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कानून-व्यवस्था को लेकर पटियाला पुलिस में बदलाव, थानों और चौकियों में नई तैनातियां

पटियाला. एस.एस.पी. वरुण शर्मा ने पटियाला पुलिस में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 3 थाना प्रभारियों (एस.एच.ओ.) सहित कई पुलिस चौकियों के इंचार्जों के तबादले कर दिए हैं। जारी आदेशों के अनुसार, इंस्पैक्टर गुरप्रीत सिंह हांडा को थाना कोतवाली का नया एस.एच.ओ. नियुक्त किया गया है, जबकि वहां तैनात इंस्पैक्टर जसप्रीत सिंह काहलों को पुलिस लाइन भेज दिया गया है। इसी प्रकार इंस्पेक्टर सौरभ सबरवाल को थाना लाहौरी गेट का एस.एच.ओ. नियुक्त किया गया है, जबकि इंस्पैक्टर रणदीप कुमार का तबादला पुलिस लाइन कर दिया गया है।  वहीं, इंस्पैक्टर विनरप्रीत सिंह को थाना सिविल लाइन का एस.एच.ओ. बनाया गया है और इंस्पैक्टर अमनदीप सिंह बराड़ को पुलिस लाइन भेज दिया गया है। इसके अलावा सब-इंस्पैक्टर लवदीप सिंह को मॉडल टाऊन पुलिस चौकी का इंचार्ज नियुक्त किया गया है, जबकि सब-इंस्पैक्टर गुरपिंदर सिंह को पुलिस लाइन स्थानांतरित कर दिया गया है। अन्य नियुक्तियों में ए.एस.आई. बलदेव सिंह को अफसर कॉलोनी पुलिस चौकी, पटियाला का इंचार्ज बनाया गया है। सब-इंस्पैक्टर जनक राज को थाना कोतवाली का अतिरिक्त एस.एच.ओ. (एडिशनल एस.एच.ओ.) नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही ए.एस.आई. अमरिंदर सिंह को भुनरहेड़ी पुलिस चौकी का इंचार्ज तथा ए.एस.आई. हरदीप सिंह को बहादुरगढ़ पुलिस चौकी का इंचार्ज नियुक्त किया गया है। यह फेरबदल पुलिस प्रशासन को और अधिक प्रभावी एवं चुस्त-दुरुस्त बनाने के उद्देश्य से किया गया है। 

एनसीआर में नहीं होगा बदलाव, चार नए ग्रीनफील्ड शहर बनेंगे: सीएम सैनी

पंचकूला हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के दायरे में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, हरियाणा के पांच जिला एनसीआर क्षेत्र में ही रहेंगे। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का रीजनल प्लान-2041 पर चर्चा हुई। इसमें एनसीआर के भविष्य के विकास, शहरी नियोजन, पर्यावरण संरक्षण, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और सस्टेनेबल ग्रोथ से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर बात हुई है। मुख्यमंत्री मंगलवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (एनसीआरपीबी )की बैठक में शामिल होने के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने बताया कि रीजनल प्लान-2041 को अंतिम रूप देने के लिए केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों (हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं दिल्ली) के वरिष्ठ अधिकारियों की एक सब-कमेटी गठित की गई है। यह सब-कमेटी 15 अगस्त, 2026 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट बोर्ड को सौंपेगी। आत्मनिर्भर शहरी केंद्र के रूप में विकसित होंगे जिसके बाद अगली बैठक दिसंबर 2026 में गुरुग्राम में आहोगी। आज की बैठक में आरआरटीएस (रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम) के साथ-साथ चार नए ग्रीनफील्ड शहर विकसित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बोर्ड के सभी सदस्य राज्य एक-एक नए ग्रीन फील्ड शहर की विकास योजना भेजेंगे। नमो सिटी के नाम से विकसित होने वाले यह शहर आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और आत्मनिर्भर शहरी केंद्र के रूप में विकसित किए जाएंगे। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र का संतुलित और सशक्त विकास मुख्यमंत्री ने कहा इन निर्णयों से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र का संतुलित और सशक्त विकास सुनिश्चित होगा। हरियाणा सरकार एनसीआर के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और ग्रीनफील्ड शहरों तथा आरआरटीएस परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाएगी। बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एके शर्मा, तथा राजस्थान के कैबिनेट मंत्री झाबर सिंह खर्रा शामिल हुए। इनके अलावा हरियाणा के मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कातिकिथाला, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर सहित एनसीआर क्षेत्र से संबंधित राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

