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Rajya Sabha Election: मीनाक्षी नटराजन का बड़ा ऐलान, नामांकन निरस्त होने के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख करेंगी

भोपाल प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में समझौता (कॉम्प्रोमाइज) हुआ है और कांग्रेस इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटिशन) दायर करेगी।मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि पार्टी की लीगल टीम इस मामले पर काम कर रही है और परिणाम घोषित होने के 45 दिन के भीतर याचिका दायर कर दी जाएगी। भाजपा ने रची साजिश उन्होंने कहा, “ना तो नामांकन पत्र में कोई गलती थी और ना ही हमारे किसी साथी से कोई चूक हुई। जब फार्म-16 में नोटिस के उल्लेख का कोई कॉलम ही नहीं है, तो उसके आधार पर नामांकन निरस्त करना यह साबित करता है कि यह एक षड्यंत्र था।” कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को हर स्तर पर लड़ेगी, क्योंकि यह मामला केवल एक सीट का नहीं, बल्कि पूरी चुनाव व्यवस्था की निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में नगरीय निकाय और विधानसभा चुनाव होने हैं। यदि इसी तरह नामांकन निरस्त किए जाते रहे, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। पेपर लीक और राम मंदिर चंदा मामला पर बरसीं मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि देश और प्रदेश के सामने अभी तीन बड़े गहरे संकट हैं। जिस तरह से नीट पेपर लीक हुआ, वैसे ही भोपाल के राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से पेपर लीक हो गए। छात्र और उनके अभिभावक वर्षों का संघर्ष करते हैं लेकिन जिस तरह से उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और कोई इसकी जिम्मेदारी नहीं ले रहा। इसको लेकर कांग्रेस ने छात्रों की गूंज कार्यक्रम प्रारंभ किया है। इसके तहत इंदौर से भोपाल तक 14 और 15 जुलाई को साइकिल यात्रा निकाली जा रही है। 9 अगस्त को दिल्ली में बड़ा कार्यक्रम कर अपनी बात जन-जन तक पहुंचाई जाएगी। जिस तरह से हम सब के आराध्य और आस्था के केंद्र भगवान श्रीराम के मंदिर में चढ़ावे की चोरी हुई, वह पूरे देश ने देखा‌। यह बहुत गंभीर मामला है। महाकाल की नगरी उज्जैन में भी जमीन की लूट की बात सामने आई है। दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। प्रदेश का किसान परेशान वहीं, किसानों के साथ होने का दावा करने वाली भाजपा सरकार अक्सर किसानों के साथ धोखा करती है। ग्रीष्मकालीन मूंग का अच्छा उत्पादन हुआ है लेकिन प्रदेश में मात्र 25% ही उपज खरीदी जा रही है। किसान परेशान है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए। किसानों से जुड़ा केवल यह एक मामला नहीं है। ना तो उन्हें खाद मिल रही है ना ही बीज। अमेरिका के साथ जो व्यापारिक समझौता किया गया है उसकी चोट भी सीधी सीधी किसानों पर ही है सरकार को इसको लेकर स्थिति साफ करनी चाहिए।  

Indore Traffic Alert: शहर में 5 नए ब्लैक स्पॉट की पहचान, रालामंडल चौराहे पर दुर्घटनाओं का सबसे ज्यादा खतरा

