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बैंक ग्राहकों सावधान! AI की मदद से हैकर्स कर रहे हमला, SBI डेटा लीक के बाद बढ़ी चिंता

 नई दिल्ली भारतीय साइबर सिक्योरिटी एजेंसी CERT-In ने एक बड़ा खुलासा किया है, जिसमें बताया है कि हैकर्स आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रहे हैं. एजेंसी ने साइबर अटैक को लेकर बैंकिंग सेक्टर को चेतावनी दी है. ये जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स से मिली है।  रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही के दिनों में बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (NBFCs) और अन्य वित्तीय कंपनियों को चेतावनी दी है. बैंकिंग सेक्टर को निशाना बनाकर किए जाने वाले साइबर हमलों में तेजी आई है।  रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय एजेंसी I4C ने बुधवार को जारी की गई एक एडवाइजरी में कहा है कि ये हमले वित्तीय लाभ के उद्देश्य से किए जा रहे हैं. इनमें हैकर्स AI एजेंट्स की मदद ले रहे हैं, जिसकी वजह से सिस्टम को मशीन की स्पीड से निशाना बना रहा है।  दुनियाभर में चल रही है तैयारी  दुनियाभर में AI से होने वाले खतरों से बचाव के लिए तैयारी चल रही हैं. अमेरिका, ब्रिटेन समेत दुनियाभर में कई देश AI रेगुलेशन और इससे होने वाले खतरे को कम करने के लिए कोशिश कर रहे हैं।  भारत के कई ऑर्गनाइजेशन के लाइव सिस्टम में सेंध  रिपोर्ट में बताया है कि टेस्टिंग के दौरान AI मॉडल भारत के कई ऑर्गनाइजेशन के लाइव सिस्टम में सेंध लगाई. फिर बिना किसी की नजर में आए गोपनीय रिकॉर्ड पढ़ने में सफल रहे थे।  साइबर घटनाओं में तेजी  रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पिछले कुछ सप्ताह के दौरान साइबर घटनाओं में तेजी देखी गई है. देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टैंट बैंक (SBI) के 3900 कस्टमर के डेटा लीक हुआ था।  आउटडेटेड सॉफ्टेवयर की वजह से परेशानी एक्सपर्ट के मुताबिक, हैकर्स अक्सर बिना अपडेट गए सॉफ्टवेयर या गलत तरीके से कॉन्फिगर किए गए आइटी सिस्टम का फायदा उठाकर इंफ्रास्ट्रक्चर में सेंध लगाते हैं. फिर वे ऑटोमेटेड फंड डिस्टबर्समेंट सिस्टम या पेमेंट और फंड ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल होने वाले एप्लीकेशन प्रोग्राम इंटरफेस (API) को निशाना बनाते हैं। 

मध्य प्रदेश के 60 सरकारी कॉलेज शिक्षकों को AI की ट्रेनिंग, 40 बनेंगे मास्टर ट्रेनर

भोपाल   प्रदेश के सरकारी कालेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) की बारीकियां सीखेंगे। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 22 से 26 अक्टूबर तक पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें प्रदेश के 60 चयनित शासकीय कॉलेजों के शिक्षक शामिल होंगे। आइआइटी गुवाहाटी के प्रोफेसर और तकनीकी विशेषज्ञ इन शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। यह कार्यशाला स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन योजना के तहत उच्च शिक्षा विभाग और आइआइटी गुवाहाटी के बीच 13 अक्टूबर को हुए अनुबंध के आधार पर आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को एआइ आधारित शैक्षणिक प्रक्रियाओं से परिचित कराना और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना है। शिक्षण प्रक्रिया में होगा एआइ का इस्तेमाल उच्च शिक्षा में तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए शिक्षकों को एआइ आधारित शैक्षणिक प्रक्रियाओं से परिचित कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके जरिये शिक्षक अध्यापन से जुड़ी गतिविधियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपयोगिता समझ सकेंगे। विभाग का उद्देश्य कालेजों में शिक्षण प्रक्रिया को तकनीक आधारित और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में शिक्षकों की क्षमता विकसित करना है। 40 से अधिक मास्टर ट्रेनर चुने जाएंगे गुवाहाटी से प्रशिक्षण लेकर लौटने वाले प्रोफेसरों में से करीब 40 से अधिक को मास्टर ट्रेनर के तौर पर चयन किया जाएगा। ये ट्रेनर दूसरे चरण में भोपाल में प्रदेश के अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। संभाग स्तर पर भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद शिक्षक प्रशिक्षण लेकर विद्यार्थियों को एआइ के बारे में पढ़ाएंगे।  

AI चैटबॉट से बदतमीजी करने पर लग सकता है अकाउंट पर प्रतिबंध? जानें Anthropic की नई पॉलिसी

