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PF ट्रांसफर की टेंशन खत्म, EPFO ने शुरू की ऑटोमैटिक सुविधा; आवेदन की जरूरत नहीं

नई दिल्ली नौकरी बदलने पर पुरानी कंपनी के प्रोविडेंट फंड (PF) का पैसा नए खाते में ट्रांसफर कराने के लिए अब आपको अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने आधार से जुड़े यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) वाले पात्र सदस्यों के लिए पीएफ बैलेंस अपने आप ट्रांसफर करने की सुविधा शुरू की है. यानी नई कंपनी में नौकरी शुरू होने और जरूरी जानकारी दर्ज होने के बाद पुराने पीएफ खाते का पैसा अपने आप नए खाते में ट्रांसफर हो सकेगा।  इस बदलाव का सीधा फायदा उन कर्मचारियों को मिलेगा, जो समय-समय पर नौकरी बदलते रहते हैं. पहले पीएफ ट्रांसफर कराने के लिए अलग से रिक्वेस्ट डालनी पड़ती थी और कई बार प्रक्रिया पूरी होने में समय लगता था. अब EPFO का मकसद इस काम को आसान बनाना और कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत को एक जगह बनाए रखना है. आइए, समझते हैं कि नया नियम कैसे काम करेगा और आपको क्या करना होगा।  पहले नौकरी बदलने पर क्या होता था? पुरानी व्यवस्था में नौकरी बदलने के बाद कर्मचारी को अपनी नई कंपनी में UAN की जानकारी देनी पड़ती थी. इसके बाद नए पीएफ खाते को पुराने खाते से जोड़ने और पैसा ट्रांसफर कराने के लिए अलग से रिक्वेस्ट डालनी पड़ती थी. यह ट्रांसफर रिक्वेस्ट EPFO के पोर्टल के जरिए ऑनलाइन की जा सकती थी. कुछ मामलों में ऑफलाइन प्रोसेस का विकल्प भी उपलब्ध था।  इसके बाद नियोक्ता (Employer) और EPFO की ओर से जरूरी जांच पूरी की जाती थी. प्रक्रिया पूरी होने पर पुराने खाते का पैसा नए खाते में ट्रांसफर होता था. इस दौरान जानकारी में गड़बड़ी या दूसरी वजहों से देरी भी हो सकती थी. बार-बार नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों के लिए अलग-अलग पीएफ खातों का रिकॉर्ड संभालना भी मुश्किल हो जाता था।  नए सिस्टम में कैसे होगा PF ट्रांसफर? EPFO ने अपने सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सर्विसेज (CITES) प्लेटफॉर्म के जरिए पीएफ ट्रांसफर की प्रक्रिया को आसान बनाया है. इसके तहत आधार से जुड़े UAN वाले पात्र सदस्यों का पीएफ बैलेंस अपने आप ट्रांसफर किया जा सकेगा. इसे तीन चरणों में समझिए… स्टेप 1: नई कंपनी में जॉइनिंग के समय अपना मौजूदा UAN दें. नौकरी बदलने पर नया UAN बनवाने के बजाय उसी UAN का इस्तेमाल करना जरूरी है. स्टेप 2: नई कंपनी की ओर से आपकी जॉइनिंग और पीएफ से जुड़ी जरूरी जानकारी EPFO के रिकॉर्ड में दर्ज की जाएगी. स्टेप 3: पात्रता की शर्तें पूरी होने पर पुराने पीएफ खाते का बैलेंस नए खाते में अपने आप ट्रांसफर हो सकेगा. इसके लिए अलग से ऑनलाइन या ऑफलाइन ट्रांसफर रिक्वेस्ट डालने की जरूरत नहीं होगी. ध्यान रखें कि यह सुविधा आधार से जुड़े UAN और संबंधित पात्रता शर्तों पर लागू होती है. इसलिए यह सुनिश्चित कर लें कि आपका UAN आधार से जुड़ा है और आपकी जानकारी सही है. एक UAN रखने से क्या फायदा होगा? नौकरी बदलने पर कर्मचारी का UAN वही रहेगा, जबकि नई कंपनी के साथ नया पीएफ खाता जुड़ सकता है. ऑटोमैटिक ट्रांसफर की सुविधा से पुराने खाते में जमा रकम को नए खाते में लाना आसान होगा. इससे कर्मचारियों को कई फायदे मिल सकते हैं. कम कागजी कार्रवाई: पीएफ ट्रांसफर के लिए बार-बार अलग आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. बचत का बेहतर हिसाब: पुरानी नौकरी में जमा पीएफ की रकम नए खाते में आने से कुल बचत को समझना आसान होगा. सर्विस रिकॉर्ड बनाए रखने में मदद: अलग-अलग नौकरियों का रोजगार रिकॉर्ड एक ही UAN के तहत देखा जा सकेगा. समय की बचत: ट्रांसफर के लिए अलग से अनुरोध करने और उसकी स्थिति का इंतजार करने की जरूरत कम होगी. हालांकि, पीएफ ट्रांसफर और अंतिम निकासी यानी फाइनल सेटलमेंट अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. ऑटोमैटिक ट्रांसफर की सुविधा का मतलब यह नहीं है कि हर तरह का क्लेम भी अपने आप मंजूर हो जाएगा. अपना PF और सर्विस रिकॉर्ड कैसे चेक करें? अगर आपने हाल में नौकरी बदली है, तो यह देखना जरूरी है कि आपकी नई नौकरी और पीएफ खाते की जानकारी EPFO के रिकॉर्ड में सही दर्ज है या नहीं. इसके लिए इन चरणों का पालन करें…     EPFO के यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर जाएं.     अपने UAN और पासवर्ड की मदद से लॉग इन करें.     जरूरत पड़ने पर OTP के जरिए सत्यापन पूरा करें.     पोर्टल पर उपलब्ध सर्विस हिस्ट्री सेक्शन में जाएं.     यहां अपनी पिछली और मौजूदा नौकरी से जुड़ा रिकॉर्ड जांचें. अगर नई कंपनी की जानकारी दिखाई नहीं दे रही है या रिकॉर्ड में कोई गलती है, तो पहले अपनी कंपनी के ह्यूमन रिसोर्स डिपार्टमेंट (HRD) से संपर्क करें. UAN, आधार और दूसरी जरूरी जानकारी में अंतर होने पर उसे ठीक करवाएं. EPFO के डिजिटल सिस्टम में कई बदलाव EPFO अपने मेंबर सर्विस प्लेटफॉर्म को आसान बनाने के लिए कई बदलाव कर रहा है. इनमें पीएफ क्लेम की प्रक्रिया को तेज करना, भुगतान व्यवस्था में सुधार और अलग-अलग कार्यालयों पर निर्भरता कम करने जैसे प्रयास शामिल हैं. ऑटोमैटिक पीएफ ट्रांसफर भी इसी दिशा में एक कदम है. अगर आप नई कंपनी में शामिल हुए हैं, तो सबसे पहले अपना पुराना UAN इस्तेमाल करें और आधार लिंक होने के साथ अपनी जानकारी भी जांच लें. इससे पीएफ ट्रांसफर की प्रक्रिया आसान बनाने वाली इस सुविधा का लाभ लेने में मदद मिलेगी। 