इंदौर  इंदौर शहर में सड़क सुरक्षा की तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। एक ओर यातायात पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने पांच ब्लैक स्पॉट को सूची से हटाने में सफलता हासिल की, तो दूसरी ओर उतने ही नए ब्लैक स्पॉट सामने आ गए। सबसे गंभीर बात यह है कि शहर के 16 ब्लैक स्पाट में अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और बायपास कॉरिडोर पर हैं। इससे बायपास इंदौर का सबसे खतरनाक दुर्घटना कारिडोर बनकर उभरा है। रालामंडल चौराहा पूरे शहर का सबसे संवेदनशील ब्लैक स्पाट है, जहां वर्ष 2023 से 15 जून 2026 तक 13 दुर्घटनाओं में 14 लोगों की मौत हुई। यातायात पुलिस के वर्ष-2025 के ब्लैक स्पाट के आंकड़ों (2023, 2024, 2025 तथा 15 जून 2026 तक) के अनुसार, शहर में वर्तमान में 16 ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं। इनमें 11 पुराने स्थान अब भी सूची में बने हुए हैं, जबकि पांच नए स्थानों को पहली बार ब्लैक स्पाट घोषित किया गया है। दूसरी ओर, पांच पुराने ब्लैक स्पाट को इंजीनियरिंग सुधार के बाद सूची से हटा दिया गया है। यहां सबसे ज्यादा खतरा आंकड़ों के अनुसार, दुर्घटनाओं का सबसे अधिक दबाव अब बायपास और राष्ट्रीय राजमार्ग पर है। ओमेक्स सिटी, बिचौली मर्दाना ब्रिज, रालामंडल चौराहा, कैलोद करताल फाटा, कनाड़िया ब्रिज, यूनो बिजनेस पार्क, फीनिक्स माल और नावदापंथ ब्रिज सहित अधिकांश ब्लैक स्पाट एनएचएआई के हिस्से में आते हैं। तेज रफ्तार, भारी वाहनों की आवाजाही और जंक्शन की डिजाइन इस कॉरिडोर को अधिक जोखिमपूर्ण बना रही है। कैलोद करताल फाटा, लवकुश चौराहा और ओमेक्स सिटी भी लगातार हादसों की सूची में बने हुए हैं। कुछ को सुधारा तो नए उभरे रिजलाय फाटा, बेस्ट प्राइज, आईटी पार्क चौराहा और प्रभु तोल कांटा सहित पांच स्थानों को ब्लैक स्पाट की सूची से हटा दिया गया है। इन स्थानों पर इंजीनियरिंग सुधार और यातायात प्रबंधन का सकारात्मक असर दिखा है। वहीं एमआर-10 टोल, कनाड़िया ब्रिज, यूनो बिजनेस पार्क, फीनिक्स माल और नावदापंथ ब्रिज जैसे पांच नए स्थान ब्लैक स्पाट के रूप में सामने आए हैं। यानी जहां एक स्थान सुरक्षित हुआ, वहीं दूसरे स्थान पर खतरा बढ़ गया। सिर्फ छह माह में 2.48 लाख चालान यातायात पुलिस ने चालानी कार्रवाई में भी तेजी दिखाई है। एक जनवरी 2026 से 25 जून तक 2.48 लाख से अधिक चालान बनाए जा चुके हैं। सबसे अधिक कार्रवाई बिना हेलमेट, गलत पार्किंग और शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर हुई है। इसके बावजूद ब्लैक स्पाट की संख्या में स्थायी कमी नहीं आई है। यह संकेत है कि केवल चालानी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। सड़क की डिजाइन, संकेतक, प्रकाश व्यवस्था और यातायात इंजीनियरिंग में भी व्यापक सुधार की जरूरत है।     122 दुर्घटनाएं (2023 से 15 जून 2026 तक)     123 मौतें दर्ज     2,48,620 चालान ( एक जनवरी से 25 जून 2026 तक) आगे यह करना होगा ब्लैक स्पाट की सूची बताती है कि इंदौर में सड़क सुरक्षा का फोकस अब केवल शहर के चौराहों तक सीमित नहीं रह गया है। सबसे बड़ा जोखिम बायपास और राष्ट्रीय राजमार्ग के हिस्सों पर है। यदि इन कारिडोर पर इंजीनियरिंग सुधार, गति नियंत्रण और निगरानी को प्राथमिकता नहीं दी गई तो एक ब्लैक स्पाट हटने के साथ दूसरा बनने का सिलसिला जारी रहेगा।     राऊ, रालामंडल और अर्जुन बड़ौद में फ्लाइओवर शुरू होने से वहां के ब्लैक स्पाट समाप्त हो गए हैं। अर्जुन बड़ौद में पुल बनने से पहले यातायात का दबाव अधिक था। लाजिस्टिक क्षेत्र होने के कारण ट्रक और ट्राले गलत दिशा से आते थे तथा सड़क पर खड़े रहते थे। इससे दुर्घटनाएं अधिक होती थीं, जो अब समाप्त हो गई हैं। एमआर-10 बायपास पर 65 करोड़ रुपये की लागत से छह लेन और करीब ढाई किलोमीटर लंबे फ्लाइओवर का निर्माण अगले दो माह में पूरा हो जाएगा। नेमावर रोड पर राघवगढ़ के पास भी दो माह में काम पूरा होने की संभावना है। इससे आवागमन और अधिक सुरक्षित होगा। – प्रवीण यादव, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई  

Nirav Modi Extradition: भगोड़े हीरा कारोबारी को बड़ा झटका, आखिरी कानूनी लड़ाई हारने के बाद भारत लाने का रास्ता साफ

नई दिल्ली भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. दस्तावेजों के मुताबिक नीरव मोदी ने अपनी आखिरी कानूनी कोशिश भी हार दी है. उन्होंने यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स में जो अपील दायर की थी, उससे भी राहत नहीं मिली. सूत्रों के मुताबिक, अब नीरव मोदी के पास कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा है. ऐसे में अब ब्रिटेन की सरकार उनके प्रत्यर्पण की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर भारत भेज सकती है।  मिल रही जानकारी के मुताबिक नीरव मोदी ने अप्रैल 2026 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स का दरवाजा खटखटाया था. इससे पहले ब्रिटेन की अदालतें उनकी सभी अपीलें खारिज कर चुकी थीं. अदालत ने माना था कि भारत की ओर से जेल की व्यवस्था और उनके साथ व्यवहार को लेकर दिए गए आश्वासन पर्याप्त हैं. सूत्रों का कहना है कि अब प्रत्यर्पण में कोई कानूनी बाधा नहीं बची है और ब्रिटेन की एजेंसियों ने नीरव मोदी को भारत के हवाले करने की प्रशासनिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।  आपको बता दें कि नीरव मोदी मार्च, 2019 से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद हैं. उन्हें सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन और ईडी ने पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भारत लाने की मांग की है. ऐसे में कूटनीतिक सूत्रों का दावा है कि अब नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण कभी भी हो सकता है।  किन-किन मामलों में फंसा है नीरव मोदी? भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी भारत में तीन अलग-अलग मामलों में वांछित है. इनमें पंजाब नेशनल बैंक घोटाले की सीबीआई जांच, मनी लॉन्ड्रिंग का ईडी मामला और सबूतों- गवाहों से छेड़छाड़ का मामला शामिल है. अप्रैल, 2021 में ब्रिटेन की तत्कालीन गृह सचिव प्रीति पटेल ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी. इसके बाद नीरव मोदी की सभी जमानत याचिकाएं और कानूनी अपीलें खारिज हो चुकी हैं. मार्च 2026 में उसने भारत भेजे जाने के खिलाफ आखिरी अपील भी हार दी. इसके बाद उसने फ्रांस स्थित यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जहां से भी उसे राहत नहीं मिली है और अब उसके प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो चुका है। 