पर्वतपुर–सीतानाला कोल ब्लॉक शुरू होने का रास्ता साफ, दुगदा वाशरी को मिलेगा स्थायी कोयला फीड

 बोकारो  झारखंड सरकार ने जिले के चंदनकियारी स्थित पर्वतपुर कोल ब्लॉक और सीतानाला कोल ब्लॉक के खनन पट्टा को स्वीकृत कर लिया है। इससे पूरे क्षेत्र में उत्साह और जश्न का माहौल है। लंबे समय से लंबित इस परियोजना को मंजूरी मिलने के साथ ही स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं में नई आशा जगी है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि कोयला खनन शुरू होने से चंदनकियारी में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। विधायक उमाकांत रजक ने इसे ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताते हुए कहा कि इससे रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना के विकास और स्थानीय व्यापार-व्यवसाय को बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला चंदनकियारी को विकास और आत्मनिर्भरता की नई दिशा देगा। विधायक का कहना है केि विकास के कार्यो से संबंधित फाइलों की धूल हटाने की कोशिश कर रहा हूं। विदित हो कि यह दोनों कोल ब्लाक जेएसडब्ल्यू स्टील को वर्ष 2023 में नीलामी के माध्यम से दिया गया था। तब से खनन पट्टा एवं अन्य स्वीकृति को लेकर उत्पादन प्रारंभ नहीं हो पा रहा था। अब खनन पट्टा मिलने के बाद जल्द ही उत्पादन प्रारंभ होने की संभावना है। अब निवेश, रोजगार और विकास पर नजर कैबिनेट की स्वीकृति के बाद पर्वतपुर कोल ब्लॉक के 2174.52 एकड़ तथा सीतानाला कोल ब्लॉक के लगभग 792 एकड़ क्षेत्र में खनन गतिविधियां शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा। खनन कार्य शुरू होने के साथ परिवहन, मशीनरी, ठेका कार्य, छोटे व्यापार, होटल और सेवा क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके अलावा सड़क, बिजली, जलापूर्ति और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों को अब उम्मीद है कि वर्षों से कागजों में अटकी परियोजनाएं धरातल पर उतरेंगी और चंदनकियारी कोयला आधारित औद्योगिक विकास के नए केंद्र के रूप में उभरेगा। वर्षों के इंतजार के बाद खुला रास्ता: पर्वतपुर कोल ब्लॉक का सफर पिछले कई वर्षों से उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 2020 में केंद्र सरकार ने गजट अधिसूचना जारी कर इसके संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) को सौंपने का निर्णय लिया था। उस समय यह माना गया था कि बंद पड़ी खदान के चालू होने से करीब चार हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकेगा। लगभग नौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस कोल ब्लॉक को भूमिगत (अंडरग्राउंड) खनन के रूप में विकसित करने की योजना थी ताकि आसपास के गांवों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। हालांकि, कोल ब्लॉक आवंटन नीति, कानूनी प्रक्रियाओं और स्वामित्व हस्तांतरण की जटिलताओं के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। पहले सेल इसकी देखरेख करता रहा, बाद में ब्लॉक बीसीसीएल के पास पहुंचा और अंततः वर्ष 2023 में जेएसडब्ल्यू स्टील ने नीलामी के माध्यम से इसे हासिल कर लिया। पर्वतपुर-सीता नाला परियोजना को संचालन की मंजूरी, दुगदा वाशरी को मिलेगा कच्चा कोयला सरकार से संचालन की अनुमति मिलने के बाद जेएसडब्ल्यू स्टील की पर्वतपुर एवं सीता नाला कोकिंग कोल परियोजना में उत्पादन शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। परियोजना से निकाले जाने वाले कोकिंग कोयले का उपयोग दुगदा कोल वाशरी में किया जाएगा, जिसका संचालन भी हाल ही में जेएसडब्ल्यू स्टील को सौंपा गया है। जानकारी के अनुसार, पांच वर्षों से अधिक समय से बंद पड़ी दुगदा कोल वाशरी को पुनः चालू करने की तैयारी तेज हो गई है। कंपनी वाशरी की मशीनरी और आधारभूत संरचना का आकलन कर रही है। वाशरी की वर्तमान क्षमता सालाना दो मिलियन टन वाश्ड कोल उत्पादन की है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर चार मिलियन टन तक ले जाने की योजना है। पर्वतपुर और सीता नाला परियोजना से मिलने वाला कच्चा कोयला दुगदा वाशरी के लिए स्थायी फीड का काम करेगा। इससे वाशरी के नियमित संचालन में मदद मिलेगी और कोकिंग कोल की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि खदान और वाशरी दोनों के संचालन की जिम्मेदारी एक ही कंपनी के पास होने से उत्पादन, परिवहन और प्रसंस्करण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी। दुगदा वाशरी के पुनः संचालन से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ इस्पात उद्योग को गुणवत्तापूर्ण वाश्ड कोकिंग कोल उपलब्ध होगा। इससे आयातित वाश्ड कोल पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी। बोकारो-धनबाद कोल बेल्ट में इसे एक महत्वपूर्ण औद्योगिक विकास के रूप में देखा जा रहा है।

