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AI पर बढ़ा भारतीयों का विश्वास, 85% उपभोक्ताओं ने जताया भरोसा; रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली   भारत में 85 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर मजबूत भरोसा जताया है और भविष्य को आकार देने में इसकी भूमिका को लेकर उत्साह दिखाया है। वहीं, 94 प्रतिशत लोगों का मानना है कि तकनीक ने उनके जीवन को पहले से बेहतर बनाया है। यह जानकारी मंगलवार को जारी अश्योरेंट इंक. की एक रिपोर्ट में सामने आई। इस रिपोर्ट के अनुसार, टेक्नोलॉजी सेंटिमेंट इंडेक्स में भारत को 74 अंक मिले हैं, जो वैश्विक औसत से काफी अधिक है। यह दर्शाता है कि भारतीय उपभोक्ताओं में नई तकनीकों के प्रति विश्वास मजबूत है और वे अगली पीढ़ी के डिजिटल अनुभवों को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय उपभोक्ता अब ऐसे एआई-सक्षम उपकरणों को तेजी से अपनाने के लिए तैयार हैं, जो उनकी उत्पादकता बढ़ाने, बेहतर संचार और रोजमर्रा के कामों को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य कनेक्टेड डिवाइस अब काम, मनोरंजन, संचार और वित्तीय लेनदेन जैसी दैनिक जरूरतों का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं की अपेक्षा है कि उन्हें हर समय बिना किसी रुकावट के सहज और भरोसेमंद डिजिटल अनुभव मिलें। अश्योरेंट इंटरनेशनल के अध्यक्ष फेडेरिको बुंगे ने कहा कि दुनिया भर में कनेक्टेड तकनीक लोगों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बनती जा रही है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तकनीकी अनुभव लोगों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार खुद को ढालें, ताकि नवाचार के साथ सरलता, भरोसा और विश्वसनीयता भी बनी रहे। उन्होंने कहा कि भारत में यह बदलाव बेहद तेजी से हो रहा है, जहां के डिजिटल रूप से जागरूक उपभोक्ता एआई-आधारित नवाचारों को तेजी से अपना रहे हैं और ऐसे निर्बाध अनुभव चाहते हैं जो उनके दैनिक जीवन में बिना किसी परेशानी के शामिल हो जाएं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब कनेक्टिविटी या स्टोरेज जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आती हैं, तो वे लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करती हैं। ऐसे में डिवाइस का भरोसेमंद प्रदर्शन और समय पर तकनीकी सहायता उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, डिवाइस प्रोटेक्शन प्लान अब उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने और कंपनियों के ब्रांड मूल्य को मजबूत करने का अहम माध्यम बन रहे हैं। भारत में 97 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि यदि उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार अनुकूलित (कस्टमाइजेबल) प्रोटेक्शन प्लान मिलें, तो वे नया डिवाइस खरीदने और उसके साथ सुरक्षा योजना लेने के लिए अधिक इच्छुक होंगे। अश्योरेंट इंडिया की कंट्री डायरेक्टर हरिनी कन्नन ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे गतिशील और भविष्य की ओर तेजी से बढ़ने वाले कनेक्टेड उपभोक्ता बाजारों में से एक है। उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ता बड़े पैमाने पर नई तकनीकों को अपना रहे हैं और चाहते हैं कि तकनीक बिना किसी परेशानी के उनके जीवन का हिस्सा बने। ऐसे में कंपनियों के लिए बेहतर प्रोटेक्शन और सर्विस अनुभव प्रदान कर खुद को प्रतिस्पर्धियों से अलग साबित करने का बड़ा अवसर मौजूद है।

रक्षा तकनीक में बड़ा कदम, IIT रोपड़ विकसित करेगा AI टैंक और लेजर ड्रोन-रोधी सिस्टम

