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निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार के तर्कों को नहीं मिली राहत

जयपुर

राजस्थान हाईकोर्ट में आज पंचायत और निकाय चुनाव टालने के मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई टल गई. अवमानना याचिका पर अगली सुनवाई 26 मई को होगी. जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल, जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ ने आदेश दिए. गिर्राज सिंह देवंदा और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने अवमानना याचिका दायर की है. याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट प्रेमचंद देवंदा और पुनीत सिंघवी ने पैरवी की.

कोर्ट ने जताई नाराजगी
इससे पहले 11 मई को हाई कोर्ट ने सरकार और राज्य चुनाव आयोग के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने तय समय पर चुनाव नहीं कराने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार का रवैया ठीक नहीं है, और उसे पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है.

कोर्ट को चुनाव में देरी की बताई वजह  
कोर्ट में सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि वार्डों के आंतरिक सीमांकन को लेकर हाईकोर्ट के दो अलग-अलग फैसले आने से देरी हुई, जबकि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं आने के कारण आरक्षण तय नहीं हो पाया. बेंच ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदेश निकायों को लेकर था, तो पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए, और ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, यह हमारे सामने नहीं है.

कोर्ट ने जजमेंट रिजर्व रखा
कोर्ट में सरकार की ओर से कहा गया कि राजस्थान का बड़ा हिस्सा रेगिस्तानी है, जून में हीटवेव चलती है, जुलाई में बरसात शुरू हो जाती है और ऐसे में चुनाव कराना मुश्किल होगा, लेकिन बेंच ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया. सुनवाई के बाद अदालत ने जजमेंट रिजर्व रख लिया है.

15 अप्रैल तक चुनाव कराने के दिर्नेश थे
हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला देते हुए 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने और 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन पूरा करने के निर्देश दिए थे. अब सरकार और चुनाव आयोग ने और समय मांगा है, जबकि इस मुद्दे पर अवमानना याचिका भी दायर है, जिस पर 18 मई को सुनवाई होगी.

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