बरसात में मछलियों के प्रजनन को बचाने के लिए 15 अगस्त तक नहीं होगी मछली पकड़ने की अनुमति

जगदलपुर. मछलियों के संरक्षण और प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए 16 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है. बरसात का मौसम मछलियों के प्रजनन का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए नदी और नालों में मछली शिकार पर रोक लगाई गई है. नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है. दोषी पाए जाने पर कारावास और आर्थिक दंड दोनों हो सकते हैं. हालांकि केज कल्चर गतिविधियों को छूट दी गई है. दूसरे राज्यों से मछली आयात और बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा. व्यापारियों को आयात से जुड़े दस्तावेज साथ रखना अनिवार्य होगा. बरसात में बड़ी संख्या में ग्रामीण मछली पकड़कर आय अर्जित करते हैं. इसी कारण प्रतिबंध अवधि में निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है. मत्स्य विभाग ने नियमों का पालन सुनिश्चित करने की अपील की है. उद्देश्य आने वाले वर्षों के लिए मत्स्य संसाधनों का संरक्षण करना है.

रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स माध्यम से संचालित किए जाने के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी

बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाएं और जन-कल्याण के लिए 24 हजार 200 करोड़ रूपये की स्वीकृति मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति के प्रस्ताव पर उप समिति गठित रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स माध्यम से संचालित किए जाने के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की पुनरीक्षित लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रूपये की स्वीकृति प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट और ग्रामों के पुनर्वास संबंधी मुआवजा के लिए 2,381 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति श्रमिक कल्याण संबंधी योजनाओं के लिए 531 करोड़ 78 लाख रूपये की स्वीकृति जनजातीय विद्यार्थियों को शैक्षणिक सुविधाओं के लिए 687 करोड़ रूपये की स्वीकृति रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 639 करोड़ 25 लाख रूपये की स्वीकृति स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 492 करोड़ 45 लाख रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में हुई। बैठक में मध्यप्रदेश के बुनियादी ढांचे और जन-कल्याण को बड़ी रफ्तार देते हुए कुल 24,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण सहित कुल 19,472 करोड़ 29 लाख रुपये का पुनरीक्षित बजट स्वीकृत किया गया। राज्य में विश्वस्तरीय सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने और परोपकारी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 'मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति 2026 लागू करने के प्रस्ताव पर मंत्रि-परिषद ने 5 सदस्यीय मंत्रि-मण्डल उप समिति का गठन किया है। समिति सभी संबंधित पहलुओं का अध्ययन कर रिपोर्ट देगी। मंत्रि-परिषद ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स मॉडल पर चलाने का पायलट प्रोजेक्ट भी मंजूर किया गया। वन्य-प्राणी संरक्षण और संवेदनशील क्षेत्रों के 94 गांवों के विस्थापन व मुआवजे के लिए 16वें वित्त आयोग की अवधि 2026-2031 के तहत 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रुपये आवंटित किए हैं। सामाजिक और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देते हुए जनजातीय विद्यार्थियों की शैक्षणिक व आवासीय सुविधाओं के लिए 687 करोड़ रुपये और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से रेशम उत्पादन की विभिन्न योजनाओं के लिए 639 करोड़ 25 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। मंत्रि-परिषद द्वारा श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन,औद्योगिक सुरक्षा और श्रमिक कल्याण योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए 531 करोड़ 78 लाख रुपये तथा स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन व ऑडिट व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन के लिए 492 करोड़ 45 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह सभी निर्णय आगामी पांच वर्षों में मध्यप्रदेश के समग्र, समावेशी और सतत विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ी पहल है। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की पुनरीक्षित लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की मूल लागत 7 हजार 500.80करोड़रूपये में 5 हजार 388.58 करोड़ रूपये की अतिरिक्त लागत जोड़कर पुनरीक्षित लागत 12 हजार 889.38 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके अतिरिक्त उ‌द्योग के स्वीकृत मानदंडों के अनुसार परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण पीपीपी घटक एवं आंतरिक ऋण के प्रभाव को सम्मिलित करते हुए 6 हजार 582.91 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस तरह कुल 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। अतिरिक्त वित्त पोषण में भारत शासन और मध्यप्रदेश शासन द्वारा 1,696 करोड़ 74 लाख रूपये की अतिरिक्त इक्विटी और केन्द्रीय करों के लिए 214 करोड़ 64 लाख रूपये का अतिरिक्त अधीनस्थ ऋण, वित्त पोषण एजेंसी बैंकों से ऋण निधि के विरुद्ध 3,496 करोड़ 15 लाख रूपये का अतिरिक्त पीटीए/आंतरिक ऋण, मध्यप्रदेश शासन से राज्य करों के लिए 656 करोड़ 96 लाख रूपये एवं आईडीसीकी लागत के लिए 518 करोड़ 42 लाख रूपये का अतिरिक्त ऋण शामिल है। प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट और ग्रामों के पुनर्वास संबंधी मुआवजा के लिए 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा वन विभाग के अंतर्गत प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट और ग्रामों के पुनर्वास के लिए मुआवजा सम्बंधी योजना के सोलहवें केन्द्रीय वित आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 5 वर्षों तक संचालन के लिए कुल 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट (नॉन-रिकरिंग), प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट (रिकरिंग) और प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट (प्रोजेक्ट एलिफेंट) के लिए एक हजार 131 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन तीनों योजनाओं से वन्यप्राणी संरक्षण के वैज्ञानिक सिद्धान्तों के आधार पर बनाई गई प्रबंध योजना का क्रियान्वयन किया जाना है, जिसमें मुख्यतः प्रदेश के टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान तथा गांधीसागर अभयारण्य में वन एवं वन्य-प्राणी सुरक्षा के लिए हैबीटेट सुधार, अग्नि एवं वन सुरक्षा, जल स्त्रोतों का विकास, वन मार्गो का रखरखाव आवश्यक संरचनाओं का निर्माण एवं उनका रखरखाव, हाथियों का प्रबंधन एवं सुरक्षा कार्य, रेस्क्यू सामग्री क्रय, कैम्प निर्माण, दवाईयां क्रय एवं हाथियों के लिए भोजन व्यवस्था आदि कार्य किए जायेंगे। ग्रामों के पुनर्वास के लिए मुआवजा सम्बंधी योजना के लिए एक हजार 250 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। योजना का मुख्य उद्देश्य संरक्षित वन क्षेत्रों में वन्य-प्राणियों के संवेदनशील आवास स्थलों को एवं वन्य-प्राणियों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहे ग्रामों को संरक्षित वन क्षेत्र के बाहर पुनर्वसित करना है। इसमें ग्रामीणों के अचल सम्पत्ति का विधि अनुसार अधिग्रहण कर निर्धारित मुआवजा का भुगतान किया जाता है। योजना का क्रियान्वयन संजय टाइगर रिजर्व, सतपुडा टाइगर रिजर्व, पन्ना टाइगर रिजर्व, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, रातापानी टाइगर रिजर्व, ओरछा अभयारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत 94 ग्रामों में किया जायेगा। श्रमिक कल्याण से संबंधित योजनाओं के लिए 531 करोड़ 78 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा श्रमिक कल्याण से संबंधित श्रम विभाग अंतर्गत विभिन्न योजनाओं के एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 5 वर्षों तक संचालन के लिए 531 करोड़ 78 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार श्रम आयुक्त कार्यालय के संचालन के लिए 57 करोड़ 48 … Read more

जासूसी एंगल की जांच तेज, यूपी के कई शहरों की तस्वीरें पाकिस्तान भेजने का आरोप; धार से गिरफ्तारी

