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छत्तीसगढ़ की पंचायतों में 24 जून को ग्राम सभा का आयोजन, विकास योजनाओं पर होगी चर्चा

रायपुर. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों को ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीण विकास, पंचायतों की वित्तीय स्थिति, आवास योजनाओं, रोजगार, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय विकास कार्यों जैसे जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के सभी ग्राम पंचायतों में 24 जून को ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। ग्राम सभाओं में आवास प्लस 2.0 की स्थायी प्रतीक्षा सूची सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी। पात्र हितग्राहियों की प्राथमिकता सूची होगी तैयार ग्राम सभा में विशेष रूप से आवास प्लस 2.0 सर्वेक्षण से प्राप्त सिस्टम जनरेटेड स्थायी प्रतीक्षा सूची (पीडब्ल्यूएल) का अवलोकन एवं वाचन किया जाएगा। ग्राम सभा द्वारा शासन की मार्गदर्शिका एवं एसओपी के अनुसार पात्र हितग्राहियों की प्राथमिकता सूची तैयार की जाएगी तथा ग्रामीणों से प्राप्त दावे-आपत्तियों को नियमानुसार प्राप्त कर निराकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ग्राम सभा से अनुमोदन के बाद स्थायी प्रतीक्षा सूची को आवास सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा। वीबी जी राम जी के संबंध में दी जाएगी जानकारी ग्राम सभा में पूर्व बैठक के निर्णयों के पालन प्रतिवेदन, पंचायतों के आय-व्यय की समीक्षा एवं अनुमोदन, विभिन्न योजनाओं से स्वीकृत कार्यों की प्रगति, तथा अन्य विकासात्मक विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। ग्राम सभाओं में विकसित भारत, रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी जी राम जी) के संबंध में भी ग्रामीणों को जानकारी दी जाएगी तथा इसके क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने, बेरोजगारी भत्ते के बेहतर प्रावधान, समय पर मजदूरी भुगतान और ग्राम सभा आधारित विकास योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। ग्राम सभा में ज्यादा से ज्यादा सहभागिता की अपील प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों से ग्राम सभा में अधिक से अधिक ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा ग्राम विकास से जुड़े निर्णयों में जनभागीदारी बढ़ाने की अपील की गई है। ग्राम सभा में पिछली बैठकों में पारित प्रस्तावों की समीक्षा, पंचायतों के आय-व्यय का अनुमोदन, विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति, आवास प्लस 2.0 की प्रतीक्षा सूची तथा पंचायत संपत्तियों के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0 के परिणामों को भी ग्रामीणों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों को सतर्कता और समन्वय के निर्देश

भोपाल  पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा की अध्‍यक्षता में पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक की वीडियों कॉफ्रेंस आयोजित की गई। बैठक में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने सभी जोनल पुलिस महानिरीक्षकों एवं पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि मोहर्रम, ताजिया जुलूसों, अन्य धार्मिक आयोजनों, महामहिम राष्ट्रपति के प्रस्तावित भ्रमण तथा वीआईपी कार्यक्रमों के दौरान कानून-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था एवं साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा योजना तैयार कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि आगामी त्योहारों एवं आयोजनों के दौरान परंपरागत रूप से संवेदनशील क्षेत्रों, जुलूस मार्गों, धार्मिक स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जाए। शांति समितियों, धर्मगुरुओं एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद स्थापित कर सामाजिक समरसता एवं आपसी सौहार्द का वातावरण बनाए रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित होने वाली भ्रामक सूचनाओं, अफवाहों एवं आपत्तिजनक सामग्री पर सतत निगरानी रखी जाए तथा किसी भी प्रकार की भड़काऊ अथवा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधि के विरुद्ध त्वरित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। संवेदनशील क्षेत्रों में खुफिया तंत्र को सक्रिय रखते हुए संभावित चुनौतियों का समय रहते आकलन कर आवश्यक निवारक कदम उठाए जाएं। डीजीपी ने कहा कि उपलब्ध पुलिस बल, दंगा नियंत्रण उपकरणों, वाहनों, संचार संसाधनों, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की समीक्षा कर उन्हें पूर्णतः सक्रिय एवं तैयार रखा जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे स्थापित हैं, वहां उनकी कार्यशीलता सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी स्थिति में महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों एवं पुलिस प्रतिष्ठानों की निगरानी व्यवस्था बाधित न होने पाए। बैठक में महामहिम राष्ट्रपति के प्रस्तावित मध्यप्रदेश भ्रमण सहित अन्य वीआईपी एवं वीवीआईपी कार्यक्रमों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल, रूट सुरक्षा, एंटी-सबोटेज जांच, यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण एवं समन्वित सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। संबंधित विभागों एवं एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर सभी सुरक्षा व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण करने पर बल दिया गया। बैठक में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक गुप्‍तवार्ता  ए.साईं मनोहर, उप पुलिस महानिरीक्षक  तरूण नायक, पीएसओ टू डीजीपी डॉ. विनीत कपूर, एसओ टू डीजीपी  मलय जैन, पुलिस अधीक्षक एटीएस  प्रणय नागवंशी, एवं एआईजी मती विनीता मालवीय उपस्थित रहे।  

