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1 जुलाई तक आवेदन, सर्च कमेटी करेगी हरियाणा आयोग के नए पदों पर चयन

 चंडीगढ़  हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग में मुख्य आयुक्त के साथ ही आयुक्त के एक पद पर नियुक्ति की जाएगी। पहली जुलाई तक आवेदन किए जा सकते हैं। पात्र उम्मीदवारों के नामों पर विचार के लिए प्रदेश सरकार ने सर्च कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी वैधानिक समिति को अपनी सिफारिशें भेजेगी। पिछले महीने आयोग के मुख्य आयुक्त पद से सेवानिवृत्त हुए रिटायर्ड आइएएस टीसी गुप्ता के बाद मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी यह जिम्मेदारी अतिरिक्त कार्यभार के रूप में संभाल रहे हैं।मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार आयोग में एक मुख्य आयुक्त तथा चार आयुक्त नियुक्त किए जा सकते हैं। मुख्य आयुक्त पद के लिए हरियाणा के मुख्य सचिव अथवा केंद्र सरकार के सचिव स्तर एवं समकक्ष पद पर कार्यरत या सेवानिवृत्त अधिकारी पात्र हैं। आयुक्त का रिक्त पद हरियाणा सरकार के ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारियों में से भरा जाएगा, जिन्होंने प्रशासनिक सचिव अथवा राज्य सेवा में समकक्ष पद एवं दर्जा धारण किया हो। हरियाणा काडर के अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी भी इस पद के लिए पात्र होंगे। चयनित अभ्यर्थी पदभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि अथवा 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो, पद पर कार्य करेंगे। इस पद पर पुनर्नियुक्ति का प्रविधान नहीं है। वेतन, भत्ते एवं सेवा शर्तें हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम 2014 तथा 28 जून 2019 को किए गए संशोधनों के अनुसार लागू होंगी। पात्र एवं इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित प्रारूप में अपने आवेदन सामान्य प्रशासन विभाग के आयुक्त एवं सचिव के कार्यालय में पहली जुलाई तक जमा करवा सकते हैं। केंद्र अथवा राज्य सरकार में कार्यरत अधिकारियों को अपने आवेदन उचित माध्यम से भेजने होंगे।

मध्य प्रदेश सरकार को झटका, SPE विंग पर RTI लागू; सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त की अधिसूचना

