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MP ट्रांसको की टीम ने खराब मौसम में बहाल की ग्वालियर-औरैया इंटर स्टेट ट्रांसमिशन लाइन

एमपी ट्रांसको की टीम ने प्रतिकूल मौसम में बहाल की ग्वालियर-औरैया इंटर स्टेट ट्रांसमिशन लाइन मालनपुर और मेहगांव के 220 केवी सबस्टेशनों को मिलती है आपूर्ति ग्वालियर मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) की ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस टीम ने ग्वालियर-औरैया (उत्तर प्रदेश) 220 केवी इंटर स्टेट ट्रांसमिशन लाइन के मेजर ब्रेकडाउन को प्रतिकूल मौसम के बीच दुरुस्त कर लाइन को पुनः चालू कर दिया। यह लाइन ग्वालियर क्षेत्र के मेहगांव तथा औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर के 220 केवी सबस्टेशनों को विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों में ट्रांसमिशन लाइन को शीघ्र बहाल करना पारेषण व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। 145 किलोमीटर लंबी लाइन में सघन पेट्रोलिंग से मिला फाल्ट उत्तर प्रदेश स्थित पीजीसीआईएल के औरैया सबस्टेशन से ग्वालियर तक आने वाली इस 220 केवी इंटर स्टेट ट्रांसमिशन लाइन का रखरखाव एमपी ट्रांसको द्वारा किया जाता है। हाल ही में आई तेज बारिश और तूफान के दौरान भिंड जिले की गोहद तहसील के बिरखाड़ी गांव के समीप लाइन के दो टावरों के हार्डवेयर क्षतिग्रस्त हो गए थे तथा मिड-स्पान जॉइंट फेल हो गया था। करीब 145 किलोमीटर लंबी इस लाइन में फाल्ट का पता लगाने के लिए टीम ने सघन पेट्रोलिंग की, जिसके बाद फाल्ट का स्थान चिन्हित किया गया। खेत, कीचड़ और लगातार बारिश के बीच चला मरम्मत अभियान फाल्ट ऐसे क्षेत्र में मिला जहां धान की फसल खड़ी थी। लगातार बारिश, तेज हवा और कीचड़ के कारण टावरों तक पहुंचना कठिन था। खड़ी फसल के कारण राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने थीं। इन परिस्थितियों में मरम्मत कार्य की योजना बनाकर सुधार कार्य शुरू किया गया। 67 घंटे में पूरा किया सुधार कार्य मुख्य अभियंता (अति उच्च दाब मेंटेनेंस)  डी.के. अग्रवाल के मार्गदर्शन में पूरी टीम ने लगातार 67 घंटे कार्य कर लाइन को बहाल किया। सुधार कार्य में दोनों टावरों के क्षतिग्रस्त डिस्क इंसुलेटर बदलना, ओपीजीडब्ल्यू और कंडक्टर को नीचे उतारना तथा मिड-स्पान जॉइंट की मरम्मत शामिल थी। ये तकनीकी कार्य लगभग 45 मीटर की ऊंचाई पर प्रतिकूल मौसम के बीच संपादित किए गए। औद्योगिक और कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है लाइन ग्वालियर-औरैया 220 केवी इंटर स्टेट ट्रांसमिशन लाइन के दोनों सर्किटों से लगभग 200-200 मेगावाट विद्युत मालनपुर और मेहगांव के 220 केवी सबस्टेशनों को प्राप्त होती है। यह आपूर्ति क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों, कृषि उपभोक्ताओं तथा घरेलू विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान देती है। लाइन के बहाल होने से क्षेत्र को पुनः सामान्य विद्युत आपूर्ति मिलने लगी है।

