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रोजगार मेले में 27 हजार युवाओं का पंजीकरण, बड़ी संख्या में युवाओं को मिला रोजगार

रोजगार मेले में 27 हजार युवाओं का पंजीकरण, बड़ी संख्या में मिला रोजगार 200 से अधिक कंपनियों ने की भागीदारी, युवाओं को उद्योगों से सीधे जुड़ने का मिला अवसर मुजफ्फरनगर  मुजफ्फरनगर के नुमाइश ग्राउंड में  आयोजित भव्य रोजगार मेला एवं विकास कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के समग्र विकास, युवाओं के सशक्तीकरण और किसानों के कल्याण को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इस दौरान उन्होंने चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा तैयार “कौशल दर्शन” पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसमें प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं की सफलता की कहानियों का संकलन है। साथ ही मिशन द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वीडियो का प्रदर्शन भी किया गया, जिसने कार्यक्रम को और आकर्षक बना दिया। 200 से अधिक कंपनियों की भागीदारी रोजगार मेले में 200 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियों ने भाग लिया, जिससे युवाओं को सीधे उद्योगों से जुड़ने का अवसर मिला। इस मेले में 27,000 से अधिक युवाओं ने पंजीकरण कराया, जिनमें से बड़ी संख्या में युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि यह मेला युवाओं के लिए एक सशक्त प्लेटफॉर्म साबित हो रहा है, जहां उन्हें उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार मिल रहा है। उन्होंने चयनित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि जो युवा इस बार चयनित नहीं हो सके हैं, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सरकार समय-समय पर ऐसे अवसर उपलब्ध कराती रहेगी। बड़ी संख्या में युवाओं की रही मौजूदगी मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। रोजगार मेलों के जरिए न केवल नौकरी के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि स्वरोजगार को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदेश में निवेश, उद्योग और तकनीकी विकास को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए और अधिक रोजगार सृजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपस्थिति रही, जिससे यह आयोजन उत्साह और ऊर्जा से भरपूर नजर आया।

एमपी में दो बच्चों का नियम खत्म, अब तीन या अधिक संतान वालों को भी मिलेगी सरकारी नौकरी

भोपाल  मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी से जुड़ा करीब 24 साल पुराना दो बच्चों वाला नियम अब खत्म होने की तैयारी में है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे मुख्यमंत्री से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे जल्द ही कैबिनेट में पेश किया जाएगा। अगर कैबिनेट से मंजूरी मिलती है, तो तीन या उससे अधिक बच्चों वाले लोगों को सरकारी नौकरी से न तो बाहर किया जाएगा और न ही नौकरी पाने से रोका जाएगा। अभी तक इस नियम के कारण कई कर्मचारी और उम्मीदवार प्रभावित हो रहे थे।  क्या था पुराना नियम? साल 2001 में तत्कालीन सरकार ने सिविल सेवा नियमों में बदलाव कर यह प्रावधान लागू किया था। इसके तहत दो से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी नौकरी में नियुक्ति या नौकरी जारी रखने में दिक्कत आती थी। यानी उनको अपात्र माना जाता था।  इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा शिक्षा विभाग को मिलेगा। जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में शिक्षक ऐसे हैं जो इस नियम से प्रभावित थे। नया नियम लागू होने के बाद उनकी नौकरी सुरक्षित हो जाएगी। इसके अलावा स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में भी हजारों मामले लंबे समय से लंबित हैं, जिन्हें अब सुलझाया जा सकेगा। पुराने मामलों पर भी होगा फैसला सरकार उन कर्मचारियों को भी राहत देने पर विचार कर रही है, जिन्हें तीसरी संतान के कारण नौकरी से हटाया गया था या जिनके मामले कोर्ट में चल रहे हैं। कैबिनेट इन सभी मामलों पर अंतिम निर्णय ले सकती है। बता दें पिछले कुछ वर्षों में इस नियम को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ बताया गया और बदलते सामाजिक हालात के हिसाब से इसे पुराना माना गया। इसी बीच जनसंख्या संतुलन को लेकर भी चर्चा तेज हुई, जिसके बाद सरकार ने इस पर पुनर्विचार शुरू किया।  दूसरे राज्यों में पहले ही बदलाव मध्य प्रदेश से पहले राजस्थान और छत्तीसगढ़ इस नियम को खत्म कर चुके हैं। वहां तीन या उससे अधिक बच्चों वाले लोग बिना किसी रोक-टोक के सरकारी सेवा में बने रह सकते हैं। सरकार इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट में रख सकती है, जिसके बाद इस नियम को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया जाएगा।

