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स्मार्ट सिटी की ओर कदम, AI कैमरों से रियल-टाइम ट्रैफिक जाम की मिलेगी जानकारी

भोपाल  आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों का समाधान अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), सेंसर और डेटा आधारित तकनीकें के माध्यम से होगा। मैनिट और ट्रिपल आइ‌टी के छात्रों द्वारा विकसित नवाचार शहरों की ट्रैफिक व्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक बड़े बदलाव की नींव रख रहे हैं। स्मार्ट कैमरों और सेंसर की मदद से यह तकनीक समझ सकेगी कि किस दिशा में वाहनों का दबाव अधिक है, जिससे ट्रैफिक सिग्नल स्वत: उसी अनुसार संचालित हो सकेंगे और जाम की समस्या कम होगी। वहीं डिजिटल हेल्थ ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म के जरिए मरीज के शरीर से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा को रियल-टाइम में रिकॉर्ड किया जाएगा। जिसे डॉक्टर दूर बैठे भी देख सकेंगे। इससे समय पर इलाज संभव होगा और अस्पतालों पर दबाव भी घटेगा। स्मार्ट इंडिया हैकथॉन (एसआइएच) 2025 में छह से अधिक टीमों के आइडिया राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हुए हैं। इन आइडियाज की खास बात यह है कि ये सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की दिक्कतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए है। वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम स्मार्ट सेंसर आधारित वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम कचरा पात्रों में लगे सेंसर से नगर निगम को अलर्ट भेजेगा कि कहां कचरा भर चुका है। इससे समय पर सफाई होगी और शहर साफ रहेंगे। वहीं, डाक विभाग के लिए विकसित एआइ आधारित समाधान से पार्सल और पत्रों की प्रोसेसिंग तेज होगी। फेक न्यूज और देशविरोधी प्रचार की पहचान मैनिट की एक टीम ने ऐसा टूल बनाया है, जो सोशल मीडिया डेटा का विश्लेषण कर संदिग्ध पोस्ट, ट्रेंड और कैंपेन को चिन्हित करेगा। यह सिस्टम पैटर्न पहचानकर बताएगा कि कौन सा कंटेंट संगठित तरीके से फैलाया जा रहा है, जिससे समय रहते कार्रवाई की जा सके। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में क्या बदलेगा ट्रिपल आईटी की टीम ने ग्रामीण इलाकों के लिए डिजिटल हेल्थ ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म बनाया है। इसमें मरीज का इलाज, जांच और दवाओं का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। इससे बार-बार फाइल ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी और डॉक्टर दूर बैठे भी मरीज की स्थिति समझ सकेंगे। साइबर ठगी से आम लोगों की सुरक्षा डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ फर्जी ऐप्स का खतरा भी बढ़ा है। छात्रों ने फेक बैंकिंग एपीके डिटेक्शन सिस्टम तैयार किया है, जो ऐप के कोड, परमिशन और व्यवहार का विश्लेषण कर यह बताएगा कि ऐप सुरक्षित है या नहीं। स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल मैनिट की टीम ने एआइ आधारित स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम विकसित किया है। मौजूदा सिस्टम में सिग्नल तय समय पर बदलते हैं, चाहे सड़क खाली हो या जाम से भरी। नया सिस्टम रीयल-टाइम डेटा, कैमरों और सेंसर की मदद से यह समझेगा कि किस दिशा में ज्यादा वाहन हैं। उसी आधार पर सिग्नल का समय अपने आप बदलेगा। इससे जाम कम होगा, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड को रास्ता मिलेगा और ईंधन की बर्बादी भी रुकेगी।