झारखंड सरकार का बड़ा कदम, JSW स्टील को खनन पट्टा; बोकारो-धनबाद बेल्ट में बढ़ेंगी संभावनाएं

बोकारो. झारखंड सरकार ने जिले के चंदनकियारी स्थित पर्वतपुर कोल ब्लॉक और सीतानाला कोल ब्लॉक के खनन पट्टा को स्वीकृत कर लिया है। इससे पूरे क्षेत्र में उत्साह और जश्न का माहौल है। लंबे समय से लंबित इस परियोजना को मंजूरी मिलने के साथ ही स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं में नई आशा जगी है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि कोयला खनन शुरू होने से चंदनकियारी में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। विधायक उमाकांत रजक ने इसे ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताते हुए कहा कि इससे रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना के विकास और स्थानीय व्यापार-व्यवसाय को बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला चंदनकियारी को विकास और आत्मनिर्भरता की नई दिशा देगा। विधायक का कहना है केि विकास के कार्यो से संबंधित फाइलों की धूल हटाने की कोशिश कर रहा हूं। विदित हो कि यह दोनों कोल ब्लाक जेएसडब्ल्यू स्टील को वर्ष 2023 में नीलामी के माध्यम से दिया गया था। तब से खनन पट्टा एवं अन्य स्वीकृति को लेकर उत्पादन प्रारंभ नहीं हो पा रहा था। अब खनन पट्टा मिलने के बाद जल्द ही उत्पादन प्रारंभ होने की संभावना है। अब निवेश, रोजगार और विकास पर नजर कैबिनेट की स्वीकृति के बाद पर्वतपुर कोल ब्लॉक के 2174.52 एकड़ तथा सीतानाला कोल ब्लॉक के लगभग 792 एकड़ क्षेत्र में खनन गतिविधियां शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा। खनन कार्य शुरू होने के साथ परिवहन, मशीनरी, ठेका कार्य, छोटे व्यापार, होटल और सेवा क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके अलावा सड़क, बिजली, जलापूर्ति और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों को अब उम्मीद है कि वर्षों से कागजों में अटकी परियोजनाएं धरातल पर उतरेंगी और चंदनकियारी कोयला आधारित औद्योगिक विकास के नए केंद्र के रूप में उभरेगा। वर्षों के इंतजार के बाद खुला रास्ता: पर्वतपुर कोल ब्लॉक का सफर पिछले कई वर्षों से उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 2020 में केंद्र सरकार ने गजट अधिसूचना जारी कर इसके संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) को सौंपने का निर्णय लिया था। उस समय यह माना गया था कि बंद पड़ी खदान के चालू होने से करीब चार हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकेगा। लगभग नौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस कोल ब्लॉक को भूमिगत (अंडरग्राउंड) खनन के रूप में विकसित करने की योजना थी ताकि आसपास के गांवों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। हालांकि, कोल ब्लॉक आवंटन नीति, कानूनी प्रक्रियाओं और स्वामित्व हस्तांतरण की जटिलताओं के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। पहले सेल इसकी देखरेख करता रहा, बाद में ब्लॉक बीसीसीएल के पास पहुंचा और अंततः वर्ष 2023 में जेएसडब्ल्यू स्टील ने नीलामी के माध्यम से इसे हासिल कर लिया। पर्वतपुर-सीता नाला परियोजना को संचालन की मंजूरी, दुगदा वाशरी को मिलेगा कच्चा कोयला सरकार से संचालन की अनुमति मिलने के बाद जेएसडब्ल्यू स्टील की पर्वतपुर एवं सीता नाला कोकिंग कोल परियोजना में उत्पादन शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। परियोजना से निकाले जाने वाले कोकिंग कोयले का उपयोग दुगदा कोल वाशरी में किया जाएगा, जिसका संचालन भी हाल ही में जेएसडब्ल्यू स्टील को सौंपा गया है। जानकारी के अनुसार, पांच वर्षों से अधिक समय से बंद पड़ी दुगदा कोल वाशरी को पुनः चालू करने की तैयारी तेज हो गई है। कंपनी वाशरी की मशीनरी और आधारभूत संरचना का आकलन कर रही है। वाशरी की वर्तमान क्षमता सालाना दो मिलियन टन वाश्ड कोल उत्पादन की है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर चार मिलियन टन तक ले जाने की योजना है। पर्वतपुर और सीता नाला परियोजना से मिलने वाला कच्चा कोयला दुगदा वाशरी के लिए स्थायी फीड का काम करेगा। इससे वाशरी के नियमित संचालन में मदद मिलेगी और कोकिंग कोल की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि खदान और वाशरी दोनों के संचालन की जिम्मेदारी एक ही कंपनी के पास होने से उत्पादन, परिवहन और प्रसंस्करण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी। दुगदा वाशरी के पुनः संचालन से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ इस्पात उद्योग को गुणवत्तापूर्ण वाश्ड कोकिंग कोल उपलब्ध होगा। इससे आयातित वाश्ड कोल पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी। बोकारो-धनबाद कोल बेल्ट में इसे एक महत्वपूर्ण औद्योगिक विकास के रूप में देखा जा रहा है।

