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गोरखनाथ मंदिर में आहुत श्रद्धांजलि सप्ताह में सम्मिलित होंगे मुख्यमंत्री

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मंगलवार (29 सितंबर) को गोरखनाथ मंदिर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह में सम्मिलित होंगे।  मुख्यमंत्री, गोरखनाथ मंदिर में मंगलवार सुबह युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की पुण्यस्मृति में आहुत श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में देशभर के प्रमुख संतों की भी सहभागिता होगी। इसके बाद गोरखनाथ मंदिर में मलूक पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास जी महाराज द्वारा सुनाई जा रही सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा का विराम होगा। सीएम योगी भी इस कथा के विराम सत्र में सम्मिलित होंगे। गोरखपुर दौरे के तीसरे दिन, बुधवार को मुख्यमंत्री अपने पूज्य गुरुदेव राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करेंगे।

यूपीआईटीएस-2026 में चार दिन में ₹5,500 करोड़ के व्यापारिक समझौते

ग्रेटर नोएडा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश को देश-दुनिया के लिए भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में आयोजित चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) ने चार दिनों में ही नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित इस पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में 28 सितंबर तक संचयी रूप से ₹5,500 करोड़ यानी करीब 574 मिलियन अमेरिकी डॉलर के 3,765 व्यापारिक समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इसके अलावा देश-विदेश के खरीदारों और कंपनियों की ओर से ₹12,500 करोड़ की कारोबारी पूछताछ दर्ज की गई है। मंगलवार को ट्रेड शो का अंतिम दिन है, जिससे इन आंकड़ों में और वृद्धि की संभावना है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (एफआईईओ) के अपर महानिदेशक सुविध शाह के अनुसार, 28 सितंबर तक कुल 35,387 बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) बैठकें संपन्न हुई हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए आयोजित रिवर्स बायर्स सेलर्स मीट (आरबीएसएम) में 11,887 बैठकें, जबकि मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र में घरेलू व अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच 23,500 बी2बी बैठकें हुईं। इन बैठकों ने प्रदेश के उद्यमियों, निर्माताओं और निर्यातकों को सीधे वैश्विक खरीदारों से जोड़ने का काम किया है। योगी सरकार की नीतियों का वैश्विक बाजार में दिख रहा असर यूपीआईटीएस-4.0 महज उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, निवेश अनुकूल वातावरण और उद्यमिता की क्षमता को वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रभावी मंच बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में विकसित किए जा रहे औद्योगिक एवं कारोबारी इकोसिस्टम का लाभ एमएसएमई, ओडीओपी, हथकरघा, हस्तशिल्प, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा आधुनिक विनिर्माण क्षेत्र के उद्यमियों को मिल रहा है। चार दिनों में हुए 3,765 एमओयू और ₹12,500 करोड़ की कारोबारी पूछताछ से स्पष्ट है कि यूपीआईटीएस ने प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों से जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक सेतु का काम किया है। यहां छोटे उद्यमियों से लेकर बड़े निर्माताओं तक को घरेलू और विदेशी खरीदारों के साथ सीधे संवाद, उत्पाद प्रदर्शन और व्यापारिक समझौतों का अवसर मिल रहा है। ‘लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में यूपी की नई पहचान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन के तहत यूपीआईटीएस के माध्यम से प्रदेश के पारंपरिक और आधुनिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) जैसे कार्यक्रमों ने स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों के उत्पादों को वैश्विक खरीदारों के सामने पहुंचाने का अवसर दिया है। यूपीआईटीएस-4.0 के माध्यम से उत्तर प्रदेश की एमएसएमई शक्ति, ओडीओपी उत्पाद, हथकरघा, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और विनिर्माण क्षमता एक ही मंच पर वैश्विक बाजार से जुड़ रही है। इससे न केवल व्यापार के नए अवसर बन रहे हैं, बल्कि प्रदेश के स्थानीय उत्पादों के लिए निर्यात की संभावनाएं भी विस्तार पा रही हैं।