राज्य स्तरीय विज्ञान मेले में एमपी ट्रांसको के स्टॉल को द्वितीय पुरस्कार

भोपाल  बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल में 22 से 26 सितंबर 2026 तक आयोजित 13 वे राज्य स्तरीय भोपाल विज्ञान मेले में ऊर्जा विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के स्टॉल को सरकारी क्षेत्र की श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। ट्रांसमिशन प्रणाली से संबंधित विविध तकनीकी मॉडलों, आधुनिक संचार एवं निगरानी व्यवस्थाओं तथा जानकारीपरक प्रदर्शनों के कारण एमपी ट्रांसको का स्टॉल मेले के दौरान आगंतुकों और विद्यार्थियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहा। आधुनिक तकनीकों और मॉडलों का हुआ प्रदर्शन स्टॉल पर ट्रांसमिशन लाइनों के मॉडल के साथ गैस इंसुलेटेड सब स्टेशन (जीआईएस), एयर इंसुलेटेड सबस्टेशन (एआईएस), ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, ओपीजीडब्ल्यू संचार प्रणाली, एसएलडीसी एवं स्काडा डिस्प्ले, रिमोट वीडियो सर्विलांस व्यवस्था, आयसोलेटर के रिमोट संचालन, फॉल्ट लोकेटर, भूमिगत केबल प्रणाली, पाइल फाउंडेशन, स्कैफोल्डिंग तथा आपातकालीन बहाली प्रणाली (ईआरएस) के मॉडल प्रदर्शित किए गए। चालू ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस में उपयोग किए जाने वाले हॉट सूट मॉडल ने भी आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इन अधिकारियो ने प्राप्त किया एम पी ट्रांसको की तरफ से पुरस्कार एमपी ट्रांसको की ओर से भोपाल के अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रदीप सिंह राघव एवं राजेश शांडिल्य, अधीक्षण अभियंता सुधीर नेमा सहित अन्य अधिकारियों ने पुरस्कार प्राप्त किया। उल्लेखनीय है कि विज्ञान मेले में एनटीपीसी, भारत पेट्रोलियम की मध्यप्रदेश इकाई सहित विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने भी भाग लिया था।

एमपी ट्रांसको ने मूंदी एक्स्ट्रा हाई टेंशन सब स्टेशन में ऊजीकृत किया 50 एमवीए क्षमता का अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर

भोपाल  मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने 132 केवी सबस्टेशन मूंदी (खंडवा) में 50 एमवीए क्षमता का अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊजीकृत किया है। इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से मूंदी सब स्टेशन की क्षमता बढ़कर 90 एमवीए की हो गई है जिससे जहाँ सबस्टेशन में बढ़ते लोड का उचित प्रबंधन किया जा सकेगा, वहीं मूंदी सबस्टेशन में दूसरा ट्रांसफार्मर लगने से निमाड़ अंचल के इस क्षेत्र के ट्रांसमिशन नेटवर्क को सुदृढ़ता, फ्लेक्सेविलिटी और विश्वसनीयता प्रदान हुई है। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने कहा कि 132 के वी सबस्टेशन मूंदी में वर्तमान और भविष्य में बढते लोड को देखते हुए 40 एमवीए क्षमता के अतिरिक्त 50 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जीकृत किया गया है। इस क्षमता वृद्धि से मूंदी सबस्टेशन से जुड़े हजारों घरेलू, कृषि विद्युत उपभोक्ताओं को सीधा लाभ होगा अब उन्हें और अधिक गुणवत्ता की विद्युत आपूर्ति उपलब्ध रहेगी। एमपी ट्रांसको खंडवा के अतिरिक्त मुख्य अभियंता  सुरेंद्र सोलंकी ने बताया कि 132 के वी मूंदी सबस्टेशन में इस अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर को स्थापित कर ऊर्जीकृत करने से खंडवा जिले की ट्रांसफार्मेसन कैपेसिटी में बढोत्तरी 2342 एम वी ए की हो गई है, वही मूंदी सब स्टेशन की ट्रांसफार्मेसन कैपेसिटी बढ़कर 90 एमवीए की हो गई है।  सोलंकी ने बताया कि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी खंडवा जिले में अपने 7 सब स्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण करती है जिनमें 400 केवी सबस्टेशन छैगांव माखन, 220 केवी सबस्टेशन छनैरा, तथा 132 केवी के खंडवा, मूंदी, सिंगोट, छैगांव माखन एवं पंधाना सबस्टेशन शामिल है।400 केवी सबस्टेशन की क्षमता 630, 220 केवी की 1000 तथा 132 केवी सब स्टेशनों की क्षमता 712 एम वी ए की है जिससे खंडवा जिले की कुल क्षमता 2342 एम वी ए की हो गई है। एमपी ट्रांसको की ट्रांसपोर्टेशन कैपेसिटी बढ़कर हुई 85448 एमवीए एमपी ट्रांसको प्रदेश में अपने 417 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज सब स्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण करती है जिसमें 400 केवी के 14 सब स्टेशन, 220 केवी के 88 सबस्टेशन एवं 132 केवी के 315 सबस्टेशन शामिल हैं। एमपी ट्रांसको के प्रदेश में कुल 1056 पावर ट्रांसफार्मर क्रियाशील है जिसमें 400 केवी के 41, 220 के वी वोल्टेज लेवल के 220 और 132 के वी के 795 ट्रांसफार्मर शामिल हैं। इस 50 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से एमपी ट्रांसको की कुल ट्रांसफारमेशन कैपेसिटी (पारेषण क्षमता) बढ़कर 85488 एमवीए की हो गई है।  