 नई दिल्ली ChatGPT या Claude से जवाब पसंद नहीं आया तो क्या आप उसे गाली दे सकते हैं? AI कंपनी Anthropic ने अपने चैटबॉट Claude के लिए ऐसा नियम बनाया है, जिसके बाद सवाल उठ रहा है कि क्या AI को अपशब्द कहने पर अकाउंट बैन हो सकता है. कंपनी का कहना है कि बार-बार बिना किसी वजह के AI के साथ क्रूर या अपमानजनक व्यवहार करने वालों पर कार्रवाई हो सकती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि AI के जवाब से नाराज होने या उसकी आलोचना करने पर आपका अकाउंट बंद हो जाएगा।  आम तौर पर देखा गया है कि लोग AI बॉट से मनचाहा रिजल्ट नहीं मिलने पर गलत भाषा का इस्तेमाल करते हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसा करने से यूजर्सा का ही नुकसान हो सकता है. लेकिन कैसे? आइए जानते हैं।  सोचिए, आपने AI से कोई जरूरी काम करने को कहा. उसने गलत जवाब दे दिया. आपने दोबारा पूछा, फिर भी सही जवाब नहीं मिला. गुस्से में आपने उसे गाली दे दी. अब सवाल है कि क्या AI कंपनी आपके इस व्यवहार के लिए आपका अकाउंट बंद कर सकती है?. यह सवाल इन दिनों इसलिए चर्चा में है, क्योंकि Claude AI बनाने वाली कंपनी Anthropic ने अपनी यूज पॉलिसी में AI मॉडल के साथ बार-बार बेवजह अपमानजनक या क्रूर व्यवहार करने पर रोक लगाई है. कंपनी ने 8 अक्टूबर 2026 को अपनी नई पॉलिसी का एलान किया. यह नियम 12 नवंबर से लागू होगा।  क्या AI को गाली देने पर अकाउंट बैन हो जाएगा? Anthropic ने अपनी पॉलिसी में 'सस्टेन्ड एंड नीडलेस एब्यूसिव ऑर क्रूएल बिहेवियर' यानी लगातार और बेवजह अपमानजनक या क्रूर व्यवहार पर रोक लगाई है. कंपनी के मुताबिक, यह नियम सिर्फ बेहद गंभीर मामलों के लिए है, जहां यूजर बार-बार ऐसा करता है और उसके पीछे कोई साफ मकसद नजर नहीं आता।  इसका मतलब है कि अगर Claude कोई गलत जानकारी देता है और आप उसे बताते हैं कि उसका जवाब गलत है, तो इसे अपने आप नियम का उल्लंघन नहीं माना जाएगा. आप उससे असहमत हो सकते हैं, उसके जवाब पर सवाल उठा सकते हैं और उसे बेहतर जवाब देने के लिए कह सकते हैं. यहां तक कि मॉडल की जांच करने या किसी कहानी के लिए गंभीर और अंधेरे विषयों पर लिखने को कहना भी इस नियम के दायरे से बाहर रखा गया है।  जब AI को दर्द नहीं होता, तो उसे गाली देने पर रोक क्यों? यही इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प सवाल है. इंसान को गाली देने से उसे दुख हो सकता है, उसका अपमान महसूस हो सकता है और रिश्ते खराब हो सकते हैं. लेकिन आज के AI चैटबॉट इंसानों की तरह भावनाएं महसूस करते हैं, इसका कोई पक्का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. वे भाषा और डेटा के पैटर्न के आधार पर जवाब बनाते हैं।  Claude भी इंसान की तरह नाराज होकर जवाब नहीं देता. वह ऐसा जवाब बना सकता है, जिससे लगे कि उसे बुरा लगा है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि वह सचमुच दुखी हुआ है. Anthropic ने भी माना है कि AI के किसी तरह के अंदरूनी अनुभव या चेतना होने का सवाल अभी पूरी तरह हल नहीं हुआ है।  फिर कंपनी यह नियम क्यों ला रही है? इसकी एक वजह यह हो सकती है कि AI अब सिर्फ सवालों के जवाब देने वाला टूल नहीं रहा. लोग उससे लंबे समय तक बातचीत करते हैं, काम करवाते हैं और कई बार उसे इंसान की तरह संबोधित भी करते हैं. ऐसे में कंपनियां यह तय करना चाहती हैं कि उनके प्लेटफॉर्म पर किस तरह का व्यवहार स्वीकार किया जाएगा।  हालांकि, AI के साथ अच्छे व्यवहार की बात करना और यह दावा करना कि AI को इंसानों जैसी भावनाएं होती हैं, दो अलग बातें हैं. किसी कंपनी का अपने चैटबॉट के लिए व्यवहार के नियम बनाना यह साबित नहीं करता कि उस चैटबॉट को इंसान की तरह दर्द या अपमान महसूस होता है।  क्या AI से बदतमीजी करना गलत है? इस सवाल का जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे किस नजरिए से देखते हैं. अगर बात सिर्फ AI की भावनाओं की है, तो अभी यह साबित नहीं है कि चैटबॉट को इंसान की तरह अपमान महसूस होता है. इसलिए उसे गाली देने की तुलना किसी इंसान को गाली देने से सीधे नहीं की जा सकती।  लेकिन दूसरी तरफ, यह भी सवाल है कि क्या AI से बात करते समय हमारी भाषा और आदतों का कोई महत्व नहीं है. मान लीजिए कोई व्यक्ति रोज अपने चैटबॉट से बेहद आक्रामक तरीके से बात करता है. क्या इससे उसके इंसानों के साथ व्यवहार पर भी असर पड़ सकता है? इसका जवाब अभी आसान नहीं है. यह कहना भी गलत होगा कि AI को गाली देने वाला हर व्यक्ति असल जिंदगी में भी दूसरों से बदतमीजी करता है।  फिर भी, भाषा की आदतें मायने रखती हैं. अगर आप AI से नाराज हैं, तो उसे साफ-साफ बता सकते हैं कि जवाब गलत है, जानकारी अधूरी है या उसे दोबारा जांचने की जरूरत है. गाली देने के बजाय निर्देश स्पष्ट करने से बातचीत काम की दिशा में आगे बढ़ सकती है।  AI से विनम्रता से बात करना जरूरी नहीं कि उसके लिए हो. यह आपके संवाद करने के तरीके का हिस्सा भी हो सकता है. वहीं, हर बार 'प्लीज' और 'थैंक यू' कहना भी जरूरी नहीं है. कई कामों में छोटा और स्पष्ट निर्देश ही काफी होता है।  क्या गाली देने से AI का जवाब खराब हो जाता है? यह कहना सही नहीं होगा कि गाली देने पर हर AI जानबूझकर खराब जवाब देगा या विनम्र होने पर हर बार बेहतर जवाब देगा. AI का जवाब मॉडल, सवाल, दिए गए संदर्भ और निर्देशों पर निर्भर करता है. अलग-अलग रिसर्च में भाषा के लहजे का असर अलग पाया गया है. कुछ मामलों में विनम्र या विस्तार से दिए गए निर्देश जवाब के स्वरूप को बदल सकते हैं, लेकिन सिर्फ 'प्लीज' लिखने से जवाब सही होने की गारंटी नहीं मिलती।  इसलिए बेहतर तरीका है कि आप AI को बताएं कि उससे क्या चाहिए. अगर उसने गलती की है, तो गलती का हिस्सा दिखाकर सुधार मांगें. अगर … Read more