कृषि मंत्री विजय सिन्हा की घोषणा: स्कूलों में सॉयल टेस्टिंग लैब से बढ़ेगी वैज्ञानिक सोच और कृषि जागरूकता

पटना बिहार के 629 सरकारी विद्यालयों में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना की जाएगी। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने यह घोषणा की है। सोमवार को कृषि भवन में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना तथा मुख्यमंत्री बागवानी मिशन अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने, छात्रों में अनुसंधान एवं प्रयोगात्मक क्षमता विकसित करने और किसानों को मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने संबंधी योजनाओं पर चर्चा हुआ। कृषि मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना के अंतर्गत संचालित स्कूल सॉयल हेल्थ प्रोग्राम के तहत राज्य के कुल 160 पीएम श्री एवं राजकीय विद्यालयों में मिनी सॉयल टेस्टिंग प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा चुकी है। इस पहल का उद्देश्य विद्यालय स्तर पर छात्रों को मृदा परीक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया से जोड़ना तथा कृषि एवं पर्यावरण के प्रति उनकी समझ को विकसित करना है। अब आगे वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस कार्यक्रम का व्यापक विस्तार करते हुए राज्य के कुल 629 पीएम श्री एवं राजकीय विद्यालयों में मिनी सॉयल टेस्टिंग प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी और इस योजना को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा। इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से कक्षा 7, 8, 9 एवं 11 के छात्र-छात्राएं मृदा परीक्षण, नमूना संग्रहण तथा मृदा स्वास्थ्य संबंधी व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लेंगे। इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, तकनीकी कौशल एवं अनुसंधान की प्रवृत्ति विकसित होगी। एक लाख रुपये की लगात आएगी कृषि मंत्री ने बताया कि प्रत्येक विद्यालय में मिनी सॉयल टेस्टिंग प्रयोगशाला की स्थापना के लिए एक लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है, जिसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार तथा 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी। भारत सरकार द्वारा प्रत्येक विद्यालय को 50 मिट्टी नमूनों का संग्रहण, परीक्षण तथा किसानों के बीच मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण का लक्ष्य दिया गया है। उन्होंने कहा कि पहल छात्रों, विद्यालयों और किसानों के बीच एक प्रभावी समन्वय स्थापित करेगी तथा संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना और ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने की पहल कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता को नई दिशा प्रदान करेगी। छात्रों को इसका लाभ सबसे ज्यादा मिले समीक्षा बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने चतुर्थ कृषि रोड मैप के अंतर्गत तैयार डीपीआर के आधार पर संचालित ड्रैगन फ्रूट विकास योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के अंतर्गत पिछले तीन वित्तीय वर्षों के लिए कुल तीन करोड़ रुपये की लागत से इस योजना के क्रियान्वयन को स्वीकृति प्रदान की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत 60 लाख रुपये की राशि के अंतर्गत कुल 13.62 लाख रुपये की निकासी और व्यय को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया ताकि किसानों और विद्यार्थियों को इसका अधिकतम लाभ मिल सके।  

लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए AI प्रशिक्षण सत्र आयोजित

रायपुर  लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक से अवगत कराने तथा शासकीय कार्यों में नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से  Artificial Intelligence (AI) संबंधी प्रशिक्षण सत्र का आयोजन कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया।         प्रशिक्षण सत्र का आयोजन अवर सचिव  अनुभव शर्मा के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों को AI (Artificial Intelligence) की कार्यप्रणाली, उपयोगिता तथा विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रभावी इस्तेमाल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। सत्र में ।प् के माध्यम से कार्यों को अधिक सरल, प्रभावी एवं समयबद्ध बनाने के तरीकों पर प्रकाश डाला गया। उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रशिक्षण में उत्साहपूर्वक भाग लेकर आधुनिक तकनीक की उपयोगी जानकारी प्राप्त की।            कार्यक्रम का उद्देश्य शासकीय कार्यप्रणाली में नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना तथा अधिकारियों- कर्मचारियों को डिजिटल दक्षताओं से सशक्त बनाना रहा। इस अवसर पर राज्यपाल के विधिक सलाहकार मती सत्यभामा अजय दुबे, उप सचिव सु निधि साहू,  सुधीर सुलतानिया,  लक्षित त्रिलोक सेठिया,  अनूप अग्रवाल एवं लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

जम्मू-कश्मीर और पंजाब पुलिस की बड़ी रेड, हथियार व ड्रग्स के साथ 2 आरोपी दबोचे गए

अमृतसर. आज सुबह अमृतसर की ड्रीम सिटी कॉलोनी में जम्मू-कश्मीर पुलिस और अमृतसर रूरल पुलिस ने ज्वाइंट सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान पुलिस ने एक फ्लैट पर रेड करके 2 युवकों को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक मौके पर एक AK-47 राइफल, एक पिस्टल और करीब 500 ग्राम नशीला पदार्थ बरामद होने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, जम्मू पुलिस को एक वांछित व्यक्ति के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर पुलिस टीम उसे ट्रेस करते हुए अमृतसर की ड्रीम सिटी कॉलोनी पहुंची। इसके बाद जम्मू पुलिस और अमृतसर रूरल पुलिस ने मिलकर फ्लैट पर रेड की। अमृतसर रूरल पुलिस के कई सीनियर अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके को घेरकर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। घटना के बाद ड्रीम सिटी कॉलोनी में डर और दहशत का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि किराए के फ्लैट में हथियार और ड्रग्स मिलना सुरक्षा के लिहाज से बहुत बड़ी चिंता की बात है। जानकारी के मुताबिक, यह परिवार ड्रीम सिटी कॉलोनी में किराए पर रह रहा था। पुलिस फ्लैट के मालिक से भी पूछताछ कर रही है कि किराएदारों का कन्फर्मेशन और पुलिस वेरिफिकेशन हुआ था या नहीं। इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए DSP यादविंदर सिंह ने कहा कि यह जम्मू-कश्मीर और पंजाब पुलिस का ज्वाइंट ऑपरेशन था। उन्होंने कहा कि जम्मू पुलिस के इनपुट के आधार पर ड्रीम सिटी के एक घर में रेड की गई, जहां से 2 युवकों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार युवकों की पहचान शेखपुरा निवासी सूरजदीप सिंह और देवीदासपुरा निवासी हरप्रीत सिंह के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों युवकों की गाड़ियां भी कब्जे में ले ली हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।

यूएसएससी ने पाँच वर्षों में खरीद, अनुबंध और विक्रेता प्रबंधन में स्थापित की नई पहचान

