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यूपी चुनाव 2027: सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर बढ़ी खींचतान

नई दिल्ली उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर INDIA गठबंधन के भीतर अभी से शह और मात का खेल शुरू हो गया है। कांग्रेस के नवनियुक्त उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने जिम्मेदारी संभालते ही समाजवादी पार्टी (सपा) के सामने 'बराबर-बराबर' सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग रख दी है। गौतम ने न सिर्फ आधी सीटों पर दावा ठोका, बल्कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती की जमकर तारीफ भी की जिसने यूपी की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक गौतम ने साफ-साफ कहा, "व्यक्तिगत रूप से मैं चाहूंगा कि गठबंधन में दोनों पार्टियों की बराबर की हिस्सेदारी हो। हालांकि, जब दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत होगी तब अंतिम फैसला होगा। मुझे पहले से कोई घोषणा करने का अधिकार नहीं है, लेकिन हम निश्चित रूप से आधी सीटों के लिए अपनी बात मजबूती से रखेंगे।" 403 सीटों का गणित उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। अगर इतिहास पर नजर डालें तो ठीक 10 साल पहले भी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था। उस समय सपा ने 298 और कांग्रेस ने 105 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि, कई सीटों पर दोनों के बीच 'फ्रेंडली फाइट' भी हुई थी और अंततः बीजेपी की प्रचंड लहर में वह गठबंधन बिखर गया था। इसके बाद दोनों दल लोकसभा चुनावों में साथ आए, जहां उन्हें बड़ी सफलता मिली। यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से सपा ने 62 पर चुनाव लड़कर 37 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस ने 17 में से 6 सीटों पर कब्जा जमाया। दावों और उम्मीदों का टकराव सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव के उत्साह से लबरेज कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में सपा से करीब 150 सीटों की मांग कर सकती है। शुरुआती संकेतों की मानें तो समाजवादी पार्टी कांग्रेस को 70 से 80 से ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं है। ऐसे में राजेंद्र पाल गौतम का 'बराबर हिस्सेदारी' वाला बयान सीधे तौर पर अखिलेश यादव की पार्टी पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि जब 2017 में सपा सत्ता में थी, तब भी उन्होंने कांग्रेस को 105 सीटें दी थीं तो इस बार उनका हिस्सा और बड़ा होना चाहिए। कांग्रेस रणनीतिकारों को लगता है कि चूंकि अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनने की रेस में हैं, इसलिए वे कांग्रेस को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाएंगे। उनका मानना है कि यदि कांग्रेस को गठबंधन में मजबूत भूमिका मिलती है तो वह सपा के पाले में दलित और ब्राह्मण वोटों का ट्रांसफर आसानी से करवा सकती है। मायावती पर डोरे और कांसीराम कार्ड राजेंद्र पाल गौतम ने बातचीत के दौरान बसपा प्रमुख मायावती को भी साथ आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा, "संविधान और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए बहुजन समाज के मुद्दों पर काम करने वाले सभी लोगों को इस दमनकारी मनुवादी सरकार के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।" मायावती की तारीफ करते हुए गौतम ने कहा, "बहनजी हमारे समाज की एक बड़ी और कद्दावर नेता हैं, हम उनका सम्मान करते हैं। वे हमेशा एक मजबूत नेता रही हैं। समझ नहीं आता कि आज उनकी क्या मजबूरियां हैं दिलचस्प बात यह है कि पिछले महीने ही राजेंद्र पाल गौतम अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ बिना किसी तय कार्यक्रम के लखनऊ में मायावती के घर पहुंचे थे, हालांकि तब उनकी मुलाकात नहीं हो पाई थी। चंद्रशेखर आजाद के बढ़ते कद को रोकने की रणनीति राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में दलित समुदाय से आने वाले सांसद चंद्रशेखर आजाद का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में दलित समुदाय के ही राजेंद्र पाल गौतम को यूपी का जिम्मा सौंपकर कांग्रेस एक तीर से दो निशाने साधना चाहती है। वह मायावती के छिटक रहे दलित वोट बैंक में सेंध लगाने के साथ-साथ चंद्रशेखर आजाद के बढ़ते प्रभाव को भी नियंत्रित करना चाहती है। यही वजह है कि अब कांग्रेस के कार्यक्रमों में मान्यवर कांसीराम की तस्वीरें भी दिखाई देने लगी हैं। भले ही राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच बेहतर तालमेल की वजह से अंत में कोई बीच का रास्ता निकल आए, लेकिन नए प्रभारी के इन बयानों ने समाजवादी पार्टी के भीतर असहजता जरूर पैदा कर दी है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महज 2 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि सपा ने 111 सीटें जीती थीं। अब देखना होगा कि जमीन पर कमजोर सांगठनिक ढांचे के बावजूद कांग्रेस का यह बराबर का दांव कितना कामयाब होता है।