मंगलवार को चमकेगा इन राशियों का भाग्य, करियर में मिल सकती है बड़ी सफलता

मेष आपको सेल्फ लव पर फोकस करना चाहिए। दिन मिला-जुला रहने वाला है। आपको मेहनत का पूरा फल मिलेगा। मान-सम्मान बढ़ेगा। पैसों के लेन-देन से बचें। शादीशुदा लोगों की जिंदगी में खुशियां रहेंगी। वृषभ गुस्से और वाणी पर काबू रखें। आज के दिन पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। आज सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत है। शाम तक सुख- सुविधाओं से जुड़ी चीजों में पैसे खर्च हो सकते हैं। मिथुन आज दिन खत्म होते-होते आपको मनचाहा लाभ मिल सकता है। शुरुआत में नौकरी करने वाले जातकों पर काम का दवाब रहेगा। आज के दिन आपको सफल होने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। कर्क आज के दिन आपके आय के साधन में वृद्धि होगी। व्यापारियों को मन चाहा लाभ होगा। परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। दिन के मध्य में नौकरी करने वाले जातकों को नए अवसर मिलेंगे। सिंह आज के दिन आपका आर्थिक बजट बिगड़ सकता है। आप संतान की किसी बात से परेशान रहेंगे। दिन के मध्य में किसी विशेष काम में आपको सफलता मिल सकती है। आज दिन शुभ समाचार लेकर आ सकता है। कन्या आज किस्मत चमक सकती है। काम के दौरान आपको मनचाही सफलता हासिल होगी। रुके हुए कार्य पूरे होंगे। आज दोपहर में किसी विशेष व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। विवाहित जातकों की लव लाइफ अच्छी रहेगी। तुला आज सुख-सुविधा से जुड़ी किसी चीज में पैसे खर्च हो सकते हैं। दिन की शुरुआत में खर्चों का सामना करना पड़ सकता है। मन में नकारात्मक विचारों का प्रभाव भी हो सकता है। वृश्चिक किसी काम में लापरवाही करने से बचना चाहिए। नौकरी पेशा करने वाले जातकों को गुप्त शत्रुओं से बचना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले जातकों के लिए यह दिन शुभ साबित हो सकता है। धनु आज आपको कुछ बड़े खर्चों का सामना करना पड़ सकता है। शुरुआत में कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। छात्रों का मन पढ़ाई से उचट सकता है। परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद हो सकते हैं। मकर आज उतार-चढ़ाव भरा दिन साबित हो सकता है। नौकरी करने वाले जातकों को नौकरी के नए अवसर मिल सकते हैं। कार्यस्थल पर प्रमोशन मिल सकता है। दिन के मध्य में गुप्त शत्रुओं से बचकर रहने की जरूरत है। कुंभ आज का दिन कुछ बड़े खर्चे लेकर आ सकता है। जिससे आपका आर्थिक बजट हिल सकता है। आज समय और धन दोनों को सोच-समझकर खर्च करें। शारीरिक व मानसिक रूप से परेशान हो सकते हैं। मीन आज का दिन आपके लिए मिले-जुले परिणाम लेकर आया है। काम के सिलसिले में ट्रैवल करना पड़ सकता है। दिन की शुरुआत में कुछ चुनौतियों आएंगी, जिनका सामना करना पड़ सकता है।

योगी सरकार में बालवाटिकाओं को मिलेगा ‘लर्निंग कॉर्नर’ का नया संसार, 966 पीएम श्री विद्यालयों में होगी आधुनिक व्यवस्था, ₹193 लाख की मंजू