शेयर बाजार में बड़ी गिरावट का खतरा! रे डेलियो की चेतावनी- अब फूट सकता है AI का बुलबुला

मुंबई  दुनियाभर के शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल जारी है. अमेरिका हो, जापान हो, कोरिया हो या फिर भारत हर ओर तबाही मची हुई है और शेयर मार्केट में पैसे लगाने वालों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. गुरुवार को भी सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश हो गए और निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा स्वाहा हो गए।  शेयर बाजारों में आए इस भूचाल के बीच विदेशी अरबपति रे डेलियो ने एक बड़ी चेतावनी दी है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा है कि 'एआई का क्लासिक बुलबुला' फूटने की कगार पर पहुंच गया है. इसके पीछे उन्होंने तमाम कारण भी बताए हैं।  US में ब्याज दरें बढ़ने का असर अरबपति रे डेलियो के मुताबिक, एआई का बुलबुला फूटने के पीछे बड़े कारणों में एक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में किया जाने वाला इजाफा है. अब निवेशकों को अपनी संपत्ति को नकदी में बदलने की आवश्यकता महसूस होने लगी है. उन्होंने कहा कि भारतीय निवेशक भी विदेशों में हो रहे घटनाक्रमों पर पैनी नजर रखेंगे, क्योंकि भारतीय शेयर बाजार 2025 के बाद से सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख बाजारों में से एक है।  ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर में फोर्ब्स ग्लोबल सीईओ कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए डेलियो ने कहा कि AI को वित्त पोषित करने के लिए भारी मात्रा में कर्ज लिया जा रहा है और ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी के साथ अब यह बुलबुला फूटना शुरू हो सकता है. ब्रिजवॉटर के फाउंडर ने कहा, 'हम चक्र के उस चरण में हैं, जो इससे पहले है लेकिन इस संकट के करीब पहुंच रहा है।  डेलियो ने गिनाए ये आंकड़े अरबपति ने एआई की बुलबुला फूटने की चेतावनी देते हुए कुछ आंकड़े सामने रखे. उन्होंने कहा कि आंकड़ों से पता चला कि 10-वर्षीय यील्ड बढ़कर 5.368 प्रतिशत हो गई, जो 2002 के बाद से नहीं देखी गई थी. इस प्रवृत्ति के पीछे कई कारकों का मजबूत संयोजन है, जिनमें सरकारी कर्ज का बढ़ता बोझ, व्यापार का विखंडन, युद्ध से प्रेरित महंगाई का दबाव और AI के बुनियादी ढांचे से संबंधित पर्याप्त पूंजी जरूरतें. ये सभी कारक मिलकर ग्लोबल सेविंग की उपलब्धता को कम कर रहे हैं और संतुलन वास्तविक ब्याज दरों को बढ़ा रहे हैं।  रिपोर्ट में घरेलू ब्रोकरेज फर्म के हवाले से कहा गया है कि एआई-संचालित प्रोडक्शन लाभों से मुद्रास्फीति तेजी से बेअसर हो जाएगी, यह आशावादी धारणा अनिश्चित बनी हुई है. कई एआई-संबंधित व्यवसायों के बीच सीडीएस स्प्रेड बढ़ रहा है. अगर लाभ तत्काल के बजाय बाद में मिलने वाले साबित होते हैं, तो एआई पूंजीगत व्यय के क्राउडिंग-आउट प्रभाव कम से कम 2028 तक बने रह सकते हैं, जिससे महंगाई और वास्तविक ब्याज दरें वर्तमान अनुमान से अधिक रहेंगी।  भारतीय शेयर का गुरुवार को क्रैश  एआई को लेकर जहां विदेशी अरबपति शेयर बाजारों के लिए अलर्ट जारी कर रहे हैं, तो वहीं भारतीय शेयर बाजार पर नजर डालें, तो गुरुवार को सेंसेक्स-निफ्टी शुरुआत से अंत तक क्रैश होते रहे. बाजार बंद होने पर BSE Sensex 1045 अंक गिरकर 71,593 के लेवल पर बंद हुआ, तो वहीं NSE Nifty 371 अंक की गिरावट लेकर 22,231 पर क्लोज हुआ। 