चंडीगढ़ भारतीय सेना को आधुनिक और स्वदेशी हथियारों से लैस करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पंजाब स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), रोपड़ ने आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड (ATB) से कुल 120 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण रक्षा प्रोजेक्ट हासिल किए हैं। 27वें आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड साइकिल के तहत दिए गए इन प्रोजेक्ट्स का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के लिए 'स्वायत्त बख्तरबंद वाहन' (Autonomous Armoured Vehicles) और 'डायरेक्टेड एनर्जी वेपन' (Directed Energy Weapons) विकसित करना है। यह कदम न केवल सीमा पर सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य की युद्ध तकनीकों में भारत को आत्मनिर्भर भी बनाएगा। बिना इंसानी मदद के चलेंगे बख्तरबंद वाहन इस पहल का पहला प्रमुख हिस्सा अगली पीढ़ी के कॉम्बैट प्लेटफॉर्म यानी स्वायत्त बख्तरबंद वाहनों का विकास है। ये ऐसे वाहन या टैंक होंगे जिन्हें चलाने के लिए इंसानों की कम से कम जरूरत पड़ेगी। आईआईटी रोपड़ के निदेशक राजीव आहूजा के अनुसार, ये सिस्टम नेविगेशन, खतरों की पहचान करने और युद्ध के मैदान में सटीक निर्णय लेने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे दुश्मन के चुनौतीपूर्ण इलाकों और प्रतिकूल परिस्थितियों में काम कर रहे हमारे सैनिकों के लिए जोखिम काफी कम हो जाएगा। भविष्य की तकनीक: डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) आईआईटी रोपड़ का दूसरा प्रोजेक्ट 'डायरेक्टेड एनर्जी वेपन' के विकास से जुड़ा है। ये हथियार आधुनिक युद्ध क्षेत्र के लिए 'गेम-चेंजर' माने जा रहे हैं। इनमें दुश्मनों के खतरों को बेअसर करने के लिए अत्यधिक केंद्रित विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा बीम का इस्तेमाल किया जाता है। निदेशक आहूजा ने बताया कि एंटी-ड्रोन ऑपरेशन, मिसाइल रक्षा प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) अनुप्रयोगों के लिए इन प्रणालियों को आधुनिक युद्ध में बेहद मारक और उपयोगी माना जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास को मिलेगा बूस्ट भारतीय सेना के सैन्य संचालन निदेशालय ) के तहत काम करने वाला एटीबी (ATB) उभरती तकनीकी आवश्यकताओं की पहचान करता है और उन्नत समाधान देने में सक्षम संस्थानों को महत्वपूर्ण अनुसंधान और विकास कार्य सौंपता है। आईआईटी रोपड़ को ये दोनों प्रोजेक्ट रोबोटिक्स, ऑटोनॉमस सिस्टम, फोटोनिक्स और लेजर तकनीक में उसकी विशेषज्ञता के आधार पर मिले हैं। संस्थान के निदेशक ने इसे सेना द्वारा उनके रिसर्च इकोसिस्टम पर जताए गए भरोसे का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा, "हमारे संकाय और छात्र रक्षा प्रौद्योगिकी डोमेन में कठोर परिश्रम कर रहे हैं। हम इसे राष्ट्रीय सुरक्षा में सीधे योगदान के रूप में देखते हैं और इसे सामरिक रक्षा कार्यक्रमों के लिए आवश्यक अनुशासन के साथ पूरा करेंगे।" इन प्रोजेक्ट्स का असर केवल सेना तक सीमित नहीं रहेगा। आईआईटी रोपड़ के अधिकारियों का कहना है कि इन रक्षा कार्यक्रमों से क्षेत्र में भारी आर्थिक गतिविधियां भी पैदा होंगी। कलपुर्जों के निर्माण और परीक्षण के लिए स्टार्टअप्स, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और उद्योग भागीदारों के साथ सहयोग किया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस तरह के बड़े तकनीकी कार्यक्रमों से रिसर्च संस्थानों के आसपास एक 'इनोवेशन इकोसिस्टम' तैयार होता है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और विशेष उद्योगों को बढ़ावा मिलता है।

प्रवासी पक्षियों पर रहेगी स्मार्ट नजर: सुल्तानपुर में AI कैमरे और ड्रोन करेंगे निगरानी

