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जडेजा-सुंदर को क्यों घसीटा?’ बेन स्टोक्स पर सचिन ने तोड़ी चुप्पी

नई दिल्ली भारत और इंग्लैंड के बीच 5 टेस्ट मैच की सीरीज का चौथा मुकाबला ही इकलौता ऐसा मैच रहा जिसका कोई परिणाम नहीं निकला। मैनचेस्टर में खेला गया टेस्ट ड्रॉ हुआ था और उसके आखिरी सेशन में 'हैंडशेक कंट्रोवर्सी' की काफी चर्चा रही। इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने उस समय मैच को ड्रॉ मानकर जल्दी समाप्त करने की पैंतरेबाजी चली जब रविंद्र जडेजा और वॉशिंगटन सुंदर दोनों ही अपने-अपने शतक के करीब थे। स्टोक्स ने मैच ड्रॉ की पेशकश करते हुए जडेजा की तरफ हाथ बढ़ाया लेकिन भारतीय ऑलराउंडर ने इससे साफ इनकार कर दिया। इससे चिढ़े स्टोक्स और इंग्लैंड के बाकी खिलाड़ियों ने मजाक उड़ाने के अंदाज में जडेजा पर खूब टिप्पणियां भी की थी और ताना मारे थे। इस मुद्दे पर क्रिकेट जगत की राय बंटी हुई दिखी थी। ज्यादातर पूर्व क्रिकेटरों और एक्सपर्ट्स ने बेन स्टोक्स की हरकत की आलोचना की थी लेकिन डेल स्टेन जैसे कुछ पूर्व क्रिकेटरों ने स्टोक्स का समर्थन किया था। सीरीज खत्म होने पर महान सचिन तेंदुलकर ने भी हैंडशेक कंट्रोवर्सी पर खुलकर अपनी बात रखी है। बेन स्टोक्स ने जिस अंदाज में जडेजा और सुंदर के सामने पेशकश रखी, उसकी तेंदुलकर ने आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह सुंदर और जडेजा का सिरदर्द थोड़े है कि वे इसे सुनिश्चित करें कि पांचवें टेस्ट के लिए इंग्लैंड के गेंदबाजों को भरपूर आराम मिले। सचिन ने भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज का रिव्यू किया है। उन्होंने इससे जुड़ा वीडियो रेडिट पर पोस्ट किया है। उसमें वह हैंडशेक कंट्रोवर्सी पर कहते हैं, ‘वॉशिंगटन ने शतक बनाया और जडेजा ने शतक बनाया। यह सही भावना क्यों नहीं है? वे ड्रॉ के लिए खेल रहे थे।’ उन्होंने आगे कहा, ‘सीरीज जीवंत था तो उन्हें क्यों मानना चाहिए (और हाथ मिलाना चाहिए) और इंग्लैंड के गेंदबाजों और फील्डरों को आराम देना चाहिए? अगर इंग्लैंड हैरी ब्रूक को गेंद थमाना चाहता था तो यह बेन स्टोक्स का फैसला था। यह भारत की समस्या नहीं थी। मेरे लिए, यह ठीक था। वे ड्रॉ के लिए खेल रहे थे, अपने शतकों के लिए नहीं। जब वे बल्लेबाजी के लिए आए तब अगर वे आउट हो गए होते तो हम हार सकते थे। जब वे बल्लेबाजी करने आए तब हैरी ब्रूक बोलिंग नहीं कर रहे थे, क्या वह कर रहे थे? इसलिए, पांचवें टेस्ट के लिए इंग्लैंड के गेंदबाज क्यों तरोताजा रहने चाहिए? क्या आपके पास इसका जवाब है? नहीं!’ सचिन तेंदुलकर ने कहा, 'मैं पूरी तरह भारतीय टीम के साथ हूं। चाहे गंबीर हों या शुभमन या जडेजा या वॉशिंगटन, जिसने भी फैसला लिया। मैं शत प्रतिशत उनके साथ हूं। आखिरी टेस्ट में जब रनों को रफ्तार की जरूरत थी, सुंदर ने शानदार ढंग से उसे अंजाम दिया। क्या उन्होंने नहीं किया? जब क्रीज पर डटे रहने की जरूरत थी, उसने चौथे टेस्ट में यह किया। और जब बेरहमी से और तेजी से रन की जरूरत थी, उसने पांचवें टेस्ट में ऐसा ही किया। शानदार।'  