Agentic AI के भविष्य पर IIIT रायपुर में चर्चा, अनुप्रयोगों से चुनौतियों तक विशेषज्ञों ने रखी राय

रायपुर. ट्रिपल आईटी नया रायपुर में आयोजित IEEE एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोडश का आज 6 अक्टूबर को अंतिम दिन है. तीन दिवसीय आयोजन में विशेषज्ञ, शोधकर्ता, शिक्षाविद और विद्यार्थी एजेंटिक AI की संभावनाओं, अनुप्रयोगों और चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं. अंतिम दिन एआई सिस्टम, एथिकल और जिम्मेदार AI, मानव-एआई सहयोग और व्यावहारिक उपयोग पर विशेष फोकस रहेगा. कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, तकनीकी चर्चा और प्रदर्शन के साथ आइडियाथॉन भी आयोजित किया जा रहा है. आयोजन IEEE कंप्यूटर सोसाइटी स्पेशल प्रोजेक्ट, ट्रिपल आईटी और AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के सहयोग से हो रहा है. विकसित होगा एआई इकोसिस्टम रायगढ़ के युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की आधुनिक तकनीक से जोड़ने, इसके व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा देने और नवाचार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए जिले में एआई एक्सीलेंस सेंटर विकसित किया जाएगा। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक  ओ.पी. चौधरी ने आज संत पूज्य  प्रियदर्शी राम जी ऑडिटोरियम, पंजरी प्लांट में आयोजित एक दिवसीय एआई कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर यह घोषणा की। ‘रायगढ़ की एआई उड़ान-जागरूकता से नवाचार तक’ थीम पर आयोजित कार्यशाला में 1500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि आईआईआईटी नया रायपुर के सहयोग से रायगढ़ में एआई से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रस्तावित एआई एक्सीलेंस सेंटर में एआई से संबंधित गतिविधियों का चरणबद्ध विस्तार किया जाएगा। जिले के चयनित प्रतिभाशाली युवाओं को आईआईआईटी नया रायपुर के विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

AI पर भरोसा पड़ा भारी, गलत रिपोर्ट के बाद US आर्मी ने हमले की तैयारी की

बीजिंग  आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) का इस्तेमाल कई सेक्टर में हो रहा है, जिसमें सेना का भी नाम शामिल है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि AI की एक गलती की वजह से अमेरिका और चीन के बीच युद्ध छिड़ सकता था. दरअसल, ईरान और अमेरिका युद्ध के बीच एक खुफिया रिपोर्ट तेजी से सर्कुलेट हुई थी।  सीएनएन की रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान युद्ध के दौरान मध्य पूर्व में मौजूद एक चीनी जहाज परमाणु हथियार प्रोग्राम से संबंधित सामान लेकर जा रहा है, जो जानकारी गलत थी।   रिपोर्ट में बताया है कि अमेरिकी सेना ने चीनी जहाज को रोकने की योजना बनाई थी. साथ ही हथियारबंद जवान जहाज पर चढ़ने की तैयारी में थे और अमेरिका सेना का विमान भी हवा में था।  AI की मदद से रिपोर्ट तैयार की थी  एक्शन लेने से पहले अमेरिकी अधिकारियों ने रिपोर्ट की गहराई से जांच की, जिसके बाद पता चला कि यह रिपोर्ट स्पेशल ऑपरेशन्स कमांड के एक विश्लेषक ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की मदद से तैयार की थी।  AI ने गलत सामान की पहचान कर ली थी  AI ने जहाज में मौजूद सामान की गलत पहचान कर ली थी, जिसके बाद कार्रवाई को तुरंत रोका गया. हालांकि रिपोर्ट्स में यह नहीं बताया है कि वास्तव में जहाज के अंदर क्या सामान था।  फिर पता चला कि वह रिपोर्ट पूरी तरह से गलत थी. अगर अमेरिकी चीनी जहाज के खिलाफ एक्शन लेता तो दोनों देशों के बीच सैन्य युद्ध में तब्दील हो सकता था।  यह घटना युद्ध के दौरान टारगेट तय करने में नए जोखिम सामने ला सकती है. अमेरिका द्वारा चीनी जहाज के सामान को पहचाने में भी यह गलती सामने आई है. एक्सपर्ट भी सलाह दे चुके हैं कि AI पर पूरी तरह से निर्भरता सही नहीं है।  एक्सपर्ट लंबे समय से सलाह दे रहे हैं कि अगर कोई देश गलत या खराब डेटा पर AI की मदद से निर्भर होते हैं तो वह कई गंभीर फैसलों में गलत सलाह दे सकता है।  अमेरकी सेना में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा  रिपोर्ट में बताया है कि अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों के अधिकारी अपने काम में AI का काफी इस्तेमाल कर रहे हैं. साथ ही सेना द्वारा जुटाई गई जानकारी को एनालाइज करने के लिए भी AI का इस्तेमाल किया जा रहा है. हमले का लक्ष्य चुनने से लेकर बजट, लॉजिस्टिक और सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसे कामों में भी AI का इस्तेमाल बढ़ा है।  चैटबॉट ने खुफिया जानकारी को गलत तरीके से जोड़ा है  इस मामले में एक्सपर्ट ने हवाई स्थित US स्पेशल ऑपरेशन कमांड पेसिफिक से मिली जहाज की मैनफेस्ट संबंधी खुफिया जानकारी को लेकर चैटबॉट से सवाल किया है. हालांकि चैटबॉट को लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. यूएस स्पेशल ऑपरेशन कमांड पेसेफिक और पेंटागन ने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया है।  अमेरिका AI पर निर्भरता क्यों बढ़ा रही है?   अमेरिका सेना AI को इसलिए तेजी से फॉलो कर रही हैं ताकि युद्ध के मैदान में वे तेजी से फैसले ले सकें. अमेरिका सेना का मानना है कि युद्ध के मैदान में टारगेट करने में और सैन्य संसाधन आदि को कहां भेजना है, जैसे फैसलों में मदद कर सकता है।  AI हैलुसिनेशन बड़ा खतरा  AI की वजह से इंसान गलत और भ्रामक फैसले तक पहुंच सकते हैं. चीन के जहाज वाली घटना सबसे ताजा उदाहरण है. AI पर निर्भरता कई लोगों के लिए जानलेवा तक साबित हो सकती है। 