OpenAI उतरेगा हार्डवेयर की दुनिया में, ‘Gumdrop’ बन सकता है iPhone का विकल्प

OpenAI अपना पहला हार्डवेयर डिवाइस "Gumdrop" लॉन्च करने की तैयारी में है, जो iPhone का विकल्प बन सकता है। पेन के आकार का यह स्क्रीन-रहित गैजेट Apple के पूर्व डिजाइन चीफ जोनी आइव द्वारा डिजाइन किया जा रहा है। Foxconn द्वारा निर्मित यह डिवाइस 2026-27 में लॉन्च हो सकता है। कैमरा और माइक्रोफोन से लैस Gumdrop हस्तलिखित नोट्स को डिजिटल टेक्स्ट में बदल सकेगा और OpenAI के AI मॉडल्स को चला सकेगा। जेब या गले में पहनने योग्य यह iPod Shuffle साइज का गैजेट AI-आधारित प्रोडक्टिविटी के जरिए स्मार्टफोन्स को रिप्लेस करने का लक्ष्य रखता है। अब वो दिन दूर नहीं जब आपके फोन की जगह कोई दूसरा डिवाइस ले लेगा। दरअसल रिपोर्ट्स के मुताबिक, (REF.) OpenAI अपना पहला डिवाइस लॉन्च कर सकता है। इसे आप अपनी जेब में रख पाएंगे और गले में भी पहन सकेंगे। आकार में यह डिवाइस पेन की तरह का होगा। इस डिवाइस पर Apple के पूर्व चीफ डिजाइन ऑफिसर जोनी आइव काम कर रहे हैं, जिनका मकसद OpenAI को आपके iPhone की जगह लेने के लिए तैयार करना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह डिवाइस एक छोटा गैजेट होगा, जो कि शक्तिशाली एआई से लैस होगा। यह डिवाइस बिना किसी स्क्रीन के आएगा और बावजूद इसके हर जरूरत को पूरा कर सकेगा। चलिए OpenAI के इस अपकमिंग डिवाइस के बारे में जानते हैं। कहां तैयार हो रहा और कब आएगा? ताइवान की इकोनॉमिक डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, OpenAI पहले इस डिवाइस को चीन की Luxshare कंपनी से बनवाने की सोच रही थी लेकिन अमेरिका में चीन की सप्लाई चेन को लेकर चिंताओं के कारण अब OpenAI ने इसके लिए Foxconn को चुना है। यह डिवाइस या तो वियतनाम में बनेगा या अमेरिका में, और 2026-27 के दौरान लॉन्च हो सकता है। गौर करने वाली बात है कि Foxconn पहले से ही OpenAI का मुख्य मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर है और AI डेटा सेंटर्स को डिजाइन करने से लेकर उन्हें तैयार करने तक का काम संभालता है। ऐसे में नए कंज्यूमर डिवाइस के लिए भी Foxconn को चुनना समझदारी भरा फैसला लगता है। Gumdrop नाम का यह पेन क्या-क्या कर सकेगा? इस डिवाइस का इंटरनल कोडनेम "Gumdrop" है और यह एक स्मार्ट पेन की तरह काम करेगा। इसका साइज iPod Shuffle जितना होगा लेकिन इसमें कोई डेडिकेटेड स्क्रीन नहीं होगी। यह डिवाइस कैमरा और माइक्रोफोन जैसे सेंसर्स की मदद से अपने आसपास की चीजों को समझ सकेगा। सबसे खास बात यह है कि यह OpenAI के AI मॉडल्स को खुद अपने अंदर चला सकेगा, और जब ज्यादा पावर चाहिए होगी तो क्लाउड से मदद ले लेगा। यह आपके हाथ से लिखे नोट्स को टेक्स्ट में बदलकर तुरंत ChatGPT में अपलोड कर देगा। यानी आप जो पेन से लिखेंगे, वे डिजिटल हो जाएगा। बिना स्क्रीन लेगा iPhone की जगह? यह डिवाइस दूसरे डिवाइसेस से बात कर सकेगा, बिल्कुल वैसे जैसे आज हम अपने स्मार्टफोन से करते हैं। इसे वियरेबल की तरह नहीं बनाया जाएगा, लेकिन आप इसे जेब में रख या गले में पहन पाएंगे। यह डिवाइस AI-आधारित प्रोडक्टिविटी का इस्तेमाल करके iPhone को रिप्लेस करने की कोशिश करेगा। OpenAI का मानना है कि भविष्य में लोगों को बड़ी स्क्रीन की जरूरत नहीं होगी, बल्कि एक छोटा, स्मार्ट और तेज डिवाइस काफी होगा जो AI की ताकत से सब कुछ कर दे। यह पेन जैसा गैजेट उस सपने को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

भविष्य की फैक्टरी? चीन में AI संभाल रहा 5000 लूम का काम, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

नई दिल्ली  हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर चीन की एक विशाल टेक्सटाइल फैक्ट्री के वीडियो तेजी से वायरल हुए हैं, जिनमें चीन के शिनजियांग प्रांत के अराल शहर में 5,000 से अधिक लूम (बुनाई मशीनें) स्वचालन और AI‑आधारित नियंत्रण के तहत 24 घंटे, 7 दिन nonstop चल रही हैं, और वहां कोई मानव श्रमिक दिखाई नहीं दे रहा। यह क्लिप टेक्सटाइल उद्योग में चीन के ऑटोमेशन रुझान को लेकर वैश्विक चर्चा का विषय बना हुआ है। दावा किया जा रहा है कि 5000 करघे (looms) पूरी तरह AI के सहारे, बिना किसी इंसान के 24 घंटे चल रहे हैं।   इन वीडियो को “ZERO Humans Factory” और “Fully Autonomous Textile Plant” जैसे दावों के साथ साझा किया जा रहा है।  विशेषज्ञों के मुताबिक यह चीन की स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग क्रांति का उदाहरण है, लेकिन यह दावा अभी प्राधिकृत समाचार स्रोतों में पुष्ट नहीं हुआ है।  हालांकि, इस वीडियो को लेकर यह स्पष्ट प्रमाणित नहीं हुआ है कि यह किसी प्राधिकृत समाचार एजेंसी या सरकारी स्रोत द्वारा पुष्टि की गई रिपोर्ट है। यह मुख्य रूप से सोशल मीडिया और प्लेटफॉर्म वीडियो पोस्ट्स में दिखाई जा रहा तस्वीरों/फुटेज पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि इसे फैक्ट‑चेक की आवश्यकता है।     ऑटोमेशन है, लेकिन इंसान गायब नहीं प्रमाणिक औद्योगिक रिपोर्ट्स और चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, यह दावा भ्रामक और अधूरा है।  चीन ने वाकई AI-संचालित लूम्स, रोबोटिक यार्न हैंडलिंग, ऑटो-क्वालिटी डिटेक्शन और स्मार्ट सेंसर सिस्टम को बड़े पैमाने पर अपनाया है। लेकिन पूरी तरह इंसान-मुक्त टेक्सटाइल फैक्ट्री फिलहाल मौजूद नहीं है। AI क्या करता है?     करघों की गति और पैटर्न का ऑटो कंट्रोल     धागे की टूट-फूट का तुरंत पता     ऊर्जा दक्षता और उत्पादन ऑप्टिमाइज़ेशन     रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स इंसान कहां जरूरी ?     मशीन मेंटेनेंस और इमरजेंसी इंटरवेंशन     सॉफ्टवेयर मॉनिटरिंग     क्वालिटी ऑडिट और फाइनल इंस्पेक्शन     सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स क्यों फैल रहा है ‘ZERO Humans’ नैरेटिव? विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की तकनीकी ताकत को अति-नाटकीय तरीके से दिखाने और सोशल मीडिया एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए ऐसे दावे किए जाते हैं। वास्तविकता में इसे “High Automation Factory” कहना ज्यादा सही होगा, न कि “No Humans Factory”। चीन में टेक्सटाइल उद्योग में ऑटोमेशन और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग का विकास कई वर्ष से चल रहा है। औद्योगिक इंटरनेट और टेक्नोलॉजी से जुड़ी रिपोर्ट बताती हैं कि चीन की कई टेक्सटाइल फैक्ट्रियाँ AI, IoT और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के साथ काम कर रही हैं, जहाँ मशीनें उच्च गति पर लगातार चल रही हैं और केवल निगरानी के लिए कुछ लोग मौजूद रहते हैं। लेकिन यह सत्यापित नहीं हुआ है कि कोई फैक्टरी पूरी तरह बिना किसी मानव हस्तक्षेप के चल रही है। आमतौर पर उत्पादन लाइनें स्वचालित हैं, मगर इंसानों की निगरानी, रख‑रखाव और गुणवत्ता नियंत्रण अभी भी अधिकांश औद्योगिक सेट‑अप में आवश्यक है। चीन में ऑटोमेशन क्यों बढ़ा? चीन अब औद्योगिक ऑटोमेशन को राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा बना रहा है, जिसमें AI‑संचालित रोबोट्स और मशीनें लागत कम, उत्पादन तेज और गुणवत्ता बढ़ाने में सहायता कर रही हैं।   रिपोर्टों के अनुसार, चीन में मैन्युफैक्चरिंग रोबोट्स की तैनाती दुनिया के कई देशों से अधिक है, जिससे ट्रेड‑वॉर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में चीन अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।  भारत‑चीन टेक्सटाइल मुकाबला  चीन की टेक्नोलॉजी‑भारी उत्पादन प्रणाली से भारत जैसे बड़े कपड़ा उत्पादक देशों पर प्रभाव भी दिख रहा है।  चीन सस्ते निर्यात और उच्च क्वालिटी उत्पादन के लिए ऑटोमेशन का लाभ उठा रहा है, जिससे दुनियाभर के बाजारों में चीन का प्रभाव और मजबूत हो रहा है। वहीं भारत में तकनीक‑उन्मुख अपग्रेडेशन और एक्सपोर्ट‑फोकस्ड प्रयासों से वैश्विक कपड़ा आपूर्ति श्रृंखला में हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश हो रही है। उदाहरण के लिए भारत अब कई बाजारों में कपड़ा निर्यात के नए केंद्र के रूप में उभरा है। ऐसे में AI‑बेस्ड ऑटोमेशन, मशीन‑ड्रिवन उत्पादन, और मानव श्रम की भूमिका में बदलाव आज वैश्विक टेक्सटाइल प्रतिस्पर्धा के नए परिदृश्य हैं।