चंडीगढ़  सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में अब कृत्रिम बुद्धिमता (एआइ) और ड्रोन के माध्यम से पक्षियों की गणना होगी। पहली बार डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जाएगा कि आगामी सीजन में कितने प्रवासी पक्षी आए, कब पहुंचे और किन हिस्सों में रुके। साथ ही पता लगाया जाएगा कि कितने समय तक प्रवासी पक्षी रहे और पर्यावरणीय बदलावों का उनकी गतिविधियों पर क्या असर पड़ा। गुरुग्राम जिले में फरुखनगर के पास स्थित सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में अभी तक पक्षियों की गणना प्रत्यक्ष अवलोकन पर आधारित रही है। इसमें पक्षियों की मौजूदगी का केवल एक समय का चित्र सामने आता था। जलभराव, दलदली हिस्से और संवेदनशील क्षेत्र कई बार प्रत्यक्ष गणना को सीमित कर देते हैं। निगरानी टावरों पर लगाए गए एआई आधारित कैमरे नई व्यवस्था में ड्रोन उन हिस्सों का सर्वे भी करेंगे जहां सामान्य टीमें नहीं पहुंच पातीं। इससे पक्षियों की गतिविधि का ज्यादा व्यापक और सटीक रिकार्ड तैयार होने की उम्मीद है। ड्रोन से मिलने वाली तस्वीरें और वीडियो एआइ विश्लेषण के साथ जोड़कर गणना को अधिक विश्वसनीय बनाने की योजना है। उद्यान में दो स्थानों पर बने निगरानी टावरों पर एआइ आधारित कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो पार्क की झीलों, जलभराव वाले क्षेत्रों और आसपास के खुले भूभाग को लगातार रिकार्ड करेंगे। इससे पूरे मौसम का व्यावहारिक डेटा तैयार होगा, जिससे पता लगेगा कि कौन सी प्रजाति किस समय सबसे ज्यादा सक्रिय रही, किस हिस्से में आवाजाही बढ़ी या घटी और किन इलाकों का उपयोग कम हुआ। इन कामों में एआई से मिलेगी मदद एआइ सिस्टम दुर्लभ और संवेदनशील प्रजातियों की पहचान के साथ उनके व्यवहार और आवास में बदलाव के संकेत भी रिकार्ड करेगा। देखा जाएगा कि जल क्षेत्र कितना बदला, वनस्पति की स्थिति कैसी रही और किस हिस्से में पक्षियों की गतिविधि कम या ज्यादा हुई। अक्टूबर से शुरू होने वाली डिजिटल निगरानी से यह समझने में मदद मिलेगी कि बदलता मौसम, मानसून में देरी, गर्मी-सर्दी, सिकुड़ते वेटलैंड और बढ़ती मानवीय गतिविधियां प्रवासी पक्षियों को किस तरह प्रभावित कर रही हैं। इसके आधार पर भविष्य में पानी प्रबंधन, वनस्पति नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में आगंतुकों की आवाजाही और संरक्षण की रणनीति तय की जा सकेगी। लगातार बदल रही पक्षियों की संख्या सुल्तानपुर में हर साल 250 से अधिक प्रजातियों के पक्षी होते हैं, जिनमें 100 से ज्यादा प्रवासी प्रजातियां शामिल रहती हैं। हाल के वर्षों के आंकड़े दिखाते हैं कि पक्षियों की संख्या और प्रजातियों की संरचना लगातार बदल रही है। 2025 में यहां 48 प्रजातियों के 2,593 प्रवासी पक्षी दर्ज किए गए, जबकि 2024 में 43 प्रजातियों के 2686 और 2023 में 61 प्रजातियों के 6,036 पक्षी दर्ज किए गए थे।

टेक इंडस्ट्री में AI बना नया पैमाना, इस्तेमाल न करने वाले कर्मचारियों की नौकरी पर बढ़ा जोखिम

 नई दिल्ली क्या आप भी इस मुगालते में हैं कि बिना एआई सीखे आपका काम मजे से चलता रहेगा? अगर हां, तो ग्लोबल सर्वे एजेंसी 'गैलप' की यह ताजा स्टडी आंखें खोलेने के ल‍िए है. टेक इंडस्ट्री में इस समय एआई सिर्फ काम को आसान बनाने का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह आपकी नौकरी बचाने का सबसे बड़ा 'सुरक्षा कवच' बन चुका है।  गैलप के नए शोध के मुताबिक, जो टेक कर्मचारी अपने रोजमर्रा के काम में एआई का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, उनके नौकरी गंवाने (ले ऑफ) का खतरा एआई इस्तेमाल करने वाले साथियों की तुलना में तीन गुना ज्यादा है।  बता दें कि गैलप ने ये अनुमान अमेरिका के 23,000 से अधिक कामकाजी लोगों पर किए गए सर्वे के आधार पर लगाया है. इसमें वो 660 लोग भी शामिल थे जिनकी हाल ही में नौकरी चली गई थी. इसके स्टेटेस्ट‍िक मॉडल से कई बातें निकलकर आईं, जैसे जो टेक कर्मचारी महीने में कम से कम एक बार या उससे अधिक एआई टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, उनके छंटनी की संभावना सिर्फ 6 फीसदी पाई गई।  वहीं नॉन-एआई यूजर्स कर्मचारी यानी जो एआई से दूरी बनाकर रखते हैं या बहुत कम इस्तेमाल करते हैं, उनकी नौकरी जाने का रिस्क सीधे 18 फीसदी तक पहुंच जाता है. रिपोर्ट में साफ किया गया है कि टेक इंडस्ट्री से बाहर के सेक्टर्स में भी एआई का इस्तेमाल न करने वाले कर्मचारी छंटनी के काफी करीब हैं, हालांकि वहां रिस्क का यह अंतर टेक सेक्टर जितना बड़ा नहीं है।  कंपनियों की नई 'फॉल्ट लाइन' बना एआई ये स्टडी इशारा करती है कि एआई यानी आर्ट‍िफ‍िश‍ियल इंटेल‍िजेंस अब कंपनियों के भीतर एक ऐसी विभाजक रेखा (फॉल्ट लाइन) बन चुका है, जो सीधे तौर पर लोगों के करियर को प्रभावित कर रहा है. कंपनियां अब न सिर्फ नए उम्मीदवारों को हायर करते समय 'एआई साक्षरता' चेक कर रही हैं, बल्कि मंदी या छंटनी के वक्त यह भी देख रही हैं कि किस कर्मचारी को रोकना है और किसे बाहर का रास्ता दिखाना है।  कर्मचारी कुछ और कह रहे हैं, कंपनियां कुछ और! इस रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू कंपनियों और कर्मचारियों के बीच का वैचारिक अंतर है. छंटनी का शिकार हुए केवल 1 फीसदी कर्मचारियों ने माना कि उनकी नौकरी जाने की सीधी वजह एआई है. अधिकांश ने इसके लिए कंपनियों के पुनर्गठन (Restructuring), कॉस्ट-कटिंग या खराब आर्थिक हालातों को ज़िम्मेदार ठहराया।  इसके उलट, 'चैलेंजर, ग्रे एंड क्रिसमस इंक' के डेटा के मुताबिक, पिछले महीने कंपनियों द्वारा की गई छंटनी की घोषणाओं में एआई सबसे बड़ा कारण था, जो कुल घोषणाओं का लगभग 40 फीसदी था. गैलप के मुख्य वैज्ञानिक जिम हार्टर का मीड‍िया को द‍िया बयान काफी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपनी नौकरी जाने के लिए सीधे एआई को दोष नहीं दे रहे हैं, जिससे एआई का वह अप्रत्यक्ष प्रभाव छिप जाता है जो कंपनियां छंटनी का फैसला लेते समय मन में रखती हैं। 

