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अंतरराष्ट्रीय सेमीनार में एम.पी. ट्रांसको के कार्यपालन अभियंता हितेश तिवारी के शोधपत्र को मिली सराहना –

  जबलपुर  अंतरराष्ट्रीय विद्युत ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा विषय पर आयोजित 6वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में एम.पी. पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के कार्यपालन अभियंता इंजीनियर हितेश तिवारी द्वारा प्रस्तुत शोधपत्र को व्यापक सराहना मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी.) भिलाई के इलेक्ट्रिकल विभाग द्वारा, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एन.आई.टी.) जमशेदपुर के सहयोग से भिलाई में आयोजित इस सम्मेलन में “ऑप्टिमल ग्रिड इंटीग्रेशन प्लानिंग एंड इकोनॉमिक असेसमेंट ऑफ़ ए सोलर- बी.ई.एस.एस. हाइब्रिड सिस्टम” विषय पर यह शोधपत्र प्रस्तुत किया गया।           पी.एच.डी. स्कॉलर एवं एम.पी. ट्रांसको, जबलपुर के योजना एवं डिजाइन विभाग में कार्यपालन अभियंता के पद पर पदस्थ इंजीनियर हितेश कुमार तिवारी, द्वारा प्रस्तुत इस शोध में सौर ऊर्जा एवं बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली के ग्रिड एकीकरण की तकनीकी व्यवहारिता एवं आर्थिक मूल्यांकन पर महत्वपूर्ण विश्लेषण किया गया है। इस शोधकार्य का मार्गदर्शन जी.जी.आई.टी.एस. जबलपुर के डॉ. राजीव कुमार चौहान एवं जी.एल.ए. यूनिवर्सिटी, मथुरा के डॉ. संजय कुमार मौर्य द्वारा किया गया। इस सम्मेलन में देश-विदेश के अनेक शोधकर्ताओं एवं प्रसिद्ध विद्युत विशेषज्ञो ने सहभागिता की।  

एम.पी. ट्रांसको का बड़ा कदम, 40 एम.व्ही.ए. पॉवर ट्रांसफार्मर की साईट पर हुई मेजर रिपेयरिंग

