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MP में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मेकओवर: पूरे प्रदेश में दौड़ेंगी किफायती और कंफर्टेबल बसें

भोपाल  मध्यप्रदेश में जल्द ही कम किराएवाली आरामदायक बसें दौड़ती नजर आएंगी। प्रस्तावित मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए परिवहन विभाग की कवायद तेज हो गई है। इसके लिए प्रदेश में राज्यस्तरीय कम्पनी के साथ 7 सहायक कंपनियां भी गठित की गई हैं। राज्य सरकार द्वारा अप्रैल 2025 में स्वीकृत मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना के अंतर्गत नगर वाहन सेवा और अंतरशहरी बस सेवा को सुगम बनाने का काम किया जा रहा है। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी एक्ट के तहत राज्यस्तरीय मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड कंपनी का गठन किया गया। 3 जुलाई 2025 को इसका पंजीयन हुआ। राज्यस्तरीय कंपनी के अध्यक्ष सीएम होंगे जबकि परिवहन मंत्री और मुख्य सचिव उपाध्यक्ष होंगे। राज्यस्तरीय कंपनी के साथ पूरे प्रदेश में 7 सहायक कंपनियां भी रहेंगी। इसके लिए राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, सागर, रीवा और ग्वालियर में वर्तमान में संचालित सिटी बस कंपनियों के शेयर होल्डिंग में परिवर्तन किया गया है। इन सातों शहरों के लिए नए सिरे से कंपनियां गठित की गई हैं। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत पूरे प्रदेश में नए सिरे से बस रूट निर्धारित किए जा रहे हैं। इन रूट्स पर बस फ्रिक्वेंसी का भी निर्धारण किया जा रहा है। इसके लिए वैज्ञानिक पद्धति से ट्रैफिक सर्वे किया जा रहा है। उज्जैन और इंदौर संभाग का ट्रैफिक सर्वे और रूट निर्धारण का काम जहां अंतिम चरण में है वहीं जबलपुर तथा सागर संभाग में भी सर्वे चल रहा है। इसके बाद भोपाल, नर्मदापुरम, रीवा, शहडोल, ग्वालियर और चंबल संभाग में सर्वे किया जाएगा। आरामदायक, सुरक्षित और कम किराए वाले बस मिलेगी अधिकारियों ने बताया कि सातों क्षेत्रीय सहायक कंपनियों पर अपनी क्षेत्राधिकार के जिलों में सिटी बस सेवा और अंतरशहरी बस सेवा के संचालन की जिम्मेदारी रहेगी। सुगम परिवहन बस सेवाओं में यात्रियों को आरामदायक, सुरक्षित और कम किराए वाले बस उपलब्ध कराने पर खासा जोर दिया जा रहा है।

