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अमृतसर में हेल्थ कार्ड से इलाज पर अस्पताल का विरोध, AAP विधायक ने की हस्तक्षेप, बच्चा रेफर

अमृतसर
 पंजाब के अमृतसर से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां सरकार की स्वास्थ्य योजना होने के बावजूद एक गरीब परिवार को अपने बीमार बच्चे के इलाज के लिए परेशानी उठानी पड़ी। घटना मकबूलपुरा क्षेत्र के एक निजी अस्पताल की है, जहां स्वास्थ्य कार्ड के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे का उपचार करने से इन्कार कर दिया।

पीड़ित परिवार की सदस्य मनीषा ने बताया कि उनका बच्चा लंबे समय से बीमार है और वे अलग-अलग अस्पतालों में उसका इलाज करवा रहे हैं। इस बार उन्हें उम्मीद थी कि स्वास्थ्य योजना के तहत उन्हें राहत मिलेगी, लेकिन अस्पताल द्वारा इलाज से मना करने पर उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं। इस दौरान अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामा चलता रहा।

अस्पताल में बिगढ़ा माहौल
मामले की जानकारी मिलते ही आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेता कमल कुमार मौके पर पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन के साथ तीखी बहस की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निजी अस्पताल सरकारी योजनाओं को सही ढंग से लागू नहीं कर रहे हैं और गरीब मरीजों से अनुचित तरीके से पैसे वसूलने की कोशिश की जाती है।

विवाद बढ़ने पर क्षेत्र की विधायक जीवनजोत कौर भी अस्पताल पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने इसे गलतफहमी का मामला बताते हुए कहा कि अस्पतालों को मरीजों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर प्रकार की बीमारी का इलाज हर अस्पताल में संभव नहीं होता, इसलिए कई बार मरीजों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे बड़े केंद्रों पर भेजना पड़ता है।

विधायक बोलीं-गलतफहमी हुई
विवाद बढ़ने पर पूर्वी हलके की विधायक जीवनजोत कौर भी मौके पर आईं। उन्होंने इसे गलतफहमी का मामला बताया और कहा कि अस्पतालों को मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर बीमारी का इलाज हर अस्पताल में संभव नहीं होता, इसलिए मरीजों को उच्च केंद्रों पर रेफर करना पड़ता है।

अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. ऋषभ ने कहा कि मरीज की बीमारी योजना के तहत कवर नहीं थी, जिससे यह गलतफहमी पैदा हुई। उन्होंने बताया कि अब मरीज को बेहतर इलाज के लिए उच्च केंद्र पर रेफर कर दिया गया है और मामला आपसी सहमति से सुलझ गया है।

बच्चे की बिमारी योजना से बाहर
वहीं अस्पताल के निदेशक डॉ. ऋषभ ने अपनी सफाई में कहा कि बच्चे की बीमारी स्वास्थ्य योजना के दायरे में नहीं आती थी, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने बताया कि मरीज को अब बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र में भेज दिया गया है और मामला आपसी सहमति से सुलझा लिया गया है।

इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और निजी अस्पतालों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सरकार इस तरह के मामलों की गंभीरता से जांच करे, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।

 

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