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1965 का पटना विश्वविद्यालय: अनुशासन, बोटिंग क्लब और अशोक राजपथ की चाय में बसती थी छात्र जिंदगी

पटना  पटना विश्वविद्यालय को सिर्फ कक्षाओं, परीक्षाओं और डिग्रियों से समझना मुश्किल है। इसका असली संसार उन घंटों में भी बसता था, जो कक्षा में शिक्षक छात्र-छात्राओं को विषय के बारे में विस्तृत जानकारी देते थे। यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए शिक्षकों द्वारा दी गई जानकारी ही सबसे बड़ा दस्तावेज होता था। गंगा गंगा की ओर खुलती खिड़कियों से आती हवा, पुराने बरामदों में चलती बहसें, पुस्तकालय में देर तक खुली किताबों ने यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को आकार दिया। विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी पूंजी शायद उसके भवन नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी हजारों स्मृतियां हैं। पटना विवि के पूर्व छात्र और वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. आलोक कुमार ने यादें साझा की। बताया कि यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों में अनुशासन के साथ शिक्षकों के प्रति सम्मान बहुत था। पढ़ाई के दौरान कोई भी विद्यार्थी कक्षा से बाहर इधर-उधर नहीं घूम सकता था। इसके लिए सख्त मनाही थी। विद्यार्थी पुस्तकालय में बैठ कर पुस्तकों का अध्ययन करते थे। पटना विश्वविद्यालय में एडमिशन होना बड़ी बात थी 1965 में यहां मेरा नामांकन हुआ था। ज्यादातर छात्र-छात्राएं गांव देहात के होते थे। जो पारिवारिक रूप से कमजोर होते थे लेकिन पढ़ाई के मामले में इनका कोई जोर नहीं होता था। पटना विश्वविद्यालय में नामांकन होना ही बड़ी बात होती थी। अच्छे अंकों के आधार और प्रतियोगिता लेकर नामांकन होता था। यहां स्नातक करने वाले बच्चों का सपना सिविल सर्विस में जाने का होता था। पढ़ाई के साथ विद्यार्थी सिविल सेवा की तैयारी साथ में करते थे। इसका परिणाम हुआ कि प्रतिवर्ष यहां के छात्र-छात्राएं सिविल सेवा के लिए चयनित होकर विश्वविद्यालय का नाम बढ़ाते रहे। वहीं जो सिविल सेवा में नहीं गए वे प्रोफेसर बनते थे। खेल के प्रति रहता था उत्साह पढ़ाई के साथ यहां पढ़ने वाले बच्चों में खेल के प्रति काफी लगाव रहता था। उन दिनों फुटबाल काफी लोकप्रिय खेलों में से एक होता था। वैसे तो कालेज परिसर में टेनिस, बैंडमिंटन का भी महत्व था। यहां पर बोटिंग क्लब हुआ करता था। विश्वविद्यालय परिसर से गंगा नजदीक होने के कारण बच्चे कुशल प्रशिक्षकों के निर्देशन में गंगा की लहरों पर बोटिंग का आनंद उठाते थे। वहीं बच्चों के बीच वाद-विवाद प्रतियोगिता होती थी। इसके लिए बच्चों में काफी उत्साह होता था। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए बच्चे पूरी तैयारी करके आते थे। यहां पर वार्षिक खेलकूद काफी रोमांच और आनंद के साथ मनाया जाता था। इसके लिए काफी तैयारी होती थी। इस दौरान दानापुर से बिहार मिलिट्री का बैंड आता था। जीत के साथ बैंड धुन बजाता था। बच्चे भी अनुशासन के साथ कार्यक्रम का आनंद उठाते थे। वहीं एक वर्ष बाद प्रो. महेंद्र प्रसाद प्राचार्य बने। वे अनुशासन प्रिय व्यक्ति थे। जिस क्लास में शिक्षक देर से आते थे वे वहां जाकर पढ़ाने लगते थे। नोटिस बोर्ड पर सूचना दी जाती थी। कालेज का ऐसा माहौल था कि सभी शिक्षक और कर्मचारी समय से पहले आ जाते थे। पिंटू होटल का रसगुल्ला था लोकप्रिय उन दिनों पिंटू होटल में भोजन करना बड़ी बात होती थी। वहां का समोसा और रसगुल्ला काफी लोकप्रिय होता था। कालेज में पढ़ने वाले बच्चे अपना पैकेट मनी बचा कर यदा-कदा यहां समोसा और रसगुल्ला का आनंद उठाते थे। वहीं मनोरंजन के लिए उन दिनों शहर में छह सिनेमाघर हुआ करता था। रिजेंट, एलिफिस्टिन, पर्ल, वीणा, रुपक, अशोक आदि थे। कालेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं मनोरंजन के लिए सिनेमा का भी आनंद उठाते थे। ऐतिहासिक फिल्मों को देखने का आनंद कुछ और होता था। दशहरा में होता था सांस्कृतिक कार्यक्रम दशहरा के समय उन दिनों हर जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम की धूम रहती थी। गोविंद मित्रा रोड, लंगर टोली, हार्डिंग पार्क, पटना जंक्शन के सामने आदि स्थानों पर शास्त्रीय संगीत और नृत्य का शानदार आयोजन होता था। देश के नामचीन कलाकारों में पंडित बिरजू महाराज, गिरिजा देवी, लच्छू महाराज आदि नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुति से लोगों को पूरी रात आनंदित करते थे। दशहरा पर तीन से चार दिनों तक लगातार कार्यक्रम होता था। पूरा शहर जागता था। उन दिनों सुरक्षा व्यवस्था के साथ लोगों में एक दूसरे के प्रति भाईचारे और प्रेम का वातावरण था। मेले घूमने के दौरान महिलाएं परिवार के साथ रात भर घूमते थे। कहीं कोई घटना नहीं होती थी। उन दिनों रिक्शा यातयात का प्रमुख साधन हुआ करता था। मेले में पांच एवं 10 रुपये घंटे के हिसाब से रिक्शे की बुकिंग होती थी। रिक्शा वाला पूरी रात लोगों को मेले का सैर कराता था। अशोक राजपथ पर रहती थी चहल-पहल पटना विश्वविद्यालय की कहानी अशोक राजपथ के बिना अधूरी है। विश्वविद्यालय से निकलते ही सड़क का संसार जैसे परिसर का विस्तार बन जाता था। किताबों की दुकानें, चाय की प्यालियां, दोस्तों की मंडलियां और आने-जाने वाले विद्यार्थियों की भीड़। मानो अशोक राजपथ खुद एक खुली पाठशाला होती थी।किसी दुकान पर परीक्षा की तैयारी पर चर्चा होती तो कहीं साहित्य की नई किताब पर बहस। चाय के छोटे से गिलास के साथ बड़ी-बड़ी योजनाएं बनतीं। किसी को प्रशासनिक सेवा में जाना था, किसी को साहित्य में पहचान बनानी थी तो कोई शोध की दुनिया में जाना चाहता था। इन सपनों का कोई औपचारिक पाठ्यक्रम नहीं था, लेकिन विश्वविद्यालय जीवन उन्हें दिशा देता था। गंगा भी इस पूरे संसार की मौन साक्षी थी। शाम ढलते ही कई विद्यार्थी नदी किनारे पहुंच जाते। दिनभर की भाग दौड़ के बाद वहां बैठना, बातचीत करना और भविष्य के बारे में सोचना विद्यार्थी जीवन का हिस्सा था। गंगा की धारा और विश्वविद्यालय की हलचल के बीच जैसे एक पूरा शहर अपनी युवा ऊर्जा के साथ सांस लेता था।  