MP में बिजली ट्रांसमिशन को मिली रफ्तार, अगस्त में 6 नई लाइनें स्थापित; 135 सर्किट किलोमीटर का रिकॉर्ड

एमपी ट्रांसको ने अगस्त माह में 135 सर्किट किलोमीटर की 6 नई ट्रांसमिशन लाइनें पूर्ण कर स्थापित किया नया कीर्तिमान भोपाल मध्यप्रदेश में अगस्त माह में हुई लगातार भारी वर्षा और चुनौतीपूर्ण मौसम परिस्थितियों के बावजूद मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अगस्त माह में कुल 135.90 सर्किट किलोमीटर लंबाई की 132 केवी की कुल 6 ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण एवं सेकंड सर्किट के कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए हैं। इसमें रेलवे के लिए तैयार की गई एक महत्वपूर्ण लाइन भी शामिल है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस उपलब्धि पर अमले को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में विद्युत पारेषण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, विश्वसनीय एवं सक्षम बनाने के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार हो रही वर्षा के बीच एमपी ट्रांसको के अभियंताओं एवं कर्मचारियों ने समर्पण और दक्षता के साथ कार्य करते हुए यह उपलब्धि अर्जित की है। इन कार्यों के पूर्ण होने से प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा भविष्य की बढ़ती विद्युत मांग को पूरा करने में सहायता मिलेगी। अगस्त माह में 6 महत्वपूर्ण लाइने हुई पूर्ण एम पी ट्रांसको के मुख्य अभियंता के. एम. सिंघल ने बताया कि अगस्त माह में 132 केवी डबल सर्किट सिंगल स्ट्रिंग आलोट–ताल ट्रांसमिशन लाइन के सेंकड सर्किट का 19.56 सर्किट किलोमीटर, गंज बासौदा–सहरवासा लाइन के सेंकड सर्किट का 28.92 सर्किट किलोमीटर तथा कैमोर–बरही लाइन के सेंकड सर्किट का 32.40 सर्किट किलोमीटर कार्य पूर्ण किया गया। उन्होंने बताया कि 132 केवी सब स्टेशन सनावद से आरटीएस निमारखेड़ी तक 15.90 सर्किट किलोमीटर लंबी 132 केवी डबल फेज डबल वायर रेलवे ट्रैक्शन लाइन का निर्माण कार्य गंभीर निर्माण चुनौतियां के कारण लंबी अवधि से पूर्ण नहीं हो पा रहा था, जिसे स्थानीय प्रशासन के सहयोग से रेल्वे के इस लाईन कार्य को भी गहन वर्षाकाल मे पूर्ण किया गया। इसके अतिरिक्त बिलकिसगंज–मुगालिया छाप लाइन के सेंकड सर्किट का 17.27 सर्किट किलोमीटर तथा रतनगढ़–सिंगोली लाइन के सेंकड सर्किट का 21.85 सर्किट किलोमीटर निर्माण कार्य भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया।  