एम.पी. ट्रांसको ने 40 एम.व्ही.ए. पॉवर ट्रांसफार्मर की साईट पर ही की मेजर रिपेयरिंग इन-हाउस तकनीकी क्षमता का बना उत्कृष्ट उदाहरण भोपाल एम.पी. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के इंजीनियर्स ने अपनी तकनीकी दक्षता, मटेरियल मैनैजमेंट और त्वरित निर्णय क्षमता का प्रभावी परिचय देते हुए 40 एम.व्ही.ए. क्षमता के एक अत्यधिक क्षतिग्रस्त पॉवर ट्रांसफार्मर की सब स्टेशन स्थल पर ही मेजर रिपेयरिंग कर उसे सफलतापूर्वक पुनः ऊर्जीकृत किया। इस प्रयास से कंपनी को संभावित आर्थिक नुकसान से तो बचाया जा सका, साथ ही रबी फसल के महत्वपूर्ण लोड सीजन के दौरान ट्रांसमिशन नेटवर्क में लंबे आउटेज की आशंका को भी समाप्त किया गया। मनगवां में क्षतिग्रस्त हुआ था ट्रांसफार्मर रीवा जिले के 132 के.व्ही. सब स्टेशन, मनगवां में स्थापित 40 एम.व्ही.ए. पॉवर ट्रांसफार्मर तकनीकी कारणों से आग लगने के चलते गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। ट्रांसफार्मर निर्माता कंपनी के इंजीनियर द्वारा निरीक्षण के बाद यह अभिमत दिया गया कि ट्रांसफार्मर की साईट पर रिपेरिंग संभव नहीं है। इसे कंपनी के वर्कशॉप में भेजकर रिपेयरिंग कराना आवश्यक होगा। रबी सीजन के दौरान क्षेत्रीय ट्रांसमिशन नेटवर्क में 40 एम.व्ही.ए. क्षमता की महत्ता एवं स्थानीय ट्रांसमिशन नेटवर्क आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए एम.पी. ट्रांसको प्रबंधन द्वारा इसे साईट पर ही रिपेयर करने का निर्णय लिया गया। अधीक्षण अभियंता शर्मा की अगुवाई मुख्यालय जबलपुर वृत्त के अधीक्षण अभियंता आर.सी. शर्मा के मार्गदर्शन में साईट पर ही मेजर रिपेयरिंग के लिये विस्तृत तकनीकी कार्य योजना तैयार की गई। प्रदेश के विभिन्न स्थलों पर उपलब्ध ट्रांसफार्मर स्पेयर्स, जिनमें एच.वी./एल.वी. बुशिंग, प्रेशर रिलीफ डिवाइस, ऑयल वॉल्व, विभिन्न ओ-रिंग्स एवं गैस्केट्स (जो ट्रांसफार्मर में ऑयल लीकेज रोकने हेतु आवश्यक होती हैं), की त्वरित व्यवस्था सुनिश्चित की गई। जबलपुर के कार्यपालन अभियंता नरेन्द्र पटेल के साथ अधीक्षण अभियंता शर्मा द्वारा मनगवां में कैंप कर लगभग 15 दिनों में उच्च तकनीकी स्तर के रिपेयरिंग कार्यों को चरणबद्ध रूप से पूर्ण किया गया। इस दौरान क्षतिग्रस्त बुशिंग को डिस्मेंटल कर उनके स्थान पर लोकली मॉडीफाइड बुशिंग टरेट में फिटमेंट, ट्रांसफार्मर के टॉप कवर सहित विभिन्न पार्ट्स की गैस्केट रिप्लेसमेंट, आवश्यक प्री एवं पोस्ट-रिपेयर टेस्टिंग, ट्रांसफार्मर ऑयल फिल्ट्रेशन एवं अन्य प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक संपादित किया गया। रिपेरिंग और टेस्टिंग के उपरांत ट्रांसफार्मर को सुरक्षित रूप से पुनः सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया गया।  

एम.पी. ट्रांसको की 2025 की उपलब्धियां: ऊर्जा मंत्री तोमर ने किया ड्रोन पेट्रोलिंग के विस्तार का ऐलान