कांग्रेस पर CPI(M) का हमला, विपक्षी गठबंधन में बढ़ा तनाव

नई दिल्ली इंडिया ब्लॉक की सोमवार (8 जून) को प्रस्तावित बैठक से ठीक पहले मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. द्रमुक (DMK) द्वारा कांग्रेस की मौजूदगी के कारण इस बैठक से दूर रहने की घोषणा के बाद अब CPI (M) ने भी कांग्रेस की कार्यशैली पर भारी नाराजगी जताई है. CPI(M) ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि केरल में उसके नेताओं द्वारा लगाए गए BJP के साथ ‘डील’ के आरोप गठबंधन की मूल भावना के खिलाफ हैं. उधर, सूत्रों का ये भी कहना है कि झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने से बाद से हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा भी नाखुश है. CPI(M) महासचिव एम.ए. बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा है. साथ ही इस पत्र की कई कॉपियां गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों को भी भेजी हैं. बेबी ने पत्र में राहुल, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बयानों पर ऐतराज जताया है. उन्होंने कहा कि केरल विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस ने बार-बार ये प्रचार किया कि CPI(M) और BJP के बीच राजनीतिक समझौता है तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच खास डील है. CPI(M) ने इसे विपक्षी गठबंधन की भावना के खिलाफ बताया है. माकपा नेता ने इन आरोपों को पूरी तरह से एक मनगढ़ंत और झूठी कहानी करार दिया है जिसे वो किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं कर सकते. उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को याद दिलाया कि केरल की धरती पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी के खिलाफ सीधे राजनीतिक लड़ाई लड़ते हुए माकपा ने अपने सैकड़ों समर्पित कार्यकर्ताओं को खोया है. BJP के खिलाफ बना था इंडिया ब्लॉक बेबी ने अपने पत्र में कहा कि INDIA ब्लॉक BJP के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई के लिए बना था और ऐसे वक्त में सहयोगी दलों पर ही संदेह जताना गठबंधन की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन आरोपों पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो 8 जून की गठबंधन बैठक से पहले ही एकता पर सवाल खड़े हो जाएंगे. कांग्रेस के रवैये पर कड़े सवाल उठाने के बावजूद CPI(M) ने विपक्षी एकजुटता और समन्वय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है. एमए बेबी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी संसद के अंदर मोदी सरकार की तानाशाही, सांप्रदायिक और जनविरोधी नीतियों का मजबूती से विरोध करने के लिए अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर काम करती रहेगी. DMK-AAP ने किया किनारा वहीं, दिल्ली में होने वाली इस रणनीतिक बैठक में ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और राहुल गांधी जैसे शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना है. हालांकि, कांग्रेस के साथ मतभेदों के चलते द्रमुक (DMK) के इस बैठक में शामिल होने की उम्मीद न के बराबर हैं. दूसरी ओर आम आदमी पार्टी ने भी इस बैठक से दूरी बना ली हैं, जिससे विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं. JMM भी नाखुश उधर, झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनावों में दो राज्यसभा सीटों में से एक पर कांग्रेस द्वारा अपने उम्मीदवार प्रणव झा की घोषणा करने पर जेएमएम भी कांग्रेस से उतना ही नाराज है. सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ जेएमएम राज्य की दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना चाहती थी, क्योंकि जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल है. शुक्रवार को जेएमएम नेतृत्व की बैठक के बाद पार्टी के कई नेताओं ने कहा कि पार्टी दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है. हालांकि, शनिवार को जेएमएम ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को एक सीट से अपना अधिकारिक उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा की. झामुमो के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने इसकी घोषणा की. 'TVK वैकल्पिक दोस्त' इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने गठबंधन में किसी भी तरह की फूट या बिखराव के दावों को पूरी तरह खारिज किया है. राउत ने कहा कि भले ही डीएमके ने इस बैठक से दूरी बना ली हो, लेकिन विपक्ष को तमिलनाडु में टीवीके (TVK) के रूप में एक मजबूत वैकल्पिक मित्र मिल गया है.

