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चार राज्यों से 4 संदिग्ध गिरफ्तार, पाकिस्तानी कनेक्शन की जांच तेज; डिजिटल सबूत खंगाल रही एजेंसियां

भोपाल  मध्य प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) की जांच में देश विरोधी गतिविधियों के आरोपितों से जुड़े नए और चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इंटरनेट मीडिया और वाट्सएप के जरिए संपर्क में रहने वाला पाकिस्तानी हैंडलर आरोपित युवकों को नियमित रूप से जिम जाने, शारीरिक रूप से फिट रहने और पासपोर्ट बनवाने का निर्देश दे रहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि उन्हें भविष्य में प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेजने की तैयारी की जा रही थी। एटीएस सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर युवकों को कथित तौर पर “लड़ाके” बनने के लिए शारीरिक रूप से तैयार रहने की सलाह देता था। इसी क्रम में पासपोर्ट बनवाने पर भी विशेष जोर दिया गया था। अब तक गिरफ्तार आरोपितों में केवल भोपाल निवासी फराज के पास पासपोर्ट मिलने की पुष्टि हुई है। चार राज्यों से चार आरोपित गिरफ्तार इस मामले में एटीएस अब तक चार आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें भोपाल से फराज, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से नईम अब्दुल्ला, राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव और बिहार के मधुबनी से इजहार उल हक को पकड़ा गया है। सबसे पहले गिरफ्तार किए गए फराज को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। आतंकी संगठनों से संबंधों की जांच जारी एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपितों के संबंध किसी आतंकी संगठन से थे या नहीं। हालांकि प्रारंभिक पूछताछ में सभी आरोपित किसी बड़े संगठन से जुड़े होने से इन्कार करते रहे हैं। इसके बावजूद जांच एजेंसियां इस दावे की गहन पड़ताल कर रही हैं। डिजिटल सबूतों की होगी फोरेंसिक जांच जांच का फोकस अब आरोपितों से जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों पर है। एटीएस इन डिवाइसों से डेटा रिकवर कर उनके ऑनलाइन नेटवर्क, सोशल मीडिया संपर्कों और चैटिंग रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। इसके साथ ही उन लोगों की पहचान भी की जा रही है, जो इन आरोपितों के संपर्क में थे। सूत्रों का मानना है कि डिजिटल जांच के बाद इस मामले में और लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है, जिससे गिरफ्तार आरोपितों की संख्या बढ़ने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। फंडिंग के सबूत अभी नहीं मिले जांच एजेंसियों के मुताबिक अब तक किसी संस्था, संगठन या व्यक्ति द्वारा देश विरोधी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता दिए जाने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि आरोपितों के बैंक खातों और लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है, ताकि किसी संभावित फंडिंग नेटवर्क का पता लगाया जा सके।  

ATS का बड़ा ऑपरेशन: कई राज्यों में फैले आतंकी मॉड्यूल पर शिकंजा, 6 गिरफ्तारी, पाकिस्तान कनेक्शन की जांच तेज