लखनऊ योगी सरकार ने नौनिहालों की प्रारंभिक शिक्षा को और अधिक रोचक, गतिविधि आधारित एवं बाल-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पीएम श्री योजना के अन्तर्गत वर्ष 2026-27 में 966 पीएम श्री विद्यालयों में स्थित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों/बालवाटिकाओं में लर्निंग कॉर्नर विकसित किए जाएंगे। इसके लिए ₹193 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है। प्रत्येक चयनित विद्यालय के लिए ₹20,000 की दर से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।  इन केंद्रों में बच्चों की आयु और सीखने की जरूरतों के अनुरूप रीडिंग कॉर्नर, ब्लॉक कॉर्नर, परफॉर्मेंस कॉर्नर और आर्ट कॉर्नर विकसित किए जाएंगे। 966 पीएम श्री विद्यालयों में लर्निंग कॉर्नर की स्थापना से बालवाटिकाओं में बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार होगा, जहां किताब, खिलौना, कला, अभिनय और गतिविधि सीखने के माध्यम बनेंगे। योगी सरकार की यह पहल प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को अधिक जीवंत, अनुभवपरक और बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खेल और गतिविधियों से सीखेंगे बच्चे, बालवाटिका बनेगी सीखने की प्रयोगशाला राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप प्रारंभिक बाल्यावस्था में बच्चों को गतिविधि आधारित शिक्षण से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। शासन के निर्देशों के अनुसार चारों लर्निंग कॉर्नर बच्चों के सामाजिक एवं संवेदनात्मक विकास, संज्ञानात्मक विकास, शारीरिक विकास तथा सूक्ष्म मांसपेशियों के विकास में सहायक होंगे। 3-5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए तैयार किए जाने वाले लर्निंग कॉर्नर में रीडिंग, ब्लॉक, परफॉर्मेंस और आर्ट गतिविधियों के लिए आयुवर्ग के अनुरूप सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।  कहानी की किताबों से लेकर पजल और ब्लॉक्स तक, सीखने के लिए समृद्ध सामग्री रीडिंग कॉर्नर में हिंदी वर्णमाला मैट, चित्रात्मक कहानी की पुस्तकें, ओपन बुक शेल्फ, चित्र एवं संख्या चार्ट और लेखन/चित्रकारी के लिए क्लिप बोर्ड जैसी सामग्री शामिल है। इसका उद्देश्य बच्चों में शब्दावली, सुनने और शुरुआती साक्षरता से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ावा देना है। ब्लॉक कॉर्नर में बड़े फोम ब्लॉक्स, लकड़ी के ब्लॉक्स, शेप सॉर्टर, पिक्चर पजल, अल्फाबेट एवं नंबर ब्लॉक्स, स्टैकिंग टॉयज और लेसिंग बोर्ड जैसी सामग्री निर्धारित की गई है। इससे बच्चों में आकार पहचान, समस्या समाधान, स्थानिक समझ, शुरुआती साक्षरता एवं संख्याज्ञान जैसी क्षमताओं के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।  परफॉर्मेंस और आर्ट कॉर्नर से निखरेगी रचनात्मकता परफॉर्मेंस कॉर्नर में बच्चों के लिए विभिन्न भूमिका-आधारित गतिविधियों से जुड़ी सामग्री रखी जाएगी। इनमें ड्रेस-अप कॉस्ट्यूम, फिंगर स्टिक पपेट, किचन प्ले सेट, सॉफ्ट डॉल, इमोशन मास्क, स्मॉल ड्रम, हैट्स एवं स्कार्फ और टॉय टेलीफोन जैसी सामग्री शामिल है। इनका उद्देश्य कल्पनाशील भूमिका-अभिनय, कहानी कहने, संवाद, सामाजिक सहभागिता और भावनात्मक विकास को बढ़ावा देना है। आर्ट कॉर्नर में नॉन-टॉक्सिक फिंगर पेंट, क्रेयॉन, चाइल्ड-सेफ ग्लू स्टिक, आर्ट शीट एवं कलर पेपर जैसी सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके माध्यम से बच्चों को रचनात्मक अभिव्यक्ति और सूक्ष्म मोटर कौशल विकसित करने के अवसर मिलेंगे।  3-5 और 5-6 वर्ष के बच्चों की जरूरत के अनुसार अलग व्यवस्था लर्निंग कॉर्नर की सामग्री आयु वर्ग के अनुरूप निर्धारित की गई है। 3-5 वर्ष और 5-6 वर्ष के बच्चों के लिए अलग-अलग सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बच्चों की उम्र और विकासात्मक जरूरतों के अनुरूप गतिविधियां संचालित की जा सकें। 5-6 वर्ष के बच्चों के लिए रीडिंग कॉर्नर में शुरुआती पठन कौशल को ध्यान में रखते हुए अर्ली रीडर्स एवं द्विभाषी पुस्तकों जैसी सामग्री का प्रावधान किया गया है।    “लर्निंग कॉर्नर से बच्चों की जिज्ञासा को मिलेगा सीखने का नया मंच” “बालवाटिका में सीखना बच्चों के लिए जितना सहज और आनंददायक होगा, उनकी बुनियाद उतनी ही मजबूत होगी। 966 पीएम श्री विद्यालयों में लर्निंग कॉर्नर विकसित होने से नौनिहालों को पढ़ने, खेलने, कला, अभिनय और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा। हमारा प्रयास है कि बच्चे अपनी स्वाभाविक जिज्ञासा के साथ सीखें और शुरुआती वर्षों में ही उनकी क्षमताओं को सही दिशा मिले।” संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा “गतिविधि आधारित वातावरण से निखरेंगी बच्चों की सीखने की क्षमताएं” “लर्निंग कॉर्नर में आयु वर्ग के अनुरूप निर्धारित सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बच्चों को उनकी विकासात्मक जरूरतों के अनुसार सीखने के अवसर मिलें। रीडिंग, ब्लॉक, परफॉर्मेंस और आर्ट कॉर्नर के प्रभावी उपयोग के साथ सामग्री की उपलब्धता और गुणवत्ता की नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।”  मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

जीबीसी 5.0 के लक्ष्य के करीब पहुंचा सोनभद्र, 14,612 करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर एमओयू