कैसे भारत बनेगा AI का केंद्र: 2030 तक लाखों लोगों को मिलेगा रोजगार

नई दिल्ली केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा को बताया कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के क्षेत्र में स्किल्स के मामले में दुनिया के सबसे अच्छे देशों में शामिल है। उन्होंने स्टैनफोर्ड AI इंडेक्स रिपोर्ट 2025 का हवाला देते हुए कहा कि भारत AI प्रतिभा को अपनी ओर खींचने में पूरी दुनिया में पहले नंबर पर है। हर साल भारत में AI से जुड़ी नौकरियों में करीब 33% की बढ़ोतरी हो रही है। साल 2016 से अब तक भारत में AI प्रतिभा की संख्या तीन गुना से ज्यादा हो गई है। सरकार का मानना है कि AI से भारत मजबूत बनेगा और हर क्षेत्र में फायदा होगा। सरकार की एआई को लेकर प्लानिंग ANI की रिपोर्ट (Ref.) के मुताबिक, मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत सरकार इस बात को अच्छी तरह समझती है कि जैसे-जैसे अलग-अलग क्षेत्र में AI का इस्तेमाल होगा, वैसे-वैसे अधिक स्किल वाले लोगों की जरूरत होगी। सरकार अपनी AI योजनाओं को इसी दिशा में बना रही है। दुनिया भर की रिपोर्ट्स भी भारत के AI कर्मचारियों की तारीफ कर रही हैं। 2027 तक दोगुना होगा एआई टैलेंट बेस अनुमान है कि भारत में AI का टैलेंट बेस 2027 तक दोगुने से ज्यादा हो जाएगा। हर साल करीब 15 प्रतिशत की दर से यह बढ़ोतरी होगी। भारत के AI एक्सपर्ट्स की बढ़ती संख्या का असर दुनिया भर में दिख रहा है। गिटहब पर AI प्रोजेक्ट्स में भारत का योगदान 2024 में दूसरा सबसे बड़ा था, जो कुल प्रोजेक्ट्स का 19.9 प्रतिशत था। इससे साफ पता चलता है कि भारत के AI डेवलपर्स कितने मजबूत हैं। भारत का IndiaAI मिशन मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ये आंकड़े भारत सरकार के बड़े स्तर पर AI कौशल, रिसर्च और नवाचार पर ध्यान देने का नतीजा हैं। IndiaAI मिशन के तहत सरकार कई बड़े कदम उठा रही है। इसमें 500 पीएचडी विद्वानों, 5,000 पोस्टग्रेजुएट और 8,000 ग्रेजुएट छात्रों को AI से जुड़े काम के लिए मदद दी जा रही है। छोटे शहरों में 27 IndiaAI डेटा और AI लैब्स बनाए गए हैं, जहां डेटा तैयार करने करने जैसे कोर्स चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, 174 आईटीआई और पॉलिटेक्निक में भी ऐसे लैब्स बनाए जा रहे हैं। ये सब काम दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में हो रहा है ताकि हर जगह के युवाओं को मौका मिले। 2030 तक 1 करोड़ लोग एआई से जुड़े का करेंगे सरकार नासकॉम के साथ मिलकर युवाओं को AI, बिग डेटा और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी नई स्किल्स की ट्रेनिंग दे रही है। ये कोर्स राष्ट्रीय कौशल मानकों से जुड़े हैं। प्लेटफॉर्म पर 500 से ज्यादा कोर्स हैं। अब तक 16 लाख से ज्यादा लोग इन कोर्स में नामांकन कर चुके हैं या ट्रेनिंग ले चुके हैं। इसके अलावा एक फ्री नेशनल कोर्स 'युवा AI फॉर ऑल' शुरू किया गया है, जो हर किसी को AI की बेसिक जानकारी देता है। नासकॉम की रिपोर्ट कहती है कि भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल कौशल वाला टैलेंट पूल है। साल 2030 तक भारत 80 से 100 लाख लोगों को AI से जुड़े कामों के लिए तैयार कर सकता है।