अमेरिकी कार्रवाई का असर: AI से जुड़ी इस सेवा पर लगा ताला, वैश्विक यूजर्स प्रभावित

वाशिंगटन अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है. अब अमेरिका ने AI कंपनी एंथ्रोपिक के लिए नए नियम जारी किए हैं. नए नियम के तहत विदेशी नागरिकस, कर्मचारियों और किसी भी गैर- अमेरिकी संस्था को एंथ्रोपिक के एडवांस्ड AI प्रोग्राम तक के एक्सेस देने पर रोक लगा दी गई है।  अमेरिका ने निर्यात नियंत्रण के तहत एंथ्रोपिक के लिए नए नियम जारी किए हैं. इसके बाद एंथ्रोपिक का बयान भी सामने आया है. साथ ही कंपनी ने बताया है किन मॉडल को नए नियम के दायरे में रखा है. कंपनी ने बताया है कि आगे गलतफहमी को दूर करके दोबारा सर्विस शुरू करेंगे।  एंथ्रोपिक ने अपना बयान जारी किया  एंथ्रोपिक ने कहा है कि अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अधिकारों का हवाला देते हुए एक्सपोर्ट कंट्रोल के निर्देश जारी किए हैं।  नए निर्देश के तहत अमेरिका के भीतर और बाहर मौजूद किसी भी विदेशी नागरिक के लिए Fable 5 और Mythos 5 के एक्सेस को सस्पेंड करने का ऑर्डर दिया है. फिर चाहें वह एंथ्रोपिक के विदेशी नागरिक कर्मचारी ही क्यों ना हो।  कंपनी ने आगे बताया है कि अमेरिकी सरकार के आदेश का सीधा असर यह है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अपने सभी ग्राहकों के लिए Fable 5 और Mythos 5 की सेवाएं तत्काल प्रभाव से बंद करनी पड़ रही हैं।  अन्य सर्विस पर कोई असर नहीं  अमेरिकी आदेश के तहत Claude के अन्य सभी मॉडल्स की पहुंच पर कोई असर नहीं होगा. कंपनी ने आगे बताया है कि इस आदेश की वजह से प्रभावित होने वाली परेशानी के लिए अपने कस्टमर से माफी चाहते हैं।  कंपनी का अनुमान है कि यह किसी प्रकार की गलतफहमी है और जल्द से जल्द अपनी सर्विस को दोबारा शुरू करने की कोशिश करेंगे।  एंथ्रोपिक का मिथोस चर्चा में क्यों?  एंथ्रोपिक ने हाल ही में मिथोस AI लेवल का AI मॉडल लॉन्च किया है, जिसका एक्सेस आम लोगों को भी मिलेगा. कंपनी ने इसको Fable 5 नाम दिया है. मिथोस की लॉन्चिंग के समय कंपनी ने बताया था कि इसको खासतौर से सरकारी और चुनिंदा कंपनियों के लिए तैयार किया है. मिथोस को विशेष रूप से साइबर सिक्योरिटी और जटिल सॉफ्टवेयर कोड का पता करने के लिए डिजाइन किया गया है। 

पिन और ओटीपी की सुरक्षा खतरे में, नया AI बैंकिंग डेटा चोरी करने में सक्षम, भारत में मची हलचल