भोपाल  तारीख 11 जून… वक्त तड़के का था और भोपाल का काजी कैंप अभी नींद में था। तभी अचानक एटीएस की एक विशेष टीम चुपचाप इलाके में दाखिल हुई। न कोई सायरन, न कोई हलचल। कुछ ही मिनटों में नन्हें बी की मस्जिद के पास रहने वाले मोहम्मद फराज को हिरासत में ले लिया गया। ऑपरेशन इतना गोपनीय था कि स्थानीय पुलिस तक को इसकी भनक नहीं लगी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ठीक उसी समय, भोपाल से करीब 1000 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भी एटीएस की टीमें एक और संदिग्ध पर शिकंजा कस रही थीं। आखिर ऐसा क्या सुराग मिला था जिसने दो राज्यों में एक साथ यह हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन शुरू करवा दिया? इसके पीछे के चेहरे कौन थे और इस पूरे नेटवर्क का मकसद क्या था? आइए जानते हैं इस पूरे मामले की अंदरूनी कहानी।  सबसे पहले समझते हैं कि मामला क्या था?  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) देशभर में संदिग्ध गतिविधियों, विदेशी एप्लीकेशनों, डार्क वेब नेटवर्क और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय समूहों की लगातार निगरानी करती है। इसी दौरान एनआईए को भोपाल के काजीकैंप क्षेत्र निवासी मोहम्मद फराज तथा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हुईं।प्रारंभिक जांच के बाद दोनों की निगरानी शुरू की गई और आगे की जांच की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) को सौंपी गई। एटीएस ने 11 जून की तड़के कार्रवाई करते हुए मोहम्मद फराज को भोपाल से हिरासत में लिया। वहीं, उत्तर प्रदेश एटीएस और एसटीएफ की मदद से नईम अब्दुल्ला को देवबंद से गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया। दोनों को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया। बाद में 16 जून को फराज को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया, जबकि नईम अब्दुल्ला 20 जून तक एटीएस रिमांड पर है। अब जानते हैं इस कथित नेटवर्क का उद्देश्य क्या था? जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों पर पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से प्राप्त कट्टरपंथी साहित्य और जिहादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने का आरोप था। उनका उद्देश्य बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को प्रभावित कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करना था। जांच में यह भी सामने आया है कि युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें देशविरोधी गतिविधियों, सामाजिक अशांति, टारगेट किलिंग और हिंसक घटनाओं के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा था। साथ ही शरिया कानून के समर्थन में वैचारिक अभियान चलाने के संकेत भी मिले हैं। अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं? इस मामले में अब तक छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हाल-फिलहाल में बिहार के मधुबनी जिले से इजहार-उल-हक को गिरफ्तार किया गया है। उसे भोपाल लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां से 20 जून तक एटीएस रिमांड पर भेजा गया है।  फराज ने क्या-क्या उगला? फराज की पूछताछ में कई चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। वह मध्यप्रदेश के बाहर भी अपना स्लीपर सेल खड़ा कर रहा था। इसके लिए उसे नईम और पाकिस्तान के साथ एक खाड़ी देश में बैठे हैंडलर डायरेक्शन दे रहे थे। फराज की पूछताछ के बाद एटीएस ने धार निवासी हाजी अहजर को गिरफ्तार किया है। एमपी एटीएस ने हरियाणा के नूंह से भी एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। वह भी फराज के संपर्क में कई महीनों से था और जिहादी नेटवर्क को स्थानीय स्तर पर खड़ा करने का प्रयास कर रहा था। हालांकि नूंह में हिरासत में लिए गए युवक की अधिकृत गिरफ्तारी अभी नहीं की है। विदेशी फंडिंग और डिजिटल उपकरणों की जांच एटीएस ने फराज और उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों को हो रही विदेशी फंडिंग की भी बहुत गहनता से जांच कर रही है। इसी जांच में गिरोह का खुलासा हुआ है। वहीं उसके पास से बरामद मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स की जांच की जा रही है। मध्यप्रदेश में नेटवर्क खड़ा करने, गरीब और बैचलर युवकों का ब्रेनवॉश करने और सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी सोच फैलाने का टास्क फराज को मिला था। फराज के संपर्क में अब तक करीब आधा दर्जन युवकों  के होने का पता चला है। पुलिस उन सभी युवकों की सोशल मीडिया प्रोफाइल खंगालने के साथ उनकी हर गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखे हुए है। टेलीग्राम-वाट्सएप ग्रुप से युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा था। शनिवार से ही उसका परिवार काजीकैंप स्थित मकान में ताला बंद कर फरार हो गया है। वहीं कॉलोनी की जिस क्लीनिक पर फराज काम करता था, उसमें भी शनिवार से ताला लटका हुआ है।  डार्क एप्स और सोशल मीडिया गतिविधियां भी जांच के दायरे में सूत्रों के अनुसार, आरोपी कुछ डार्क एप्स के माध्यम से संदिग्ध समूहों के संपर्क में था। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि उसने गाजा के समर्थन में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट की थीं। हालांकि, इन सभी आरोपों की जांच अभी जारी है और एजेंसियां आरोपी के डिजिटल नेटवर्क तथा संभावित विदेशी संपर्कों के हर पहलू की गहनता से जांच कर रही हैं।   आगे जांच की दिशा क्या होगी? अब तक पांच राज्यों में इस कथित मॉड्यूल के नेटवर्क से जुड़े तार मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कुछ और संदिग्धों की गिरफ्तारी हो सकती है। फिलहाल नईम अब्दुल्ला, शाकिर और इजहार-उल-हक एटीएस रिमांड पर हैं। जांच एजेंसियां मोहम्मद फराज, नईम अब्दुल्ला, शाकिर मेव और इजहार-उल-हक को इस नेटवर्क की प्रमुख कड़ियों के रूप में देख रही हैं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।  

जासूसी एंगल की जांच तेज, यूपी के कई शहरों की तस्वीरें पाकिस्तान भेजने का आरोप; धार से गिरफ्तारी