पंजाब में खिलाड़ियों को मिलेगा दाखिले और नौकरियों में वेटेज, 75% प्रदर्शन और 25% परीक्षा अंक का होगा हिसाब

लुधियाना  पंजाब सरकार ने खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियों और एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में दाखिले में अधिक अवसर मुहैया करवाने के लिए नई स्ट्रेटजी बनाई है। अब उनके ग्राउंड में दिखाए गए प्रदर्शन को प्राथमिकता मिलेगी। उनके नौकरी की राह में जिला स्तर से लेकर इंटरनेशनल मुकाबले खेले है।  इसके लिए पंजाब स्टेट पॉलिसी ऑन रिजर्वेशन फॉर स्पोर्ट्सपर्सन जारी की है। पॉलिसी में सरकारी नौकरियों में 3 प्रतिशत आरक्षण और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश पर लागू होगी। पुरानी 1988 की खेल भर्ती भी जहां-जहां अंतर है, नई नीति उसे ओवरराइड कर देगी। स्पोर्ट्स परफॉरमेंस को 75% वेटेज नई पॉलिसी के मुताबिक खेल उपलब्धियों को 75 प्रतिशत वेटेज और प्रवेश परीक्षा को 25 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा, जबकि सभी विज्ञापित पदों के लिए खेल विभाग द्वारा खेल ग्रेडेशन और स्कोरिंग अनिवार्य कर दी गई है। अंकों का लाभ केवल तभी मिलेगा जब उम्मीदवार प्रवेश परीक्षा में न्यूनतम क्वालीफाइंग अंक प्राप्त कर लेगा। चार ग्रुप में मिलेगी नौकरियां खेल ग्रेड के आधार पर नौकरी के लिए सरकार ने 4 ग्रुप तय किए हैं। ग्रेड A और B वाले ग्रुप A, B, C और D की नौकरियों के लिए पात्र होंगे। जबकि ग्रेड C वाले ग्रुप C और D की नौकरियों के लिए पात्र हैं। ग्रेड D केवल ग्रुप D की नौकरियों के लिए पात्र हैं। 2023 की पॉलिसी से ऐसे अलग 2023 की खेल नीति के अनुसार खेलों (एथलेटिक्स, हॉकी, फुटबॉल आदि) के खिलाड़ियों को शैक्षणिक, तकनीकी और मेडिकल संस्थानों में दाखिले के समय वरीयता देने का प्रावधान था, लेकिन अब यह प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

मनेन्द्रगढ़ में 23 मार्च को आयोजित होगा रोजगार मेला, युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी का बड़ा मौका

एमसीबी जिले के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र मनेन्द्रगढ़ के तत्वावधान में 23 मार्च 2026 को रोजगार मेला एवं प्लेसमेंट कैंप का आयोजन किया जाएगा। यह प्लेसमेंट कैंप जिला रोजगार कार्यालय मनेन्द्रगढ़ में सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित होगा, जहां निजी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनियों के माध्यम से युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इस रोजगार मेले में परिशराम ह्यूमन रिसोर्सेस प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम (हरियाणा) द्वारा आईटीआई उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के लिए मीटर इंस्टॉलेशन के 50 पदों पर भर्ती की जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों को 15 हजार से 20 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन प्रदान किया जाएगा तथा उनका कार्यक्षेत्र छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में रहेगा। इस पहल से जिले के आईटीआई योग्य युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त करने का एक बेहतर और सशक्त अवसर मिलेगा। जिला रोजगार कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह रोजगार मेला पूरी तरह निःशुल्क है। इसमें भाग लेने के इच्छुक आवेदकों के लिए ई-रोजगार पोर्टल https://erojgar.cg.gov.in/ अथवा गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध  ÞCG Rojgar पंजीयन ऐप” के माध्यम से पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। केवल पंजीकृत आवेदकों को ही प्लेसमेंट कैंप में शामिल होने की पात्रता प्रदान की जाएगी। जिला प्रशासन ने जिले के योग्य और इच्छुक युवाओं से अपील की है कि वे इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाते हुए रोजगार मेले में सहभागिता करें और निजी क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार संभावनाओं का लाभ प्राप्त कर अपने भविष्य को सशक्त बनाएं।