MP Transco की बड़ी राहत: पेंशनर्स और कर्मचारियों को कैशलेस स्वास्थ्य योजना से जुड़ने का फिर मिला मौका

भोपाल मध्यप्रदेश शासन के उपक्रम म.प्र. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा संचालित अंशदायी कैशलेस स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत अब तक शामिल होने से वंचित रह गए कार्मिकों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों को योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए एक और अवसर प्रदान किया गया है। एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता मानव संसाधन एवं प्रशासन श्री धीरेंद्र सिंह ने बताया कि पात्र कार्मिकों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों से 25 जून से 20 जुलाई 2026 तक पुनः आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से स्वीकार किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जो पात्र हितग्राही वर्तमान में योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं और अब इसमें शामिल होना चाहते हैं, उन्हें योजना के प्रारंभ होने की तिथि से अब तक देय सभी अंशदान किस्तों का भुगतान एकमुश्त करना होगा। योजना के अन्य सभी नियम एवं शर्तें यथावत रहेंगी। एमपी ट्रांसको प्रबंधन ने पात्र कार्मिकों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों से निर्धारित अवधि में आवेदन प्रस्तुत कर इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेने का आग्रह किया है।  

MP ट्रांसको की बड़ी उपलब्धि, इन-हाउस ओवरहॉलिंग से 400 केवी सर्किट ब्रेकर पर बचाए 50 लाख रुपये

एमपी ट्रांसको ने बिरसिंहपुर फीडर के 400 केवी सर्किट ब्रेकर की इन-हाउस ओवरहॉलिंग कर बचाए 50 लाख रुपये भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के अभियंताओं ने 400 केवी सब स्टेशन कटनी में स्थापित बिरसिंहपुर नंबर-2 फीडर के 400 केवी एबीबी निर्मित सर्किट ब्रेकर की सफलतापूर्वक इन-हाउस ओवरहॉलिंग कर कंपनी को लगभग 50 लाख रुपये की बचत कराई है। अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री आर.सी. शर्मा की पहल पर अभियंताओं एवं तकनीकी कर्मचारियों द्वारा लगभग एक सप्ताह तक सतत प्रयास कर यह कार्य पूर्ण किया गया। बिरसिंहपुर के महत्वपूर्ण फीडर में लगा है यह ब्रेकर यह सर्किट ब्रेकर बिरसिंहपुर ताप विद्युत गृह से आने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण 400 केवी फीडर पर स्थापित है, जिसके माध्यम से लगभग 350 मेगावॉट विद्युत का पारेषण होता है। प्रदेश की विद्युत व्यवस्था की दृष्टि से यह फीडर अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण फीडर पर स्थापित सर्किट ब्रेकर की सफल ओवरहॉलिंग ने न केवल इसकी विश्वसनीयता बढ़ाई है, बल्कि विद्युत आपूर्ति की निर्बाधता और ग्रिड सुरक्षा को भी सुदृढ़ किया है। फर्स्ट जेनरेशन का है ब्रेकर लगभग 20 वर्ष पुराने फर्स्ट जनरेशन सर्किट ब्रेकर के स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध न होने के बावजूद कटनी डिवीजन की टीम ने अपनी तकनीकी दक्षता और अनुभव का परिचय देते हुए इसका निरीक्षण, परीक्षण, मरम्मत एवं आवश्यक पार्ट्स का प्रतिस्थापन किया। इस चुनौतीपूर्ण कार्य में ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस संभाग दमोह एवं कटनी का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। ऊर्जा मंत्री ने की सराहना ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इसे कंपनी की तकनीकी क्षमता, संसाधनों के कुशल उपयोग, लागत नियंत्रण एवं आत्मनिर्भर कार्य संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए संबंधित अभियंताओं एवं कर्मचारियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि कंपनी के अभियंता अपनी विशेषज्ञता के बल पर महत्वपूर्ण उपकरणों के रखरखाव एवं पुनर्संचालन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।  

