samacharsecretary.com

लुधियाना के नए निगम कमिश्नर का एक्शन मोड, चार्ज लेते ही शहर की सड़कों पर पहुंचे

लुधियाना. नगर निगम लुधियाना के नए कमिश्नर ओजस्वी ने कार्यभार संभालने के अगले ही दिन एक्शन मोड अपनाते हुए मंगलवार सुबह शहर का दौरा किया। पंजाब सरकार की 'मिशन क्लीन' मुहिम के तहत उन्होंने निगम अधिकारियों के साथ विभिन्न इलाकों का निरीक्षण कर सफाई व्यवस्था, सीवरेज, पेयजल लीकेज और टूटी सड़कों की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कमिश्नर केवल मुख्य सड़कों तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि मोहल्लों की अंदरूनी गलियों में भी पहुंचे। उन्होंने सीवरेज ओवरफ्लो, पानी की लीकेज, सड़कों पर गड्ढों और सफाई व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया तथा संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर में सफाई व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि सोमवार को कार्यभार संभालने के बाद कमिश्नर ओजस्वी ने नगर निगम के अधिकारियों और शहर के तीनों मेयरों के साथ बैठक की थी। बैठक में शहर की प्राथमिक समस्याओं और उनके समाधान को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यभार संभालते समय ही कमिश्नर ने कहा था कि उनकी पहली प्राथमिकता शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाना और मानसून के दौरान जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करना होगी। इसी दिशा में उन्होंने मंगलवार सुबह स्वयं फील्ड में उतरकर ग्राउंड जीरो पर हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मिलिट्री हॉस्पिटल नामकुम में मेगा आई कैंप, विशेषज्ञ डॉक्टर कर रहे मोतियाबिंद और रेटिना उपचार

रांची जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए भारतीय सेना ने मिलिट्री हॉस्पिटल नामकुम में ‘दृष्टि 2026’ मेगा नेत्र चिकित्सा शिविर का शुभारंभ किया है. 16 से 19 जून तक आयोजित इस चार दिवसीय शिविर के माध्यम से झारखंड के लोगों को अत्याधुनिक नेत्र चिकित्सा और विशेषज्ञ उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. शिविर का उद्घाटन सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम, महानिदेशक सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवाएं (DGAFMS) द्वारा किया गया. विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम दे रही सेवा नई दिल्ली स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सकों की टीम पूर्व सैनिकों, उनके आश्रितों और रांची एवं आसपास के जिलों से आए नागरिकों को परामर्श, जांच और उन्नत उपचार दे रही है. शिविर में मोतियाबिंद ऑपरेशन, ग्लूकोमा उपचार और रेटिना संबंधी रोगों के लिए एंटी-VEGF इंजेक्शन जैसी विशेष सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जो आंखों की रोशनी सुधारने और अंधापन रोकने की संभावना को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. सेना की पहल से राहत विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं को सीधे रांची तक पहुंचाकर भारतीय सेना ने लोगों को महानगरों में इलाज के लिए होने वाली लंबी और खर्चीली यात्राओं से राहत दी है. उद्घाटन समारोह में डीजीएएफएमएस ने पूर्वी कमान, मिलिट्री हॉस्पिटल नामकुम और विशेषज्ञ चिकित्सा टीमों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहल गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.   बड़ी संख्या में लाभार्थी पहुंचे पहले ही दिन बड़ी संख्या में लोग शिविर में पहुंचे, जिससे इसकी जरूरत और महत्व साफ दिख गया. ‘दृष्टि 2026’ भारतीय सेना की उस सेवा भावना का सशक्त उदाहरण है, जो सीमाओं की सुरक्षा से आगे बढ़कर समाज के जरूरतमंद लोगों तक आशा, उपचार और बेहतर जीवन का संदेश पहुंचाती है.

DMF मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, कारोबारी शाश्वत लुणावत समेत कई ठिकानों पर दबिश

