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पालकी यात्रा बनी भक्ति और आस्था का प्रतीक, मंत्री टेटवाल ने किया विधिवत शुभारंभ

भोपाल  राजगढ़ जिले के सारंगपुर में सावन के पावन माह में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां बटकेश्वर महादेव मंदिर से निकली महादेव की भव्य पालकी यात्रा में लाखों शिवभक्तों ने भाग लिया। यात्रा का शुभारंभ कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल ने महाकाल के जयकारों के साथ किया। उन्होंने पालकी यात्रा की अगुवाई करते हुए पूर्ण श्रद्धा के साथ नगर भ्रमण कराया। बड़ी संख्या में सहभागिता के लिये श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कलशधारी महिलाओं ने दी यात्रा को भव्यता पालकी यात्रा में हजारों महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश लेकर मंगल कलश लेकर यात्रा को भव्यता प्रदान की। मंत्री टेटवाल ने सभी माताओं-बहनों का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह दृश्य जनशक्ति और आस्था की एक अनुपम मिसाल है, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत को सजीव करती है। भक्ति, संस्कृति और अनुशासन का संगम ढोल-नगाड़ों, मंजीरों और बम-बम भोले के जयघोष के साथ जब पालकी यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से निकली, तो पूरा वातावरण शिवमय हो गया। शिव के गण, नंदी की झांकियां और भक्तों की टोलियों ने यात्रा को एक दिव्य स्वरूप प्रदान किया। मार्ग में जगह-जगह नागरिकों ने यात्रा का पुष्प-वर्षा एवं आरती कर स्वागत किया। बटकेश्वर महादेव ‘चंद्रमौलेश्वर’ रूप में करते हैं नगर भ्रमण बटकेश्वर महादेव को चंद्रमौलेश्वर के रूप में जाना जाता है। वे प्रतिवर्ष इस यात्रा के माध्यम से नगर में भ्रमण करते हैं और अपनी प्रजा का हाल जानते हैं। यात्रा के समापन पर मंदिर में विशेष श्रृंगार आरती व भंडारे का आयोजन किया गया। टेटवाल ने श्रद्धालुओं का किया अभिनंदन मंत्री टेटवाल ने नगर निगम, पुलिस बल, सफाई मित्रों, श्रद्धालुओं एवं समस्त प्रशासनिक अमले का आभार प्रकट करते हुए कहा कि आप सभी के सहयोग से यह यात्रा न केवल अनुशासित रही, बल्कि भक्ति और संस्कृति का अनुपम उदाहरण भी बनी। सारंगपुर की इस ऐतिहासिक पालकी यात्रा ने न केवल धार्मिक समरसता का संदेश दिया, बल्कि प्रशासनिक समन्वय और जन आस्था का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत किया।  

वन विभाग और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया संस्था के बीच हरित बदलाव के सहयोग हेतु हुआ एमओयू