सोनभद्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने की नीति के तहत सोनभद्र अब बड़े निवेश की नई मंजिल की ओर बढ़ रहा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) 5.0 के लिए शासन की ओर से निर्धारित 20 हजार करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य के करीब जिला तेजी से पहुंच रहा है। अब तक जिले में 33 परियोजनाओं के लिए 14,612 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर एमओयू हो चुके हैं। शेष 5,388 करोड़ रुपये के लक्ष्य को भी जल्द हासिल करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से प्रयास तेज कर दिए गए हैं। पनौरा में 7,400 करोड़ का पीएसपी प्लांट जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि प्रमुख निवेश परियोजनाओं में अदानी समूह का 7,400 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। समूह की ओर से पनौरा में पीएसपी (पंप्ड स्टोरेज पावर) प्लांट स्थापित किया जाएगा। ऊर्जा भंडारण और विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में यह परियोजना सोनभद्र की ऊर्जा क्षमता को और मजबूत करने वाली होगी। वहीं, टिहरी हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन (टीएचडीसी) ने बसुधारी में करीब 6,400 करोड़ रुपये के निवेश से परियोजना स्थापित करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। बड़े ऊर्जा निवेश से सोनभद्र की पहचान देश के प्रमुख ऊर्जा एवं औद्योगिक केंद्रों में और मजबूत होने की संभावना है। 33 परियोजनाओं के लिए 14,612 करोड़ के एमओयू जिलाधिकारी ने बताया कि शासन से जिले को 20 हजार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। इसके सापेक्ष अब तक 33 परियोजनाओं के लिए 14,612 करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि शेष 5,388 करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य को भी जल्द प्राप्त करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निवेश परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है। परियोजनाओं के क्रियान्वयन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय कारोबार, परिवहन, निर्माण तथा सेवा क्षेत्र को भी गति मिलेगी। बड़े निवेश से बदलेगी सोनांचल की तस्वीर सोनभद्र में प्रस्तावित बड़े निवेश से जिले के औद्योगिक परिदृश्य में व्यापक बदलाव की उम्मीद है। ऊर्जा क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजनाएं न केवल औद्योगिक गतिविधियों को गति देंगी, बल्कि रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी नए अवसर पैदा करेंगी। निवेश से रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार सोनभद्र में लगातार बढ़ते औद्योगिक निवेश से जिले में रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। बड़े उद्योगों के साथ सहायक उद्योगों और सेवा क्षेत्र के विस्तार से स्थानीय युवाओं, कारोबारियों और उद्यमियों को भी लाभ मिल सकता है। शासन के निवेश लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में तेजी से बढ़ते कदमों से सोनभद्र के औद्योगिक हब के रूप में उभरने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

यूपीआईटीएस में छाया यूपीएसडीएम के हुनर का जादू

ग्रेटर नोएडा जब हुनर को मंच मिलता है तो उत्साह खुद-ब-खुद उमड़ पड़ता है। यही नजारा सोमवार को उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी-2026 में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के पवेलियन में देखने को मिला। प्रदर्शनी के चौथे दिन उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन का पवेलियन सुबह से ही हुनर, उत्साह और उमंग से गुलजार रहा। दिन की शुरुआत जोश और गर्व से भरे माहौल में हुई। पीएसी की 32वीं वाहिनी के जवानों ने बैंड की शानदार प्रस्तुति देकर पूरे प्रदर्शनी परिसर में देशभक्ति की लहर दौड़ा दी। उनकी एक-एक धुन पर कदम थिरक उठे और इसी जोश ने युवाओं में नई ऊर्जा भर दी। देखते ही देखते युवा खुद मंच की ओर खिंचे चले आए और ‘कौशल मंच’ पर एक के बाद एक शानदार प्रस्तुतियां दीं। युवाओं के इस जुनून को देखकर उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल के अधिकारी भी खुद को रोक नहीं पाए और मंच पर आकर उन्होंने भी अपने हुनर का प्रदर्शन किया। ‘कौशल मंच’ जहां प्रतिभाओं से जगमगा रहा था, वहीं पवेलियन के 16 प्रत्यक्ष कौशल प्रदर्शन केंद्रों पर सीखने-सिखाने का दौर भी पूरे दिन चलता रहा। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विभिन्न कौशलों को करीब से जाना। शाम ढलते ही उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन का पवेलियन सुरों के रंग में रंग गया। दिल्ली घराने के उस्ताद अलीम खान एवं समूह ने अपनी शानदार प्रस्तुति से महफिल लूट ली। उस्ताद अलीम खान और उनके बेटे अरीम खान ने वायलिन पर जब मधुर धुनें छेड़ीं तो पूरा पंडाल झूम उठा। तबले पर समीर खान की थाप ने इस शाम को और भी यादगार बना दिया।