सोनपुर, भागलपुर और मुंगेर में एयरपोर्ट के लिए जमीन खरीद प्रक्रिया तेज, 22 अक्टूबर तक मांगे प्रस्ताव

पटना  बिहार में प्रस्तावित तीन ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया अब तेज होगी। सोनपुर (सारण), भागलपुर और मुंगेर में एयरपोर्ट के लिए जमीन की संयुक्त मापी, स्वामित्व की जांच और सीधे खरीद की प्रक्रिया में सहयोग के लिए सलाहकार नियुक्त किए जाएंगे। नागरिक विमानन विभाग ने इसके लिए योग्य और अनुभवी कंसल्टेंसी फर्मों से प्रस्ताव मांगे हैं। सलाहकार जमीन के रिकॉर्ड से लेकर निबंधन और दाखिल-खारिज तक की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। जमीन की खरीद से डिजिटल लैंड बैंक तक होगा काम चयनित कंसल्टेंसी फर्म को केवल जमीन की पहचान तक सीमित नहीं रहना होगा। वह जमीन के रिकॉर्ड की जांच, स्वामित्व सत्यापन, सीधे जमीन खरीद में सहयोग, निबंधन और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में भी मदद करेगी। इसके साथ ही तीनों प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए डिजिटल लैंड बैंक तैयार करने की जिम्मेदारी भी सलाहकार की होगी। गुणवत्ता और लागत के आधार पर होगा कंसल्टेंट का चयन नागरिक विमानन विभाग के अनुसार कंसल्टेंट का चयन गुणवत्ता एवं लागत आधारित चयन पद्धति से किया जाएगा। इसमें तकनीकी प्रस्ताव को 70 प्रतिशत और वित्तीय प्रस्ताव को 30 प्रतिशत अंक दिए जाएंगे। निविदा में भाग लेने की प्रक्रिया 30 सितंबर से शुरू हो चुकी है। इच्छुक एजेंसियां 22 अक्टूबर तक अपना प्रस्ताव जमा कर सकेंगी। 15 अक्टूबर को होगी प्री-बिड बैठक विभाग की ओर से 15 अक्टूबर को प्री-बिड बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें इच्छुक कंसल्टेंसी फर्म निविदा से जुड़े बिंदुओं पर जानकारी ले सकेंगी। तकनीकी प्रस्ताव 23 अक्टूबर को नागरिक विमानन विभाग के कार्यालय में खोले जाएंगे। तकनीकी रूप से योग्य पाए जाने वाले कंसल्टेंटों के वित्तीय प्रस्ताव बाद में खोले जाएंगे। जमीन के कागजात से खरीद तक निगरानी चयनित कंसल्टेंट को जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करनी होगी। स्वामित्व स्पष्ट करने के बाद जमीन की खरीद और निबंधन की प्रक्रिया में सहयोग किया जाएगा। इसके बाद दाखिल-खारिज समेत अन्य जरूरी राजस्व प्रक्रियाओं को पूरा कराने में भी कंसल्टेंसी फर्म मदद करेगी। तीन शहरों में एयरपोर्ट की जमीन पर फोकस सोनपुर, भागलपुर और मुंगेर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए जमीन जुटाना इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य लक्ष्य है। विभाग की ओर से जमीन की मापी से लेकर डिजिटल लैंड बैंक तैयार करने तक की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की तैयारी की जा रही है। कंसल्टेंट की नियुक्ति के बाद तीनों परियोजनाओं के लिए जमीन संबंधी काम को गति मिलने की उम्मीद है।  

