samacharsecretary.com

अमृतधारा: जब कोरापानी के आंगनों में मुसकराया ’जल जीवन’

रायपुर

दूर पहाड़ियों और जंगलों के आंचल में बसे एक छोटे से गांव में सुबह की पहली किरण के साथ ही बर्तनों की खनखनाहट और मीलों दूर पानी की तलाश में पैदल चलती महिलाओं के कदमों की आहट… यह कहानी छत्तीसगढ़ के सारंगढ़दृबिलाईगढ़ जिले की बिलाईगढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत परसदा छोटे के आश्रित गांव कोरापानी की है। महज 25 परिवारों और लगभग 110 की आबादी वाले इस छोटे से गांव के लिए स्वच्छ पीने का पानी वर्षों तक एक बड़ा सपना हुआ करता था। लेकिन आज, मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में जल जीवन मिशन ने इस गांव की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दी है। कभी पानी के गंभीर संकट से जूझने वाला कोरापानी अब राज्य में ग्रामीण जल-स्वावलंबन की एक जगमगाती मिसाल बन चुका है।

जल-संकट की पुरानी गाथा: कुएं, हैंडपंप और लंबी कतारें

कोरापानी का अतीत अभावों और संघर्षों से भरा था। गांव की महिलाओं और मासूम बेटियों का एक बड़ा कीमती समय केवल पीने का पानी जुटाने में ही बीत जाता था। सिर पर गगरियां उठाए कुएं, हैंडपंप और नदी की ओर जाती महिलाएं गांव की रोजमर्रा की नियति बन चुकी थीं। भीषण गर्मी के दिनों में जब भूजल स्तर नीचे गिर जाता था, तब हैंडपंप भी जवाब दे जाते थे और बूंद-बूंद पानी के लिए ग्रामीणों को भारी मशक्कत करनी पड़ती थी। वहीं, मानसून के आगमन के साथ मटमैले और दूषित पानी के इस्तेमाल से जलजनित बीमारियों का खतरा हर समय मंडराता रहता था। इस दैनिक संघर्ष ने न केवल ग्रामीणों की सेहत पर असर डाला, बल्कि महिलाओं की आत्मनिर्भरता और बच्चों की पढ़ाई को भी प्रभावित किया।
संकट के इस दौर में जल जीवन मिशन कोरापानी के ग्रामीणों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ। गांव में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के माध्यम से श्एकल ग्राम सोलर नलजल योजनाश् की शुरुआत की गई। देखते ही देखते गांव के क्षितिज पर 20 हजार लीटर क्षमता की विशाल पानी टंकी आकार लेने लगी और हरित ऊर्जा के रूप में सोलर पैनल स्थापित किए गए। इसके बाद पूरे गांव में पाइपलाइन का जाल बिछाकर सभी 24 परिवारों को क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन से जोड़ दिया गया। इतना ही नहीं, गांव के आंगनबाड़ी केंद्र और शासकीय स्कूल तक भी नल पहुंचाए गए, जिससे अब बच्चों को भी शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो रहा है।

जैसे ही नलों से जल की धारा बही, ग्रामीणों के चेहरों पर बरसों से गायब खुशी लौट आई। अब महिलाओं को पानी के लिए मीलों दूर भटकना नहीं पड़ता, जिससे उनके कीमती समय और शारीरिक श्रम की बचत हो रही है। इस बचे हुए समय का उपयोग वे अपने परिवार की देखभाल, घरेलू कार्यों और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में कर रही हैं। शुद्ध पेयजल मिलने से गांव में डायरिया और पेट से जुड़ी बीमारियों का प्रकोप भी खत्म हो गया है। बच्चों का स्वास्थ्य सुधरा है और उनकी उपस्थिति स्कूल में नियमित हुई है।
इस व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व टिकाऊ बनाने के लिए ’सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के पावन अवसर पर श्जल अर्पण दिवसश् का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, पंचगण और जलवाहिनी की समर्पित महिलाओं की मौजूदगी में नलजल योजना को विधिवत ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दिया गया। ग्रामीणों को जल संरक्षण, स्वच्छता और योजना के रख-रखाव का प्रशिक्षण भी दिया गया, जिससे गांव अब पानी के प्रबंधन में स्वयं सक्षम बन गया है।

अब घर पर आता है पानी, दूर हुई जीवन की परेशानी

आज कोरापानी के आंगनों में मुसकराती जलधाराएं शासन की जनकल्याणकारी नीतियों के सफल क्रियान्वयन की गवाही दे रही हैं। दैनिक जीवन की सबसे बड़ी चिंता दूर होने पर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय, तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की पूरी टीम के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया है। कोरापानी में आया यह ऐतिहासिक परिवर्तन यह साबित करता है कि जब दृढ़ इच्छाशक्ति और सही दिशा में प्रयास हो, तो सुदूर  प्रगति की मुख्यधारा से जुड़ जाता है।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here