‘नोटिस निकाल देना’: CJI की टिप्पणी से हड़कंप, वरिष्ठ वकीलों की पैरवी पर लगी लगाम

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई ने बुधवार को कहा कि अगले सोमवार (11 अगस्त) से कोर्ट संख्या 1 में कोई भी वरिष्ठ वकील मौखिक रूप से मामलों का उल्लेख नहीं कर सकेंगे। सीजेआई गवई ने यह पाबंदी तब लगाई, जब वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी आज एक मामले का मौखिक उल्लेख करने के लिए उनकी अदालत में खड़े हुए थे। कोर्टरूम में सिंघवी के खड़ा होते और मामले का उल्लेख करने की मांग करते ही सीजेआई ने कहा कि जूनियर्स को भी मौका दिया जाना चाहिए। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश गवई ने कोर्ट मास्टर को इस संबंध में एक नोटिस जारी करने का भी निर्देश दिया। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस गवई ने कहा, "नोटिस निकाल देना… अब से किसी भी वरिष्ठ वकील को मामले का मौखिक उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सोमवार से किसी भी नामित वरिष्ठ वकील को मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जूनियर वकीलों को ऐसा करने का अवसर दिया जाना चाहिए।" अगले सोमवार से होगा नियम प्रभावी सीजेआई ने कहा कि वह इस नियम को अगले सोमवार से प्रभावी कर रहे हैं, ताकि सभी को तब तक इसकी सूचना मिल सके। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "वरिष्ठ अधिवक्ताओं से बहुत बड़ी मांग है कि किसी भी मामले का उल्लेख अब वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा नहीं किया जाए।" सिंघवी बोले- समान रूप से हो लागू दरअसल, जब सिंघवी कोर्ट नंबर 1 यानी सीजेआई की अदालत में किसी मामले का मौखिक उल्लेख करने के लिए उठे, तो सीजेआई गवई ने उनसे कहा, "एक बड़ी मांग है, हमें वरिष्ठ वकीलों द्वारा मौखिक उल्लेख करना बंद करना चाहिए।" इस पर सिंघवी ने कहा, "मैं इसके लिए पूरी तरह से तैयार हूं, अगर इसे समान रूप से लागू किया जाता है।" इस पर CJI ने कहा, “हम इसे लागू करेंगे। किसी भी वरिष्ठ वकील को उल्लेख करने की अनुमति नहीं होगी। जूनियर को मौका देना चाहिए। सोमवार से, कोर्ट नंबर 1 में, किसी भी वरिष्ठ वकील को मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं होगी। कोई नामित वरिष्ठ वकील नहीं। सोमवार से हम इसका पालन करेंगे। ताकि किसी को अचरज न हो।” लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, उसी दौरान सिंघवी ने सुझाव दिया, "इसे सभी अदालतों में एक समान लागू किया जा सकता है।" इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह इसे केवल अपनी पीठ में ही लागू कर सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "कम से कम कोर्ट नंबर 1 में तो इसकी अनुमति नहीं होगी। जूनियर्स को अवसर मिलने चाहिए।"  