रायपुर. छत्तीसगढ़ में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बड़ी कार्रवाई ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में मंगलवार को ईडी ने एक साथ छापेमारी की कार्रवाई शुरू की। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कथित घोटाले की जांच के सिलसिले में की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक ईडी की टीमों ने रायपुर, दुर्ग, धमतरी, अंबिकापुर और महासमुंद सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर दबिश दी है। प्रदेशभर में करीब नौ ठिकानों पर छापेमारी की चर्चा है। कार्रवाई के बाद कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्यों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है। कारोबारी शाश्वत लुणावत के निवास पर भी ईडी की दबिश राजधानी रायपुर के वल्लभ नगर स्थित कारोबारी शाश्वत लुणावत के निवास पर भी ईडी की टीम ने सुबह से जांच शुरू की। जानकारी के अनुसार पांच अधिकारियों की टीम कई घंटों से घर के भीतर दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई DMF घोटाले से जुड़े पहलुओं की जांच के तहत की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि शाश्वत लुणावत प्रदेश के एक प्रतिष्ठित परिवार से जुड़े हैं और राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार संचालित करते हैं। ईडी की जांच केवल उनके निवास तक सीमित नहीं है, बल्कि उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी की कार्रवाई जारी है। हालांकि ईडी की ओर से फिलहाल आधिकारिक रूप से कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन प्रदेशभर में चल रही इस बड़ी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद कई महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

मध्यप्रदेश बना देश का पहला नक्सलमुक्त राज्य, प्रधानमंत्री मोदी ने की सराहना: CM डॉ. यादव

सबसे पहले मध्यप्रदेश हुआ नक्सलमुक्त, प्रधानमंत्री मोदी ने की प्रशंसा – मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को दी सरकार की उपलब्धियों की जानकारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पूरे देश में सबसे पहले मध्यप्रदेश ने ही नक्सलवाद को समाप्त किया है। लाल सलाम को आखिरी सलाम करने में मध्यप्रदेश ने बाजी मारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 जून को नई दिल्ली में हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मध्यप्रदेश सरकार के विकास के हर मामले में सदैव अग्रणी रहने की क्रियाशीलता की सराहना की। इस वर्ष बैठक का विषय "विकसित भारत @2047 के लिये समावेशी मानव विकास" था। पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शासी परिषद् की बैठक में भाग लिया। उन्होंने बताया कि गवर्निंग काउंसिल की बैठक में विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए केंद्र और राज्यों की साझी भागीदारी, समन्वित प्रयासों तथा विकास के विभिन्न आयामों पर व्यापक और सार्थक चर्चा हुई। देश के जो क्षेत्र नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहां विकास की गति तेज करने पर चर्चा हुई। भविष्य में युवाओं के विकास पर सरकार का विशेष रूप से जोर रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी को मध्यप्रदेश आयुष्मान योजना, नदी जोड़ो परियोजनाओं के क्रियान्वयन, पीएम मित्र पार्क निर्माण सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों से भी अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण से अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण को बीते सप्ताह मप्र सरकार को विभिन्न क्षेत्रों में मिली विशेष उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश में हो रहे उच्च कोटि के कामों की भी प्रशंसा की है। समान नागरिक संहिता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने के संबंध में नीति निर्माण जनसामान्य के सुझावों मांगे जा रहें है। अच्छी नीति निर्माण के लिए बेहतर जनभागीदारी आवश्यक है। प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या सुझाव आमंत्रित करने के लिए सभी जिलों में जागरूकता अभियान चलाये जायें। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता के बारे में 22 जून तक सुझाव आमंत्रित किये गये हैं। समान नागरिक संहिता की वेबसाइट (ucc.mp.gov.in) पर सुझाव देने की प्रक्रिया भी बहुत सरल है। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण से कहा कि वे अपने-अपने प्रभार के जिलों में समान नागरिक संहिता के संबंध में और उसमें सुझाव देने के लिये अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस – स्वस्थ आयु के लिये योग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को प्रदेश में सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र ने अंतराष्ट्रीय योग दिवस को मान्यता दी। विश्व के 190 से अधिक देशों में करोड़ों लोग योग अपना चुके है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष योग दिवस की थीम 'स्वस्थ आयु के लिये योग' रखी गई है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय द्वारा वर्ष 2026 के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए निर्धारित गतिविधियों का प्रदेश में अक्षरश: पालन किया जाएगा। एमपी टूरिज्म को मिला "कॉन्फ्रेंस मैनेजमेंट में उत्कृष्टता पुरस्कार" मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग को मुंबई में आयोजित प्रतिष्ठित '10वें डेसेनियल एक्जीबिशन एक्सीलेंस अवार्ड्स (EEA) 2026' में "कॉन्फ्रेंस मैनेजमेंट में उत्कृष्टता पुरस्कार" प्राप्त हुआ है। एमपी टूरिज्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना प्रदेश के लिये एक बड़ी उपलब्धि है। इसे देश के इवेंट, एक्जीबिशन और माइस (MICE – मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेसिंग एंड एक्जीबिशन) सेक्टर के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है। पर्यटन निगम को यह राष्ट्रीय पुरस्कार राज्य में 20 से भी ज्यादा राष्ट्रीय और राज्य महत्व के बड़े सम्मेलनों के सफल एवं बेहतरीन प्रबंधन के लिए दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इस बड़ी उपलब्धि के लिए विभागीय मंत्री एवं अधिकारियों को बधाई दी। प्रदेश को मिला उभरती नवकरणीय ऊर्जा अवसंरचना उत्कृष्टता सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केन्द्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गत 15 जून को गोवा में ग्लोबल विंड डे – 2026 पर मध्यप्रदेश को उभरती नवकरणीय ऊर्जा अवसंरचना उत्कृष्टता सम्मान प्रदान किया है। हमारा मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा में देश के अग्रणी राज्यों में से है और हम प्रदेश में इस दिशा में लगातार काम कर रहें है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश को यह केंद्रीय सम्मान प्राप्त होने पर विभागीय मंत्री एवं अधिकारियों को बधाई दी। प्रदेश में स्थापित होगा सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को जानकारी दी कि गत 15 जून को भोपाल में सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने के लिये कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये सभी आवश्यक प्रबंधन करना वर्तमान दौर की जरूरत है। प्रदेश में सायबर सुरक्षा के लिये एक सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा। यह सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा की दिशा में यह ठोस कदम है। यह सेंटर केंद्रीय सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के लिये महत्वपूर्ण आधार बनेगा। एमएसएमई यूनिट्स को प्रोत्साहन राशि का वितरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 14 जून को सिंगल क्लिक से प्रदेश की 900 एमएसएमई यूनिट्स को 360 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि का वितरण किया है। इसमें 6 ईटीपी निर्मित करने वाली इकाइयों को 2 करोड़ 2 लाख की रुपये सहायता, विशेष पैकेज के तहत इकाइयों को 1 करोड़ 7 लाख रुपये मण्डी शुल्क की प्रतिपूर्ति और 11 इकाईयों को विद्युत टैरिफ के रूप में 3 करोड़ 69 लाख रुपये का वितरण भी किया गया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत ऋण राशि, भू-आवंटन पत्रक तथा स्टार्ट-अप नीति 2025 के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि का वितरण भी इस दौरान किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में औद्योगिक परिदृश्य बदलने के लिये कृत संकल्पित है और इस क्षेत्र के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। बड़े उद्योगों के अलावा हमारा पूरा ध्यान एमएसएमई की ओर भी है, जिनका प्रदेश के औद्योगिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है।  