5 अगस्त से पहले कश्मीर में सियासी सरगर्मी, बड़ा फैसला आने की अटकलें

नई दिल्ली क्या जम्मू-कश्मीर को 6 साल बाद एक बार फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने वाला है? 5 अगस्त से पहले कुछ बड़ा होने की चर्चाओं के बीच ऐसे कयास लग रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी और फिर होम मिनिस्टर अमित शाह ने रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी। इसके अलावा मंगलवार सुबह ही एनडीए के संसदीय दल की भी मीटिंग होने वाली है। इन घटनाक्रमों के चलते ही चर्चा तेज है कि क्या 5 अगस्त को फिर से मोदी सरकार बड़ा फैसला लेगी। इससे पहले राम मंदिर का शिलान्यास और फिर जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने एवं राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का फैसला भी 5 अगस्त की तारीख को ही हुआ था। तब साल 2019 था। तब से ही मांग उठती रही है कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाए। इसके जवाब में पीएम मोदी और होम मिनिस्टर अमित शाह लगातार कहते रहे हैं कि सही समय पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा। सरकार ने कभी राज्य का दर्जा देने से इनकार नहीं किया है, बस सही समय की बात कही है। ऐसे में सवाल है कि क्या वह सही समय अब आ गया है। कुछ बड़ा होने के कयास लग ही रहे हैं और सबसे ज्यादा चर्चा जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की ही है। फारूक अब्दुल्ला के बयान से भी ऐसे कयास तेज हैं। उन्होंने सोमवार को कहा कि सरकार बताए कि आखिर जम्मू-कश्मीर को कब पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा। उन्होंने आर्टिकल 370 हटाने की छठी बरसी से एक दिन पहले यह मांग दोहराई है। उन्होंने इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर की राज्यसभा सीटों पर भी चुनाव कराने की मांग की है। अब्दुल्ला ने कहा, 'वो राज्य का दर्जा कब वापस करने जा रहे हैं? उन्होंने कहा था कि चुनाव होने और सरकार बनने के बाद दर्जा लौटा दिया जाएगा। अब उस वादे का क्या हुआ? अब उनका कहना है कि विधानसभा की दो खाली सीटों पर चुनाव कराएंगे, लेकिन राज्यसभा की 4 सीटों पर चुनाव कब होंगे? आखिर वे सदन में लोगों की आवाज उठाने के अधिकार को क्यों रोक रहे हैं।' क्‍यों चर्चा है जम्‍मू और कश्‍मीर को पूर्ण राज्‍य का दर्जा देने की? जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की चर्चा 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35A के निरस्त होने के बाद से चल रही है. जब से जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा हटाकर दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया. तब से लगातार पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की मांग स्थानीय नेताओं, दलों द्वारा की जा रही है. गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में संसद में वादा किया था कि उचित समय पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा. उसके बाद भारत सरकार भी कई बार बोल चुकी है कि वह समय आने पर पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने भी 2023 में राज्य का दर्जा बहाली का आदेश दिया था.    दरअसल केंद्र शासित प्रदेश के रूप में, जम्मू-कश्मीर की सरकार के पास सीमित शक्तियां हैं. पुलिस, कानून-व्यवस्था, और अखिल भारतीय सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण मामलों में उपराज्यपाल और केंद्र सरकार का नियंत्रण है. नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC), पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), और कांग्रेस जैसे दल लगातार पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग करते रहे हैं. NC के नेता उमर अब्दुल्ला ने इसे अपनी सरकार का प्रमुख एजेंडा बनाकर 2024 में हुए विधानसभा चुनावों में 42 सीटें जीत ली. पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में संशोधन जरूरी है, जिसके लिए लोकसभा और राज्यसभा की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अंतिम स्वीकृति चाहिए होगी. उनकी मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी होने पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा. रविवार को राष्ट्रपति की पीएम और गृहमंत्री से अलग अलग मुलाकात से यह कयास लगाया जा रहा है कि कहीं ये मुलाकात जम्मू कश्मीर के लिए तो नहीं है. बहुत संभावना है कि कल अनुच्छेद 370 के रद्द होने के छठें साल पर सरकार जम्मू कश्मीर की जनता को राज्य दर्जे की बहाली का ऐलान करे.  जम्‍मू और कश्‍मीर को अलग अलग राज्‍य बनाने की अफवाह भी जम्मू क्षेत्र हिंदू बहुल होने और कश्मीर घाटी के मुस्लिम बहुल होने के चलते अक्सर इस बात पर चर्चा होती रही है कि क्या दोनों को अलग राज्य का दर्जा देना संभव है.जम्मू के लोग यह शिकायत करते रहे हैं कि कश्मीरी नेतृत्व ने उनके क्षेत्र के विकास को नजरअंदाज किया और उन्हें सत्ता में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया. इस संदर्भ में, जम्मू को अलग राज्य बनाने की मांग को कुछ लोग क्षेत्रीय सशक्तिकरण के रूप में देखते हैं.  जो लोग जम्मू को अलग राज्य का दर्जा देने के पक्ष में हैं, उनका तर्क है कि इससे क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं और पहचान को बेहतर संबोधित किया जा सकेगा. जम्मू हिंदुओं को एक सम्मानजनक पहचान और विकास के अवसर देगा, जो कश्मीर के साथ एकजुटता में संभव नहीं है. कश्मीरी मूल की पत्रकार  @AartiTikoo एक्स पर लिखती हैं कि…  जम्मू और कश्मीर में इन दिनों यह अफ़वाह ज़ोरों पर है कि केंद्र सरकार अनुच्छेद 370 के हटाए जाने की छठी वर्षगांठ, यानी कल, इस केंद्र शासित प्रदेश को फिर से राज्य का दर्जा दे सकती है. और जो बात इससे भी ज़्यादा चौंकाने वाली है — वह यह कि अफ़वाहों के बाज़ार में कहा जा रहा है कि कश्मीर और जम्मू को अलग करके दो स्वतंत्र राज्य बना दिया जाएगा. अगर इनमें से कोई भी बात सही निकली, तो यह बेहद विनाशकारी कदम होगा. यह मूलतः डिक्सन प्लान को अमल में लाने जैसा होगा — यानी जम्मू-कश्मीर का धार्मिक आधार पर विभाजन, जिससे मुस्लिम बहुल क्षेत्र को अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान के हवाले कर दिया जाएगा. भारत की सीमाओं से लगे किसी भी मुस्लिम बहुल क्षेत्र को पाकिस्तान की सेना और उसके जिहादी आतंकियों से अप्रभावित रखना संभव नहीं है. अगर यह तर्क दिया जाए कि हिंदू बहुल जम्मू, अपनी जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक शक्ति से वंचित रहा है, और मुस्लिम बहुल कश्मीरी नेतृत्व ने उसके साथ भेदभाव किया है — तो यह साफ़ … Read more