नवा रायपुर एनटीपीसी के यूनिफाइड शेयर्ड सर्विस सेंटर (यूएसएससी) का स्थापना दिवस 15 जून 2026 को नवा रायपुर स्थित परिसर में उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। वर्ष 2021 में स्थापित यूएसएससी आज एनटीपीसी की महत्वपूर्ण व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्रीकृत संचालन का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जो खरीद एवं अनुबंध प्रक्रियाओं, विक्रेता प्रबंधन तथा विभिन्न सेवाओं के प्रभावी निष्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए एनटीपीसी के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (पश्चिम क्षेत्र-II) एवं कार्यकारी निदेशक-यूएसएससी  नीरज जलोटा ने संगठन की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछले पाँच वर्षों में यूएसएससी ने असाधारण दृढ़ता और कार्यकुशलता का परिचय देते हुए एनटीपीसी के रणनीतिक एवं परिचालन लक्ष्यों को पूरा करने में एक मजबूत स्तंभ के रूप में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के माध्यम से खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि, सक्रिय रेट कॉन्ट्रैक्ट और पंजीकरणों में बढ़ोतरी तथा विक्रेता आधार के विस्तार जैसी उपलब्धियां यूएसएससी की निरंतर प्रगति को दर्शाती हैं।  जलोटा ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजिटल एवं सूचना प्रौद्योगिकी के व्यापक एकीकरण तथा रेट कॉन्ट्रैक्ट और विक्रेता पंजीकरण के विस्तार पर विशेष बल दिया। समारोह के दौरान उत्कृष्ट कार्य निष्पादन करने वाले यूएसएससी के 40 कर्मचारियों को प्रशंसा प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस सम्मान ने कर्मचारियों के उत्साह और मनोबल को नई ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम की शुरुआत औपचारिक केक कटिंग समारोह से हुई, जिसके बाद कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत इन-हाउस स्कीट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। रंगारंग प्रस्तुतियों ने समारोह को यादगार बना दिया और कर्मचारियों के बीच टीम भावना को और मजबूत किया। इस अवसर पर  राम भजन मलिक, कार्यकारी निदेशक (ऐश मैनेजमेंट एवं एनआई),  बिद्या नंद झा, कार्यकारी निदेशक (ऑपरेशन सर्विसेज),  हर्ष आहूजा, कार्यकारी निदेशक (यूएसएससी सी एंड एम) सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संगठन की उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर भी चर्चा की गई।

18 वर्ष पूरे करने वाले युवाओं के लिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने का अवसर

रांची  एक अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष पूरे करने वाले युवा अपने पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 गणना चरण (30 जून से 29 जुलाई) तक फॉर्म-6 बीएलओ को जमा कर सकेंगे। हालांकि, यह फॉर्म और दस्तावेज दावा एवं आपत्ति अवधि (पांच अगस्त से चार सितंबर) के दौरान भी जमा किया जा सकेगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, वैसे व्यक्ति जो झारखंड या भारत के किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें जन्म तिथि और जन्म स्थान के आधार पर स्वयं, स्वयं और माता-पिता में से किसी एक तथा स्वयं और दोनों माता-पिता के लिए घोषणा पत्र और आवश्यक दस्तावेज के साथ फॉर्म-6 जमा करना होगा आवेदक दस्तावेज के रूप में पिछले एसआईआर में तैयार मतदाता सूची का वह एक्सट्रैक्ट पेज भी जमा कर सकता है, जिसमें उसके माता-पिता का नाम है। यह एक्सट्रैक्ट पेज निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी, सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी तथा बीएलओ के पास उपलब्ध हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, झारखंड की वर्ष 2026 की मतदाता सूची में सम्मिलित वैसे मतदाता जो वर्ष 2003 की मतदाता सूची से अपना या अपने माता-पिता की मैपिंग पूरा कर चुके हैं, लेकिन वह झारखंड के किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित होना चाहते हैं, उन्हें कोई दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं है। इन्हें दावा और आपत्ति अवधि के दौरान केवल फॉर्म-8 जमा करना होगा। इसी तरह, झारखंड से बाहर की वर्तमान मतदाता सूची में सम्मिलित मतदाता, जो झारखंड के किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित होना चाहते हैं, उन्हें दावा और आपत्ति अवधि के दौरान जन्म तिथि और जन्म स्थान के आधार पर स्वयं, स्वयं और माता-पिता में से किसी एक अथवा स्वयं और दोनों माता-पिता के लिए घोषणा पत्र और आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म-8 जमा करना होगा। यह आवेदक भी दस्तावेज के रूप में पिछले एसआईआर में तैयार मतदाता सूची का उद्धरण पृष्ठ जमा कर सकता है, जिसमें उसके माता-पिता का नाम सम्मिलित है।

वर्णिका शर्मा ने एम्स रायपुर पहुंचकर जाना बालिका का हाल, उपचार प्रक्रिया हुई शुरू