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बाद एमपी एटीएस ने धार जिले से एक और संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है। संदिग्ध की पहचान हाजी अजहर के रूप में हुई है। इससे पहले एटीएस ने भोपाल से मोहम्मद फराज को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान टीम को कई अहम सुराग मिले हैं। अब तक इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तारी हो चुकी है। टीम ने इससे पहले नईम अब्दुल्ला को पकड़ा था। उसकी निशानदेही पर हरियाणा के नूंह से एक संदिग्ध को पूछताछ के लिए भोपाल लाया गया है। मोहम्मद फराज और नईम अब्दुल्ला से पूछताछ हो रही है। सूत्रों के अनुसार, दोनों की निशानदेही पर हुई कार्रवाई में जांच एजेंसी को कई अहम डिजिटल इनपुट मिले हैं। पाकिस्तान के नंबर पर होती थी बात सूत्रों के अनुसार में इस बात का खुलासा हुआ है कि संदिग्धों के मोबाइल फोन पर पाकिस्तान के नंबर मिले हैं। जांच के दौरान यह पाया गया है कि संदिग्ध पाकिस्तान और अफगानिस्तान के नंबरों से बात करते थे। फिलहाल जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश में है कि यह लोग किस नेटवर्क के संपर्क ने और क्या काम करते थे। भोपाल से गिरफ्तार संदिग्ध मोहम्मद फराज के मोबाइल की डिजिटल सबूत मिले हैं। इस सबूतों से साफ होता है कि वह विदेशी नेटवर्क के संपर्क में था और बातचीत के लिए एक स्पेशल ऐप का इस्तेमाल करता था। मामले का खुलासा होने के बाद जांच एजेंसी मोहम्मद फराज के चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है। यूपी के शहरों की भेजी गई तस्वीरें सूत्रों के अनुसार जांच में यह बात सामने आई है कि नईम अब्दुल्ला ने उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों की तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान भेज हैं। फराज के मोबाइल फोन की डिजिटल जांच में ऐसे सबूत मिले हैं।     MP में ATS की बड़ी कार्रवाई     धार से एक संदिग्ध को किया गिरफ्तार     भोपाल से मोहम्मद फराज की हुई थी गिरफ्तारी     जांच में खुलासा, यूपी के कई शहर की भेजी गई फोटो आर्थिक लेनदेन की जांच जांच एजेंसी गिरफ्तार सभी संदिग्धों के आर्थिक लेन देन की जांच भी कर रही है। फिलहाल इसको लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। टीम ने पूरे मामले की जांच तेज कर दी है।

फराज को मिला था युवाओं का ब्रेनवॉश करने का टास्क, ATS ने आतंक मॉड्यूल के तीसरे आरोपी को दबोचा

भोपाल/अलवर एमपी एटीएस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आतंकी साजिश से जुड़े मामले में तीसरे आरोपी शाकिर मेव को गिरफ्तार किया है। उसे राजस्थान के अलवर जिले के टप्पुकरा थाना क्षेत्र से पकड़ा गया। शाकिर मेव सेकंड हेड कमांडर की भूमिका में था और साजिश में अहम भूमिका निभाता था। आरोपी को न्यायालय में पेश कर 20 जून तक रिमांड पर लिया है। दूसरी ओर, भोपाल के काजी कैंप से गिरफ्तार मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह से पूछताछ में जांच एजेंसियों को चौंकाने वाले इनपुट मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक उसे कथित तौर पर पाकिस्तानी हैंडलर्स ने मध्यप्रदेश में नेटवर्क खड़ा करने, गरीब और बैचलर युवकों का ब्रेनवॉश करने और सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी सोच फैलाने का टास्क सौंप रखा था। जांच में यह भी सामने आया है कि उसे “लश्कर कमांडर” के नाम से नई पहचान दी गई थी, जिसके जरिए वह सोशल मीडिया नेटवर्क को बढ़ाने और युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा था। यह पहचान उसके साथी नईम अब्दुल्ला ने उपलब्ध कराई थी। दोनों को रिमांड पर लेकर अलग-अलग और आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है। जांच में पाकिस्तानी संपर्क, डिजिटल नेटवर्क, टारगेट किलिंग की साजिश और फंडिंग से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल हो रही है। टेलीग्राम-वाट्सएप ग्रुप से युवाओं को जोड़ने की कोशिश शुरुआती जांच में सामने आया है कि टेलीग्राम और वाट्सएप ग्रुप्स के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। फराज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को जोड़ने और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े वीडियो साझा करने के लिए ग्रुप बनाता था। वह पिछले करीब चार वर्षों से डिजिटल गतिविधियों में सक्रिय था। अब एटीएस डिजिटल गतिविधियों, विदेशी फंडिंग और पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही है। फराज का साथी नईम देवबंद से गिरफ्तार इधर, फराज की निशानदेही पर उसके साथी नईम अब्दुल्ला को देवबंद से शनिवार को गिरफ्तार किया गया। देवबंद से गिरफ्तारी को जांच में अहम कड़ी माना जा रहा है क्योंकि इससे नेटवर्क के कनेक्शन और लिंक की दिशा स्पष्ट हो रही है। दोनों को अदालत में पेश करने के बाद 16 जून तक रिमांड पर भेजा गया है। फराज को एटीएस ने हिरासत में लिया था गुरुवार तड़के करीब 3:30 बजे काजी कैंप स्थित घर पर एटीएस की टीम ने दबिश दी थी। कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय रखी गई थी। करीब 12 अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम में तीन महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं। टीम ने पहले घर को चारों तरफ से घेर लिया, फिर छत के रास्ते अंदर पहुंचकर फराज को हिरासत में लिया। डॉक्टर के क्लिनिक पर काम करता था फराज जांच एजेंसियों के मुताबिक फराज मोहल्ले में ही एक डॉक्टर के क्लीनिक पर काम करता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसने देवबंद में रहकर धार्मिक शिक्षा ली थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात सहारनपुर निवासी नईम अब्दुल्ला से हुई थी। नईम के जरिए फराज का संपर्क कथित रूप से विदेशी हैंडलर्स से हुआ। जांच एजेंसी को आशंका है कि दोनों के माध्यम से एक नेटवर्क तैयार करने की कोशिश की जा रही थी। अब एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि इस नेटवर्क से प्रदेश में कितने लोग जुड़े थे। मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट की जांच फराज का मोबाइल जब्त कर फॉरेंसिक जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि मोबाइल डेटा से उसके संपर्कों, गतिविधियों और कथित फंडिंग नेटवर्क से जुड़े लोगों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच जारी है। पूछताछ में सामने आया है कि फराज चार वर्षों से टेलीग्राम और वाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर कई ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था। एजेंसियां उसके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही हैं। उसके संपर्कों की सूची तैयार की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क तक पहुंचा जा सके। उसके मोबाइल की CDR भी खंगाली जा रही है। विदेशी फंडिंग की हो रही जांच फराज ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि उसके पिता बैटरी रिपेयरिंग का काम करते हैं। परिवार में वह इकलौता लड़का है। बताया गया है कि पाकिस्तानी हैंडलर्स उसे गरीब तबके के युवाओं को जोड़ने और मिशन आगे बढ़ाने की सलाह देते थे। एटीएस उसके बैंकिंग रिकॉर्ड्स भी खंगाल रही है ताकि विदेशी फंडिंग का खुलासा हो सके।