ट्रंप और ईरान समझौते पर उठे सवाल, एक्सपर्ट्स बोले- यह इज्जत बचाने की रणनीति हो सकती है

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते को लेकर तरह-तरह की चर्चा है. इस बीच वेस्ट एशिया मामलों के एक्सपर्ट इसे अलग नजरिये से देखते हैं. उनका मानना है कि यह डील महज जंग से पहले की स्थिति पर वापसी भर है. आने वाले 60 दिन यह तय करेंगे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन उद्देश्यों को हासिल कर पाते हैं या नहीं, जिनके नाम पर उन्होंने ईरान के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन शुरू किया था।  क्या है समझौते का मुख्य उद्देश्य? वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के मिडिल ईस्ट प्रोग्राम के वरिष्ठ फेलो विल टॉडमैन ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि शुरुआती समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच दुश्मनी को खत्म करना, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना है. उनके अनुसार यह समझौता मूल रूप से हालात को उसी स्थिति में वापस ले जाता है, जहां वे अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों से पहले थे।  टॉडमैन ने कहा, 'अमेरिका अब तक उनमें से एक भी उद्देश्य या लक्ष्य नहीं पा सका, जिनका ऐलान उसने जंग के शुरू करने से पहले किया था.' उन्होंने कहा कि युद्ध के बाद बनी परिस्थितियां बताती हैं कि इस मिलिट्री ऑपरेशन से अमेरिका को जैसी अपेक्षा थी, वैसी रणनीतिक सफलता हासिल नहीं हुई है।  दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच रविवार को होर्मुज को दोबारा खोलने पर सहमति बनी. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है. इस मार्ग के खुलने से ग्लोबल एनर्जी बाजार को राहत मिलने की उम्मीद है और तेल आपूर्ति नॉर्मल होने का रास्ता साफ हो सकता है. हालांकि समझौते की पूरी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं. ईरान ने संकेत दिया है कि समझौते को औपचारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया हस्ताक्षर समारोह के बाद शुरू होगी।  60 दिन तक बातचीत के बाद खुलेगी समझौते की राह बातचीत में मिडिएटर की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के अनुसार यह हस्ताक्षर समारोह शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आयोजित किया जा सकता है. समझौते में एक महत्वपूर्ण प्रावधान 60 दिनों की वार्ता अवधि (बातचीत के लिए 60 दिनों का समय) भी है. इस दौरान ईरान के एनरिच (हाई लेवल पर संवर्धित) यूरेनियम के भंडार और उसके परमाणु प्रोग्राम से जुड़े विवादित मुद्दों पर बातचीत होगी. यही वह स्टेप होगा, जिसमें यह स्पष्ट होगा कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कितनी प्रभावी शर्तें लागू करा पाते हैं।  खाड़ी देशों से संबंधों में नुकसान टॉडमैन का कहना है कि तीन महीने से अधिक चले इस युद्ध ने अमेरिका के पश्चिम एशियाई सहयोगियों के साथ संबंधों को भी नुकसान पहुंचाया है. उनके मुताबिक खाड़ी के कई अरब देशों को महसूस हुआ कि अमेरिका ने युद्ध के दौरान उनके हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।  उन्होंने कहा, 'अरब खाड़ी देशों को लगता है कि अमेरिका ने उन्हें अकेला छोड़ दिया. राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध से पहले और युद्ध के दौरान निर्णय लेते समय उनके हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया.' टॉडमैन के अनुसार इसका परिणाम यह हो सकता है कि खाड़ी देश अपनी सुरक्षा के लिए केवल अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय अन्य देशों के साथ भी रणनीतिक साझेदारियां विकसित करें।  विशेषज्ञ का मानना है कि अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच बना विश्वास का संकट जल्दी दूर होने वाला नहीं है. उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन या भविष्य की कोई भी अमेरिकी सरकार इस भरोसे की कमी को दूर करने के लिए पर्याप्त राजनीतिक पूंजी खर्च करने के लिए तैयार नहीं दिखती।  इस जंग से अमेरिका और इजरायल के बीच भी पनपे मतभेद ऐसे में आने वाले वर्षों में दोनों पक्षों के संबंध धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकते हैं. टॉडमैन ने यह भी कहा कि इस युद्ध ने अमेरिका और इजरायल के बीच भी एक असामान्य प्रकार का मतभेद पैदा कर दिया है. उनके अनुसार इजरायली सरकार को आशंका है कि मौजूदा समझौता ईरान से उत्पन्न सुरक्षा खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं करता और भविष्य में इजरायल की सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं को भी सीमित कर सकता है।  उन्होंने कहा, 'इजरायल का मानना है कि समझौता ईरान के खतरे को पूरी तरह बेअसर नहीं बनाता. इसके अलावा इजरायल को लगता है कि लेबनान में उसका अभियान अभी अधूरा है.' लेकिन दूसरी ओर राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि लेबनान में संघर्ष आगे न बढ़े, क्योंकि इससे ईरान के साथ हुआ समझौता खतरे में पड़ सकता है।  विशेषज्ञ के अनुसार युद्ध का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहा. इससे अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के बीच भी दूरी बढ़ी है. यूरोप के कई देशों ने युद्ध का समर्थन नहीं किया था और उन्होंने कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया था।  टॉडमैन ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से नाटो की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि गठबंधन ने युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं दिया. उनके मुताबिक यह विवाद ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ाने वाला साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल युद्धविराम और होरमुज का खुलना एक पॉजिटिव संकेत है, लेकिन असली चुनौती अगले 60 दिनों की बातचीत में होगी।  अगर परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम भंडार और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, तो यह समझौता केवल अस्थायी राहत साबित हो सकता है. ऐसे में आने वाले दो महीने न सिर्फ अमेरिका और ईरान, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया के भविष्य के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं।   

रात में होने वाले विवाह समारोहों पर कथावाचक देवकीनंदन की आपत्ति, सनातन बोर्ड गठन की पैरवी