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बाद एमपी एटीएस ने धार जिले से एक और संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है। संदिग्ध की पहचान हाजी अजहर के रूप में हुई है। इससे पहले एटीएस ने भोपाल से मोहम्मद फराज को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान टीम को कई अहम सुराग मिले हैं। अब तक इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तारी हो चुकी है। टीम ने इससे पहले नईम अब्दुल्ला को पकड़ा था। उसकी निशानदेही पर हरियाणा के नूंह से एक संदिग्ध को पूछताछ के लिए भोपाल लाया गया है। मोहम्मद फराज और नईम अब्दुल्ला से पूछताछ हो रही है। सूत्रों के अनुसार, दोनों की निशानदेही पर हुई कार्रवाई में जांच एजेंसी को कई अहम डिजिटल इनपुट मिले हैं। पाकिस्तान के नंबर पर होती थी बात सूत्रों के अनुसार में इस बात का खुलासा हुआ है कि संदिग्धों के मोबाइल फोन पर पाकिस्तान के नंबर मिले हैं। जांच के दौरान यह पाया गया है कि संदिग्ध पाकिस्तान और अफगानिस्तान के नंबरों से बात करते थे। फिलहाल जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश में है कि यह लोग किस नेटवर्क के संपर्क ने और क्या काम करते थे। भोपाल से गिरफ्तार संदिग्ध मोहम्मद फराज के मोबाइल की डिजिटल सबूत मिले हैं। इस सबूतों से साफ होता है कि वह विदेशी नेटवर्क के संपर्क में था और बातचीत के लिए एक स्पेशल ऐप का इस्तेमाल करता था। मामले का खुलासा होने के बाद जांच एजेंसी मोहम्मद फराज के चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है। यूपी के शहरों की भेजी गई तस्वीरें सूत्रों के अनुसार जांच में यह बात सामने आई है कि नईम अब्दुल्ला ने उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों की तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान भेज हैं। फराज के मोबाइल फोन की डिजिटल जांच में ऐसे सबूत मिले हैं।     MP में ATS की बड़ी कार्रवाई     धार से एक संदिग्ध को किया गिरफ्तार     भोपाल से मोहम्मद फराज की हुई थी गिरफ्तारी     जांच में खुलासा, यूपी के कई शहर की भेजी गई फोटो आर्थिक लेनदेन की जांच जांच एजेंसी गिरफ्तार सभी संदिग्धों के आर्थिक लेन देन की जांच भी कर रही है। फिलहाल इसको लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। टीम ने पूरे मामले की जांच तेज कर दी है।

हार के खिलाफ एक्शन में ममता बनर्जी, भवानीपुर परिणाम को लेकर हाईकोर्ट में दायर की याचिका

 कोलकाता ममता बनर्जी ने भवानीपुर की हार को कोलकाता हाईकोर्ट में चुनौती दी है. पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज दोपहर अचानक कोलकाता हाई कोर्ट पहुंच गईं और भवानीपुर विधानसभा रिजल्ट के नतीजे को चुनौती दी है. ममता बनर्जी के साथ सांसद डेरेक ओ ब्रायन, डोला सेना और कल्याण बनर्जी मौजूद थे. रिपोर्ट के अनुसार ममता याचिका के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने कोर्ट पहुंचीं थीं।  भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधी टक्कर थी. इस सीट से पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जीत हासिल की है. जबकि ममता को हार का मुंह देखना पड़ा था. कांटे की टक्कर में इस सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने इस सीट पर ममता बनर्जी को 15104 वोटों से मात दी थी. इस सीट पर शुभेंदु अधिकारी को 73917 और ममता बनर्जी को 58812 वोट मिले थे. तीसरे स्थान पर रहे सीपीएम के श्रीजीब विश्वास को 3556 वोट मिले थे।  ममता बनर्जी मतगणना के दिन 16-17 राउंड तक आगे ही थीं. लेकिन दोनों उम्मीदवारों के बीच गैप धीरे धीरे कम होता गया. आखिर मतगणना के आखिरी चरणों में शुभेंदु अधिकारी ने तगड़ी लीड ली और आखिरकार 15104 वोट से चुनाव जीत गए। इस सीट पर मतगणना के दौरान काफी हंगामा भी हुआ था। उन्होंने भवानीपुर विधानसभा रिजल्ट के नतीजे को चुनौती दी. ममता बनर्जी के साथ सांसद डेरेक ओ ब्रायन, डोला सेना और कल्याण बनर्जी भी उपस्थित थे। आपको बता दें कि भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधी टक्कर देखी गई थी. इस सीट से पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने जीत हासिल की. वहीं ममता को हार का मुंह देखने को मिला. कांटे की टक्कर में इस सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15104 वोटों से हराया था।  