नया AI टोल सिस्टम क्या है? FASTag और GPS टोल से जानिए पूरा फर्क

 नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) अब टोल गेट पर भी एंट्री करने जा रहा है. अब भारत के हाइवे और टोल गेट पर टोल चार्जेस काटने का काम AI बेस्ड सिस्टम से होगा. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को राज्यसभा में बताया है कि सेटेलाइट बेस्ड टोल कलेक्शन सिस्टम साल 2026 के अंत तक लागू हो जाएगा.  दरअसल, प्रश्नकाल के दौरान सवालों के जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि न्यू टोल बेस्ड सिस्टम टेक्नोलॉजी सेटेलाइट और AI बेस्ड होगा. इसके लिए कार या अन्य व्हीकल मालिक को टोल गेट पर रुकने की जरूरत नहीं होगी. वह 80 किलोमीटर की स्पीड से भी टोल गेट पार कर सकेंगे.  सरकारी रेवेन्यू को होगा फायदा  मंत्री ने कहा कि AI Toll सिस्टम से 1500 करोड़ रुपये के फ्यूल सेविंग होगी और सरकारी रेवेन्यू में 6,000 करोड़ शामिल होंगे. AI बेस्ड टोल कलेक्शन सिस्टम फास्टैग और जीपीएस बेस्ड टोल सिस्टम से अलग होगा.  AI टोल सिस्टम कैसे काम करेगा? AI बेस्ड टोल कलेक्शन सिस्टम, असल में MLFF (Multi-Lane Free Flow) सिस्टम है. इस सिस्टम के तहत हाइवे पर टोल बूथ नहीं होंगे. इसके लिए एक लोहे का स्ट्रक्चर तैयार होगा, जिसको गैन्ट्री कहा जाता है. गैन्ट्री पर हाई रेजोल्यूशन कैमरा और सेंसर होंगे, जो कार की नंबर प्लेट को डिटेक्ट करेंगे और एनालाइज करेंगे. यह सिस्टम एंट्री और एग्जीट दोनों पर होगा, इसके बाद टोल चार्ज वसूला जाएगा. यह पूरा काम ऑटोमैटिक होगा और कार को टोल टैक्स के लिए कहीं रोकने की जरूरत नहीं होगी.  AI बेस्ड टोल फास्टैग और GPS बेस्ड सिस्टम से कितना अलग है?  सर्विस का नाम               FASTag (मौजूदा)           GPS/GNSS (सैटेलाइट)               AI आधारित (MLFF) टेक्नोलॉजी                  RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी)          सैटेलाइट ट्रैकिंग                           कैमरा और AI विजन रुकने की जरूर             थोड़ा रुकना पड़ता है      नहीं रुकना पड़ेगा                               नहीं रुकना पड़ेगा  डिवाइस                        विंडशील्ड पर स्टिकर     व्हीकल में OBU (डिवाइस)                   सिर्फ नंबर प्लेट हो  टोल रेट                          फिक्स्ड रेट                     जितनी दूरी उतना चार्ज                    जितनी दूरी उतना चार्ज  बैरियर                        टोल गेट लगे होते हैं              गेट फ्री टेक्नोलॉजी                             गेट फ्री टेक्नोलॉजी  मौजूदा FASTag सिस्टम का क्या होगा?  मौजूदा टोल कलेक्शन सिस्टम FASTag बेस्ड है, जिसमें व्हीकल के विंड स्क्रीन पर एक रेडियो फ्रिक्वेंसी (RFID) टैग लगाना होता है. इस सिस्टम के तहत एक छोटी चिप होती है. यह स्टिकर चिप प्रीपेड वॉलेट या बैंक अकाउंट से लिंक होता है.  FASTag बेस्ड स्टिकर वाली कार जैसे ही टोल गेट पर पहुंचती है, गेट के ऊपर लगे सेंसर RFID चिप को डिटेक्ट करते हैं. इसके बाद गेट ओपन हो जाते हैं. हालांकि फास्टैग में बैलेंस माइनस में है तो वह ब्लैक लिस्ट हो जाता है. इसकी वजह से टोल गेट ओपन नहीं होता है. ऐसे में आपको टोल चार्ज कैश में पेमेंट करनी पड़ती है.  AI और GPS टोल अलग-अलग सिस्टम हैं.  GPS आधारित सिस्टम (GNSS) के लिए व्हीकल में एक विशेष ट्रैकिंग डिवाइस (OBU) की जरूरत होगी. वहीं, AI सिस्टम मुख्य रूप से बाहरी कैमरों और आपकी गाड़ी की मौजूदा नंबर प्लेट की मदद से काम करता है. यह AI सिस्टम उन गाड़ियों के लिए भी यूजफुल होगा, जिनके अंदर GPS नहीं लगा है. 