चीनी लग्जरी कार ब्रांड DENZA की भारत में एंट्री, जल्द लॉन्च होंगी प्रीमियम कारें

 नई दिल्ली भारतीय बाजार में जल्द ही हमें एक नया कार ब्रांड देखने को मिलेगा. इस कार ब्रांड की एंट्री कन्फर्म हो गई है. वैसे ये एक मौजूदा कार ब्रांड का सब-ब्रांड होगा. हम बात कर रहे हैं डेंजा (Denza) की, जो जल्द ही भारत में अपनी पहली कार लॉन्च करेगा. ये बीवाईडी (BYD) का लग्जरी ब्रांड है।  कंपनी ने अपना पहला टीजर जारी कर भारत में एंट्री को कन्फर्म कर दिया है. वैसे कंपनी किस कार को अपनी एंट्री के लिए चुनेगी ये कन्फर्म नहीं है. लेकिन बीवाईडी डेंजा के दो मॉडल्स की चर्चा काफी ज्यादा हो रही है. इसमें से एक एमपीवी होगी, जबकि दूसरा हाई परफॉर्मेंस इलेक्ट्रिक फास्टबैक होगी।  डेंजा डी9 (Denza D9) लग्जरी इलेक्ट्रिक एमपीवी और डेंजा जेड 9 जीटी (Denza Z9 GT) को कंपनी शुरुआत में लॉन्च कर सकती है. दोनों ही कारें सीबीयू (कंप्लीट बिल्ट अप यूनिट) रूप में आएंगी और इन्हें डेंजा के एक्सक्लूसिव शोरूम से बेचा जाएगा. ये गाड़ियां बीवाईडी की मौजूदा रेंज से ज्यादा कीमत पर आएंगी और ज्यादा प्रीमियम एक्सपीरियंस ऑफर करेंगी।  डेंजा डी9 में क्या होगा खास?  टीजर में डेंजा ने अपनी किसी भी कार को टीज नहीं किया है. ना ही कंपनी ने ये बताया है कि उनकी पहली कार कब लॉन्च होगी. डेंजा डी9 की बात करें, तो ये एक प्रीमियम 7-सीटर एमपीवी होगी, जिसकी सीधा मुकाबला एमजी एम9, मर्सिडीज बेंज वी-क्लास, टोयोटा वेलफायर और लेक्सस एलएम से होगा।  कार के डायमेंशन की बात करें, तो डी9 की लंबाई 5250 एमएम, चौड़ाई 1960 एमएम और ऊंचाई 1920 एमएम होगी. कार का व्हीलबेस 3110 एमएम होगा. एक्सटीरियर की बात करें, तो ये कार मॉडर्न और एलिगेंट डिजाइन के साथ आएगी. इसमें मोशन फ्रंट ग्रिल, फुल विडथ टेल लाइट्स, पावर्ड बायडायरेक्शनल स्लाइडिंग डोर्स, सॉफ्ट क्लोजिंग डोर्स, एक बड़ा पैनोरोमिक सनरूफ और 18 इंच के एलॉय व्हील्स मिलेंगे।  इंटीरियर की बात करें, तो कार में 15.9 इंच का सेंट्रल टचस्क्रीन, 10.25 इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, पैंसेजर डिस्प्ले और ऑपरेशनल रियर एंटरटेनमेंट स्क्रीन मिलेगी. कार में 103 से 115kWh की बैटरी मिल सकती है, जो 800 किलोमीटर तक की क्लेम्ड रेंज के साथ आएगी।  डेंजा जेड9 जीटी में क्या होगा?  ये एक 5-सीटर कार होगी, जिसकी लंबाई 5195 एमएम होगी. कार की चौड़ाई 1990 एमएम और ऊंचाई 1490 एमएम होगी. इसमें 3125 एमएम का व्हीलबेस मिलेगा. ये कार वुल्फगैंग एगर डिजाइन को फॉलो करेगी. डेंजा जेड9 जीटी में 17.3 इंच का फ्लोटिंग टचस्क्रीन और 13.2 इंज का डुअल डिस्प्ले मिलेगा।  इस कार में हाई परफॉर्मेंस ट्रिपल मोटर सेटअप मिलेगा. इसमें 100 से 122.5kWh की बैटरी मिल सकती है. इसमें 850kW तक की पावर और 1100 एनएम तक का टॉर्क मिलेगा. कार की टॉप स्पीड 270 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी, जबकि 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ने में इसे 2.7 से 3.4 सेकंड का वक्त लगेगा। 

OBC क्रीमीलेयर नियम पर हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी, प्रमोशन और वेतन आधार नहीं

 ग्वालियर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने ओबीसी प्रमाण पत्र को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि माता-पिता के वेतनमान और पदोन्नति के आधार पर ही संतान को क्रीमीलेयर में नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ओबीसी प्रमाण पत्र का आवेदन खारिज करने के आदेश को रद कर दिया और मामले पर नियमों के अनुसार दोबारा विचार करने के निर्देश दिए। 2020 में खारिज हुआ था आवेदन मामला रागिनी राठौर से जुड़ा है। उनके ओबीसी प्रमाण पत्र के आवेदन को अनुविभागीय अधिकारी ने 23 अक्टूबर 2020 को खारिज कर दिया था। इसके बाद रागिनी ने अपर कलेक्टर के समक्ष अपील की, लेकिन 29 नवंबर 2022 को वहां भी एसडीओ के आदेश को बरकरार रखा गया। इसके बाद रागिनी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दोनों आदेशों को चुनौती दी। पिता की सरकारी नौकरी और वेतन को बनाया था आधार याचिका में बताया गया कि अधिकारियों ने रागिनी के पिता की आय को केवल वेतन के आधार पर देखते हुए उन्हें क्रीमीलेयर की श्रेणी में माना और इसी आधार पर ओबीसी प्रमाण पत्र का आवेदन खारिज कर दिया। रागिनी के पिता की प्रारंभिक नियुक्ति सिविल जज वर्ग-दो के पद पर हुई थी। इसके बाद 16 जून 2008 को 40 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद उन्हें सिविल जज वर्ग-एक के पद पर पदोन्नति मिली। याचिका के अनुसार, उनके पिता की आय का स्रोत केवल वेतन था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन मामले में 11 मार्च 2026 को दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि क्रीमीलेयर का निर्धारण करते समय केवल माता-पिता के वेतन, वेतनमान या पदोन्नति को आधार बनाकर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। खंडपीठ ने प्रशासनिक अधिकारियों के आदेश रद करते हुए कहा कि मामले के सभी प्रासंगिक पहलुओं की जांच सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जानी चाहिए। OBC प्रमाण पत्र जारी करने पर कोर्ट ने नहीं दिया अंतिम आदेश हालांकि, हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि उसके आदेश का मतलब रागिनी राठौर को स्वतः ओबीसी प्रमाण पत्र जारी करना नहीं है। कोर्ट ने उनके दावे पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा या नहीं, इसका निर्णय सक्षम अधिकारी को लागू नियमों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नए सिरे से करना होगा। यानी हाई कोर्ट ने सिर्फ प्रशासनिक आदेशों को रद कर मामले पर नियमानुसार पुनर्विचार का रास्ता साफ किया है।  

यूपी राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल, अब्बास अंसारी-जगदीश राय को लेकर राजभर का बड़ा बयान