बेंजामिन नेतन्याहू के बेटे ने उठाया तख्तापलट का मुद्दा, ट्वीट से गरमाया माहौल

तेल अवीव इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बेटे ने एक ऐसा ट्वीट किया है, जिससे देश में हलचल मच गई है। इजरायली पीएम के बेटे ने याएर नेतन्याहू ने एक ट्वीट किया, जिसमें दावा किया गया कि सेना प्रमुख एयाल जामिर देश में तख्तापलट करने की योजना बना रहे थे। इसके अलावा उन्होंने कहा कि गाजा पर इजरायल के पूर्ण नियंत्रण का भी उन्होंने विरोध किया है। दरअसल जामिर ने कहा था कि गाजा पर पूरी तरह नियंत्रण करने का प्लान इजरायल डिफेंस फोर्सेज को फंसाने का एक जाल है। हिब्रू मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार नेतन्याहू जूनियर की पोस्ट पर विवाद छिड़ गया है। याएर नेतन्याहू के पास कोई सरकारी पद नहीं है। ऐसे में उनकी तरफ से सेना प्रमुख पर तख्तापलट की साजिश रचने का आरोप लगाने से गहरा विवाद हो गया है। उन्होंने कहा कि जामिर चाहते थे कि विद्रोह कर दिया जाए और इजरायल में सैन्य तख्तापलट हो जाए। वहीं सेना प्रमुख एयाल जामिर ने ऐसे आरोपों का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा कैसे आप कह सकते हैं। आपको इससे क्या मिलेगा? आप मेरे ऊपर हमले क्यों कर रहे हैं। आखिर जंग के बीच ऐसा करने का क्या मकसद है। अब इस मामले में बेंजामिन नेतन्याहू का भी जवाब आया है। उन्होंने सेना प्रमुख को संबोधित करते हुए कहा कि मीडिया में अपना पद छोड़ने की धमकी न दें। मैं हर बार आपकी ऐसी धमकी को स्वीकार नहीं कर सकता। यदि हम आपके प्लान को स्वीकार नहीं करेंगे तो आपको जाना होगा। मेरा बेटा 33 साल का है और वह अब बड़ा हो गया है। दरअसल खबरें आती रही हैं कि जामिर की इजरायली कैबिनेट के कई मंत्रियों से असहमति रही है। गाजा पर पूरी तरह कब्जा करने के प्लान का भी विरोध करते रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को भी कहा था कि यदि हमने गाजा पर फुल कंट्रोल की कोशिश की तो हमास की कैद में रखे गए 20 बंधकों को नुकसान होगा, जो फिलहाल जीवित हैं और रिहाई का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल मंगलवार को बेंजामिन नेतन्याहू कैबिनेट की मीटिंग थी। तीन घंटे चली इस मीटिंग में सेना की राय और कब्जे के प्लान पर चर्चा हुई। अब इसे लेकर वोटिंग कराने की तैयारी है। नेतन्याहू कब्जे के प्लान पर आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं। यह मांग इजरायल में लंबे समय से होती रही है। इस पर जामिर का कहना था कि आप गाजा में एक जाल बिछा रहे हैं। इससे बंधकों की जिंदगी पर खतरा होगा और सेना को भी इससे बड़ा नुकसान होने की आशंका है।  

पानी-पानी हुआ सिंधु डेल्टा: 80% जलाशय सूखे, 12 लाख विस्थापन की त्रासदी, कौन है जिम्मेदार?