WhatsApp यूजरनेम फीचर पर सरकार की चिंता, ऑनलाइन ठगी का खतरा बताया

नई दिल्ली इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) ने वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर (Username Feature) पर जवाब देने के लिए मेटा (Meta) को तीन दिन की अतिरिक्त मोहलत दे दी है। भारत में कंपनी के प्लेटफॉर्म्स को लेकर बढ़ती नियामकीय जांच के बीच अब मेटा (Meta) को अपना जवाब 9 जुलाई तक सौंपना होगा। दरअसल, केंद्र सरकार ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप के अलावा टेलीग्राम (Telegram) और सिग्नल (Signal) को भी नोटिस जारी कर उनके यूजरनेम फीचर (Username Feature) और धोखाधड़ी रोकने के लिए अपनाए गए सुरक्षा उपायों की जानकारी मांगी थी। सरकारी अधिकारी वॉट्सऐप के प्रस्तावित यूजरनेम सिस्टम में लागू किए जाने वाले प्रतिबंधों, वेरिफिकेशन (Verification) प्रक्रिया और यूजर्स के लिए उपलब्ध रिपोर्टिंग मैकेनिज्म (Reporting Mechanism) की भी समीक्षा कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से जारी नोटिस नए डिजिटल पहचान फीचर्स (Digital Identity Features) से जुड़े संभावित जोखिमों की व्यापक समीक्षा का हिस्सा हैं। सरकार विशेष रूप से इस बात का आकलन कर रही है कि कहीं ऐसे फीचर्स मौजूदा मोबाइल नंबर आधारित पहचान प्रणाली (Phone Number-based Authentication) को कमजोर तो नहीं करेंगे। क्या है पूरा मामला?  दरअसल, पूरा बवाल वॉट्सऐप में यूजरनेम फीचर को लेकर है. मेटा का इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप पर यूजरनेम बेस्ट अकाउंट को रोलआउट किया जाना है. इसके लिए कंपनी ने यूजरनेम रिजर्व करने का ऑप्शन दिया. कंपनी ने बताया कि वह इस साल के अंत तक यूजरनेम फीचर को रोल आउट कर देगी।  क्या है वॉट्सएप का यूजरनेम फीचर मेटा के मालिकाना हक वाले प्लेटफॉर्म वॉट्सएप ने हाल ही में एक नए यूजरनेम फीचर की घोषणा की थी। इस फीचर की मदद से यूजर्स अपना फोन नंबर शेयर किए बिना भी दूसरों से बातचीत कर सकेंगे। यह यूजर्स के लिए एक ऑप्शनल यूनिक आइडेंटिफायर (पहचान) की तरह काम करेगा। यह यूजरनेम हमेशा '@' सिंबल से शुरू होगा, जैसे- @Name123। इसका इस्तेमाल करके दूसरे लोग आपको मैसेज या कॉल कर सकेंगे और आपका फोन नंबर पूरी तरह से प्राइवेट रहेगा। यह यूजरनेम आपके प्रोफाइल पर दिखने वाले डिस्प्ले नेम से अलग होगा। डिस्प्ले नेम एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम हर अकाउंट के लिए बिल्कुल यूनिक होगा। एप में ऐसे काम करेगा यह नया सिस्टम  वॉट्सएप के लेटेस्ट वर्जन में यूजर्स 'सेटिंग्स' में जाकर, फिर 'अकाउंट' और उसके बाद 'यूजरनेम' पर क्लिक करके अपनी पसंद का यूजरनेम रिजर्व कर सकते हैं। जिन लोगों के पास आपका फोन नंबर सेव नहीं है, उन्हें ग्रुप चैट, डायरेक्ट मैसेज या कॉल के दौरान डिफॉल्ट रूप से आपका यूजरनेम ही दिखाई देगा। मेटा के मुताबिक, अगर आपकी पसंद का यूजरनेम पहले से किसी ने ले रखा है, तो आपको दूसरा नाम चुनना होगा। इसके अलावा, कुछ खास यूजरनेम बिजनेस, सरकारों या पब्लिक फिगर्स के लिए सुरक्षित रखे गए हैं, जिन्हें कोई दूसरा व्यक्ति क्लेम नहीं कर सकता है। मेटा को सरकार ने भेजा है नोटिस  इस फीचर को लेकर सरकार ने बुधवार को मेटा को नोटिस भी भेजा था. साथ ही इसे रोलाउट करने के निर्देश दिए थे. इसके अलावा 3 दिन के भीतर  जवाब देने को कंपनी को कहा गया था. सरकार को आशंका है कि यूजरनेम बेस्ड फीचर को लेकर सरकार ने साइबर ठगी के खतरे की आशंका जाहिर की. यूजरनेम से लोग कन्फ्यूज हो सकते हैं. साथ ही फर्जी नाम का इस्तेमाल कर ठगी जैसी वारदात को अंजाम दे सकते हैं और लोगों को चुना लगा सकते हैं।  मुश्किल हो सकती है यूजर बेस्ड अकाउंट की पहचान यूजरनेम बेस्ड अकाउंट की पहचान मुश्किल हो सकती है. साथ ही मिलते जुलते यूजरनेम का इस्तेमाल कर लोग साइबर ठगी कर नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके अलावा फर्जी पहचान होने का खतरा रहेगा. साइबर ठग इस फीचर का फायदा उठा सकते हैं. इसमें असली नकली का भेद मिट जाएगा. ब्रांड और सेलिब्रिटी की नकल होने का खतरा भी बढ़ जाएगा. स्पैम मैसेज में बढ़ोतरी हो जाएगी. ईडी जैसी जांच एजेंसी के लिए एक चुनौती हो सकती है. सोशल इंजीनियरिंग अटैक का भी खतरा बढ़ेगा।  सरकार को इस फीचर से क्या परेशानी है? मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि वॉट्सएप का यह नया फीचर धोखाधड़ी, ऑनलाइन स्कैम और रूप बदलकर ठगी करने की घटनाओं को बढ़ावा दे सकता है। सरकार का मानना है कि फीचर इनेबल होने के बाद पहली बार संपर्क करने वाले व्यक्ति को यूजर का फोन नंबर नहीं दिखेगा, जिससे अपराधियों की पहचान करना मुश्किल हो जाएगा। मंत्रालय ने 1 जुलाई को भेजे अपने नोटिस में साफ कहा है कि इस फीचर के आने से ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और इम्पर्सनेशन हमलों के मामले काफी बढ़ सकते हैं। इससे गलत इरादे रखने वाले अपराधियों को पीड़ितों को ढूंढने और उन्हें मैसेज भेजने में आसानी हो जाएगी। इसके अलावा, इस फीचर से पहचान चुराना भी आसान हो जाएगा। अपराधी आम लोगों, सरकारी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी एजेंसियों से मिलते-जुलते यूजरनेम रखकर लोगों को आसानी से अपना शिकार बना सकते हैं। यूजरनेम vs डिस्प्ले नेम डिस्प्ले नेम को बदला जा सकता है और वह कई लोगों का एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम हमेशा यूनिक (यूनिवर्सल) होगा। सुरक्षित यूजरनेम सरकार, बिजनेस और वीआईपी लोगों के नाम वाले यूजरनेम को कोई भी आम यूजर बुक नहीं कर पाएगा, ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके। इधर, मेटा की मैसेजिंग कंपनी व्हाट्सएप ने कहा है कि सेलिब्रिटी, और पब्लिस स्पेस में पॉपुलर लोगों के यूजरनेम को रिजर्व रखा जाएगा. यह एक ऑप्शनल सर्विस है।   

