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विभागों में पारदर्शिता बढ़ाने AI का प्रयोग, सिस्टम तोड़ने वालों पर गिरेगी गाज

भोपाल  जिले में विभिन्न मामलों को लेकर चल रहे कोर्ट प्रकरण का प्रबंधन अब लीगल कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम से होगा। प्रशासन एआइ आधारित इस सॉफ्टवेयर को अपने यहां लागू करने जा रहा है। जिले के जो भी विभाग अपने यहां के कोर्ट प्रकरणों को दबाकर या लटकाकर बैठे हैं, वे सब जाहिर होंगे। अब ऐसे प्रकरणों को निपटाना होगा। ऐसा नहीं करने वाले सामने आएंगे और उन पर कार्रवाई की रूपरेखा भी बनेगी। कलेक्ट्रेट से जुड़े हुए ही 150 के करीब कोर्ट केस अभी चल रहे हैं। जिले के सभी विभागों को मिलाने पर संख्या इससे चार गुना तक बनेगी। ऐसे समझें सिस्टम यह एक इंटीग्रेटेड केस मैनेजमेंट सिस्टम के रूप में काम करेगा, ताकि विभाग के सभी संबंधित अधिकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर जानकारी देख सकें। कानूनी मामलों की प्रगति और पेंडेंसी पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का काम करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि कानूनी डेटा सुरक्षित रहे और केवल अधिकृत व्यक्तियों की ही उस तक पहुंच हो। ऐसे करेगा काम -केस ट्रैकिंग: यह विभिन्न न्यायालयों में चल रहे सरकारी मामलों की वर्तमान स्थिति को ट्रैक करेगा। – डाटा माइग्रेशन: पुराने कानूनी मामलों के डेटा को सिस्टम में सुरक्षित रूप से स्थानांतरित करने का काम करेगा। दस्तावेजों का प्रबंधन: यह कानूनी दस्तावेजों, आदेशों और याचिकाओं को डिजिटल रूप में सहेज कर रखने में मदद करेगा। – अलर्ट और रिमाइंडर: आगामी पेशी और महत्वपूर्ण समय-सीमाओं के लिए रिमाइंडर देगा। ये होगा लाभ इसका सबसे बड़ा लाभ मेट्रो, नए आइएसबीटी समेत ब्रिज, सड़क और सार्वजनिक हित के संस्थानों को लेकर चल रहे जमीन संबंधी विवाद में होगा।  सिस्टम में प्रकरण से जुड़ा हर अपडेट और डिटेल सबमिट होगा, जिससे केस निपटाने में तेजी आएगी। प्रकरण पर निर्णय होने से जिले के ग्रामीण से लेकर शहरी प्रोजेक्ट और आमजन से जुड़े काम भी तेजी से हो पाएंगे। पेंशन प्रकरण से जुड़े केसों में भी न्याय होगा। नई तकनीक से जल्द निपटेंगे कोर्ट केस कोर्ट केस को शीघ्रता से निपटाने में नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे प्रकरण निपटान प्रक्रिया बेहतर व तेज होगी। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर 600 केस की पेंडेंसी सुनकर कलेक्टर नाराज भोपाल. जिला समिति की बैठक में  600 पेंडिंग प्रकरणों पर कलेक्टर नाराज हुए। कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में पशुपालन, मत्स्य, स्व-सहायता समूह, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना सहित विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं के प्रकरण जो बैकों में भेजे गए हैं, उनके वितरण और लक्ष्य की जानकारी ली गई। कलेक्टर ने कहा, केन्द्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं के प्रकरण कई बैकों में लक्ष्य के अनुरूप निराकरण नहीं किए गए हैं। यह खेदजनक है। जिन बैंकर्स के प्रकरण स्वीकृत हो गए, उनका वितरण एक सप्ताह देने का कहा। लंबित प्रकरणों का 15 दिन में निराकरण का लक्ष्य दिया।

स्वदेशी तकनीक का दम: पीएम मोदी ने पहने ‘Sarvam Kaze’, भारतीय कंपनी की AI में उड़ान