कराची पड़ोसी देश पाकिस्तान इन दिनों एक कुदरती कहर की मार झेल रहा है। देश के दक्षिणी हिस्से में सिंधु डेल्टा उजड़ चुका है। हालात ये हैं कि वहां से लोगों का पलायन जारी है और बसे-बसाए करीब 40 गांव वीरान पड़ गए हैं और इसी के साथ सिन्धु डेल्टा में एक बसी बसाई सभ्यता उजड़ चुकी है। दरअसल, ये दर्दनाक कहानी है सिंध प्रांत के दक्षिणी छोर पर अरब सागर से सटे सिंधु डेल्टा में बसे उन गांवों की जहां के लोग परंपरागत रूप से खेतीबारी करने और मछली पकड़ने का काम करते थे लेकिन हाल के कुछ वर्षों में समुद्री जल ने वहां अतिक्रमण किया है और सबकुछ नष्ट कर दिया है। अब इन गांवों से करीब 12 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। उनमें से अधिकांश कराची में आकर बसे हैं। पिछले दिनों कराची पलायन करने वाले हबीबुल्लाह खट्टी खारो चान कस्बे के अपने पुश्तैनी गांव मीरबहार में अपनी मां की कब्र पर उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे थे, क्योंकि उनका गांव अब समंदर की आगोश में समाता जा रहा है। जहां उनकी मां की कब्र है, वहां अब समुद्री नमक का साम्राज्य है। जब वह अपनी मां की कब्र पर पहुंचे तो उनके पैरों पर नमक की मोटी चादर चढ़ चुकी थी। यह गांव सिंधु डेल्टा में उस जगह से करीब 15 किलोमीटर दूर है, जहां सिंधु नदी अरब सागर में मिलती है। डेल्टा से करीब 12 लाख लोग पलायन कर चुके हबीबुल्लाह के मुताबिक, खारो चान में 40 गांव हुआ करते थे लेकिन बढ़ते समुद्री जल के कारण अब अधिकांश लुप्त हो चुके हैं। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार उस कस्बे की आबादी 1981 में 26000 के करीब थी जो 2023 में घटकर 11,000 रह गई है। हबीबुल्लाह खट्टी अब अपने परिवार के साथ कराची में बसने जा रहे हैं। उनकी तरह इस डेल्टा से करीब 12 लाख लोगों ने पलायन किया है। थिंक टैंक जिन्ना इन्स्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो दशकों में सिंधु डेल्टा से करीब 12 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। पानी का बहाव 80 फीसदी कम गया यूएस-पाकिस्तान सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज़ इन वॉटर द्वारा 2018 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, सिंचाई नहरों, जलविद्युत बांधों और हिमनदों व बर्फ पिघलने पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण 1950 के दशक से अब तक सिंधु डेल्टा में पानी का बहाव 80 फीसदी कम हो चुका है। इस कारण से डेल्टा में समुद्री जल का विनाशकारी प्रवेश हुआ है और आसपास के गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1990 के बाद से डेल्टा के पानी की लवणता लगभग 70% बढ़ गई है, जिससे वहां फसलें उगाना अब असंभव हो गया है और झींगा मछली और केकड़े की प्रजाति नष्ट हो चुकी है। भारत ने भी सिंधु जल समझौता स्थगित किया तिब्बत से शुरू होकर, सिंधु नदी पूरे पाकिस्तान में बहने से पहले कश्मीर से होकर बहती है। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया है। इसकी वजह से भी सिंदु में पानी का बहाव कम हो गया है। यह नदी और इसकी सहायक नदियाँ देश के लगभग 80% कृषि भूमि की सिंचाई करती हैं और लाखों लोगों की आजीविका का साधन हैं। सिंधु नदी द्वारा समुद्र में मिलने से पहले दोनों छोरे पर जमा किए गए समृद्ध तलछट से निर्मित यह डेल्टा कभी खेती, मछली पकड़ने, मैंग्रोव और वन्यजीवों के लिए आदर्श हुआ करता था।  

कांस्टेबल भर्ती घोटाले को लेकर बवाल, कांग्रेस विधायकों ने पहन ली पुलिस वर्दी, बताया व्यापमं-2

भोपाल. मध्य प्रदेश विधानसभा में चल रहे मानसून सत्र के दौरान बुधवार को कांग्रेस विधायक पुलिस के वेश में पहुंचे। सभी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में हुए घोटाले का विरोध कर रहे थे। सभी ने विधानसभा में प्रदर्शन किया। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस घोटाले को व्यापमं पार्ट-2 बताया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने पुलिस की प्रतीकात्मक वर्दी पहनकर प्रदर्शन किया और जोरदार नारेबाजी की। सिंघार ने आरोप लगाया कि यह घोटाले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कर दोषियों को सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने सरकार पर भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया।