रायपुर छत्तीसगढ़ में हरित विकास को जनभागीदारी से साकार करने की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल करते हुए आज भारतीय प्रबंधन संस्थान रायपुर तथा ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया संस्था के संयुक्त आयोजन में पाँचवाँ भारत ग्रामीण संवाद–2025 सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। गाँवों के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की हरित आर्थिक बदलाव की यात्रा विषय जिसमें प्रदेश को हरित दिशा में आगे ले जाने की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यदि गाँवों को केंद्र में रखकर परंपरागत ज्ञान और संसाधनों का सतत उपयोग किया जाए, तो हम पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि जैविक खेती, सूर्य ऊर्जा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देकर प्रदेश को हरित राज्य बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस दिशा में पूर्णतः प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम के दौरान वन विभाग और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया संस्था के बीच हरित बदलाव के सहयोग हेतु एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। प्रबंधन संस्थान रायपुर द्वारा प्रदेश के हरित विकास के पाँच मुख्य आधार प्रस्तुत किए गए  जिसमे परंपरागत खेती और वन संसाधनों का संरक्षण, हरित रोजगार तथा पर्यावरणीय पर्यटन, स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा, सूर्य ऊर्जा आधारित ग्राम-बिजली प्रबंधन में लोगों की भागीदारी और नीति तथा संस्थागत ढाँचे का निर्माण शामिल थे। कार्यक्रम में पंचायती प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, महिलाओं, उद्यमियों और विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया। सभी ने जल संरक्षण, शिक्षा की गुणवत्ता, पारंपरिक बीजों की कमी, वनों की कटाई, कचरा प्रबंधन और रासायनिक खेती पर निर्भरता जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक वन-समृद्ध राज्य है। यहाँ की प्राकृतिक सम्पदा और जनभागीदारी मिलकर हरित विकास के आदर्श मॉडल की नींव रख सकते हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायतें इस हरित बदलाव की धुरी बनेंगी और महिलाओं को इस बदलाव में नेतृत्व की भूमिका दी जाएगी। पंचायत विभाग के सचिव भीम सिंह ने जानकारी दी कि अब पंचायतों का मूल्यांकन जल संरक्षण, स्वच्छता और हरित मानकों के आधार पर किया जाएगा। सुशासन अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने कहा कि यह समय की माँग है कि हरित अर्थव्यवस्था को केवल शासन की योजना न मानकर, समुदाय को उसका सहभागी और कर्ता बनाना चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि गाँवों में ही परंपरागत उद्योगों का पुनरुद्धार, जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, घरेलू उद्योगों को पुनर्जीवित करना तथा हस्तशिल्प को बढ़ावा देना हरित विकास की गति को और सशक्त बना सकते हैं।

मंत्री पटेल में स्वच्छता रील्स प्रतियोगिता में मोहन रोकड़े को किया सम्मानित

भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) द्वारा कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिये शॉर्ट वीडियो रील्स प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य युवाओं, विद्यार्थियों और रचनात्मक प्रतिभाओं को माध्यम बनाकर स्वच्छता के संदेश का प्रचार-प्रसार करना था। प्रतियोगिता की थीम "कचरा निपटान, गांव की शान – बनाएं स्वच्छता अपनी पहचान" पर आधारित थी। प्रतियोगिता तीन प्रमुख विषयों पर केंद्रित रही कचरे का पृथक्करण (जैविक और अजैविक), कचरे का पुनरुपयोग औऱ खुले में कचरा नहीं फैलाना। इस प्रतियोगिता में खालवा जनपद के ग्राम मल्हारगढ़ (जिला खंडवा) निवासी मोहन रोकड़े की रील का उत्कृष्ट मानते हुए चयन किया गया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने रोकड़े को 25,000 रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के मिशन संचालक दिनेश जैन भी उपस्थित थे। राज्य स्तरीय शॉर्ट वीडियो प्रतियोगिता का उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण युवाओं को अपशिष्ट प्रबंधन के सुरक्षित उपायों, व्यवहारों एवं समाधानों को उजागर करने वाली शॉर्ट वीडियो बनाने के लिए प्रेरित करना था, जिससे युवा रचनात्मकता से स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण में अपना योगदान दे सकें। इस पहल के माध्यम से प्रदेश के नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता को लेकर सकारात्मक सोच विकसित होगी।  

मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री ने किया शिवपुरी के ग्राम पचावली में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण

सरकार का पहला कर्त्तव्य है नागरिकों की सुरक्षा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सभी प्रभावितों को शीघ्र प्रदान किया जायगा मुआवजा : केंद्रीय मंत्री सिंधिया मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री ने किया शिवपुरी के ग्राम पचावली में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण प्रभावितों को सहायता राशि वितरित शिवपुरी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को शिवपुरी जिले के ग्राम पचावली पहुंचकर हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने बाढ़ से प्रभावित स्‍थानीय नागरिकों को मकान क्षति तथा खाद्यान्न के लिए सहायता राशि प्रदान की। मुख्यमंत्री ने ग्राम पचावली में ग्रामवासियों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन, कोलारस विधायक महेन्द्र सिंह यादव, पूर्व विधायक प्रहलाद भारती, जनप्रतिनिधि, कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी, पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़, जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनहानि, पशुहानि अथवा फसल क्षति जैसी हर स्थिति में सरकार पीड़ितों के साथ है। प्रभावित परिवार को राहत राशि सीधे उनके खाते में प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे बाढ़ प्रभावितों के दुख-दर्द जानने आए हैं। सरकार हर हाल में प्रभावित परिवारों के साथ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का पहला कर्तव्य हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अतिवर्षा से उत्पन्न परिस्थितियाँ हमारे लिए परीक्षा की घड़ी हैं। जनता के सहयोग और प्रशासन के समर्पण से स्थिति पर नियंत्रण पाया गया है। उन्‍होंने कहा कि अतिवृष्टि एवं बाढ़ग्रस्‍त क्षेत्रों में राहत कार्य निरंतर जारी रहेंगे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चलाए जा रहे राहत कार्यों की लगातार समीक्षा की जा रही है। शासन-प्रशासन पूरी मुस्‍तैदी के साथ राहत कार्यों में लगा है। उन्‍होंने बाढ़ प्रभावितों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि चिंता न करें, दुख की घड़ी में सरकार आपके साथ है। केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि हम सुख-दुख के हर क्षण प्रभावितों के साथ हैं। संकट की घड़ी में हर संभव सहायता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस बार औसत वर्षा से कहीं अधिक वर्षा हुई है, जिसके कारण सिंध नदी में उफान आया और पचावली सहित 32 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने बताया कि ग्वालियर से दो हेलीकॉप्टर राहत कार्य के लिए भेजे गए थे। मौसम प्रतिकूल होने के कारण वे प्रभावित क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पाए। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राहत दलों के संयुक्त प्रयासों से प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया। लगभग 400 लोगों की जान बचाई गई और प्रभावितों को तत्काल आर्थिक सहायता दी गई। उन्होंने कहा कि मक्का एवं सोयाबीन की फसल को व्यापक क्षति हुई है, जिसकी भरपाई के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावितों को शीघ्र मुआवजा प्रदान किया जाए।  

विश्वास की मिसाल बनें, भय का कारण नहीं — राज्यपाल पटेल का संदेश

विश्वास की मिसाल बनें, भय का कारण नहीं — राज्यपाल पटेल का संदेश राज्यपाल से मिले 77वें आर.आर. बैच के प्रशिक्षु आई.पी.एस भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि पुलिस के लिए जितना जरूरी कानून व्यवस्था बनाए रखना है, उतना ही जरूरी जनहितैषी छवि को पुख्ता बनाना भी है। इसलिए जरूरी है कि "जनता के बीच आपकी उपस्थिति विश्वास का प्रतीक बने।" राज्यपाल पटेल भारतीय पुलिस सेवा के 77वें परिवीक्षाधीन प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी और डी.जी.पी. के प्रिन्सिपल स्टाफ ऑफिसर विनीत कपूर भी मौजूद रहे। भारत भ्रमण के तहत इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मित्र राष्ट्र भूटान, नेपाल और मालदीव के अधिकारी भी शामिल हुए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि पुलिस सेवा एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसमें अनुशासन, ईमानदारी, निष्पक्षता, संवेदनशीलता और जनसेवा समाहित है। पुलिस को आम जनता कानून व्यवस्था के रक्षक और न्याय दिलाने वाले के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि आई.पी.एस. अधिकारी के रूप में मिलने वाली शक्तियां और विशेषाधिकार समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति की सेवा के साधन हैं। इसलिए अपने सेवा काल में हमेशा जनसेवा को ही केंद्र में रखें। साइबर अपराधों में कमी लाना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी राज्यपाल पटेल ने कहा कि साइबर अपराध वर्तमान समय की बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसमें कमी लाना आप सबकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके लिए सतत जन जागरूकता और जन संवाद के नवाचार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब भी दूरस्थ क्षेत्रों में जाएं तो गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों के प्रति आत्मीय और संवेदनशील रहें। अपनी शिक्षा और मेधा का उपयोग जनता की सेवा में करें। राज्यपाल पटेल का प्रशिक्षु अधिकारी नारायण उपाध्याय ने पौधा भेंट कर स्वागत किया। उपाध्याय ने भारत भ्रमण के तहत विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी भी दी। प्रशिक्षु अधिकारी सुनीपा मनोचा और राहुल आर. अतराम ने स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। आभार प्रशिक्षु अधिकारी सुसुषमा सागर ने माना। संचालन ए.आई.जी. ट्रेनिंग सुश्रद्धा जोशी ने किया। राज्यपाल के अपर सचिव उमाशंकर भार्गव, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी अरविंद पुरोहित और प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।  