5.48 लाख से अधिक फुटफॉल के साथ यूपीआईटीएस ने रचा नया रिकॉर्ड

ग्रेटर नोएडा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन के अनुरूप आयोजित चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) ने व्यापारिक गतिविधियों के साथ जनभागीदारी के मामले में भी नया रिकॉर्ड बनाया है। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित पांच दिवसीय ट्रेड शो में 28 सितंबर तक कुल 5,48,881 फुटफॉल दर्ज की गई। इसमें 1,56,523 घरेलू कारोबारी खरीदार और 3,92,358 सामान्य आगंतुक शामिल हैं। ट्रेड शो मंगलवार को संपन्न होगा, जिससे फुटफॉल का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है। यूपीआईटीएस में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस बात को दर्शाती है कि यह आयोजन अब केवल कारोबारियों और उद्योग जगत तक सीमित नहीं रह गया है। प्रदेश के उत्पादों, हस्तशिल्प, हथकरघा, ओडीओपी उत्पादों, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि उत्पादों और आधुनिक विनिर्माण की झलक देखने के लिए बड़ी संख्या में आम लोग भी ट्रेड शो में पहुंच रहे हैं। वहीं, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की मौजूदगी ने प्रदर्शनी को वास्तविक कारोबारी गतिविधियों का मंच बना दिया है। कारोबार और जनभागीदारी का संगम यूपीआईटीएस-4.0 की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहां कारोबार और जनभागीदारी एक साथ दिखाई दी। जहां एक ओर कारोबारी खरीदार प्रदेश के उत्पादों की गुणवत्ता, कीमत, उत्पादन क्षमता और निर्यात संभावनाओं को समझने के लिए विभिन्न स्टॉल पर पहुंचे, वहीं दूसरी ओर सामान्य आगंतुकों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के स्थानीय उत्पादों और शिल्प की जानकारी ली। 1,56,523 घरेलू कारोबारी खरीदारों की मौजूदगी ने प्रदेश के उद्यमियों को देश के अलग-अलग हिस्सों के व्यापारियों और संभावित कारोबारी साझेदारों से सीधे जुड़ने का अवसर दिया। इससे स्थानीय उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने और व्यापारिक नेटवर्क को विस्तार देने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन को मिल रही मजबूती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन के तहत उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यूपीआईटीएस इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आया है। यहां प्रदेश के अलग-अलग जिलों के उत्पाद एक ही छत के नीचे प्रदर्शित किए जा रहे हैं। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) के तहत तैयार किए जा रहे उत्पादों के साथ हथकरघा, हस्तशिल्प, कृषि आधारित उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, चमड़ा, कालीन, पीतल, कांच, लकड़ी के उत्पाद और अन्य पारंपरिक एवं आधुनिक उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में ट्रेड शो महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बड़ी संख्या में सामान्य आगंतुकों की मौजूदगी ने इन उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का अवसर भी दिया है। इससे उत्पादों की पहचान बढ़ाने, ब्रांडिंग को मजबूत करने और स्थानीय उद्यमियों को नए ग्राहक वर्ग से जोड़ने में मदद मिल रही है। 3.92 लाख सामान्य आगंतुकों ने बढ़ाई रौनक 28 सितंबर तक ट्रेड शो में पहुंचे 3,92,358 सामान्य आगंतुकों ने यूपीआईटीएस को व्यापक जनभागीदारी वाला आयोजन बना दिया है। अलग-अलग हॉल में लगे स्टॉल्स पर लोगों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। आगंतुक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए उत्पादों को करीब से देख रहे हैं और उनकी निर्माण प्रक्रिया, विशेषताओं तथा उपयोगिता की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। ट्रेड शो में व्यापारिक गतिविधियों के साथ उत्तर प्रदेश की समृद्ध कला-संस्कृति, खानपान और पारंपरिक उत्पादों को भी प्रदर्शित किया जा रहा है। इससे प्रदेश की विविधता को एक ही मंच पर देखने का अवसर मिल रहा है। प्रदर्शनी हॉलों में लगातार बढ़ी कारोबारी गतिविधियां विभिन्न प्रदर्शनी हॉलों में खरीदारों और आगंतुकों की निरंतर आवाजाही से कारोबारी गतिविधियों को गति मिली है। कारोबारी खरीदार उत्पादों की जानकारी लेने के साथ संभावित आपूर्तिकर्ताओं और निर्माताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं। ट्रेड शो में घरेलू खरीदारों के साथ विदेशी खरीदारों की भागीदारी ने प्रदेश के उद्यमियों के लिए निर्यात बाजार के नए अवसर भी खोले हैं। इससे छोटे और मध्यम उद्यमों को अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने तथा संभावित व्यापारिक साझेदारों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला है।