पाकिस्तानी खतरे को लेकर CDS की चेतावनी: सेना को 365 दिन सतर्क रहने के निर्देश

नई दिल्ली चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने एक बार फिर पाकिस्तान की ओर से होने वाले हमले के लेकर भारतीय सेना (Indian Army) को अलर्ट किया है। CDS अनिल चौहान ने कहा कि हमें 24×7 और 365 दिन चौंकन्ना रहने होंगे। सीडीएस ने यह भी कहा कि भारतीय सेना के पास अत्यधिक दूरी पर स्थित स्थिर और गतिशील दोनों लक्ष्यों को भेदने की क्षमता होनी चाहिए। दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के ‘पूर्ण-आयामी प्रतिरोध सिद्धांत’ को चुनौती देने की जरूरत है। सीडीएस ने इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवादी पाकिस्तान के किसी भी हिस्से में छिप नहीं सकते। वार्षिक ‘ट्राइडेंट’ व्याख्यान श्रृंखला के उद्घाटन सत्र में उन्होंने दोहराया कि सैन्य तैयारी अत्यंत उच्च स्तर की होनी चाहिए, चौबीसों घंटे और साल के 365 दिन तैयार रहने की जरूरत है। उन्होंने जवानों से कहा कि युद्ध और शांति के बीच बहुत कम अंतर है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि आज के समय में यह अंतर धुंधला हो रहा है और वे एक दूसरे में विलीन हो रहे हैं। सीडीएस ने कहा, ‘हमें अपरंपरागत और परमाणु क्षेत्रों के बीच पारंपरिक अभियानों के लिए अधिक स्थान बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी पाकिस्तान की धरती पर कहीं भी छिप नहीं सकते। जनरल अनिल चौहान ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय सेना के पास अत्यधिक दूरी पर स्थित स्थिर और गतिशील दोनों लक्ष्यों को भेदने की क्षमता होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमें पाकिस्तान की ओर से की जाने वाली किसी भी हिंसात्मक कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा। चाहे वह राज्य के अंदर से किया जाए या राज्य के बाहर से किया जाए, और यह पहला मानदंड है, जो हमें समझना होगा। यह हम सभी के लिए नया मानदंड है। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि एक और सैन्य मानक यह है कि अब परमाणु नीति पर अधिक निर्भरता होगी, जो पारंपरिक सैन्य अभियानों की बुनियाद बन गई है। उन्होंने कहा कि एक और मानक यह होगा कि भारत को अपने विरोधियों के मुकाबले तकनीकी रूप से आगे रहना होगा।

कांग्रेस-टीएमसी के रवैये से विपक्ष में दरार, संसद चलाने की अपील भी न आई काम

नई दिल्ली. बिहार के SIR को लेकर संसद में हंगामा थमने के आसार नहीं हैं। अब एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी गठबंधन INDIA के बड़े दलों ने छोटी पार्टियों की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें संसद चलने का तरीका खोजने की बात कही गई थी। हालांकि, किसी भी पार्टी ने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। विपक्षी गठबंधन SIR पर चर्चा की मांग कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, INDIA गठबंधन के कुछ सदस्यों ने बड़े दलों से संसद चलने का तरीका खोजने की अपील की, लेकिन इस बात को खारिज कर दिया गया। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि मंगलवार सुबह INDIA गठबंधन की बैठक में CPM के जॉन ब्रिटास, RSDP के एनके प्रेमचंद और IUML के ईटी मोहम्मद बशीर ने सुझाव दिया कि संसद सत्र खाली नहीं जाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, इन सांसदों की याचिका को कांग्रेस, द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल जैसे बड़ी पार्टियों की तरफ से खारिज कर दिया गया। बड़े दलों का मानना है कि मतदाता सूची समीक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा से सरकार को बचने का मौका नहीं दिया जाना चाहिए। खबरें ये भी हैं कि विपक्ष ने आने वाले दिनों में ECI यानी भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन का कार्यक्रम तय किया है। 11 अगस्त को विपक्ष का मार्च पहले विपक्षी दलों ने 8 अगस्त को चुनाव आयोग तक मार्च का फैसला किया था, लेकिन झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के कारण इसे बढ़ाकर 11 अगस्त कर दिया गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की तरफ से दिए गए रात्रि भोज का कार्यक्रम 7 अगस्त को होने वाला है। इसके अलावा सोरेन के निधन के चलते कांग्रेस द्वारा मंगलवार को बेंगलुरु में किया जाने वाला विरोध प्रदर्शन अब आठ अगस्त को होगा। इस प्रदर्शन का नेतृत्व राहुल करेंगे। कांग्रेस का आरोप है कि 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बेंगलुरु की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई थी। निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है।

