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राजस्थान में विधायकों को बड़ा फायदा, सैलरी-पेंशन दोनों में बढ़ोत्तरी

जयपुर  राजस्थान सरकार ने जुलाई से विधायकों को बड़ा तोहफा दिया है। जुलाई से सभी विधायकों की सैलरी में 10% की बढ़ोतरी होने जा रही है। अब विधायकों को हर महीने 40,000 रुपये की जगह 44,000 रुपये का मूल वेतन मिलेगा। यानी सालाना 48,000 रुपये ज्यादा पगार मिलेगी। कितनी है अब सैलरी और भत्ता? फिलहाल, विधायकों को मूल वेतन और भत्ता मिलाकर हर महीने करीब 1,47,000 रुपये मिलते हैं। अब भत्तों में भी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही पूर्व विधायकों की पेंशन में भी इजाफा करने की तैयारी है। पिछले सत्र में हुआ था प्रस्ताव पास राजस्थान की बीजेपी सरकार ने विधानसभा के पिछले सत्र में ही वेतन और पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव पास कर दिया था। राज्य का विधि विभाग जल्द ही इस पर आधिकारिक घोषणा कर सकता है। पूर्व विधायकों की पेंशन राजस्थान में एक बार के पूर्व विधायक को 35,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती है। हर अतिरिक्त 5 साल की सेवा पर 8,000 रुपये जुड़ते हैं। उदाहरण के लिए, 2 बार विधायक रह चुके को 43,000 रुपये, 3 बार वाले को 51,000 रुपये और 6 बार विधायक रहे नेता को 75,000 रुपये पेंशन मिलती है। अब पेंशन में भी इजाफे की तैयारी है, हालांकि नई रकम अभी तय नहीं हुई है। जनता की नाराजगी भी विधायकों की सैलरी बढ़ने पर जनता का कहना है कि जब सरकारी नौकरियां कम हो रही हैं और महंगाई बढ़ रही है, तब नेताओं की सैलरी और पेंशन बढ़ाना सही नहीं है। कई लोगों का कहना है कि विधायकों की सैलरी उनके कामकाज और विकास कार्यों की गुणवत्ता पर आधारित होनी चाहिए।  

CGPSC भर्ती घोटाला: कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका, कहा- युवाओं का भविष्य बर्बाद करना हत्या से बड़ा अपराध

बिलासपुर हाईकोर्ट ने CG-PSC भर्ती घोटाले में एग्जाम कंट्रोलर सहित तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है. मामले में जस्टिस बीडी गुरु ने कहा कि ‘जो प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक करता है, वह लाखों युवाओं के भविष्य से खेलता है, यह कृत्य हत्या से भी गंभीर अपराध है. प्रश्नपत्र लीक कर पीएससी जैसी प्रतिष्ठित संस्था को शर्मसार किया है. मामले के आरोपी बाड़ द्वारा फसल खाने जैसा उदाहरण हैं.’ बता दें, कि CG-PSC 2020 में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई. जिस पर पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर ने सवाल उठाते हुए मामले में जनहित याचिका लगाई. याचिका में बताया गया, कि कैसे अफसर और कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदारों को चयनित किया गया, और डिप्टी कलेक्टर जैसे पद दिए गए हैं. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भी टिप्पणी करते हुए कहा था कि एक साथ इस तरह से रिश्तेदारों का चयन इत्तेफाक नहीं हो सकता. हाईकोर्ट ने भर्ती की जांच के आदेश भी दिए. राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ तब इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा (ACB-EOW) ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की. फिर बाद में मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया. सीबीआई की जांच में पीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह के इशारे पर बड़े पैमाने पर प्रश्न पत्र लीक किए जाने का खुलासा हुआ. आरोप है कि प्रश्न पत्र उनके दो भतीजों नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी को दिए गए. इसके बाद परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने इन्हें बजरंग पावर एंड इस्पात के निदेशक श्रवण गोयल तक पहुंचाया, जिन्होंने यह पेपर अपने बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को दिलवाया. इसी आधार पर सभी ने डिप्टी कलेक्टर व डीएससी जैसे पद हासिल किए. इस मामले में अध्यक्ष रहे टामन सिंह के साथ ही उनके भतीजे नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के बाद टामन सिंह सोनवानी सहित उनके दोनों भतीजों ने हाईकोर्ट में जमानत अर्जी लगाई थी. सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता ने तर्क देते हुए झूठे केस में फंसाने के आरोप लगाए. बचाव पक्ष ने यह तर्क भी दिया कि पीएससी के नियमों के तहत भतीजा परिवार की परिभाषा में नहीं आता. लिहाजा, यह कहना कि अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने परिवार के सदस्यों का चयन कराया है, यह गलत है. ज्ञात हो, कि इस मामले में अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, भतीजा नितेश सोनवानी, साहिल सोनवानी, उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर के साथ ही उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल उसके बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को गिरफ्तार किया गया है.