लखनऊ मेट्रो सेकंड फेज शुरू, पीजीआई से बाराबंकी तक पहुंचेगा नेटवर्क, 40 लाख लोगों को फायदा

लखनऊ  लखनऊ मेट्रो का महाविस्तार होने जा रहा है। मेट्रो के सेकंड फेज के लिए काम शुरू हो गया है। टेंडर होने के बाद जुलाई से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है। बताया जा रहा है कि लखनऊ में मेट्रो का नेटवर्क रेलवे से भी बड़ा हो जाएगा इसमें शहर के आसपास के इलाकों को भी कवर किया जाएगा। आगे के चरणों में पीजीआई, बख्शी का तालाब, बाराबंकी तक मेट्रो की सुविधा मिलेगी। इसके तहत 150 किमी का नया मेट्रो ट्रैक बिछाया जाएगा। दस नए कॉरिडोर बनेंगे। मेट्रो कॉरिडोर के विस्तार के लिए मंजूरी इसमें शहर में तकरीबन दस नए मेट्रो कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इस रिपोर्ट को शासन को भेजी गई थी। सरकार ने मेट्रो कॉरिडोर के विस्तार के लिए मंजूरी भी दे दी है। अब मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की ओर से विस्तृत कार्ययोजना (डीपीआर) बनाई जा रही है। इस मामले निगरानी मुख्य सचिव के जरिये खुद मुख्यमंत्री कर रहे हैं। 35 से 40 लाख की आबादी को लाभ मिलेगा सूत्र बताते हैं कि अयोध्या रोड पर बाराबंकी तक, सीतापुर रोड पर इटौंजा तक, कानपुर रोड पर उन्नाव तक, हरदोई रोड पर संडीला तक के अतिरिक्त इसका पीजीआई और मोहनलालगंज तक विस्तार किया जाएगा। एयरपोर्ट से मुंशी पुलिया वाली मेट्रो लाइन को आगे तक बढ़ाया जाएगा। अनुमान के मुताबिक मेट्रो विस्तार होने से लखनऊ की 35 से 40 लाख की आबादी को इसका लाभ मिलेगा। करीब 10 वर्ष में पूरा होगा प्रोजेक्ट प्राप्त जानकारी के अनुसार बाराबंकी, संडीला, उन्नाव, इटौंजा, मोहनलालगंज तक कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी। प्रोजेक्ट करीब 10 वर्ष में पूरा होगा। इस पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मेट्रो का विस्तार 150 किलोमीटर तक होने जा रहा है। मेट्रो की ओर से कराए गए सर्वे के आधार पर नेटवर्क विस्तार का प्रस्ताव तैयार किया गया है।     मेट्रो प्रशासन की ओर से तैयार कराए जा रहे डीपीआर में सभी मेट्रो स्टेशनों पर पार्किंग सुविधाओं को विकसित किया जाएगा।     यहां ई साइकिल, ई-बाइक जैसी ई-व्हीकल सेवाएं भी यात्रियों को मिलेंगी।     पीजीआई, मोहनलालगंज, गोसाईंगंज, बंथरा, राजाजीपुरम, काकोरी, दुबग्गा, मलिहाबाद, रहीमाबाद, कमता, चिनहट, मटियारी, बीबीडी, तिवारीगंज, सफेदाबाद, मड़ियांव, केशवनगर, आईआईएम, बृज की रसोई, बख्शी का तालाब, इटौंजा, जानकीपुरम आदि इलाकों को कवर करने की योजना है।