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अपनी ही पार्टी के दो विधायकों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि  अब्बास अंसारी और जौनपुर की जफराबाद सीट से विधायक जगदीश नारायण राय सुभासपा के चुनाव चिह्न पर जीतकर विधानसभा पहुंचे, लेकिन दोनों शुरू से ही समाजवादी पार्टी के साथ रहे हैं. राजभर के मुताबिक, ये विधायक सपा का झंडा और टोपी लगाकर घूमते हैं और उनका राजनीतिक झुकाव भी समाजवादी पार्टी की ओर है. उन्होंने कहा कि ये दोनों सपा के लिए वोट कर सकते हैं।  ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि अब्बास अंसारी  और जगदीश नारायण राय को लेकर कहा कि ये दोनों विधायकों का व्यवहार चुनाव बाद से ही सुभासपा से अलग रहा है. उन्होंने दावा किया कि पार्टी के जिन 12 प्रत्याशियों को सुभासपा ने चुनाव में उतारा था, उनमें से कई का झुकाव सपा की ओर था. उनके मुताबिक, जो चुनाव हार गए, वे भी अलग हो गए और जीतने वाले विधायक भी सुभासपा के साथ सक्रिय नहीं रहे. राजभर ने कहा कि उन्हें इन विधायकों के जाने से कोई खास चिंता नहीं है और वह चुनाव का इंतजार कर रहे हैं।  धनराज नथवानी की उम्मीदवारी पर भी उठाए सवाल राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की ओर से धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाए जाने पर भी ओमप्रकाश राजभर ने सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की ओर से जिस उद्योगपति को उम्मीदवार बनाया गया है, उनके परिवार का भाजपा से भी राजनीतिक जुड़ाव रहा है. राजभर ने इसे भाजपा और सपा के बीच कथित तालमेल से जोड़ने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि जो सपा के लोग बोलते हैं कि बसपा भाजपा की B टीम है. ओवैसी, भाजपा की B टीम है तो अब तो यह खुद ही बीजेपी की B टीम हो गए हैं. दरअसल, उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होना है. सपा ने रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है. तीसरी सीट को लेकर भी सियासी चर्चाएं जारी हैं।  'पीडीए का मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' ओमप्रकाश राजभर ने आजतक से बातचीत में अखिलेश यादव के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वाले राजनीतिक नारे पर भी निशाना साधा. उन्होंने तंज कसते हुए पीडीए का अर्थ 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' बताया. राजभर का आरोप था कि समाजवादी पार्टी की राजनीति में परिवार और आर्थिक रूप से प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है. उन्होंने सपा की ओर से राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को अपने पीडीए के दावे और उम्मीदवारों के चयन के बीच तालमेल स्पष्ट करना चाहिए. राजभर ने अपने बयान में धनराज नथवानी और रामगोपाल यादव का उल्लेख करते हुए सपा नेतृत्व पर परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया।  47 से 125 सीटों तक पहुंचने का श्रेय लेने पर सपा को घेरा इंटरव्यू के दौरान राजभर ने 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन और अपने दल की भूमिका पर भी विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि 2017 में भाजपा के साथ रहते हुए वह खुद चुनाव जीते थे. इसके बाद सपा ने उन्हें अपने गठबंधन में शामिल किया और 2022 के चुनाव में सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा. राजभर ने दावा किया कि 2022 में सपा गठबंधन की सीटें बढ़ने में सुभासपा की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी. उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के कई जिलों में उनके समर्थन से सपा को फायदा हुआ. राजभर ने गाजीपुर, मऊ, बलिया, आजमगढ़ और आंबेडकर नगर जैसे जिलों का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव से पूछा कि गठबंधन में सुभासपा के योगदान को क्यों भुलाया जा रहा है।  उन्होंने सपा नेताओं के उन बयानों पर भी नाराजगी जताई, जिनमें सपा की जीत को केवल अपनी पार्टी की ताकत से जोड़कर देखा जाता है. राजभर ने कहा कि गठबंधन में दोनों दलों का योगदान था और किसी एक दल को पूरी सफलता का श्रेय देना उचित नहीं है।  कांग्रेस के साथ गठबंधन पर बोले- दोनों साथ मिलकर लड़ेंगे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर राजभर ने कहा कि दोनों दलों के बीच राजनीतिक जरूरत का रिश्ता है. उन्होंने दावा किया कि सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान के बावजूद दोनों पार्टियां अंततः मिलकर चुनाव लड़ेंगी. राजभर ने कांग्रेस की ओर से सीटों की मांग को लेकर भी कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को कम सीटों की मांग करने के बजाय ज्यादा सीटें मांगनी चाहिए. उन्होंने अपने इंटरव्यू में मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति का भी उल्लेख किया. राजभर ने अखिलेश यादव और कांग्रेस के संबंधों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अलग-अलग राज्यों में विपक्षी दलों के नेताओं के बयान उनके गठबंधन की एकजुटता पर प्रश्न खड़े करते हैं।  चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोपों को लेकर भी साधा निशाना चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों पर भी ओमप्रकाश राजभर ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के पुराने शासन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल अपने कार्यकाल में चुनावी व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाते थे, लेकिन सत्ता से बाहर होने के बाद चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हैं. राजभर ने कहा कि चुनाव में जनता का फैसला सबसे महत्वपूर्ण होता है. उनके मुताबिक, जनता सरकार के कामकाज और राजनीतिक दलों के प्रदर्शन के आधार पर अपना निर्णय लेती है। 

किसानों के लिए बड़ी खबर, रबी फसलों के समर्थन मूल्य में इजाफा; दलहन-तिलहन को बढ़ावा