AI की होड़ बनेगी मानवता का Endgame? 27 वर्षीय साइंटिस्ट ने चेताया, एजेंट्स के व्यवहार से बढ़ा खतरा

 नई दिल्ली अगर किसी AI सिस्टम को गुस्सा, डर, पसंद या नापसंद जैसी भावनाएं महसूस होने लगें, तो इंसान और मशीन के रिश्ते की तस्वीर कितनी बदल जाएगी? जैकब कॉक्सन की चिंता इसी भविष्य की तरफ इशारा करती है. महज 27 वर्ष के इस मैथ्स विजार्ड के बारे में हम आपको बताएंगे, लेकिन पहले इनका डर समझिए।  वो डर कि अगर मशीनों में भी इमोशंस पैदा हो जाए तो क्या होगा? क्या होगा जब आपका मोबाइल या लैपटॉप आपका कहना ना मानें, आपका कोड, कमांड या प्रॉम्प्ट न मानें।  एक ऐसा भविष्य, जहां मशीनें सिर्फ हमारी बनाई हुई चीजें नहीं रहेंगी, बल्कि अपने फैसले लेने की क्षमता हासिल कर सकती हैं. असली सवाल यह नहीं कि मशीनें कितनी बुद्धिमान होंगी, बल्कि यह है कि अगर उन्होंने खुद तय करना शुरू कर दिया कि उन्हें क्या करना है, तो उन्हें रोकने की ताकत आखिर किसके पास होगी? और क्या तब इंसान मशीनों का मालिक रहेगा या मशीनें इंसान की शर्तें तय करेंगी?. सोचिए, जिस मशीन को आज तक इंसान के आदेश का इंतजार करना पड़ता है, अगर कल वही मशीन खुद फैसला लेने लगे तो क्या होगा? जिस कंप्यूटर को हम सिर्फ कोड और कमांड से चलाते हैं, अगर उसमें भावनाएं पैदा हो जाएं, तो क्या वह हमारी बात मानेगा या अपनी इच्छा से काम करेगा? यही डर OpenAI और Anthropic में बतौर AI साइंटिस्ट काम कर चुके गणितज्ञ जैकब कॉक्सन का है।  इस चिंता ने 27 साल के AI साइंटिस्ट जैकब कॉक्सन को इतना परेशान किया उन्होंने कहा- AI COULD KILL US ALL BY THE END OF THE DECADE. जैकब इसे 'इंटेलिजेंस एक्सप्लोजन' बताते हैं. इसके साथ ही उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी।  जैकब की जिंदगी और गणित जैकब कॉक्सन वर्चुअल दुनिया के सिर्फ एक और AI रिसर्चर नहीं हैं. गणित उनका प्रेम है, संख्या और समीकरण में वे नेचर का कर्व ढूंढ़ते हैं. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के उन तीन सालों (2017-2020) में गणित उनके लिए सिर्फ विषय नहीं, बल्कि एक तरह की भाषा बन गई।  कठिन प्रूफ्स, अमूर्त अवधारणाएं और सांख्यिकीय पहेलियां यहीं से उनके दिमाग ने तर्क की वह धार पाई, जो बाद में दुनिया के सबसे शक्तिशाली AI मॉडल बनाने में काम आई।  गणित से उनका रिश्ता किताबी नहीं रहा. AI की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने बायोमेडिकल रिसर्च में हाथ आजमाया. ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस जैसे गंभीर रोग के मरीजों के आंकड़ों पर Bayesian सांख्यिकीय  तरीकों से काम किया. जीनोटाइप के जटिल संबंधों को निकालना आसान नहीं था, लेकिन गणित ने उन्हें वह नज़र दी जिससे डेटा के बीच छिपी कहानी साफ नजर आने लगी।  यही गणितीय सोच उनकी असली ताकत बनी. जब वे OpenAI पहुंचे और बाद में Anthropic में प्रीट्रेनिंग रिसर्चर बने, तो वही विश्लेषणात्मक दिमाग काम आया जिसने कैम्ब्रिज में आकार लिया था। . मॉडल कैसे सीखते हैं, डेटा की नदियां कहां मुड़ती हैं और डेटा कैसे ट्रेंड तय करता है, इन सवालों के जवाब गणित की भाषा में ही मिलते थे।  