भारत ने AI क्षेत्र में तीसरा स्थान हासिल किया, UK और साउथ कोरिया को पछाड़ा

 नई दिल्ली भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सेक्टर में बड़ी छलांग लगाई है. Stanford University की 2025 Global AI Vibrancy Tool रिपोर्ट (2024 के डेटा पर आधारित) में भारत दुनिया में तीसरी पोजिशन पर है. रिपोर्ट की मानें, तो भारत को 21.59 स्कोर मिला है. इस लिस्ट में भारत सिर्फ अमेरिका और चीन से पीछे है.  जहां अमेरिका का स्कोर 78.6 है, जबकि चीन का स्कोर 36.95 है. एक साल पहले तक भारत 7वें स्थान पर था और महज एक साल में भारत ऊंची छलांग लगाकर तीसरे पायदान पर पहुंच गया है.  क्या है स्टैनफोर्ड का ग्लोबल AI वाइब्रेंसी टूल?  ये टूल एक ऑनलाइन डैशबोर्ड है, जो देशों को AI इकोसिस्टम में उनकी एक्टिविटी और कॉम्पिटेटिवनेस के आधार पर रैंक करता है. ये डैशबोर्ड देशों का आकलन 7 पिलर- रिसर्च, टैलेंट, इकोनॉमी, पॉलिसी, इंफ्रास्ट्रक्चर, रिस्पॉन्सिबल AI और पब्लिक ओपिनियन के आधार पर करता है.  जहां इस लिस्ट में भारत पिछले साल 7वें स्थान पर था, इस साल तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. भारत ने साउथ कोरिया और यूनाइटेड किंगडम को पीछे छोड़ दिया है.  7वें से तीसरे नंबर पर सिर्फ एक साल में भारत कैसे पहुंचा?  भारत के तेजी से आगे बढ़ने के कई कारण हैं. रिपोर्ट की मानें, तो मजबूत पॉलिसी, तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और AI टैलेंट का बड़ा पूल भारत को आगे ले जाने में अहम भूमिका निभा रहा है.  इसकी वजह से भारत कई मोर्चों पर मजबूत हुआ है. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि भारत को AI के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए 'नई और बड़ी पहलों' का सीधा फायदा मिला है. इन्हीं कदमों के दम पर भारत ने कई विकसित देशों को पीछे छोड़ते हुए ग्लोबल AI रेस में अपनी स्थिति मजबूत की है. स्टार्टअप और प्राइवेट सेक्टर पुश कितना जरूरी है?  भारत की AI वाइब्रेंसी तेजी से आगे बढ़ते स्टार्टअप और एंटरप्राइसेस इकोसिस्टम से जुड़ी हुई है. स्टार्टअप और एंटरप्राइसेस फाइनेंस से लेकर हेल्थकेयर, एजुकेशन और लॉजिस्टिक तक विभिन्न सेक्टर्स में AI को जोड़ रहे हैं. भारत के बड़े डिजिटल बाजार और एक्टिव कंपनियां इसे उभरते मार्केट्स में सबसे अधिक कॉम्पिटेटिव AI इकोनॉमी में से एक बनाती हैं. भारत का टैलेंट एडवांटेज कितना बड़ा है?  भारत AI टैलेंट का ग्लोबल पावर हाउस है. AI हायरिंग में भारत ने दुनिया में सबसे ज्यादा ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ हासिल की है. साल 2024 में भारत AI से जुड़े GitHub प्रोजेक्ट्स में सबसे ज्यादा योगदान करने वाला दूसरा देश बन गया है. AI स्किल पेनिट्रेशन के मामले में भी भारत दुनिया के टॉप देशों में शामिल है. यह रैंकिंग भारत की मजबूत इंजीनियरिंग वर्कफोर्स को दिखाती है.  क्या भारत वास्तव में AI रिसर्च और इनोवेशन में मजबूत है?  भले ही भारत, अमेरिका और चीन से पीछे है, लेकिन AI पब्लिकेशन और पेटेंटिंग में भारत के सुधार साफ नजर आते हैं. ये दोनों ही फैक्टर R&D पिलर के लिए महत्वपूर्ण हैं. स्टैनफोर्ड के AI इंडेक्स के मुताबिक भारत लगातार अपनी AI आउटपुट क्षमता बढ़ा रहा है और खुद को एक स्ट्रैटेजिक AI डेवलपमेंट हब के तौर पर स्थापित कर रहा है. खासकर एकेडमिक-इंडस्ट्री के बीच बढ़ता सहयोग, भारत को मजबूत कर रहा है.  सरकार का क्या रोल है?  यहां IndiaAI Mission एक प्रमुख प्लेयर है. इस मिशन को केंद्रीय कैबिनेट ने अगले 5 सालों के लिए लगभग 10,300–10,372 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी थी. इसके तहत 10 हजार से ज्यादा GPUs को कंप्यूटिंग कैपेसिटी बढ़ने के लिए लगाना, एक नेशनल नॉन-पर्सनल डेटा प्लेटफॉर्म डेवलप करना और सुरक्षित और भरोसेमंद AI के लिए फ्रेमवर्क तैयार करना है. इसका सीधा असर पॉलिसी, गवर्नेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर पिलर्स पर पड़ा है.  हाई रैंकिंग के बाद भी भारत अभी कहां पिछड़ रहा है? एनालिस्ट को यहां कई गैप्स नजर आ रहे हैं. कटिंग-एज AI रिसर्च और ग्लोबल विजिबल फाउंडेशनल मॉडल्स, चीन और अमेरिकी के मुकाबले हाई-वैल्यू प्राइवेट इन्वेस्टमेंट फ्लो, डेटा क्वालिटी और एडवांस R&D कैपेसिटी में बॉटलनेक स्थिति बड़ी चुनौतियां हैं. भारत को प्रमुश शहरी केंद्रों के आगे रिस्पॉन्सिबल AI रेगुलेशन और एक्सेस पर काम करने की जरूरत है.  भारत के AI फ्यूचर के लिए ये रैंकिंग क्या मायने रखती है?  तीसरे स्थान पर होना ये दिखाता है कि भारत दुनिया की सबसे ज्यादा कॉम्पिटेटिव AI पावर में से एक है. साथ ही भारत लोअर और मिडिल इनकम वाले देशों के आगे खड़ा है. हालांकि, फ्रंटियर कैपेबिलिटी के मामले में अमेरिका और चीन के मुकाबले भारत काफी पीछे है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर भारत AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बनाए रखता है, रिसर्च और इनोवेशन पर दोगुना जोर दे और एथिकल व इन्क्लूसिव AI गवर्नेंस को मजबूत करता है, तो आने वाले में दशक में भारत की AI ग्रोथ रेट काफी तेज हो सकती है.  