23 अक्टूबर को जगदलपुर में आयोजित होगा मुरिया दरबार

रायपुर छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और गौरवशाली विरासत के प्रतीक बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में देश की राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु शामिल होंगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निमंत्रण पर राष्ट्रपति  मुर्मु ने 23 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर में आयोजित होने वाले मुरिया दरबार में शामिल होने का आमंत्रण स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति  मुर्मु को मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का निमंत्रण पत्र सौंपने के अवसर पर केंद्रीय मंत्री  तोखन साहू, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल, बस्तर लोकसभा सांसद  महेश कश्यप तथा संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन उपस्थित रहे। राष्ट्रपति की उपस्थिति बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरव का अवसर मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट जनजातीय परंपराओं, लोक आस्था और सामुदायिक सहभागिता के लिए देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है। राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने फरवरी 2026 में जगदलपुर में आयोजित बस्तर पंडुम के अवसर पर बस्तर दशहरा को जनजातीय संस्कृति और भाईचारे को अनूठा उदाहरण बताया था। उन्होंने बस्तर की प्राचीन परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित करते हुए विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था। ऐसे में बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की प्रस्तावित उपस्थिति बस्तर की सांस्कृतिक पहचान, जनजातीय परंपराओं और लोक विरासत के लिए विशेष गौरव का अवसर होगी। मुरिया दरबार बस्तर की जीवंत सामाजिक परंपरा बस्तर दशहरा की परंपराओं में मुरिया दरबार का विशेष महत्व है। यह आयोजन बस्तर की सामाजिक एवं सामुदायिक व्यवस्था की जीवंत अभिव्यक्ति है। मुरिया दरबार के माध्यम से बस्तर की परंपराओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक प्रमुखों और स्थानीय समुदाय के बीच संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाया जाता है। बस्तर की संस्कृति और सामाजिक जीवन में मांझी एवं चालकी जैसे पारंपरिक पदों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने जुलाई 2026 में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी मांझी और चालकी की सामाजिक जीवन तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया था। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की ऐसी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा है, जिसकी पहचान केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया में है। मुरिया दरबार में राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति बस्तर की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए अत्यंत गौरव का अवसर है। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति यहां के जनजीवन, लोक आस्था, कला, परंपराओं और प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई है। राष्ट्रपति  मुर्मु की उपस्थिति से बस्तर की इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक पहचान मिलेगी। राज्य सरकार का प्रयास है कि बस्तर की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए पर्यटन के माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसरों का विस्तार किया जाए।  अग्रवाल ने कहा कि बस्तर दशहरा हमारी सांस्कृतिक विविधता और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण है। 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार में राष्ट्रपति का स्वागत करना पूरे बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण होगा। बस्तर की संस्कृति से राष्ट्रपति का विशेष जुड़ाव महामहिम राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु का बस्तर की संस्कृति और जनजातीय विरासत से विशेष जुड़ाव रहा है। फरवरी 2026 में उन्होंने जगदलपुर में बस्तर पंडुम का उद्घाटन किया था। अपने संबोधन में उन्होंने बस्तर की प्राचीन संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपातों और गुफाओं को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि बस्तर की समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक विकास को आगे बढ़ाना आवश्यक है। जुलाई 2026 में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी राष्ट्रपति ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित एवं संवर्धित करने और जनजातीय समुदायों की विकास यात्रा में सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया था।

यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल हुए चार और नए ऐतिहासिक स्थल