अवधपुरी में महाराजाधिराज श्री महाकाल सरकार अपनी प्रजा का हाल जानने भ्रमण पर निकले, रीगल टाउन गेट पर भव्य स्वागत

भोपाल  सावन के चौथे सोमवार को  अवधपुरी भोपाल में महाराजाधिराज  श्री महाकाल सरकार अपनी प्रजा का हाल जानने अवधपुरी क्षेत्र में भ्रमण पर निकले। जगह जगह महाकाल जी की सवारी का भव्य स्वागत किया गया । महाकाल जी की सवारी शिव शक्ति धाम मंदिर से शुरू होकर वैष्णवी वस्त्रालय,अवधपुरी व्यापारी संघ, निर्मल पैलेस, संगम विहार, तुलसी विहार, सौम्य पार्कलैंड, रीगल टाउन, कंचन नगर चौराहा, युगान्तर कॉलोनी, विद्यासागर व्यापारी संघ, गुरुकृपा डेयरी होते हुए शिव शक्ति धाम मंदिर पहुंची। रीगल टाउन गेट पर मनकामनेश्वर उत्सव समिति के सभी सदस्यों ने श्री महाकाल बाबा की सवारी का भव्य स्वागत किया । स्वागत में समस्त रीगल टाउन एवं रीगल कस्तूरी के भक्तगण उपस्थित रहे और सभी ने धर्म का लाभ लिया। बच्चों और महिलाओं ने महाकाल सवारी  का भव्य स्वागत स्वागत किया।

शिक्षा विभाग की तैयारी पूरी: जल्द होगी नई भर्ती, जानिए कितने पद हैं रिक्त

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य में अब भी शिक्षकों की आवश्यकता बनी हुई है। इसे ध्यान में रखते हुए 5,000 नये शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शीघ्र आरंभ की जाएगी। विद्यालय भवनों के रखरखाव के लिए 133 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। साथ ही छात्रावासों की स्थिति सुधारने के लिए भी ठोस कदम उठाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की संख्या कम सीएम विष्णु देव साय राजधानी में रविवार को एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालते ही प्राथमिकता रही कि विभाग को गहराई से समझते हुए सुधार की ठोस पहल की जाए। सबसे पहले एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें पाया गया कि राज्य में शिक्षक और छात्रों का अनुपात राष्ट्रीय औसत से बेहतर होने के बावजूद वितरण असमान है। ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों की संख्या अधिक है, लेकिन शिक्षक अपेक्षाकृत कम हैं। जबकि, शहरी क्षेत्रों में शिक्षक अधिक संख्या में पदस्थ हैं। इस असंतुलन को दूर करने के लिए युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया शुरू की गई। बंद पड़े विद्यालय पुनः प्रारंभ किए गए इसके परिणामस्वरूप वर्तमान में कोई भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है। इस प्रभाव का विस्तार इतना व्यापक रहा कि इरकभट्टी जैसे गांवों में वर्षों से बंद पड़े विद्यालय पुनः प्रारंभ हो गए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में लागू किया गया है। राज्य में इसे तत्परता से अपनाया गया है।