पाकिस्तान कनेक्शन की जांच तेज: भोपाल से गिरफ्तार मोहम्मद फराज के पास मिलीं कथित जिहादी PDF फाइलें

भोपाल मध्य प्रदेश ATS ने भोपाल से एक ऐसे कथित कट्टरपंथी मॉड्यूल का खुलासा किया है, जिसके तार पाकिस्तान, देवबंद, डार्क ऐप्स, जिहादी साहित्य, मार्शल आर्ट ट्रेनिंग और अफगानिस्तान तक जाते बताए जा रहे हैं. पुराने भोपाल के काजी कैंप इलाके से गिरफ्तार 35 वर्षीय मोहम्मद फराज को एजेंसी एक ऐसे इंटरस्टेट नेटवर्क की अहम कड़ी मान रही है, जिसे कथित तौर पर लोन वुल्फ हमलों के लिए तैयार किया जा रहा था. सूत्रों के मुताबिक इस ग्रुप का हैंडलर पाकिस्तान में बैठा था. निर्देश साफ थे. हथियार खरीदो, तैयार रहो और जरूरत पड़ने पर विदेश जाने के लिए भी तैयार रहो. जांच एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क से जुड़े युवाओं को मिलिशिया ट्रेनिंग के बाद दुनिया के दूसरे देशों में भी जिहाद के नाम पर लड़ाई के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी थी। पाकिस्तान से भेजी गई कथित जिहादी दस्तावेजी PDF फाइलें MP ATS के IG डॉ. आशीष ने बताया, “मोहम्मद फराज, जो पुराने भोपाल के काजी कैंप इलाके का रहने वाला है, उसे MP ATS ने गिरफ्तार कर विशेष अदालत में पेश किया. अदालत ने उसे विस्तृत पूछताछ के लिए 16 जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। जानकारी के अनुसार फराज भोपाल में एक डॉक्टर के क्लीनिक पर काम करता था. बाहर से सामान्य जिंदगी, लेकिन मोबाइल और ऑनलाइन गतिविधियों में एजेंसियों को ऐसे इनपुट मिले हैं, जिनके आधार पर उसकी गहन जांच की जा रही है. ATS का दावा है कि वह कथित तौर पर स्पेशल ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान जाने की तैयारी में था। जांच के दौरान ATS ने आरोपी के मोबाइल फोन से पाकिस्तान से भेजी गई कथित जिहादी दस्तावेजी PDF फाइलें बरामद करने का दावा किया है. एजेंसी अब उसके डिजिटल डेटा, चैट, सोशल मीडिया अकाउंट, ऑनलाइन संपर्कों और संदिग्ध ग्रुप्स की परतें खोल रही है। मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी सूत्रों के अनुसार फराज सिर्फ डिजिटल कट्टरपंथी सामग्री तक सीमित नहीं था. वह मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी ले रहा था. एजेंसियों को शक है कि वह कुछ डार्क ऐप्स के जरिए संदिग्ध ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था. उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच में प्रारंभिक तौर पर गाजा के समर्थन में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी सामने आने की बात कही जा रही है। ATS के मुताबिक यह कार्रवाई खास इनपुट के आधार पर की गई. एजेंसी को सूचना मिली थी कि फराज एक पाकिस्तानी WhatsApp ग्रुप से जुड़ा हुआ है और सीमा पार बैठे हैंडलर के निर्देश पर मध्य प्रदेश सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा है। पूछताछ में फराज ने कथित तौर पर बताया कि वह पिछले 5-6 साल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के संपर्क में था. ATS का दावा है कि नईम ने ही फराज को पाकिस्तानी हैंडलर से जोड़ा. इसके बाद फराज धीरे-धीरे इस नेटवर्क में गहराई तक उतरता चला गया। मदरसे से जुड़े कुछ संपर्कों की जानकारी भी सामने आई जांच के दौरान देवबंद के एक मदरसे से जुड़े कुछ संपर्कों की जानकारी