8th Pay Commission: कर्मचारियों-पेंशनर्स के लिए जरूरी खबर, सैलरी हाइक पर अभी नहीं हुआ फैसला

नई दिल्ली 8th सेंट्रल पे कमीशन (8th Central Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर अब इसकी आगामी बैठकों और राज्यों के दौरों पर है। आयोग ने अक्टूबर 2026 में मुंबई और बेंगलुरु में स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन का प्रोग्राम तय किया है। इसके अलावा कंसल्टेंट इंगेजमेंट गाइडलाइंस में बदलाव और जयपुर व चंडीगढ़ से जुड़े पुराने नोटिस भी आयोग के हालिया अपडेट का हिस्सा हैं। हालांकि, इन गतिविधियों को वेतन बढ़ोतरी या फिटमेंट फैक्टर के अंतिम ऐलान से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग की अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। प्रोफेसर पुलक घोष सदस्य और पंकज जैन मेंबर-सेक्रेटरी हैं। आयोग का मुख्य काम केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के पे, अलाउंसेस, पेंशन और दूसरी सेवा शर्तों की समीक्षा कर सरकार को अपनी सिफारिशें देना है। फिलहाल, आयोग अलग-अलग कर्मचारी संगठनों, यूनियनों, पेंशनर एसोसिएशनों और अन्य हितधारकों से सुझाव ले रहा है। मुंबई दौरा इस प्रॉसेस में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव है। आयोग 22 और 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई में स्टेकहोल्डर मीटिंग्स करेगा। योग्य कर्मचारी यूनियन, प्रतिनिधि संगठन, पेंशनर एसोसिएशन, फेडरेशन और अन्य संबंधित ग्रुप आयोग से मुलाकात के लिए एप्वाइंटमेंट रिक्वेस्ट भेज सकते हैं। इसके लिए 10 अक्टूबर 2026 तक आवेदन किया जा सकता है। बैठक का स्थान और विस्तृत कार्यक्रम बाद में जारी किया जाएगा। इससे पहले आयोग का बेंगलुरु दौरा 7 और 8 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। इसके लिए एप्वाइंटमेंट रिक्वेस्ट भेजने की अंतिम तारीख 18 सितंबर 2026 थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। इसी तरह जयपुर में 31 अगस्त और 1 सितंबर को प्रस्तावित बैठक तथा चंडीगढ़ में 16 से 18 सितंबर तक हुए प्रोग्राम भी स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन का हिस्सा थे। इन दौरों का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों की राय और सुझाव समझना है। आयोग ने 11 अगस्त 2026 को कंसल्टेंट की नियुक्ति से जुड़ी गाइडलाइन्स में भी आंशिक बदलाव किया था। यह एक प्रशासनिक अपडेट है और इसका सीधा मतलब कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन या अलाउंसेस में बदलाव नहीं है। इसी तरह अलग-अलग कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर, मिनिमम बेसिक पे या सैलरी हाइक को लेकर कई मांगें सामने आ सकती हैं, लेकिन इन्हें आयोग की अंतिम सिफारिश नहीं माना जाना चाहिए। फिलहाल, 8th पे कमीशन के ताजा अपडेट में किसी निश्चित फिटमेंट फैक्टर, मिनिमम बेसिक सैलरी या सैलरी हाइक की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। आयोग की राज्यवार बैठकें अभी कंसल्टेशन प्रॉसेस का हिस्सा हैं। आगे आयोग विभिन्न सुझावों और उपलब्ध आंकड़ों का अध्ययन करके अपनी सिफारिशें तैयार करेगा। इसके बाद सरकार इन सिफारिशों पर फैसला लेगी। इसलिए सोशल मीडिया या अन्य जगहों पर चल रहे वेतन बढ़ोतरी के आंकड़ों को आधिकारिक फैसला मानने से पहले सरकारी घोषणा का इंतजार करना जरूरी है।

IAS छोड़ने के बाद क्या करेंगी दिव्या मित्तल? 29 सितंबर सुबह 8:30 बजे करेंगी बड़ा खुलासा