भोपाल  कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने रात में होने वाले विवाह, शादियों में मद्यपान की बढ़ती प्रवृत्ति, मंदिरों के प्रबंधन और राम मंदिर दान पात्र विवाद जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार समय का विभाजन देवताओं, पितरों और दैत्यों के समय में किया गया है। रात का समय दैत्यों का माना जाता है, इसलिए हिंदू समाज को रात में विवाह करने से बचना चाहिए। दैत्यों के समय में विवाह करके दैवीय और आदर्श जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि प्राचीन भारतीय परंपरा में 'गोधूलि बेला' को विवाह के लिए सबसे शुभ और उत्तम समय माना जाता था। उस समय विवाह के सभी प्रमुख संस्कार और फेरे दिन में ही संपन्न होते थे। मुगल आक्रांताओं के दौर में जब बेटियों की सुरक्षा और सम्मान पर खतरा मंडराने लगा था, तब मजबूरी और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों ने रात के समय छिपकर विवाह करना शुरू किया। धीरे-धीरे यह एक परंपरा का रूप बन गई। देवकीनंदन ठाकुर ने चिंता जताई उन्होंने कहा कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और वैसा कोई खतरा नहीं है, इसलिए समाज को शोर-शराबे और अनावश्यक दिखावे से दूर रहकर फिर से दिन में विवाह करने की पवित्र परंपरा की ओर लौटना चाहिए। शादियों में मद्यपान के सेवन को लेकर भी देवकीनंदन ठाकुर ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विवाह हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है। ऐसे पवित्र अवसर पर मद्यपान करना अत्यंत दूषित विषय है। इसका नकारात्मक प्रभाव केवल परिवार पर ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों और बच्चों के जीवन पर भी पड़ता है। विवाह को जितना अधिक पवित्र रखा जाएगा, समाज उतना ही स्वस्थ और संस्कारित बनेगा। उन्होंने राम मंदिर दान पात्र विवाद पर बोलते हुए शास्त्रों का जिक्र किया और कहा कि शास्त्रों में लिखा है कि जो व्यक्ति मंदिर के धन का दुरुपयोग करता है, उसे 60 हजार वर्षों तक विष्ठा (मल) का कीड़ा बनकर कष्ट भोगना पड़ता है। यदि लोगों को इस बात का वास्तविक ज्ञान हो जाए तो कोई भी मंदिर का एक रुपया तक चुराने की हिम्मत नहीं करेगा। मंदिरों के प्रबंधन में सरकारी हस्तक्षेप का विरोध करते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने 'सनातन बोर्ड' के गठन की मांग की। उन्होंने कहा कि मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं का संचालन धर्म के जानकार, मर्मज्ञ और धर्मनिष्ठ लोगों के हाथों में होना चाहिए। इस बोर्ड का अध्यक्ष चारों शंकराचार्यों में से किसी एक को बनाया जाना चाहिए, ताकि सनातन धर्म और धार्मिक संस्थाओं का संचालन सही दिशा में हो सके। 'फैसला आने तक वर्षों बीत जाते हैं' न्याय व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अदालतों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया इतनी लंबी हो जाती है कि फैसला आने तक वर्षों बीत जाते हैं। उन्होंने कहा कि कहीं ऐसा न हो कि फैसला आने से पहले ही आरोपी की हार्ट अटैक से मौत हो जाए और भगवान राम अपनी दक्षिणा की प्रतीक्षा करते रह जाएं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने श्रीराम की मर्यादा का उल्लंघन किया है और गलती की है, उनसे तुरंत धन वापस लिया जाना चाहिए। मामले को वर्षों तक अदालतों में घसीटने से बेहतर है कि दोषियों को तत्काल उनके पदों से हटाया जाए। 

हरियाणा राजनीति में बढ़ी नजदीकियां, सीएम आवास पर बिश्नोई परिवार के साथ डिनर

 पंचकूला हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और दिग्गज नेता कुलदीप बिश्नोई के परिवार के बीच नजदीकियां बढ़ती दिख रही हैं। सोमवार रात को बिश्नोई परिवार ने मुख्यमंत्री आवास पर सीएम सैनी के साथ डिनर किया। खास बात यह है कि पिछले महज 15 दिनों के भीतर दोनों पक्षों के बीच यह तीसरी बड़ी मुलाकात है। इस मुलाकात की तस्वीरें खुद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने सोशल मीडिया (X) अकाउंट पर शेयर की हैं। मुख्यमंत्री आवास पर जुटे दोनों परिवार यह अनौपचारिक बैठक चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर हुई। सीएम नायब सिंह सैनी और उनकी पत्नी सुमन सैनी ने बिश्नोई परिवार का स्वागत किया। डिनर के इस मौके पर भाजपा के वरिष्ठ नेता कुलदीप बिश्नोई, उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई और उनके बेटे व भाजपा विधायक भव्य बिश्नोई मौजूद रहे। इसके अलावा विधायक रणधीर पनहार (पिराह) भी अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे थे। किस बात से नाराज थे बिश्नोई भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता कुलदीप बिश्नोई मुख्य रूप से राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा द्वारा उनके पिता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजन लाल पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण नाराज थे। सीएम सैनी ने की तारीफ मुख्यमंत्री ने कहा कि चौधरी भजनलाल की कार्यशैली हमेशा जनहित और विकास केंद्रित रही। चौधरी भजनलाल हमारे लिए बहुत सम्मानित हैं। हम सब उनका बहुत सम्मान करते हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान को बीजेपी की ओर से बिश्नोई समाज को सकारात्मक संदेश देने के तौर पर देखा जा रहा है। रेखा शर्मा ने जताया खेद इसी कड़ी में सांसद रेखा शर्मा ने भी अपने बयान पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि उनका वक्तव्य किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी नहीं था, बल्कि एक राजनीतिक व्यवस्था के संदर्भ में दिया गया था वापस कांग्रेस ज्वाइन करने की कयासें चार साल पहले बीजेपी में शामिल हुए स्व. भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई भाजपा से अलग राजनीति करने के विभिन्न विकल्पों पर विचार करने लगे थे। हिसार व भिवानी से सांसद रह चुके कुलदीप बिश्नोई ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि भाजपा अपनी पार्टी की राज्यसभा सदस्य रेखा शर्मा से माफी नहीं मंगवाती तो उनके पास राजनीति करने के तीन बड़े विकल्प मौजूद हैं। बता दें कि कुलदीप बिश्नोई राहुल गांधी के भी खास माने जाते थे।  

अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए पूर्व मध्य रेलवे चलाएगा दर्जनों परीक्षा स्पेशल ट्रेनें

 पटना  बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूर्व मध्य रेलवे ने व्यापक इंतजाम किए हैं। रेलवे प्रशासन ने परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के सुगम आवागमन के लिए 16 एवं 17 जून को 30 से अधिक परीक्षा स्पेशल ट्रेनों के परिचालन की व्यवस्था की है। इससे पूर्व सोमवार रात रेलवे ने 14 विशेष ट्रेन चलाने की घोषणा की थी। मंगलवार को इसमें 16 और अतिरिक्त रूटों पर भी विशेष ट्रेन चलाने की घोषणा पूर्व मध्य रेल प्रशासन ने की है। 14 जून को चली थी 19 स्‍पेशल ट्रेनें पूर्व मध्य रेलवे द्वारा जारी प्रेस बयान के अनुसार, 14 जून को आयोजित परीक्षा के दौरान भी अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए कुल 19 परीक्षा स्पेशल ट्रेनें चलाई गई थीं। इनमें दानापुर मंडल द्वारा 12 तथा समस्तीपुर मंडल द्वारा 7 विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया था। रेलवे प्रशासन ने परीक्षार्थियों की भारी संख्या को देखते हुए दूसरे चरण की परीक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की है। रेलवे के अनुसार 16 जून की रात पाटलिपुत्र से किशनगंज, अररिया और नौगछिया के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसके अलावा पटना से नरकटियागंज तथा भभुआ के लिए भी स्पेशल ट्रेनें संचालित होंगी। इन ट्रेनों का ठहराव बेगूसराय, खगड़िया, नौगछिया, कटिहार, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, बापूधाम मोतिहारी, बेतिया, जहानाबाद, गया, डेहरी ऑन सोन और सासाराम सहित विभिन्न प्रमुख स्टेशनों पर रहेगा। 17 जून को व‍िभ‍िन्‍न रूट पर चलेंगी ट्रेनें 17 जून को भी बड़ी संख्या में परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा। पटना-गया, बक्सर-पटना, बक्सर-दानापुर, किऊल-गया, गया-किऊल, बख्तियारपुर-राजगीर, राजगीर-बख्तियारपुर, बेतिया-हाजीपुर, बेतिया-पाटलिपुत्र, दोरम मधेपुरा-हाजीपुर के बीच ट्रेन चलेगी। इसी तरह मधुबनी-सोनपुर, मुजफ्फरपुर-पाटलिपुत्र, समस्तीपुर-सीवान, समस्तीपुर-हाजीपुर, पूर्णिया कोर्ट-पाटलिपुत्र, सहरसा-हाजीपुर, सुपौल-देवघर, औरंगाबाद-गया, हाजीपुर-छपरा, सोनपुर-मुजफ्फरपुर तथा नौगछिया-पाटलिपुत्र के बीच विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा केंद्रों तक अभ्यर्थियों की सुरक्षित एवं समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त कोच, विशेष निगरानी और आवश्यक परिचालन प्रबंध किए गए हैं। स्टेशन परिसरों में भीड़ नियंत्रण और यात्रियों की सहायता के लिए अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की गई है। पूर्व मध्य रेलवे ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय पर स्टेशन पहुंचें तथा रेलवे द्वारा संचालित परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का अधिकतम लाभ उठाएं। रेलवे प्रशासन का मानना है कि इन विशेष ट्रेनों के संचालन से अभ्यर्थियों को यात्रा में सुविधा मिलेगी और नियमित ट्रेनों पर दबाव भी कम होगा। प्रमुख मार्ग एवं ठहराव     पाटलिपुत्र–किशनगंज / अररिया / नौगछिया स्पेशल : बेगूसराय, खगड़िया, नौगछिया और कटिहार मार्ग से चलेगी।     पटना–नरकटियागंज स्पेशल : पाटलिपुत्र, सोनपुर, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, बापूधाम मोतिहारी और बेतिया होते हुए संचालित होगी।     पटना–भभुआ स्पेशल : तरेगना, जहानाबाद, गया, डेहरी ऑन सोन और सासाराम मार्ग से चलेगी।     किऊल–गया एवं गया–किऊल स्पेशल : शेखपुरा और नवादा के रास्ते संचालित होगी।     बख्तियारपुर–राजगीर स्पेशल : बिहारशरीफ और नालंदा होते हुए चलेगी।  