भोपाल   सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने उस सरकारी अधिसूचना को रद कर दिया है, जिसके जरिए लोकायुक्त के स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) को RTI कानून के दायरे से बाहर रखा गया था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली एजेंसी को इस तरह की छूट देना कानून के अनुरूप नहीं है। 'खुफिया एवं सुरक्षा संगठन' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) मुख्य रूप से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामलों की जांच करती है। ऐसे में इसे RTI अधिनियम की धारा 24(4) के अंतर्गत आने वाले 'खुफिया एवं सुरक्षा संगठन' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। RTI के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार ने अधिसूचना के माध्यम से RTI कानून में निर्धारित सीमाओं से आगे बढ़कर SPE को छूट देने का प्रयास किया था, जो विधिसम्मत नहीं है। न्यायालय ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्टाचार की जांच करने वाली संस्थाओं को RTI के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला बरकरार इस मामले पर फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 20 दिसंबर 2021 के फैसले को बरकरार रखा है. दरअसल, इससे पहले राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें एसपीई को आरटीआई से बाहर रखना गलत माना गया. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश लोकायुक्त की SPE ब्रांच से भी RTI द्वारा जानकारियां मांगी जा सकेंगी।  मध्य प्रदेश सरकार का 2011 का आदेश रद्द सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी और एएस चंदूरकर की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसमें लोकायुक्त की स्पेशल पुलिस एस्टेबलिशमेंट (एसपीई) को आरटीआई कानून के दायरे से बाहर किया गया था. मध्य प्रदेश सरकार ने 25 अगस्त 2011 को ये अधिसूचना जारी की थी. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ये अधिसूचना "कानून के हिसाब से गलत" है।  कोर्ट ने आगे कहा, "हमारी राय है कि मध्य प्रदेश राज्य के GAD (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट) का 25.08.2011 का नोटिफिकेशन, जिसमें SPE को 2005 के एक्ट के सेक्शन 24(4) के तहत उसके दायरे से बाहर करने की मांग की गई थी, कानून के हिसाब से गलत होने के कारण रद्द किया जा सकता है, क्योंकि इसमें उन मामलों के लिए भी प्रावधान है जो 1947 के एक्ट के सेक्शन 7 के तहत नहीं आते हैं।  क्यों उठी लोकायुक्त SPE पर आरटीआई की मांग? दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत याचिकाकर्ता कामता प्रसाद मिश्रा के मामले से हुई. कामता प्रसाद मिश्रा मध्य प्रदेश के कटनी जिले के माधव नगर थाने के प्रभारी थे. 11 अप्रैल 2017 को उनपर भ्रष्टाचार मामले में एफआईआर हुई. इसके बाद 2020 में अभियोजन की स्वीकृति मिली. इस दौरान कामता प्रसाद मिश्रा ने आरटीआई आवेदन दायर कर लोकायुक्त से जानकारियां मांगी, जिसे SPE ने खारिज कर दिया।  हाईकोर्ट का खटखटाया दरवाजा इसके बाद याचिकाकर्ता कामता प्रसाद मिश्रा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचे. 2021 में हाईकोर्ट ने SPE के आदेश को रद्द कर याचिकाकर्ता को मांगी गई जानकारी प्रदान करने के निर्देश दिए, लेकिन एसपीई ने हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी. हालांकि, 15 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहरा दिया। 

लखनऊ में सीएम योगी का सख्त संदेश—माफियाओं का अंत तय, 2017 के बाद यूपी में बड़ा बदलाव

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ में आयोजित डी-3 त्रिवेणी कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया। उन्होंने दौरान सभा को संबोधित करते हुए कहा, माफिया का सफाया करना ही मेरा प्रिय विषय है। आगे भी माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करते रहूंगा। एक समय था जब उत्तर प्रदेश में माफियाओं का बोलबाला था और वे समानांतर सरकार चलाते थे, लेकिन आज स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। हमारी सरकार ने पहले दिन से ही यह तय कर दिया था कि जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। अब यूपी का नाम सुनकर लोग दूरी नहीं, गले लगाते हैं मुख्यमंत्री ने कहा, वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में दंगे, उपद्रव और असुरक्षा का माहौल था। त्योहारों में व्यवधान डाले जाते थे, व्यापारी और बेटियां सुरक्षित नहीं थीं तथा सत्ता में बैठे लोग दंगाइयों को संरक्षण देते थे। अब स्थिति बदल चुकी है। जो भी त्योहारों में खलल डालने की कोशिश करेगा, उसका वर्तमान और भविष्य दोनों समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या में 500 वर्षों के इंतजार के बाद राम मंदिर निर्माण डबल इंजन सरकार की बड़ी उपलब्धि है। पहले रामभक्तों पर लाठियां और गोलियां चलती थीं, अब अयोध्या विश्वस्तरीय धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में विकसित हो रही है।  