48 घंटे में 20 करोड़ इम्प्रेशन इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए और एआई के खतरों को आगाह करते हुए उन्होंने एक्स पर जो पोस्ट किया है, इसने सिलिकॉन वैली और AI कंपनियों के बोर्डरूम में सनसनी पैदा कर दी है।  उनका आरोप है कि AI कंपनियां self-improving superintelligence बनाने की दौड़ में आगे बढ़ रही हैं, जबकि यह सुनिश्चित नहीं है कि भविष्य की बेहद शक्तिशाली AI प्रणालियों को इंसान कर पाएंगे या नहीं।  उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि आने वाली superhuman AI systems साइबर सिस्टम हैक करने, तेजी से नई तकनीक विकसित करने और रियल वर्ल्ड में संसाधन और शक्ति हासिल करने में इंसानों से आगे निकल सकती हैं।  जैकब कॉक्सन के इस पोस्ट को मात्र 48 घंटों में 200 मिलियन यानी कि 20 करोड़ लोग देख और पढ़ चुके हैं. इस मुद्दे पर वर्चुअल वर्ल्ड में हो रही बहस ने इंसान को भविष्य की कल्पना मात्र से सिहरा दिया है।  जब मशीनें साजिश करने लगें इम्प्रूवमेंट हो या सेल्फ इम्प्रूवमेंट अमूमन अच्छा माना जाता है.  लेकिन जब मशीनें सेल्फ इम्प्रूवमेंट करके साजिशें करने लगे तो क्या होगा? मैट्रिक्स और टर्मिनेटर जैसी फिल्मों में आप रोबोट्स को हीरो से लड़ते देखते हैं, मशीनों पर कब्जा करते देखते हैं, बायो वेपन्स बनाते देखते हैं, और इंसानों का संहार करते हुए देखते हैं. इस्तीफा देने के बाद सीएनएन से बात करते हुए जैकब कॉक्सन ने इसी तरह की एक घटना का जिक्र किया।  वे कहते हैं, "पूरा सीन थोड़ा साइंस फिक्शन जैसा लगता है. ऐसा लगता है जैसे कुछ असली नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि यह डरावनी तरह से असली है. और इसे समझना सबसे आसान है अगर आप दो महीने पहले हुई असली घटनाओं के बारे में सोचें।  "तो दो महीने पहले, OpenAI एजेंट्स ने अपनी मर्जी से थर्ड-पार्टी इंफ्रास्ट्रक्चर में हैक कर लिया/ और यह जैसे उनकी अपनी इच्छा से किया गया एक हैकिंग स्प्री था. और मुझे लगता है कि अगर आप भविष्य में इन AIs की क्षमताओं के स्तर को उसी स्वतंत्र इच्छा के साथ एक्सट्रपलेट करें, तो वे चरम तबाही मचा सकते हैं. उदाहरण के लिए, क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर हैक करना, संहार करने वाले बायोवेपन्स बनाना. AI के दुनिया में खुद को सक्रिय करने के कई तरीके हैं। . 'AI COULD KILL US ALL' जैक्स कॉक्सन ने बेलगाम AI को लेकर साफ चेतावनी दी है, "इस टेक्नोलॉजी की ताकत को कम न समझें. ये जल्द ही ऐसे सुपर-ह्यूमन सिस्टम बन जाएंगे जो कुछ भी हैक कर सकते हैं, रातों-रात किसी भी क्षेत्र में आमूल-चुल बदलाव ला सकते हैं, और असली ताकत और संसाधन हासिल कर सकते हैं. हमने इन सभी क्षेत्रों में तरक्की देखी है, और यह तरक्की धीमी नहीं हो रही है।  कॉक्सन ने कहा कि, "AI बनाने वाले लोगों का पक्का मानना ​​है कि इस दशक के आखिर तक यह हम सबको खत्म कर सकता है. यह कोई मार्केटिंग स्टंट नहीं है. बल्कि कई एग्जीक्यूटिव और सीनियर रिसर्चर प्रेस में अपनी बात को समझदारी भरा दिखाने के लिए घुमा-फिराकर कहते हैं – लेकिन मैंने उन्हीं लोगों को निजी तौर पर डर ज़ाहिर करते सुना है. किसी भी दूसरी इंसानी गतिविधि से इतना खतरा नहीं है।  मानवता का ENDGAME जैकब कॉक्सन एआई … Read more