बस्तर में बेरोजगार युवाओं को मिलेगी 1500 पदों पर नौकरी, जल्द जारी होंगी भर्तियां

रायपुर ‘संकल्प’ थीम पर आधारित राज्य सरकार का बजट ‘विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़’ के विजन को आगे बढ़ाने वाला बताया जा रहा है। इस बजट में शिक्षा, अधोसंरचना, औद्योगिक निवेश, कृषि आधारित उद्योग, पर्यटन और सामाजिक सुरक्षा को केंद्र में रखकर मिशन मोड में काम करने की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। सरकार ने पांच नए मुख्यमंत्री मिशन प्रारंभ करने की घोषणा की है, जिनका उद्देश्य नीति से परिणाम तक स्पष्ट रणनीति के साथ समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। खासतौर पर बस्तर और सरगुजा क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जहां रोजगार, शिक्षा और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर जोर है। शिक्षा और रोजगार पर विशेष जोर शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कुल बजट का 13.5 प्रतिशत प्रविधान स्कूल शिक्षा के लिए किया गया है। बस्तर के अबूझमाड़ और जगरगुंडा में दो एजुकेशन सिटी स्थापित की जाएंगी, जिससे दूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। बस्तर फाइटर्स में 1,500 नई भर्तियों से युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। औद्योगिक विकास और शहरी अधोसंरचना औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए 23 नए औद्योगिक पार्कों की स्थापना हेतु 250 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। मुख्यमंत्री आदर्श शहर समृद्धि योजना के लिए 200 करोड़ रुपये और भूमि विकास बैंक के सुदृढ़ीकरण के लिए भी 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अंबिकापुर-जगदलपुर हवाई सेवा विस्तार से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी। बस्तर-सरगुजा में कृषि और आजीविका फोकस कृषि आधारित उद्योगों के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बकरी, सूअर और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इंद्रावती नदी पर देवरगांव और मटनार बैराज के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक स्वीकृत किए गए हैं। स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा कुनकुरी, मनेंद्रगढ़, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा और दंतेवाड़ा मेडिकल कॉलेजों के संचालन को गति दी जाएगी। सरकारी कर्मचारियों के लिए कैशलेस उपचार सुविधा भी लागू की जाएगी, जो स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में अहम कदम माना जा रहा है।

भविष्य की नौकरियों पर AI का कहर, 2027 तक ज्यादातर जॉब्स खत्म; केवल पांच क्षेत्र में रहेंगी अवसर