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में एक शानदार चश्मा पहने हुए देखा गया। यह साधारण नहीं बल्कि AI डिवाइस है। इस वियरेबल का नाम sarvam kaze है। एआई ग्लासेस को देश के AI स्टार्टअप सर्वम AI ने बनाया है। एआई समिट 2026 में जियो ने भी अपने एआई ग्लासेस पेश किए हैं। ऐसे में पीएम मोदी द्वारा स्वदेशी एआई ग्लासेस को पहनना कोई आम बात नहीं है। ये एआई ग्लासेस कई दमदार फीचर्स के साथ लाए जाएंगे। पीएम मोदी ने टेस्ट किए एआई ग्लासेस 16 फरवरी से शुरू हुए इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में Sarvam Kaze पेश किए गए हैं। यह एक AI वियरेबल है। इसकी मदद से अन्य स्मार्ट ग्लासेस की तरह ही यूजर रियल समय में देखी जाने वाली चीजों के बारे में सुन सकते हैं। यह एआई ग्लासेस आपकी बातों का जवाब देता है और इसके जरिए आप कुछ भी कैप्चर कर सकते हैं। भारत मंडपम में चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में वॉक फेंक के दौरान पीएम मोदी ने यह चश्मा पहना था। सर्वम AI के को-फाउंडर प्रत्यूष कुमार द्वारा शेयर की गई फोटोज में प्रधानमंत्री एग्जीबिशन फ्लोर पर इसके रियल-टाइम रिस्पॉन्स को टेस्ट करते हुए दिखाई दे रहे हैं। चैट फीचर लाने की योजना में कंपनी कंपनी इस हफ्ते एक चैट फीचर भी लॉन्च करने की योजना बना रही है। इस डिवाइस को आवाज और विजुअल इंटरैक्शन के जरिए असल दुनिया में इंटेलिजेंस लाने के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी के मुताबिक, यूजर्स सर्वम प्लेटफॉर्म पर जाकर कस्टम एक्सपीरियंस भी पा सकते हैं। इस एआई डिवाइस को भारत में डिजाइन और बनाया गया है। कंपनी इसे पूरी तरह से देसी AI प्रोडक्ट के तौर पर पेश कर रही है। कंपनी के अनुसार इस डिवाइस को मई में भारतीय बाजार में लॉन्च किया जा सकता है। बिना इंटरनेट वाला एआई भारतीय स्टार्टअप Sarvam AI ने हाल ही में Sarvam Edge लॉन्च किया है। इसकी खासियत है कि यह बिना इंटरनेट के चल रहा है। इसकी मदद से आप अपने फोन या लैपटॉप पर बिना इंटरनेट के भी AI का इस्तेमाल कर पाएंगे। ब्लॉग पोस्ट के अनुसार, Sarvam AI ने बताया है कि यह एक ऐसा ऑन डिवाइस AI प्लेटफॉर्म होगा, जिसे चलाने के लिए ना तो क्लाउड सर्वर की जरूरत है और ना ही इंटरनेट कनेक्शन की। Sarvam Edge उन लोगों तक भी AI को पहुंचाएंगा, जो महंगे इंटरनेट प्लान का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं और जिनके क्षेत्र में नेटवर्क नहीं आते हैं। Sarvam Edge की खासियत होगी कि यह आपके डिवाइस की प्रोसेसिंग पावर का इस्तेमाल करेगा और इंटरनेट से जुड़ा ना होने की वजह से 100% सुरक्षित भी रहेगा। इससे देखकर लग रहा है कि अब भारतीय कंपनियों ने भी एआई के क्षेत्र में देश को टॉप पर पहुंचाने के लिए अपनी कमर कस ली है।

AI के दौर में इंसानों का भविष्य क्या? 800 करोड़ आबादी के सामने रोजगार का बड़ा सवाल