लखनऊ उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की पूर्व जिलाधिकारी (DM) और चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया था। इसके 14 दिन बाद 14 सितंबर को उनका इस्तीफा स्वीाकर कर लिया गया। उन्होंने इसकी जानकारी एक्स हैंडल पर दी थी। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद सोशल मीडिया पर उनके भविष्य को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं, इन दावों पर विराम लगाते हुए दिव्या मित्तल ने अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है। जिसमें उन्होंने संकेत दिया है कि वह 29 सितंबर को सुबह अपने भविष्य के प्लान का एलान करने वाली हैं। सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे कयासों का किया जिक्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए पोस्ट में पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में उन तमाम अटकलों और कयासों का जिक्र किया, जिसको लेकर उनके इस्तीफे के बाद से कयास लगाए जा रहे थे। उन्होंने लिखा, "आगे क्या करना है? मैंने पढ़ा: बच्चे छोटे हैं। अब घर। अच्छा पैकेज मिलेगा। वापस विदेश। IAS पर किताब लिखी है। कोचिंग। टिकट पक्का हो गया होगा। राजनीति। 29 सितंबर, सुबह 8:30 बजे बताऊंगी।" दिव्या मित्तल के इस पोस्ट के बाद उनके अगले कदम को लेकर उत्सुकता काफी बढ़ गई है और लोग उन्हें आगे भविष्य के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं। कुछ लोगों ने लिखा है कि हमें इंतजार है। ऐसे में अब सभी 29 सितंबर को सुबह 8:30 बजे का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब दिव्या मित्तल स्वयं अपने अगले कदम का खुलासा करेंगी। कौन हैं पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल? गौरतलब है कि पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल का जन्म हरियाणा राज्य के रेवाड़ी जिले में हुआ है। दिव्या मित्तल ने आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की पढ़ाई की है। शादी के बाद वह अपने पति गगनदीप के साथ लाखों के पैकेज पर लंदन चली गईं। कुछ समय बाद वह लंदन की नौकरी छोड़ वापस अपने देश भारत लौट आईं। यहां आकर वह यूपीएससी की तैयारी में जुट गई। इसके बाद साल 012 में दिव्या मित्तल यूपीएससी ने क्रैक किया। उनका सेलेक्शन आईपीएस के लिए हुआ, लेकिन वह आईएएस बनना चाहती थी। दूसरे प्रयास में 2013 में आईएएस बन गईं। दिव्या मित्तल अपने कार्यकाल के दौरान मिर्जापुर, बस्ती, देवरिया जिले में डीएम रहीं। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारी संभाली।  

बेल्जियम से यूपी पहुंचा 200 टन का विशाल वेसल, 308 पहियों वाले ट्रक ने मचाई हलचल

लखनऊ  Balrampur News बेल्जियम देश से समुद्र के रास्ते भारत पहुंचे विशालकाय वेसल की देश भर में चर्चा है। हर किसी को इसके बारे में जानने की इच्छा है। लगभग 200 टन वजनी इस वेसल को 308 पहियों वाला ट्रक लेकर यूपी के बलरामपुर की तरफ बढ़ रहा है।  ये ट्रक जिस भी शहर से गुजर रहा है वहां इसे देखने वालों का हुजूम उमड़ रहा है। कोई सेल्फी ले रहा तो कोई वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहा है। आइए यहां जानते हैं कि इस ट्रक और इसपर लदे इस विशालकाय वेसल के बारे में पूरी डिटेल। कैसे भारत पहुंचा वेसल जानकारी के अनुसार, ये वेसल ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर उतरा और फिर इसे 308 पहियों वाले विशालकाय ट्रेलर पर क्रेन की मदद से रखा गया। इसके बाद ये ट्रक झारखंड और बिहार के रास्ते उत्तर प्रदेश पहुंचा। अब तक किन शहरों से होकर गुजरा वायरल ट्रक ओडिशा से शुरू हुई इस ट्रक की यात्रा झारखंड और बिहार से होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंची है। सफर के दौरान ये ट्रक झारखंड की राजधानी रांची के पास नगड़ी टोल प्लाजा और पिस्का रेलवे क्रॉसिंग से होते हुए गुजरा। इसके बाद इस ट्रक ने बिहार में प्रवेश किया जहां ये औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर के रास्ते आगे बढ़ा। आखिर में ये ट्रक अब यूपी में प्रवेश कर चुका है। जहां ये चंदौली और वाराणसी के रास्ते अपने गंतव्य बलरामपुर चीनी मिल की और बढ़ रहा है। रोजाना केवल 10 से 12 किलोमीटर की दूरी हो रही तय इस वेसल के भारी वजन को सड़क पर संतुलित करने के लिए ट्रक में 308 पहिये लगाए गए हैं। बताया जा रहा है कि अत्यधिक वजन के कारण यह महाट्रक रोजाना केवल 10 से 12 किलोमीटर की ही दूरी तय कर पा रहा है। इस ट्रक ने अभी तक के सफर में लगभग 2 करोड़ रुपए का डीजल इस्तेमाल किया है। किस काम आएगा ये 200 टन का वेसल बेल्जियम से आया ये 200 टन का बाहूबली वेसल बलरामपुर चीनी मिल से जुड़े एथनॉल प्लांट के लिए ले जाया जा रहा है। इस वेसल में वैक्यूम बॉयलर जैसे इंटस्ट्रियल बॉयलर उपकरण हैं। 308 पहियों वाले ट्रक के लिए बनाना पड़ा स्पेशल रूट इसका बड़ा आकार होने के कारण आम सड़कों से निकालने के लिए स्पेशल रूट बनाने की जरूरत पड़ी। कई शहरों में कई मार्गों को बंद करना पड़ा तो कहीं बिजली के खंभे और तारों को हटाना भी पड़ा। कैमूर में इसे निकालने के लिए पुल तोड़ने की भी जरूर पड़ी। इस ट्रक के साथ पुलिस प्रशासन की टीम भी लगातार चल रही है। बता दें कि ये ट्रक अब वाराणसी से होते हुए गाजीपुर की तरफ बढ़ रहा है और जल्दी ही बलरामपुर पहुंचाया जाएगा।  