राखी उतारने के बाद न करें ये गलती, जानें राखी के सही विसर्जन विधि

इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 9 अगस्त को मनाया जाएगा. अक्सर लोगों को एक कंफ्यूजन होता है कि रक्षाबंधन पर पिछले साल की पुरानी राखी का क्या करना चाहिए और पुरानी राखी उतारने के नियम क्या हैं? आइए आपको बताते हैं. अक्सर आपने देखा होगा कि कुछ लोग राखी को पूरे एक साल तक बांधे रखते हैं और फिर अगले साल रक्षाबंधन पर नई राखी बंधवाते हैं. ऐसे में लोग जानना चाहते हैं कि आखिर पुरानी राखी का क्या करें? आइए आपको बताते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पिछले साल की राखी को रक्षाबंधन पर उतार देना चाहिए. आमतौर पर, रक्षाबंधन की राखी को 24 घंटे के अंदर या जन्माष्टमी के दिन उतार देनी चाहिए. रक्षाबंधन पर बांधी गई राखी को पूरे साल नहीं पहनना चाहिए. रक्षाबंधन के 24 घंटे के भीतर या जन्माष्टमी के दिन राखी उतारना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष शुरू होने से पहले राखी को उतार देना चाहिए, क्योंकि इसे अशुद्ध माना जाता है. अगर आपने सोने या चांदी की राखी पहनी हो तो आप इसे पूरे साल पहन सकते हैं. पिछले साल की पुरानी राखी को फेंकने की बजाय आप उसे सम्मानपूर्वक विसर्जित कर सकते हैं या फिर उसे किसी अन्य काम में इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, पुरानी राखी को कहीं भी ऐसे ही नहीं फेंकना चाहिए. आप पुरानी राखी को किसी नदी, तालाब या बहते पानी में बहा सकते हैं. अगर यह संभव नहीं हो तो आप इसे किसी पेड़ के नीचे रख सकते हैं या फिर मिट्टी में दबा सकते हैं. विसर्जन करते समय आप एक सिक्का भी रख सकते हैं. राखी को इधर-उधर फेंकना अपवित्र माना जाता है. अगर राखी खंडित हो गई है, तो उसे लाल कपड़े में लपेटकर किसी सुरक्षित स्थान पर रखें और बाद में विसर्जित करें. आप पुरानी राखी को किसी पेड़ पर भी बांध सकते हैं.

स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने की आशंका: NHM कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान

रायपुर प्रदेश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारियों ने 18 अगस्त से अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन करने का ऐलान किया है. संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो यह आंदोलन व्यापक और तीव्र रूप लेगा. स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव की पूर्ण जिम्मेदारी शासन की होगी. छत्तीसगढ़ एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अमित मिरी ने कहा कि वर्षों से धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा के बाद भी कर्मचारियों को सिर्फ आश्वासन ही मिला है. इसके बाद भी NHM कर्मचारी आंदोलन के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करने से बचने का हर संभव प्रयास करेंगे, लेकिन यदि शासन ने इस बार भी कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी की, तो “संघर्ष ही विकल्प” बचेगा. संघ की दस मांगों में संविलियन एवं स्थायीकरण, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, ग्रेड पे का निर्धारण, कार्य मूल्यांकन व्यवस्था में पारदर्शिता, लंबित 27 प्रतिशत वेतन, नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण, अनुकम्पा नियुक्ति, मेडिकल एवं अन्य अवकाश की सुविधा, स्थानांतरण नीति और न्यूनतम 10 लाख कैशलेश चिकित्सा बीमा शामिल है.