जेल में पंजाबी कैदी से बढ़ी नजदीकियां! जालंधर की लेडी अफसर पर प्रेम संबंध, फॉरेन ट्रिप और कॉस्मेटिक सर्जरी के आरोप

जालंधर  कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में एक पंजाबी मूल की पूर्व महिला जेल गार्ड को एक कैदी के साथ प्रेम संबंध बनाने और अपने पद का दुरुपयोग करने के मामले में अदालत ने दो साल की सशर्त सजा सुनाई है। सजा के तहत उसे निर्धारित अवधि तक घर में नजरबंद रहना होगा और अदालत की शर्तों का पालन करना होगा।  31 वर्षीय रमनदीप एबॉट्सफोर्ड की रहने वाली हैं। रमनदीप ने मार्च 2021 में नॉर्थ फ्रेजर प्रीट्रायल सेंटर में करेक्शनल ऑफिसर (जेल गार्ड) के रूप में नौकरी शुरू की थी। सितंबर 2021 से लगभग एक वर्ष तक उनका एक कैदी के साथ गुप्त प्रेम संबंध रहा। कैदी जेल के भीतर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता था। रमनदीप को इस बात की जानकारी थी और वह तलाशी अभियान से पहले कैदी को सतर्क कर देती थीं।  रमनदीप ने अदालत में कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि कैदी के पास मोबाइल कैसे पहुंचा, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया।  24 जून को फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश दिबा माज्जुब ने कहा कि रमनदीप ने अपने कृत्य से जेल के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को खतरे में डाला। अदालत ने माना कि आरोपी ने अपराध स्वीकार किया है, लेकिन यह केवल एक साधारण गलती नहीं बल्कि सार्वजनिक विश्वास का गंभीर उल्लंघन था।  पूरा मामला तब सामने आया, जब एक वरिष्ठ जेल अधिकारी के घर पर जानलेवा हमले की साजिश की जांच शुरू हुई। जांच एजेंसियों का आरोप है कि जालंधर मूल की महिला अधिकारी ने ही उस अधिकारी की कार की नंबर प्लेट की फोटो कैदी तक पहुंचाई थी। इसके बाद कथित तौर पर उसी जानकारी के आधार पर अधिकारी की पहचान कर पूरी साजिश रची गई। यह मामला बाद में कनाडा पुलिस की प्रोजेक्ट साउथ जांच का अहम हिस्सा बना। 3 जुलाई को ऑन्टारियो सुपीरियर कोर्ट की अनुमति के बाद 563 पन्नों वाले ITO (इन्फॉर्मेशन टू ऑब्टेन) के कुछ हिस्से सार्वजनिक किए गए, जिनसे पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ। मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। महिला अधिकारी पेड लीव पर हैं, जबकि कैदी अब भी जेल में बंद है। जांच एजेंसियों ने उसका नाम अमेरिका के वांटेड ड्रग तस्कर रॉयन वेडिंग के कथित ड्रग नेटवर्क से भी जोड़ा है। दोसांझ गांव की निशवंत, कैदी ड्राइवर के तौर पर कनाडा गया कनाडा पुलिस के मुताबिक निशवंत कौर दोसांझ का परिवार पंजाब के जालंधर जिले के दोसांझ कलां गांव से जुड़ा बताया जाता है। वह ब्रिटिश कोलंबिया के ऐबट्सफोर्ड में रहती हैं और टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर में कॉर्पोरल थीं। 