षण करने और जायजा लेने अक्सर निकल जाया करते हैं। वे अक्सर ही अलग-अलग जिलों के प्रवास पर रहते हैं, इसलिए त्वरित गति का इस्तेमाल करने के लिए इस विमान का भी उपयोग किया जाएगा। सुपर-मिड साइज है यह बिजनेस जेट 6,297 किलोमीटर की नॉन-स्टॉप रेंज, हवा में उड़ता आलीशान विमान और 250 करोड़ की कीमत वाला सुपर-मिड साइज बिजनेस जेट 'बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500' अब मध्य प्रदेश के आसमान पर उड़ते रहेगा। मुख्यमंत्री जैसे अति-विशिष्ट और संवेदनशील पद की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए राज्य सरकार हर कदम बेहद फूंक-फूंक कर उठा रही है। कनाडा से उड़ान भरने को तैयार यह विमान 30 सितंबर तक भोपाल पहुंचने वाला है, लेकिन इससे पहले इसकी हर तकनीकी बारीकी को परखा जा रहा है। विमानन संचालनालय में नियमित पद पर पदस्थ सीनियर पायलट विश्वास राय इस नए प्लेन को उड़ाने के लिए कनाडा में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। प्लेन को उड़ाने के लिए तीन पायलटों की व्यवस्था रहेगी, लेकिन एक बार में दो पायलट ही प्लेन उड़ाएंगे। जब तक पायलट की ट्रेनिंग पूरी नहीं हो जाती, तब तक विमान निर्माता कंपनी एक साल के लिए अपने एक पायलट की सेवाएं मध्य प्रदेश सरकार को उपलब्ध कराएगी। तीसरे पायलट की नियुक्ति के लिए निजी एविएशन कंपनियों से दरें मांगी गई हैं। राज्य सरकार ने इस नए स्टेट जेट प्लेन की खरीदी के लिए अपने बजट में 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। कनाडा की कंपनी बॉम्बार्डियर से अत्याधुनिक चैलेंजर 3500 जेट विमान खरीदा जा रहा है। वर्तमान में, राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर किराए के विमानों पर निर्भर रहती है। नए विमान के आने के बाद यह निर्भरता समाप्त हो जाएगी। सरकार अभी किराए के विमान का उपयोग करने के लिए प्रति घंटा दो से पांच लाख रुपये किराया देती है। इसके अलावा, प्लेन का उपयोग हो या न हो, स्टेट हैंगर पर खड़े रहने का प्रतिदिन 10 लाख रुपये भुगतान करना होता है। इसके लिए अलग-अलग 12 विमान कंपनियों के साथ अनुबंध किया गया है। पिछले लंबे समय से यही व्यवस्था है, जिस वजह से राज्य का एक बड़ा बजट किराया भरने में ही चला जाता है। यह जेट प्लेन केवल छह शहरों की हवाई पट्टियों पर ही उतरने लायक है। इन शहरों में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा और सिंगरौली शामिल हैं। इन शहरों के अलावा मुख्यमंत्री इस प्लेन का उपयोग प्रदेश के अन्य शहरों तक पहुंचने में नहीं कर पाएंगे। इस प्लेन की सीटिंग कैपेसिटी आठ प्लस टू है, जिसका अर्थ है कि प्लेन में आठ यात्री बैठ सकेंगे और दो पायलट रहेंगे। देसी पायलट अटक रहे फिलहाल यह जानकारी सामने आई है कि इस हाई-टेक जेट को आसमान में उतारने के लिए भेजे गए दोनों भारतीय पायलट जब अपनी पहली कोशिश में कठिन टेस्ट पूरी तरह पास नहीं कर पाए, तो सुरक्षा से कोई समझौता न करते हुए उन्हें दोबारा गहन ट्रेनिंग दिलाई गई। अब ये दोनों पायलट सह-पायलट की भूमिका निभाएंगे। जबकि विमान की मुख्य कमान एक अनुभवी विदेशी पायलट के हाथों में होगी। विदेशी पायलट फिलहाल उड़ाएंगे विमानन नियमों के मुताबिक इसके लिए 'फॉरेन एयरक्रू टेम्परेरी ऑथराइजेशन' (FATA) की मंजूरी ली गई है। विमान नियम 1937 और डीजीसीए के कड़े मानकों के तहत 65 वर्ष से कम आयु और बड़े विमानों का कम से कम दो हजार घंटे का अनुभव रखने वाले विदेशी पायलट ही ऐसे विमानों को संभाल सकते हैं, जिसकी वैधता दिसंबर 2026 तक है। टर्बुलेंस