एम.पी. ट्रांसको ने वर्ष 2025 में हासिल की ऐतिहासिक उपलब्धियां : ऊर्जा मंत्री तोमर ड्रोन पेट्रोलिंग का 400 व 132 के.व्ही. लाइनों तक विस्तार भोपाल  वर्ष 2025 में ऊर्जा क्षेत्र में एम.पी. पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की है। एम.पी. ट्रांसको ने कैलेंडर वर्ष 2025 में प्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क (पारेषण प्रणाली) के अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, विस्तारीकरण एवं विश्वसनीयता में महत्वपूर्ण कार्य किया है। विशेष रूप से 220 के.व्ही. ट्रांसमिशन लाइनों की ड्रोन पेट्रोलिंग में मिली सफलता के बाद अब प्रदेश में 400 के.व्ही. एवं 132 के.व्ही. के 23000 ट्रांसमिशन टावरों की ड्रोन पेट्रोलिंग भी की जा रही है। मध्यप्रदेश देश के उन राज्यों में अग्रणी है जो ट्रांसमिशन टावरों की पेट्रोलिंग ड्रोन के माध्यम से प्रारंभ करा रहे हैं। ट्रांसफार्मेशन केपेसिटी हुई 82985 एम.व्ही.ए. मध्यप्रदेश में इस वर्ष एम.पी. ट्रांसको ने अपने नेटवर्क में 2211 एम.व्ही.ए. क्षमता की अतिरिक्त वृद्धि की, जिससे प्रदेश में कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 82985 एम.व्ही.ए. की हो गई है। इस वर्ष 33 नये पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जीकृत किये गये, जिससे एम.पी. ट्रांसको के ऊर्जीकृत पावर ट्रांसफार्मर की संख्या बढकर 1036 हो गई है। 724 सर्किट कि.मी. ट्रांसमिशन लाइनों का हुआ निर्माण इस वर्ष कंपनी ट्रांसमिशन लाइनों की लंबाई बढ़कर 42857 सर्किट कि.मी. की हो गई है, जो प्रदेश के 417 अति उच्चदाब सबस्टेशनों में विद्युत पारेषण करती है। इस वर्ष प्रदेश में 724 सर्किट कि.मी. ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण कर ऊर्जीकृत किया गया। पहली बार 19849 मेगावाट की डिमांड को किया हैंडल एम.पी. ट्रांसको के सिस्टम ने प्रदेश में पहली बार 19849 मेगावाट विद्युत डिमांड बिना किसी व्यवधान के हैंडल करने में सफलता प्राप्त की। वर्ष के अंतिम दिन 31 दिसम्बर 2025 को प्रदेश में आज तक की अधिकतम 19849 मेगावाट डिमांड दर्ज की गई। ट्रांसमिशन सिस्टम में नई टेक्नोलॉजी का हुआ समावेश एम.पी. पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेश के अपने ट्रांसमिशन सिस्टम में नई तकनीकों का समावेश किया है। मुख्यालय जबलपुर में स्वदेशी तकनीक से निर्मित स्काडा सिस्टम को अपग्रेड किया गया है। इसके अलावा मेट्रो इंदौर के लिये कम्पोजिट ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण भी किया गया है। प्रदेश के पुराने तीन 132 के.व्ही. सबस्टेशन को रिमोट से संचालित करने के कार्य का पहला चरण पूरा कर लिया गया है। मध्यप्रदेश को मिला प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ‘पावर लाइन ट्रांसटेक इंडिया अवॉर्ड’ दिसम्बर माह में मध्यप्रदेश ने विद्युत ट्रांसमिशन के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। एम.पी. ट्रांसको को वेस्टर्न रीजन में सबसे कम ट्रांसमिशन लॉस दर्ज करने के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ‘पावर लाइन ट्रांसटेक इंडिया अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। प्रोटेक्शन सेल हुआ 100 प्रतिशत डिजीटल भारत सरकार के डिजीटल इंडिया विजन के तहत कंपनी के प्रोटेक्शन सेल ने इस वर्ष पूरी तरह डिजीटल स्वरूप ले लिया है, प्रदेश में 42857 सर्किट कि.मी. ट्रांसमिशन लाइनों, 417 एक्स्ट्रा हाईटेंशन सबस्टेशन के 1000 से अधिक पावर ट्रांसफार्मर की हर पल निगरानी एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले प्रोटेक्शन सेल का समूचा कार्य पूर्णतः डिजीटल हो रहा है।  

एम.पी. ट्रांसको शुरू करेगी ‘रोको-टोको’ अभियान, बिजली चोरी और अनधिकृत उपयोग के खिलाफ कड़ा कदम