मकान निर्माण पर बढ़ा बोझ: LDA ने ‘चढ़ावे’ के नाम पर बढ़ाया शुल्क

लखनऊ राजधानी में अब मकान का नक्शा पास करना और महंगा हो जाएगा. पूरे लखनऊ शहर के लोगों को अब मकान का नक्शा पास कराते समय सुख-सुविधा शुल्क देना होगा. एलडीए ने इसकी दरें भी करीब तीन गुना बढ़कर 200 से 500 प्रति वर्ग मीटर कर दी है. यह शुल्क शहीद पथ, किसान पथ और ग्रीन कॉरिडोर के विकास के नाम पर देना होगा. पहले यह शहीद पथ और किसान पथ के अगल-बगल 250 मीटर के दायरे में मकान बनवाने वालों से ही लिया जाता था. ये फैसला मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब की अध्यक्षता में हुई एलडीए बोर्ड की बैठक में लिया गया. बैठक में यह भी तय किया गया कि सरकारी विभागों द्वारा बनाई गई 7:50 मीटर चौड़ी सड़क के किनारे भी मकान का नक्शा पास होगा, बस मार्ग 200 मीटर लंबा होना चाहिए. एलडीए की इस बैठक में दो और योजनाओं को भी मंजूरी मिली है, जिनमें बीकेटी में विकसित की जाने वाली नैमिष नगर योजना के साथ-साथ आगरा एक्सप्रेस-वे की वरुण विहार योजना शामिल है. वरुण विहार योजना को 2664 हेक्टेयर में विकसित किया जाएगा. साथ ही नैमिषनगर योजना को 1084 हेक्टेयर में पूरा करने की तैयारी है. इसके अलावा लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की बैठक में ऐशबाग, बसंतकुंज, विराजखंड, गोमतीनगर जैसे क्षेत्रों में भी विकास की योजनाओं पर चर्चा की गई. यहां के सेक्टर-4 में एलडीए की तरफ से सुख-सुविधाओं से लैस अपार्टमेंट बनाए जाएंगे.