को भी देता है मात गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के पुराने टर्बोप्रॉप विमान के मुकाबले यह नया विमान लगभग 50 प्रतिशत तेज और आधुनिक सुविधाओं से लैस यह जेट 45 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़कर टर्बुलेंस को मात देता है। इसकी 870 किमी/घंटा की रफ्तार इसे भोपाल से सीधे टोक्यो तक पहुंचाने में सक्षम है। सुरक्षा और तकनीकी जांच के तमाम कड़े दौर से गुजरने के बाद यह वीवीआईपी जेट मुख्यमंत्री के सुरक्षित और आरामदायक दौरों का नया सारथी बनने जा रहा है। पुराने टर्बोप्रॉप विमान की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत तेज और आधुनिक सुविधाओं से लैस इस जेट को उतरने के लिए कम से कम 5,500 फीट लंबे रनवे की जरूरत होगी, जिससे यह भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और खजुराहो सहित चुनिंदा हवाई पट्टियों पर ही संचालित हो सकेगा।  

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बनी सहमति? 90% बातचीत पूरी, जल्द ऐलान संभव

 नई दिल्‍ली भारत और अमेरिका के संबंधों में सालो से व्‍यापार सबसे बड़ा अड़चन बना हुआ था, लेकिन अब दोनों देश एक निर्णायक मोड़ क करीब दिख रहे हैं. अमेरिकी विदेश विभाग के सीनियर अधिकारी ने कहा है कि प्रस्‍ताव‍ित समझौता 90 फीसदी से ज्‍यादा पूरा हो चुका है, बस मसले बचे हुए हैं।   अधिकारी ने कहा कि यह डील दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जा सकता है. PTI के इस सवाल- कब डील पर साइन हो सकता है, के जवाब में अधिकार ने कहा कि मैं यही कहूंगा कि देखते रहिए, जैसा कि हम बार-बार कहते हैं, 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है और बस कुछ आखिरी चीजें तय की जा रही हैं. इस कारण मुझे उम्‍मीद है कि आपको इस बारे में बहुत जल्‍द कुछ जानकारी मिलेगी।  अधिकारी ने आगे कहा कि यह समझौता द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाएगा. अधिकारी ने यह भी कहा कि और इससे वास्तव में अमेरिका-भारत संबंधों में एक नया आयाम जुड़ेगा, जो व्यापार के मामले में दशकों से हमारे लिए संभव नहीं हो पाया है. यह हमेशा से ही संबंधों में सबसे बड़ी बाधा रही है।  पीयूष गोयल ने कहा- बस ये काम बाकी इससे पहले कमर्शियल और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी संकेत दिया था कि बातचीत लगभग पूरी होने वाली है. गुरुवार को नई दिल्ली में पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दे दिया है, जिनमें अमेरिका के साथ समझौता लगभग पूरा हो चुका है. उन्होंने आगे कहा कि हमें बस अपने लिए सही लाभ खोजना है ताकि हम समझौते को जल्‍द से लागू कर सकें।  भारत और अमेरिका ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे का ऐलान किया था. हालांकि, अमेरिकी टैरिफ में बदलाव के कारण आगे की बातचीत की आवश्यकता पड़ी. गोयल ने कहा कि भारत के व्यापार समझौते वैश्विक जीडीपी के लगभग 75 प्रतिशत हिस्से वाले बाजारों तक तरजीही पहुंच प्रदान करेंगे।  पीएम मोदी दिसंबर में अमेरिकी यात्रा पर  अमेरिकी अधिकरी ने संबंधों में चल रही व्‍यस्‍तता की ओर भी इशारा किया. विदेश मंत्री मार्को रुबियो अक्‍टूबर में भारी दौरे पर आने वाले हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में फ्लोरिडा में होने वाले G20 शिखर सम्‍मेलन के लिए अमेरिका की यात्रा करेंगे. अधिकारी ने कहा कि संबंधों में बहुत कुछ चल रहा है. अधिकारी ने कहा कि क्वाड देशों के विदेश मंत्री इस साल तीसरी बार मिलने वाले हैं।