आर्थिक मोर्चे पर भारत का कमाल, 110 अरब डॉलर से अमेरिका-चीन की टेंशन बढ़ी

नई दिल्ली भारत में सेमीकंडक्‍टर का उपयोग बड़े स्तर पर होता है और अब भारत कंजम्‍प्‍शन के अलावा, मैन्‍युफैक्‍चरिंग भी करने लगा है. भारत में तेजी से चिप (India Semiconductor Market) बनाने का काम हो रहा है, जिस कारण सेमीकंडक्‍टर इंडस्‍ट्री ग्रो कर रही है. घरेलू च‍िप मार्केट 2023 में 38 अरब डॉलर तक था और वित्त वर्ष 2024-25 में 45 से 50 अरब डॉलर था, जो 2030 तक 100 से 110 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.  अगर भारत यह टारगेट हासिल कर लेता है तो वह US चीन की कैटेगरी में शामिल हो जाएगा, जिनकी सेमीकंडक्‍टर इंडस्‍ट्रीज ट्रिलियन डॉलर की हैं. 2023 में चीन का सेमीकंडक्‍टर मार्केट 177.8 अरब डॉलर था, जो ग्‍लोबल मार्केट का 32 फीसदी हिस्‍सा है. वहीं मैन्‍युफैक्चरिंग की बात करें तो यह 16 से 18% उत्‍पादन करता है. अमेरिका का चिप मार्केट साल 2023 में 130 अरब डॉलर था, जो ग्‍लोबल मार्केट का 25 फीसदी है, लेकिन US 12 फीसदी ही उत्‍पादन करता है.  भारत उभरता हुआ चिप मार्केट  भारत का साल 2024 में कुल सेमीकंडक्‍टर मार्केट 45 अरब डॉलर था, जो कुल ग्‍लोबल मार्केट में 1 फीसदी उत्‍पादन करता है. हालांकि भारत का चिप मार्केट 16% ग्रोथ से बढ़ रहा है यानी 2030 तक इसकी ग्‍लोबल मार्केट में 6.21 फीसदी तक की हिस्‍सेदारी होगी. ऐसे में कहा जा सकता है कि भारत ग्‍लोबल सेमीकंडक्‍टर मार्केट में एक उभरता हुआ देश है.  इस वजह से बढ़ रहा सेमीकंडक्‍टर का उत्‍पादन  एक ऑफिशियल स्‍टेटमेंट के मुताबिक, इस ग्रोथ को 76000 करोड़ रुपये के खर्च से शुरू किए गए इंडिया सेमीकंडक्‍टर मिशन और सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम जैसी सेमीकंडक्‍टर का उत्‍पादन बढ़ रहा है. इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (ICET) जैसे ग्‍लोबल सहयोग ने इस क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी को और बढ़ाया है.  फॉक्‍सकॉन और एचसीएल का ज्‍वाइंट वेंचर  देश का चिप निर्माण इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर धीरे-धीरे साइज बदल रहा है. मई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत सेमीकंडक्‍टर मिशन के तहत एक सेमीकंडक्‍टर निर्माण सुविधा को मंजूरी दी, जो HCL और फॉक्‍सकॉन के बीच एक ज्‍वाइंट वेंचर है. यह प्‍लांट मोबाइल फोन, लैपटॉप, कार और PC जैसे उपकरणों के लिए डिस्‍प्‍ले ड्राइवर चिप्‍स का निर्माण करेगा. इस प्‍लांट को 20 हजार वेफर मंथली की क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है. इससे मंथली 36 मिलियन चिप्‍स का उत्‍पादन होने की उम्‍मीद है.  भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप का उत्पादन भी इसी वर्ष शुरू होने वाला है और पांच मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट अभी बन रही हैं. भारत सिर्फ एक मार्केट ही नहीं, बल्कि एक उत्‍पादन सेंटर के तौर पर भी महत्‍वपूर्ण ग्‍लोबल हिस्‍सेदारी हासिल करने के लिए भी तैयार है.