मोहर्रम को लेकर बरेली पुलिस अलर्ट, गांव-गांव ताजियों की ऊंचाई की जांच जारी

लखनऊ मोहर्रम के दौरान इस बार 12 फीट से अधिक ऊंचाई का कोई भी ताजिया नहीं निकलेगा। इसकी निगरानी के लिए यूपी के बरेली में पुलिस फास्ट हो गई है। पुलिसकर्मी गांव-गांव जाकर ताजियों की ऊंचाई नाप रहे हैं और ताजियादारों से संपर्क कर नियमों का पालन करने की अपील कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार मोहर्रम में जिले भर में 1033 ताजिया निकाले जाएंगे। इनमें सबसे अधिक 93 ताजिया नवाबगंज क्षेत्र में निकलेंगे। इसके बाद बहेड़ी में 81, हाफिजगंज में 79, भोजीपुरा व सीबीगंज में 60-60, शाही में 55, फतेहगंज पश्चिमी में 50, शेरगढ़ में 49, देवरनिया में 48, शीशगढ़ में 47, इज्जतनगर में 39, बारादरी में 36, किला व आंवला में 30-30 ताजिया निकाले जाएंगे। सिरौली में 28, क्योलड़िया, मीरगंज व भमोरा में 26-26, कैंट में 25, बिथरी में 24, अलीगंज में 23, भुता में 20, फतेहगंज पूर्व में 19, फरीदपुर में 17, प्रेमनगर में 10 और कोतवाली में तीन ताजिया निकलेंगे। एसएसपी ने इन सभी ताजियों की जांच और निगरानी के लिए एक-एक सिपाही को नोडल अधिकारी नामित किया है। संबंधित थाना प्रभारी इन पुलिसकर्मियों के साथ क्षेत्र में पहुंचकर ताजियों की ऊंचाई का सत्यापन कर रहे हैं। इसके पीछे कारण केवल इतना है कि कोई हादसा न हो। माहर्रम से पहले तैयारी पूरी करने के निर्देश एसएसपी ने त्योहार को सकुशल संपन्न कराने के लिए मोहर्रम से पहले सारी तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इनमें पीस कमेटी की मीटिंग, पुराने विवाद की समीक्षा, रूट का निरीक्षण, फोर्स की तैनाती समेत कई बिंदु शामिल हैं। सभी थाना प्रभारियों के साथ ही सीओ को भी रूट का भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही निर्धारित प्रारूप में ताजियादार, गांव समेत अन्य सारी जानकारियां दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। पिछले साल 23 फीट के ताजिया में लगी थी आग अधिकारियों का कहना है कि ताजियों की अधिक ऊंचाई होने पर बिजली लाइनों और अन्य अवरोधों से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसी वजह से 12 फीट की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है। पिछले साल फरीदपुर में गौसगंज के पास 23 फीट का ताजिया निकाला गया था, जो हाइटेंशन लाइन से टकरा गया और उसमें आग लग गई। इस मामले में ताजियादारों पर रिपोर्ट हुई थी और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई थी। आज नजर आएगा मुहर्रम का चांद बरेली। मुहर्रम का चांद मंगलवार शाम को देखा जाएगा। चांद के दीदार के साथ से इस्लामी साल की शुरुआत होगी। यौमे आशूरा (10 मुहर्रम) को मनाया जाएगा। दरगाह आला हजरत के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है। माहे मुहर्रम का चांद 16 जून की शाम को देखा जाएगा। चांद नजर आने के बाद आगाज होगा। दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने कहा कि मुहर्रम मुसलमानों को सब्र और इंसानियत की सीख देता है। एसएसपी अनुराग आर्य के अनुसार मोहर्रम को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सभी ताजियों की ऊंचाई निर्धारित मानक के अनुरूप सुनिश्चित कराई जा रही है। जुलूस मार्गों का निरीक्षण किया जा रहा है और आयोजकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। ताजियादारों से भी लगातार संवाद कर सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।