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एक प्रमुख विशेषज्ञ ने ऐसी चेतावनी दी है जिसने दुनिया भर में हड़कंप मचा दिया है. लैटवियन मूल के कंप्यूटर साइंटिस्ट और लुइसविल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. रोमन याम्पोलस्की ने ‘द डायरी ऑफ ए सीईओ’ पॉडकास्ट में स्टीवन बार्टलेट से बातचीत में कहा कि 2027 तक आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) आ सकता है, जो इंसानों से बेहतर हर संज्ञानात्मक काम कर सकेगा. इसके साथ ही अगले पांच सालों में 99 प्रतिशत नौकरियां गायब हो जाएंगी. डॉ. याम्पोलस्की, जिन्होंने AI सेफ्टी और रिस्क पर 100 से ज्यादा रिसर्च पेपर प्रकाशित किए हैं, ने कहा, “कोई भी जॉब ऐसी नहीं जो ऑटोमेटेड ना हो सके. पहले की सभी तकनीकें इंसानों की मदद करती थीं, लेकिन AI सब कुछ खुद कर लेगा.” इसका नतीजा होगा कि लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ जाएगा. इन जॉब्स पर सबसे अधिक खतरा एक्सपर्ट ने बताया कि सबसे पहले कंप्यूटर पर होने वाले काम ऑटोमेट हो जाएंगे, फिर ह्यूमनॉइड रोबोट्स के आने से फिजिकल लेबर भी 5 साल पीछे रह जाएगा. 2030 तक रोबोट्स इतने प्रभावी हो जाएंगे कि सभी फिजिकल काम भी AI संभाल लेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि इससे पहले कभी नहीं देखी गई स्तर की बेरोजगारी आएगी. “10 प्र.तिशत बेरोजगारी भी डरावनी है, लेकिन एआई की वजह से 99 प्रतिशत तक बेरोजगारी हो जाएगी.” उन्होंने कहा कि आज के मॉडल्स से ही 60 प्रतिशत जॉब्स रिप्लेस हो सकती हैं और कई जॉब्स तो ‘बुलशिट जॉब्स’ हैं जो बिना ऑटोमेशन के ही खत्म हो जाएंगे. रिट्रेनिंग का कोई फायदा नहीं, क्योंकि “प्लान बी नहीं है.” आएगा आइआइ का बाप डॉ. याम्पोलस्की ने AGI के आने को 2027 तक संभावित बताया, जो प्रेडिक्शन मार्केट्स और लीडिंग AI लैब्स के सीईओज की भविष्यवाणियों पर आधारित है. इसके बाद सुपरइंटेलिजेंस आ सकती है, जो इंसानों से कहीं ज्यादा स्मार्ट होगी. लेकिन उनका मुख्य फोकस जॉब्स पर है. उन्होंने कहा कि क्रिएटिव काम, मीडिया, पॉडकास्टिंग सब AI से बेहतर हो सकता है क्योंकि AI तेज, सटीक और डेटा-ड्रिवन है. फिर भी, कुछ जॉब्स बचे रह सकते हैं, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम है. उन्होंने सिर्फ 5 तरह के काम बताए जहां लोग इंसान को प्राथमिकता देंगे: पर्सनल सर्विसेज फॉर द रिच – जैसे अमीर लोग अपने अकाउंटेंट, पर्सनल असिस्टेंट या अन्य सर्विसेज में इंसान चाहेंगे, जैसे वॉरेन बफेट AI की बजाय ह्यूमन अकाउंटेंट चुनते हैं. इमोशनल या पर्सनल टच वाली जॉब्स – जहां इंसानी भावनाएं, एम्पैथी या ट्रस्ट जरूरी हो, जैसे कुछ थेरेपी या पर्सनल रिलेशनशिप रोल्स, लेकिन ये भी सीमित होंगे. AI ओवरसाइट एंड रेगुलेशन – AI सिस्टम्स को कंट्रोल, मॉनिटर और रेगुलेट करने वाले एक्सपर्ट्स, क्योंकि सेफ्टी इश्यूज रहेंगे. इंटरमीडियरीज या AI एक्सप्लेनर्स – जो AI को समझकर कंपनियों या लोगों के लिए इसे डिप्लॉय और एक्सप्लेन करेंगे. प्रॉम्प्ट इंजीनियर्स या स्पेशलाइज्ड AI हैंडलर्स – शुरुआत में प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग जैसी जॉब्स, लेकिन लंबे समय में ये भी कम हो सकती हैं. ये जॉब्स सिर्फ छोटे सेक्शन के लिए होंगी, ज्यादातर लोगों के लिए नहीं होगी. उन्होंने कहा कि समाज को यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) जैसी व्यवस्था अपनानी पड़ेगी, क्योंकि AI से इतनी अबंडेंस आएगी कि काम की जरूरत नहीं रहेगी. लेकिन खतरा ये है कि सिस्टम तैयार नहीं हैं. यह चेतावनी भारत जैसे देशों के लिए और भी गंभीर है, जहां युवा बेरोजगारी पहले से समस्या है. अगर AI इतनी तेजी से जॉब्स छीन लेगा, तो लाखों-करोड़ों लोग प्रभावित होंगे. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकारों को अभी से पॉलिसी बनानी चाहिए, स्किल डेवलपमेंट पर फोकस करना चाहिए, लेकिन डॉ. याम्पोलस्की मानते हैं कि रिट्रेनिंग काफी नहीं होगी.  

6 दिवसीय रोजगार मेले में मिलेगा करियर बनाने का मौका, बड़ी कंपनियाँ करेंगी सीधी भर्ती

रायपुर प्रदेश के युवाओं को निजी क्षेत्र में अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा संभाग स्तरीय रोजगार मेलों का आयोजन किया जा रहा है। यह रोजगार मेले 12 से 17 फरवरी 2026 तक छत्तीसगढ़ के विभिन्न संभागों में आयोजित होंगे। जारी कार्यक्रम के अनुसार 12 एवं 13 फरवरी को बिलासपुर संभाग में रोजगार मेला आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 14 और 15 फरवरी को दुर्ग संभाग में रोजगार मेले का आयोजन होगा। वहीं 16 एवं 17 फरवरी को सरगुजा और बस्तर संभाग में रोजगार मेले लगाए जाएंगे। इन रोजगार मेलों में निजी क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित कंपनियां हिस्सा लेंगी। कंपनियों के प्रतिनिधि मौके पर ही अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लेकर योग्य उम्मीदवारों का चयन करेंगे, जिससे युवाओं को सीधे रोजगार प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। रोजगार मेले में शामिल होने के इच्छुक अभ्यर्थी ई-रोजगार पोर्टल अथवा छत्तीसगढ़ रोजगार मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन पंजीयन और आवेदन कर सकते हैं। पंजीकृत उम्मीदवारों को रोजगार मेले के दौरान साक्षात्कार एवं चयन प्रक्रिया में शामिल होने की सुविधा प्रदान की जाएगी।