मुंबई  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लगातार एडवांस होता जा रहा है और हर फील्ड में इसकी धमक देखने को मिल रही है. आज AI दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति बन चुका है. चैटबॉट से लेकर सेल्फ-ड्राइविंग कार, मेडिकल डायग्नोसिस से लेकर कंटेंट राइटिंग तक हर क्षेत्र में AI तेजी से अपनी जगह बना रहा है. ऐसे में एक बड़ा सवाल लोगों के मन में उठता है कि अगर सभी काम AI ही कर देगा, तो दुनिया के 800 करोड़ लोग क्या करेंगे? क्या नौकरियां खत्म हो जाएंगी? क्या इंसान बेकार हो जाएगा? आइए इस सवाल का जवाब ChatGPT से जान लेते हैं. ChatGPT के मुताबिक सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि AI का उद्देश्य इंसानों को पूरी तरह रिप्लेस करना नहीं, बल्कि उनके काम को आसान और तेज बनाना है. इतिहास गवाह है कि जब भी नई तकनीक आई जैसे औद्योगिक क्रांति, कंप्यूटर या इंटरनेट आया, तब शुरुआत में नौकरियों को लेकर डर पैदा हुआ. हालांकि समय के साथ नई तकनीक ने पुराने कामों को बदला और नई नौकरियां भी पैदा कीं. AI भी कुछ दोहराए जाने वाले और डेटा आधारित कामों को संभालेगा, लेकिन रचनात्मकता, भावनात्मक समझ और नैतिक निर्णय जैसे क्षेत्रों में इंसान की भूमिका अभी भी अहम रहेगी. दूसरा पहलू है नौकरियों का बदलाव. कई पारंपरिक नौकरियां कम हो सकती हैं, लेकिन AI से जुड़े नए क्षेत्र तेजी से उभर रहे हैं- जैसे डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, AI ट्रेनिंग, रोबोटिक्स और डिजिटल मैनेजमेंट. इसके अलावा हेल्थकेयर, शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, कला और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में इंसानी स्पर्श की जरूरत हमेशा बनी रहेगी. यानी भविष्य में नौकरियां खत्म नहीं होंगी, बल्कि उनका स्वरूप बदलेगा. तीसरा महत्वपूर्ण मुद्दा है स्किल्स का. आने वाले समय में वही लोग सफल होंगे जो नई तकनीक के साथ खुद को अपडेट करेंगे. डिजिटल लिटरेसी, क्रिटिकल थिंकिंग, क्रिएटिविटी और समस्या सुलझाने की क्षमता बेहद जरूरी होगी. सरकारों और संस्थानों को भी शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाकर लोगों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से प्रशिक्षित करना होगा. AI को दुश्मन नहीं, बल्कि एक टूल के रूप में देखने की जरूरत है. हालांकि यह भी सच है कि AI से असमानता बढ़ने का खतरा हो सकता है. अगर तकनीक का लाभ केवल कुछ कंपनियों या देशों तक सीमित रह गया, तो बेरोजगारी और आर्थिक अंतर बढ़ सकता है. इसलिए नीति-निर्माताओं के लिए जरूरी है कि वे AI के विकास के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा, नई नौकरियों के अवसर और रिस्किलिंग प्रोग्राम पर भी ध्यान दें. कुछ विशेषज्ञ यूनिवर्सल बेसिक इनकम जैसे विकल्पों पर भी चर्चा कर रहे हैं, ताकि तकनीकी बदलाव का असर संतुलित रहे. यह कहना गलत होगा कि AI सब कुछ कर देगा और इंसान के पास कोई काम नहीं बचेगा. AI एक शक्तिशाली असिस्टेंस है, लेकिन मानव बुद्धि, भावनाएं और नैतिकता की बराबरी अभी नहीं कर सकता. भविष्य इंसान और मशीन के सहयोग का होगा, प्रतिस्पर्धा का नहीं. अगर हम बदलाव को अपनाएं और खुद को तैयार रखें, तो AI 800 करोड़ लोगों के लिए खतरा नहीं, बल्कि नए अवसरों का दरवाजा साबित हो सकता है.

IGIMS अस्पताल में शुरू हुई डिजिटल हेल्थकेयर सुविधा, AI करेगा मरीजों की जांच

पटना पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में मरीजों को बेहतर और सटीक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। अब अस्पताल में मरीजों के सटीक उपचार के लिए एआई आधारित जांच और इलाज की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। IGIMS में रोबोटिक्स फिजियोथेरेपी की शुरुआत अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि हाल ही में संस्थान में 164 बेड के आई हॉस्पिटल का निर्माण किया गया है। इसके अलावा मरीजों के लिए रोबोटिक्स फिजियोथेरेपी सेवा शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि रोबोटिक्स तकनीक के माध्यम से जनरल सर्जरी, यूरो सर्जरी, ऑन्को सर्जरी, गायनी सर्जरी समेत अन्य स्वास्थ्य सेवाएं भी शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इससे जटिल सर्जरी अधिक सटीकता और कम समय में संभव हो सकेगी। 1200 बेड का मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल निर्माणाधीन राजधानी के प्रमुख अस्पतालों में शामिल इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में 1200 बेड का मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल भी निर्माणाधीन है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस वर्ष दिसंबर तक इस नए अस्पताल की शुरुआत कर दी जाएगी। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, निर्माणाधीन अस्पताल में अत्याधुनिक आईसीयू और इमरजेंसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे मरीजों को उन्नत और बेहतर उपचार मिल सकेगा। वर्तमान में 1700 बेड की सुविधा संस्थान में वर्तमान में लगभग 1500 से 1700 बेड की सुविधा उपलब्ध है। हाल ही में 500 बेड वाले नए अस्पताल भवन का उद्घाटन किया गया है। इसमें फिलहाल 100 बेड पर मरीजों का इलाज शुरू हो चुका है, जबकि शेष 400 बेड को भी जल्द ही चालू करने की तैयारी है। इन सुविधाओं के शुरू होने से मरीजों को सभी प्रकार की चिकित्सीय सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हो सकेंगी।