जयपुर से धरा गया फर्जी सिम गिरोह का सदस्य, साइबर ठगी में था बड़ा नेटवर्क

जयपुर साइबर ठगों को फर्जी मोबाइल सिम उपलब्ध कराने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। मालपुरा गेट थाना क्षेत्र में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर मोबाइल सिम सक्रिय करवाने की सूचना पर पुलिस थाना साइबर क्राइम राजस्थान की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 19 वर्षीय आरोपी घनश्याम मीणा को गिरफ्तार किया है। यह आरोपी फर्जी आधार कार्ड तैयार कर उन पर अपनी तस्वीर लगाकर अवैध रूप से मोबाइल सिम प्राप्त करता था और फिर उन्हें अन्य साइबर अपराधियों को बेचता था। एसपी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार 22 जुलाई को साइबर थाना पुलिस को सूचना मिली कि मालपुरा गेट स्थित भारती हेक्साकॉम लिमिटेड (एयरटेल) के सांगानेर स्टोर पर एक संदिग्ध व्यक्ति ने डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया के तहत एक मोबाइल सिम एक्टिव कराने के लिए आधार कार्ड प्रस्तुत किया। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस को पता चला कि संदिग्ध ने स्टोर संचालक से कहा कि इस नंबर को कंपनी के पोस्टपेड फैमिली प्लान के तहत मोबाइल नंबर 7300043398 और 7300043318 के साथ जोड़ा जाए।

पर्यावरण के अनुकूल सफर की ओर कदम, DTC बोर्ड ने दी 100 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद को मंजूरी

 नई दिल्ली डीटीसी ने अंतरराज्यीय बस सेवा की शुरुआत के लिए तैयारी शुरू कर दी है. इसके तहत बसों की खरीद प्रक्रिया जल्द ही आरंभ की जाएगी. दिल्ली के आस-पास के प्रमुख शहरों के लिए 200 बसों की खरीद की योजना है, लेकिन पहले चरण में 100 बसों की खरीद की जाएगी. 100 CNG बसें भी खरीदी जाएंगी DTC बोर्ड ने बसों की खरीद के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, और अब जल्द ही एक बैठक में बसों के मॉडल पर चर्चा कर उन्हें स्वीकृति दी जाएगी. हाल ही में आयोजित बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को पेश किया गया था. डीटीसी अंतरराज्यीय बस सेवा के तहत 100 सीएनजी और 100 इलेक्ट्रिक बसों को शामिल करने की योजना बना रहा है. इसके अनुसार, लंबी दूरी के रूटों पर सीएनजी बसों और कम दूरी के रूटों पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा. डीटीसी बोर्ड की बैठक में बसों की खरीद प्रक्रिया आरंभ करने और पहले चरण में 100 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के प्रस्ताव पर सहमति दी गई है. पिछली बैठक में स्टैंडर्ड फ्लोर वाली एसी ई-बसों (टाइप-3) की खरीद का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था. इस दौरान चर्चा हुई कि बाजार में नए इलेक्ट्रिक बसों के मॉडल उपलब्ध हैं, इसलिए आगामी बोर्ड बैठक में बसों के मॉडल पर विचार किया जाएगा. आधुनिक मॉडल की बसों की खरीद के लिए बोर्ड से स्वीकृति मिलने के बाद प्रक्रिया शुरू की जाएगी. रूट सर्वे अंतिम चरण में डीटीसी के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि अंतरराज्यीय बस सेवा के लिए रूटों का सर्वेक्षण अंतिम चरण में है. जल्द ही रूटों की एक सूची तैयार की जाएगी, जिसे आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा. बोर्ड की स्वीकृति मिलने के बाद ही यह सूची सार्वजनिक की जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि पड़ोसी राज्यों के शहरों तक डीटीसी बसों के संचालन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. फंड भी है उपलब्ध डीटीसी को बसों की खरीद के लिए फंड की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि उसके पास इस कार्य के लिए लगभग 320 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं. दिल्ली सरकार के वित्त विभाग ने परिवहन विभाग के माध्यम से 199.5 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी निधि के उपयोग के लिए पूर्व सहमति दी थी, जो अब ब्याज सहित बढ़कर 320.3 करोड़ रुपये हो गई है.

सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम

हरेली की सुग्घर परंपरा के रंग में रंगा मुख्यमंत्री निवास सरगुजिहा कला पर केंद्रित सजावट में बस्तर और मैदानी छत्तीसगढ़ की भी सुंदर झलक सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम रंग-बिरंगी छोटी गेड़ियों, नीम और आम पत्तियों की झालर से आकर्षक बना कार्यक्रम मंडप  रायपुर  छत्तीसगढ़ की परंपरा में “हरेली” मानव और प्रकृति के जुड़ाव को नमन करने का उत्सव है। हरेली आती है तो छत्तीसगढ़ के खेत-खलिहान, गाँव-शहर, हल और बैल, बच्चे-युवा-महिलाएँ सभी इस पर्व के हर्षोल्लास से भर जाते हैं। जिस हरेली पर्व से छत्तीसगढ़ में त्योहारों की शुरुआत होती है, उसके स्वागत में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री निवास के द्वार भी सज गए हैं। पूरा मुख्यमंत्री निवास श्रावण अमावस्या को मनाये जाने वाले हरेली पर्व की सुग्घर परंपरा के रंग में रंग गया है।  हरेली पर मुख्यमंत्री निवास की सजावट के तीन प्रमुख हिस्से हैं। प्रवेश द्वार, मध्य तोरण द्वार और मुख्य मंडप। प्रवेश द्वार में बस्तर के मेटल आर्ट की झलक है। इस द्वार पर लोगों के स्वागत में छत्तीसगढ़ का पारम्परिक वाद्य तुरही के मध्य में भगवान गणेश की प्रतिकृति है और मेटल आर्ट का घोड़ा भी उकेरा गया है।  प्रवेश द्वार के बाद मध्य में तोरण द्वार है जिसे पारम्परिक टोकनी से सजाया गया है। साथ ही रंग-बिरंगी छोटी झंडियाँ तोरण के रूप में शोभा बढ़ा रही हैं। इस हिस्से में नीम और आम पत्तों की झालर को हरेली की परम्परा के प्रतीक के रूप में लगाया गया है। पूरी सजावट का मुख्य आकर्षण वे छोटी-छोटी रंग-बिरंगी गेड़ियां हैं, जिनका सुंदर स्वरूप यहां से मुख्य मंडप तक हर जगह दिखता है।  मुख्य मंडप द्वार को सरगुजा की कला के रंगों से आकर्षक बनाया गया है। इस द्वार की छत को पैरा से छाया गया है और सरगुजिहा भित्ति कला का के मनमोहक चित्र बनाये गए हैं। कई रंगों से सजा बैलगाड़ी का चक्का भी इस द्वार की रौनक बढ़ा रहा है।  मुख्य कार्यक्रम मंडप के बाएँ हिस्से में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिवेश का पारम्परिक घर बना है। इस घर के आहते को मैदानी छत्तीसगढ़ की चित्रकला से सजाया गया है। घर के आँगन में तुलसी चौरा और गौशाला है, जहाँ हल, कुदाल, रापा, गैती, टंगिया, सब्बल जैसे पारम्परिक कृषि यंत्र के साथ ही गोबर के उपले रखे हैं। इस ग्रामीण घर की दीवारों को सरगुजा की रजवार पेंटिंग के सुंदर चित्रों से सजाया गया है।  कार्यक्रम मंडप में कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण है। खास बात यह है कि इस प्रदर्शनी में पारम्परिक और आधुनिक कृषि यंत्रों को एक साथ प्रदर्शित किया गया है। पैडी सीडर, जुड़ा, बियासी हल, तेंदुआ हल और ट्रैक्टर जैसे यंत्र प्रदर्शित हैं।  मंडप में एक ओर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के जलपान का हिस्सा है तो वहीं सावन का झूला भी सावन के फुहारों भरे मौसम के आंनद को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ का पारम्परिक रहचुली झूला भी आकर्षण का केंद्र है। संस्कृति की छटा बिखेरते पारम्परिक नृत्य :  हरेली के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में गेड़ी  नृत्य और राउत नाचा जैसे पारम्परिक लोक नृत्य की छटा भी मनमोहक धुनों के साथ बिखर रही है। गेड़ी नृत्य के लिए बिलासपुर से दल आमंत्रित किया गया है। गेड़ी नृत्य के दल ने वेशभूषा में परसन वस्त्र के साथ सिर पर सीकबंद मयूर पंख का मुकुट, कौड़ी व चिनीमिट्टी से बनी माला और कौड़ी जड़ित जैकेट पहन रखा है। यह दल माँदर, झाँझ, झुमका, खँजरी, हारमोनियम और बाँसुरी की मधुर धुन में अपनी प्रस्तुति दे रही है। ग़ौरतलब है कि गेड़ी नृत्य की शुरुआत हरेली के दिन से होती है।  हरेली के मौके पर मुख्यमंत्री निवास में गड़बेड़ा (पिथौरा) से राउत नाचा के लिए 50 लोगों का दल पहुँचा है। इस दल में पुरुषों ने जहाँ धोती-कुर्ता के साथ सिर पर कलगी लगी पगड़ी, कौड़ी जड़ित बाजूबंद और पेटी के साथ पैरों में घुँघरू पहना है तो महिलाएँ भी पारम्परिक श्रृंगारी करके पहुँची हैं। इन दोनों ही दलों के सदस्यों ने बताया कि उन्हें इस मौक़े पर मुख्यमंत्री निवास पहुँचने का बेसब्री से इंतज़ार रहता है।