28 सितंबर को 20 राज्यों में बारिश-आंधी का अलर्ट, 75 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

नई दिल्ली देश के पूर्वी और उत्तरी राज्यों में मानसून के रौद्र रूप के बीच मौसम विभाग ने एक बार फिर से टेंशन बढ़ाने वाला अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आज यानी 28 सितंबर को यूपी, दिल्ली, बिहार, पंजाब सहित 20 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 75 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज हवा के झोंके चलने की चेतावनी है। इस बीच पहाड़ी इलाकों में लैंड स्लाइड की भी चेतावनी जारी की गई है। अगर आप यात्रा का प्लान कर रहे हैं तो मौसम विभाग का अपडेट जरूर पढ़ लीजिए नहीं तो मुश्किलों में फंस सकते हैं। छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश में तेज आंधी लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकता है। वहीं, आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जिलों में खतरनाक बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस बीच मछुआरों और किसानों को समुद्री इलाकों से दूर हटकर सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए कहा गया है। पश्चिम मध्य बंगाल में अगले 24 घंटे फिर से भारी पड़ने वाले हैं। वहीं, बंगाल की खाड़ी में पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तक एक डीप डिप्रेशन बना हुआ है जिससे पूर्वी भारत के लोगों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। इसके अलावा दक्षिण छत्तीसगढ़ और ओडिशा में डीप डिप्रेशन की वजह से मौसम बिगड़ने वाला है। उत्तर-पूर्वी असम और आसपास के इलाकों में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में एक सुस्पष्ट दाब क्षेत्र में बदल गया। तो चलिए आज हम आपलोगों को बताते हैं कि आज यानी 28 सितंबर को देश के अन्य राज्यों में मौसम का हाल कैसा रहेगा। इसके अलावा हम जिलावार भी मौसम का हाल बता रहे हैं देश के 20 राज्यों में प्रचंड बारिश-आंधी की चेतावनी मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक आज यानी 28 सितंबर को देश के 20 राज्यों यूपी, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, अंडमान-निकोबार और केरल में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी कर दिया है। इस बारिश के साथ 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी है। दिल्ली में आज मौसम कैसा रहेगा दिल्ली(28 सितंबर-बारिश-आंधी का अलर्ट): मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक दिल्ली में आज यानी 28 सितंबर को मध्यम बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की चेतावनी है। वहीं, दिल्ली में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस जाएगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। यूपी में आज मौसम कैसा रहेगा यूपी(28 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): बिजनौर, रामपुर, बरेली, मोरादाबाद, लखीमपुर खीरी, बागपत, श्रावस्ती, सहारनपुर, बहराइच, सिद्धार्थ नगर, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, गाजीपुर, मथुरा, अलीगढ़, आगरा, कानपुर, प्रयागराज और अंबेदकर नगर में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज हवा के झोंके चलेंगे। । वहीं, इस दौरान लखनऊ में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा। बिहार में आज मौसम कैसा रहेगा बिहार(28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): पश्चिमी चंपारण, पटना, भोजपुर, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, औरंगाबाद, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, भागलपुर, मुंगेर, बेगूसराय और बांका में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की संभावना है। वहीं, पटना में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा। झारखंड में आज मौसम कैसा रहेगा झारखंड(28-29 सितंबर-तेज बारिश-तूफान की चेतावनी): गुमला, गढ़वा, सिमडेगा, रांची, पश्चिम सिंहभूम, धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, साहेबगंज, रामगढ़, हजारीबाग, जमशेदपुर और पलामू में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 70 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चलेगी। वहीं, रांची में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा। उत्तराखंड में आज मौसम कैसा रहेगा उत्तराखंड (28 सितंबर-बारिश-आंधी का अलर्ट): हरिद्वार, चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, पिथौरागढ, पौड़ी गढ़वाल और नैनीताल में प्रचंड बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चलेगी। वहीं, देहरादून में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रहेगा। हिमाचल में आज मौसम कैसा रहेगा हिमाचल (28-29 सितंबर-बारिश-तूफान की चेतावनी): मंडी, सोलन, बिलासपुर, किन्नौर, लाहौल-स्पीति, सिरमौर, कुल्लू और मनाली में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे। वहीं, मनाली में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। जम्मू-कश्मीर में आज मौसम कैसा रहेगा जम्मू-कश्मीर (28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की संभावना): राजौरी, बारामूला, गांदरबल, डोडा, कठुआ और सांबा में मध्यम से भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी की चेतावनी है। वहीं, श्रीनगर में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा। पश्चिम बंगाल में आज मौसम कैसा रहेगा पश्चिम बंगाल(28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): पुरबा मेदिनीपुर, दार्जिलिंग, हावड़ा, नादिया, कोलकाता, अलीपुरद्वार, दुर्गापुर और बीरभूम में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे। वहीं, कोलकाता में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस पर जाएगा। पंजाब में आज मौसम कैसा रहेगा पंजाब (28 सितंबर-भारी बारिश और आंधी की संभावना): पठानकोट, लुधियाना, चंडीगढ़, जालंधर, मोगा, मनसा,कपूरथला और पटियाला में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलेगी। राजस्थान में आज मौसम कैसा रहेगा राजस्थान (28 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): … Read more

सऊदी अरब के तेल निर्यात पर भी असर, होर्मुज संकट से 16-17 मिलियन बैरल की सप्लाई बाधित होने का दावा

नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में पिछले सात महीनों से जारी युद्ध ने अब दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब को भी अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। होर्मुज स्ट्रेट 28 फरवरी से बंद है, जबकि 10 सितंबर को ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब के कच्चे तेल के निर्यात का पश्चिमी रास्ता भी बंद हो गया है। इन रुकावटों के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर 109.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, अभी ये 104.2 डॉलर पर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' पर हस्ताक्षर करने के बाद सप्लाई में रुकावट और बढ़ सकती है। ट्रंप ने यूएन में कहा कि अमेरिकी कांग्रेस चुनावों के बाद ईरान के पास या तो पूरी तरह खत्म होने या फिर डील करने का विकल्प है। सात दिनों के भीतर ही ईरान ने संकेत दिया कि वह डील करना पसंद करेगा। 16-17 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है सप्लाई संकट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से पहले दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती थी। इसमें करीब 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल और 50 लाख बैरल पेट्रोलियम उत्पाद शामिल थे। होर्मुज के रास्ते को आंशिक रूप से बायपास करने के लिए सऊदी अरब ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए करीब 40 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल निर्यात कर रहा था। वहीं, यूएई हबशन-फुजैराह पाइपलाइन के जरिए करीब 15 लाख बैरल प्रतिदिन तेल बाहर भेज रहा था। दोनों देश होर्मुज से बाहर तेल पहुंचाने के लिए शटल सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे, जहां उसे दूसरे जहाजों में ट्रांसफर कर आगे भेजा जा सकता था। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के बंद होने से कच्चे तेल की सप्लाई में कम से कम 13-14 मिलियन बैरल प्रतिदिन की रुकावट आ सकती है। रूस अभी हर दिन लगभग 3.5 मिलियन बैरल तेल एक्सपोर्ट करता है। अगर ग्राहम एक्ट लागू किया जाता है और जिन देशों को टारगेट किया गया है, वे मान जाते हैं, तो ग्लोबल ऑयल सप्लाई में रुकावट 16-17 मिलियन बैरल प्रति दिन तक बढ़ सकती है। इस कमी को पूरा करने के लिए कोई दूसरा जरिया नहीं है। LNG और पेट्रोलियम उत्पादों पर भी असर इस रुकावट का असर सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और एनएनजी पर भी पड़ेगा। एलएनजी को करीब -163 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाता है और समुद्र के बीच इसे आसानी से दूसरे जहाज में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। भारत सरकार ने ग्राहम एक्ट को लेकर कहा है कि इसके प्रभाव सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ेगा। मौजूदा हालात को देखते हुए यह चिंता और महत्वपूर्ण हो गई है। अमेरिका में भी बढ़ी कीमतों की मार ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी से तेहरान पर दबाव तो बनता है, लेकिन इससे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों पर भी असर पड़ रहा है। इससे ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगातार बंद रखने के रुख के और मजबूत होने की आशंका है। अमेरिका में भी इसका असर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। 4.30 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई हैं, जो 4 डॉलर प्रति गैलन से अधिक है। जबकि डीज़ल की कीमतें 6.75 डॉलर प्रति गैलन तक बढ़ गई हैं, जिससे चुनावी साल में खेती-बाड़ी के क्षेत्र पर असर पड़ रहा है। ग्राहम एक्ट लागू करने से न सिर्फ उन देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान हो सकता है जिन्हें निशाना बनाया गया है, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी नुकसान हो सकता है। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ने से अमेरिका में भी कीमतें बढ़ेंगी। अमेरिका के बेंचमार्क WTI की कीमत पहले ही 27 फरवरी को 67.02 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर अब 92.41 डॉलर हो गई है। यमन में सऊदी समर्थित बलों को झटका इस बीच यमन में सऊदी समर्थित बलों को भी नुकसान उठाना पड़ा है। हूतियों ने मोचा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया है और पेरिम द्वीप पर भी नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इसके अलावा सऊदी अरब के सीमावर्ती शहरों और रियाद पर भी हमले किए गए हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के सीधे सैन्य हस्तक्षेप के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया है। अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और फ्रांस का समर्थन फिलहाल खुफिया जानकारी और लॉजिस्टिक सहायता तक सीमित बताया गया है। तुर्की और पाकिस्तान ने भी सऊदी अरब के समर्थन में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट हुआ था। इससे पहले 2015 में भी पाकिस्तान ने हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब के सैन्य अभियान में सीधे हस्तक्षेप से इनकार किया था। भारत पर क्यों बढ़ सकता है दबाव? भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, लेकिन उसने यह खरीद तब की थी जब अमेरिका ने कोई प्रतिबंध नहीं लगाया था। बाइडेन प्रशासन की 'प्राइस कैप' (कीमत की सीमा) पॉलिसी के तहत रूसी कच्चा तेल खरीदने की इजाजत थी, लेकिन छूट के साथ। हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने भी समय-समय पर रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए लाइसेंस दिए थे। यह कानून भारत को तब निशाना बना रहा है जब उसने अमेरिकी तेल और गैस की खरीद बढ़ा दी है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान, भारत ने 8.2 अरब डॉलर का रूसी कच्चा तेल आयात किया। इस साल अगस्त में अमेरिका LNG आयात का सबसे बड़ा स्रोत भी बनकर उभरा है। पश्चिम एशिया संकट का असर भारत के लिए सीधे तौर पर भी दिख रहा है। भारत के क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत 26 फरवरी को 70.61 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 123.67 डॉलर प्रति बैरल बताई जा रही है। इसी अवधि में स्पॉट एलएनजी की कीमतों में करीब 150 फीसदी की वृद्धि हुई है। कतर से लंबे समय तक होने वाली सप्लाई बंद होने के बाद से भारत की खरीद में स्पॉट LNG का हिस्सा बढ़ गया है। ऐसे में लंबे समय तक ऊंची ऊर्जा कीमतें भारत के आयात बिल, परिवहन लागत और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। राजनीतिक समाधान से ही राहत की उम्मीद जब … Read more