कोर्ट केस और नोटिस के बाद आगरा प्रशासन ने मजार शिफ्टिंग का लिया फैसला

आगरा आगरा पुलिस प्रशासन ने एमजी रोड पर आगरा कॉलेज के सामने बीच सड़क स्थित विवादित मजार को हटाने की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है. यातायात बाधित होने और हादसों की आशंका के कारण इस मजार को हटाने की मांग लंबे समय से हो रही थी. प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच कई दौर की चर्चा के बाद सहमति बनी, जिसके तहत अब कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच पुलिस बल की निगरानी में मजार को शिफ्ट किया जा रहा है. इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर एमजी रोड के इस रास्ते को रोक दिया गया है. हिंदूवादी नेता ने दायर किया था कोर्ट में वाद इस मजार को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद भी चल रहा था. हिंदूवादी नेता कुंवर अजय तोमर ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से दोनों मजारों के ध्वस्तीकरण की मांग को लेकर अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में वाद दायर किया था. वादी का आरोप था कि यह मजार और दरगाह सरकारी भूमि पर बनी हैं. अधिकारियों को जारी हुआ था समन इससे पहले कुंवर अजय तोमर ने 19 जनवरी 2026 को धारा 80 सीपीसी के तहत नोटिस भेजकर कार्रवाई की मांग की थी. अधिकारियों द्वारा समय सीमा में जवाब न देने पर उन्होंने कोर्ट का रुख किया. इसके बाद न्यायाधीश श्वेत्शा चंद्रा की अदालत ने वाद स्वीकार करते हुए आगरा के जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता को समन जारी किए थे. आखिरकार अब सहमति से शिफ्टिंग की कार्रवाई की जा रही है. पक्षकार का बयान योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष और ताजमहल-तेजोमहालय केस के पक्षकार हिंदूवादी नेता कुंवर अजय तोमर लगातार इसके लिए लड़ रहे थे. कुंवर अजय तोमर ने मजार के ध्वस्तीकरण के लिए 19 जनवरी 2026 को आगरा नगर निगम के नगर आयुक्त, पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता और डीएम को धारा 80 सीपीसी का नोटिस भेजा था जिस पर अधिकारियों ने ना कोई संज्ञान लिया और ना कोई कार्रवाई की थी, जिसके बाद उन्होंने 10 अप्रैल 2026 को अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में वाद दाखिल किया था. जिसमें अभी अगले महीने 21 जुलाई को सुनवाई भी होनी है लेकिन उससे पहले ही अब प्रशासन ने मजार पर कार्रवाई कर दी है. यह मामला डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य तक भी पहुंचा था और उन्होंने भी अधिकारियों को कार्रवाई के आदेश दिए थे. वहीं, कुंवर अजय तोमर ने पूरी कार्रवाई पर प्रशासन का आभार जताया है और इस कार्रवाई को अपनी बड़ी जीत बताया है उन्होंने कहा कि यह आगरा वासियों के लिए  राहत भरी खबर है इससे कहीं ना कहीं अब जाम की समस्या से राहत मिलेगी, यातायात बाधित नहीं होगा. तोमर ने कहा कि हमारी लड़ाई यही नहीं रुकेगी सामने नागरी प्रचारिणी के बराबर में बनीं दरगाह का भी आधा हिस्सा अवैध है उस पर भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी चाहिए. अजय तोमर का कहना है कि कोर्ट में हमने जो वाद दाखिल किया है उसमें एमजी रोड वाली मजार और सामने बनी दरगाह दोनों शामिल है. बता दें कि कुंवर अजय तोमर ने इसके अलावा 27 मस्जिदों मजारों और दरगाहों पर कार्रवाई के लिए एक और धारा 80 सीपीसी का नोटिस नगर निगम के नगर आयुक्त, पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता, आगरा के डीएम और छावनी परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भेजा है.

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ रहे राजस्थान के लाखों असंगठित श्रमिक