रायपुर में डीजीपी-आईजी कांफ्रेंस: AI का इस्तेमाल कर पुलिसिंग को बनाया जाएगा भविष्य तैयार

भोपाल  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जमाने में पुलिस भी बदलेगी। एआई की मदद से पुलिस यह पूर्वानुमान लगा सकेगी कि किस जगह, किस समय, किस तरह का अपराध घटित हो सकता है। पहले के आंकड़ों के आधार पर एआई यह अनुमान लगा सकेगा। ऐसे ही किसी समय के ट्रैफिक का वाल्यूम यानी वाहनों की संख्या के आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकेगा कि सड़क दुर्घटना आशंका कहां-कहां है। इससे पुलिस घटनाएं रोकने पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी। दरअसल, देशभर की पुलिसिंग में 'प्रेडेक्टिव पुलिसिंग' माडल अपनाने पर विचार चल रहा है। पिछले सप्ताह रायपुर में हुई डीजीपी-आईजी कान्फ्रेंस में मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने 'फ्यूचर रेडी पुलिसिंग 2047' को लेकर विजन प्रस्तुत किया। क्राइम प्रिवेंशन एवं डिटेक्शन पर दिया प्रजेंटेंशन उन्होंने बताया कि एआई का उपयोग कर पुलिस अपराध की आशंका आदि बता सकती है। इसे लेकर उन्होंने 'क्राइम प्रिवेंशन एवं डिटेक्शन' विषय पर प्रजेंटेशन दिया। इसी में एआई मॉडल पर चर्चा हुई। कहा गया कि राज्य इस मॉडल का परीक्षण कर अपने-अपने स्तर पर लागू कर सकेंगे। कान्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल थे। डीजीपी मकवाणा ने 'फ्यूचर रेडी पुलिसिंग 2047' के अंतर्गत 'कम्युनिटी पुलिसिंग और पब्लिक ट्रस्ट' विषय पर बताया कि पुलिस आमजन से बेहतर संवाद रखकर कैसे उनका भरोसा जीत सकती है। संवाद को लेकर नवाचार किए बता दें कि डीजीपी बनने के बाद से ही उनका इस पर विशेष ध्यान रहा है। कई जिलों में पुलिस अधीक्षकों ने आमजन से संवाद को लेकर नवाचार भी किए हैं। कांफ्रेस में भी उन्होंने 'नशे से दूरी' अभियान सहित अन्य नवाचारों के बारे में बताया। कांफ्रेंस में उभरते साइबर अपराध, भीड़ प्रबंधन, वैज्ञानिक अन्वेषण, टेक्नोलाजी-इंटीग्रेशन, साइबर सुरक्षा, नागरिक-सहभागिता जैसे विषयों पर चर्चा हुई। मकवाणा ने डेटा-संचालित निर्णय प्रक्रिया, आपदा प्रबंधन प्रणालियां और युवाओं की सकारात्मक भागीदारी जैसे बिंदुओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग तभी प्रभावी हो सकती है जब उसमें तकनीक और मानवीय संवेदना दोनों का संतुलित समावेश हो।

Gemini पर सैम अल्टमैन का बयान: क्या गूगल का AI चैटजीपीटी की रफ्तार का मुकाबला कर पाएगा?

नई दिल्ली सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में एक इंटरनल मेमो में स्वीकार किया कि गूगल अभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में आगे दिखाई दे रहा है। Gemini 3 मॉडल की सफलता ने डेवलपर्स और क्रिएटर्स के बीच गूगल की लोकप्रियता बढ़ा दी है। हालांकि, ऑल्टमैन ने इस बढ़त को केवल “अस्थायी” बताया और दावा किया कि OpenAI बेहद तेजी से गैप को कम कर रहा है। गूगल का नया Gemini 3 मॉडल कोडिंग, डिजाइन और प्रोटोटाइप जेनरेशन में शानदार प्रदर्शन कर रहा है। यह मॉडल गूगल के सर्च, प्रोडक्टिविटी ऐप्स और क्रिएटिव टूल्स में गहराई से इंटीग्रेट किया गया है, जिससे इसे बड़े पैमाने पर यूजर विजिबिलिटी मिल रही है। क्या Gemini से पिछड़ रही ChatGPT? डेवलपर्स का कहना है कि Gemini 3 वेबसाइट डिजाइन, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और टेक्स्ट-टू-प्रोटोटाइप जैसे काम बेहद तेजी और सटीकता से कर रहा है। ये वो क्षेत्र हैं जहां पहले OpenAI का दबदबा था। ऑल्टमैन ने स्वीकार किया कि यह बड़ी चुनौती है, लेकिन साथ ही कहा कि कंपनी का असली फोकस सुपरइंटेलिजेंस बनाने पर है, जो भविष्य में गूगल समेत हर प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ देगी। Anthropic का उभरता खतरा गूगल के अलावा, ऑल्टमैन ने Anthropic का भी जिक्र किया, जिसकी Claude AI कोडिंग और डीबगिंग में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। Claude सीधे OpenAI के Codex और Copilot जैसे सिस्टमों की टक्कर में खड़ी है। AI इंडस्ट्री में कई मोर्चों पर चुनौतियां हैं, और OpenAI को अब एक साथ कई स्तरों पर मुकाबला करना पड़ रहा है। गूगल की तगड़ी आर्थिक ताकत भी है बड़ी चुनौती तकनीकी क्षमता के साथ-साथ गूगल की आर्थिक मजबूती भी उसे इस दौड़ में बढ़त देती है। कंपनी का मार्केट वैल्यू 3.5 ट्रिलियन डॉलर है और वह हर साल 70 बिलियन डॉलर से अधिक फ्री कैश फ्लो जनरेट करती है। विडंबना यह है कि इसी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियां भी करती हैं, यानी प्रतिस्पर्धियों पर गूगल का अप्रत्यक्ष आर्थिक लाभ भी बना रहता है। सुपरइंटेलिजेंस की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही OpenAI ऑल्टमैन के अनुसार, OpenAI अभी मजबूत स्थिति में है और AI रेस की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। कंपनी इस साल लगभग 13 बिलियन डॉलर की कमाई की ओर बढ़ रही है, हालांकि रिसर्च और कंप्यूटिंग पर भारी खर्च उसकी वित्तीय रणनीति को चुनौती देते हो सकते हैं। ऑल्टमैन ने कहा कि कंपनी को एक साथ कई मुश्किल काम करने हैं। बेहतरीन रिसर्च लैब, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोडक्ट प्लेटफॉर्म बनना कंपनी के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। ChatGPT की एंगेजमेंट घटी, पर वित्तीय स्थिति मजबूत कंपनी की सीएफओ सारा फ्रायर ने बताया कि ChatGPT की यूजर्स के बीच एंगेजमेंट भले स्थिर हो गई हो, लेकिन कंपनी आर्थिक रूप से सेफ जोन में है। यह बयान उन चिंताओं को कम करने की कोशिश है जो पिछले कुछ महीनों में OpenAI की धीमी गति को लेकर उठ रही थीं।  