एम.पी. ट्रांसको चलाएगी ‘रोको-टोको‘‘अभियान इंदौर की ट्रांसमिशन लाइनों में चायनीज मांझा फँसने से दो वर्षों में 13 बार बिजली बाधित भोपाल  मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने इंदौर शहर में ट्रांसमिशन लाइनों के नजदीक चायनीज मांझे से पतंग उड़ाने के कारण उत्पन्न होने वाली संभावित दुर्घटनाओं और विद्युत व्यवधानों पर अंकुश लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें सतर्क व सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कंपनी इंदौर में विशेष ‘‘रोको-टोको ‘‘ अभियान चलाएगी। एम.पी. ट्रांसको की कार्यपालन अभियंता मती नमृता जैन ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में इंदौर क्षेत्र में 13 बार ऐसी घटनाएं हुई हैं, जब पतंग के साथ चायनीज मांझा ट्रांसमिशन लाइन के संपर्क में आया, जिससे न केवल बिजली आपूर्ति बाधित हुई, बल्कि ट्रांसमिशन लाइनें क्षतिग्रस्त भी हुईं। चलाया जायेगा जागरूकता अभियान रोको-टोको अभियान के तहत, एम.पी. ट्रांसको ने इंदौर के उन क्षेत्रों को चिन्हित किया है जहाँ बहुतायत में पतंग उड़ाई जाती हैं। इन संवेदनशील क्षेत्रों में नागरिकों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, व्यापक जागरूकता फैलाने के लिए पोस्टर, बैनर और पी.ए. सिस्टम के माध्यम से भी लोगों को सचेत और सतर्क किया जाएगा, ताकि जान-माल की हानि रोकी जा सके और उपभोक्ताओं को व्यापक क्षेत्र में बिजली के अनावश्यक लंबे व्यवधान का सामना न करना पड़े। क्यों घातक है चायनीज मांझा दरअसल, चायनीज मांझा, जो कि सामान्य सूती धागे से अलग होता है, विद्युत का सुचालक होने के कारण बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ट्रांसमिशन लाइनों के संपर्क में आने पर यह न केवल बिजली आपूर्ति में व्यवधान डालता है, बल्कि जान-माल की हानि का कारण भी बन सकता है। जब यह मांझा बिजली के तारों से टकराता है, तो इसमें मौजूद सामग्री के कारण करंट प्रवाहित हो सकता है, जिससे पतंग उड़ाने वाले और आसपास के लोगों को गंभीर खतरा होता है। इंदौर में ये क्षेत्र है संवेदनशील इंदौर में जिन क्षेत्रों को चायनीज मांझा के साथ पतंग उड़ाने के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील माना गया है, उनमें मुख्य रूप से लिम्बोदी, मूसाखेड़ी, खजराना, महालक्ष्मी नगर, सुखलिया, गौरीनगर, बाणगंगा, तेजाजी नगर और नेमावर रोड शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अभियान पर विशेष जोर रहेगा।  

त्यौहारी सीजन में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए रात और तड़के किया जा रहा ट्रांसमिशन लाइनों का मेंटेनेंस: मंत्री तोमर

इंदौर मे एमपी ट्रांसको की अभिनव पहल : मंत्री  तोमर त्यौहारी सीजन में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए रात और तड़के किया जा रहा ट्रांसमिशन लाइनों का मेंटेनेंस: मंत्री  तोमर भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि इंदौर महानगर के विद्युत उपभोक्ताओं को जरूरत के समय विद्युत का व्यवधान न हो, इस उद्देश्य  के साथ मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी इंदौर ने एक अभिनव पहल  की है। त्यौहारी सीजन में ट्रांसमिशन लाइन के मेंटेनेंस दिन के बजाय देर रात या  तड़के किए जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को बिजली व्यवधान का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा है कि इसी तरह के प्रयोग अन्य शहरों में भी किए जाएंगे। सामान्यतः ट्रांसमिशन लाइन में मेंटेनेंस का कार्य दिन के उजाले में ही किया जाता है, लेकिन इंदौर ट्रांसमिशन मेंटेनेंस टीम ने इस परंपरा को बदल दिया है। अब जब शहर सो रहा होता है, तब एमपी ट्रांसको की टीमें फील्ड में सक्रिय होकर ट्रांसमिशन लाइनों की देखरेख कर रही होती  हैं। फ्रंट लाइन मे  महिला अधिकारी एमपी ट्रांसको इंदौर की यह पहल इसलिए भी विशेष है क्योंकि इसका नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य अभियंता मती नीलम खन्ना के मार्गदर्शन मे कार्यपालन अभियंता मती नम्रता जैन कर रहीं है। कार्यपालन अभियंता मती नम्रता  जैन  चाहे रात्रि कालीन हो या सुबह तडके, पूरे शटडाउन समय मे फील्ड पर मौजूद रहकर मेंटेनेंस कार्य की स्वयं निगरानी करती हैं। त्यौहारी सीजन में उपभोक्ताओं को राहत देने का प्रयास अतिरिक्त मुख्य अभियंता मती नीलम खन्ना ने बताया कि इंदौर की बिजली व्यवस्था  कुछ इस तरह  है कि यदि ट्रांसमिशन लाइन पर मेंटेनेंस के दौरान शटडाउन लिया जाए, तो उपभोक्ताओं को असुविधा हो सकती है। इस समय त्यौहारी सीजन होने के कारण घरेलू और व्यावसायिक दोनों वर्गों के लिए  निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। रेलवे के मेगा ब्लॉक के दौरान भी किया गया सफल कार्य विगत दिवस रेलवे द्वारा दिए गए समय सीमा वाले मेगा ब्लॉक के दौरान  मती  नम्रता जैन की सूझबूझ और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता के कारण एमपी ट्रांसको की टीम ने रात भर काम कर रेलवे क्रॉसिंग पर कंडक्टर बदली के बेहद चुनौतीपूर्ण काम  को न्यूनतम संभव समय मे  पूरा करने का उल्लेखनीय कार्य किया। इसी तरह 132 के व्ही नॉर्थ जोन- चंबल सर्किट एक ट्रांसमिशन  लाइन पर सुबह 4 बजे से शटडाउन लेकर काम किया गया, तो  इसी फीडर के सर्किट नंबर दो पर रात भर ब्रेकडाउन अटेंड किया गया। अंधेरे और ठंड के बावजूद अधिकारी-कर्मचारी पूरी निष्ठा से कार्य में जुटे रहे। एमपी ट्रांसको की यह अनूठी पहल तकनीकी नवाचार के साथ-साथ कार्यसंस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण भी है।  