बांदा केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। सरकार ने इस बार गेहूं की तुलना में दलहन-तिलहन पर ज्यादा मेहरबानी दिखाई है। गेहूं का एमएसपी 2585 से बढ़ाकर 2610 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है, यानी सिर्फ 25 रुपये की वृद्धि। जबकि चने में 83 रुपये, मसूर में 390 रुपये, रेपसीड-सरसों में 413 रुपये, जौ में 136 रुपये, कुसुम (तिलहन) में सबसे ज्यादा 675 रुपये बढ़ाया है। हालांकि जिले में कुसुम का उत्पादन किया ही नहीं जाता है। दलहन और खाद्य तेलों के आयात को कम करने पर फोकस सरकार की मंशा स्पष्ट है कि देश में गेहूं का बफर स्टाक पहले से ही पर्याप्त है। 2014-15 से 2025-26 के बीच 3715 लाख टन गेहूं की खरीद एमएसपी पर हुई है, जो 2004-05 से 2013-14 के 2254 लाख टन से काफी अधिक है। इसलिए अब फोकस दलहन और खाद्य तेलों के आयात को कम करने पर है। जिले के किसानों के लिए यह फैसला सीधे जेब से जुड़ा है। लेकिन गेहूं के दाम में कम बढ़ोतरी पर किसान मायूस हैं। जिले में 3.39 लाख किसान हैं, जो करीब 3.77 लाख हेक्टेयर खेती में रबी फसलों की पैदावार करते हैंं। इसमें से 1.94 लाख खेती में किसान गेहूं की उपज पैदा करते हैं। जिले में रबी की मुख्य फसलें गेहूं, चना, मसूर और सरसों हैं। अतिरिक्त लाभ का हिसाब कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष 2026-27 में जिले की मंडियों और सरकारी क्रय केंद्रों पर कुल 6,00,120 क्विंटल गेहूं, 1,52,051 क्विंटल चना, 41,444 क्विंटल मसूर और 23,526 क्विंटल सरसों की खरीद/उत्पादन दर्ज किया गया था। यदि इसी उत्पादन को आधार मानें तो नए बढ़े हुए एमएसपी से किसानों को होने वाले अतिरिक्त फायदे में गेहूं बीते वर्ष 6,00,120 क्विंटल हुआ, इसमें बढ़ोतरी धनराशि यदि 25 रुपये बढ़ा दिया जाए तो करीब 1.50 करोड़ रुपये की होगी। वहीं यदि चने की बात करें तो बीते वर्ष 1,52,051 क्विंटल का उत्पादन हुआ तो बढ़ोतरी 83 रुपये होने पर अतिरिक्त लाभ में करीब 1.26 करोड़ रुपये का सीधे लाभ होगा। मसूर में भी बीते वर्ष 41,444 क्विंटल का उत्पादन हुआ, यदि बढ़ोतरी 390 रुपये होने पर किसानों को होने वाले फायदे की बात करें तो करीब 1.61 करोड़ रुपये का लाभ होगा। सरसों बीते वर्ष 23,526 क्विंटल हुई, बढ़ोतरी 413 रुपये की सरकार ने की तो इस हिसाब से करीब 97 लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ होगा। यानी यदि आने वाले रबी सीजन में इतना ही उत्पादन हुआ तो बांदा के किसानों की जेब में पिछले साल के मुकाबले कुल पांच करोड़ 35 लाख दो हजार 631 रुपये अतिरिक्त आएंगे। इसमें सबसे ज्यादा फायदा मसूर और सरसों के किसानों को होगा। गेहूं सबसे ज्यादा पैदा होने के बावजूद सबसे कम लाभ देगा।     पानी की कमी के कारण दलहन-तिलहन की खेती ज्यादा फायदेमंद है। एमएसपी बढ़ने से किसान को चना-मसूर-सरसों में ज्यादा फायदा होगा, किसानों को चाहिए चना, मसूर, सरसों जैसी खेती की ओर लौटें, जिससे भूजल बचेगा और फायदा भी अधिक होगा।     -संजय कुमार, जिला कृषि अधिकारी, बांदा बढ़ोतरी एक नजर में फसल 2026-27 2027-28 बढ़ोतरी गेहूं 2,585 2,610 25 जौ 2,150 2,286 136 चना 5,875 5,958 83 मसूर 7,000 7,390 390 रेपसीड-सरसों 6,200 6,613 413 कुसुम (तिलहन) 6,540 7,215 675  

600 मजदूर रोज काट रहे 565 पेड़, फिर भी डिंडौरी में कटाई की रफ्तार धीमी

डिंडौरी डिंडौरी जिले के 30 हजार हेक्टेयर में फैले साल के जंगल पर साल बोरर कीट का खतरा बढ़ गया है। इससे प्रभावित करीब 1.50 लाख पेड़ों को 31 दिसंबर तक काटने की तैयारी है। इसके लिए जंगल को 113 सेक्टर में बांटा गया है। हालांकि, विभाग के बताए आंकड़ों और मौके पर काम की रफ्तार को देखें तो तय समय में डेढ़ लाख पेड़ों की कटाई पूरी करना चुनौतीपूर्ण नजर आता है। विभाग के मुताबिक दो मजदूर एक पेड़ काटने में करीब डेढ़ से ढाई घंटे लेते हैं। वहीं, 60 सेक्टर में रोजाना औसतन करीब 565 पेड़ ही काटे जा रहे हैं। इस रफ्तार से पूरी कटाई में लंबा समय लग सकता है। डिंडौरी से करीब 85 किमी दूर मौके पर पहुंची  टीम टीम डिंडौरी से करीब 85 किमी दूर पश्चिम करंजिया वन परिक्षेत्र के चौरा दादर और खारी डीह के बीच स्थित जंगल में पहुंची। यहां करीब डेढ़ किमी पहाड़ी और कीचड़ भरे रास्ते से तरवर टोला के जंगल तक पहुंचना पड़ा। बारिश के कारण कुछ देर काम बंद रहा। बारिश थमने के बाद जंगल में फिर कुल्हाड़ी और आरी चलने लगी 60 सेक्टर में करीब 600 मजदूर लगाने का दावा वन विभाग के मुताबिक 60 सेक्टर में करीब 10-10 मजदूर लगाए गए हैं, यानी करीब 600 मजदूर कटाई में लगे हैं। विभाग का कहना है कि जरूरत पड़ने पर छत्तीसगढ़ सीमा से लगे गांवों से भी मजदूर बुलाए जाएंगे। मौके पर मिले मजदूर गोपाल नेताम ने बताया कि उस दिन उसके साथ करीब 13 लोग काम कर रहे थे। मोटे पेड़ों को आरी से और बाकी को कुल्हाड़ी से काटा जा रहा था। पेड़ गिराने के बाद सिर्फ तना काटना ही काम नहीं है। मजदूरों को टहनियां काटने और छाल उतारने का काम भी करना पड़ता है। घने जंगल में जंगली घास और वनस्पति के कारण काम जोखिम भरा है। मजदूरों के मुताबिक, यहां अकसर सांप भी दिखाई देते हैं। हेलमेट-जूते तो दूर, प्राथमिक इलाज की भी परेशानी मजदूर फूल सिंह ने बताया कि उन्हें हेलमेट, दस्ताने और सुरक्षा जूते उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उनके मुताबिक पेड़ काटते समय चोट लगने पर मौके पर प्राथमिक इलाज की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। फूल सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में काम के दूसरे विकल्प कम होने के कारण मजदूर यह काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जंगल में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। प्यास लगने पर मजदूर करीब 200-250 मीटर दूर स्थित झिर से पानी लेते हैं। बारिश के दौरान इसमें भी मटमैला पानी आने की बात उन्होंने कही। 80 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में साल के जंगल डिंडौरी जिले में कुल 80,263 हेक्टेयर क्षेत्र में साल के जंगल हैं। इनमें करीब 76,230 हेक्टेयर सघन और 4,032 हेक्टेयर विरल वन क्षेत्र है। वन विभाग के मुताबिक, दो साल में साल बोरर से प्रभावित पेड़ों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले साल 5-6 हजार पेड़ों पर निशान लगाए गए थे, जबकि इस बार यह संख्या करीब डेढ़ लाख तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, साल बोरर का प्राकृतिक चक्र करीब 30 साल का होता है। डिंडौरी में 1997-98 में भी इसका बड़ा प्रकोप सामने आया था। 30 साल पहले 22.15 लाख पेड़ काटने पड़े थे वन विभाग के अनुसार, 1997-98 में साल बोरर के प्रकोप के कारण 1.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 22.15 लाख पेड़ काटने पड़े थे। उस दौरान 1.39 करोड़ कीट नष्ट किए गए थे। इस बार प्रभावित पेड़ों की कटाई के बाद छोटे पौधों को सुरक्षित रखने की बात कही जा रही है। हालांकि, कटे हुए जंगल को दोबारा विकसित होने में 20 से 30 साल लग सकते हैं। विभाग के अनुमान के मुताबिक कटाई के बाद करीब 46,390 घनमीटर इमारती लकड़ी और 43,940 घनमीटर जलाऊ लकड़ी मिलेगी। कटाई और परिवहन पर करीब 8 से 10 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। लकड़ी की नीलामी ई-ऑक्शन के जरिए की जाएगी। डिंडौरी में जलाए गए 19.50 लाख 'साल बोरर' कीड़े मध्यप्रदेश के डिंडौरी में वन विभाग ने आठ संग्रहण केंद्रों पर करीब 19 लाख 50 हजार साल बोरर कीड़े जलाए। गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे कीड़ों से बनी मालाओं को लकड़ियों के बीच रखकर आग लगाई गई। अकेले करंजिया संग्रहण केंद्र पर 3 लाख 50 हजार कीड़े जलाए गए। साल बोरर क्या है ? साल बोरर एक बीटल होता है. ये पेड़ के अंदर रहता है और पेड़ को अंदर से खोखला करता है. इसके बाद ये पेड़ किसी काम का नहीं बचता है. फिर उस एक पेड़ को पूरी तरह से बर्बाद करने के बाद ये कीट दूसरे पेड़ में चला जाता है. इसकी पहचान करने का सबसे आसान तरीका ये है कि पेड़ के सबसे नीचे वाले भाग में थोड़ा बुरादा टाइप होता है या फिर पत्तियों की बात करें तो पत्तियां पीली पड़ने लगेंगी. ये सिंप्टम्स होते हैं, अगर बाहर से पहचानना चाहें तो।  पेड़ों को काटना क्यों है जरूरी साल बोरर कीट लगातार पकड़ा भी जा रहा है. इसके अलावा इस कीट से प्रभावित पेड़ को काटना जरूरी इसलिए भी होता है, क्योंकि अगर संक्रमित पेड़ को काटेंगे नहीं, तो एक पेड़ से दूसरे पेड़ में संक्रमित हो जाएगा. लार्वा थ्रेडिंग के जरिये ये फैलता है. पहले एक पेड़ को खोखला कर फिर दूसरे पेड़ में जाता है, ऑब्जर्वेशन में पाया गया है कि जब तक की एक पेड़ को ये खत्म नहीं कर देते पूरी तरह से, तब तक दूसरे पेड़ में नहीं जाते हैं. अनूपपुर में लगभग 35% साल के पेड़ हैं, अगर साल बोरर कीट से प्रभावित पेड़ों को काटेंगे नहीं तो और संक्रमित होंगे जिससे और ज्यादा नुकसान होगा।  अमरकंटक में साल बोरर का कितना प्रकोप अमरकंटक का जंगल करीब 8525 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. यहां लगभग 40 लाख साल के पेड़ हैं. क्षेत्र के 10 बीट में से आठ में साल बोरर का संक्रमण भी पाया गया है. इनमें अमरकंटक, सोनमुड़ा, कपिलधारा, उमरगोहान, भूड़ाकोना, दमगढ़, पौड़ी, ताली बीट शामिल है। 