AI और जलवायु परिवर्तन 2028 तक भारतीय व्यवसायों के लिए प्रमुख जोखिम: रिपोर्ट

नई दिल्ली   भारतीय कंपनियों ने साइबर अटैक और डेटा ब्रीच के रूप में अपने टॉप बिजनेस जोखिम की पहचान की है, जबकि 2028 तक के लिए एआई और क्लाइमेट चेंज को भविष्य का बिजनेस जोखिम बताया है। यह जानकारी बुधवार को आई एक रिपोर्ट में दी गई।  ग्लोबल प्रोफेशनल सर्विस फर्म एऑन ने कहा कि प्रतिभाओं को आकर्षित कर उन्हें बनाए रखने की चुनौतियां बनी हुई हैं, जबकि प्रॉपर्टी डैमेज और एक्सचेंज रेट फ्लक्चुएशन एशिया में किसी और जगह की तुलना में भारत में ज्यादा है। एऑन के भारत के सीईओ ऋषि मेहरा ने कहा, "भारतीय व्यवसाय डिजिटल व्यवधान, टैलेंट अडैप्टेबिलिटी और भू-राजनीतिक बदलावों के बीच उल्लेखनीय एजिलिटी का प्रदर्शन कर रहे हैं।77.8 प्रतिशत भारतीय रेस्पॉन्डेंट्स का कहना है कि उन्हें प्रॉपर्टी डैमेज से नुकसान हुआ है, 46.2 प्रतिशत बिजनेस इंटरप्शन और 63.6 प्रतिशत एक्सचेंज रेट फ्लक्चुएशन से प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब आधे रेस्पॉन्डेंट्स के लिए टैलेंट से जुड़ी चुनौतियां और कैश फ्लो/लिक्विडिटी के कारण नुकसान हुआ है। जोखिम प्रबंधन का औपचारिकीकरण तेजी से हो रहा है, जिसमें 70 प्रतिशत रेस्पॉन्डेंट्स ने डेडिकेटेड रिस्क और इंश्योरेंस टीम को स्थापित किया है। 64.9 प्रतिशत रेस्पॉन्डेंट्स इंश्योरेबल रिस्क की कुल कॉस्ट को मेजर कर रहे हैं।  92.9 प्रतिशत रेस्पॉन्डेंट्स के पास साइबर अटैक के लिए योजनाएं और फॉर्मल रिव्यूज हैं। प्रॉपर्टी डैमेज के लिए 90.9 प्रतिशत रेस्पॉन्डेंट्स के पास योजनाएं हैं। वहीं, 55 प्रतिशत रेस्पॉन्डेंट्स टैलेंट रिटेंशन पर ध्यान दे रहे हैं। आईटी मंत्रालय के डेटा के अनुसार, 400 से अधिक स्टार्टअप्स और 6.5 लाख प्रोफेशनल्स का एक स्किल्ड वर्कफोर्स 20 अरब डॉलर की साइबरसिक्योरिटी इंडस्ट्री को सशक्त बना रहे हैं, जिसके साथ भारत तेजी से एक ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी हब के रूप में उभर रहा है।  सीईआरटी-इन रिसर्च सहयोग, इंटरनेशनल फोरम में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए एक मजबूत और विश्वसनीय साइबर डिफेंस आर्किटेक्चर बना रहा है, जो कि डिजिटल इंडिया विजन से जुड़ा है।