नशे के खिलाफ बड़ा अभियान, ANT F अब पूरे राज्य में करेगी तेज कार्रवाई

 रांची  झारखंड के एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को मजबूत बनाया गया है। पहले से कार्यरत इस बल को सीआईडी झारखंड के एडीजी मनोज कौशिक ने री-स्ट्रक्चर किया है। इसमें न सिर्फ पदाधिकारियों की संख्या बढ़ाई गई है, बल्कि झारखंड जगुआर या स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के 40 कमांडो की एक टुकड़ी को भी इस बल के साथ जोड़ा गया है। ये वही कमांडो हैं, जिन्हें माओवादियों के विरुद्ध अभियान में लगाया गया था। 40 कमांडों का एक पूरा असाल्ट ग्रुप इससे जुड़ा हुआ है। इसे इस कदर मजबूत बनाया गया है, ताकि यह पूरे राज्य में कहीं भी बिना किसी की मदद लिए छापेमारी कर सके और केस दर्ज कर सके। झारखंड में नशे के विरुद्ध मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सख्त निर्देश के बाद राज्य में अफीम, गांजा, ब्राउन शुगर, प्रतिबंधित सीरप, इंजेक्शन व प्रतिबंधित दवाओं के विरुद्ध अब एएनटीएफ का छापामारी अभियान तेज होगा। हाल ही में राज्य सरकार ने नारकोटिक्स के विरुद्ध अभियान, गुप्तचरों के लिए योजनाएं सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर संकल्प जारी किया है। एएनटीएफ व सक्षम एजेंसी की तरह काम करेगी, आरोपितों के विरुद्ध एफआईआर की भी स्वतंत्रता होगी। इस एएनटीएफ की सीधी निगरानी सीआईडी के एडीजी करेंगे। इसका नियंत्री विभाग भी सीआईडी ही होगा। इसमें शामिल अधिकारी सूचना संग्रह कर, अंतरराज्यीय समन्वय, वित्तीय लेन-देन के बिंदु पर काम करेंगे और सभी 24 जिलों के एसएसपी, एसपी के समन्वय से अभियान संचालित करेंगे। राज्य के 14 जिलों में अफीम की खेती एएनटीएफ के रडार पर राज्य के वे 14 जिले हैं, जहां सर्वाधिक अफीम की खेती होती है। इन जिलों में रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, सरायकेला-खरसांवा, पलामू, लातेहार, गढ़वा, हजारीबाग, चाईबासा, चतरा, कोडरमा व देवघर शामिल हैं। एएनटीएफ का मानना है कि नशे के सौदागरों के पास बड़े हथियार भी होते हैं, जिससे वे सूचनादाता से लेकर अभियान में शामिल पदाधिकारियों-जवानों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। यही वजह है कि तेज तर्रार अधिकारियों के अलावा जवानों को भी इसमें शामिल किया गया है। झारखंड का चतरा, खूंटी, पलामू, लातेहार, और रांची के ग्रामीण इलाकों में अफीम की खेती सर्वाधिक होती है। यहां से अफीम को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली भेजा जाता है। झारखंड में ब्राउन शुगर की खेप मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल (मुर्शिदाबाद और मालदा रूट) तथा उत्तर प्रदेश के बरेली रूट से आता है। पूर्व में बड़ी संख्या में ब्राउन शुगर की जब्ती हुई है।  

