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आदिवासी अंचल से निकली सफलता की मिसाल, उमरिया की प्रियंका सिंह मसराम बनीं MPPSC से हिंदी असिस्टेंट प्रोफेसर

उमरिया
 जब हौसले बुलंद हों और लक्ष्य के प्रति ईमानदारी हो, तो बंदिशें और संसाधन कभी आड़े नहीं आते। संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा अधिनियम के तहत आने वाले उमरिया जिले के सुदूर आदिवासी अंचल, पाली विकासखंड के ग्राम कुमूर्दु की बहू प्रियंका सिंह मसराम ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। प्रियंका ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सहायक प्राध्यापक (हिन्दी) भर्ती परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर पूरे जिले का नाम रोशन किया है।

ग्रामीण पृष्ठभूमि और पारंपरिक जिम्मेदारियों के बीच प्रियंका की यह छलांग सिर्फ एक व्यक्तिगत नौकरी का मामला नहीं है, बल्कि यह इस आदिवासी बेल्ट में महिलाओं की बदलती सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का एक बड़ा जमीनी दस्तावेज है।

खुद की मेहनत से बनाई अलग पहचान
प्रियंका के पति धर्मपाल सिंह वर्तमान में बैतूल जिले की मुलताई जनपद पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के पद पर तैनात हैं। प्रशासनिक माहौल घर में होने के बावजूद प्रियंका ने अपनी पढ़ाई की निरंतरता को टूटने नहीं दिया। उन्होंने अपनी इस सफलता से साबित किया कि शादी और पारिवारिक दायित्वों के बाद भी अगर जिद पक्की हो, तो देश की कठिनतम परीक्षाओं में से एक को भी पास किया जा सकता है।

ग्रामीण अंचल में जश्न और प्रेरणा की नई लहर
कुमूर्दु गांव और आसपास के इलाकों में प्रियंका की इस कामयाबी के बाद से खुशी की लहर है। ग्रामीणों का कहना है:

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    यह सफलता अंचल की अन्य युवतियों में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति एक नया आत्मविश्वास पैदा करेगी।

    पांचवीं अनुसूची वाले इस पिछड़े क्षेत्र में उच्च शिक्षा को लेकर समाज का नजरिया तेजी से बदलेगा।

    प्रियंका की यह जीत आने वाली पीढ़ी के लिए अब एक गाइडिंग लाइट (प्रेरणा स्रोत) की तरह काम करेगी।

स्थानीय स्तर पर परिजनों और समाज के प्रबुद्ध जनों ने प्रियंका सिंह मसराम को इस ऐतिहासिक सफलता पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

 

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