छत्तीसगढ़ में 15 हजार युवाओं को जल्द मिलेगी नौकरी

जांजगीर. भाजपा सरकार युवाओं के भरोसे पर पूरी तरह खरी उतरी है। पहले युवाओं का भविष्य असुरक्षित हो गया था और इंजीनियरिंग से उनका मोहभंग हो रहा था लेकिन इस साल स्थिति बदली है और इंजीनियरिंग की सीटों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को हुनरमंद बनाना सरकार की प्राथमिकता है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के युवा मांगने वाले नहीं, बल्कि देने वाले बनें। इसी दिशा में 28 से 31 जनवरी तक रायपुर में रोजगार मेला आयोजित किया जा रहा है जहां 15 हजार से अधिक युवाओं को ऑफर लेटर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सरकार हर सेक्टर में सक्रियता से काम कर रही है और अब तक करीब साढ़े 8 हजार करोड़ रुपये के एमओयू किए जा चुके हैं। इससे बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के युवा खेल के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जो प्रदेश के लिए गर्व की बात है। भ्रष्टाचार पर सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। आगे भी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में रोजगार, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में और भी बड़े कदम उठाए जाएंगे, ताकि छत्तीसगढ़ के युवाओं को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाया जा सके। कौशल विकास, रोजगार और तकनीकी शिक्षा मंत्री खुशवंत साहेब ने जांजगीर दौरे के दौरान यह जानकारी दी है।

केंद्र सरकार का गिफ्ट: पहाड़ी राज्यों के इंजीनियरों को PSU में जॉब, जानें सैलरी

केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसले के तहत देश के पहाड़ी राज्यों के स्थानीय इंजीनियरों को सार्वजनिक उपक्रम में काम करने का अवसर देने का निर्णय लिया है। सरकारी उपक्रम में पहली बार अस्थायी नौकरी दी जाएगी। सरकार का मकसद युवा इंजीनियरों को पेशेवर रूप से दक्ष बनाना है, जिससे वह राज्य को नई ऊंचाई तक ले जा सकें। इससे युवाओं को रोजगार और आधुनिक तकनीक का अनुभव मिलेगा, जिससे वे अपने राज्यों का विकास कर सकेंगे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लि. (एनएचएआईडीसीएल) प्रथम चरण में फरवरी में 64 सिविल इंजीनियरों के पदों पर भर्ती करेगा। यह भर्ती सिर्फ पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों के स्थानीय स्नातक के लिए आरक्षित होगी। एक अधिकारी ने बताया कि स्थानीय युवा इंजीनियर पहाड़ों में निर्माण के दौरान भौगोलिक चुनौतियों व स्थानीय पारिस्थितिकी को समझते हैं। उन्हें न केवल सरकार में रोजगार मिलेगा, बल्कि वे अत्याधुनिक तकनीक और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट का अनुभव भी हासिल कर सकेंगे। इसके बाद भविष्य में वे राज्य सरकारों के साथ मिलकर वहां का विकास कर सकेंगे। इससे स्थानीय प्रतिभाओं का बड़े शहरों की ओर होने वाला पलायन भी कम होगा। दुर्गम इलाकों में चल रहे राष्ट्रीय राजमार्गों, सुरंगों और पुलों के निर्माण में तेजी आएगी। 80 हजार तक मानदेय एनएचएआईडीसीएल स्थानीय सिविल इंजीनियर्स स्टेट स्पेसिफिक ग्रेजुएट स्कीम के तहत मानदेय के रूप में 70,000 रुपये से 80,000 रुपये प्रति माह भुगतान किया जाएगा। प्रति वर्ष वेतन में पांच फीसदी की वृद्धि होगी। शुरुआत में नियुक्ति दो साल के लिए होगी, जिसे प्रदर्शन के आधार पर एक साल और (कुल तीन वर्ष) बढ़ाया जा सकता है। अर्हता प्रदेश का डोमिसाइल (मूल निवास प्रमाण पत्र) होना अनिवार्य है। नए सिविल इंजीनियर स्नातक को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा। स्नातक अंतिम वर्ष के छात्र भी आवेदन कर सकते हैं। नियुक्ति के समय तक डिग्री पूरी होनी चाहिए। उम्मीदवार के पास सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक या समकक्ष विषय की डिग्री होनी चाहिए। यह डिग्री IITs, NITs या NIRF रैंकिंग (इंजीनियरिंग श्रेणी) में टॉप 100 में शामिल किसी अन्य संस्थान से प्राप्त होनी चाहिए। यदि उम्मीदवार अभी स्नातक की पढ़ाई पूरी कर रहा/रही है, तो स्नातक वर्ष या उससे ठीक पिछले वर्ष की NIRF रैंकिंग मान्य होगी। पात्रता से संबंधित शर्तें I. इस योजना के अंतर्गत किसी विशेष राज्य/केंद्र शासित प्रदेश (State/UT) के लिए विज्ञापित रिक्तियों में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का उसी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का स्थायी निवासी (डोमिसाइल) होना अनिवार्य है। II. नए स्नातकों को आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। जो छात्र अंतिम वर्ष में अध्ययनरत हैं, वे भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते कि वे कार्यभार ग्रहण करने से पहले स्नातक डिग्री पूरी कर लें। III. कार्य अनुभव: आवश्यक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने के बाद 0 से 2 वर्ष का कार्य अनुभव मान्य होगा। क्या काम करने होंगे 1. डिटेल प्राजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) और डिजाइन की समीक्षा करना। 2. भूमि अधिग्रहण, उपयोगिता स्थानांतरण में जिला अधिकारियों के साथ समन्वय। 3. निर्माण स्थल का दौरा और प्रोजेक्ट की गुणवत्ता व सुरक्षा की निगरानी। 4. अनुबंध प्रबंधन और तकनीकी पत्राचार में सहयोग।  