एमपी ट्रांसको ने भिंड में ऊर्जीकृत किया अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर भिंड जिले की पारेषण क्षमता में हुई वृद्धि – मंत्री तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्य प्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी ने 132 केवी सब स्टेशन भिंड की क्षमता वृद्धि करते हुए 50 एमवीए क्षमता का एक अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जीकृत किया है।इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से सब स्टेशन की ट्रांसफार्मेशन कैपेसिटी बढ़कर 153 एम वी ए की हो गई है। इस सब स्टेशन में यह तीसरा ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जीकृत किया गया है, इससे सब स्टेशन में बढ़ते लोड का उचित प्रबंधन किया जा सकेगा। एमपी ट्रांसको भिंड जिले में अपने 8 सब स्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण का कार्य करती है, जिसमें 132 केवी सबस्टेशन भिंड के अलावा 220 केवी सब स्टेशन मालनपुर, 220 केवी सबस्टेशन मेहगांव एवं 132 केवी सब स्टेशन लाहर, प्रतापपुरा, रान, गोहद एवं गोरमी शामिल है। इस ट्रांसफार्मर के स्थापित होने से भिंड जिले की ट्रांसफारमेशन केपैसिटी बढ़कर 1619 एम वी ए की हो गई।  

एमपी ट्रांसको ने सुरक्षित दूरी सुनिश्चित कर मानव जीवन को जोखिम से बचाया

220 केवी दमोह-टीकमगढ़ लाइन में ट्रिपिंग की जाँच के लिये विशेष अभियान भोपाल   मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस दमोह संभाग द्वारा 220 केवी दमोह-टीकमगढ़ ट्रांसमिशन लाइन में हुई ट्रिपिंग की जांच के लिए विशेष पेट्रोलिंग अभियान चलाया गया। पेट्रोलिंग में जबलपुर नाका क्षेत्र में यह पाया गया कि श्री हरिकांत उपाध्याय द्वारा मकान की छत पर कराये जा रहे बाउंड्री एवं छज्जे का निर्माण ट्रांसमिशन लाइन के अत्यधिक निकट प्रतिबंधित कारिडोर के भीतर आ गया था, जिसके कारण लाइन में ट्रिपिंग की स्थिति उत्पन्न हुई थी। कार्यपालन अभियंता श्री एस.के. मुड़ा के मार्गदर्शन में सहायक अभियंता श्री एमए बेग व ट्रांसमिशन लाइन मैंटैनेंस दमोह की टीम ने संबंधित को ट्रांसमिशन लाइन के प्रतिबंधित कारिडोर मे निर्माण से संभावित खतरों एवं सुरक्षा मानकों की जानकारी दी गई। उनकी सहमति से छत की बाउंड्री एवं छज्जे के उस हिस्से को सुरक्षित तरीके से हटाया गया, जिससे ट्रांसमिशन लाइन को आवश्यक दूरी उपलब्ध हो सके। साथ ही विद्युत ट्रिपिंग की आशंका को टाला जा सके। दमोह में लगभग 15 निर्माण खतरनाक जद में एमपी ट्रांसको के अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री अरविंद शर्मा ने बताया कि दमोह शहर में लगभग 15 ऐसे निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जो इस प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर आते हैं। इन सभी मामलों में संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे स्वयं निर्माण हटाएं, अन्यथा प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इन निर्माणों से न केवल रहने वालों की जान जोखिम में है, बल्कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति भी लंबे समय तक बाधित हो सकती है। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर की अपील ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। ट्रांसमिशन लाइनों के समीप किसी भी प्रकार का निर्माण न करें और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें। कम से कम 27 मीटर का सुरक्षित कारिडोर आवश्यक एमपी ट्रांसको ने आम नागरिकों से अपील की है कि अति उच्च दाब विद्युत लाइनों के निकट किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने से पूर्व विद्युत सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखें, जिससे दुर्घटनाओं एवं विद्युत व्यवधानों से बचा जा सके। नियमानुसार 132 के.वी. ट्रांसमिशन लाइन के दोनों ओर 27 मीटर का क्षेत्र और 220 के वी लाइन में 35 मीटर सुरक्षा कॉरीडोर के रूप में प्रतिबंधित है। इसके भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण पूर्णतः वर्जित है। इस क्षेत्र में बने मकान, दुकान या अन्य संरचनाएं इसलिए अत्यंत जोखिमपूर्ण हैं क्योंकि तेज हवा या अन्य कारणों से तारों के झूलने (स्विंग) की स्थिति में कभी भी जानलेवा हादसा हो सकता है। ट्रांसमिशन लाइनों में प्रवाहित विद्युत धारा घरेलू बिजली की तुलना में लगभग 600 से 950 गुना अधिक घातक होती है। ऐसे में इन लाइनों के पास रहना या निर्माण करना, हर समय एक खतरे के साए में रहने जैसा है।