32 वर्षीय गुरप्रीत सिंह पंजाब से ट्रक ड्राइवर के रूप में कनाडा गया था। बाद में जांच एजेंसियों ने उसका नाम अमेरिका के वांछित ड्रग तस्कर रायन वेडिंग के कथित ड्रग तस्करी नेटवर्क से जोड़ा। अक्टूबर 2024 से वह टोरंटो जेल में बंद है और अमेरिका प्रत्यर्पण की प्रक्रिया का सामना कर रहा है। दोनों के बीच पहले से प्यार, जेल में देख फिर रिश्ते सक्रिय हुए ITO के मुताबिक गुरप्रीत के अक्टूबर 2024 में टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर पहुंचने से पहले से ही दोनों के बीच लंबे समय से निजी संबंध थे। गुरप्रीत के जेल पहुंचने के बाद निशवंत को पता चला तो उनके बीच का यह रिश्ता फिर से सक्रिय हो गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि निशवंत ने अपनी ड्यूटी उसी टावर और ब्लॉक में लगवा ली, जहां गुरप्रीत बंद था। अक्टूबर 2024 से 2025 तक दोनों के बीच लगातार निजी मुलाकातें होती रहीं। सेल के बाहर ज्यादा समय, यहीं से बढ़ा शक पुलिस के अनुसार निशवंत अक्सर गुरप्रीत की सेल के आसपास जरूरत से ज्यादा समय बिताती थीं। जेल सुपरवाइजरों ने यह भी नोटिस किया कि वह गुरप्रीत से मिलने के बाद उसके पूर्व सेलमेट से भी मिलती थीं। जांचकर्ताओं का कहना है कि इसी असामान्य गतिविधि के बाद दोनों पर निगरानी बढ़ाई गई। जेल के फोन के अलावा कथित अवैध मोबाइल से भी संपर्क ITO के मुताबिक दोनों जेल के आधिकारिक फोन सिस्टम के अलावा गुरप्रीत के पास मौजूद कथित अवैध मोबाइल फोन के जरिए भी लगातार संपर्क में थे। जांच के दौरान गुरप्रीत की कई बातचीत इंटरसेप्ट कर मॉनिटर की गई। जांच दस्तावेजों में दावा किया गया है कि निशवंत ने एक सहकर्मी को बताया था कि गुरप्रीत ने उन्हें महंगे गिफ्ट दिए, कॉस्मेटिक सर्जरी के लिए पैसे दिए और विदेश यात्राओं का खर्च भी उठाया। जांच अधिकारी डिटेक्टिव कांस्टेबल एंटोनियो डी ओनोफ्रियो ने लिखा कि गुरप्रीत का निशवंत पर इतना प्रभाव था कि यह एक जेल अधिकारी और कैदी के रिश्ते के लिहाज से बेहद असामान्य था। नंबर प्लेट से हत्या की साजिश तक में शामिल यॉर्क रीजनल पुलिस के मुताबिक जून 2025 में एक वरिष्ठ करेक्शनल अधिकारी की हत्या की साजिश रची गई। अधिकारी के घर पर मुंह ढके हमलावर ने हमला करने की कोशिश भी की। ITO में आरोप है कि गुरप्रीत ने जेल के बाहर मौजूद सहयोगियों के जरिए पूरी योजना बनाई, जबकि निशवंत ने कथित तौर पर 'इंटरनल फैसिलिटेटर' की भूमिका निभाई। पुलिस का दावा है कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारी की कार की नंबर प्लेट की फोटो लेकर गुरप्रीत तक पहुंचाई। बाद में इसी जानकारी के आधार पर वाहन का रिकॉर्ड निकाला गया और अधिकारी के घर की पहचान की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इसी घटना के बाद प्रोजेक्ट साउथ जांच का दायरा बढ़ा। निशवंत की नाराजगी का बदला लिया इस मामले में सार्वजनिक किए गए अदालत दस्तावेजों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि गुरप्रीत सिंह की वरिष्ठ जेल अधिकारी से क्या रंजिश थी। हालांकि पुलिस का दावा है कि निशवंत दोसांझ की उस अधिकारी से नाराजगी थी और उसी के बाद कथित साजिश रची गई। जांच में और भी कई नाम 563 पन्नों के ITO में निशवंत और गुरप्रीत के अलावा कई पुलिस अधिकारियों और सिविलियन के नाम भी जांच के दायरे में होने का उल्लेख है। एजेंसियां इनके बीच कथित संपर्क और सहयोग की भी जांच कर रही हैं। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर में पहले भी कंट्राबैंड और भ्रष्टाचार के मामले सामने आ चुके हैं। इसी वजह से जेल पहले से जांच एजेंसियों की … Read more

कोरोना के बाद बढ़ी स्लीपिंग पिल्स की मांग! ICMR रिपोर्ट में लाइफस्टाइल बदलाव का बड़ा खुलासा