737 MAX विमानों में सॉफ्टवेयर खामी का खुलासा, FAA ने शुरू की सुरक्षा जांच

 वॉशिंगटन  विमान बनाने वाली अमेरिकी कंपनी बोइंग के 737 MAX विमानों में सॉफ्टवेयर गड़बड़ी का पता चला है। इसकी वजह से लैंडिंग के दौरान पायलटों को ऑटोमेटेड फ्लाइट गाइडेंस नहीं मिल पाता है। कंपनी के डॉक्यूमेंट्स का हवाला देते हुए वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट दी है कि यह समस्या कॉकपिट सॉफ्टवेयर अपडेट से जुड़ी है और तब हो सकती है जब पायलट मिस्ड अप्रोच (लैंडिंग की कोशिश नाकाम होने) के बाद विमान का तय रूट बदलते हैं। ऐसी स्थिति में अगली बार लैंडिंग की कोशिश के दौरान ऑटोमेटेड नेविगेशन फीचर काम करना बंद कर सकता है। बोइंग ने क्या कहा? बोइंग ने कहा कि उसने पिछले महीने ही ऑपरेटर्स को इस समस्या के बारे में बता दिया था और वह इसके स्थायी समाधान पर काम कर रही है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को भेजे एक ईमेल बयान में बोइंग ने कहा, "हमने ऑपरेटर्स के साथ ऐसी स्थितियों को सुरक्षित रूप से संभालने के लिए मौजूदा पायलट प्रक्रियाओं को मजबूत करने वाली जानकारी साझा की। हमारे इंजीनियर इस समस्या को हमेशा के लिए ठीक करने के लिए एक सॉफ्टवेयर अपडेट पर काम कर रहे हैं।" फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) सुरक्षा से जुड़ी संभावित समस्या की समीक्षा कर रहा है। एफएए ने कहा कि उसे कुछ 737 MAX विमानों में लगे फ्लाइट कंप्यूटर के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट से जुड़ी समस्या के बारे में जानकारी है। एजेंसी ने कहा, "एफएए एक सुधारात्मक कार्रवाई समीक्षा बोर्ड बुलाएगा और अगर सुरक्षा से जुड़ी कोई चिंता सामने आती है तो तुरंत कार्रवाई करेगा।" एफएए, बोइंग और एयरलाइंस अब यह पता लगा रहे हैं कि प्रभावित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कितनी बड़े पैमाने पर हो रहा है और क्या इस समस्या से सुरक्षा को कोई व्यापक खतरा है। विमानों की डिलीवरी पर रोक लगाने की मांग वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, साउथवेस्ट एयरलाइंस और यूनाइटेड एयरलाइंस ने बोइंग से कहा है कि वे उस सॉफ्टवेयर वाले नए 737 MAX विमानों की डिलीवरी रोक दें, जिनमें यह समस्या है। इसके बजाय उन्होंने पुराने सॉफ्टवेयर वर्शन वाले विमानों की मांग की है। इस नई समस्या के कारण MAX विमानों की जांच और बढ़ गई है। अभी यह साफ नहीं है कि इस सॉफ्टवेयर वाले कितने विमान अभी उड़ान भर रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब बोइंग के 737 MAX प्रोग्राम की रेगुलेटरी और सुरक्षा के लिहाज़ से कड़ी जांच हो रही है।

देशभर में निकोटीन पाउच पर शिकंजा, अवैध बिक्री रोकने राज्यों को भेजा गया पत्र

नई दिल्ली देशभर में खुलेआम बिक रहे 'निकोटीन पाउच' को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। बिना मंजूरी के ऑनलाइन और दुकानों पर निकोटीन पाउच बेचने के मामलों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र ने सभी राज्यों को आधिकारिक पत्र भेजा है। सरकार ने इन अवैध उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने, इन्हें जब्त करने और बेचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी के अनुसार, ये निकोटीन पाउच सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह हैं। इन पैकेटों में अत्यधिक मात्रा में लत लगाने वाला निकोटीन होता है। बच्चों को जल्दी लग जाती है लत बता दें कि सबसे बड़ी चिंता यह है कि ये बच्चों तक आसानी से पहुंच रहे हैं, जिससे कम उम्र में ही युवाओं को इसकी खतरनाक लत लगने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए सलाहकार बोर्ड ने साफ सिफारिश की है कि निकोटीन के ऐसे किसी भी नए उत्पाद को बाजार में बेचने की अनुमति न दी जाए। गौर करने वाली बात यह है कि लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि अगर सिगरेट छोड़ने के लिए 'निकोटीन गम' का इस्तेमाल किया जा सकता है, तो 'निकोटीन पाउच' पर पाबंदी क्यों है? आइए हम आपको बताते हैं। क्या है निकोटीन गम और निकोटीन पाउच में फर्क? इस बात को ऐसे समझिए मंजूरी प्राप्त निकोटीन गम शरीर को निकोटीन की एक नियंत्रित और सुरक्षित खुराक देते हैं, जिससे धीरे-धीरे सिगरेट या तंबाकू की लत छूटने में मदद मिलती है। अमेरिकी दवा नियामक संस्था (FDA) ने इनकी सुरक्षा और असरशीलता की पूरी जांच करने के बाद इन्हें सिगरेट छुड़ाने के एक वैध इलाज के तौर पर मंजूरी दी है। इसके साथ यदि डॉक्टर या काउंसलर की सलाह ली जाए, तो सिगरेट छोड़ने की सफलता दर दोगुनी से भी ज्यादा हो जाती है। निकोटीन पाउच असुरक्षित और गैर-कानूनी क्यों? इसके ठीक उलट, निकोटीन पाउच में  के इन पाउच में भी निकोटीन होता है, लेकिन इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि ये सिगरेट छुड़ाने में असरदार हैं। यही वजह है कि अमेरिकी एफडीए या अन्य प्रमुख स्वास्थ्य नियामकों ने इन्हें इलाज के रूप में कोई मंजूरी नहीं दी है।  