भी सामने आई है. एजेंसियां अब इन संपर्कों की भूमिका की जांच कर रही हैं. ATS यह पता लगाने में जुटी है कि फराज किन-किन लोगों के संपर्क में था, क्या कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था और क्या स्थानीय स्तर पर भी उसे मदद मिल रही थी। जांच एजेंसी के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर ने फराज को कथित तौर पर जिहाद के लिए उकसाया. उसे बताया गया कि भारत में कई युवाओं को पहले ही तैयार किया जा चुका है और अब उसे भी इसी काम के लिए खुद को तैयार करना होगा. ATS सूत्रों का दावा है कि फराज इस कदर कट्टरपंथी हो चुका था कि वह हैंडलर के किसी भी आदेश को अंजाम देने के लिए तैयार था। शुरुआती पूछताछ में फराज ने कथित तौर पर बताया कि वह Telegram और WhatsApp के जरिए भारत, पाकिस्तान और दूसरे देशों के कई संदिग्ध कट्टरपंथी समूहों से जुड़ा हुआ था. जांच में यह भी सामने आया है कि नईम अब्दुल्ला ने उसे मारे गए पाकिस्तानी आतंकी खालिद सैफुल्लाह का नाम इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया था। युवाओं को टारगेट किलिंग और लोन वुल्फ हमलों के जरिए दहशत फैलाने का काम ATS का दावा है कि इस नेटवर्क से जुड़े युवाओं को टारगेट किलिंग और लोन वुल्फ हमलों के जरिए दहशत फैलाने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा था. उन्हें पासपोर्ट बनवाने को कहा गया था, ताकि आगे चलकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान या पश्चिम एशिया जाकर कथित आतंकी प्रशिक्षण लिया जा सके । जांच एजेंसी के मुताबिक फराज ने पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर अपना पासपोर्ट भी बनवा लिया था. वह अफगानिस्तान या पश्चिम एशिया जाने के लिए तैयार था. एजेंसियां अब यह खंगाल रही हैं कि क्या उसकी विदेश यात्रा की कोई तारीख, रूट या फंडिंग चैनल भी तय किया गया था। ATS सूत्रों के अनुसार युवाओं को भड़काने के लिए इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े कथित प्रशिक्षण वीडियो, जिहादी साहित्य और डिजिटल दस्तावेज साझा किए जा रहे थे. फराज के मोबाइल से बरामद कथित सामग्री को एजेंसी उसके बयानों की पुष्टि करने वाला अहम डिजिटल सबूत मान रही है। जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तानी हैंडलर ने फराज और इस ग्रुप से जुड़े अन्य युवाओं को प्रतिबंधित संगठन PFI के कथित Mission 2047 एजेंडे की ओर भी धकेलने की कोशिश की. आरोप है कि फराज से शपथ दिलवाई गई और लोकतांत्रिक व्यवस्था को न मानते हुए हथियारबंद संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा गया। इस मामले में भोपाल के STF थाने में मोहम्मद फराज और देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के खिलाफ BNS की धारा 152 और UAPA की धारा 13(1)(B) और 18 के तहत केस दर्ज किया गया है. नईम अब्दुल्ला की तलाश जारी है। भोपाल पुलिस तक को नहीं थी इस एक्शन की जानकारी आरोपी की गिरफ्तारी और पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई. सूत्रों के मुताबिक ऑपरेशन की जानकारी भोपाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय पुलिस तक को नहीं दी गई थी. ATS ने गिरफ्तारी से लेकर पूछताछ तक पूरे ऑपरेशन को बेहद सीमित दायरे में रखा। अब ATS और अन्य एजेंसियां इस कथित पैन-इंडिया नेटवर्क की … Read more