41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को राहत

रायपुर छत्तीसगढ़ में विद्युत टैरिफ के वार्षिक संशोधन के बावजूद  छत्तीसगढ़ सरकार ने आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार को न्यूनतम रखने के लिए कई स्तरों पर राहत और संरक्षण की व्यवस्था की है। विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए औसतन 6.23 प्रतिशत अर्थात लगभग 42 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि स्वीकृत की गई है, लेकिन राज्य में मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना, बिजली बिल समाधान योजना और पीएम सूर्यघर योजना जैसी पहलों के कारण अधिकांश उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव काफी सीमित रहेगा। गौरतलब है कि विद्युत दरों का निर्धारण छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा किया जाता है, जो एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है। आयोग विद्युत कंपनियों की वार्षिक राजस्व आवश्यकता, उत्पादन लागत, कोयला, ट्रांसमिशन तथा वितरण व्यय सहित विभिन्न आर्थिक पहलुओं का अध्ययन कर दरों का निर्धारण करता है। नए टैरिफ में घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है। हालांकि मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के कारण प्रदेश के अधिकांश परिवारों पर इसका अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। प्रदेश में लगभग 51 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं। इनमें से 14.5 लाख बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है। इसके अलावा 26.5 लाख ऐसे उपभोक्ता, जिनकी मासिक खपत 400 यूनिट तक है, उन्हें 200 यूनिट तक की खपत पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। इन राहतों के कारण लगभग 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दर वृद्धि का प्रभाव शून्य से लेकर मात्र 3.65 प्रतिशत तक ही होगा। किसानों पर अतिरिक्त व्यय भार नहीं राज्य के 8.65 लाख कृषि उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा प्रभार में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, लेकिन इसकी प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में किए जाने के कारण किसानों पर इसका अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। कृषि पंपों के स्थायी प्रभार को भी यथावत रखा गया है। सौर ऊर्जा से हजारों परिवारों का बिल हुआ शून्य ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित पीएम सूर्यघर योजना का छत्तीसगढ़ राज्य में तेजी से क्रियान्वयन किया जा रहा है। अब तक लगभग 66 हजार उपभोक्ता इस योजना का लाभ प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें से 16 हजार परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है। वर्तमान में लगभग 89 हजार घरों में सौर संयंत्र स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है। राज्य सरकार ने आगामी वर्षों में 5 लाख घरों में सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा है, जिससे बिजली उपभोग की लागत में कमी आएगी। बिजली बिल समाधान योजना से मिली बड़ी राहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार द्वारा 12 मार्च 2026 से मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत बीपीएल, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिलों में विशेष राहत प्रदान की जा रही है। बीपीएल उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तथा संपूर्ण सरचार्ज में छूट दी जा रही है। वहीं घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मूल राशि में 50 प्रतिशत तथा पूरे सरचार्ज में छूट का लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही शेष राशि को अधिकतम 60 किस्तों में जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। योजना के तहत अब तक 6 लाख बीपीएल, 1.5 लाख घरेलू तथा 33 हजार कृषि उपभोक्ताओं ने आवेदन किया है। लगभग 1328 करोड़ रुपये के बकाया देयकों का समाधान किया जा चुका है, जिसमें 749 करोड़ रुपये की राहत उपभोक्ताओं को दी गई है। उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने पर भी जोर राज्य में औद्योगिक निवेश और रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए स्टील उद्योगों को लोड फैक्टर पर मिलने वाली 25 प्रतिशत छूट को पूर्ववत जारी रखा गया है। इससे राज्य के उद्योग अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक बने रहेंगे और उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। आदिवासी क्षेत्रों के छात्रावासों को विशेष राहत बस्तर एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित छात्रावासों को गैर-घरेलू श्रेणी से घरेलू श्रेणी में शामिल कर विशेष राहत प्रदान की गई है। इससे इन संस्थानों के संचालन व्यय में कमी आएगी। कम बिजली खर्च करने का नया अवसर 10 किलोवाट से अधिक भार वाले घरेलू, गैर-घरेलू, औद्योगिक तथा सार्वजनिक उपयोगिता उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक समय (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) बिजली उपयोग पर 5 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। वहीं पीक आवर्स में 5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क निर्धारित किया गया है। इससे उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत का बेहतर प्रबंधन करने का अवसर मिलेगा। ऊर्जा अधोसंरचना को मजबूत करने बड़ा निवेश राज्य सरकार बिजली उत्पादन और वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। वर्तमान में 2×660 मेगावाट क्षमता के सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र का कार्य प्रारंभ किया जा चुका है, जिसकी पहली इकाई मार्च 2029 तक शुरू होने की संभावना है। इसके अलावा मड़वा में 800 मेगावाट क्षमता के नए विद्युत संयंत्र की योजना पर भी कार्य चल रहा है। आगामी वर्षों में 400/132 केवी के 4, 220/132 केवी के 17 तथा 132/33 केवी के 34 नए उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे। वहीं वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 106 नए 33/11 केवी उपकेंद्रों का निर्माण जारी है तथा लगभग 300 अतिरिक्त उपकेंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है। उपभोक्ता हित और व्यवस्था दोनों का संतुलन ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उत्पादन एवं वितरण लागत, पूर्व वर्षों के वित्तीय दायित्वों तथा विद्युत अधोसंरचना विस्तार की आवश्यकताओं को देखते हुए किया गया यह संशोधन सीमित दायरे का है। राज्य सरकार ने सब्सिडी, राहत योजनाओं और सौर ऊर्जा कार्यक्रमों के माध्यम से आम उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव न्यूनतम रखने का प्रयास किया है।