जबलपुर   भागदौड़ और तनावभरी जीवनशैली के बीच पर्याप्त नींद न लेना लोगों की सेहत के लिए गम्भीर चुनौती बनता जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन छह घंटे से भी कम नींद ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कम नींद न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि कार्यक्षमता और अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर डालती है। एमपी के जबलपुर शहर में भी अनिद्रा की स्थिति गम्भीर होती जा रही है। ड्रग इंस्पेक्टर डॉ. डीके जैन के अनुसार कोरोना काल के बाद से नींद से सम्बंधित विभिन्न दवाइयों की मांग और बिक्री में भारी उछाल आया है। स्थानीय थोक दवा व्यापारियों के मुताबिक शहर में हर माह सवा करोड़ से दो करोड़ रुपए की नींद सम्बंधी दवाएं बिक रही हैं। शरीर की जैविक जरूरत मनोचिकित्सक डॉ. ओपी रायचंदानी के अनुसार नींद शरीर का एक बायोलॉजिकल फंक्शन है, जो सभी अंगों को री-स्टोर करती है। इसे आलस्य समझना गलत है। उनके अनुसार शहर में दस में से छह लोग कम नींद के कारण किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से प्रभावित हैं। सेहत पर असर नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, एक वयस्क के लिए रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद अनिवार्य है। रिसर्च के अनुसार खराब स्लीप -क्वालिटी के कारण देश को सालाना लगभग 29 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जब कोई कर्मचारी अधूरी नींद के साथ काम करता है, तो उसकी कार्यक्षमता (प्रोडक्टिविटी) घट जाती है और गलतियों की आशंका बढ़ जाती है। अनिद्रा के कारण विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली और डिजिटल आदतें अनिद्रा की प्रमुख वजह बन रही हैं। इनमें प्रमुख हैं- डिजिटल स्क्रीन की लत: सोने से पहले लम्बे समय तक मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल स्क्रीन का उपयोग। बिंज वाचिंग : लोग सोशल मीडिया और देर रात तक फिल्में या वेब सीरीज देखने के आदी हैं। सामाजिक और आर्थिक कारक: शहरी शोर-शराबा, भीषण गर्मी और महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारियों का मानसिक दबाव। नींद लाने के लिए करें ये काम -समय पर नींद लाने के लिए रात का खाना सोने से 3-4 घंटे पहले खा लें। -भारी, मसालेदार या तला हुआ खाना सोने में दिक्कत पैदा कर सकता -रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में शहद या खसखस मिलाकर पीने से मस्तिष्क शांत होता है और अच्छी नींद आती है। -शाम 4 बजे के बाद चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स जैसे कैफीन वाले पदार्थों का सेवन न करें। -सोने वाले कमरे को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें। -बिस्तर पर केवल सोने के उद्देश्य से जाएं। वहां बैठकर टीवी देखने या ऑफिस का काम करने से बचें।

7 देशों ने मिलाया हाथ, Crude Oil Production पर लिया बड़ा फैसला; पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा असर?

 नई दिल्ली मिडिल ईस्ट टेंशन लगभग खत्म हो गई है, दुनिया की तेल जरूरतों के बड़े हिस्से की आवाजाही और सप्लाई के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट से तेल-गैस से लदे जहाज निकलने लगे. इन सबके बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरते हुए 72 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई।  Crude Oil Price Crash और Hormuz पर हालात सामान्य होने के बीच अब तक एक-दूसरे से लड़ते झगड़ते नजर आने वाले ओपेक+ (OPEC+) देशों ने एक साथ मिलकर बड़ा फैसला लिया है, जो दुनिया के लिए राहत भरा है।  Crude की कीमतों में गिरावट जारी इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है.  खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड की कीमत और भी ज्यादा फिसल गई. Brent Crude Oil Price 1 फीसदी के आसपास फिसलकर 71 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था. तो वहीं WTI Crude Oil Price फिसलकर 68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. इसके अलावा मर्बन क्रूड ऑयल की कीमत मामूली बढ़त के साथ 66 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थी। संकट टला, अब आई ये राहत भरी खबर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बात बनने और बैठकों को लेकर पॉजिटिव संकेतों के बीच पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश से लेकर ब्रिटेन तक, दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस का संकट खत्म होता नजर आया है. क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट ओपन है और यहां से तेल-गैस के टैंकरों की आवाजाही जारी है. यानी Oil-Gas सप्लाई चेन फिर से सुचारू नजर आ रही है. हालांकि, ये युद्ध पूर्व स्तर से अभी भी नीचे बनी हुई है, लेकिन इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव और गिरावट के रूप में दिखने भी लगा है।  इस बीच एक और राहत भरी खबर ये आई है कि ओपेक+ (OPEC+) देशों ने भी तेल को लेकर बड़ा फैसला किया है. इसमें शामिल सात देशों ने एक साथ मिलकर अगले महीने से तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है. रिपोर्ट के मुताबिक,  सऊदी अरब और रूस की अगुवाई में प्रति दिन 1.88 लाख बैरल एक्स्ट्रा क्रू़ड ऑयल प्रोड्यूश करने को मंजूरी दी गई है. मतलब अब आने वाले समय में तेल पर्याप्त तेल बाजार में सप्लाई होगा. लगातार 5वें महीने इस बढ़ोतरी को लेकर सहमति बनी है।  एक साथ आए ये 7 ओपेक+ देश गौरतलब है कि बीते कुछ समय में ओपेक+ देशों के बीच उत्पादन कोटा, बाजार हिस्सेदारी और तेल की कीमतों को लेकर बड़े मतभेद देखने को मिल रहे थे. कुछ देश क्रूड प्राइस को लेकर प्रोडक्शन सीमित रखने पर जोर दे रहे थे, तो कुछ उत्पादन में इजाफा कर इनकम बढ़ाने पर फोकस कर रहे थे. लेकिन इन मतभेदों के बाद अब ओपेक+ में शामिल देश सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने एकमत से उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है।  OPEC+ देशों (तेल उत्पादक) देशों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, 'बाजार की स्थितियों पर नजर रखना और उनका आकलन करना जारी रखा जाएगा, इसके अलावा तेल बाजार की स्थिरता को बनाए रखने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत सतर्क दृष्टिकोण अपनाने को महत्व दिया जाएगा।  क्या भारत में सस्ता होगा Petrol-Diesel?  अगर तेल उत्पादक देशों की सहमति के मुताबिक, अगले महीने से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल क्रूज प्रोडक्शन बढ़या जाता है, तो निश्चित तौर पर कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा और इनमें गिरावट देखने को मिल सकती है. Crude Price Fall से इसके आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों राहत मिलेगी, क्योंकि OMCs की लागत कम होगी और इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद भी बढ़ेगी।   हालांकि, ये तुरंत सस्ता होगा कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि देश में Petrol-Diesel कितना और कब सस्ता होगा, ये कई कारकों पर निर्भर करेगा. भारत में फ्यूल प्राइस कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव के साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव, रिफाइनिंग कॉस्ट, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और राज्यों में लागू VAT पर भी निर्भर करते हैं. देखने वाली बात ये होगी कि प्रोडक्शन बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कितने समय के लिए नीचे बनी रहती हैं।  पेट्रोलियम मंत्री ने दिए थे ये संकेत  मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे भारी भरकम नुकसान के बीच भारत में करीब चार साल बाद अचानक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार चार बार में 7 रुपये प्रति लीटर के आसपास का इजाफा किया गया था. अब होर्मुज ओपन होने और कच्चा तेल सस्ता होने के बीच पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने बीते हफ्ते कीमतों में कटौती के संबंध में तस्वीर साफ की थी।  Hardeep Singh Puri ने कहा था कि निजी क्षेत्र की कंपनियों और OMCs के पास जो शेयर हैं, वे दो से ढाई महीने पहले खरीदे गए थे, जब कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं, अगर कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. इस बारे में अटकलें लगाना मेरे लिए उचित नहीं होगा।   

