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मानवाधिकार मामलों की सुनवाई के लिए पंजाब में बनेगी खास अदालतें, RTI में सामने आई जानकारी

 चंडीगढ़
पंजाब में मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े अपराधों की सुनवाई के लिए प्रत्येक जिले में विशेष अदालत नामित करने का प्रावधान है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मिली जानकारी और पंजाब सरकार की अधिसूचना से यह सामने आया है। पीपल वेलफेयर सोसायटी चंडीगढ़ ने मानवाधिकार संरक्षण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने की मांग उठाई है।

पंजाब सरकार ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 30 के तहत विशेष अदालतों के गठन के संबंध में अधिसूचना जारी की थी। इसमें प्रत्येक जिले में दूसरी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत को विशेष अदालत के रूप में नामित करने का प्रावधान है। जिस जिले में केवल एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत है, वहां पहली अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत को यह जिम्मेदारी देने की व्यवस्था है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य अधिनियम के तहत आने वाले अपराधों की सुनवाई संबंधित क्षेत्राधिकार में कराना है। सोसायटी ने कहा कि कानूनी प्रावधानों के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि आम लोगों, पीड़ितों और संबंधित संस्थाओं को विशेष अदालतों की व्यवस्था, अपने अधिकारों और उपलब्ध कानूनी उपायों की जानकारी हो। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जनसूचना अधिकारी की ओर से 13 अक्तूबर 2026 को जारी पत्र में अधिवक्ता कंवर पहल सिंह को आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का उल्लेख है। पत्र में 11 सितंबर 2026 को दिए गए दो आवेदनों के संबंध में दस्तावेजों की प्रतियां भेजने की जानकारी दी गई है।

विशेष अदालतों में सुनवाई का प्रावधान
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 30 के तहत राज्य सरकार उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से प्रत्येक जिले में सत्र न्यायालय को विशेष अदालत के रूप में निर्दिष्ट कर सकती है। पंजाब सरकार की अधिसूचना में दूसरी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत को नामित करने का प्रावधान बताया गया है। जहां ऐसी दूसरी अदालत नहीं है, वहां पहली अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत को यह जिम्मेदारी देने की व्यवस्था है। 

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