एमपी ट्रांसको ने सेमरी हरचंद सब स्टेशन पर किया तीसरा पॉवर ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने नर्मदापुरम जिले की विद्युत पारेषण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए 132 केवी सब स्टेशन सेमरी हरचंद में तीसरे पॉवर ट्रांसफार्मर को सफलतापूर्वक स्थापित कर ऊर्जीकृत कर दिया है।  तोमर ने बताया कि इस पॉवर ट्रांसफार्मर के चालू होने से विश्व प्रसिद्ध मड़ई वाइल्डलाइफ अभयारण्य सहित सेमरी हरचंद सबस्टेशन से जुड़े अनेक ग्रामीण एवं कृषि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और मानक वोल्टेज पर अधिक विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति हो सकेगी। नर्मदापुरम जिले की पारेषण क्षमता हुई 2000 के पार एमपी ट्रांसको के अतिरिक्त मुख्य अभियंता  राजेश शांडिल्य ने बताया कि इस क्षमता वृद्धि के बाद सेमरी हरचंद सब स्टेशन की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 100 एमवीए हो गई है। साथ ही नर्मदापुरम जिले की कुल स्थापित ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढकर 2000 एमवीए के पार हो गई है। साथ ही 2015 एमवीए क्षमता के साथ जिले की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ एवं विश्वसनीय बनेगी। एमपी ट्रांसको द्वारा नर्मदापुरम जिले में 220 केवी के तीन प्रमुख सब स्टेशन नर्मदापुरम, इटारसी, एवं पिपरिया तथा 132 केवी के छह सब स्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण किया जा रहा है। इनमें सेमरीहरचंद के अलावा पिपरिया, बनखेड़ी, सोहागपुर, मोहासा बाबई,एवं सिवनी मालवा सब स्टेशन शामिल हैं।  

जायका टीम ने भोपाल में एमपी ट्रांसको की ट्रांसमिशन लाइन और महावड़िया सब स्टेशन का सूक्ष्म मूल्यांकन किया