आज होगी इंडिया गठबंधन की अहम बैठक, सीट शेयरिंग पर हो सकता है फ़ैसला

पटना इंडिया गठबंधन में सीट शेटरिंग फॉर्मूला को लेक पिछले कुछ दिनों से जारी मंथन अब अंतिम चरण में हैं। रविवार को इंडिया गठबंधन के समन्वय समिति के अध्यक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पोलो रोड में अहम बैठक हुई। इसमें इंडिया गठबंधन के घटक दलों के सभी प्रमुख नेता शामिल हुए। आज फिर से इंडिया गठबंधन के सभी घटक दल पोलो रोड में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आवास पर बैठक करेंगे। इसके बाद सात अक्टूबर यानी कल तेजस्वी यादव संयुक्त प्रेस कॉफ्रेंस कर सीट शेयरिंग की घोषणा कर देंगे। अब इंडिया गठबंधन इस बार आठ दलों के साथ चुनावी मैदान में उतरेगा। इनमें कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई),  मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम), भाकपा माले, विकासशील इंसान पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी शामिल हैं। सूत्र बता रहे हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन में राजद के खाते में करीब 130, कांग्रेस को 55 सीट, वामदल को 35, वीआईपी को 20 सीटें मिल सकती है। हालांकि कुछ सीटों को लेकर अब भी खींचतान जारी है। संभावना है कि आज की बैठक में इस पर सभी दलों की सहमति बन जाए। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस की पार्टी रालोजपा राजद कोटे से पांच सीओं पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। सूत्र बता रहे हैं कि इंडिया गठबंधन की बैठक में 2020 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टियों में वोट प्रतिशत और सीटों के रिकॉर्ड को देखते हुए इस बार सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय हुआ है। ओवैसी को नहीं मिला अब तक जवाब इधर, AIMIM पार्टी के सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी को इंडिया गठबंधन अपने साथ रखेगा या नहीं? इस पर कोई बात अब तक नहीं हुई है। संभावना है कि आज की बैठक में इस मुद्दे पर बात हो। हालांकि, ओवैसी ने राजद से गठबंधन को लेकर कहा कि हमने उनके सामने प्रस्ताव रखा था और बीजेपी से लड़ने के लिए सिर्फ 6 सीटें मांगी थीं, लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।  