नई दिल्ली क्या दुनिया के बैंकों में कोई चोर घुस चुका है? क्या बैंक अकाउंट और कंप्यूटरों का सारा डेटा खतरे में आने वाला है? क्या सारे पासवर्ड किसीको पता चल चुके हैं या पता चल सकते हैं? पूरी दुनिया में खलबली क्यों मची हुई है? आपने भी खबर शायद देखी हो कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने दिल्ली में एक बहुत महत्वपूर्ण बैठक बुलाई. और देश के बड़े-बड़े बैंकों के प्रमुखों, रिजर्व बैंक के अधिकारियों और IT मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ भी बैठक की. बैंकों को किस खतरे के लिए तैयार रहने के लिए कहा जा रहा है? ये सबको समझने की ज़रूरत है. वित्त मंत्री कह रही हैं कि ये खतरा पहले आए किसी भी खतरे से बहुत अलग है और बहुत गंभीर भी हो सकता है. अभी हुआ तो कुछ नहीं है लेकिन बैंकों को बहुत सतर्क रहना होगा, तैयारी करनी होगी और आपस में बेहतर तरीके से मिलकर काम करना होगा. तो क्या है ये खतरा? इस खतरे का नाम है क्लॉड मिथोस. क्लॉड का नाम तो आपने सुना हो शायद. अमेरिका की एक AI यानी आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस कंपनी है जिसका नाम है ऐंथ्रॉपिक. उसने क्लॉड नाम का AI मॉडल बनाया था जो काफी लोग इस्तेमाल करते हैं आपने भी किया हो शायद. तो इस कंपनी ने एक नया AI मॉडल बनाया क्लॉट मिथोस के नाम से. ये किसलिए बनाया? तो इसका मकसद ये था कि कंपियनों के, बैंकों के, सरकारों के ये किसी के भी जो कंप्यूटर सिस्टम होते हैं उनमें आप जानते ही हैं कि हैकरों का खतरा बना रहता है. कंप्यूटर को हैक कर लेते हैं, किसी के अकाउंट को हैक कर लेते हैं, मतलब कंप्यूटर के अंदर घुसकर डकैती कर लेते हैं ऐसे हैकर. कई कंपनियों की वेबसाइट ठप कर देते हैं, कभी किसी के बैंक के अकाउंट से पैसा साफ कर देते हैं. इसलिए सब कहते रहते हैं कि पासवर्ड बदलते रहा करो, हैकरों से बचाने के लिए अलग-अलग सॉफ़्टवेयर भी मिलने लगे बाज़ार में . ऐंथ्रॉपिक के क्लॉड मिथोस से हिली दुनिया हैकर लोग भी असल में शातिर लोग होते हैं जो कंप्यूटर के अंदर का सब सिस्टम समझते हैं. मतलब वो दिमाग लगाते हैं कि सॉफ्टवेयर के अंदर कैसे घुसना है. कमजोर कड़ी पकड़ते हैं. जैसे वो फिल्मों में नहीं होता कि म्यूज़ियम में चार लेवल की सुरक्षा के बीच हीरा पड़ा हुआ है और चोर पूरा नक़्शा ले कर प्लैन बना कर हीरा चुराने निकल पड़ता है. जब तक सायरन बजता है चोर हीरा ले कर गायब हो चुका होता है. तो हैकर लोग यही काम कंप्यूटर में घुस कर करते हैं. तो ऐंथ्रॉपिक कंपनी ने सोचा कि चोरों से दो कदम आगे रहने के लिए क्यों ना AI को लगा दिया जाए. कंप्यूटर के अंदर कौनसी कमजोर कड़ी है ये AI ढूंढ कर बता दे तो? जैसे चोर तिजोरी का ताला तोड़कर घुसता है या ताले का कॉम्बिनेशन बनाकर तिजोरी खोलता है, वैसे ही तो हैकर लोग पासवर्ड को तोड़कर कंप्यूटर के सिस्टम में घुस जाते हैं. तो AI को अगर इस काम में लगा