MP के चार हाईवे होंगे हाईटेक: यात्रा के दौरान फूड, फ्यूल और चार्जिंग की पूरी सुविधा

 ग्वालियर  नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की सहयोगी संस्था नेशनल हाइवेज लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) मध्यप्रदेश के चार हाइवे किनारे यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की तैयारी कर रही है। एनएचएआई की खाली पड़ी जमीन को विकसित कर फूड कोर्ट, रेस्टोरेंट, शॉपिंग स्टोर, पार्किंग, शौचालय, ईवी चार्जिंग स्टेशन और डोरमेट्री जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यहां वाहन चालक थोड़ी देर रुककर आराम कर सकेंगे और यात्रियों के लिए बच्चों का खेलकूद एरिया भी विकसित किया जाएगा। इन चार स्थानों पर यह सुविधाएं विकसित होंगी:     ग्वालियर-शिवपुरी हाइवे पर घाटीगांव     तेजाजीनगर-बलवारा के पास बैग्राम (एनएच 347)     नेशनल हाइवे 52 पर भाटखेड़ी     इंदौर-गुजरात नेशनल हाइवे 47 पर हटोड अभी तक राष्ट्रीय राजमार्गों पर केवल टोल प्लाजा के आसपास कुछ सुविधाएं उपलब्ध होती थीं। लेकिन नए बने एक्सप्रेसवे की तरह अब पुराने नेशनल हाइवे पर भी यात्रियों की सुविधाओं को लेकर गंभीर पहल की जा रही है। इन परियोजनाओं से सरकार को भी फायदा होगा क्योंकि विकसित की गई जमीन लीज पर दी जाएगी, जिससे राजस्व प्राप्त होगा। सर्वे रिपोर्ट से सामने आई जानकारी     तेजाजीनगर-बलवारा (एनएच 347) बैग्राम: 4.86 हेक्टेयर जमीन, यहां से रोजाना 330 कारें और 1,871 ट्रक गुजरते हैं।     नेशनल हाइवे 52, भाटखेड़ी: 2.58 हेक्टेयर जमीन, यहां से औसतन 3,023 कारें और 3,134 ट्रक गुजरते हैं।     ग्वालियर-शिवपुरी (एनएच 46) घाटीगांव: 0.82 हेक्टेयर जमीन, रोजाना 1,637 कारें, 156 बसें और 2,105 ट्रक गुजरते हैं।     इंदौर-गुजरात हाइवे (एनएच 47) हटोड: 2.86 हेक्टेयर जमीन, प्रतिदिन 2,243 कारें, 359 बसें और 1,230 ट्रक गुजरते हैं। क्षेत्रीय कारीगरों को बढ़ावा इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि हाईवे सुविधाओं में क्षेत्रीय कला और कारीगरों के लिए कियोस्क और स्टॉल भी उपलब्ध कराए जाएंगे। यात्री यहां से स्थानीय कलाकृतियां खरीद सकेंगे, जिससे क्षेत्रीय कारीगरों को रोजगार मिलेगा और हाइवे पर गुजरने वाले लोगों के लिए यह आकर्षण का केंद्र बनेगा।  