बिहार का एंटी-टेरर मास्टरप्लान: ATS कमांड ऑफिस किन जिलों में बनेंगे, क्या होगी जिम्मेदारी

पटना आतंकवाद से लड़ने के लिए बिहार पुलिस महकमा में गठित विशेष इकाई एटीएस (आतंकवाद निरोध दस्ता) के चार नए क्षेत्रीय कार्यालय बनेंगे। पटना में मौजूद एटीएस के मुख्यालय के अलावा गया, मोतिहारी, दरभंगा और पूर्णिया में भी एक-एक क्षेत्रीय कार्यालय बनाए जाएंगे। इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार करके पुलिस महकमा ने गृह विभाग को भेज दिया है। अनुमति मिलने के साथ ही इनके गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यह जानकारी एडीजी (विधि-व्यवस्था) पंकज कुमार दराद ने दी। वह सोमवार को पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्रीय कार्यालय जहां मौजूद रहेंगे, वहां के आसपास के जिलों को इससे जोड़ा जाएगा। एडीजी दराद ने कहा कि इन क्षेत्रीय कार्यालय का गठन होने से एटीएस की कार्य क्षमता का विकास होगा। इनकी जवाबदेही आतंकवाद से जुड़ी गतिविधि पर नजर रखने के साथ ही धार्मिक, राष्ट्रविरोधी और आपराधिक गतिविधि पर भी नजर रखने की होगी। यह सभी जिलों में मौजूद स्पेशल ब्रांच के समानांतर काम करेगा। प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यालय की कमान डीएसपी रैंक के अधिकारी के पास होगी। उन्होंने कहा कि एटीएस सीमावर्ती इलाकों में आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों पर भी निरंतर नजर बनाए रखता है। राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से संबंधित धाराओं में जेल में बंद जो लोग छूटकर बाहर आते हैं, उन पर भी निरंतर नजर बनाए रखने और इनसे संबंधित सूचना एकत्र करने का काम भी एटीएस के स्तर से की जाती है। उन्होंने कहा कि एटीएस की सोशल मीडिया इकाई के माध्यम से 176 व्यक्ति को चरमपंथी विचारधारा के कारण चिन्हित किया गया है। इसमें 12 लोगों को अतिचरमपंथी उन्माद की प्रवृति को लेकर मानसिक रूप से प्रेरित करके समझाने का काम किया गया है। एडीजी ने कहा कि सभी जिलों में मौजूद तमाम थानों में एक अधिकारी और एक सिपाही को खासतौर से आसूचना एकत्र करने के लिए रखा गया है। इनकी जवाबदेही मादक पदार्थों की तस्करी, शराब के अवैध व्यापार, आतंकवाद, अपराध समेत अन्य सभी जरूरी मुद्दों पर आसूचना एकत्र कर इसे जिला से लेकर मुख्यालय तक पहुंचाने की होगी। जिलों में मौजूद सीएटी की टीम के साथ समन्वय स्थापित कर ये कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि एसटीएस के अंतर्गत गठित विशेष स्वाट (एसडब्ल्यूएटी यानी स्पेशल वेपन एंड टैक्टिस टीम) टीम की जिम्मेदारी राज्य में मौजूद 257 संवेदनशील संस्थानों के निगरानी की है। इसमें पिछले वर्ष 194 और इस वर्ष 41 में मॉक ड्रील एवं रेकी की गई है। उन्होंने कहा कि एटीएस के अब तक 176 कमांडों को विशेष रूप से ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इन्हें एसजी के मनेसर और कोलकाता स्थित केंद्रों पर खासतौर से प्रशिक्षण दिया गया है।  

घुसपैठ पर यूपी का बड़ा एक्शन प्लान: अभियान तेज, सभी शहर हाई-अलर्ट पर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में घुसपैठियों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसी कड़ी में नेपाल सीमा के साथ ही बड़े शहरों में खुफिया एजेन्सियां, एटीएस और अन्य सुरक्षा से जुड़े संगठन तेजी से सक्रिय हो गए है। डीएम और कप्तान ने मातहतों को विदेशी नागरिकों के हर दस्तावेज की गम्भीरता से जांच करने के निर्देश दिए हैं।   पिछले कुछ वर्षों में सीमा पर स्थित जिलों में फर्जी पहचान पत्र के जरिए घुसपैठ की घटनाएं काफी बढ़ गई। इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश में भी दिखाई पड़ा। इस पर यूपी में अवैध घुसपैठियों को कानून व्यवस्था के लिए चुनौती न बनने देने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। केन्द्र सरकार के निर्देश पर संदिग्ध गतिविधियों और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। 2016 में दो करोड़ बांग्लादेशी भारत में थे वर्ष 2016 में तत्कालीन केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद को बताया था कि लगभग दो करोड़ अवैध बांग्लादेशी भारत के अंदर रह रहे हैं। इसी तरह अवैध रोहिंग्यां प्रवासियों की संख्या भी 40 हजार से अधिक बताई गई थी। जांच में पाया गया कि यूपी के लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी और तेजी से विकसित हो रहे अन्य शहरों पर भी इनका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही सभी जिलों में अस्थायी डिटेंशन सेन्टर बनाए जाने लगे हैं। अफसरों का कहना है कि घुसपैठियों के खिलाफ यह अभियान कानून-व्यवस्था, सामाजिक सदभाव और संसाधन प्रबंधन को मजबूत करने के साथ भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।  