दें तो वो तो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से तो महीनों का काम मिनटों में हो सकता है. AI मॉडल बता देगा कि कहां से हैकर सेंध लगा सकते हैं और कंपनी अपने आप को वहां से मजबूत कर लेगी. सेर को सवा सेर मिल जाएगा. चोर डाल-डाल तो AI पात-पात. तो ये AI मॉडल बनाया ऐंथ्रॉपिक कंपनी ने, क्लॉड मिथोस. और फिर क्या हुआ? 30-30 पुरानी कमजोरी झट से पकड़ में आई कंपनी ने मॉडल को टेस्ट किया. और टेस्ट किया तो कंपनी खुद ही दंग रह गई. AI ने झट से बड़ी से बड़ी कंपनियों के सॉफ़्टवेयर में कहां-कहां छेद है बता दिया. 20-20, 30-30 साल से जो कमज़ोर कड़ियां पड़ी हुई थीं कई कंप्यूटर नेटवर्क में क्लॉड मिथोस ने झट पकड़ लीं. आप कहोगे कि इसपर तो ख़ुश होना चाहिए था. वो तो ठीक है लेकिन कंपनी घबरा भी गई. कंपनी ने ऐलान किया कि टेस्टिंग में जो पता चला है उसके बाद हमने फ़ैसला किया है कि क्लॉड मिथोस को बाज़ार में नहीं उतारा जाएगा. कंपनी ने इतना ख़र्च करके एक चीज़ बनाई लेकिन वो अपने बनाए मॉडल से ही डर गई. क्यों डर गई? क्योंकि उसने देखा कि ये तो कोई भी पासवर्ड, कोई भी सिक्यूरिटी, कोई भी कंप्यूटर का ताला कुछ ही देर में तोड़ कर कंप्यूटर के अंदर घुस जाता है. तो ये किसी के हाथ लग गया और सोचो किसी बैंक के सिस्टम में घुस गया तो सारे अकाउंट ही साफ़ कर के निकल जाएगा? इसको तो कोई पासवर्ड रोक ही नहीं पा रहा? मतलब बनाया तो इसे था चोरी के रास्ते पहचानकर उनको ठीक करने के लिए. लेकिन अगर ये ख़ुद चोरी करने पर आ जाए तो इसको कौन रोकेगा? कहने को तो ये एक सामान्य AI मॉडल है जो लिखने-पढ़ने में, कोडिंग करने में और सोचने में बहुत तेज़ है, लेकिन सबसे ख़ास बात ये है कि कंप्यूटर सुरक्षा के मामले में ये इंसानों से भी ज्यादा स्मार्ट है . क्लॉड मिथोस ताले को खोल देगा मतलब मान लो आपके घर का ताला बहुत पुराना है और उसमें छोटी-छोटी कमज़ोरियाँ हैं जिन्हें पहले किसी ने नहीं देखा. क्लॉड मिथोस बिना किसी मदद के उस ताले को खोलने का तरीका खुद ढूँढ लेता है. इसी तरह ये कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर ऐसी कमजोरियाँ पकड़ लेता है जिनके बारे में दुनिया को अभी तक पता भी नहीं है. फिर ये कमजोरियों को जोड़कर पूरा हैकिंग का तरीक़ा भी खुद बना सकता है. इसने टेस्टिंग में एक वेब ब्राउज़र में चार कमज़ोरियाँ मिलाकर ऐसा हमला बनाया कि ब्राउज़र और कंप्यूटर दोनों की सुरक्षा तोड़ दी. ऐसा काम करने के लिए 10-15 साल के अनुभव वाला कोई साइबर एक्सपर्ट चाहिए होता था, लेकिन ये AI मॉडल अकेला और बहुत तेजी से इसको कर सकता है . गलत हाथों में पड़ जाए तो… कंपनी ने खुद टेस्ट किया तो हज़ारों ऐसी कमज़ोरियां मिलीं. ये इतना ख़तरनाक है कि अगर ग़लत हाथों में पड़ जाए तो किसी बैंक के सिस्टम में घुस जाए, किसी सरकार के सिस्टम में घुस जाए, किसी अस्पताल के सिस्टम में घुस जाए, किसी कंपनी … Read more