MP Transco ने व्हाट्सएप को कहा अलविदा, अब स्वदेशी ऐप ‘अराताई’ का सफल प्रयोग

भोपाल “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने भारत में निर्मित स्वदेशी मैसेजिंग ऐप अराताई का प्रयोग शुरू कर दिया है। ज़ोहो कॉर्प द्वारा विकसित यह ऐप विदेशी प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप का सुरक्षित और मजबूत विकल्प माना जा रहा है। एम.पी. ट्रांसको में सबसे पहले शहडोल डिवीजन के कार्यपालन अभियंता चंद्रभान कुशवाहा ने कार्यालयीन संवाद और फाइल शेयरिंग के लिए स्वदेशी अराताई का उपयोग प्रारंभ किया है। उन्होंने बताया कि “अराताई पूरी तरह भारत में विकसित सुरक्षित और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म है, जिससे विभागीय संवाद को स्वदेशी तकनीक के माध्यम से सशक्त बनाया जा सकेगा।” इस ऐप में उच्च स्तरीय डेटा सुरक्षा, ग्रुप मैसेजिंग, मल्टी-डिवाइस सपोर्ट और तेज़ फ़ाइल शेयरिंग जैसी सुविधाएं हैं। इसका डेटा भारत के सर्वरों पर सुरक्षित रहता है। श्री कुशवाहा की पहल से शहडोल डिवीजन का संपूर्ण आंतरिक संचार अब अराताई के माध्यम से हो रहा है। एम.पी. ट्रांसको की यह पहल डिजिटल आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित करने की दिशा में सराहनीय कदम है।  