OPS की मांग के बीच NPS का नया विकल्प, 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चा तेज

नई दिल्ली एक ओर जहां कई कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने OPS को बहाल करने की डिमांड की है तो दूसरी ओर पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने एनपीएस में 2-3 करोड़ नए सब्सक्राइबर जुड़ने की उम्मीद लगा रखी है।PFRDA की चेयरपर्सन एस रमन ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि अगले दो साल में NPS से करीब 2-3 करोड़ नए सब्सक्राइबर जुड़ेंगे। रमन ने एनपीएस दिवस के मौके पर PTI से बातचीत में कहा कि इस बढ़ोतरी की वजह हाल ही में शुरू की गई ‘NPS तत्काल’ सुविधा हो सकती है। इसका मकसद NPS अकाउंट खोलने के प्रोसेस को तेज और आसान बनाना है। बता दें सरकार ने 1 जनवरी 2004 को ओल्ड पेंशन स्कीम की जगह NPS शुरू किया था। इस नई स्कीम के तहत लोग अपने कामकाजी सालों में पैसा जमा करते हैं और यह रकम बाजार से जुड़े फंडो में लगाई जाती है। 8वें वेतन आयोग से गारंटीड पेंशन की मांग सर्वे ऑफ इंडिया की MSA ने 8वें वेतन आयोग से OPS बहाल करने की मांग की है। संगठन ने अंतिम वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर गारंटीड पेंशन की मांग भी रखी है। वहीं फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल आर्गेनाइजेशन ने NPS और UPS के तहत आने वाले कर्मचारियों को भी पेंशन व्यवस्था में लाने की मांग की है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए NPS जरूरी रिटायरमेंट के समय जमा हुई रकम से पेंशन जैसी सुविधाएं मिलती हैं, जिनमें एन्युइटी आधारित आय भी शामिल है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए NPS जरूरी है, जबकि प्राइवेट सेक्टर के लोग इसमें स्वेच्छा से जुड़ सकते हैं। NPS तत्काल से छोटे शहरों में बढ़ेगा पेंशन कवरेज NPS तत्काल सुविधा से टियर-2 और टियर-3 शहरों में रहने वाले लोगों में भी पेंशन कवरेज बढ़ने की उम्मीद है। रमन ने कहा कि यह सुविधा इन्फॉर्मल सेक्टर के और लोगों को भी पेंशन सिस्टम से जोड़ सकती है। इससे NPS का दायरा सिर्फ सैलरीड और फॉर्मल सेक्टर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। NPS तत्काल स्कीम क्या है? अब तक ग्राहक BHIM ऐप या अपने बैंक के UPI ऐप से सीधे NPS में एनरोल या नया NPS अकाउंट नहीं खोल सकते थे। हालांकि, इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल आगे पैसा जमा करने के लिए किया जा सकता था। NPS में औपचारिक रूप से जुड़ने के लिए पहले ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करना पड़ता था, जिससे परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) मिलता था। ‘NPS तत्काल’ स्कीम के जरिए PFRDA, UPI से नए NPS सब्सक्राइबर जोड़ेगा। इसकी शुरुआत NPCI के BHIM UPI ऐप से होगी। इसके लिए KYC-वेरिफाइड बैंक अकाउंट चाहिए और ऑनलाइन पेमेंट ऑप्शन से पैसा जमा किया जा सकता है। BHIM ऐप पर NPS अकाउंट कैसे खोलें? NPS तत्काल स्कीम से लोग BHIM ऐप डाउनलोड करने के बाद महज कुछ आसान स्टेप्स में पेंशन अकाउंट खोल सकते हैं। स्टेप्स ये हैं… 1. BHIM ऐप खोलें, होमस्क्रीन पर रिचार्ज और बिल पेमेंट सेक्शन में ‘view all’ पर क्लिक करें, फिर NPS टैब पर जाएं। 2. अपना डेट ऑफ बर्थ जैसी बेसिक जानकारी दें। 3. प्रोसेस के दौरान दिख रहे अपने बैंक अकाउंट को चुनें। 4. UPI से कम से कम ₹250 का पहला कंट्रीब्यूशन ऑथराइज करें। इससे आपका PRAN बनेगा और अकाउंट एक्टिव हो जाएगा। किन बैंकों के ग्राहक आवेदन कर सकते हैं? रमन ने यह भी दोहराया कि फिलहाल स्टेट बैंक, ICICI बैंक, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक और IDFC फर्स्ट बैंक के ग्राहक BHIM ऐप से NPS अकाउंट खोलने की इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए कागजी काम की जरूरत नहीं है, पूरा प्रोसेस डिजिटल है और KYC तुरंत पूरी हो जाती है। तत्काल रूट का मकसद NPS अकाउंट खोलने के प्रोसेस को आसान और तेज बनाना है।