Vande Bharat Sleeper जल्द ट्रैक पर! जानिए कब से शुरू होगी पहली सेवा

 नईदिल्ली  देश में इस समय 50 से ज्यादा Vande Bharat ट्रेनें चल रही हैं, और अब जल्दी ही इसका स्लीपर वर्जन भी लोगों को मिलने वाला है। इसके अलावा भारत की पहली बुलेट ट्रेन पर भी तेजी से काम चल रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रेल मंत्री Ashwini Vaishnav ने बताया है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को अगले महीने यानी सितंबर में लॉन्च किया जा सकता है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि यह ट्रेन बहुत जल्द शुरू की जाएगी। रेल मंत्री ने हाल ही में राज्यसभा में जानकारी दी थी कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का पहला मॉडल तैयार हो गया है। लंबी यात्रा में आरामदायक यह ट्रेन नई तकनीक से बनी है और इसे बहुत आरामदायक बनाया गया है, ताकि लोग लंबी दूरी की यात्रा में थकान महसूस न करें। यह ट्रेन राजधानी एक्सप्रेस, तेजस एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों से भी बेहतर और तेज मानी जा रही है। इसका सफर समय पर और बिना रुकावट के होगा। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाई गई है जो रातभर का या लंबा सफर करते हैं। इसमें आरामदायक सीटें और आधुनिक सुविधाएं होंगी, जिससे यात्री को अच्छा अनुभव मिलेगा।

’ये वक्त हमारा है’ अभियान का शुभारंभ एवं वार्षिक कैलेंडर का विमोचन भी होगा

स्व-सहायता समूहों का तीन दिवसीय राखी मेला भोपाल हाट में 5 अगस्त से राखी मेला :पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री पटेल करेंगे मेले का उद्घाटन ’ये वक्त हमारा है’ अभियान का शुभारंभ एवं वार्षिक कैलेंडर का विमोचन भी होगा भोपाल मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत स्व-सहायता समूहों का तीन दिवसीय राखी मेला भोपाल 5 अगस्त को प्रात: 10 बजे प्रारंभ होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल मेले का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह भी उपस्थित रहेंगीं। मेले के शुभारंभ के साथ ही आजीविका मिशन के तहत स्व-सहायता समूहों की दीदियों की खुशहाली और सशक्तिकरण के अभियान ‘’ये वक्त हमारा है’’ की शुरुआत भी होगी। मेले में अभियान के वार्षिक कैलेंडर का विमोचन भी किया जाएगा, जो समूहों की गतिविधियों और उपलब्धियों को रेखांकित करेगा। मेले में विभिन्न जिलों से आ रही स्व-सहायता समूहों की दीदियों द्वारा समूह उत्पादों का विक्रय सह प्रदर्शन किया जायेगा। मेले की साज-सज्जा में खास तौर पर ग्रामीण परिवेश की झलक के लिये “सावन की थीम” के साथ पर्यावरण हितैषी बस्तुओं का उपयोग किया जायेगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को वृहद बाजारों से जोड़ने के लिये अनेक प्रयास आजीविका मिशन द्वारा किये जा रहे हैं। इसी क्रम में स्व-सहायता समूहों का तीन दिवसीय राखी मेला भोपाल हाट में आयोजित किया जा रहा है। मेले में विभिन्न जिलों से आ रही स्व-सहायता समूहों की दीदियों द्वारा 40 स्टॉल लगाये जायेंगे। राखी के त्यौहार को ध्यान में रखते हुये विशेष रूप से राखी, मिठाईयां वस्त्र एवं सजावटी सामान सहित विभिन्न प्रकार की समूहों द्वारा निर्मित बस्तुएं उपलब्ध रहेंगी। मेले में आने बाले आगन्तुकों को झूला, खटिया, बैलगाड़ी, मटके, विभिन्न जिलों के जनजातीय समुदाय द्वारा बांस एवं अन्य पत्तियों आदि से बनाई जाने वाली टोपी एवं खान-पान में मिलेट्स, महुआ आदि के व्यंजन एवं प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के अन्य व्यंजन पूरे ग्रामीण परिवेश का एहसास करायेंगे। इस दौरान विभिन्न लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी जायेंगीं। यह मेला न केवल स्व-सहायता समूहों की मेहनत और हुनर का उत्सव होगा, बल्कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर और सामुदायिक एकजुटता का भी शानदार प्रदर्शन करेगा उत्पादों की विविधता मेले में चार चांद लगाएगी। मेला न केवल लोगों को खरीदारी का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि लोगों को समूह से जुडी ग्रामीण महिलाओं के आत्म-निर्भरता और उद्यमिता के प्रेरक सफर को देखने का अवसर भी प्रदान करेगा।  