अस्पताल पर हमले के बाद मलबे में दबे थे मोजतबा खामेनेई? ईरानी धर्मगुरु के दावे से हलचल

तेहरान 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हुए भीषण अमेरिकी और इजरायली हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की कमान संभालने वाले नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (56) को लेकर एक और सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य और वरिष्ठ धर्मगुरु मोहसिन हैदरी ने कतरी टीवी चैनल 'अल अरबी' को दिए इंटरव्यू में दावा किया है कि शुरुआती हमले में घायल होने के बाद मोजतबा को इलाज के लिए तेहरान के एक अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन इसके बाद तीन अस्पतालों को निशाना बनाया गया और मोजतबा को तीसरी बार मलबे से जिंदा निकाला गया। इस खुलासे के बाद 56 साल के नए सुप्रीम लीडर की सेहत, उनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति और उनके सीक्रेट लोकेशन को लेकर दुनिया भर में फिर से चर्चा छिड़ गई है। अस्पताल पर बमबारी के बाद मलबे से बचाया गया ईरानी धर्मगुरु मोहसिन हैदरी के अनुसार, 28 फरवरी को अली खामेनेई के तेहरान स्थित परिसर पर हुए हमले में मोजतबा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हैदरी ने बताया, "जब दुश्मनों को पता चला कि वे घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं, तो तेहरान के तीन अलग-अलग अस्पतालों पर बमबारी की गई। मोजतबा खामेनेई तीसरे अस्पताल में मौजूद थे और उन्हें मलबे के नीचे से बाहर निकाला गया।" इस हमले के बाद से ही मोजतबा किसी अज्ञात स्थान पर चले गए हैं और तब से अब तक न तो उन्हें सार्वजनिक रूप से देखा गया है और न ही उनका कोई ऑडियो-वीडियो संदेश जारी हुआ है। गुप्त कमरे में वोटिंग और 8 मार्च का चुनाव असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का सचिवालय खुद अमेरिकी और इजरायली हमलों का शिकार बना था, जिसमें 8 लोग मारे गए थे और नए सुप्रीम लीडर से जुड़ी कई गोपनीय रिपोर्ट जलकर खाक हो गई थीं। हमले के बाद असेंबली के सदस्यों को बिना जगह बताए एक गुप्त कमरे में बुलाया गया। वहां सदस्यों ने कागज की पर्चियों पर अपने वोट लिखे। मोहसिन हैदरी ने बताया कि उन्होंने ही सबसे पहले मोजतबा खामेनेई के नाम का प्रस्ताव रखा था, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अली खामेनेई के बेटे को चुनने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी थी। मोजतबा को 59 में से 50 वोट मिले, जबकि 8 वोट अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को पड़े और 1 सदस्य ने मतदान में भाग नहीं लिया। हैदरी के मुताबिक, मोजतबा को खुद भी यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें चुना जा रहा है। उन्हें टीवी पर आधिकारिक ऐलान देखने के बाद ही अपने सुप्रीम लीडर बनने का पता चला। क्या वाकई जिंदा और स्वस्थ हैं मोजतबा खामेनेई? मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अमेरिका और ईरान की ओर से अलग-अलग विरोधी दावे किए जा रहे हैं। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वे मानते हैं कि मोजतबा मरे नहीं हैं, लेकिन वे बेहद गंभीर रूप से घायल और अधमरे हो चुके हैं। ट्रंप के मुताबिक उनके शरीर का बायां हिस्सा (हाथ और पैर) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान न्यू यॉर्क पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में इन दावों को खारिज किया। पेजेशकियान ने दावा किया कि उन्होंने हाल ही में मोजतबा खामेनेई के साथ 7 घंटे लंबी बैठक की है और वे पूरी तरह से स्वस्थ और शासन चलाने में सक्षम हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता संभालने से पहले किसी भी औपचारिक पद पर न रहने वाले और "शैडो मैन" कहे जाने वाले मोजतबा खामेनेई की लंबे समय से जारी गुमनामी ईरान के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संशय को और बढ़ा रही है।

जिस लेफ्ट से दशकों तक लड़ीं ममता, अब उसी से बातचीत; SIR मुद्दे पर साथ आने की तैयारी