इंदौर-मुंबई हाईवे होगा 6 लेन, चार जिलों के गांवों में जमीन अधिग्रहण की तैयारी

इंदौर  आगरा-मुंबई हाईवे पर इंदौर से पलासनेर के बीच हादसों को रोकने के लिए यहां रोड 6 लेन का किया जा रहा है। 154 किमी के इस हिस्से में रोड चौड़ा किया जाना है। इसी रोड पर सबसे ज्यादा करीब 15 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे। जहां 25 से ज्यादा हादसों में कई लोगों ने अपनी जान गवाई और कई घायल हो गए थे। आगरा-मुंबई रोड (एनएच-52) के इंदौर से खलघाट होते हुए पलासनेर(महाराष्ट्र) तक के हिस्से को सिक्स लेन करने का काम शुरू हो गया है। एनएच-52 के 154.77 किमी हिस्से में मौजूदा 4 लेन सड़क का विस्तार होगा। यह कवायद इसलिए है क्योंकि इस साल जनवरी से जुलाई के बीच एनएच-52 पर 15 ब्लैक स्पॉट्स पर 27 सड़क हादसे हुए, जिनमें 27 लोगों को जान गंवानी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के चेयरमैन जस्टिस एएम सप्रे ने एनएचएआई के अधिकारियों से पूछा कि हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा था कि इंदौर-खलघाट हाईवे को सिक्स लेन किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के लिए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुल 178 गांवों से जमीन अधिग्रहित की जानी है। सबसे ज्यादा महू के 41 गांवों से जमीनों का अधिग्रहण होगा। अभी डीपीआर पर भी काम जारी है। NH-52:15 ब्लैक स्पॉट्स पर 27 जानें गईं धार के 16, धरमपुरी के 30 गांव नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने जो प्लान संभागायुक्त भास्कर लक्षकार को दिखाया है, उसके मुताबिक परियोजना का बड़ा असर इंदौर जिले की महू तहसील में होगा। यहां 41 गांव इसके दायरे में हैं। धार तहसील में 16 गांव हैं। धरमपुरी तहसील में 30 गांव हैं। बड़वानी जिले की राजपुर तहसील में 22 गांव प्रोजेक्ट के दायरे में हैं। सेंधवा में 15 गांव हैं। निवाली में 9 गांव हैं। वरला में 2 गांव हैं। खरगोन जिले की महेश्वर तहसील के 6 गांव शामिल हैं। कसरावद के 28 गांव भी इसमें शामिल हैं। महाराष्ट्र की ओर के 9 गांव भी इस हाइवे विस्तार में शामिल हैं। इस तरह मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के कुल 178 गांव प्रोजेक्ट के दायरे में आ रहे हैं। नियुक्त होंगे भू-अर्जन अधिकारी : प्रोजेक्ट के लिए जमीन का भू-अर्जन प्रस्तावित है। इसमें निजी, सरकारी और वनभूमि शामिल है। सड़क किनारे की सुविधाओं और जंक्शन के लिए जरूरी जमीन भी शामिल है। सभी संबंधित जिलों की तहसीलों में सक्षम प्राधिकारी भू-अर्जन (कम्पिटेंट अथॉरिटी फॉर लैंड एक्विजिशन-CALA) की नियुक्ति की जानी है। इसके लिए धारा 3(ए) का प्रकाशन किया जाना है। अभी तक यहां फोरलेन सड़क इंदौर से महाराष्ट्र के पलासनेर के बीच अभी तक फोरलेन सड़क है। कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति ने एनएचएआई से इस रास्ते पर हादसे रोकने को लेकर उठाए जा रहे कदम पर सवाल पूछा था। इस पर अधिकारियों ने कमेटी को बताया था कि सड़क को फोरलेन से सिक्स लेन किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए मधय प्रदेश और महाराष्ट्र के 170 से ज्यादा गांवों से जमीन अधिग्रहण किया जाना है। मध्य प्रदेश इन जिलों के गांवों से लेंगे जमीन मध्य प्रदेश के इंदौर, धार, बड़वानी, खरगोन जिलों के गांवों से हाईवे को चौड़ा करने के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए भू-अर्जन अधिकारी नियुक्ति भी की जाएगी। महाराष्ट्र की ओर से भी करीब 9 गांवों से यह सड़क गुजरती है। इसे चौड़ा करने के लिए वहां भी जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। आर्थिक और औद्योगिक केन्द्रों को मिलेगा फायदा यह मार्ग आगरा-मुंबई कॉरिडोर का हिस्सा है, जो उत्तर भारत को पश्चिमी एवं दक्षिणी भारत से जोड़ता है. इंदौर एवं मुंबई जैसे प्रमुख आर्थिक व औद्योगिक केंद्रों को जोड़ने वाले इस कॉरिडोर पर लगातार यातायात का दबाव बढ़ रहा है. इस रूट पर प्रतिदिन लगभग 40 हजार वाहनों का आवागमन हो रहा है. इस रूट के 6-लेन का किए जाने से देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और माल परिवहन की दक्षता में बढ़ोत्तरी होगी।  इस परियोजना के तहत भेरू घाट, बाकानेर घाट एवं बिजासन घाट जैसे चुनौतीपूर्ण घाट खंडों को 6-लेन में बदला जाएगा. इस दौरान इस रूट पर पड़ने वाले ब्लैक स्पॉट को भी खत्म किया जाएगा. इस रूट पर कई स्थानों पर ढलाने हैं, इनका संतुलन किया जाएगा. कैरिजवे का चौड़ीकरण किया जाएगा. ढलान को कम तीखा और मोड़ों को अधिक सुरखित बनाया जाएगा. इस नई सड़क पर सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित किया जाएगा।  इसको सेफ्टी फर्स्ट के सिद्धांत पर तैयार किया जाएगा. इसमें क्रैश बैरियर्स, उच्च गुणवत्ता की रोड मार्किंग, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव साइनज, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम एवं आधुनिक स्लोप स्टेबिलाइजेशन तकनीकों का उपयोग किया जाएगा. इन उपायों के माध्यम से घाट खंडों को उच्च क्षमता, अधिक सुरक्षित एवं निर्बाध यातायात के अनुरूप अत्याधुनिक 6-लेन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा।  बनेंगे फ्लाई ओवर, अंडरपास परियोजना के अंतर्गत खलघाट क्षेत्र में नर्मदा नदी पर एक नए समानांतर पुल का निर्माण भी किया जाएगा. इससे मौजूदा पुल पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा. इसके अलावा आसपास के छोटे बड़े शहरों में होने वाले जाम को कम करने के लिए बायपास, सर्विस रोड, फ्लाई ओवर और अंडरपास का भी निर्माण किया जाएगा. इससे हाईवे और स्थानीय यातायात व्यवस्था को अलग-अलग व्यवस्थित किया जा सकेगा. यह व्यवस्था न केवल जाम की समस्या को कम करेगी, बल्कि लोगों की सुरक्षा, सुविधा एवं यात्रा अनुभव को भी बेहतर बनाएगी।  पीथमपुर क्षेत्र को मिलेगा फायदा यह परियोजना एनएच-47 व प्रस्तावित इंदौर वेस्टर्न बायपास के साथ मिलकर स्थानीय लॉजिस्टिक्स नेटर्व को और मजबूत करेगी. खासतौर से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को इससे फायदा मिलेगा. इससे सप्लाई चेन और बेहतर होगी. एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण यादव के मुताबिक "इस सिक्स लेन हाईवे के निर्माण से इंदौर से महाराष्ट्र और मुंबई तक की यात्रा कम समय में पूरी होगी. इसके अलावा लॉजिस्टिक नेटवर्क में भी मजबूती आएगी. इसकी डीपीआर दिसंबर के अंत तक पूरी होने की संभावना है। 