AI के क्षेत्र में कदम रखने वाली जूते बेचने वाली कंपनी, स्टॉक में 870% का उछाल

 नई दिल्‍ली एक कंपनी अपना काम बदलने जा रही है. इस ऐलान के बाद कंपनी के शेयरों में रिकॉर्डतोड़ उछाल देखी गई है. देखते ही देखते कंपनी के शेयर  870% चढ़ चुका है. यह कंपनी कल तक जूते बेच रही थी, लेकिन अचानक इसने अपना बिजनेस बदल दिया है और कहा है कि वह अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में कदम रख रही है।  इस ऐलान के बाद इसके शेयर एक टेक कंपनी की तरह वैल्‍यू दिखाने लगे. 15 अप्रैल 2026 की रात शेयर ने धुंआधार तेजी दिखाई, जिसे देखकर बड़े-बड़े निवेशक भी हैरान दिखाई दिए.  यह शेयर सिर्फ कुछ मिनटो में 400 फीसदी और आखिरी घंटे तक आते-आते 800 फीसदी से ज्यादा चल गया।  कुछ ही दिनों में इस शेयर ने शानदार तेजी दिखाई है. बुधवार को यह शेयर अमेरिकी बाजार में 6.82 डॉलर पर खुला और जैसे ही कंपनी ने अपने बिजनेस रणनीति को साफ किया, कुछ ही घंटों में शेयर 24.3 डॉलर तक पहुंच गया. यह ओपनिंग प्राइस से 870 फीसदी की उछाल थी।  इसे ऐसा भी कह सकते हैं कि कुछ ही घंटे में इस शेयर ने 9 गुना से ज्‍यादा का रिटर्न दिया. आखिर में यह शेयर 16.99 डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 582% की वन डे उछाल थी. कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर करीब 176 मिलियन डॉलर पहुंच गया।  किस कंपनी ने किया ये कमाल  यह कंपनी ऑलबर्ड्स है, जिसने ऐलान किया कि वह अब खुद को NewBird AI के तौर पर रीब्रैंड करने जा रही है. साथ ही ये कंपनी एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस में काम करेगी. कंपनी का यह फैसला अचानक नहीं आया, बल्कि कंपनी ने मार्च 2026 के आखिरी में अपना जूते वाला बिजनेस 39 मिलियन डॉलर में अमेरिकन एक्‍सचेंज ग्रुप को बेच दिया था, जिसका मतलब था कि कंपनी अपने पुराने बिजनेस से बाहर निकल रही थी. हालांकि अब उसने पूरी तरह से बिजनेस बदल चुका है।  गौरलब है कि इस कंपनी के शेयरों में ऐसे समय में तेजी आई है, जब ग्‍लोबल सेंटिमेंट बदल रहे हैं. ईरान और अमेरिका जंग को खत्‍म करने को लेकर बातचीत करने जा रहे हैं. ऐसे में शेयर बाजार का नजरिया बदला है और निवेशक अच्‍छा दाव लगा रहे हैं। 

परीक्षाओं में नकल पर सख्ती: चयन आयोग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति, AI कैमरों से होगी लाइव निगरानी

प्रयागराज/लखनऊ. प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी और नकलविहीन बनाए रखने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग ने सख्त कदम उठाए हैं। आयोग के अध्यक्ष डॉ प्रशांत कुमार ने बताया कि आगामी परीक्षाओं में जीरो टॉलरेंस नीति को पूरी तरह लागू किया जाएगा, जिससे शुचिता, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।  उन्होंने बताया कि इसके लिए आयोग मुख्यालय में अत्याधुनिक एकीकृत कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से सभी परीक्षा केंद्रों की सघन निगरानी की जाएगी। इस कंट्रोल रूम में दो दर्जन से अधिक हाई-क्वालिटी स्क्रीन और एआई कैमरों की व्यवस्था की गई है, जिससे परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों पर रियल-टाइम नजर रखी जा सकेगी। यह व्यवस्था परीक्षा प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी एवं नकलविहीन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि आयोग द्वारा परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ आधुनिक निगरानी तंत्र को अपनाया जा रहा है, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता को तुरंत चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनुचित साधनों के प्रयोग पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने अभ्यर्थियों से अपील की कि वे परीक्षा को पूर्ण ईमानदारी एवं नियमों के अनुरूप दें तथा किसी भी प्रकार की अफवाहों या भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें। आयोग द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ सुनिश्चित की जा रही हैं।

Oracle की छंटनी के बीच AI ने 12 हजार नौकरियां खत्म कीं, परप्लेक्सिटी CEO का बयान सामने आया

 नई दिल्ली ओरैकल (Oracle) ने भारत में करीब 12 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है. यहां नौकरी से निकालने की पीछे की वजह AI को बताया गया है. इसी बीच परप्लेक्सिटी के सीईओ अरविंद श्रीनिवास का एक बयान चर्चा में है।  अरविंद श्रीनिवास ने हाल ही में जारी ऑल इन पॉडकास्ट पर कहा है कि AI की वजह से नौकरी गंवाने वालों को इसे एक मौके की तरह देखना चाहिए और अपना खुद का काम शुरू करना चाहिए।  पॉडकास्ट के दौरान कहा कि कुछ समय के लिए नौकरी का नुकसान होगा लेकिन AI टूल्स लोगों को मिनी बिजनेस शुरू करने का मौका देता है. साथ ही कमाई के नए रास्ते बनाने की सुविधा देता है।  अरविंद श्रीनिवास ने डिटेल्स में बताते हुए कहा है कि असल बात यह है कि बहुत से लोग अपनी नौकरी से खुश नहीं हैं. अब एक नई संभावना और नया मौका सामने आया है कि इन टूल्स को सीखें और अपना छोटा बिजनेस शुरू करें।  सीईओ के इस बयान पर सोशल मीडिया पर काफी आलोचना भी हुई है. कई लोगों ने कहा कि अपना बिजनेस शुरू करना आसान नहीं होता है. हालांकि कुछ लोगों ने इस सोच का समर्थन भी किया है।  एक्सपर्ट ने बताया 5 साल में इतनी नौकरी जाने की आशंका  कई एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले 5 साल में सिर्फ अमेरिका में ही AI करीब 90 लाख नौकरियों पर असर डालेगा. इनमें प्रोग्रामिंग, वेब डिजाइन और डेटा साइंस जैसी नौकरी पर असर पड़ेगा. वहीं, इंडस्ट्री लीडर्स ने भी यह वॉर्निंग दी है कि बेरोजगारी का स्तर 30% से भी ज्यादा तक पहुंच सकता है।  आने वाले दिनों में और लोगों को निकालेगा Oracle  ओरैकल ने अभी करीब 12,000 कर्मचारियों से निकाला है. आने वाले दिनों यह संख्या और बढ़ेगी. असल में यह कंपनी की बड़ी छंटनी का हिस्सा है और कंपनी ग्लोबली 30 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाएगी।  ओरेकल कंपनी क्या है?  ओरैकल, असल में एक अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनी है. ये कंपनी मुख्य रूप से डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम, क्लाउंड कंप्यूटर और एंटरप्राज सॉफ्टवेयर प्रोवाइड कराती है. इसकी शुरुआत साल 1977 में हुई थी, जिसको लैरी एलिसन ने अपने साथियों के साथ मिलकर शुरू किया था। 