योगी सरकार की सख्ती: एटीएस ने आठ जिलों से सभी मदरसों की रिपोर्ट मांगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (यूपी एटीएस) ने मदरसों को लेकर सख्त कदम उठाया है। लखनऊ स्थित एटीएस मुख्यालय ने प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशाम्बी, फतेहपुर, बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र भेजा है। इस पत्र में हर मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों, पढ़ाने वाले मौलवियों और प्रबंधकों की पूरी डिटेल मांगी गई है। हर व्यक्ति का नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, पूरा पता और मोबाइल नंबर सहित सारी जानकारी जल्द से जल्द भेजने को कहा गया है।  खासकर प्रयागराज जिले के सभी मदरसों की पूरी लिस्ट और विस्तृत जानकारी एटीएस की प्रयागराज यूनिट को सबसे पहले उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। बाकी सात जिलों की रिपोर्ट भी जल्द मुख्यालय भेजनी होगी। एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ खुफिया इनपुट मिले थे, जिनमें कुछ मदरसों में संदिग्ध गतिविधियों की आशंका जताई गई थी, इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर यह कवायद की जा रही है। उन्होंने साफ किया कि ज्यादातर मदरसे अच्छा काम कर रहे हैं और यह सिर्फ सत्यापन का काम है, लेकिन किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कुछ लोग इसे सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं तो कुछ इसे अल्पसंख्यक समुदाय पर दबाव मान रहे हैं। प्रयागराज के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने बताया कि उनके विभाग ने सभी मदरसों को नोटिस भेज दिया है और अगले कुछ दिनों में पूरी सूची एटीएस को सौंप दी जाएगी। इसी तरह बाकी जिलों में भी काम तेजी से चल रहा है। एटीएस ने स्पष्ट किया है कि अभी सिर्फ जानकारी इकट्ठा की जा रही है। इसके बाद जरूरत पड़ी तो मौके पर जाकर सत्यापन किया जाएगा। फिलहाल, किसी मदरसे पर कोई छापा या सीधी कार्रवाई नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग के सूत्रों का कहना है कि यह नियमित सुरक्षा जांच का हिस्सा है और इससे घबराने की कोई बात नहीं है।