जयपुर किसी भी देश या प्रदेश के विकास की यात्रा तभी सार्थक होती है, जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक उसके हक और योजनाओं की पहुंच हो। अंत्योदय के इसी संकल्प को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी क्रम में ‘ई-श्रम पोर्टल’ एक ऐतिहासिक पहल के रूप में उभरा है। इस पोर्टल के जरिए ना केवल श्रमिकों का एकीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, बल्कि यूनिवर्सल अकाउंट नंबर के जरिए उन तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है। हमारे देश की अर्थव्यवस्था में असंगठित क्षेत्र का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्यों, कृषि, घरेलू सेवाओं, रेहड़ी-पटरी व्यवसाय, परिवहन, वस्त्र उद्योग के साथ ही गिग वर्कर्स अपनी मेहनत से देश की प्रगति में योगदान दे रहे हैं। इन असंगठित श्रमिकों की कोई समग्र और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं होने से उन तक योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होता है। इसी को देखते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 26 अगस्त 2021 को ई-श्रम पोर्टल की शुरुआत की गई। ई-श्रम पोर्टल के प्रति राजस्थान के श्रमिकों में बढ़ती जागरुकता मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान भी इस महत्वपूर्ण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। राज्य में ई-श्रम पोर्टल के प्रति श्रमिकों की बढ़ती जागरुकता के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अब तक राजस्थान में 1 करोड़ 54 लाख 50 हजार 294 श्रमिक ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें 82 लाख 40 हजार 291 महिलाएं और 72 लाख 9 हजार 896 पुरुष श्रमिक शामिल हैं। यह तथ्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि महिलाओं की भागीदारी 53.33 प्रतिशत है, जो आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती सक्रियता का परिचायक है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधार कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक पंजीकरण राजस्थान में पंजीकृत श्रमिकों के क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें, तो कृषि क्षेत्र सबसे आगे है। राज्य में 85 लाख 99 हजार 316 कृषि श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। इसके बाद निर्माण क्षेत्र के 24 लाख 29 हजार 179 तथा वस्त्र एवं परिधान उद्योग के 8 लाख 2 हजार 650 श्रमिक पंजीकृत हुए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि ई-श्रम पोर्टल ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों को एक साझा मंच पर लाने में सफलता प्राप्त की है। पंजीकरण के विभिन्न माध्यमों का विश्लेषण करें तो स्वयं पंजीकरण की प्रक्रिया को श्रमिकों ने व्यापक रूप से अपनाया है। राज्य में 1 करोड़ 2 लाख 27 हजार 852 श्रमिकों ने स्वयं ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। इसके अतिरिक्त कॉमन सर्विस सेंटर्स के माध्यम से 51 लाख 62 हजार 175 श्रमिकों का पंजीकरण हुआ है। राज्य सेवा केंद्रों, उमंग प्लेटफॉर्म तथा अन्य माध्यमों से भी हजारों श्रमिक इस अभियान से जुड़े हैं। यह दर्शाता है कि सरकार ने श्रमिकों तक पहुंच बनाने के प्रभावी प्रयास किए हैं। वन-स्टॉप-सॉल्यूशन’ से एक क्लिक दूर योजनाएं ई-श्रम पोर्टल पर 21 अक्टूबर 2024 को ‘वन-स्टॉप-सॉल्यूशन’ की शुरुआत की गई, जिसके माध्यम से विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं को एकीकृत किया गया। इस व्यवस्था ने श्रमिकों के लिए योजनाओं की जानकारी प्राप्त करना और लाभ उठाने को पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल बना दिया है। अब पंजीकृत श्रमिक एक क्लिक पर प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना, व्यापारियों एवं स्व-रोजगार व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम-वृद्धावस्था सुरक्षा, आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, बुनकर स्वास्थ्य बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना तथा सफाई कर्मचारियों-हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्तियों के पुनर्वास संबंधी योजनाओं जैसी अनेक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ सकते हैं। इसके साथ ही ई-श्रम पोर्टल रोजगार, कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा दे रहा है। दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना, गरीब कल्याण रोजगार योजना, दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम जैसी योजनाओं को पोर्टल से जोड़कर श्रमिकों के लिए रोजगार और आजीविका के नए द्वार खोले गए हैं। इससे ना केवल रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि श्रमिक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हो रहे हैं। सरल और सुलभ पंजीकरण प्रक्रिया से बढ़ी सक्रियता ई-श्रम पोर्टल की एक बड़ी विशेषता इसकी सरल और सुलभ पंजीकरण प्रक्रिया है। 16 से 59 वर्ष आयु वर्ग का कोई भी असंगठित श्रमिक (जो ईपीएफओ, ईएसआईसी या सरकारी वित्त पोषित राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का सदस्य नहीं हो) इस पोर्टल पर पंजीकरण कर सकता है। श्रमिक अपने आधार और मोबाइल नंबर के माध्यम से स्वयं ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर या राज्य सेवा केंद्र में भी निःशुल्क पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। उमंग ऐप और पोर्टल के माध्यम से भी श्रमिक अपनी प्रोफाइल को विभिन्न योजनाओं से जोड़कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। राजस्थान सहित पूरे देश में ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से असंगठित श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का नया अध्याय लिखा जा रहा है। वर्तमान समय में ई-श्रम पोर्टल असंगठित श्रमिकों के लिए केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। यह श्रमिकों को पेंशन, बीमा, स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा, कौशल विकास और रोजगार जैसी आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने वाला एकीकृत मंच है। साथ ही, सरकार को भी लक्षित लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंचाने में सहायता मिल रही है। यह पहल ना केवल श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि विकसित भारत एवं विकसित राजस्थान-2047 के संकल्प को पूरा करने में उनकी भागीदारी को भी सुनिश्चित कर रही है।