डिग्री नहीं, स्किल की जरूरत: एआई के दौर में ये 6 हुनर बचाएंगे आपकी नौकरी

नई दिल्ली एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटेमेशन के चलते दुनिया की बड़ी कंपनियों में छंटनी का दौर तेज हो गया है। अमेजन, यूपीएस, टारगेट, माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल और नेस्ले जैसी दिग्गज कंपनियों ने हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। धड़ाधड़ पिंक स्लिप पकड़ाई जा रही हैं और नई भर्तियों पर रोक लगा दी गई है। टेक से लेकर ट्रांसपोर्ट तक जैसी फलने फूलने वाली इंडस्ट्री अब रीस्ट्रक्चरिंग और एफिशिएंसी की भाषा बोल रही हैं। हर सेक्टर के विभिन्न कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चितता से भरा है। इस उथल-पुथल के बीच अमेरिकी अर्थव्यवस्था नो हायर -नो फायर यानी न नई भर्ती, न ज्यादा छंटनी , ऐसी स्थिति में फंसी है। इसकी वजह है- जियोपॉलिटिक्स (अंतरराष्ट्रीय तनाव), ऑटोमेशन, टैक्स-टैरिफ और बदलती उपभोक्ता आदतें। अमेरिका की सत्ता में डोनाल्ड ट्रंप के लौटने के बाद से पब्लिक सेक्टर में हजारों लोगों की नौकरियां गई हैं। सरकारी शटडाउन अपने चौथे हफ्ते के करीब है, जिससे कई लोगों को सैलरी नहीं मिली और सभी के पास कोई जवाब नहीं है। भर्तियां अब सिर्फ डिग्री के दम पर नहीं टैग्ड के फाउंडिंग मेंबर और सीईओ देवाशीष शर्मा का कहना है कि भारत में कंपनियों में अब भर्तियां डिग्री के दम पर नहीं, बल्कि कैंडिडेट में जॉब के लिए दिखने वाली तैयारी से तय होगी। प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप और योग्यता मूल्यांकन से स्किल्स देखी जाएगी। उन्होंने कहा, 'एम्प्लॉयर्स खासकर बड़ी कंपनियां एकेडमिक इंस्टीट्यूशन्स के साथ मिलकर स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स बनाकर और करिकुलम को मिलकर डिजाइन करके जॉब के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।' कई बड़ी दिग्गजों कंपनियों खर्चों को लेकर अपना हाथ टाइट कर लिया है और कर्मचारियों की संख्या पर लगाम लगाई है, यहां देखें लिस्ट अमेजन: ने 14,000 कॉर्पोरेट कर्मचारियों (लगभग 4% ) की छंटनी की है। कंपनी इस पैसे को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश कर रही है। यूपीएस : ने इस साल 48,000 नौकरियां घटाई हैं और 93 ब्रांचों को बंद कर दिया है क्योंकि शिपिंग (सामान भेजने) की मात्रा कम हुई है। टारगेट : टारगेट ने 1800 कर्मचारियों (लगभग 8% कॉर्पोरेट कर्मी) को हटाया है। नेस्ले : बढ़ती कीमतों और टैरिफ के कारण अगले दो सालों में दुनिया भर में 16,000 छंटनियां कर रही है। लुफ्थांसा समूह : 2030 तक 4,000 पद खत्म करने की योजना बना रहा है। प्रशासनिक काम को डिजिटल और AI प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट कर रहा है। नोवो नॉर्डिस्क : अपनी ब्लॉकबस्टर दवाओं की भारी मांग के बावजूद 9,000 कर्मचारियों (11% कार्यबल) की छंटनी की घोषणा की है। इंटेल : छंटनी और कर्मचारियों के छोड़ने से अपने मुख्य मैनफोर्स को 99,500 से घटाकर 75,000 कर रहा है। माइक्रोसॉफ्ट : माइक्रोसॉफ्ट ने इस साल 6,000 कर्मचारियों को निकालने के बाद, गेमिंग और प्रबंधन डिवीजनों में 9,000 और कर्मचारियों की छंटनी की है। एआई, ऑटोमेशन और मार्केट की बदलती जरूरतों में कैसे टिके रहें- 1- फिर से सीखें और नए सिरे से सोचें वो दिन गए जब एक ही स्किल से जिंदगी काटी जा सकती है। जिंदगी भर कमाया जा सकता था। खुद की स्किल्स को बढ़ाना और उसे अपग्रेड करना अब ऑप्शनल नहीं है; यह अनिवार्य है और जिदा रहने का तरीका है। प्रोफेशनल्स को लगातार सीखने में निवेश करना चाहिए, चाहे वह एआई साक्षरता हो, डेटा इंटरप्रिटेशन हो, या कम्युनिकेशन को बेहतर बनाना हो। कोर्सेरा, लिंक्डइन लर्निंग जैसे प्लेटफॉर्म और कंपनी-स्पॉन्सर्ड प्रोग्राम किसी के स्किलसेट को नए सिरे से समझने के लिए मजबूत रास्ते देते हैं। 2. एक पर्सनल ब्रांड बनाएं आज की दुनिया में आपकी ऑनलाइन पहचान बहुत मायने रखती है। लिंक्डिन पर नेटवर्किंग, अनुभव साझा करना और ईमानदारी से खुद को पेश करना फायदेमंद साबित हो सकता है। डिजिटल वर्ल्ड में आपकी मौजदूगी आपको भीड़ में सबसे अलग खड़ा कर देगी। 3. फाइनेंशियल दूर की सोच बढ़ाएं जॉब की असुरक्षा के माहौल में आपका बचाया हुआ पैसा बहुत काम आएगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक कम से कम छह महीने के खर्चों को कवर करने वाला एक इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए। कंसल्टिंग, फ्रीलांसिंग, या पैसिव इन्वेस्टमेंट के जरिए इनकम के सोर्स को अलग-अलग करें। साइड इनकम के लिए निवेश करें। 4. जुड़े रहें, संपर्क में रहें नेटवर्किंग लेन-देन वाली नहीं, बल्कि रिश्तों को बनाए रखने वाली होती है। नौकरी से निकाले जाने और बदलाव के दौरान इमोशनल सपोर्ट अक्सर साथियों, पुराने साथ काम करने वालों या इंडस्ट्री के लोगों से मिलता है। इन कनेक्शन को बनाए रखने से अनजाने रास्ते खुल सकते हैं। 5. मानसिक संतुलन को प्राथमिकता दें नौकरी छूटने या अस्थिरता से मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है। मानसिक रूप से मजबूत बने रहने में थेरेपी, मेडिटेशन और नियमित दिनचर्या मदद करती है। 6. लगातार सीखें, खुद को बदलें अब हर व्यक्ति को अपनी स्किल्स को बढ़ाने, खुद को नया रूप देने की जरूरत है। आज का जॉब मार्केट खत्म नहीं हुआ है। यह बस बदल रहा है। इसके लिए सिर्फ टेक्निकल काबिलियत ही नहीं, बल्कि इमोशनल इंटेलिजेंस, एडजस्ट करने की क्षमता और समय के साथ बदलना जरूरी है।