बिहार में रेल नेटवर्क विस्तार की तैयारी, ₹1852 करोड़ की नई लाइन को मिली मंजूरी

किशनगंज. सीमांचल क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्र को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाली जालालगढ़- किशनगंज नई रेल लाइन बिछने की उम्मीद फिर से जगी है। साल 2008-09 में स्वीकृत हुई यह परियोजना तकनीकी और बजटीय कारणों से करीब 17 वर्षों से ठप पड़ी थी, लेकिन अब इसे फिर से गति दिया जा रहा है। रेलवे बोर्ड और उत्तर पूर्वी सीमांत रेलवे संशोधित लागत का अंतिम मूल्यांकन कर रही हैं। तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने वर्ष 2008-09 में इस परियोजना का शिलान्यास किया था। उस समय इसकी अनुमानित लागत 360 करोड़ रुपए थी। करीब 17 सालों में भूमि अधिग्रहण और निर्माण लागत में वृद्धि के कारण अब परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 1852 करोड़ रुपये के करीब हो गई है। प्रस्तावित रेल लाइन की कुल लंबाई 51.632 किलोमीटर होगी। यह रेल मार्ग पूर्णिया के जलालगढ़ जंक्शन से शुरू होकर अमौर, बैसा, रौटा, खाताहाट, महीनगांव, दौला जैसे क्षेत्रों से गुजरेगा और किशनगंज मुख्यालय तक पहुंचेगा। इस पूरे खंड में यात्रियों की सुविधा के लिए आठ नए रेलवे स्टेशन बनाने की योजना है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के पूरा होने के बाद न्यू जलपाईगुड़ी से कटिहार जाने वाली ट्रेनों के लिए एक वैकल्पिक और अपेक्षाकृत छोटा मार्ग उपलब्ध होगा। इससे वर्तमान में अत्यधिक व्यस्त मुकुरिया-किशनगंज रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव कम होगा। परियोजना से यात्री और मालगाड़ियों के परिचालन में सुधार आएगा। पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक क्षेत्र के समानांतर यह एक वैकल्पिक रेल संपर्क उपलब्ध कराएगी। इस रेलवे लाइन का निर्माण हो जाने से आपातकालीन परिस्थितियों में सेना और सुरक्षा बलों की आवाजाही के लिए यह मार्ग रणनीतिक कवच साबित हो सकता है। अमौर और बैसा जैसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को इस रेल लाइन से सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। महानंदा और कनकई नदी की बाढ़ से प्रभावित इन इलाकों के किसान अपनी मक्का, जूट और धान जैसी फसलों को अब आसानी से सिलीगुड़ी, कोलकाता और दिल्ली की बड़ी मंडियों तक पहुंचा सकेंगे। वहीं, सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में रेल संपर्क बेहतर होने से स्थानीय व्यापार को नई गति मिलेगी, परिवहन लागत घटेगी और सीमांचल क्षेत्र के आर्थिक विकास को नया आधार मिलेगा। इस नए रेल खंड के निर्माण से जहां सुरक्षा की दृष्टि से वैकल्पिक रेलवे रूट बनेगा, वहीं सुदूर ग्रामीण क्षेत्र को रेलवे कनेक्टिविटी सुविधा मिल जाएगी। दरअसल, तत्कालीन किशनगंज सांसद मरहूम तस्लीमुद्दीन के पहल से तत्कालीन यूपीए सरकार के समय इस परियोजना को हरी झंडी मिली थी, लेकिन तत्कालीन रेल मंत्री के शिलान्यास के कुछ दिनों के बाद इस परियोजना में ग्रहण लग गया था और 17 साल तक इस परियोजना पर काम शुरू नहीं हो पाया। वहीं, अब केंद्र सरकार ने परियोजना को रिवाइज कर राशि देने की घोषणा की है। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बताया कि किशनगंज-जलालगढ़ के बीच नई रेल लाइन बिछाने को लेकर कार्य चल रहा है। रेल मंत्रालय जल्द ही इस दिशा में काम शुरू होगा।