AI से बदलेगा इंस्टाग्राम का गेम! फोटो और वीडियो में जुड़ सकेगा कोई भी चेहरा

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के बढ़ते चलन को देखते हुए मेटा के स्वामित्व वाला इंस्टाग्राम एक ऐसा फीचर लाने पर काम कर रहा है, जिसकी मदद से एआई से बनी फोटो और वीडियो में यूजर डिजिटली अपना चहरा जोड़ सकेंगे। कंपनी जल्द ही एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर ला सकती है। इंस्टाग्राम का यह फीचर OpenAI के Sora प्लेटफॉर्म को टक्कर दे सकता है। एक टिप्सटर Alessandro Paluzzi ने अपने एक्स अकाउंट से ट्वीट करके इस अपकमिंग टूल के बारे में बताया है। उनके अनुसार, इंस्टाग्राम में आने वाला यह टूल, सिंपल इमेज फिल्टर के बजाय पर्सनलाइज्ड “लाइकनेस” बनाने पर फोकस करता है। अभी तक इंस्टाग्राम ने इस फीचर के लॉन्चिंग को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। हालांकि, टिप्सटर द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट से पता चलता है कि इस सुविधा पर काफी पहले से काम चल रहा है। फेस स्वैप टूल लाने की तैयारी Alessandro Paluzzi ने X पर इंस्टाग्राम के अपकमिंग फीचर की डिलेट शेयर की है। उन्होंने दावा किया है कि इंस्टाग्राम AI-पावर्ड फेस स्वैप सिस्टम पर काम कर रहा है। इसे फेस स्वैप टूल भी कहा जाता है। हालांकि, इंस्टाग्राम में इसे “मेरी लाइकनेस बनाएं” नाम से लाया जा सकता है। लीक हुई इमेज के अनुसार, यूजर्स AI विजुअल्स या छोटी क्लिप बना सकते हैं। एआई से बनाई गई इन क्लिप में उनका चहरा भी जोड़ सकते हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हुआ है कि इंस्टाग्राम यह लाइकनेस डेटा कैसे इकट्ठा करेगा। उम्मीद है कि सिस्टम मौजूदा पोस्ट और हाइलाइट्स को एनालाइज करेगा या फिर ऑप्शन को एक्टिवेट करने के लिए यूजर्स को एक डेडिकेटेड सेल्फी अपलोड करने के लिए कहा जा सकता है। सेटअप हो जाने के बाद यूजर अलग-अलग सिनेरियो में खुद को दिखाते हुए कस्टमाइज्ड इमेज या वीडियो बना सकते हैं। इसके लिए उन्हें टेक्स्ट प्रॉम्प्ट डालना होगा। शेयरिंग और क्रिएटिव को मिलेगा बढ़ावा इस फीचर की मदद से एआई कंटेंट को और भी आकर्षक बनाया जा सकेगा। यूजर डायरेक्ट मैसेज के जरिए प्राइवेटली क्रिएशन भेज सकते हैं या उन्हें स्टोरीज और फीड पर पब्लिकली पोस्ट भी कर सकते हैं। हालांकि, ऐसी किसी भी डिटेल के लिए कोई कन्फर्मेशन नहीं है। अगर इसे लागू किया जाता है, तो यह टूल मेटा के अपने ऐप्स में जेनरेटिव AI में बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के साथ अलाइन होगा। इससे यूजर्स को ज्यादा इंटरैक्टिव और पर्सनलाइज्ड कंटेंट क्रिएशन टूल मिलेंगे। लेनी होगी परमिशन रिपोर्ट की मानें तो यूजर्स डायरेक्ट मैसेज से इनवाइट या रिक्वेस्ट भेज पाएंगे। AI से बने मीडिया में उनके अपीयरेंस का इस्तेमाल करने से पहले दूसरे यूजर को मंजूरी देनी होगी। यह परमिशन बेस्ड तरीका गलत इस्तेमाल को रोकने और पर्सनल आइडेंटिटी को प्रोटेक्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। अभी इस अपकमिंग फीचर की इतनी जानकारी ही सामने आई है। आगे आने वाले समय कंपनी इसके बारे में अन्य डिटेल शेयर कर सकती है।

AI से 99% जॉब्स पर होगा खतरा, बचेंगी ये खास नौकरियां: एक्सपर्ट का अनुमान

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इंसानों की जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। आज AI पॉवर्ड डिवाइसेज की मदद से लोग हर तरह का काम निकलवा रहे हैं। हालांकि वह दिन अब दूर नहीं है जब AI महज हेल्पर की तरह हमारी मदद करने की बजाय, हमें रिप्लेस ही कर दे। ऐसा कहना है कि जाने-माने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्चर डॉ. रोमन याम्पोल्स्की का। डॉ. रोमन ने चेतावनी दी है कि महज एक साल में AI इंसानों की 99 फीसदी नौकरियां खा जाएगा। उन्होंने यह तक कह दिया है कि कोई भी ऐसा इंसानी काम नहीं दिख रहा, जिसे ऑटोमेट ना किया जा सकता हो। याम्पोल्स्की के मुताबिक 2045 तक समाज एक ऐसे टेक्नोलॉजिकल पॉइंट पर पहुंच सकता है जहां से वापस लौटना मुमकिन नहीं होगा। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और इस मुद्दे पर विस्तार से बात करते हुए, डॉ. रोमन याम्पोल्स्की ने कहा कि आने वाले बदलाव पिछले इंडस्ट्रियल बदलावों से बिल्कुल अलग होंगे। बता दें कि कम्प्यूटर साइंटिस्ट डॉ. याम्पोल्स्की लातविया से आते हैं और वे फिलहाल लुइसविले यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। उन्होंने AI सुरक्षा और जोखिम पर 100 से ज्यादा एकेडमिक पेपर पब्लिश किए हैं। उन्होंने हाल ही में स्टीवन बार्टलेट द्वारा होस्ट किए जाने वाले 'द डायरी ऑफ ए CEO' में यह बातें कही हैं। किसी भी फिजिकल लेबर को किया जा सकता है ऑटोमेट टाइम्स ऑफ इंडिया लाइक रिपोर्ट के मुताबिक बातचीत के दौरान, डॉ. याम्पोल्स्की ने कहा, "पांच सालों में किसी भी तरह के फिजिकल लेबर को ऑटोमेट किया जा सकता है। तो हम एक ऐसी दुनिया देख रहे हैं जहां बेरोजगारी का स्तर ऐसा होगा जो हमने पहले कभी नहीं देखा। मैं 10 प्रतिशत बेरोज़गारी की बात नहीं कर रहा हूं, बल्कि 99 प्रतिशत की बात कर रहा हूं।" कौन सी नौकरियां बचने की संभावना? डॉ. याम्पोल्स्की ने बताया है कि कौन सी नौकरियां बचने की संभावना है। उन्होंने इंटरव्यू में कहा, “आपके पास सिर्फ वही नौकरियां बचेंगी जहां किसी भी वजह से आप चाहेंगे कि कोई दूसरा इंसान आपके लिए वह काम करे। कुछ नौकरियां ऐसी होती हैं जहां इंसान की जरूरत होती है। हो सकता है आप अमीर हों और किसी भी वजह से आप एक इंसानी अकाउंटेंट चाहते हों।” उन्होंने कहा कि इंसानों द्वारा बनाए गए सामानों के लिए शौक की वजह से भी कुछ नौकरियां बीच सकती हैं। उन्होंने कहा, "आपको ऐसे लोगों के लिए एक छोटा सा मार्केट मिल सकता है जो अभी भी हाथ से बनी चीज़ों को पसंद करते हैं।” वहीं AI की निगरानी और रेगुलेशन का जॉब भी बचा हुआ रहेगा। हालांकि डॉ. याम्पोल्स्की ने कहा कि लंबे समय में AI को पूरी तरह से कंट्रोल करना शायद नामुमकिन हो, लेकिन उन्होंने कहा है कि इंसानी निगरानी बदलाव की गति को धीमा कर सकती है।

डब्ल्यूईएफ 2026: ‘AI नौकरियां नहीं छिनेगा, इंसानों के साथ काम करेगा’, एक्सपर्ट्स का बयान

नई दिल्ली  दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) 2026 में शामिल तकनीकी कंपनियों के बड़े अधिकारियों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंसानों की नौकरियां नहीं छीनेगा, बल्कि काम करने के तरीके को बदलेगा। एआई कई कामों को अपने आप कर सकता है, लेकिन यह पूरी नौकरी की जगह नहीं ले सकता। वर्करा के संस्थापक और सीईओ कियान कटानफोरूश ने कहा कि एआई को लेकर भाषा का सही इस्तेमाल बहुत जरूरी है। वे एआई को 'सहकर्मी' कहने के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि एआई कुछ खास काम तो अच्छी तरह कर सकती है, लेकिन इंसानों की तरह पूरी नौकरी नहीं कर सकती। उन्होंने बताया कि इंसान एक साथ सैकड़ों तरह के काम करते हैं, जबकि एआई केवल तय किए गए काम ही कर पाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक यह अनुमान गलत साबित हुआ है कि एआई बड़े पैमाने पर लोगों की नौकरियां खत्म कर देगा। हिप्पोक्रेटिक एआई के सह-संस्थापक और सीईओ मुंजाल शाह ने भी कहा कि एआई इंसानों की जगह नहीं लेगा, बल्कि बड़े स्तर पर कर्मचारियों की मदद करेगा। उन्होंने भविष्य की कल्पना करते हुए कहा कि दुनिया में '8 अरब लोग और 80 अरब एआई सिस्टम' होंगे, जो नए कामों को आसान बनाएंगे। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक एआई सिस्टम ने गर्मी की लहर के दौरान हजारों लोगों को फोन करके उन्हें ठंडी जगहों पर जाने की सलाह दी और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे सिस्टम को सही ढंग से लागू करने के लिए कड़े परीक्षण की आवश्यकता होती है। हमारे पास ऐसे मॉडल हैं जो अन्य मॉडल्स की जांच करते हैं और फिर वे मॉडल भी उन्हीं मॉडल्स की जांच करते हैं। अमिनी की संस्थापक और सीईओ केट कैलॉट ने कहा कि एआई अभी भी सिर्फ एक उपकरण है। यह अपने आप सही और गलत का फैसला नहीं कर सकता, क्योंकि इसमें इंसानों जैसी सोच और मूल्य समझने की क्षमता नहीं है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) के सीईओ क्रिस्टोफ श्वाइजर ने कहा कि एआई के साथ काम करने का अनुभव कभी-कभी किसी सहकर्मी के साथ काम करने जैसा लगता है। किसी कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने काम करने के तरीके को कितना बदलती है, न कि सिर्फ नई तकनीक अपनाने पर। उन्होंने यह भी कहा कि एआई को एक बड़ी प्रबंधन जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए और इसे सिर्फ तकनीकी टीम पर नहीं छोड़ा जा सकता। एचपी कंपनी के अध्यक्ष और सीईओ एनरिक लोरस ने कहा कि एआई का इस्तेमाल संतुलन के साथ होना चाहिए। एचपी के कॉल सेंटरों में कभी-कभी एआई गलत जवाब देता है, लेकिन कुल मिलाकर इसकी सटीकता पहले से बेहतर हुई है और ग्राहकों की संतुष्टि भी बढ़ी है।

MP में AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का गठन, 90 दिन में जानेंगी बीमारियां – बड़ी तकनीकी सौगात

भोपाल  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) को शासन, स्वास्थ्य और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में मध्यप्रदेश को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा देशभर में प्रस्तावित 58 एआइ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (AI Centers of Excellence) में से दो सेंटर मप्र में स्थापित होंगे। प्रत्येक सेंटर करीब 10 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में विकसित होगा, जहां शासकीय कार्यों में एआइ के नवाचार और समाधान विकसित किए जाएंगे। साथ ही चैट-जीपीटी (ChatGPT) जैसा स्वदेशी एआइ प्लेटफॉर्म भी तैयार किया गया है, जिसे फरवरी में नेशनल एआइ समिट से पहले लॉन्च किया जाएगा। रिसर्च फैलोशिप शुरू- सीईओ इंडिया एआइ अभिषेक सिंह मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026 (MP Regional AI Impact Conference-2026) में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव एवं सीईओ इंडिया एआइ अभिषेक सिंह ने बताया कि एआइ से प्रदेश में लिए रिसर्च फैलोशिप शुरू की गई है, जिसका लाभ अब सभी विषयों के विद्यार्थी ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि भारत एआइ के क्रियान्वयन में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है। अनुवाद के लिए 'भाषिणी' पोर्टल और देशभर में एआइ डेटा लैब्स विकसित की जा रही है। मप्र में 30 एआइ डेटा लैब्स बनने से लाखों युवाओं को डेटा एनालिस्ट के रूप में प्रशिक्षण मिलेगा। हैकाथॉन विजेताओं को मिले पुरस्कार कॉन्फ्रेंस में सीएम डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 के संचालन के लिए आयोजित उज्जैन महाकुंभहैकाथॉन और मप्र इनोटेक स्पर्धा के विजेताओं को पुरस्कृत किया। भोपाल स्मार्ट सिटी के बीनेस्ट इंक्यूबेशन सेंटर से निकले स्टार्टअप स्टारब्रू टेकसिस्टम्स के आशुतोष राय को पहला स्थान मिला है। इसमें देशभर से 1726 कंपनियों ने भाग लिया था। वेक्टर बॉर्न बीमारियों का हो सकेगा फोरकास्ट एमपी इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPSEDC) के एमडी आशीष वशिष्ठ ने बताया कि एआइ के उपयोग से शासन में पारदर्शिता और सेवा वितरण में सुधार होगा। एआई आधारित मॉडल से डेंगू, चिकनगुनिया जैसी वेक्टर बॉर्न बीमारियों और कुपोषणकी तीन महीने पहले ही भविष्यवाणी की जा रही है। डब्ल्यूएचओ मानकों के आधार पर कुपोषण फोरकास्टिंग से संभावित कुपोषित बच्चों की पहचान पहले ही हो सकेगी। एआई से फसल गिरदावरी और रोग प्रकोप की सटीक जानकारी भी मिलेगी। (MP News)  