हरियाणा के 5 जिलों को NCR से बाहर करने की अटकलों पर विराम, CM सैनी ने रखा रोडमैप

चंडीगढ़. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की 42वीं अहम बैठक नई दिल्ली में संपन्न हुई। केंद्रीय विद्युत, आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के भविष्य के विकास और ढांचागत योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सीएम सैनी ने दी जानकारी हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी इस महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने अहम जानकारियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि बैठक में लिए गए एक बड़े फैसले के तहत अब दिल्ली एनसीआर (NCR) का दायरे में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। यानी पांच राज्य एनसीआर से बाहर नहीं जाएंगे। सीएम सैनी ने स्पष्ट किया कि आज की बैठक के निर्णयों के तहत, हरियाणा के एनसीआर (NCR) क्षेत्र में फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। वायु प्रदूषण से जुड़ी पाबंदियों को किया जाएगा विभाजित हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा एनसीआर क्षेत्र के हरियाणा से जुड़े जिलों में कई बदलाव नहीं हुआ है। इसे लेकर चर्चा जरूरी की गई है। वायु प्रदूषण से जुड़ी पाबंदियों को विभाजित किया जाएगा। अरावली संरक्षण पर और जोर देते हुए परिवहन सेवाओं को अत्याधुनिक बनाने पर जोर दिया जाएगा। बी-6 वाहनों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। मेट्रो तथा नमो भारत के विस्तार पर भविष्य में बढ़ती आबादी को देखते हुए जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में शामिल होने के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। बैठक केंद्रीय शहरी विकास एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में हुई। सीएम ने रेखा गुप्ता को किया सम्मानित बैठक के दौरान सौहार्दपूर्ण माहौल देखने को मिला। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बैठक की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को सम्मानित किया और उनका आभार जताया। बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण रही, जहाँ उन्होंने दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों के विकास को लेकर अपने सुझाव रखे।