नई दिल्ली ममता बनर्जी की राजनीति एक ही सूत्र पर चलती दिखती है। जरूरत पड़ी तो भाजपा के साथ खड़ी हो गईं, जरूरत पड़ी तो कांग्रेस के साथ चली गईं। अब जरूरत पड़ने पर लेफ्ट की ओर हाथ बढ़ा रही हैं। बंगाल में दशकों तक लेफ्ट को अपना सबसे बड़ा दुश्मन बताने वाली नेता आज उसी लेफ्ट से बात कर रही हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया। सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने चुनाव आयोग और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के मुद्दे पर विपक्षी नेताओं को पत्र लिखा। पत्र में संयुक्त रणनीति बनाने की बात कही गई। इसके बाद ममता बनर्जी ने उनसे संपर्क किया। दोनों ने फोन पर बात की। चर्चा विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की संभावना पर हुई। सेरामपुर की जनसभा में ममता बनर्जी ने कहा कि अब यह देखने की जरूरत नहीं कि कौन लाल है, कौन नीला है या कौन पीला है। अब हम सब एक हैं। उन्होंने 30 सितंबर की प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक बैठक का भी जिक्र किया और विपक्षी पार्टियों से एकजुट होने को कहा। बयान साफ है। रंग अब मायने नहीं रखते। लेकिन बंगाल की राजनीति में यह बात नई है। तृणमूल कांग्रेस बनी ही लेफ्ट को हराने के वादे पर थी। ममता बनर्जी सालों तक सीपीआई(एम) की सबसे बड़ी विरोधी रहीं। अब वही नेता लेफ्ट के साथ बैठने को तैयार हैं। लेफ्ट विरोध से बनी पहचान बंगाल में ममता बनर्जी की राजनीतिक पहचान लेफ्ट फ्रंट के विरोध से बनी। 1998 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ी और तृणमूल कांग्रेस बनाई। इसके बाद पार्टी लेफ्ट की मुख्य चुनौती बन गई। 2011 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल-कांग्रेस गठबंधन ने 34 साल पुरानी लेफ्ट सरकार को हराया। ममता मुख्यमंत्री बनीं। लेफ्ट को भारी हार मिली। उसके बाद लंबे समय तक ममता बनर्जी लेफ्ट को बंगाल की तरक्की में सबसे बड़ी रुकावट बताती रहीं। सीपीआई(एम) तृणमूल पर हिंसा, मौकापरस्ती और असहिष्णुता के आरोप लगाती रही। दोनों पक्ष सड़क से विधानसभा तक एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते रहे। अब उन्हीं दो ताकतों को साथ आने के लिए कहा जा रहा है। पुराने आरोपों का कोई सार्वजनिक हिसाब नहीं हुआ। दशकों की दुश्मनी कैसे खत्म हुई, इसका कोई साफ जवाब भी नहीं दिया गया। जब बंगाल में लेफ्ट पर हमला करना होता है, पुराने आरोप काम आते हैं। जब बड़े विपक्षी मंच की जरूरत होती है, तो लाल, नीला और पीला रंग एक हो जाते हैं भाजपा के साथ भी गईं, कांग्रेस के साथ भी राष्ट्रीय राजनीति में ममता बनर्जी का सफर बार-बार रुख बदलने का रहा है। 1999 में तृणमूल भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल हुई। ममता रेल मंत्री बनीं। 2001 में एनडीए छोड़ दिया। 2003 में वाजपेयी सरकार में वापस आईं। 2004 में कोयला और खान मंत्री रहीं। 2009 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-2 सरकार में शामिल हुईं और फिर रेल मंत्री बनीं। 2012 में मल्टी-ब्रांड रिटेल में एफडीआई, डीजल की कीमतें बढ़ाने और एलपीजी सब्सिडी सीमित करने जैसे मुद्दों पर समर्थन वापस ले लिया। यानी भाजपा कभी गठबंधन साथी रही, कभी दुश्मन। कांग्रेस कभी सहयोगी रही, कभी निशाना। लेफ्ट कभी मुख्य दुश्मन था, अब विपक्षी एकता के नाम पर उससे संपर्क हो रहा है। लेफ्ट के सामने उलझन सीपीआई(एम) ने साफ कहा है कि यह तृणमूल के साथ चुनावी गठबंधन नहीं है। पार्टी इसे चुनाव आयोग और एसआईआर जैसे मुद्दों पर विपक्ष को जोड़ने की कोशिश बता रही है। लेकिन बंगाल में लेफ्ट के कार्यकर्ताओं के लिए यह आसान नहीं। दशकों से वे तृणमूल के खिलाफ लड़ते रहे हैं। ऐसे में किसी भी सहयोग से उनके समर्थकों में भ्रम फैल सकता है। पार्टी के वैकल्पिक राजनीति के दावे पर भी असर पड़ सकता है। सीपीआई(एम) नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा है कि लेफ्ट का भाजपा विरोध नया नहीं है। पार्टी अकेले भी भाजपा से लड़ती रही है। उनके बयान से साफ है कि बंगाल लेफ्ट तृणमूल के साथ किसी समझ को लेकर सतर्क है। यह सतर्कता स्वाभाविक है। तृणमूल की पहचान लेफ्ट को हराकर बनी थी, उसके साथ हाथ मिलाकर नहीं। जो पार्टी खुद को लेफ्ट शासन का विकल्प बताती थी, अब लेफ्ट का सहयोग मांग रही है क्योंकि उसे बड़े राजनीतिक कवर की जरूरत है। शुभेंदु अधिकारी का हमला बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस नए समीकरण पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो पार्टी कभी सीपीएम के खिलाफ लड़ती थी, अब उसी की दोस्त बन रही है। तृणमूल कांग्रेस का जन्म सीपीएम के लंबे शासन के खिलाफ हुआ था। आज वही सीपीएम उसकी राजनीतिक साझेदार बन गई है। इस दौरान उन्होंने विधानसभा की एक घटना का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, वोटिंग के दौरान तृणमूल के एक हिस्से और सीपीआई(एम) के अकेले विधायक का रुख एक जैसा रहा। उन्होंने इसे दोनों पक्षों के बीच बनती समझ का संकेत बताया। सिद्धांत या मौजूदा जरूरत? अभी तृणमूल और सीपीआई(एम) के बीच कोई पक्का चुनावी गठबंधन घोषित नहीं हुआ है। बातचीत हो रही है। चुनिंदा मुद्दों पर साथ काम करने की अपील की जा रही है। लेकिन बड़ा संदेश पहले से साफ है। ममता बनर्जी की राजनीति में कल के सिद्धांत आज की जरूरत के हिसाब से बदल सकते हैं। जब भाजपा चाहिए थी, एनडीए में गईं। जब कांग्रेस चाहिए थी, यूपीए में गईं। जब लेफ्ट को हराना था, एंटी-लेफ्ट राजनीति को आंदोलन का आधार बनाया। अब बड़े विपक्षी मंच की जरूरत है, तो लेफ्ट के साथ बैठने को तैयार हैं। यह ममता बनर्जी की सुविधा की राजनीति का एक और अध्याय है। इसमें वफादारी बदलती है, दुश्मन साथी बन जाते हैं और सत्ता की जरूरत के हिसाब से विचारधारा को ढाल लिया जाता है।