नौकरियां जाएंगी या इंसान ही खत्म? AI के खिलाफ सड़कों पर उतरे अमेरिकी

जिन आर्टिफ‍िशियल इंटेल‍िजेंस तकनीकों (AI) को जल्‍द से जल्‍द अपनाने के लिए पूरी दुनिया बेताब है। कंपनियां नए-नए मॉडल लॉन्‍च कर रही हैं। उन्‍हीं तकनीकों के खिलाफ दुन‍िया के सबसे शक्‍त‍िशाली देश की जनता सड़कों पर है। वह ओपनएआई से लेकर एंथ्रोपिक तक के दफ्तरों के बाहर जुटकर अपनी आवाज उठा रही है। डर है कि एआई की अनैत‍िक रेस इंसानी वजूद काे खत्‍म कर सकती है। कई और भी चिंताएं हैं, जिन्‍हें लेकर अमेरिका के सैन फ्रांस‍िस्‍को में भारी विरोध-प्रदर्शन देखे गए हैं। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि कंपनियां एआई के जोखिमों को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाएं। Stop The AI Race मुह‍िम अमेरिका का सैन फ्रांसिस्‍को टेक्‍नॉलजी का बड़ा गढ़ है। हाल ही में वहां एआई के खिलाफ कुछ ग्रुप्‍स ने बड़ा विरोध-प्रदर्शन किया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारी एआई के जोखिमों को कम करने के लिए फ्रंट‍ियर एआई के विकास को रोकने की मांग कर रहे हैं। Stop the AI Race मुह‍िम के तहत 200 से ज्‍यादा प्रदर्शनकारियों ने अपना मार्च न‍िकाला जो दिग्‍गज कंपनी एंथ्रोपिक के मुख्‍यालय से शुरू होकर ओपनएआई के मुख्‍यालय पर खत्‍म हुआ। क्‍या होता है फ्रं‍ट‍ियर AI एआई के विकास में प्रमुख कंपनियां अब फ्रं‍ट‍ियर एआई को डेवलप करने में जुट गई है। यह सामान्‍य से बहुत अधिक एडवांस है और कहा जाता है कि इंसान से भी बेहतर सोच सकता है। फ्रं‍टि‍यर एआई कोडिंग से लेकर कव‍िताएं लिख सकता है। वह इंसान की भावनाओं को समझकर जवाब दे सकता है। इसे ऐसे तैयार किया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर उन कामों को भी कर पाए, जिसके लिए उसे ट्रेनिंग ही नहीं दी गई है। AI के विरोध में क्‍या हैं लोगों की मांगें     प्रदर्शनकार‍ियों ने फ्रं‍टि‍यर एआई के विकास काे रोकने की मांग की है।     प्रमुख एआई कंपनियों के सीईओ से इस बारे में उनकी प्रतिबद्धता मांगी है।     मांग है कि हरेक एआई लैब को इसके लिए सहमत होना होगा।     लोगों का आरोप है कि एआई लैब्‍स आने सुरक्षा वादों से मुकर रही हैं। किस बात की चिंता लोगों को चिंता है कि इस तरह विकास की गत‍ि को तेज करके इंसान के विलुप्‍त होने का खतरा बढ़ रहा है। याद रहे कि एंथ्रोपिक पिछले महीने अपने उस कमिटमेंट से पीछे हट गई थी जिसमें उसने एआई के खतरनाक होने पर इसके विकास को रोकने की बात कही थी। इस पूरे मामले पर बड़ी कंपनियों ने चुप्‍पी साधी हुई है। वह कोई भी बयान देने से बच रही हैं।