samacharsecretary.com

बठिंडा के करनदीप का कमाल, 17,618 फीट की ऊंचाई पर 20 घंटे में पूरी की 122 किमी दौड़

बठिंडा.

हौसले के आगे ऊंचे पहाड़ भी छोटे पड़ जाते हैं। बठिंडा के करनदीप मोंगा ने लद्दाख की बेहद कठिन परिस्थितियों के बीच आयोजित सिल्क रूट अल्ट्रा चैलेंज में हिस्सा लेकर शहर का नाम रोशन किया है। करनदीप ने नुब्रा वैली से शुरू होकर खारदुंगला पास होते हुए लेह तक की 122 किलोमीटर लंबी दूरी 20 घंटे 36 मिनट और 4 सेकेंड में पूरी की।

इस दौरान उन्होंने करीब 17,618 फीट की ऊंचाई पर दौड़ लगाकर अपनी फिटनेस, सहनशक्ति और मजबूत इरादों का परिचय दिया। लद्दाख की ऊंची पहाड़ियों में आयोजित यह अल्ट्रा चैलेंज सामान्य दौड़ से बिल्कुल अलग चुनौती पेश करता है। प्रतिभागियों को लंबी दूरी तय करने के साथ-साथ बेहद ऊंचाई, कम ऑक्सीजन, ठंड, तेज हवाओं और कठिन पहाड़ी रास्तों का सामना करना पड़ता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में 122 किलोमीटर की दौड़ पूरी करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

नुब्रा से खारदुंगला के रास्ते पहुंचे लेह
करनदीप की दौड़ नुब्रा वैली से शुरू हुई। यहां से उन्होंने लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी मार्गों पर दौड़ते हुए खारदुंगला पास की ओर सफर किया। रास्ते में जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती गई, वैसे-वैसे शरीर पर दबाव भी बढ़ता गया। इसके बावजूद उन्होंने अपनी गति और हौसले को बनाए रखा। खारदुंगला के ऊंचे क्षेत्र से गुजरने के बाद उन्होंने लेह की तरफ दौड़ जारी रखी और आखिरकार 122 किलोमीटर का सफर 20 घंटे 36 मिनट 4 सेकेंड में पूरा कर लिया।

17,618 फीट पर दौड़ना आसान नहीं
क चंद कांसल ने कहा कि इतनी अधिक ऊंचाई पर दौड़ लगाना प्रतिभागियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। समुद्र तल की तुलना में यहां ऑक्सीजन काफी कम होती है। ऐसे में लंबे समय तक दौड़ने के लिए शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक मजबूती भी जरूरी होती है। करनदीप ने इन मुश्किल परिस्थितियों का सामना करते हुए अपनी मंजिल हासिल की।

बठिंडा के लोगों ने दी बधाई
करनदीप मोंगा की इस उपलब्धि की जानकारी मिलने के बाद बठिंडा में खेल प्रेमियों और उनके परिचितों में खुशी का माहौल है। शहरवासियों का कहना है कि लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्र में 122 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन पूरी कर करनदीप ने न केवल अपनी व्यक्तिगत क्षमता साबित की, बल्कि बठिंडा का नाम भी गौरवान्वित किया है। उनकी यह उपलब्धि शहर के युवाओं को फिटनेस और साहसिक खेलों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here