समंदर में बढ़ी भारत की ताकत! INS Mahendragiri की एंट्री से दुश्मनों की बढ़ेगी मुश्किलें

मुंबई  भारतीय नौसेना 11 जुलाई 2026 को अपनी समुद्री ताकत में एक और बड़ा इजाफा करने जा रही है. इस दिन विशाखापट्टनम में स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा. इसके साथ ही जुलाई के दौरान पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) वॉरशिप आईएनएस मालवन का भी कमीशनिंग कार्यक्रम प्रस्तावित है. इन दोनों युद्धपोतों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र और व्यापक इंडो-पैसिफिक में भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को नई मजबूती मिलेगी. स्‍टील्‍थ होने की वजह से INS महेंद्रगिरि रडार को धता बताते हुए मिशन को अंजाम देने में सक्षम है।  INS महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित छठी स्टील्थ फ्रिगेट है. इस प्रोजेक्‍ट के युद्धपोतों को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने किया है. यह युद्धपोत अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक से लैस है, जिससे दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान करना बेहद कठिन हो जाता है. करीब 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक और उपकरणों से निर्मित महेंद्रगिरि भारत के डिफेंस मैन्‍यूफैक्चरिंग की बढ़ती क्षमता का भी प्रतीक है. इसमें आधुनिक मिसाइल सिस्‍टम, पनडुब्बी रोधी हथियार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं. यह वॉर ऑपरेशन के अलावा समुद्री निगरानी, मैरीटाइम सिक्‍योरिटी, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), खोज एवं बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू) तथा अन्य बहुआयामी अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने में सक्षम होगी।  भारतीय नौसेना के अनुसार, महेंद्रगिरि का शामिल होना देश की समुद्री युद्ध क्षमता को और मजबूत करेगा. साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी माना जा रहा है. इससे रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी. इससे पहले 21 जून 2026 को भारतीय नौसेना ने तीन स्वदेशी युद्धपोतों (आईएनएस दुनागिरि, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय) को भी बेड़े में शामिल किया था. लगातार नए स्वदेशी युद्धपोतों के शामिल होने से स्पष्ट है कि भारतीय नौसेना अपने आधुनिकीकरण कार्यक्रम को तेज गति से आगे बढ़ा रही है।  डिफेंस एक्‍सपर्ट का मानना है कि महेंद्रगिरि और मालवन जैसे अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म भारतीय नौसेना को भविष्य की समुद्री चुनौतियों से निपटने में अधिक सक्षम बनाएंगे. साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और समुद्री हितों की सुरक्षा को भी नई मजबूती मिलेगी. बता दें कि इंडिन नेवी ने पिछले कुछ महीनों में अपने बेड़े में कई वॉरशिप को शामिल कर चुकी है. हिन्‍द महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नकेल कसने के लिहाज से इस कदम को अहम माना जा रहा है। 

मध्य प्रदेश में ट्रैफिक जाम से राहत की तैयारी, Google Maps के पीक ऑवर डेटा से तैयार होगा नया रोड प्लान

भोपाल  प्रदेश के बड़े शहरों के भीतर ट्रैफिक के दवाब को कम करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने डी-कंजेशन पॉलिसी पर काम करना शुरू कर दिया है। शहर के सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव वाले लोकेशन पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। शुरुआत में 6 शहरों का चयन कर काम शुरू किया गया है। इसमें जबलपुर में एक कॉरिडोर तैयार किया भी जा चुका है। इसके अलावा शहर में ही एक और नया कॉरिडोर बनाने की तैयारी की जा रही है। वहीं, राजधानी भोपाल में भी 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है। ऐसे 6 शहरों में डी-कंजेशन पॉलिसी के तहत एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने हैं। इन एलिवेटेड कॉरिडोर से बड़े शहरों का ट्रैफिक दबाव होगा कम -भोपाल : शहर के बैरागढ़ इलाके में स्थित लाउखेड़ी से निगम विसर्जन घाट तक 3.7 किमी का 306 करोड़ से कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है, जिसका 80 फीसदी काम पूरा किया जा चुका है। -इंदौर : शहर के एलआइजी से नवलखा चौराहे तक 7.44 किमी का 306 करोड़ से एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार करने का काम शुरू किया जा चुका है। -उज्जैन : शहर के हरिफाटक फ्लाइओवर और चिमनगंज मंडी चौराहे से इंदौर गेट तक दाने वाले 5.32 कि.मी का 945 करोड़ की लागत से कॉरिडोर बनाने का काम शुरू किया जा चुका है। -जबलपुर : शहर में 7 कि.मी का एक कॉरिडोर 1019 करोड़ से बनकर तैयार किया जा चुका है। जबकि, दूसरा बनाने की तैयारी विभाग द्वारा शुरू कर दी गई है। -ग्वालियर: आईआईआईटीएम महारानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा, स्वर्ण रेखा नदी, गिरबाई एबी रोड पर 13.3 किमी का 1065 करोड़ से फोरलेन कॉरिडोर का निर्माण काम 75 प्रतिशत पूरा हो चुका है। -रीवा : शहर में एलिवेटेड कॉरिडोर की डीपीआर बनाई जा रही है, जल्द काम शुरु किया जाएगा। डिजाइन तैयार करने से पहले इन पर विश्लेषण -प्रतिदिन गुजरने वाले वाहनों की संख्या -पीक आवर में जाम की स्थिति -सड़क की क्षमता दुर्घटनाओं का रिकॉर्ड -भविष्य के यातायाता का अनुमान गूगल से डेटा परीक्षण कर बनेगी डिजाइन एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने से पहले वैज्ञानिक आधारों पर परीक्षण किया जाता है। खास बात यह है कि गूगल से पहले हर घंटे का डेटा एकत्रित किया जाता है। इसके बाद इस बात का विश्लेषण करते हैं कि, सबसे पीक ऑवर में यहां ट्रैफिक की क्या स्थिति रहती है। उसके आधार पर कॉरिडोर का लेआउट-डिजाइन तैयार करते हैं। इसका डिजाइन ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय से तैयार करवाया जा रहा है। साथ ही रोड सेफ्टी का भी ध्यान रखा जा रहा है।