भोपाल  मध्यप्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में प्रदेश के चार ऐतिहासिक स्थलों को शामिल किया गया है। इनमें बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिर समूह और उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश की गौरवशाली विरासत को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भारत की कुल 78 अस्थायी धरोहरों में से 19 मध्यप्रदेश में होना प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत में समृद्धि को दर्शाता है। यूनेस्को की सूची में धरोहरों का शामिल होना मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता:  डॉ. इलैयाराजा टी. सचिव पर्यटन और पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में हमारे चार और ऐतिहासिक स्थलों का शामिल होना मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता का एक बड़ा प्रमाण है। इस गौरवशाली मान्यता से अंतर्राष्ट्रीय पटल पर मध्यप्रदेश के पर्यटन को एक नई ऊँचाई मिलेगी, जिससे दुनिया भर के सैलानी हमारी अनूठी संस्कृति और इतिहास से गहराई से परिचित हो सकेंगे।" बाग गुफाओं के भित्ति चित्र धार धार जिले में स्थित, बाग गुफाओं के भित्ति चित्र के यह स्थल विंध्याचल की पहाड़ियों के पास बाघ नदी के किनारे है। बाग गुफाएँ मध्य प्रदेश में नौ बौद्ध पाषाण-कृत (रॉक-कट) गुफाओं का एक उल्लेखनीय समूह हैं, जो मुख्य रूप से चौथी से छठी शताब्दी ईस्वी की हैं। इनका सबसे बड़ा महत्व इनमें बचे हुए भित्ति चित्रों (मुरल्स) में है, विशेषकर गुफा संख्या 4 (रंग महल) में, जो शाही दरबारों, जुलूसों, संगीतकारों, नर्तकों और समकालीन सामाजिक जीवन के दृश्यों को दर्शाती हैं। यह चित्र अजंता के साथ तकनीकी जुड़ाव रखते हुए बौद्ध भित्ति चित्र परंपरा की एक विशिष्ट क्षेत्रीय अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करते हैं, साथ ही अपनी अनूठी कलात्मक शैली को बनाए रखते हुए गुप्त काल के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन की मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।  गिनौरगढ़ का किला सीहोर (रातापानी अभयारण्य क्षेत्र) मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में (भोपाल के पास रातापानी वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी के वनों के भीतर पहाड़ी पर) स्थित है। रातापानी के परिदृश्य के भीतर स्थित गिनौरगढ़ का किला, एक स्वदेशी गोंड किलेबंद राजधानी का महत्वपूर्ण उदाहरण है। गोंड साम्राज्य के एक प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित यह किला, मजबूत प्राकृतिक सुरक्षा को किलेबंदी की व्यापक प्रणाली, शाही संरचनाओं, जलाशयों, 65 सीढ़ीदार कुओं (बावड़ियों) और चार झीलों के साथ जोड़ता है। इसकी त्रि-स्तरीय स्थानिक व्यवस्था और आसपास के वनीकृती पहाड़ी परिदृश्य के साथ एकीकरण इसे गोंड राजनीतिक संगठन, सैन्य योजना, वास्तुकला और स्वदेशी जल-प्रबंधन प्रणालियों को समझने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह : मुरैना मध्यप्रदेश के चंबल क्षेत्र के मुरैना जिले में बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह पड़वली और बटेश्वर क्षेत्रो में स्थित है। बटेश्वर, पदावली और ककरामठ मंदिर समूह मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र में प्रारंभिक मध्यकालीन नागर मंदिर वास्तुकला के क्षेत्रीय विकास का प्रतिनिधित्व करता है। मुख्य रूप से आठवीं से ग्यारहवीं शताब्दी के इन मंदिरों का यह समूह एक प्रगतिशील वास्तुशिल्प विकास को दर्शाता है। बटेश्वर में 200 से अधिक मंदिरों के बड़े क्लस्टर से लेकर, पदावली के समृद्ध नक्काशीदार वास्तुशिल्प तत्वों और ककरामठ के स्मारकीय स्वरूप तक। ये सभी स्थल मिलकर केंद्रीय भारत में क्षेत्रीय शिल्प कौशल, राजवंशों के संरक्षण, सूखी चिनाई (ड्राय-स्टोन मैसनरी) की तकनीकों और मंदिर रूपों व मूर्तिकला के विकास को दर्शाते हैं। उदयगिरि गुफाएँ : विदिशा मध्यप्रदेश के विदिशा शहर के पास बेतवा और धसन नदियों के बीच उदयगिरि गुफाएँ स्थित हैं। उदयगिरि गुफाएँ गुप्त काल की धार्मिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति से जुड़ी सबसे शुरुआती प्रमुख जीवित पवित्र भू-आकृतियों (सेक्रेड लैंडस्केप) में से एक हैं। यहाँ की 20 खुदी हुई गुफाएँ पाषाण-कृत मंदिरों, स्मारकीय मूर्तियों, शिलालेखों, आवागमन के मार्गों और प्राकृतिक स्थलाकृति को आपस में जोड़ती हैं, जिसमें प्रसिद्ध वराह राहत (प्रतिमा) वैष्णव धर्मशास्त्र, राजत्व और ब्रह्मांडीय व्यवस्था की एक अत्यंत महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति है। यहाँ हिंदू, जैन और अन्य धार्मिक तत्वों की उपस्थिति, साथ ही गुप्त साम्राज्य का संरक्षण, उदयगिरि को हिंदू पवित्र वास्तुकला के शुरुआती चरण और अधिक विकसित मंदिर परंपराओं की ओर संक्रमण को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाती है  यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में पहले ही शामिल हैं 15 स्थल यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में पहले से शामिल 15 प्रमुख स्थलों में साल 2025 के नवीनतम क्रमिक नामांकनों के तहत मौर्य मार्गों के साथ अशोक अभिलेख स्थल, चौसठ योगिनी मंदिर, उत्तर भारत के गुप्तकालीन मंदिर और बुंदेलों के महल-किलों का समूह शामिल हैं। इससे पहले साल 2024 में ग्वालियर किला, बुरहानपुर का खूनी भंडारा, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर, रामनगर (मंडला) के गोंड स्मारक और धामनार के ऐतिहासिक समूह को जोड़ा गया था। वहीं पूर्व के वर्षों में साल 2021 में नर्मदा घाटी का भेड़ाघाट-लामेताघाट व सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, साल 2019 में ओरछा का ऐतिहासिक समूह, साल 2014 में भारत के प्रतिष्ठित साड़ी बुनाई समूह तथा साल 1998 में मांडू के स्मारकों के समूह को इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान प्राप्त हुआ था। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड का सफल प्रयास मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड ने भारत के यूनेस्को विश्व धरोहर कार्यक्रम के तहत विचार के लिए कई महत्वपूर्ण विरासत संपत्तियों का प्रस्ताव रखा। जिसके तहत भारत के विश्व धरोहर मामलों के लिए नोडल एजेंसी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने राष्ट्रीय स्तर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इसके माध्यम से मध्य प्रदेश की चार धरोहरों में बाग गुफाओं के भित्ति चित्र, गिनौरगढ़ का किला, चंबल घाटी के मंदिरों का समूह (बटेश्वर, पदावली और ककरामठ), और उदयगिरि की गुफाओं को भारत की यूनेस्को टेंटेटिव (अस्थायी) सूची में शामिल किया गया है।यूनेस्को की टेंटेटिव सूची उन संपत्तियों की राष्ट्रीय सूची है जिन्हें भविष्य में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने की संभावना के रूप में देखा जाता है और यह नामांकन प्रक्रिया का एक आवश्यक प्रारंभिक चरण है।  