एम.पी. ट्रांसको के रियल हीरो बने आउटसोर्स कर्मी संजय यादव

जलते ट्रांसफार्मर की आग बुझा कर दिखाया अदम्य साहस भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के जबलपुर में गोरा बाजार स्थित 220 के.वी. सबस्टेशन में बीती रात हुई आग की घटना में आउटसोर्स कर्मी श्री संजय यादव ने अदम्य साहस और जांबाजी का परिचय देते हुए एक बड़ी दुर्घटना को टाल दिया। उनकी त्वरित कार्रवाई से न केवल 160 एम व्ही ए. पावर ट्रांसफार्मर सुरक्षित रहा, बल्कि पूरे यार्ड और शहर की बिजली आपूर्ति को भी खतरे से बचा लिया गया। दरअसल लगभग 10 करोड की लागत से स्थापित 160 एमव्हीए क्षमता वाले पावर ट्रांसफार्मर के टेप चेंजर में तकनीकी खराबी आने से अचानक आग लग गई। इसके पहले की लपटें तेज़ी से उठती और स्थिति गंभीर हो जाती, आउटसोर्स आपरेटर श्री संजय यादव ने सहायक अभियंता श्री चेतन यादव, श्री आर.एस. बैस और हेल्पर श्री अय्यूब खान के मार्गदर्शन मे अग्निशमन यंत्रों की मदद से जलते ट्रांसफार्मर के ऊपर चढ़कर आग पर नियंत्रण पा लिया। उनकी सूझबूझ, साहस और समय पर की गई कार्रवाई से एक बड़ी आपदा टल गई। यदि यह हादसा हो जाता तो शहर की विद्युत व्यवस्था के साथ औद्योगिक क्षेत्र मनेरी प्रभावित तो होता ही अमरकंटक पावर हाउस से आने वाले पावर का प्रबंधन करने की विकट चुनौती खडी हो जाती। एमडी सुनील तिवारी ने किया सम्मानित और पुरस्कृत एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक श्री सुनील तिवारी ने सब स्टेशन पहुंचकर आउटसोर्स कर्मी श्री संजय यादव का अभिनन्दन करते हुए उन्हें नगद राशि प्रदान कर पुरस्कृत किया। विषम परिस्थिति में श्री यादव को मार्गदर्शन देने वाले वरिष्ठ हेल्पर श्री अयूब खान को भी सम्मानित किया तथा टीम के सभी सदस्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि श्री यादव और टीम ने जिस असाधारण साहस, तत्परता और जिम्मेदारी का परिचय दिया है, वह एम.पी. ट्रांसको परिवार के लिए गर्व की बात है। समय-समय पर दिए प्रशिक्षण से मिला लाभ एम.पी. ट्रांसको द्वारा समय-समय पर अग्निशमन एवं सुरक्षा प्रशिक्षणों के परिणामस्वरूप ही कर्मचारी आपात स्थितियों में इस तरह की प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम हो सके।  

इंदौर मेट्रो को बड़ी तकनीकी मदद, MP ट्रांसको ने पूरी की 13 किमी की कम्पोज़िट लाइन

इंदौर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है किमध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने इंदौर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के लिए महत्वपूर्ण एक्स्ट्रा हाईटेंशन लाइन का निर्माण कर उसे ऊर्जीकृत कर दिया है। अब मेट्रो के एम.आर.-10 सब स्टेशन को 132 के.व्ही. डबल सर्किट सप्लाई एम.पी. ट्रांसको के 220 के.व्ही. जैतपुरा सब स्टेशन से प्राप्त होगी। एमपी ट्रांसको इंदौर के अतिरिक्त मुख्य अभियंता आर.के. अग्रवाल ने बताया कि जैतपुरा से एम.आर.-10 सब स्टेशन तक ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण घने आबादी वाले क्षेत्र से होकर गुजरने के कारण चुनौतीपूर्ण रहा। इस कारण एम.पी. ट्रांसको मुख्यालय जबलपुर के विशेषज्ञों द्वारा विशेष डिजाइन तैयार कर 12.77 किमी लंबी कम्पोज़िट लाइन का निर्माण कराया गया।  इस लाइन में परंपरागत टावर के स्थान पर कम जगह मे लगने वाले नैरोबेस टावर,मोनोपोल टावर और 132 के.व्ही. अंडरग्राउंड केबल तीनों तकनीकों का समावेश किया गया। कुल 38 नैरोबेस टावर, 14 मोनोपोल तथा 0.777 किमी लंबी भूमिगत केबल का उपयोग कर लाइन तैयार की गई। इसके साथ ही जैतपुरा 220 के.व्ही. सब स्टेशन में 160 एम.व्ही.ए. क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर भी स्थापित किया गया है, इससे मेट्रो को सतत और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी।  

