नटराजन मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, कांग्रेस विधायक आज राष्ट्रपति से करेंगे मुलाकात
भोपाल सुप्रीम कोर्ट कल कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने अपने राज्यसभा नामांकन पत्रों को खारिज किए जाने को चुनौती दी है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायमूर्ति पीके मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए इसे अत्यंत तत्काल सुनवाई योग्य मामला बताया और शीघ्र सुनवाई या अंतरिम आदेश की मांग की। अदालत ने उनकी दलीलों पर संज्ञान लेते हुए मामले को कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। सिंघवी ने दलील दी कि रिटर्निंग ऑफिसर ने यह कहते हुए नामांकन खारिज किया कि नटराजन ने लंबित आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी, जबकि वास्तव में केवल समन जारी हुआ था और मामले में अभी तक संज्ञान भी नहीं लिया गया था। उन्होंने कहा कि यहां तक कि संज्ञान भी नहीं लिया गया था, फिर भी नामांकन खारिज कर दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि रिटर्निंग ऑफिसर का निर्णय अवैध, मनमाना और पक्षपातपूर्ण है। साथ ही नामांकन खारिज करने के आदेश को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है। याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मीनाक्षी नटराजन की ओर से पेश होते हुए आरोप लगाया कि उनका नामांकन गलत कानूनी आधार पर संक्षेप में खारिज किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई, लेकिन साथ ही कहा कि वास्तविक कानूनी उपाय चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटीशन) दायर करना है। मीनाक्षी नटराजन को चुनाव आयोग पर भरोसा पूरे मामले पर मीनाक्षी नटराजन का भी बयान सामने आया था। चुनाव आयोग के दफ्तर से बाहर आकर मीडिया से उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने हमारी बात सुनी है और सिंघवी जी ने पूरे मामले को विस्तार से उनके समक्ष रखा है। हमें संवैधानिक संस्थाओं पर पूरा भरोसा है। हम अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे। चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार जो जानकारी सामने आ रही है, इसके मुताबिक कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को करीब 35 मिनट तक चुनाव आयुक्त से बातचीत की थी। इस प्रतिनिधिमंडल में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, मीनाक्षी नटराजन, भूपेश बघेल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बाहर आकर प्रेस को ब्रीफ किया था। उसमें सिंघवी ने बताया था कि चुनाव आयोग तक हमने हमारी बात पहुंचा दी है। उन्होंने हमारी बात पर विचार कर फैसला लेने का कहा है। हालांकि ये फैसला कब आएगा, इसका कहीं जिक्र नहीं है। बुधवार रात तक कोई फैसला नहीं आया। अब संभावना जताई जा रही है कि कुछ देर में चुनाव आयोग मामले में अपना फैसला सुना सकता है। न्याय में इतनी देरी क्यों : सिंघार नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस को आज सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उनका कहना था कि चुनाव आयोग चाहता तो इस मामले में बुधवार को ही फैसला दे सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में भाजपा उम्मीदवार के मामले में चुनाव आयोग ने निर्णय लिया था, लेकिन इस प्रकरण में आयोग ने कोई विचार नहीं किया। सिंघार ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा, "हमने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई और निर्णय की मांग की थी। अदालत ने कल का समय दिया है, लेकिन न्याय में इतनी देरी क्यों हो रही है? कई मामलों में रातभर सुनवाई होती रही है।" उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा की कठपुतली की तरह काम कर रहा है और संवैधानिक संस्थाओं का उपयोग रबर स्टांप की तरह किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने विश्वास जताया कि सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को न्यायपूर्ण फैसला देगा। तीनों राज्यसभा सीटें जीत सकती है भाजपा दरअसल, मामले पर चुनाव आयोग की चुप्पी ने कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के अनुसार, आयोग इस मामले में कानूनी राय लेने के बाद फैसला करेगा। यदि तब तक आयोग कांग्रेस के पक्ष में कोई फैसला नहीं करता या खामोश ही रहता है तो भाजपा उम्मीदवार महेश केवट का निर्वाचन तय हो जाएगा। बाकी दो सीटों पर भाजपा उम्मीदवार तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल का निर्वाचन निर्विरोध तय है। ऐसे में प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटें भाजपा बिना लड़े जीत जाएगी। सिंघार बोले- न्याय में देरी क्यों? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- कांग्रेस को आज सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा। चुनाव आयुक्त चाहते तो कल इस बारे में निर्णय दे सकते थे। खारिज करना या स्वीकार करना, यह विशेष अधिकार चुनाव आयोग को है। हरियाणा में चुनाव आयोग ने हस्तक्षेप किया था, गुजरात में हस्तक्षेप किया था तो एमपी में क्यों नहीं किया? सिंघार ने भोपाल में मीडिया से कहा- झारखंड में बीजेपी कैंडिडेट को आप (चुनाव आयोग) वैलिड कर सकते हैं तो मीनाक्षी नटराजन के मामले में फैसला क्यों नहीं लिया? इससे स्पष्ट है कि चुनाव आयोग भाजपा के रबर स्टैंप के रूप में काम कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पर चुनाव आयोग ने कोई विचार नहीं किया। उनके रिटर्निंग ऑफिसर ने स्पष्ट रूप से नियमों की धज्जियां उड़ाईं। सुप्रीम कोर्ट ने कल का समय दिया है। मैं समझता हूं कि इसमें न्याय होगा लेकिन न्याय में इतनी देरी क्यों हो रही है? सुप्रीम कोर्ट इस पर निर्णय आज करता तो बेहतर होता क्योंकि आज नामांकन वापसी की लास्ट डेट है। अदालत के निर्णय के बाद ही करें कार्यवाही वहीं, पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा विधानसभा पहुंचे और अपने समर्थकों के साथ विधानसभा गेट पर नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा की निर्वाचन शाखा भाजपा के इशारे पर काम कर रही है। शर्मा ने कहा कि ऐसी जानकारी मिल रही है कि दोपहर एक से तीन बजे के बीच भाजपा के तीनों राज्यसभा उम्मीदवारों को विजयी घोषित कर प्रमाणपत्र दिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, "हमने इस पर आपत्ति दर्ज कराई है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए विधानसभा की निर्वाचन शाखा को अदालत के निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई करनी चाहिए।" कांग्रेस की बैठक में होगी चर्चा गुरुवार को दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक भी आयोजित की गई है। पार्टी ने अपने सभी महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों को दिल्ली तलब किया है। … Read more