हरियाणा की 66 ऐतिहासिक धरोहरें होंगी पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित

 पंचकूला हरियाणा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को बढ़ाव देकर पर्यटन स्थल बनाने पर जोर दे रही नायब सरकार को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (एनसीआरपीबी) की ओर से आर्थिक बल मिलने वाला है। मंगलवार को नई दिल्ली में हुई एनसीआरपीबी की बैठक में दक्षिण हरियाणा को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की योजना पर जोर दिया गया है। दक्षिण हरियाणा जिलों में 66 ऐतिहासिक तथा महत्वपूर्ण जगहों पर उन्हें पर्यटक स्थल कें रूप में विकसित करने पर चर्चा की गई। इनमें महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, पलवल व अन्य जिलों की ऐतिहासिक धरोहर शामिल हैं। इनमें से कई को हरियाणा सरकार ने विकसित करने की योजना बना रखी थी। एनसीआरपीबी की ओर से मदद मिलने पर योजना बेहतर तरीके से सिरे चढ़ने की उम्मीद लगाई जा रही है। इन क्षेत्रों को किया जाएगा विकसित महेंद्रगढ़ जिले से नारनौल स्थित बीरबल का छत्ता, चोर गुबंद, इस्लामपुरा किला, जल महल, मिर्जा अलीजान का तख्त व बावड़ी, पीर तुर्कमान का मकबरा, शाह कुलीखान का मकबरा, शोभा सागर, इब्राहम खान शूरी का मकबरा, शाह निजाम का मकबरा, शाह विलायत का मकबरा, त्रिपोलिया दरवाजा शामिल है। पलवल जिले का बाबा उदासनाथ मंदिर, दौजी मंदिर, पंचायत मंदिर, पांडव वन, रेवाड़ी से बाग वाला तालाब, बड़ा तालाब, भगवती भक्ति आश्रम, बावल का किला, घंटेश्वर मंदिर, द रेड मास्क(लाल नकाब), तुर्कियावास मकबरा शामिल है। इनमें से कई को विकसित भी किया जा रहा है। फरीदाबाद में हरियाणा के सबसे पुराने अरावली गोल्फ कोर्स को हरियाणा सरकार ने इस साल के बजट में भी विश्वस्तरीय रिक्रिएशन एवं स्पोर्टस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई थी। इसे एनसीआरपीबी ने भी रीजनल प्लान 2041 में शामिल किया है। जिमखाना क्लब से मुगल ब्रिज तक… इसके अलावा आनंदपुर बांध, जिमखाना क्लब, मुगल ब्रिज, नाहर सिंह क्रिकेट स्टेडियम, नाहर सिंह पैलेस, राजहंस कन्वेंशन सेंटर, रोज गार्डन, सूरजकुंड को पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जाना है। गुरुग्राम के अरण्य ग्रीन फार्म, अराइज फार्म, बादशाहपुर फोर्ट, घोस अली शाह की बावड़ी, बेगम समरू पैलेस, काउन सराय और डीएलएफ गोल्फ एंड कंट्री क्लब को पर्यटन के लिए विकसित किया जाएगा। वहीं, गोल्ड ग्रीन्स गोल्फ एंड रिजाेर्ट, गोल्डन टर्टल फार्म विलेज, आइटीसी क्लासिक गोल्फ रिजाेर्ट, जान हाल, कर्मा लेकलैंड गोल्फ कोर्स, किंगडम आफ ड्रिम्स, मानेसर गोल्फ कोर्स, अलावर्दी खान की मास्क एंड सराय, शीतला माता मंदिर, शीश महल को शामिल किया गया है। इसी तरह सुलतानपुर बर्ड सेंच्यूरी, तारूधान गोल्फ कोर्स, टेरी गोल्फ कोर्स, द गोल्फ रिट्रीट फार्म भी पर्यटन हब के रूप में विकसित किए जाने वाले स्थानों में शामिल किया गया है।