इंदौर में डिजिटल रजिस्ट्रेशन की शुरुआत, अब शादी का रजिस्ट्रेशन घर बैठे और वीडियो कॉल से

इंदौर  नगर निगम इंदौर का पोर्टल बनकर तैयार हो चुका है। 15 अगस्त से इसके शुरू होने की संभावना है। अभी इसका ट्रायल किया जा रहा है। वार्ड 82 में सबसे पहले काम शुरू होगा फिर पूरे शहर में इसे लागू किया जाएगा। इस पोर्टल के माध्यम से लोग घर बैठे ही जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा सकेंगे। संपत्तिकर भर सकेंगे। इंदौर में संपत्तिकर के सात लाख खाते हैं।  नागरिकों को घर बैठे मिलेगी पारदर्शी और सरल सेवा महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि डिजिटल इंदौर की अवधारणा को साकार करने के लिए एकीकृत नगर निगम पोर्टल की आवश्यकता है, जिससे नागरिकों को विभिन्न सेवाएं घर बैठे सरल, सुलभ और पारदर्शी तरीके से मिल सकें। इस पोर्टल के माध्यम से संपत्ति कर, जल कर और कचरा प्रबंधन शुल्क जैसे करों की वसूली अब एक ही करदाता आईडी के माध्यम से संभव होगी। डिजिटल पता भी जुड़ेगा डिजिटल पते को इस नई प्रणाली में जोड़कर एक एकीकृत पहचान प्रणाली विकसित करने का प्रस्ताव सामने आया है। इससे करदाताओं को बार-बार जानकारी भरने की आवश्यकता नहीं होगी और दोहरे खाते की समस्या भी समाप्त हो सकेगी। विशेषज्ञों के द्वारा बताया गया है कि पोर्टल पर भुगतान के लिए कई विकल्प उपलब्ध रहेंगे, जिससे नागरिक अपनी सुविधा अनुसार भुगतान कर सकेंगे। संपत्तिकर से जुड़ी प्रक्रिया में एआरओ, बिल कलेक्टर और कैशियर की भूमिकाएं पोर्टल के माध्यम से स्पष्ट रूप से तय की जाएंगी। विवाह पंजीयन के लिए वीडियो कॉल भी विकल्प होगा जन्म-मृत्यु पंजीकरण के साथ-साथ विवाह पंजीयन प्रक्रिया भी सरल होगी। यदि पति-पत्नी में से कोई एक इंदौर में मौजूद है और दूसरा किसी अन्य शहर में है, तो ऐसी स्थिति में एक की भौतिक उपस्थिति और दूसरे की वर्चुअल उपस्थिति (वीडियो कॉल) के माध्यम से विवाह पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इससे नागरिकों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा।  