बालाघाट में पुलिस का एकल सुविधा केन्द्र बना बदलाव का माध्यम, नक्सल प्रभावित क्षेत्र लाभान्वित

बालाघाट पुलिस द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचालित एकल सुविधा केन्द्र की उल्लेखनीय सफलता एकल सुविधा केन्द्र के रोजगार मेले में 105 युवाओं को मिला रोजगार युवको ने हैदराबाद में किया प्रशिक्षण पूर्ण, L&T कंपनी ने देशभर के शहरों में किया पदस्थ भोपाल बालाघाट पुलिस द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें स्वरोजगार एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित “एकल सुविधा केन्द्र” लगातार महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ दर्ज कर रहा है। इसी क्रम में 36वीं बटालियन, कनकी में दिनांक 9 से 11 सितम्बर 2025 तक तीन दिवसीय रोजगार मेला आयोजित किया गया था, जिसमें लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (Larsen & Toubro Ltd.) द्वारा 105 युवाओं का प्रथम चरण में टेक्नीशियन पद पर चयन किया गया। कंपनी द्वारा चयनित सभी युवाओं को हैदराबाद में दो माह का निशुल्क प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें रहने, भोजन एवं यात्रा की संपूर्ण व्यवस्था भी कंपनी द्वारा ही की गई थी। अब इन सभी 105 युवाओं ने अपने प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है तथा उन्हें देश के विभिन्न बड़े शहरों में L&T कंपनी के तकनीशियन के रूप में पदस्थ कर किया गया है। इनमें मुंबई, पुणे, चेन्नई, बंगलुरु, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे औद्योगिक केंद्र शामिल हैं। यह उपलब्धि न केवल इन युवाओं के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि पूरे बालाघाट जिले के लिए प्रेरणास्रोत उदाहरण भी है। “एकल सुविधा केन्द्र” की यह पहल युवाओं को न केवल रोजगार दिलाने का माध्यम है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक ठोस कदम भी है। पुलिस प्रशासन का लक्ष्य है कि आने वाले समय में ऐसे रोजगार मेलों का नियमित आयोजन किया जाए ताकि अधिक से अधिक युवाओं को राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार के अवसर प्राप्त हों सकें। साथ ही, प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित की जाए जिससे वे स्थायी आजीविका की दिशा में अग्रसर हों। इस पहल ने बालाघाट पुलिस की छवि को केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था के रूप में ही  नहीं, बल्कि एक सामाजिक संरक्षक और विकास सहयोगी संस्था के रूप में स्थापित किया है। इस सफलता के साथ “एकल सुविधा केन्द्र” ने यह सिद्ध कर दिया है कि पुलिस और समाज के संयुक्त प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, समृद्धि और विकास का नया अध्याय लिखा जा सकता है।