एजुकेशन समिट में राज्यपाल का संबोधन, नई शिक्षा नीति को बताया भारत की पहचान

जयपुर राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि शिक्षा ही ज्ञान का बड़ा आधार है। इसके जरिए भारत को विश्वभर में श्रेष्ठ बनाने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के टेलेंट की दुनिया भर में मांग है। उन्होंने बच्चों की बौद्धिक क्षमता विशिष्ट क्षेत्रों में विकसित किए जाने पर जोर दिया। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान के आलोक में विकसित भारत के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं में बच्चों में नैतिकता, सहनशीलता और संस्कार निर्माण के लिए कार्य किए जाने की आवश्यकता जताई। राज्यपाल श्री बागडे मंगलवार को सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित "एजुकेशन समिट" में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा से विकास को सही मायने में गति दी जा सकती है। संवाद से सुसंवाद होता है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां जो आविष्कार हुए, उनका श्रेय पश्चिम ने ले लिया। उन्होंने कहा कि भारत में सबसे पहला विमान मुंबई के संस्कृत विद्वान शिवकर बापूजी तलपड़े ने उड़ाया परंतु श्रेय राइट बंधुओं को मिला। इसी तरह गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत भास्कराचार्य था, दुनिया में न्यूटन प्रसिद्ध हुए। उन्होंने भारत के प्राचीन ज्ञान का नई पीढ़ी में प्रसार किए जाने पर जोर दिया राज्यपाल ने कहा कि विश्व में जब कहीं विश्वविद्यालय नहीं था, तब भारत में 19 विश्वविद्यालय थे। उन्होंने कहा कि ईस्वी सन 725 में रावल पिंडी में तक्षशिला विश्वविद्यालय विश्व का श्रेष्ठ शिक्षा केंद्र था। राज्यपाल ने बप्पा रावल की महानता की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने अरबों को भारत से खदेड़ा। उनके नाम से ही बाद में पाकिस्तान का रावल पिंडी स्थान हुआ। उन्होंने कहा कि गुरुकुल पद्धति भारत की श्रेष्ठ शिक्षा पद्धति रही है। गुरुकुल में किसी एक विषय का नहीं सभी विषयों का ज्ञान दिया जाता था। उन्होंने "गुरुकुल गए रघुराई अल्प काल में शिक्षा पाई" चौपाई की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान राम ने गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त की, इसी से वह मर्यादा पुरुषोत्तम बने। राज्यपाल ने प्राचीन ज्ञान परम्परा की चर्चा करते हुए कहा कि विश्व को शून्य का ज्ञान भारत ने दिया। उसी से पूरी दुनिया को गिनती करना आया।  दशमलव का ज्ञान, व्याकरण आदि से भारत ने ही विश्व को शिक्षा दी। उन्होंने जवाहर लाल नेहरू की डिस्कवरी ऑफ इंडिया की चर्चा करते हुए कहा कि मैक्समूलर ने उसमें लिखा है कि महाभारत और रामायण जैसे दो अद्भुत ग्रन्थ भारत ने विश्व को दिए। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान, आज का बर्मा, श्रीलंका, कंबोडिया, गांधार आदि प्राचीन भारत में ही थे। कश्मीर का शारदा पीठ देश में ज्ञान का बहुत बड़ा केंद्र था। बागडे ने विनोबा भावे के कहे का उल्लेख करते हुए कहा कि देश आजाद होने के साथ ही जैसे अंग्रेजों का झंडा उतारा गया और बदला गया उसी तरह देश की शिक्षा नीति बदली जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि मैकाले ने जो शिक्षा पद्धति हमें दी उसका मूल आधार ही यही था कि अंग्रेजी के ज्ञान के साथ पश्चिम को श्रेष्ठ  साबित किया जाए। उन्होंने कहा कि अंग्रेज चाहते थे कि घरेलू उद्योग बंद किए जाएं, ताकि भारत के लोग भूखे रहे और सदा अंग्रेजों पर आश्रित रहे और गुलाम बने रहे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीयता के मूल्यों में गूंथी हुई है। इसके आलोक में देश को हर क्षेत्र में अग्रणी करने के प्रयास किए जाएं इससे पहले राज्यपाल ने वहां शैक्षिक उन्नयन और कौशल शिक्षा से जुड़े विभिन्न स्टालों का भी अवलोकन किया।

रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कोरबा और जगदलपुर में आधुनिक अधोसंरचना विकसित करने की तैयारी