रायपुर ATS की बड़ी कार्रवाई: छत्तीसगढ़ में ISIS नेटवर्क पर शिकंजा, FIR दर्ज

रायपुर  छत्तीसगढ़ में एक बड़ा आतंकी नेटवर्क तैयार करने की कोशिश को एटीएस (Anti-Terrorism Squad) ने समय रहते विफल कर दिया है। रायपुर एटीएस की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान स्थित इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) मॉड्यूल इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर भारतीय किशोरों को अपने नेटवर्क में जोड़ने की कोशिश कर रहा था। इस मामले में एटीएस ने सोमवार देर रात गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत पहली एफआईआर दर्ज की है। इसकी स्थापना के बाद से पहली बड़ी कार्रवाई है। सूत्रों के अनुसार, एटीएस ने दो नाबालिग लड़कों की पहचान की है, जिनकी उम्र 16 और 17 वर्ष बताई जा रही है। इनमें से एक रायपुर का रहने वाला है और दूसरा भिलाई का। खुफिया एजेंसियां इन दोनों पर पिछले डेढ़ साल से नजर रख रही थीं। जांच के दौरान इनके मोबाइल फोनों से कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाले कई संदेश और वीडियो सामग्री मिली है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि विदेशी हैंडलर्स इन युवाओं को आतंकी विचारधारा की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे थे। फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए गुमराह कर रहा था ISIS मॉड्यूल जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि पाकिस्तानी हैंडलर फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट्स का इस्तेमाल कर भारतीय नाबालिगों से संपर्क साध रहे थे। एटीएस के अधिकारियों के मुताबिक, ये हैंडलर्स पहले किशोरों से दोस्ती करते, फिर धीरे-धीरे उन्हें कट्टरपंथी सामग्री भेजकर उनकी मानसिकता को प्रभावित करते थे। ग्रुप चैट्स के जरिए उन्हें जिहादी वीडियो, कथित धार्मिक संदेश और ISIS से जुड़ी गलत सूचनाएं भेजी जाती थीं। हैंडलर्स का उद्देश्य नाबालिगों को इस कदर ब्रेनवॉश करना था कि वे स्थानीय स्तर पर ISIS की जड़ें फैलाने में मदद कर सकें। इसके तहत उन्हें "अंदरूनी सूचनाएं जुटाने", "स्थानीय समर्थन आधार बनाने" और "छत्तीसगढ़ में ISIS मॉड्यूल खड़ा करने" के लिए प्रेरित किया जा रहा था। एजेंसियों को मिला संदिग्ध डिजिटल सबूत एटीएस और खुफिया एजेंसियों की जांच में यह भी पाया गया कि दोनों नाबालिगों के मोबाइल में ऐसे कई चैट, नोट्स और वीडियो मौजूद हैं जो कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं। एजेंसियों को संदेह है कि इन युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से "लोन वुल्फ" हमलों और स्थानीय स्तर पर अस्थिरता पैदा करने के तरीकों पर भी प्रभावित किया जा रहा था। एटीएस अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान स्थित ISIS नेटवर्क का यह मॉड्यूल भारत में अस्थिरता पैदा करने के लिए किशोरों और युवाओं को सबसे आसान निशाना मानकर उन पर फोकस कर रहा था। स्थापना के बाद ATS की पहली FIR छत्तीसगढ़ एटीएस की स्थापना वर्ष 2017 में की गई थी। हालांकि विशेष मामलों में आमतौर पर स्थानीय पुलिस स्टेशन के माध्यम से UAPA लागू किया जाता था, लेकिन इस बार एटीएस ने स्वयं UAPA की पहली FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई आतंकवाद-रोधी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।  एटीएस अधिकारियों के अनुसार, राज्य में ऐसे अन्य संभावित संपर्कों की तलाश की जा रही है जो विदेशी आतंकी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं। एजेंसियों का कहना है कि आने वाले समय में इस तरह की जांच और सख्ती बढ़ाई जाएगी। राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती छत्तीसगढ़ में आतंकवादी संगठनों की ऑनलाइन घुसपैठ सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथ फैलाने की यह नई रणनीति युवा वर्ग को तेजी से प्रभावित कर रही है, जिसे रोकने के लिए एटीएस और साइबर सेल मिलकर रणनीतिक कदम उठा रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद राज्य की एजेंसियां अधिक सतर्क हो गई हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकी संगठनों की घुसपैठ रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाने की तैयारी कर रही हैं। छत्तीसगढ़ में ISIS मॉड्यूल की यह साजिश बेनकाब होना राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

ATS की बड़ी रेड: लखीमपुर में आरोपी सुहैल खान के घर से ISIS फ्लैग बरामद

लखीमपुर खीरी गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने गुजरात ISIS मॉड्यूल मामले में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में छापेमारी की है. यूपी पुलिस के साथ की गई इस कार्रवाई में लखीमपुर निवासी आतंकी मोहम्मद सुहैल खान के घर से ISIS का फ्लैग बरामद किया गया है. गुजरात ATS की तहकीकात में खुलासा हुआ है कि उत्तर प्रदेश के रहने वाले दोनों गिरफ्तार आतंकी मोहम्मद सुहैल खान और आजाद सुलेमान शेख हाल ही में कश्मीर भी गए थे. दोनों आतंकी   हथियार और केमिकल की डिलीवरी का रूट देखने के लिए गए थे.  बता दें कि गुजरात ATS ने सेंट्रल एजेंसियों के साथ मिलकर 9 नवंबर को ISIS से जुड़े तीन आतंकियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें एक MBBS डॉक्टर भी शामिल था. ये तीनों आतंकी खतरनाक जहर का इस्तेमाल करके आतंकी हमले की प्लानिंग में जुटे थे. इन्हीं आतंकियों ने लखनऊ स्थित RSS दफ्तर, दिल्ली की आजादपुर मंडी और अहमदाबाद में हमले के लिए रेकी भी की थी.  गिरफ्तार सुहेल के पिता ने कहा, 'किसी याराना-दोस्ताना या कैसे भी उसको फंसाया गया है.'' ये गिरफ्तारियां तब हुईं जब ये संदिग्ध हथियार लेने-देने के लिए इकट्ठा हुए थे. इनके पास से पाकिस्तान से भेजी गईं पिस्टल और कारतूस बरामद हुए हैं.  ATS के मुताबिक, ये संदिग्ध दिल्ली, लखनऊ और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में आतंकी हमलों की योजना बना रहे थे और इसके लिए इन्होंने कुछ जगहों की रेकी भी की थी. गिरफ्तार किए गए युवकों में एक लखीमपुर, दूसरा शामली का रहने वाला है, जबकि तीसरा हैदराबाद का है. फिलहाल गुजरात एटीएस और यूपी एटीएस समेत कई एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं.