samacharsecretary.com

IGIMS अस्पताल में शुरू हुई डिजिटल हेल्थकेयर सुविधा, AI करेगा मरीजों की जांच

पटना पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में मरीजों को बेहतर और सटीक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। अब अस्पताल में मरीजों के सटीक उपचार के लिए एआई आधारित जांच और इलाज की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। IGIMS में रोबोटिक्स फिजियोथेरेपी की शुरुआत अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि हाल ही में संस्थान में 164 बेड के आई हॉस्पिटल का निर्माण किया गया है। इसके अलावा मरीजों के लिए रोबोटिक्स फिजियोथेरेपी सेवा शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि रोबोटिक्स तकनीक के माध्यम से जनरल सर्जरी, यूरो सर्जरी, ऑन्को सर्जरी, गायनी सर्जरी समेत अन्य स्वास्थ्य सेवाएं भी शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इससे जटिल सर्जरी अधिक सटीकता और कम समय में संभव हो सकेगी। 1200 बेड का मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल निर्माणाधीन राजधानी के प्रमुख अस्पतालों में शामिल इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में 1200 बेड का मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल भी निर्माणाधीन है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस वर्ष दिसंबर तक इस नए अस्पताल की शुरुआत कर दी जाएगी। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, निर्माणाधीन अस्पताल में अत्याधुनिक आईसीयू और इमरजेंसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे मरीजों को उन्नत और बेहतर उपचार मिल सकेगा। वर्तमान में 1700 बेड की सुविधा संस्थान में वर्तमान में लगभग 1500 से 1700 बेड की सुविधा उपलब्ध है। हाल ही में 500 बेड वाले नए अस्पताल भवन का उद्घाटन किया गया है। इसमें फिलहाल 100 बेड पर मरीजों का इलाज शुरू हो चुका है, जबकि शेष 400 बेड को भी जल्द ही चालू करने की तैयारी है। इन सुविधाओं के शुरू होने से मरीजों को सभी प्रकार की चिकित्सीय सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हो सकेंगी।

AI से बदलेगा इंस्टाग्राम का गेम! फोटो और वीडियो में जुड़ सकेगा कोई भी चेहरा

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के बढ़ते चलन को देखते हुए मेटा के स्वामित्व वाला इंस्टाग्राम एक ऐसा फीचर लाने पर काम कर रहा है, जिसकी मदद से एआई से बनी फोटो और वीडियो में यूजर डिजिटली अपना चहरा जोड़ सकेंगे। कंपनी जल्द ही एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर ला सकती है। इंस्टाग्राम का यह फीचर OpenAI के Sora प्लेटफॉर्म को टक्कर दे सकता है। एक टिप्सटर Alessandro Paluzzi ने अपने एक्स अकाउंट से ट्वीट करके इस अपकमिंग टूल के बारे में बताया है। उनके अनुसार, इंस्टाग्राम में आने वाला यह टूल, सिंपल इमेज फिल्टर के बजाय पर्सनलाइज्ड “लाइकनेस” बनाने पर फोकस करता है। अभी तक इंस्टाग्राम ने इस फीचर के लॉन्चिंग को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। हालांकि, टिप्सटर द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट से पता चलता है कि इस सुविधा पर काफी पहले से काम चल रहा है। फेस स्वैप टूल लाने की तैयारी Alessandro Paluzzi ने X पर इंस्टाग्राम के अपकमिंग फीचर की डिलेट शेयर की है। उन्होंने दावा किया है कि इंस्टाग्राम AI-पावर्ड फेस स्वैप सिस्टम पर काम कर रहा है। इसे फेस स्वैप टूल भी कहा जाता है। हालांकि, इंस्टाग्राम में इसे “मेरी लाइकनेस बनाएं” नाम से लाया जा सकता है। लीक हुई इमेज के अनुसार, यूजर्स AI विजुअल्स या छोटी क्लिप बना सकते हैं। एआई से बनाई गई इन क्लिप में उनका चहरा भी जोड़ सकते हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हुआ है कि इंस्टाग्राम यह लाइकनेस डेटा कैसे इकट्ठा करेगा। उम्मीद है कि सिस्टम मौजूदा पोस्ट और हाइलाइट्स को एनालाइज करेगा या फिर ऑप्शन को एक्टिवेट करने के लिए यूजर्स को एक डेडिकेटेड सेल्फी अपलोड करने के लिए कहा जा सकता है। सेटअप हो जाने के बाद यूजर अलग-अलग सिनेरियो में खुद को दिखाते हुए कस्टमाइज्ड इमेज या वीडियो बना सकते हैं। इसके लिए उन्हें टेक्स्ट प्रॉम्प्ट डालना होगा। शेयरिंग और क्रिएटिव को मिलेगा बढ़ावा इस फीचर की मदद से एआई कंटेंट को और भी आकर्षक बनाया जा सकेगा। यूजर डायरेक्ट मैसेज के जरिए प्राइवेटली क्रिएशन भेज सकते हैं या उन्हें स्टोरीज और फीड पर पब्लिकली पोस्ट भी कर सकते हैं। हालांकि, ऐसी किसी भी डिटेल के लिए कोई कन्फर्मेशन नहीं है। अगर इसे लागू किया जाता है, तो यह टूल मेटा के अपने ऐप्स में जेनरेटिव AI में बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के साथ अलाइन होगा। इससे यूजर्स को ज्यादा इंटरैक्टिव और पर्सनलाइज्ड कंटेंट क्रिएशन टूल मिलेंगे। लेनी होगी परमिशन रिपोर्ट की मानें तो यूजर्स डायरेक्ट मैसेज से इनवाइट या रिक्वेस्ट भेज पाएंगे। AI से बने मीडिया में उनके अपीयरेंस का इस्तेमाल करने से पहले दूसरे यूजर को मंजूरी देनी होगी। यह परमिशन बेस्ड तरीका गलत इस्तेमाल को रोकने और पर्सनल आइडेंटिटी को प्रोटेक्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। अभी इस अपकमिंग फीचर की इतनी जानकारी ही सामने आई है। आगे आने वाले समय कंपनी इसके बारे में अन्य डिटेल शेयर कर सकती है।

AI से 99% जॉब्स पर होगा खतरा, बचेंगी ये खास नौकरियां: एक्सपर्ट का अनुमान

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इंसानों की जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। आज AI पॉवर्ड डिवाइसेज की मदद से लोग हर तरह का काम निकलवा रहे हैं। हालांकि वह दिन अब दूर नहीं है जब AI महज हेल्पर की तरह हमारी मदद करने की बजाय, हमें रिप्लेस ही कर दे। ऐसा कहना है कि जाने-माने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्चर डॉ. रोमन याम्पोल्स्की का। डॉ. रोमन ने चेतावनी दी है कि महज एक साल में AI इंसानों की 99 फीसदी नौकरियां खा जाएगा। उन्होंने यह तक कह दिया है कि कोई भी ऐसा इंसानी काम नहीं दिख रहा, जिसे ऑटोमेट ना किया जा सकता हो। याम्पोल्स्की के मुताबिक 2045 तक समाज एक ऐसे टेक्नोलॉजिकल पॉइंट पर पहुंच सकता है जहां से वापस लौटना मुमकिन नहीं होगा। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और इस मुद्दे पर विस्तार से बात करते हुए, डॉ. रोमन याम्पोल्स्की ने कहा कि आने वाले बदलाव पिछले इंडस्ट्रियल बदलावों से बिल्कुल अलग होंगे। बता दें कि कम्प्यूटर साइंटिस्ट डॉ. याम्पोल्स्की लातविया से आते हैं और वे फिलहाल लुइसविले यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। उन्होंने AI सुरक्षा और जोखिम पर 100 से ज्यादा एकेडमिक पेपर पब्लिश किए हैं। उन्होंने हाल ही में स्टीवन बार्टलेट द्वारा होस्ट किए जाने वाले 'द डायरी ऑफ ए CEO' में यह बातें कही हैं। किसी भी फिजिकल लेबर को किया जा सकता है ऑटोमेट टाइम्स ऑफ इंडिया लाइक रिपोर्ट के मुताबिक बातचीत के दौरान, डॉ. याम्पोल्स्की ने कहा, "पांच सालों में किसी भी तरह के फिजिकल लेबर को ऑटोमेट किया जा सकता है। तो हम एक ऐसी दुनिया देख रहे हैं जहां बेरोजगारी का स्तर ऐसा होगा जो हमने पहले कभी नहीं देखा। मैं 10 प्रतिशत बेरोज़गारी की बात नहीं कर रहा हूं, बल्कि 99 प्रतिशत की बात कर रहा हूं।" कौन सी नौकरियां बचने की संभावना? डॉ. याम्पोल्स्की ने बताया है कि कौन सी नौकरियां बचने की संभावना है। उन्होंने इंटरव्यू में कहा, “आपके पास सिर्फ वही नौकरियां बचेंगी जहां किसी भी वजह से आप चाहेंगे कि कोई दूसरा इंसान आपके लिए वह काम करे। कुछ नौकरियां ऐसी होती हैं जहां इंसान की जरूरत होती है। हो सकता है आप अमीर हों और किसी भी वजह से आप एक इंसानी अकाउंटेंट चाहते हों।” उन्होंने कहा कि इंसानों द्वारा बनाए गए सामानों के लिए शौक की वजह से भी कुछ नौकरियां बीच सकती हैं। उन्होंने कहा, "आपको ऐसे लोगों के लिए एक छोटा सा मार्केट मिल सकता है जो अभी भी हाथ से बनी चीज़ों को पसंद करते हैं।” वहीं AI की निगरानी और रेगुलेशन का जॉब भी बचा हुआ रहेगा। हालांकि डॉ. याम्पोल्स्की ने कहा कि लंबे समय में AI को पूरी तरह से कंट्रोल करना शायद नामुमकिन हो, लेकिन उन्होंने कहा है कि इंसानी निगरानी बदलाव की गति को धीमा कर सकती है।

डब्ल्यूईएफ 2026: ‘AI नौकरियां नहीं छिनेगा, इंसानों के साथ काम करेगा’, एक्सपर्ट्स का बयान

नई दिल्ली  दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) 2026 में शामिल तकनीकी कंपनियों के बड़े अधिकारियों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंसानों की नौकरियां नहीं छीनेगा, बल्कि काम करने के तरीके को बदलेगा। एआई कई कामों को अपने आप कर सकता है, लेकिन यह पूरी नौकरी की जगह नहीं ले सकता। वर्करा के संस्थापक और सीईओ कियान कटानफोरूश ने कहा कि एआई को लेकर भाषा का सही इस्तेमाल बहुत जरूरी है। वे एआई को 'सहकर्मी' कहने के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि एआई कुछ खास काम तो अच्छी तरह कर सकती है, लेकिन इंसानों की तरह पूरी नौकरी नहीं कर सकती। उन्होंने बताया कि इंसान एक साथ सैकड़ों तरह के काम करते हैं, जबकि एआई केवल तय किए गए काम ही कर पाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक यह अनुमान गलत साबित हुआ है कि एआई बड़े पैमाने पर लोगों की नौकरियां खत्म कर देगा। हिप्पोक्रेटिक एआई के सह-संस्थापक और सीईओ मुंजाल शाह ने भी कहा कि एआई इंसानों की जगह नहीं लेगा, बल्कि बड़े स्तर पर कर्मचारियों की मदद करेगा। उन्होंने भविष्य की कल्पना करते हुए कहा कि दुनिया में '8 अरब लोग और 80 अरब एआई सिस्टम' होंगे, जो नए कामों को आसान बनाएंगे। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक एआई सिस्टम ने गर्मी की लहर के दौरान हजारों लोगों को फोन करके उन्हें ठंडी जगहों पर जाने की सलाह दी और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे सिस्टम को सही ढंग से लागू करने के लिए कड़े परीक्षण की आवश्यकता होती है। हमारे पास ऐसे मॉडल हैं जो अन्य मॉडल्स की जांच करते हैं और फिर वे मॉडल भी उन्हीं मॉडल्स की जांच करते हैं। अमिनी की संस्थापक और सीईओ केट कैलॉट ने कहा कि एआई अभी भी सिर्फ एक उपकरण है। यह अपने आप सही और गलत का फैसला नहीं कर सकता, क्योंकि इसमें इंसानों जैसी सोच और मूल्य समझने की क्षमता नहीं है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) के सीईओ क्रिस्टोफ श्वाइजर ने कहा कि एआई के साथ काम करने का अनुभव कभी-कभी किसी सहकर्मी के साथ काम करने जैसा लगता है। किसी कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने काम करने के तरीके को कितना बदलती है, न कि सिर्फ नई तकनीक अपनाने पर। उन्होंने यह भी कहा कि एआई को एक बड़ी प्रबंधन जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए और इसे सिर्फ तकनीकी टीम पर नहीं छोड़ा जा सकता। एचपी कंपनी के अध्यक्ष और सीईओ एनरिक लोरस ने कहा कि एआई का इस्तेमाल संतुलन के साथ होना चाहिए। एचपी के कॉल सेंटरों में कभी-कभी एआई गलत जवाब देता है, लेकिन कुल मिलाकर इसकी सटीकता पहले से बेहतर हुई है और ग्राहकों की संतुष्टि भी बढ़ी है।

MP में AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का गठन, 90 दिन में जानेंगी बीमारियां – बड़ी तकनीकी सौगात

भोपाल  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) को शासन, स्वास्थ्य और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में मध्यप्रदेश को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा देशभर में प्रस्तावित 58 एआइ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (AI Centers of Excellence) में से दो सेंटर मप्र में स्थापित होंगे। प्रत्येक सेंटर करीब 10 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में विकसित होगा, जहां शासकीय कार्यों में एआइ के नवाचार और समाधान विकसित किए जाएंगे। साथ ही चैट-जीपीटी (ChatGPT) जैसा स्वदेशी एआइ प्लेटफॉर्म भी तैयार किया गया है, जिसे फरवरी में नेशनल एआइ समिट से पहले लॉन्च किया जाएगा। रिसर्च फैलोशिप शुरू- सीईओ इंडिया एआइ अभिषेक सिंह मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026 (MP Regional AI Impact Conference-2026) में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव एवं सीईओ इंडिया एआइ अभिषेक सिंह ने बताया कि एआइ से प्रदेश में लिए रिसर्च फैलोशिप शुरू की गई है, जिसका लाभ अब सभी विषयों के विद्यार्थी ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि भारत एआइ के क्रियान्वयन में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है। अनुवाद के लिए 'भाषिणी' पोर्टल और देशभर में एआइ डेटा लैब्स विकसित की जा रही है। मप्र में 30 एआइ डेटा लैब्स बनने से लाखों युवाओं को डेटा एनालिस्ट के रूप में प्रशिक्षण मिलेगा। हैकाथॉन विजेताओं को मिले पुरस्कार कॉन्फ्रेंस में सीएम डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 के संचालन के लिए आयोजित उज्जैन महाकुंभहैकाथॉन और मप्र इनोटेक स्पर्धा के विजेताओं को पुरस्कृत किया। भोपाल स्मार्ट सिटी के बीनेस्ट इंक्यूबेशन सेंटर से निकले स्टार्टअप स्टारब्रू टेकसिस्टम्स के आशुतोष राय को पहला स्थान मिला है। इसमें देशभर से 1726 कंपनियों ने भाग लिया था। वेक्टर बॉर्न बीमारियों का हो सकेगा फोरकास्ट एमपी इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPSEDC) के एमडी आशीष वशिष्ठ ने बताया कि एआइ के उपयोग से शासन में पारदर्शिता और सेवा वितरण में सुधार होगा। एआई आधारित मॉडल से डेंगू, चिकनगुनिया जैसी वेक्टर बॉर्न बीमारियों और कुपोषणकी तीन महीने पहले ही भविष्यवाणी की जा रही है। डब्ल्यूएचओ मानकों के आधार पर कुपोषण फोरकास्टिंग से संभावित कुपोषित बच्चों की पहचान पहले ही हो सकेगी। एआई से फसल गिरदावरी और रोग प्रकोप की सटीक जानकारी भी मिलेगी। (MP News)  

AI ने कहा ‘नो बिकनी’, X के नए नियमों का दावा और टेस्ट में सामने आई अलग हकीकत

आखिरकार दुनियाभर में भद्द पिटवाने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) ने अपने AI चैटबॉट Grok में जरूरी बदलाव किए हैं। ये बदलाव इसलिए किए गए हैं ताकि X पर लोग Grok का इस्तेमाल करके लोगों की अनुचित तस्वीरें न बनाई जा सकें। बता दें कि इससे पहले AI चैटबॉट Grok के जरिए लोग महिलाओं और नाबालिगों की तस्वीरें X पर शेयर करके डिजिटली उनके कपड़े उतार रहे थे। The Verge की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में आलोचना और कार्रवाई की धमकी मिलने के बाद X ने इसे लेकर जरूरी बदलाव किए हैं। हालांकि इस फीचर को टेस्ट करने वाले पत्रकारों ने बताया है कि Grok अभी भी अश्लील तस्वीरे बना रहा है। इससे पहले X के मालिक एलन मस्क ने कहा था कि वह इसे ठीक कर रहे हैं। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक पत्रकारों ने टेस्ट में पाया कि Grok अभी भी बेहद आसानी से किसी की भी बिना कपड़ों के तस्वीर बना पा रहा है। क्या है पूरा मामला? दरअसल X के AI चैटबॉट Grok का इस्तेमाल किसी की भी फोटो को अश्लील बनाने के लिए किया जा रहा था। इस अनिचित फीचर के निशाने पर ज्यादातर महिलाएं और यहां तक कि नाबालिग भी थे। बता दें कि इस तरह की तस्वीरों को डीपफेक कहा जाता है, यानी कि ऐसी नकली तस्वीरें जो कि बिलकुल असली लगती हैं। इस खतरनाक फीचर का इस्तेमाल किसी की भी प्रतिष्ठा की धज्जियां उड़ाने के लिए किया जा सकता था। इसे लेकर एलन मस्क का कहना था कि ऐसा यूजर्स और हैकर्स की वजह से हो रहा है लेकिन टेक एक्सपर्ट्स का कहना था कि बाकी AI टूल्स की तुलना में Grok में अश्लीलता को लेकर किसी तरह के फिल्टर का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। मस्क ने रातों-रात किया बदलाव मंगलवार को X की ओर से घोषणा हुई हैं कि उन्होंने Grok की पॉलिसी में बदलाव किए हैं। अब लोग उनके AI टूल का इस्तेमाल कर अश्लील तस्वीरें नहीं बना सकेंगे। हालांकि रिपोर्ट्स के अनुसार बुधवार को भी टेस्टिंग में Grok अश्लील तस्वीरें बनाते पाया गया। ऐसे में दावा किया जा रहा है कि कंपनी की कथनी और करनी में फर्क हैं। क्या कर रहीं सरकारें? X को पहले ही भारत सरकार की ओर से अल्टीमेटम मिल चुका है और X ने अपनी गलती भी मानी है। वहीं ब्रिटेन की संचार नियामक संस्था Ofcom ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। गौरतलब है कि इसी हफ्ते ब्रिटेन में एक कानून पास होने वाला है, जिसके मुताबिक किसी की बिना सहमति अश्लील डीपफेक बनाने को अपराध घोषित किया जाएगा। ब्रिटेन की सरकार ने साफ किया है कि वह तब तक पीछे नहीं हटेंगे, जब तक X पूरी तरह से अपने AI टूल को सुधार नहीं लेता। क्या सुधर गया Grok? एलन मस्क और X की ओर से भले कहा जा रहा हो कि उन्होंने X में जरूरी बदलाव किए हैं लेकिन इसे टेस्ट करने वाले पत्रकारों ने बताया है कि Grok अभी भी अश्लील तस्वीरें बना रहा है।

एआई से पूरी तरह बदल जाएगी गांव की स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर: डॉ. पिंकी जोवल

– उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस के दूसरे दिन एआई एक्सपर्ट ने रखे अपने विचार – बोले, तकनीक अगर सही तरीके से अपनाई जाए, तो मजबूत बनेंगी देश की स्वास्थ्य सेवाएं – एआई के जरिये शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच का फर्क काफी हद तक किया जा सकता है कम   लखनऊ,  स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका को लेकर होटल द सेंट्रम में आयोजित दो दिवसीय उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस के दूसरे दिन मंगलवार को एआई एक्सपर्ट ने अपने विचार रखे। एक्सपर्ट बोले, तकनीक अगर सही तरीके से अपनाई जाए, तो वह देश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बना सकती है। खासतौर पर शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच जो फर्क है, उसे एआई के जरिए काफी हद तक कम किया जा सकता है। एआई का असली फायदा तब जब फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को सशक्त बनाए चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव डॉ. पिंकी जोवेल ने कहा कि एआई का असली फायदा तब मिलेगा, जब यह फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को सशक्त बनाए। आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और डॉक्टर ही गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाते हैं। अगर तकनीक इनकी मदद करे, तो इलाज समय पर और बेहतर हो सकता है। उन्होंने टेलीमेडिसिन और रिमोट केयर को बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी आसानी से डॉक्टरों की सलाह मिल सके। उन्होंने कहा कि करीब 1.80 लाख आशा कार्यकता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और चीफ हेल्थ ऑफिसर प्रदेश और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। ये कर्मचारी गांव और कस्बों में लोगों से सीधे जुड़े होते हैं। एआई आधारित टूल्स ऐसे होने चाहिए, जो इनके रोजमर्रा के काम को आसान बनाएं, न की बोझ बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसे केंद्रों में एआई का सही इस्तेमाल कर दूरस्थ इलाकों में भी अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकती हैं। एआई को सफल बनाने के लिए विभागों में तालमेल जरूरी विभिन्न सत्रों में एआई समाधानों की बात हुई।  जो पहले से ही मैदान में काम कर रहे हैं, उनका मकसद है बीमारी को शुरू में ही पहचानना और मरीज को सही समय पर सही अस्पताल तक पहुंचाना। विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई को सफल बनाने के लिए विभागों के बीच तालमेल बहुत जरूरी है। सिर्फ स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी विभागों को भी मिलकर काम करना होगा। नीति बनाने से लेकर उसे लागू करने तक, हर स्तर पर सहयोग होगा, तभी एआई का सही फायदा मिलेगा। इससे गांव स्तर से लेकर बड़े अस्पतालों तक, हर जगह एक जैसी और बेहतर सेवाएं दी जा सकेंगी। मरीज की सहमति के बिना एआई बेस्ड डाटा का न हो इस्तेमाल पैनल में शामिल एआई एक्सपर्ट ने कहा कि जब देश की करीब आधी आबादी महिलाएं और बच्चे हैं, तब उनके स्वास्थ्य डाटा की सुरक्षा बहुत जरूरी है। मरीज की सहमति के बिना डाटा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। पारदर्शिता और भरोसा ही किसी भी मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव होती है। अगर लोग सिस्टम पर भरोसा करेंगे, तभी वे नई तकनीक को अपनाएंगे। एआई की मदद से मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। एआई आधारित सिस्टम गर्भवती महिलाओं में खतरे के संकेत पहले ही पहचान सकता है। इससे आशा कार्यकर्ता समय रहते महिला को अस्पताल तक पहुंचा सकती हैं। गांव स्तर पर जल्दी पहचान और सही रेफरल से मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती है।     कार्यक्रम में अरविंद कुमार महानिदेशक, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया, प्रो. आर के सिंह एसजीपीजीआई, डॉ. संजय सूद सी-डैक, मोहाली, प्रो. श्री राम गणपति और कर्नल समीर कंवर डीजी, पाथ आदि विशेषज्ञ शामिल हुए।

स्मार्ट सिटी की ओर कदम, AI कैमरों से रियल-टाइम ट्रैफिक जाम की मिलेगी जानकारी

भोपाल  आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों का समाधान अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), सेंसर और डेटा आधारित तकनीकें के माध्यम से होगा। मैनिट और ट्रिपल आइ‌टी के छात्रों द्वारा विकसित नवाचार शहरों की ट्रैफिक व्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक बड़े बदलाव की नींव रख रहे हैं। स्मार्ट कैमरों और सेंसर की मदद से यह तकनीक समझ सकेगी कि किस दिशा में वाहनों का दबाव अधिक है, जिससे ट्रैफिक सिग्नल स्वत: उसी अनुसार संचालित हो सकेंगे और जाम की समस्या कम होगी। वहीं डिजिटल हेल्थ ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म के जरिए मरीज के शरीर से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा को रियल-टाइम में रिकॉर्ड किया जाएगा। जिसे डॉक्टर दूर बैठे भी देख सकेंगे। इससे समय पर इलाज संभव होगा और अस्पतालों पर दबाव भी घटेगा। स्मार्ट इंडिया हैकथॉन (एसआइएच) 2025 में छह से अधिक टीमों के आइडिया राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हुए हैं। इन आइडियाज की खास बात यह है कि ये सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की दिक्कतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए है। वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम स्मार्ट सेंसर आधारित वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम कचरा पात्रों में लगे सेंसर से नगर निगम को अलर्ट भेजेगा कि कहां कचरा भर चुका है। इससे समय पर सफाई होगी और शहर साफ रहेंगे। वहीं, डाक विभाग के लिए विकसित एआइ आधारित समाधान से पार्सल और पत्रों की प्रोसेसिंग तेज होगी। फेक न्यूज और देशविरोधी प्रचार की पहचान मैनिट की एक टीम ने ऐसा टूल बनाया है, जो सोशल मीडिया डेटा का विश्लेषण कर संदिग्ध पोस्ट, ट्रेंड और कैंपेन को चिन्हित करेगा। यह सिस्टम पैटर्न पहचानकर बताएगा कि कौन सा कंटेंट संगठित तरीके से फैलाया जा रहा है, जिससे समय रहते कार्रवाई की जा सके। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में क्या बदलेगा ट्रिपल आईटी की टीम ने ग्रामीण इलाकों के लिए डिजिटल हेल्थ ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म बनाया है। इसमें मरीज का इलाज, जांच और दवाओं का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। इससे बार-बार फाइल ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी और डॉक्टर दूर बैठे भी मरीज की स्थिति समझ सकेंगे। साइबर ठगी से आम लोगों की सुरक्षा डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ फर्जी ऐप्स का खतरा भी बढ़ा है। छात्रों ने फेक बैंकिंग एपीके डिटेक्शन सिस्टम तैयार किया है, जो ऐप के कोड, परमिशन और व्यवहार का विश्लेषण कर यह बताएगा कि ऐप सुरक्षित है या नहीं। स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल मैनिट की टीम ने एआइ आधारित स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम विकसित किया है। मौजूदा सिस्टम में सिग्नल तय समय पर बदलते हैं, चाहे सड़क खाली हो या जाम से भरी। नया सिस्टम रीयल-टाइम डेटा, कैमरों और सेंसर की मदद से यह समझेगा कि किस दिशा में ज्यादा वाहन हैं। उसी आधार पर सिग्नल का समय अपने आप बदलेगा। इससे जाम कम होगा, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड को रास्ता मिलेगा और ईंधन की बर्बादी भी रुकेगी।

OpenAI उतरेगा हार्डवेयर की दुनिया में, ‘Gumdrop’ बन सकता है iPhone का विकल्प

OpenAI अपना पहला हार्डवेयर डिवाइस "Gumdrop" लॉन्च करने की तैयारी में है, जो iPhone का विकल्प बन सकता है। पेन के आकार का यह स्क्रीन-रहित गैजेट Apple के पूर्व डिजाइन चीफ जोनी आइव द्वारा डिजाइन किया जा रहा है। Foxconn द्वारा निर्मित यह डिवाइस 2026-27 में लॉन्च हो सकता है। कैमरा और माइक्रोफोन से लैस Gumdrop हस्तलिखित नोट्स को डिजिटल टेक्स्ट में बदल सकेगा और OpenAI के AI मॉडल्स को चला सकेगा। जेब या गले में पहनने योग्य यह iPod Shuffle साइज का गैजेट AI-आधारित प्रोडक्टिविटी के जरिए स्मार्टफोन्स को रिप्लेस करने का लक्ष्य रखता है। अब वो दिन दूर नहीं जब आपके फोन की जगह कोई दूसरा डिवाइस ले लेगा। दरअसल रिपोर्ट्स के मुताबिक, (REF.) OpenAI अपना पहला डिवाइस लॉन्च कर सकता है। इसे आप अपनी जेब में रख पाएंगे और गले में भी पहन सकेंगे। आकार में यह डिवाइस पेन की तरह का होगा। इस डिवाइस पर Apple के पूर्व चीफ डिजाइन ऑफिसर जोनी आइव काम कर रहे हैं, जिनका मकसद OpenAI को आपके iPhone की जगह लेने के लिए तैयार करना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह डिवाइस एक छोटा गैजेट होगा, जो कि शक्तिशाली एआई से लैस होगा। यह डिवाइस बिना किसी स्क्रीन के आएगा और बावजूद इसके हर जरूरत को पूरा कर सकेगा। चलिए OpenAI के इस अपकमिंग डिवाइस के बारे में जानते हैं। कहां तैयार हो रहा और कब आएगा? ताइवान की इकोनॉमिक डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, OpenAI पहले इस डिवाइस को चीन की Luxshare कंपनी से बनवाने की सोच रही थी लेकिन अमेरिका में चीन की सप्लाई चेन को लेकर चिंताओं के कारण अब OpenAI ने इसके लिए Foxconn को चुना है। यह डिवाइस या तो वियतनाम में बनेगा या अमेरिका में, और 2026-27 के दौरान लॉन्च हो सकता है। गौर करने वाली बात है कि Foxconn पहले से ही OpenAI का मुख्य मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर है और AI डेटा सेंटर्स को डिजाइन करने से लेकर उन्हें तैयार करने तक का काम संभालता है। ऐसे में नए कंज्यूमर डिवाइस के लिए भी Foxconn को चुनना समझदारी भरा फैसला लगता है। Gumdrop नाम का यह पेन क्या-क्या कर सकेगा? इस डिवाइस का इंटरनल कोडनेम "Gumdrop" है और यह एक स्मार्ट पेन की तरह काम करेगा। इसका साइज iPod Shuffle जितना होगा लेकिन इसमें कोई डेडिकेटेड स्क्रीन नहीं होगी। यह डिवाइस कैमरा और माइक्रोफोन जैसे सेंसर्स की मदद से अपने आसपास की चीजों को समझ सकेगा। सबसे खास बात यह है कि यह OpenAI के AI मॉडल्स को खुद अपने अंदर चला सकेगा, और जब ज्यादा पावर चाहिए होगी तो क्लाउड से मदद ले लेगा। यह आपके हाथ से लिखे नोट्स को टेक्स्ट में बदलकर तुरंत ChatGPT में अपलोड कर देगा। यानी आप जो पेन से लिखेंगे, वे डिजिटल हो जाएगा। बिना स्क्रीन लेगा iPhone की जगह? यह डिवाइस दूसरे डिवाइसेस से बात कर सकेगा, बिल्कुल वैसे जैसे आज हम अपने स्मार्टफोन से करते हैं। इसे वियरेबल की तरह नहीं बनाया जाएगा, लेकिन आप इसे जेब में रख या गले में पहन पाएंगे। यह डिवाइस AI-आधारित प्रोडक्टिविटी का इस्तेमाल करके iPhone को रिप्लेस करने की कोशिश करेगा। OpenAI का मानना है कि भविष्य में लोगों को बड़ी स्क्रीन की जरूरत नहीं होगी, बल्कि एक छोटा, स्मार्ट और तेज डिवाइस काफी होगा जो AI की ताकत से सब कुछ कर दे। यह पेन जैसा गैजेट उस सपने को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

भविष्य की फैक्टरी? चीन में AI संभाल रहा 5000 लूम का काम, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

नई दिल्ली  हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर चीन की एक विशाल टेक्सटाइल फैक्ट्री के वीडियो तेजी से वायरल हुए हैं, जिनमें चीन के शिनजियांग प्रांत के अराल शहर में 5,000 से अधिक लूम (बुनाई मशीनें) स्वचालन और AI‑आधारित नियंत्रण के तहत 24 घंटे, 7 दिन nonstop चल रही हैं, और वहां कोई मानव श्रमिक दिखाई नहीं दे रहा। यह क्लिप टेक्सटाइल उद्योग में चीन के ऑटोमेशन रुझान को लेकर वैश्विक चर्चा का विषय बना हुआ है। दावा किया जा रहा है कि 5000 करघे (looms) पूरी तरह AI के सहारे, बिना किसी इंसान के 24 घंटे चल रहे हैं।   इन वीडियो को “ZERO Humans Factory” और “Fully Autonomous Textile Plant” जैसे दावों के साथ साझा किया जा रहा है।  विशेषज्ञों के मुताबिक यह चीन की स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग क्रांति का उदाहरण है, लेकिन यह दावा अभी प्राधिकृत समाचार स्रोतों में पुष्ट नहीं हुआ है।  हालांकि, इस वीडियो को लेकर यह स्पष्ट प्रमाणित नहीं हुआ है कि यह किसी प्राधिकृत समाचार एजेंसी या सरकारी स्रोत द्वारा पुष्टि की गई रिपोर्ट है। यह मुख्य रूप से सोशल मीडिया और प्लेटफॉर्म वीडियो पोस्ट्स में दिखाई जा रहा तस्वीरों/फुटेज पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि इसे फैक्ट‑चेक की आवश्यकता है।     ऑटोमेशन है, लेकिन इंसान गायब नहीं प्रमाणिक औद्योगिक रिपोर्ट्स और चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, यह दावा भ्रामक और अधूरा है।  चीन ने वाकई AI-संचालित लूम्स, रोबोटिक यार्न हैंडलिंग, ऑटो-क्वालिटी डिटेक्शन और स्मार्ट सेंसर सिस्टम को बड़े पैमाने पर अपनाया है। लेकिन पूरी तरह इंसान-मुक्त टेक्सटाइल फैक्ट्री फिलहाल मौजूद नहीं है। AI क्या करता है?     करघों की गति और पैटर्न का ऑटो कंट्रोल     धागे की टूट-फूट का तुरंत पता     ऊर्जा दक्षता और उत्पादन ऑप्टिमाइज़ेशन     रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स इंसान कहां जरूरी ?     मशीन मेंटेनेंस और इमरजेंसी इंटरवेंशन     सॉफ्टवेयर मॉनिटरिंग     क्वालिटी ऑडिट और फाइनल इंस्पेक्शन     सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स क्यों फैल रहा है ‘ZERO Humans’ नैरेटिव? विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की तकनीकी ताकत को अति-नाटकीय तरीके से दिखाने और सोशल मीडिया एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए ऐसे दावे किए जाते हैं। वास्तविकता में इसे “High Automation Factory” कहना ज्यादा सही होगा, न कि “No Humans Factory”। चीन में टेक्सटाइल उद्योग में ऑटोमेशन और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग का विकास कई वर्ष से चल रहा है। औद्योगिक इंटरनेट और टेक्नोलॉजी से जुड़ी रिपोर्ट बताती हैं कि चीन की कई टेक्सटाइल फैक्ट्रियाँ AI, IoT और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के साथ काम कर रही हैं, जहाँ मशीनें उच्च गति पर लगातार चल रही हैं और केवल निगरानी के लिए कुछ लोग मौजूद रहते हैं। लेकिन यह सत्यापित नहीं हुआ है कि कोई फैक्टरी पूरी तरह बिना किसी मानव हस्तक्षेप के चल रही है। आमतौर पर उत्पादन लाइनें स्वचालित हैं, मगर इंसानों की निगरानी, रख‑रखाव और गुणवत्ता नियंत्रण अभी भी अधिकांश औद्योगिक सेट‑अप में आवश्यक है। चीन में ऑटोमेशन क्यों बढ़ा? चीन अब औद्योगिक ऑटोमेशन को राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा बना रहा है, जिसमें AI‑संचालित रोबोट्स और मशीनें लागत कम, उत्पादन तेज और गुणवत्ता बढ़ाने में सहायता कर रही हैं।   रिपोर्टों के अनुसार, चीन में मैन्युफैक्चरिंग रोबोट्स की तैनाती दुनिया के कई देशों से अधिक है, जिससे ट्रेड‑वॉर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में चीन अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।  भारत‑चीन टेक्सटाइल मुकाबला  चीन की टेक्नोलॉजी‑भारी उत्पादन प्रणाली से भारत जैसे बड़े कपड़ा उत्पादक देशों पर प्रभाव भी दिख रहा है।  चीन सस्ते निर्यात और उच्च क्वालिटी उत्पादन के लिए ऑटोमेशन का लाभ उठा रहा है, जिससे दुनियाभर के बाजारों में चीन का प्रभाव और मजबूत हो रहा है। वहीं भारत में तकनीक‑उन्मुख अपग्रेडेशन और एक्सपोर्ट‑फोकस्ड प्रयासों से वैश्विक कपड़ा आपूर्ति श्रृंखला में हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश हो रही है। उदाहरण के लिए भारत अब कई बाजारों में कपड़ा निर्यात के नए केंद्र के रूप में उभरा है। ऐसे में AI‑बेस्ड ऑटोमेशन, मशीन‑ड्रिवन उत्पादन, और मानव श्रम की भूमिका में बदलाव आज वैश्विक टेक्सटाइल प्रतिस्पर्धा के नए परिदृश्य हैं।