टीकमगढ़ परीक्षण संभाग को एम.पी. ट्रांसको की सर्वोत्तम दक्षता ट्रॉफी

भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के टीकमगढ़ परीक्षण संभाग ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि के लिए टीकमगढ़ को राज्य स्तरीय सर्वोत्तम दक्षता ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। जबलपुर मुख्यालय में आयोजित समारोह में एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक श्री सुनील तिवारी ने यह ट्रॉफी टीकमगढ़ टीम को प्रदान की। टीकमगढ़ की ओर से कार्यपालन अभियंता श्री आर.पी. कान्यकुब्ज, सहायक अभियंता श्री जी.पी. राय और श्रीमती चंदा यादव ने यह सम्मान ग्रहण किया। प्रबंध  संचालक श्री सुनील तिवारी ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद टीकमगढ़ की टीम की यह उपलब्धि सभी के लिए प्रेरणा है।

एम.पी. ट्रांसको की सख्ती: बड़वानी में अवैध निर्माण पर 24 नोटिस जारी, सुरक्षा की जाए सुनिश्चित

बड़वानी मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने बड़वानी शहर में एक्स्ट्रा हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों के समीप विद्युत सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर बने असुरक्षित और अवैध निर्माणों को हटाने के लिए मुहिम शुरू की है। प्रतिबंधित कॉरीडोर 27 मीटर की सीमा के अंदर बने इन निर्माणों से मानव जीवन को गंभीर खतरा है तथा दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इन क्षेत्रों में अवैध निर्माण हटाने के लिए 24 व्यक्तियों को नोटिस जारी किये गए हैं। एम पी ट्रांसको बड़वानी के अभियंता वीर सिंह भूरिया ने बताया कि मुहिम के पहले चरण में लोगों को समझाइश दी गई थी, अब संबंधितों को नोटिस देकर निर्माण हटाने के लिए कहा गया है। कर्मचारी पब्लिक ऐड्रेस सिस्टम द्वारा हाईटेंशन लाइन से निर्धारित सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील कर रहे हैं और लोगों को संभावित खतरों के प्रति सतर्क किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में जारी किए गए नोटिस बड़वानी क्षेत्र में एम.पी. नगर, तलुन, अंजद, न्यू फिल्टर के पास कसरावद रोड आदि स्थानों पर 132 के.व्ही. वोल्टेज की बड़वानी- निमरानी ट्रांसमिशन लाइन के समीप सबसे कम सुरक्षा दूरी में निर्माण किए गए हैं। इन्हें हटाने के लिए एम.पी. ट्रांसको द्वारा संबंधित व्यक्तियों को कुल 24 नोटिस जारी किए गए हैं। 27 मीटर का सुरक्षित कॉरीडोर क्यों आवश्यक? केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की गाइडलाइन्स के अनुसार 132 के.व्ही. क्षमता की ट्रांसमिशन लाइनों के 27 मीटर कॉरीडोर की न्यूनतम सुरक्षित दूरी में कोई निर्माण नहीं किया जाना चाहिए। यह दूरी इसलिए तय की गई है क्योंकि हवा के दबाव से कंडक्टर (विद्युत तार) झूल सकता है, जिसे स्विंग कहा जाता है। इस स्विंग को ध्यान में रखते हुए ही दुर्घटनाओं से बचाव के लिए यह मानक निर्धारित है। घरेलू बिजली से 600 गुना अधिक घातक ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे बने अवैध निर्माण घरेलू बिजली से 600 गुना से अधिक खतरनाक साबित हो सकते हैं। इससे न केवल जिले की विद्युत आपूर्ति लंबे समय तक बाधित होने का खतरा है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन पर भी बड़ा संकट होता है। सुरक्षा की दृष्टि से एम.पी. ट्रांसको ने नागरिकों से अपील की है कि वे मानकों के अनुरूप ही निर्माण करें और ट्रांसमिशन लाइनों से निर्धारित दूरी बनाए रखें।