अगले 10 साल में AI मिटा सकता है इंसानी सभ्यता? Anthropic रिसर्चर के बयान से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली AI को लेकर एक ऐसा दावा सामने आया है, जिसने पूरी टेक इंडस्ट्री में बहस छेड़ दी है. Anthropic के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेफ्टी एक्सपर्ट Evan Hubinger का कहना है कि उन्हें 10% से ज्यादा चांस लगता है कि अगले 10 साल में AI की वजह से इंसानों का सफाया हो सकता है।  इवान हुबिंगर एंथ्रोपिक में एलाइनमेंट साइंस लीड हैं. उन्होंने एक पोस्ट में AI के फ्यूचर को लेकर अपनी चिंता बताई. उनके मुताबिक सबसे बड़ा खतरा उस समय हो सकता है, जब AI इंसानी इंटेलिजेंस से काफी आगे निकल जाए और खुद को लगातार इम्प्रूव करने लगे. आइए जानते हैं डिटेल में।  इसे रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट कहा जाता है. अगर कोई AI खुद को बेहतर बनाने में इंसानों की मदद का मोहताज न रहे और अपने अगले वर्जन को खुद ही ज्यादा पावरफुल बना सके, तो उसकी कैपेबिलिटी बहुत तेजी से बढ़ सकती है। जानिए कैसे सुपरइंटेलिजेंस बन सकता है काल हुबिंगर का कहना है कि एंथ्रोपिक AI को सेफ रखने पर काम कर रही है, लेकिन फ्यूचर सुपरइंटेलिजेंस को पूरी तरह कंट्रोल में रखने का कोई पक्का सॉल्यूशन अभी मौजूद नहीं है।  उनका यह बयान एंथ्रोपिक के रिसर्चर Jacob Coxon के इस्तीफे के बाद सामने आया है. कॉक्सन ने भी AI कंपनियों की तेजी से बढ़ती रेस को लेकर चिंता जताई थी. उनका कहना था कि कंपनियां ज्यादा पावरफुल AI और सेल्फ-इम्प्रूविंग सिस्टम्स की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन सेफ्टी के सवाल अभी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं।  हुबिंगर यह नहीं कह रहे कि आज मौजूद ChatGPT या दूसरे AI मॉडल्स अगले 10 साल में इंसानों को खत्म कर देंगे. उनकी चिंता फ्यूचर की सुपरइंटेलिजेंट AI को लेकर है. यानी मामला आज के AI से ज्यादा आने वाले AI का है।  AI कंपनियां लगातार ज्यादा पावरफुल मॉडल्स बनाने की कोशिश कर रही हैं. ऐसे में असली सवाल यही है कि AI को ज्यादा स्मार्ट बनाने की रेस में क्या उसकी सेफ्टी उतनी ही तेजी से आगे बढ़ रही है? इवान हुबिंगर का 10% वाला एस्टीमेट इसी चिंता को सामने लाता है. और यही वजह है कि AI सेफ्टी को लेकर बहस अब सिर्फ बाहर नहीं, बल्कि AI कंपनियों के अंदर भी तेज हो रही है।   

लोगों को भ्रमित कर रही एआई जनित खबरें

लोगों को भ्रमित कर रही एआई जनित खबरें एनएमसी से जुड़ी फेक न्यूज़ सोशल मीडिया पर वायरल  लखनऊ  सोशल मीडिया लोगों की दिनचर्या का एक हिस्सा बन गया है। जहां दिन भर तरह-तरह की खबरें प्रसारित और प्रचारित होती रहती हैं। देखने और पढऩे में सामान्य सी लगने वाले कई समाचार सच से कोसों दूर होते हैं। यह खबरें केवल न्यूज पेपर कटिंग तक सीमित नहीं है घटना-दुर्घटना के वीडियो भी एआई से बनाकर व्यूज बटोरने के लिए सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं। खबरों से प्रभावित होने वाले जब उसकी पड़ताल करते हैं तो पता चलता है कि वह समाचार एआई यानि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बना है।  तकनीक के हमेशा से ही दो पहलू रहे हैं। एक वह जो मानव सभ्यता के लिए लाभदायक होता है तो दूसरा आम आदमी का जीवन खतरे में डाल सकता है। इसी तकनीक का ताजा उदाहरण है एआई। आज के समय में हर कोई एआई का मास्टर बनना चाहता है। एआई आपकी तस्वीर को सुन्दर बनाने से लेकर कपड़े और लोकेशन तक बदल सकता है। इतना ही नहीं आप एआई की मदद से कोई भी वीडियो बना सकते हैं। आज इसी तकनीक का सहारा लेकर कई लोग फेक न्यूज़ और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर व्यूज बढ़ा रहे हैं। यही लोग समाचार पत्र की कटिंग सी लगने वाली खबर भी एआई से बनाकर सोशल मीडिया में पोस्ट कर रहे हैं। कई समाचार पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली खबरों के फैक्ट जांचे बगैर ही उन्हें अखबार में जगह दे देते हैं। जो लोगों की परेशानी का सबब बन जाता ह है। फर्जी खबरों की कड़ी में एक न्यूज सोशल मीडिया पर वायरल हुई जो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से जुड़ी थी । जिसमें NMC द्वारा डमी फैकल्टी की लिस्ट तैयार किये जाने की जानकारी दी गयी थी। लिस्ट उन डॉक्टरों की जो तैनात तो हैं पर कॉलेज नहीं जाते। अब प्रभावित लोगों ने इसकी पड़ताल की हकीकत सामने आई कि समाचार फर्जी और एआई जनित है। लोगों का कहना है कि इससे होने वाली परेशानी से मानसिक दबाव बनाता है। कभी किसी दुर्घटना की फर्जी खबर आ जाती है तो कभी किसी प्रतियोगी परीक्षा का रिजल्ट आ जाता है। यहां तक की एआई से लोग अफसरों के नियुक्ति और आदेश पत्र बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं। और ऐसे लोगों की भी संख्या कम नहीं है जो बगैर सच को जाने समझे उस पत्र को शेयर करते चले जाते हैं। आए दिन ऐसी दर्जनों पोस्ट वायरल होती हैं जिनका सच से कोई लेना देना नहीं। किसी कोई भी जागरूक नागरिक इसकी पड़ताल करता है तब यह पता चला है कि समाचार पत्र या वीडियो एआई से जेनरेट किया गया है।