राजनीतिक घड़ी: बिहार में सीटों का बंटवारा तय होने की तारीख सामने आई

पटना बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों ही खेमों में सहयोगी दलों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। सहयोगी लगातार सीट बंटवारे पर दबाव बना रहे हैं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक औपचारिक बातचीत चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा के बाद ही शुरू होगी। आपको बता दें कि फिलहाल तारीखों का ऐलान नहीं हुआ। नवरात्रि की समाप्ति के बाद चुनाव आयोग की तरफ से कभी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसका ऐलान किया जा सकता है। एनडीए के छोटे सहयोगी दल पहले से ही सार्वजनिक रूप से अपनी मांगें उठा रहे हैं। एलजेपी (रामविलास) नेता अरुण भारती सोशल मीडिया पर सम्मानजनक हिस्सेदारी की माग कर रहे हैं और भाजपा व जदयू पर दबाव डाल रहे हैं। वहीं, हम (से.) प्रमुख जीतन राम मांझी ने भी अपनी अपेक्षाओं को खुले मंच से सामने रखा है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री व एलजेपी (रामिवालास) नेता चिराग पासवान और आरएलपी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की दिल्ली में मुलाकात हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने मगध–शाहाबाद क्षेत्र में पर्याप्त सीटें मिलने की इच्छा जताई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के दौरे पर थे। उन्होंने बैक टू बैक कई बैठकें कीं और रैलियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि दुर्गा पूजा के बाद एनडीए के सहयोगियों के बीच सीटों का बंटवारा कर लिया जाएगा। इंडिया गठबंधन में भी खींचतान इंडिया गठबंधन के भीतर कांग्रेस ने आरजेडी से जल्द सीटों पर समझौते को अंतिम रूप देने की मांग की है। सीपीआई (एमएल) ने 2020 में 19 सीटों पर चुनाव लड़ी और 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2024 लोकसभा चुनाव में सीट शेयरिंग में दो सीटें हासिल हुई। इस बार बड़ा हिस्सा चाहती है। वहीं, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने तो यहां तक कह दिया है कि यदि गठबंधन सत्ता में आता है तो उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। आरजेडी का क्या है रुख बिहार में महागठबंधन का अगुआ आरजेडी के सूत्रों के मुताबिक सहयोगी दलों के बीच औपचारिक बैठक और सीटों का बंटवारा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद ही होगा।

उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की तलाश जारी, रणनीति और गठजोड़ में उलझा समीकरण

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने जैसे ही उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए तारीखों की घोषणा की है, वैसे ही विपक्षी INDIA अलायंस की चिंता बढ़ गई है। विपक्षी खेमे के लिए इस पद पर उम्मीदवार के लिए चेहरे की तलाश भी कठिन चुनौती बन गई है क्योंकि विपक्षी दलों को पता है कि संसद के दोनों सदनों में संख्या बल के आधार पर उनकी स्थिति बहुत कमजोर है। बावजूद इसके विपक्ष उपराष्ट्रपति चुनाव में एक मजबूत और वैचारिक चेहरे को उम्मीदवार के रूप में उतारने की कोशिश कर सकता है, ताकि वह देश को राजनीतिक संदेश दे सके कि वह सत्तारूढ़ भाजपा और उसके उम्मीदवार से दो-दो हाथ करने को तैयार है और उसकी विचारधारा से मुकाबला करने के लिए एकजुट खड़ा है। चूंकि संसद के दोनों सदनों के सदस्य ही उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं और वहां विपक्षी सांसदों की संख्या कम है। इसलिए इंडिया अलायंस उपराष्ट्रपति चुनाव का इस्तेमाल पिछड़े और अल्पसंख्यकों, किसानों, बुद्धिजीवियों और नागरिक समाज सहित हाशिए पर पड़े वर्गों को लामबंद करने और उनके बीच स्पष्ट संदेश देने की कोशिश करेगा। इसीलिए विपक्ष एक ऐसे वैचारिक चेहरे को साझा उम्मीदवार के तौर पर तलाश कर रहा है, जो उसके इस राजनीतिक संदेश को फैला सके। 7 अगस्त को राहुल गांधी ने बुलाई बैठक बता दें कि इंडिया अलायंस की गुरुवार (7 अगस्त) को एक अहम बैठक होने वाली है, जिसमें बिहार विधानसभा चुनाव और राज्य की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का मुद्दा उठने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में उपराष्ट्रपति चुनाव के संभावित उम्मीदवार पर भी चर्चा होने की संभावना है। राहुल दे सकते हैं प्रजेंटेशन TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में नेता विपक्ष राहुल गांधी मतदाता सूचियों पर कांग्रेस की तरफ से की गई एक रिसर्च पर प्रजेंटेशन दे सकते हैं। दो दिन पहले ही उन्होंने उस रिसर्च के बारे में कहा था कि उनके हाथ एटम बम लगा है। राहुल ने कहा है कि इससे बिना किसी संदेह के यह साबित होता है कि भाजपा की मदद के लिए मतादाता सूची के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। दरअसल, जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति पद का चुनाव होना है। पिछले महीने जस्टिस शेखर यादव और जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पर नोटिस को स्वीकार करने के अपने फैसले पर सरकार के साथ कथित टकराव के बाद धनखड़ ने 21 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति का चुनाव समय से पहले हो गया है।