AI ने कहा ‘नो बिकनी’, X के नए नियमों का दावा और टेस्ट में सामने आई अलग हकीकत

आखिरकार दुनियाभर में भद्द पिटवाने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) ने अपने AI चैटबॉट Grok में जरूरी बदलाव किए हैं। ये बदलाव इसलिए किए गए हैं ताकि X पर लोग Grok का इस्तेमाल करके लोगों की अनुचित तस्वीरें न बनाई जा सकें। बता दें कि इससे पहले AI चैटबॉट Grok के जरिए लोग महिलाओं और नाबालिगों की तस्वीरें X पर शेयर करके डिजिटली उनके कपड़े उतार रहे थे। The Verge की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में आलोचना और कार्रवाई की धमकी मिलने के बाद X ने इसे लेकर जरूरी बदलाव किए हैं। हालांकि इस फीचर को टेस्ट करने वाले पत्रकारों ने बताया है कि Grok अभी भी अश्लील तस्वीरे बना रहा है। इससे पहले X के मालिक एलन मस्क ने कहा था कि वह इसे ठीक कर रहे हैं। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक पत्रकारों ने टेस्ट में पाया कि Grok अभी भी बेहद आसानी से किसी की भी बिना कपड़ों के तस्वीर बना पा रहा है। क्या है पूरा मामला? दरअसल X के AI चैटबॉट Grok का इस्तेमाल किसी की भी फोटो को अश्लील बनाने के लिए किया जा रहा था। इस अनिचित फीचर के निशाने पर ज्यादातर महिलाएं और यहां तक कि नाबालिग भी थे। बता दें कि इस तरह की तस्वीरों को डीपफेक कहा जाता है, यानी कि ऐसी नकली तस्वीरें जो कि बिलकुल असली लगती हैं। इस खतरनाक फीचर का इस्तेमाल किसी की भी प्रतिष्ठा की धज्जियां उड़ाने के लिए किया जा सकता था। इसे लेकर एलन मस्क का कहना था कि ऐसा यूजर्स और हैकर्स की वजह से हो रहा है लेकिन टेक एक्सपर्ट्स का कहना था कि बाकी AI टूल्स की तुलना में Grok में अश्लीलता को लेकर किसी तरह के फिल्टर का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। मस्क ने रातों-रात किया बदलाव मंगलवार को X की ओर से घोषणा हुई हैं कि उन्होंने Grok की पॉलिसी में बदलाव किए हैं। अब लोग उनके AI टूल का इस्तेमाल कर अश्लील तस्वीरें नहीं बना सकेंगे। हालांकि रिपोर्ट्स के अनुसार बुधवार को भी टेस्टिंग में Grok अश्लील तस्वीरें बनाते पाया गया। ऐसे में दावा किया जा रहा है कि कंपनी की कथनी और करनी में फर्क हैं। क्या कर रहीं सरकारें? X को पहले ही भारत सरकार की ओर से अल्टीमेटम मिल चुका है और X ने अपनी गलती भी मानी है। वहीं ब्रिटेन की संचार नियामक संस्था Ofcom ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। गौरतलब है कि इसी हफ्ते ब्रिटेन में एक कानून पास होने वाला है, जिसके मुताबिक किसी की बिना सहमति अश्लील डीपफेक बनाने को अपराध घोषित किया जाएगा। ब्रिटेन की सरकार ने साफ किया है कि वह तब तक पीछे नहीं हटेंगे, जब तक X पूरी तरह से अपने AI टूल को सुधार नहीं लेता। क्या सुधर गया Grok? एलन मस्क और X की ओर से भले कहा जा रहा हो कि उन्होंने X में जरूरी बदलाव किए हैं लेकिन इसे टेस्ट करने वाले पत्रकारों ने बताया है कि Grok अभी भी अश्लील तस्वीरें बना रहा है।

एआई से पूरी तरह बदल जाएगी गांव की स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर: डॉ. पिंकी जोवल

– उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस के दूसरे दिन एआई एक्सपर्ट ने रखे अपने विचार – बोले, तकनीक अगर सही तरीके से अपनाई जाए, तो मजबूत बनेंगी देश की स्वास्थ्य सेवाएं – एआई के जरिये शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच का फर्क काफी हद तक किया जा सकता है कम   लखनऊ,  स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका को लेकर होटल द सेंट्रम में आयोजित दो दिवसीय उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस के दूसरे दिन मंगलवार को एआई एक्सपर्ट ने अपने विचार रखे। एक्सपर्ट बोले, तकनीक अगर सही तरीके से अपनाई जाए, तो वह देश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बना सकती है। खासतौर पर शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच जो फर्क है, उसे एआई के जरिए काफी हद तक कम किया जा सकता है। एआई का असली फायदा तब जब फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को सशक्त बनाए चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव डॉ. पिंकी जोवेल ने कहा कि एआई का असली फायदा तब मिलेगा, जब यह फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को सशक्त बनाए। आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और डॉक्टर ही गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाते हैं। अगर तकनीक इनकी मदद करे, तो इलाज समय पर और बेहतर हो सकता है। उन्होंने टेलीमेडिसिन और रिमोट केयर को बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी आसानी से डॉक्टरों की सलाह मिल सके। उन्होंने कहा कि करीब 1.80 लाख आशा कार्यकता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और चीफ हेल्थ ऑफिसर प्रदेश और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। ये कर्मचारी गांव और कस्बों में लोगों से सीधे जुड़े होते हैं। एआई आधारित टूल्स ऐसे होने चाहिए, जो इनके रोजमर्रा के काम को आसान बनाएं, न की बोझ बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसे केंद्रों में एआई का सही इस्तेमाल कर दूरस्थ इलाकों में भी अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकती हैं। एआई को सफल बनाने के लिए विभागों में तालमेल जरूरी विभिन्न सत्रों में एआई समाधानों की बात हुई।  जो पहले से ही मैदान में काम कर रहे हैं, उनका मकसद है बीमारी को शुरू में ही पहचानना और मरीज को सही समय पर सही अस्पताल तक पहुंचाना। विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई को सफल बनाने के लिए विभागों के बीच तालमेल बहुत जरूरी है। सिर्फ स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी विभागों को भी मिलकर काम करना होगा। नीति बनाने से लेकर उसे लागू करने तक, हर स्तर पर सहयोग होगा, तभी एआई का सही फायदा मिलेगा। इससे गांव स्तर से लेकर बड़े अस्पतालों तक, हर जगह एक जैसी और बेहतर सेवाएं दी जा सकेंगी। मरीज की सहमति के बिना एआई बेस्ड डाटा का न हो इस्तेमाल पैनल में शामिल एआई एक्सपर्ट ने कहा कि जब देश की करीब आधी आबादी महिलाएं और बच्चे हैं, तब उनके स्वास्थ्य डाटा की सुरक्षा बहुत जरूरी है। मरीज की सहमति के बिना डाटा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। पारदर्शिता और भरोसा ही किसी भी मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव होती है। अगर लोग सिस्टम पर भरोसा करेंगे, तभी वे नई तकनीक को अपनाएंगे। एआई की मदद से मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। एआई आधारित सिस्टम गर्भवती महिलाओं में खतरे के संकेत पहले ही पहचान सकता है। इससे आशा कार्यकर्ता समय रहते महिला को अस्पताल तक पहुंचा सकती हैं। गांव स्तर पर जल्दी पहचान और सही रेफरल से मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती है।     कार्यक्रम में अरविंद कुमार महानिदेशक, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया, प्रो. आर के सिंह एसजीपीजीआई, डॉ. संजय सूद सी-डैक, मोहाली, प्रो. श्री राम गणपति और कर्नल समीर कंवर डीजी, पाथ आदि विशेषज्ञ शामिल हुए।