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन की रिडेवलपमेंट नीति के तहत राज्य के विभिन्न शहरों में पांच प्रमुख रिडेवलपमेंट परियोजनाओं का टेंडर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा जारी कर दिया गया है। शहरी विकास, शासकीय परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग और आधुनिक नागरिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। राज्य शासन ने इन परियोजनाओं के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग तथा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को क्रियान्वयन एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी है। मंडल द्वारा परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन (पीपीआर) और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किए गए हैं। साथ ही निजी डेवलपर्स के चयन हेतु पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अपनाई गई है। 30 जून 2025 को मंत्रिपरिषद ने इन परियोजनाओं को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की थी। इसके बाद 27 मई 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सभी परियोजनाओं के अंतिम स्वरूप पर विस्तृत चर्चा कर अनुमोदन दिया गया। इन परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल लगभग 19.14 एकड़ है तथा वर्ष 2025-26 की संशोधित गाइडलाइन दरों के अनुसार इनकी अनुमानित कीमत लगभग 250.30 करोड़ रुपये है। योजनाएं रायपुर के बीटीआई रोड शंकर नगर, महासमुंद के क्लब पारा, राजनांदगांव के कैलाश नगर, कोरबा के कटघोरा तथा जगदलपुर के चांदनी चौक फेज-2 क्षेत्र में विकसित की जाएंगी। राजधानी रायपुर की शंकर नगर स्थित परियोजना को विशेष महत्व दिया जा रहा है। बीटीआई ग्राउंड और सिंधु भवन के समीप स्थित यह क्षेत्र शैक्षणिक, प्रशासनिक, व्यावसायिक एवं आवासीय गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। परियोजना के विकसित होने से आधुनिक अधोसंरचना का विस्तार होगा और शासकीय परिसंपत्तियों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। रिडेवलपमेंट मॉडल के तहत जर्जर और अनुपयोगी सरकारी परिसंपत्तियों के स्थान पर आधुनिक एवं सुव्यवस्थित अधोसंरचना विकसित की जाएगी। इन परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय भार की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि शासकीय भूमि के मूल्य का उपयोग ही वित्तीय संसाधन के रूप में किया जाएगा। इससे सरकारी भूमि का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित होने के साथ राज्य को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा। आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। रिडेवलपमेंट नीति के माध्यम से अनुपयोगी और जर्जर शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक एवं उपयोगी अधोसंरचना में बदला जाएगा, जिससे शहरों की कार्यक्षमता और सौंदर्य दोनों में वृद्धि होगी। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि मंडल राज्य में रिडेवलपमेंट की नई कार्यसंस्कृति स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहरी क्षेत्रों के समग्र कायाकल्प का प्रयास हैं। विशेष रूप से शंकर नगर स्थित परियोजना राजधानी रायपुर के लिए आदर्श शहरी विकास मॉडल साबित होगी। मंडल के आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने टीएल बैठक में परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अगले चरण की 8 नई रिडेवलपमेंट परियोजनाओं को शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। इससे राज्य में शहरी अधोसंरचना विकास की प्रक्रिया को और गति मिलने की संभावना है।

लुधियाना के नए निगम कमिश्नर का एक्शन मोड, चार्ज लेते ही शहर की सड़कों पर पहुंचे

लुधियाना. नगर निगम लुधियाना के नए कमिश्नर ओजस्वी ने कार्यभार संभालने के अगले ही दिन एक्शन मोड अपनाते हुए मंगलवार सुबह शहर का दौरा किया। पंजाब सरकार की 'मिशन क्लीन' मुहिम के तहत उन्होंने निगम अधिकारियों के साथ विभिन्न इलाकों का निरीक्षण कर सफाई व्यवस्था, सीवरेज, पेयजल लीकेज और टूटी सड़कों की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कमिश्नर केवल मुख्य सड़कों तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि मोहल्लों की अंदरूनी गलियों में भी पहुंचे। उन्होंने सीवरेज ओवरफ्लो, पानी की लीकेज, सड़कों पर गड्ढों और सफाई व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया तथा संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर में सफाई व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि सोमवार को कार्यभार संभालने के बाद कमिश्नर ओजस्वी ने नगर निगम के अधिकारियों और शहर के तीनों मेयरों के साथ बैठक की थी। बैठक में शहर की प्राथमिक समस्याओं और उनके समाधान को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यभार संभालते समय ही कमिश्नर ने कहा था कि उनकी पहली प्राथमिकता शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाना और मानसून के दौरान जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करना होगी। इसी दिशा में उन्होंने मंगलवार सुबह स्वयं फील्ड में उतरकर ग्राउंड जीरो पर हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।