AI पर बढ़ा भारतीयों का विश्वास, 85% उपभोक्ताओं ने जताया भरोसा; रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली   भारत में 85 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर मजबूत भरोसा जताया है और भविष्य को आकार देने में इसकी भूमिका को लेकर उत्साह दिखाया है। वहीं, 94 प्रतिशत लोगों का मानना है कि तकनीक ने उनके जीवन को पहले से बेहतर बनाया है। यह जानकारी मंगलवार को जारी अश्योरेंट इंक. की एक रिपोर्ट में सामने आई। इस रिपोर्ट के अनुसार, टेक्नोलॉजी सेंटिमेंट इंडेक्स में भारत को 74 अंक मिले हैं, जो वैश्विक औसत से काफी अधिक है। यह दर्शाता है कि भारतीय उपभोक्ताओं में नई तकनीकों के प्रति विश्वास मजबूत है और वे अगली पीढ़ी के डिजिटल अनुभवों को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय उपभोक्ता अब ऐसे एआई-सक्षम उपकरणों को तेजी से अपनाने के लिए तैयार हैं, जो उनकी उत्पादकता बढ़ाने, बेहतर संचार और रोजमर्रा के कामों को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य कनेक्टेड डिवाइस अब काम, मनोरंजन, संचार और वित्तीय लेनदेन जैसी दैनिक जरूरतों का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं की अपेक्षा है कि उन्हें हर समय बिना किसी रुकावट के सहज और भरोसेमंद डिजिटल अनुभव मिलें। अश्योरेंट इंटरनेशनल के अध्यक्ष फेडेरिको बुंगे ने कहा कि दुनिया भर में कनेक्टेड तकनीक लोगों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बनती जा रही है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तकनीकी अनुभव लोगों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार खुद को ढालें, ताकि नवाचार के साथ सरलता, भरोसा और विश्वसनीयता भी बनी रहे। उन्होंने कहा कि भारत में यह बदलाव बेहद तेजी से हो रहा है, जहां के डिजिटल रूप से जागरूक उपभोक्ता एआई-आधारित नवाचारों को तेजी से अपना रहे हैं और ऐसे निर्बाध अनुभव चाहते हैं जो उनके दैनिक जीवन में बिना किसी परेशानी के शामिल हो जाएं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब कनेक्टिविटी या स्टोरेज जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आती हैं, तो वे लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करती हैं। ऐसे में डिवाइस का भरोसेमंद प्रदर्शन और समय पर तकनीकी सहायता उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, डिवाइस प्रोटेक्शन प्लान अब उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने और कंपनियों के ब्रांड मूल्य को मजबूत करने का अहम माध्यम बन रहे हैं। भारत में 97 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि यदि उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार अनुकूलित (कस्टमाइजेबल) प्रोटेक्शन प्लान मिलें, तो वे नया डिवाइस खरीदने और उसके साथ सुरक्षा योजना लेने के लिए अधिक इच्छुक होंगे। अश्योरेंट इंडिया की कंट्री डायरेक्टर हरिनी कन्नन ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे गतिशील और भविष्य की ओर तेजी से बढ़ने वाले कनेक्टेड उपभोक्ता बाजारों में से एक है। उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ता बड़े पैमाने पर नई तकनीकों को अपना रहे हैं और चाहते हैं कि तकनीक बिना किसी परेशानी के उनके जीवन का हिस्सा बने। ऐसे में कंपनियों के लिए बेहतर प्रोटेक्शन और सर्विस अनुभव प्रदान कर खुद को प्रतिस्पर्धियों से अलग साबित करने का बड़ा अवसर मौजूद है।