रक्षाबंधन गिफ्ट: लाड़ली बहनों के खाते में इस दिन आएंगे ₹1500

भोपाल   मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की अगस्त महीने में आने वाली 27वीं किस्त की तारीख का ऐलान हो गया है। मध्य प्रदेश की लाडली बहनों के लिए बड़ी खुशखबरी है। पहले कहा जा रहा था कि रक्षाबंधन से पहले खाते में 250 रुपये आएंगे। अब राज्य सरकार की ओर से ऐलान हो गया कि मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 27वीं किस्त के रूप में एक साथ 1500 रुपये खाते में आएंगे। राज्य सरकार के मुताबिक 7 अगस्त को राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ से लाडली बहना योजना की 27वीं किस्त के 1250 रुपये और रक्षाबंधन शगुन के 250 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे। रक्षाबंधन से पहले मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए यह बड़ी सौगात है। आमतौर पर लाडली बहना योजना की किस्त 10 तारीख के बाद आती है, लेकिन इस बार सरकार ने रक्षाबंधन को खास बनाते हुए 7 अगस्त को ही 1.27 करोड़ महिलाओं के खाते में पूरे 1500 रुपये भेजने का फैसला कर लिया है। पहले कहा जा रहा था कि पैसा दो किस्तों में आएगा। 9 अगस्त को रक्षाबंधन से पहले 250 रुपये का शगुन मिलेगा। इसके बाद 1250 रुपये की राशि ट्रांसफर की जाएगी। भाई दूज से हर महीने मिलेंगे 1500 हालांकि अब वो दिन दूर नहीं है, जब खाते में हर महीने 1500 रुपये आना शुरू हो जाएंगे। अगले महीने सितंबर में आने वाली लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त के रूप में 1250 रुपये मिलेंगे। हालांकि अक्टूबर यानी महज सिर्फ एक महीने के बाद से ही हर महीने खाते में 1500 रुपये आने शुरू हो जाएंगे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि हर साल लाडली बहनों को मिलने वाली राशि को बढ़ाया जाएगा और साल 2028 तक लाभार्थियों के खाते में 3000 रुपये आने शुरू हो जाएंगे लाडली बहनों को किस्त के अलावा मिल सकते हैं 5000 मुख्‍यमंत्री लाडली बहना योजना के अलावा राज्य सरकार ने एक और योजना शुरू की है। इसके तहत मुख्‍यमंत्री लाडली बहना योजना की लाभार्थियों को अलग से 5000 रुपये मिल सकते हैं। जो लाभार्थी महिलाएं फैक्टरी या मिल में नौकरी करेंगी, उन्हें सरकार की ओर से 5000 रुपये अलग से दिए जाएंगे। सीएम मोहन योदव ने अपने एक बयान में कहा कि रक्षाबंधन पर 1 करोड़ 27 लाख लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1500 रुपये की किस्त भेजे जाएंगे. इससे पहले लाड़ली बहना योजना के तहत राज्य की लाभार्थी महिलाओं को योजना की 26वीं किस्त 12 जुलाई 2025 को जारी की गई थी. उज्जैन के नलवा गांव में आयोजित ‘लाड़ली बहना सम्मेलन’ में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1543.16 करोड़ रुपये की राशि सीधे 1.27 करोड़ बहनों के बैंक खातों में ट्रांसफर की थी. जुलाई की इस किस्त में हर पात्र महिला को 1250 रुपये की मासिक सहायता दी गई थी, जो योजना की नियमित मंथली पेमेंट का हिस्सा है. इस दौरान मुख्यमंत्री ने 56.74 लाख वृद्ध, विधवा, दिव्यांग और अन्य पात्र नागरिकों को 340 करोड़ रुपये की राशि पेंशन के रूप में ट्रांसफर की थी. रसोई गैस की बढ़ती कीमतों से राहत देने के लिए 30 लाख से अधिक उज्ज्वला योजना लाभार्थी बहनों को 46.34 करोड़ रुपये की राशि रिफिलिंग के लिए सीधे खातों में दी गई थी. क्या है लाड़ली बहना योजना? शुरुआत: जून 2023 में, महिलाओं की आर्थिक मदद और सम्मान बढ़ाने के लिए लाभार्थी: 21 से 60 वर्ष की विवाहित, तलाकशुदा या विधवा महिलाएं वर्तमान लाभ: मंथली 1250 रुपये नई घोषणा: अक्टूबर से मंथली 1500 रुपये सहायता राशि इस बार: 9 अगस्त को 1250 रुपये और 250 रुपये का रक्षाबंधन शगुन यह योजना क्यों है खास? 'लाड़ली बहना योजना' केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. हर महीने की राशि से महिलाएं अपने छोटे-छोटे फैसले खुद ले सकती हैं, परिवार में उनकी भागीदारी बढ़ती है और आत्मसम्मान भी.  

AI क्रांति या तबाही? विशेषज्ञ बोले– आने वाले 5 सालों में 80 फीसदी नौकरियां जाएंगी