MP में प्रशासनिक फेरबदल की गूंज, दो IAS अफसरों को पद से हटाया गया – जानिए वजह

भोपाल  मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव विदेश दौरे से लौट आए हैं। उनकी अनुपस्थिति में सिया चेयरमैन और दो आईएएस अधिकारियों का विवाद तूल पकड़ा था। कथित तौर पर एक आईएएस अफसर नवनीत मोहन कोठारी ने एमपी एनवायरोमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन का ऑफिस लॉक करवा दिया था। बाद में मामला ऊपर तक पहुंचा तो कुछ घंटे बाद ऑफिस को खुलवाया गया। बुधवार को आईएएस नवनीत मोहन कोठारी को पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव पद से हटा दिया गया है। सिया चेयरमैन का आरोप था कि गलत तरीके से प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। साथ ही आईएएस आर उमा महेश्वरी को भी एप्को के कार्यकारी निदेशक पद से हटाया गया है। कहा जा रहा है कि सिया चेयरमैन की शिकायत के बाद यह कार्रवाई हुई है। गलत तरीके से प्रोजेक्ट को मंजूरी देने का आरोप वहीं, सिया चेयरमैन शिवनारायण सिंह चौहान ने दोनों अधिकारियों पर मनमाने तरीके से काम करने का आरोप लगाया था। साथ ही कहा था कि दोनों ने गलत तरीके से 237 प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। बताया जा रहा है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी एमपी सरकार से जवाब मांगा है। विवाद के बाद सरकार ने उठाया है बड़ा कदम दरअसल, सिया में लंबे समय से घमासान चल रहा था। आए दिन विवाद की खबरें आते रहती थीं। सरकार ने करीब दो महीने बाद बड़ा कदम उठाया है। अब आईएएस नवनीत मोहन कोठारी राज्यपाल के प्रमुख सचिव होंगे। इसके साथ ही आर उमा महेश्वरी को भी एप्को के कार्यकारी निदेशक और सिया की मेंबर सेक्रेटरी की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। अशोक वर्णवाल बने पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव वहीं, नवनीत मोहन कोठारी की जगह अब अशोक वर्णवाल पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव होंगे। उन्हें एप्को के महानिदेशक पद की भी अतिरिक्त जिम्मेवारी सौंपी गई है। दीपक आर्य को एप्को का कार्यकारी निदेशक बनाया गया है। सिया के मेंबर सेक्रेटरी का अतिरिक्त प्रभार मिला है। खनन माफिया से है मिलीभगत इसके साथ ही सिया चेयरमैन शिवनारायण सिंह चौहान ने दोनों अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि इनकी मिली भगत खनन माफियाओं से है। यह भी कहा था कि इन लोगों ने सिया की बैठकें नहीं होने दी। 237 प्रोजेक्ट्स की मंजूरी गलत तरीके से दी है। यहां से विवाद पकड़ा तूल गौरतलब है कि कोठारी और महेश्वरी के खिलाफ केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय में भी शिकायत की गई थी। मंत्रालय ने 27 जून को इस मामले पर ध्यान दिया। डीओपीटी की विजलेंस शाखा को जांच सौंपी गई। इस शिकायत के बाद कोठारी के निर्देश पर सिया चेयरमैन के ऑफिस में ताला लगा दिया गया था। जब मुख्यमंत्री मोहन यादव स्पेन दौरे पर थे, तब यह मामला उन तक पहुंचा। इसके बाद सीएम कार्यालय के एसीएस नीरज मंडलोई के कहने पर सिया चेयरमैन का ऑफिस खोला गया।

सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम

हरेली की सुग्घर परंपरा के रंग में रंगा मुख्यमंत्री निवास सरगुजिहा कला पर केंद्रित सजावट में बस्तर और मैदानी छत्तीसगढ़ की भी सुंदर झलक सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम रंग-बिरंगी छोटी गेड़ियों, नीम और आम पत्तियों की झालर से आकर्षक बना कार्यक्रम मंडप  रायपुर  छत्तीसगढ़ की परंपरा में “हरेली” मानव और प्रकृति के जुड़ाव को नमन करने का उत्सव है। हरेली आती है तो छत्तीसगढ़ के खेत-खलिहान, गाँव-शहर, हल और बैल, बच्चे-युवा-महिलाएँ सभी इस पर्व के हर्षोल्लास से भर जाते हैं। जिस हरेली पर्व से छत्तीसगढ़ में त्योहारों की शुरुआत होती है, उसके स्वागत में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री निवास के द्वार भी सज गए हैं। पूरा मुख्यमंत्री निवास श्रावण अमावस्या को मनाये जाने वाले हरेली पर्व की सुग्घर परंपरा के रंग में रंग गया है।  हरेली पर मुख्यमंत्री निवास की सजावट के तीन प्रमुख हिस्से हैं। प्रवेश द्वार, मध्य तोरण द्वार और मुख्य मंडप। प्रवेश द्वार में बस्तर के मेटल आर्ट की झलक है। इस द्वार पर लोगों के स्वागत में छत्तीसगढ़ का पारम्परिक वाद्य तुरही के मध्य में भगवान गणेश की प्रतिकृति है और मेटल आर्ट का घोड़ा भी उकेरा गया है।  प्रवेश द्वार के बाद मध्य में तोरण द्वार है जिसे पारम्परिक टोकनी से सजाया गया है। साथ ही रंग-बिरंगी छोटी झंडियाँ तोरण के रूप में शोभा बढ़ा रही हैं। इस हिस्से में नीम और आम पत्तों की झालर को हरेली की परम्परा के प्रतीक के रूप में लगाया गया है। पूरी सजावट का मुख्य आकर्षण वे छोटी-छोटी रंग-बिरंगी गेड़ियां हैं, जिनका सुंदर स्वरूप यहां से मुख्य मंडप तक हर जगह दिखता है।  मुख्य मंडप द्वार को सरगुजा की कला के रंगों से आकर्षक बनाया गया है। इस द्वार की छत को पैरा से छाया गया है और सरगुजिहा भित्ति कला का के मनमोहक चित्र बनाये गए हैं। कई रंगों से सजा बैलगाड़ी का चक्का भी इस द्वार की रौनक बढ़ा रहा है।  मुख्य कार्यक्रम मंडप के बाएँ हिस्से में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिवेश का पारम्परिक घर बना है। इस घर के आहते को मैदानी छत्तीसगढ़ की चित्रकला से सजाया गया है। घर के आँगन में तुलसी चौरा और गौशाला है, जहाँ हल, कुदाल, रापा, गैती, टंगिया, सब्बल जैसे पारम्परिक कृषि यंत्र के साथ ही गोबर के उपले रखे हैं। इस ग्रामीण घर की दीवारों को सरगुजा की रजवार पेंटिंग के सुंदर चित्रों से सजाया गया है।  कार्यक्रम मंडप में कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण है। खास बात यह है कि इस प्रदर्शनी में पारम्परिक और आधुनिक कृषि यंत्रों को एक साथ प्रदर्शित किया गया है। पैडी सीडर, जुड़ा, बियासी हल, तेंदुआ हल और ट्रैक्टर जैसे यंत्र प्रदर्शित हैं।  मंडप में एक ओर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के जलपान का हिस्सा है तो वहीं सावन का झूला भी सावन के फुहारों भरे मौसम के आंनद को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ का पारम्परिक रहचुली झूला भी आकर्षण का केंद्र है। संस्कृति की छटा बिखेरते पारम्परिक नृत्य :  हरेली के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में गेड़ी  नृत्य और राउत नाचा जैसे पारम्परिक लोक नृत्य की छटा भी मनमोहक धुनों के साथ बिखर रही है। गेड़ी नृत्य के लिए बिलासपुर से दल आमंत्रित किया गया है। गेड़ी नृत्य के दल ने वेशभूषा में परसन वस्त्र के साथ सिर पर सीकबंद मयूर पंख का मुकुट, कौड़ी व चिनीमिट्टी से बनी माला और कौड़ी जड़ित जैकेट पहन रखा है। यह दल माँदर, झाँझ, झुमका, खँजरी, हारमोनियम और बाँसुरी की मधुर धुन में अपनी प्रस्तुति दे रही है। ग़ौरतलब है कि गेड़ी नृत्य की शुरुआत हरेली के दिन से होती है।  हरेली के मौके पर मुख्यमंत्री निवास में गड़बेड़ा (पिथौरा) से राउत नाचा के लिए 50 लोगों का दल पहुँचा है। इस दल में पुरुषों ने जहाँ धोती-कुर्ता के साथ सिर पर कलगी लगी पगड़ी, कौड़ी जड़ित बाजूबंद और पेटी के साथ पैरों में घुँघरू पहना है तो महिलाएँ भी पारम्परिक श्रृंगारी करके पहुँची हैं। इन दोनों ही दलों के सदस्यों ने बताया कि उन्हें इस मौक़े पर मुख्यमंत्री निवास पहुँचने का बेसब्री से इंतज़ार रहता है।