जायका टीम ने किया भोपाल में एमपी ट्रांसको की ट्रांसमिशन लाइन एवं महावड़िया सब स्टेशन का सूक्ष्‍म मूल्‍यांकन सब स्‍टेशन बनने से हुए लाभ के संबंध में स्‍थानीय व्‍यापारियों से किया वार्तालाप भोपाल जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जायका) द्वारा मध्यप्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण के लिये मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) में संचालित जायका-2 वित्त पोषित विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत भोपाल में हुए कार्यों का विस्तृत निरीक्षण कर उनका सूक्ष्‍म मूल्‍यांकन किया गया। जायका जापान की इवैल्यूएटर सुश्री हिसाए ताकाहाशी एवं जायका के भारतीय प्रतिनिधि श्री कुनाल गुप्ता ने निर्माण कार्यों, उनकी गुणवत्ता, उपयोगिता तथा अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप क्रियान्वयन की बारीकी से जांच-पड़ताल की। महावड़िया सब स्टेशन एवं लाइन का किया निरीक्षण निरीक्षण के दौरान टीम ने सर्वप्रथम 132 केवी सब स्टेशन महावड़िया तथा इसके लिए निर्मित 132 केवी महावड़िया-मुगलियाछाप डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन का निरीक्षण कर सूक्ष्‍म मूल्‍यांकन किया। इवैल्यूएटर सुश्री ताकाहाशी ने लोन स्वीकृति के समय प्रस्तुत प्रारंभिक योजना, परियोजना के क्रियान्वयन, स्थापित उपकरणों की गुणवत्ता, लागत एवं रखरखाव से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की। सब स्‍टेशन के संचालन-संधारण की जानकारी प्राप्‍त जायका टीम ने सब स्‍टेशन के संचालन एवं संधारण कार्यों की जानकारी, पदस्थ कर्मचारियों की योग्‍यता और उनके दैनिक कार्यों का विवरण, आपातकालीन स्थिति से निपटने की कार्ययोजना तथा सब स्‍टेशन से पर्यावरण को होने वाले वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण के संबंध में भी जानकारी ली। निरीक्षण उपरांत जायका टीम ने सब स्टेशन एवं ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पाए जाने पर संतोष व्यक्त किया। उपयोगिता जानने के लिए व्‍यापारियों से की चर्चा जायका द्वारा वित्त पोषित फंड से निर्मित महावड़िया सब स्टेशन की उपयोगिता के संबंध में अधिकारियों से जानकारी लेने के साथ जायका टीम ने सब स्‍टेशन के नजदीक स्थित व्‍यापारियों के प्रतिष्‍ठानों में जाकर उनका प्रत्यक्ष फीडबैक भी लिया। व्‍यापारियों ने बताया कि सब स्टेशन के निर्माण से क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब उन्हें पर्याप्त एवं निर्बाध बिजली मिल रही है, जिससे व्‍यापार के संचालन करने में अब उन्‍हे आसानी हो रही है। इससे उनके आर्थिक एवं सामाजिक स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है। उपभोक्ताओं ने बताये फायदे जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जायका) की टीम ने भोपाल स्थित महावडिया सब स्टेशन के मूल्‍यांकन एवं निरीक्षण के दौरान सबस्‍टेशन के निर्माण से आसपास के क्षेत्रों में हुए बदलावों की जानकारी ली गई। सबस्‍टेशन के सामने स्थित डेयरी के संचालक श्री दिनेश यादव (यादव डेयरी) ने बताया कि सन् 2021 के पूर्व में बिजली सप्लाई मंडीदीप सबस्‍टेशन से आती थी, जिसमें लाइन की लंबाई अधिक होने से अनेक बार ट्रिपिंग एवं वोल्‍टेज में उतार –चढाव (फ्लक्चुएशन) की समस्या रहती थी। अब सबस्‍टेशन बनने से यह समस्या पूर्णतः समाप्त हो गई है। उन्हें अपनी दुकान पर फ्रिज एवं रेफ्रिजरेटर चलाने में कोई कठिनाई नहीं होती, जिससे दूध, दही आदि सामग्री अधिक समय तक सुरक्षित रहती है। इससे दुकान की आय में वृद्धि हुई है। इसी प्रकार, श्री बाबूलाल विश्वकर्मा (विश्वकर्मा वेल्डिंग) ने बताया कि पहले बिजली कटौती एवं लाइन फॉल्ट के कारण वेल्डिंग कार्य रुक जाता था, जिससे कार्य अवधि कम रहती थी। अब सतत एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति तथा उच्च वोल्टेज के कारण उनका कार्य सुचारु रूप से चल रहा है। अब वह अपने ग्राहकों काम समय पर करके देने में सफल हो रहे है। स्थानीय नागरिकों ने भी बताया कि सब स्टेशन के निर्माण से पहले लंबे समय तक विद्युत व्यवधान बना रहता था, जो अब न्यूनतम हो चुका है। इससे क्षेत्र में घरेलू और व्यावसायिक गतिविधियों को स्थिरता एवं गति मिली है।