 नई दिल्ली दशकों पहले कंप्यूटर के आने पर जैसी हलचल मची थी, वैसी ही स्थिति अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर देखी जा रही है। कोई इसे लेकर आशंकित है कि नौकरियां चली जाएंगी तो कुछ लोगों को लगता है कि इससे तमाम काम आसान और पारदर्शी होंगे। इस बीच भारतीय अमेरिकी निवेशक विनोद खोसला ने बड़ा अनुमान जाहिर किया है। उनका कहना है कि अगले 5 सालों में 80 फीसदी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। निखिल कामथ के साथ पॉडकास्ट में विनोद खोसला ने कहा इन नौकरियों में लगे लोगों का काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से होने लगेगा। यही नहीं उन्होंने छात्रों को भी जागरूक करते हुए कहा कि भविष्य के छात्रों को स्पेशलिस्ट बनने की बजाय जनरलिस्ट बनना होगा यानी उन्हें तमाम चीजों की जानकारी रखनी होगी। विनोद खोसला ने उम्मीद भरी एक बात भी की। उन्होंने कहा कि भले ही मौजूदा तमाम नौकरियां चली जाएंगी, लेकिन यह भी ध्यान देने की बात है कि कुछ अवसर भी इससे पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर भी पैदा होंगे, जिनके बारे में आज हम सोच भी नहीं सकते। उन्होंने कहा कि ऐसी बहुत सी शानदार नौकरियां हैं, जिन्हें इंसान कर रहे हैं। उन कामों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किया जाएगा। ऐसी करीब 80 पर्सेंट नौकरियां होंगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2040 तक बहुत सी चीजें बदल जाएंगी। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे होंगे कि कई काम तो खत्म ही हो जाएंगे। यदि कोई उन्हें करना चाहेगा तो वह उनका शौक होगा, लेकिन जरूरत नहीं होगी। विनोद खोसला का यह अनुमान ऐसे समय में आया है, जब दिग्गज टेक कंपनियों में छटनी का दौर है। इन कंपनियों का कहना है कि वे वर्कफोर्स का पुनर्गठन कर रही हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि चीजें बदल रही हैं। हाल ही में देश की सबसे बड़ी टेक कंपनी कही जाने वाली टीसीएस ने 12 हजार कर्मचारियों की छटनी का ऐलान किया है। इसके अलावा नीतियों में भी कुछ बदलाव के संकेत दिए हैं, जिससे भविष्य में भी नौकरियों पर तलवार रहेगी।

उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की तलाश जारी, रणनीति और गठजोड़ में उलझा समीकरण

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने जैसे ही उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए तारीखों की घोषणा की है, वैसे ही विपक्षी INDIA अलायंस की चिंता बढ़ गई है। विपक्षी खेमे के लिए इस पद पर उम्मीदवार के लिए चेहरे की तलाश भी कठिन चुनौती बन गई है क्योंकि विपक्षी दलों को पता है कि संसद के दोनों सदनों में संख्या बल के आधार पर उनकी स्थिति बहुत कमजोर है। बावजूद इसके विपक्ष उपराष्ट्रपति चुनाव में एक मजबूत और वैचारिक चेहरे को उम्मीदवार के रूप में उतारने की कोशिश कर सकता है, ताकि वह देश को राजनीतिक संदेश दे सके कि वह सत्तारूढ़ भाजपा और उसके उम्मीदवार से दो-दो हाथ करने को तैयार है और उसकी विचारधारा से मुकाबला करने के लिए एकजुट खड़ा है। चूंकि संसद के दोनों सदनों के सदस्य ही उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं और वहां विपक्षी सांसदों की संख्या कम है। इसलिए इंडिया अलायंस उपराष्ट्रपति चुनाव का इस्तेमाल पिछड़े और अल्पसंख्यकों, किसानों, बुद्धिजीवियों और नागरिक समाज सहित हाशिए पर पड़े वर्गों को लामबंद करने और उनके बीच स्पष्ट संदेश देने की कोशिश करेगा। इसीलिए विपक्ष एक ऐसे वैचारिक चेहरे को साझा उम्मीदवार के तौर पर तलाश कर रहा है, जो उसके इस राजनीतिक संदेश को फैला सके। 7 अगस्त को राहुल गांधी ने बुलाई बैठक बता दें कि इंडिया अलायंस की गुरुवार (7 अगस्त) को एक अहम बैठक होने वाली है, जिसमें बिहार विधानसभा चुनाव और राज्य की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का मुद्दा उठने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में उपराष्ट्रपति चुनाव के संभावित उम्मीदवार पर भी चर्चा होने की संभावना है। राहुल दे सकते हैं प्रजेंटेशन TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में नेता विपक्ष राहुल गांधी मतदाता सूचियों पर कांग्रेस की तरफ से की गई एक रिसर्च पर प्रजेंटेशन दे सकते हैं। दो दिन पहले ही उन्होंने उस रिसर्च के बारे में कहा था कि उनके हाथ एटम बम लगा है। राहुल ने कहा है कि इससे बिना किसी संदेह के यह साबित होता है कि भाजपा की मदद के लिए मतादाता सूची के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। दरअसल, जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति पद का चुनाव होना है। पिछले महीने जस्टिस शेखर यादव और जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पर नोटिस को स्वीकार करने के अपने फैसले पर सरकार के साथ कथित टकराव के बाद धनखड़ ने 21 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति का चुनाव समय से पहले हो गया है।