BCCI का बड़ा फैसला: पंत खेलेंगे बतौर बल्लेबाज़, कीपिंग करेगा ये खिलाड़ी

मैनचेस्टर पैर में लगी चोट के बावजूद ऋषभ पंत मैनचेस्टर टेस्ट मैच में बैटिंग के लिए उपलब्ध होंगे. भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने इसे लेकर अपडेट दिया है. बीसीसीआई ने कहा कि ऋषभ पंत टीम के साथ दूसरे दिन के खेल के लिए जुड़ चुके हैं और जरूरत पड़ने पर बैटिंग करेंगे. हालांकि बीसीसीआई ने ये स्पष्ट किया कि ऋषभ अब इस मैच में विकेटकीपिंग नहीं करेंगे. विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी ध्रुव जुरेल के कंधों पर होगी. बीसीसीआई की ओर से कहा गया, 'ऋषभ पंत को मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन दाहिने पैर में चोट लगी थी. इसी कारण अब वह इस टेस्ट मैच में आगे विकेटकीपिंग नहीं करेंगे. उनकी जगह ध्रुव जुरेल को विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. हालांकि, चोट के बावजूद ऋषभ पंत दूसरे दिन टीम के साथ मौजूद और जरूरत पड़ने पर वह बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध रहेंगे.' विकेटकीपिंग नहीं करेंगे पंत ऐसे में बीसीसीआई ने पहले दिन मैच के बाद पंत की चोट पर अपडेट जारी करते हुए कहा था कि उन्हे स्कैन के लिए अस्पताल ले जाया गया है। मेडिकल टीम उनकी निगरानी कर रही है। गुरुवार को बीसीसीआई ने एक बार फिर अपडेट जारी किया और बताया, मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन चोटिल होने वाले भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत अब इस मैच में विकेटकीपिंग नहीं करेंगे। उनकी जगह अब ध्रुव जुरेल विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी निभाएंगे। बल्लेबाजी के लिए हैं उपलब्ध अपनी चोट के बावजूद ऋषभ पंत दूसरे दिन टीम के साथ जुड़ गए हैं और जरूरत पड़ने पर बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध रहेंगे। टीम की आवश्यकता अनुसार, वे बैटिंग कर सकते हैं। यह फैसला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और टीम मैनेजमेंट की सलाह के बाद लिया गया है, ताकि ऋषभ पंत की चोट और टीम बैलेंस दोनों का ध्यान रखा जा सके।