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने गंभीर रूप से बीमार नाबालिग जोगेश्वरी कड़की मामले में संज्ञान लेते हुए उसके बेहतर उपचार के लिए पहल की, जिसके चलते बालिका का एम्स रायपुर में इलाज शुरू हुआ है। उल्लेखनीय है कि बालिका की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी प्राप्त होने पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने 5 जून को दंतेवाड़ा कलेक्टर को पत्र लिखकर बालिका के बेहतर उपचार के लिए तत्काल एम्स रायपुर भेजने और आवश्यक चिकित्सकीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। उक्त पत्र की प्रतिलिपि जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ), दंतेवाड़ा को भी आवश्यक कार्यवाही के लिए प्रेषित की गई थी। इसके अतिरिक्त डॉ. वर्णिका शर्मा ने एम्स रायपुर के डायरेक्टर को भी पत्र लिखकर बालिका को समुचित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था। आयोग के सतत प्रयासों, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के समन्वय से बालिका को उपचार के लिए एम्स रायपुर लाया गया। 15 जून को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा स्वयं एम्स रायपुर पहुंचीं और उपचाररत बालिका से मुलाकात कर उसका हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने बालिका एवं उसके परिजनों से चर्चा कर स्वास्थ्य स्थिति, उपचार संबंधी व्यवस्थाओं और उनकी आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की। दौरे के दौरान डॉ. वर्णिका शर्मा ने एम्स रायपुर के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट एवं संबंधित चिकित्सक दल से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बालिका की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, उपचार की प्रगति, किए जा रहे चिकित्सकीय परीक्षणों तथा आगामी उपचार योजना के संबंध में जानकारी प्राप्त की। चिकित्सकों ने अवगत कराया कि बालिका को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग प्रतिबद्ध इस अवसर पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने चिकित्सकीय दल से बालिका के उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहने देने तथा उसे सर्वोत्तम संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बालिका के स्वास्थ्य एवं उपचार से जुड़ा यह मामला आयोग की प्राथमिकता में है। आयोग द्वारा उपचार प्रक्रिया की सतत निगरानी की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर आयोग की ओर से हरसंभव सहयोग एवं समन्वय उपलब्ध कराया जाएगा। डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होना उसका अधिकार है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग बच्चों के अधिकारों की रक्षा एवं उनके समग्र कल्याण के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

गुणवत्ता और समयसीमा पर विशेष जोर, लंबित परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने पर चर्चा

रायपुर छत्तीसगढ़ में ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत और सुगम बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत राज्य स्तरीय स्थायी समिति की 28वीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने ग्रामीण सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता न करने और कार्यों में तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए हैं। सर्वे और क्लीयरेंस पहले, निर्माण बाद में           मुख्य सचिव ने बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए अधिकारियों को कार्यप्रणाली बदलने के निर्देश दिए। कोई भी सड़क बनाने से पहले उसका जमीनी स्तर पर व्यापक सर्वे किया जाए। सड़क निर्माण शुरू होने से पहले ही भूमि अधिग्रहण और फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन विभाग की अनुमति) से जुड़े सभी कानूनी व प्रशासनिक कार्य अनिवार्य रूप से पूरे कर लिए जाएं। जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने के कारण जो ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, उनका सुधार और मरम्मत कार्य प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने को कहा गया है। PMGSY फेस-4& बिना सड़क वाली सभी बसाहटें जुड़ेंगी         बैठक का सबसे अहम फैसला आगामी चरणों को लेकर रहा। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि पीएमजीएसवाय फेस-4 के अंतर्गत राज्य की ऐसी सभी बसाहटों को चिन्हित किया जाए जहां अब तक पक्की सड़कें नहीं पहुंची हैं। एक व्यापक कार्ययोजना तैयार कर इन सभी बसाहटों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के सहयोग से बनीं 52 सड़कें          बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने अब तक की वित्तीय और भौतिक प्रगति का ब्योरा पेश किया कि राज्य में पीएमजीएसवाय फेस-1, 2 और 3 के तहत अब तक 8 हजार 358 सड़कें और लगभग 447 पुल-पुलिया बनाए जा चुके हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान बस्तर संभाग के धुर नक्सल प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के सहयोग से 52 अपूर्ण सड़कों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इसके अलावा फेस-3 के तहत 31 बड़े पुलों का निर्माण भी पूरा हुआ। पीएम जनमन (PM JANMAN) योजना की प्रगति          भारत सरकार द्वारा निर्धारित 1,372 किलोमीटर लक्ष्य के मुकाबले राज्य में 1,517 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PGVT) की 872 बसाहटों के लिए स्वीकृत 807 सड़कों में से 366 सड़कों का काम पूरा हो चुका है, जबकि 429 सड़कों पर काम तेजी से चल रहा है।           इस उच्च स्तरीय बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, गृह विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव एवं खनिज सचिव श्री पी. दयानंद, आवास एवं पर्यावरण सचिव श्री अंकित आनंद, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सचिव श्री अब्दुल कैसर अब्दुल हक और छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के सीईओ श्री भीम सिंह सहित वन, परिवहन, लोक निर्माण, वित्त विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।