Indore Green Bond Model की सफलता के बाद रायपुर भी जारी करेगा ₹100 करोड़ का ग्रीन बॉन्ड

 इंदौर  देश में ग्रीन बांड के जरिए शहरी विकास के लिए पूंजी जुटाने का सफल माडल पेश करने वाले इंदौर नगर निगम के नक्शे कदम पर अब रायपुर नगर निगम भी चल पड़ा है। इंदौर की कार्यप्रणाली और अनुभव के आधार पर रायपुर नगर निगम करीब 100 करोड़ रुपये का बांड जारी करने जा रहा है। बांड जारी करने की पूरी प्रक्रिया में इंदौर नगर निगम के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक मार्गदर्शन दिया है। यह बांड जुलाई के अंतिम सप्ताह से अगस्त के पहले सप्ताह के बीच जारी हो जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि इंदौर के ग्रीन बांड की तर्ज पर रायपुर के बांड को भी निवेशकों का अच्छा प्रतिसाद मिलेगा। ग्रीन बांड से मिलने वाली राशि का उपयोग रायपुर नगर निगम शहर में इलेक्ट्रानिक मार्केट और कमर्शियल कांप्लेक्स विकसित किए जाएंगे। एए रेटिंग मिली है रायपुर के बांड को रायपुर नगर निगम द्वारा शहर के विकास के लिए जारी किए जाने वाले बांड को एए रेटिंग मिली है, जबकि इंदौर नगर निगम द्वारा जारी बांड को एए प्लस रेटिंग मिली थी। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि एए रेटिंग को सामान्यत: अच्छा माना जाता है। रायपुर नगर निगम ने बांड से जुटाई जाने वाली राशि से किए जाने वाले विकास कार्यों के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी कर ली है। शहर के विकास में हिस्सेदारी निभा रहे नागरिक बांड के माध्यम से शहर के विकास के लिए राशि जुटाने के इंदौर नगर निगम के माडल ने नगरीय निकायों के लिए वैकल्पिक वित्तीय संसाधन विकसित करने का नया रास्ता खोल दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ और नगरीय निकाय भी हैं, जो इसी तर्ज पर बांड लाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके माध्यम से आम नागरिक अपने शहर के विकास में हिस्सेदारी निभा रहे हैं। यह है इंदौर का बांड मॉडल     जलूद में 60 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए इंदौर नगर निगम ने 10 फरवरी 2023 को ग्रीन बांड जारी किया था।     सिर्फ तीन दिन में ही यह छह गुना अधिक सब्सक्राइब हो गया था।     ग्रीन बांड के माध्यम से नगर निगम ने 244 करोड़ रुपये जुटाए थे।     इस राशि से स्थापित किए गए सोलर प्लांट से निगम को प्रतिमाह करीब पांच करोड़ रुपये की बचत हो रही है।     इंदौर नगर निगम ग्रीन बांड होल्डर्स को 8.25 प्रतिशत ब्याज दे रहा है     ग्रीन बांड के लगभग 18 हजार बांड होल्डर हैं। कई निकाय भी ले रहे हैं सलाह     इंदौर एक दौर है। सिर्फ रायपुर ही नहीं, कई अन्य नगरीय निकाय भी इंदौर के बांड माडल को अपनाने जा रहे हैं। ये निकाय भी विकास कार्यों के लिए जनता से राशि जुटाना चाहते हैं। इंदौर ग्रीन बांड के बाद अब जल्द ही ब्लू बांड भी जारी हो जाएगा। -पुष्यमित्र भार्गव, महापौर इंदौर सितंबर के अंत तक जारी हो जाएगा ब्लू बांड नर्मदा के चौथे चरण के लिए एक हजार करोड़ रुपये जुटाने के उद्देश्य से इंदौर नगर निगम द्वारा लाया जाने वाला ब्लू बांड सितंबर के अंत तक जारी हो जाएगा। सीए संतोष मुछाल ने बताया कि निगम ने इसके लिए तैयारी पूरी कर ली है। दस्तावेज भी तैयार कर लिए गए हैं। लगभग सभी अनुमतियां मिल गई हैं।