BCCI का बड़ा फैसला: पंत खेलेंगे बतौर बल्लेबाज़, कीपिंग करेगा ये खिलाड़ी

मैनचेस्टर पैर में लगी चोट के बावजूद ऋषभ पंत मैनचेस्टर टेस्ट मैच में बैटिंग के लिए उपलब्ध होंगे. भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने इसे लेकर अपडेट दिया है. बीसीसीआई ने कहा कि ऋषभ पंत टीम के साथ दूसरे दिन के खेल के लिए जुड़ चुके हैं और जरूरत पड़ने पर बैटिंग करेंगे. हालांकि बीसीसीआई ने ये स्पष्ट किया कि ऋषभ अब इस मैच में विकेटकीपिंग नहीं करेंगे. विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी ध्रुव जुरेल के कंधों पर होगी. बीसीसीआई की ओर से कहा गया, 'ऋषभ पंत को मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन दाहिने पैर में चोट लगी थी. इसी कारण अब वह इस टेस्ट मैच में आगे विकेटकीपिंग नहीं करेंगे. उनकी जगह ध्रुव जुरेल को विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. हालांकि, चोट के बावजूद ऋषभ पंत दूसरे दिन टीम के साथ मौजूद और जरूरत पड़ने पर वह बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध रहेंगे.' विकेटकीपिंग नहीं करेंगे पंत ऐसे में बीसीसीआई ने पहले दिन मैच के बाद पंत की चोट पर अपडेट जारी करते हुए कहा था कि उन्हे स्कैन के लिए अस्पताल ले जाया गया है। मेडिकल टीम उनकी निगरानी कर रही है। गुरुवार को बीसीसीआई ने एक बार फिर अपडेट जारी किया और बताया, मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन चोटिल होने वाले भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत अब इस मैच में विकेटकीपिंग नहीं करेंगे। उनकी जगह अब ध्रुव जुरेल विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी निभाएंगे। बल्लेबाजी के लिए हैं उपलब्ध अपनी चोट के बावजूद ऋषभ पंत दूसरे दिन टीम के साथ जुड़ गए हैं और जरूरत पड़ने पर बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध रहेंगे। टीम की आवश्यकता अनुसार, वे बैटिंग कर सकते हैं। यह फैसला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और टीम मैनेजमेंट की सलाह के बाद लिया गया है, ताकि ऋषभ पंत की चोट और टीम बैलेंस दोनों का ध्यान रखा जा सके।

सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू से सराबोर हरेली तिहार मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्वादों से सजी रही पारंपरिक थाली सीएम निवास में पारंपरिक रंग में रंगा हरेली उत्सव, व्यंजनों की खुशबू ने रचाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला में जीवंत की छत्तीसगढ़ी पाक शैली रायपुर  छत्तीसगढ़ की धरती पर जब भी कोई त्योहार आता है, तो वह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं होता, बल्कि वह जीवनशैली, परंपरा, स्वाद और सामाजिक सौहार्द का पर्व बन जाता है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास में पारंपरिक स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। प्रदेश की अतुलनीय पाक परंपरा को जीवंत करते हुए यहां आगंतुकों के स्वागत के लिए विशेष रूप से ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला जैसे दर्जनों पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी। बांस की सूप, पिटारी और दोना-पत्तल में परोसे गए इन व्यंजनों ने न केवल स्वाद, बल्कि प्रस्तुतीकरण में भी लोकजीवन की आत्मा को उजागर किया। अतिथियों ने गर्मागर्म पकवानों का स्वाद लेते हुए राज्य की पारंपरिक पाककला की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं भी इन व्यंजनों का स्वाद चखा और कहा की  हरेली तिहार केवल खेती-किसानी का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी लोकसंस्कृति, हमारी परंपरा और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इन पारंपरिक व्यंजनों में हमारी माताओं-बहनों की मेहनत, सादगी और स्वाद की समृद्ध परंपरा छिपी है, जो हमारी असली पहचान है। यह आयोजन न केवल हरेली पर्व की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह प्रमाणित करता है कि छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी मिट्टी, उसके स्वाद और उसकी परंपराओं में रची-बसी है। इस अवसर पर परिसर का हर कोना छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सौंधी खुशबू से सराबोर था। कहीं ढोल-मंजीरों की थाप पर लोक नृत्य होते दिखे तो कहीं व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींचती रही। परंपरागत वेशभूषा में सजे ग्रामीण कलाकारों और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत और आत्मीय बना दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजनों ने इस आयोजन को एक स्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बताया।