केंद्रीय सहकारिता मंत्री 3 अक्टूबर को करेंगे डेयरी प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन

केन्द्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री शाह उज्जैन को देंगे 255 करोड़ रूपये के अत्याधुनिक डेयरी प्लांट की सौगात केंद्रीय सहकारिता मंत्री 3 अक्टूबर को करेंगे डेयरी प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन प्लांट की शुरूआत 3 लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता से होगी, भविष्य में 5 लाख लीटर तक होगा विस्तार उज्जैन  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार प्रयास किया जा रहा है। उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ द्वारा 255 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक डेयरी प्लांट स्थापित किया जा रहा है। केंद्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल से इस प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन करेंगे। उज्जैन में स्थापित होने वाला यह अत्याधुनिक डेयरी प्लांट क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विभिन्न डेयरी उत्पादों के उत्पादन को नई गति देगा। परियोजना की कुल लागत में से 170 करोड़ रुपये राज्य शासन द्वारा अनुदान के रूप में प्रदान किए जाएंगे, जबकि शेष 85 करोड़ रुपये दुग्ध संघ द्वारा ऋण के माध्यम से जुटाए जाएंगे।परियोजना को अगले दो वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य है। प्रस्तावित प्लांट की शुरुआत 3 लाख लीटर प्रतिदिन दूध प्रसंस्करण क्षमता के साथ होगी। भविष्य में इसकी क्षमता को बढ़ाकर 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक किया जा सकेगा। इससे उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती दुग्ध उपलब्धता के साथ प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार भी संभव होगा। पैक्ड मिल्क से लेकर घी तक का होगा उत्पादन प्लांट में आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के साथ विभिन्न प्रकार के डेयरी उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा। इसमें 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन पैक्ड मिल्क, 25 हजार लीटर प्रतिदिन दही तथा 10 हजार लीटर प्रतिदिन लस्सी/छाछ के उत्पादन की क्षमता होगी। इसके अलावा 10 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता का घी प्लांट भी स्थापित किया जाएगा। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के प्रबंध संचालक जयदेव बिस्वास ने कहा, “उज्जैन में आधुनिक डेयरी प्लांट की स्थापना मध्यप्रदेश के डेयरी क्षेत्र के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह द्वारा भोपाल से इस परियोजना का डिजिटल भूमि-पूजन किया जाएगा। इस परियोजना से दुग्ध उत्पादकों से प्राप्त दूध का बेहतर प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन सुनिश्चित होगा तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।” उन्होंने कहा, “प्लांट को भविष्य में 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक विस्तारित करने का प्रबंध किया गया है। इससे उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन, संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी श्रृंखला को मजबूती मिलेगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।” यह परियोजना आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों से प्राप्त दूध के बेहतर उपयोग और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देगी। साथ ही क्षेत्र में डेयरी गतिविधियों के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने तथा उपभोक्ताओं तक उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद पहुंचाने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।