खेत से बाजार तक बदलेगा किसानों का सफर, ट्रेड शो में ब्रांडिंग और डिजिटल बिक्री का मंत्र

ग्रेटर नोएडा फसल तैयार करने के बाद किसान को बाजार में उसका सही मूल्य मिले, इसके लिए अब खेती के साथ ब्रांडिंग, पैकेजिंग और डिजिटल बिक्री पर भी जोर दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में सोमवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को इसी बदलते बाजार की तस्वीर दिखाई गई। एक्सपो मार्ट में आयोजित पश्चिम मैदानी कृषि जलवायु क्षेत्र के किसान मेले में मेरठ मंडल समेत पश्चिमी यूपी के सात जिलों के प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने एफपीओ को किसानों की सामूहिक शक्ति के रूप में विकसित कर उत्पादन लागत घटाने, उपज का बेहतर मूल्य हासिल करने और बड़े बाजार तक सीधी पहुंच बनाने के उपाय बताए। एक साथ खरीदेंगे तो घटेगी लागत, साथ बेचेंगे तो बढ़ेगी ताकत कृषि सूचना तंत्र के सुदृढ़ीकरण एवं कृषक जागरूकता कार्यक्रम के तहत आयोजित किसान मेले का शुभारंभ संयुक्त कृषि निदेशक (गुणवत्ता नियंत्रण) एवं एफपीओ के नोडल अधिकारी संतोष राय और संयुक्त कृषि निदेशक मेरठ मंडल स्मिता वर्मा ने किया। दोनों अधिकारियों ने कृषि गोष्ठी के साथ मेले में लगाए गए विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया। कार्यक्रम में मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबाद, हापुड़, बागपत, शामली और मुजफ्फरनगर के प्रगतिशील एवं उपलब्धि हासिल करने वाले किसान शामिल हुए। परियोजना निदेशक (तकनीकी) नीरज सुव्रत ने एफपीओ के जरिए किसानों को बाजार से जोड़ने की संभावनाओं पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसान समूह बनाकर अपनी उपज को एकत्र करने के साथ उसकी पैकेजिंग और ब्रांडिंग कर सकते हैं। इससे उत्पाद को बड़े खरीदारों और बाजार तक पहुंचाने का रास्ता आसान हो सकता है। किसानों को एफपीओ के जरिए बीज, खाद, कीटनाशक और कृषि यंत्रों की सामूहिक खरीद के फायदे भी बताए गए। थोक खरीद से लागत कम करने और सामूहिक बिक्री से बाजार में सौदेबाजी की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। एफपीओ के कारोबार से होने वाले लाभ में संगठन के विकास के लिए हिस्सा रखने और सदस्यों को लाभांश देने की व्यवस्था की भी जानकारी दी गई। दुकान से आगे ऑनलाइन बाजार में पहुंचेगी किसान की उपज* किसान मेले में डिजिटल कारोबार को लेकर भी किसानों को जानकारी दी गई। ओएनडीसी के उपाध्यक्ष प्रवीन चौधरी ने बताया कि एफपीओ ई-कॉमर्स के माध्यम से अपने उत्पादों को ऑनलाइन स्टोरफ्रंट पर सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। डिजिटल भुगतान, प्रचार और आपूर्ति व्यवस्था जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर किसान समूह अपने उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ा सकते हैं। सिद्धार्थ गौतम ने किसानों को उपज का बेहतर मूल्य हासिल करने और उत्पादन लागत कम करने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि बीज, खाद, कीटनाशक और कृषि यंत्रों की सामूहिक खरीद तथा उपज की सामूहिक बिक्री किसानों की बाजार क्षमता को मजबूत कर सकती है। उप कृषि निदेशक गौतमबुद्धनगर विवेक दुबे ने जिले में कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं और कृषक हित में कराए गए कार्यों की प्रगति प्रस्तुत की। उन्होंने विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों का आभार जताते हुए कृषि की तकनीकी जानकारी के साथ बाजार की नई व्यवस्थाओं को समझने और अपनाने पर जोर दिया। पश्चिमी यूपी के किसानों के लिए ट्रेड शो का यह मंच खेती से आगे बढ़कर उपज के कारोबार की पूरी श्रृंखला को समझने का अवसर बना। प्रदेश सरकार की कृषि नीति में किसानों को उत्पादन के साथ बाजार, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। किसान मेले में एफपीओ को इसी बदलाव की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने रखा गया।