मौत की पटरी पर था सफर, किसान ने समय रहते रोकी ट्रेन, बच गई यात्रियों की जान

रतलाम. दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर मंगलवार सुबह बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया, जब 66 वर्षीय वृद्ध किसान ने रेलवे ट्रैक पर दरार देखी और लगभग आधा किलोमीटर दौड़ते हुए लूनी रिछा स्टेशन पहुंचकर स्टेशन अधीक्षक को जानकारी दी। उनकी सजगता से ट्रेनों का आवागमन समय रहते रोका गया। स्टेशन अधीक्षक इरफान अली ने बताया कि सुबह करीब 7:46 बजे रिछा गांव निवासी 66 वर्षीय किसान विक्रम सिंह खेत पर जा रहे थे, तभी अपलाइन ट्रैक में उन्हें काफी दरार नजर आई। उन्होंने कोई देरी नहीं की और भागते हुए स्टेशन पहुंचे। वहां मौजूद प्वाइंट मैन निलेश गुर्जर को पूरी बात बताई और दोनों तत्काल स्टेशन अधीक्षक के पास पहुंचे। किसान विक्रम सिंह ने बताया कि मैं रोज की तरह खेत पर जा रहा था, लेकिन आज जैसे ही ट्रैक पार करने लगा, तो कुछ अलग सा नजर आया। पास जाकर देखा तो पटरी में सीधी दरार थी। मैं घबराया नहीं और सूचना देने के लिए दौड़ पड़ा। स्टेशन अधीक्षक ने तत्काल प्वाइंटमैन को भेजा और दरार की पुष्टि होते ही रेल यातायात तत्काल बंद करवा दिया गया। ट्रेन आने वाली थी कुछ समय बाद ही डॉ. अंबेडकर नगर एक्सप्रेस (20156) दिल्ली की ओर से आने वाली थी, जिसे समय रहते रोक लिया गया। नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। करीब आधे घंटे तक इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही रोकी गई। पहले अस्थायी मरम्मत कर ट्रेनों को धीमी गति से निकाला गया और फिर करीब तीन घंटे की तकनीकी मरम्मत के बाद ट्रैक को पूरी तरह सुचारू किया गया। रेलवे ने किया सम्मानित किसान की साहसिक सतर्कता की जानकारी जब कोटा रेल मंडल तक पहुंची, तो अपर मंडल रेल प्रबंधक ने विक्रम सिंह को 2100 रुपये की पुरस्कार राशि देने के निर्देश दिए। स्टेशन अधीक्षक द्वारा उन्हें प्रमाण पत्र और राशि देकर सम्मानित किया गया। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अगर यह सूचना समय पर नहीं मिलती, तो बड़ा हादसा हो सकता था। विक्रम सिंह की सजगता ने सैकड़ों लोगों की जान बचा ली।

मंदिर प्रवेश पर सरकार की शर्त: सिर्फ सनातनी हिंदुओं को ही मिले अनुमति, सुप्रीम कोर्ट में रखी दलील

नई दिल्ली. बांके बिहारी मंदिर के मैनैजमेंट के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति पर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सहमति जताई है। इसके साथ ही यूपी सरकार ने यह मांग भी रखी है कि इस समिति का नेतृत्व करने वाले सेवानिवृत्त जज सनातनी हिंदू होने चाहिए। इसका अर्थ हुआ कि किसी अन्य पंथ या मजहब को मानने वाले को समिति के मुखिया के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह समिति तब तक मंदिर का प्रबंधन करेगी, जब तक इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से मंदिर में कॉरि़डोर निर्माण और अन्य सुविधाओं के लिए यूपी सरकार की ओर से लाए गए अध्यादेश पर फैसला नहीं हो जाता। यूपी सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाला बागची की बेंच से कहा है कि हमें अंतरिम समिति के गठन से कोई आपत्ति नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का प्रस्ताव है कि हाई कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज को समिति का मुखिया बना दिया जाए। इस पर यूपी सरकार का कहना है कि हमें सभी शर्तें स्वीकार हैं, लेकिन पैनल का हेड उसी व्यक्ति को बनाया जाए, जो आस्था से सनातनी हिंदू हो। इस समिति के मुखिया के पास मंदिर के प्रशासन का जिम्मा होगा। इसके अलावा मंदिर के फंड का भी वह मैनेजमेंट कर सकेगा और उसके विकास पर उसे खर्च करने की अनुमति देगा। योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंदिर के लिए बांके बिहारी कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए सरकार की ओर से फंडिंग की जाएगी। इसके अलावा आधा हिस्सा मंदिर ट्रस्ट से भी लेने की तैयारी है। इसके लिए अध्यादेश लाया गया है और मंदिर प्रशासन ने इसे ही चुनौती दी है। वहीं यूपी सरकार का कहना है कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाने के लिए भी ऐसी ही नीति का पालन किया गया था। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम समिति की बात रखी है, जो अध्यादेश की वैधता पर फैसले तक काम करेगी। इस पर सरकार ने कहा कि हम समिति के लिए तैयार हैं, लेकिन उसका मुखिया ऐसा शख्स होना चाहिए, जो खुद एक सनातनी हिंदू हो। ऐसा इसलिए ताकि श्री बांके बिहारी जी महाराज की गरिमा और पवित्रता बनी रह सके।