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पलक झपकते 50GB की फ़िल्म डाउनलोड, 6G तकनीक ने बनाया नया रिकॉर्ड

 नई दिल्ली 5जी के बाद दुनिया के प्रमुख देश 6G को डेवलप करने में जुटे हैं। कहा जाता है कि 6जी के आने से दुनिया में इंटरनेट कनेक्‍ट‍िविटी इतनी फास्‍ट हो जाएगी कि चंद सेकंडों में हैवी फाइल्‍स को डाउनलोड किया जा सकेगा। 6G से जुड़ी एक अहम खबर के तहत चीनी वैज्ञानिकों ने दुनिया की पहली ‘ऑल फ्रीक्‍वेंसी’ 6G चिप को डेवलप किया है। इसे 6जी पर बहुत बड़ी खोज के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह चिप 100 जीबीपीएस प्रति सेकंड की स्‍पीड से मोबाइल इंटरनेट स्‍पीड दे सकती है। दावा है कि पलक झपकते ही आपकी डिवाइस में 50 जीबी की फ‍िल्‍म डाउनलाेड की जा सकेगी। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्‍ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी वैज्ञानिकों ने जिस 6जी चिप को डेवलप किया है, उससे भविष्‍य में ग्रामीण और शहरों इलाकों में इंटरनेट स्‍पीड के अंतर को पाटा जा सकेगा यानी ग्रामीण इलाकों में रहकर भी लोग हाईस्‍पीड इंटरनेट इस्‍तेमाल कर पाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार, जो च‍िप डेवलप की गई है, वह वायरलेस स्पेक्ट्रम के सभी बैंड पर काम करती है। पेकिंग यूनिवर्सिटी और सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग के वैज्ञानिकों ने मिलकर चिप को डेवलप किया है। दावा है कि यह इतनी तेज है कि 50 जीबी की 8K फ‍िल्‍म को सिर्फ कुछ सेकंड में डाउनलोड किया जा सकता है। अभी इस्‍तेमाल होती हैं अलग-अलग फ्रीक्‍वेंसी मौजूदा वक्‍त में जो टेक्‍नॉलजी है, जैसे 5G, उसमें हाईस्‍पीड कनेक्‍ट‍िविटी देने के लिए अलग-अलग फ्रीक्‍वेंसी का इस्‍तेमाल होता है। चीन के संदर्भ में देखें तो रिपोर्ट से पता चलता है कि वहां अलग-अलग फ्रीक्‍वेंसी और डिवाइस इस्‍तेमाल हो रही हैं। कुछ 5जी मोबाइल फोन्‍स 3 गीगाहर्ट्ज पर काम करते हैं, जबकि सैटेलाइट 30GHz का इस्‍तेमाल करते हैं। वैज्ञानिकों ने चिप में किया ये आविष्‍कार पेकिंग यूनिवर्सिटी और सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग के वैज्ञानिकों ने जो 6जी चिप बनाई है, वह अपने आप में खास है। वैज्ञानिकों ने इसमें 0.5 GHz से 115 GHz फ्रीक्‍वेंसी को फ‍िट कर दिया है। पहले यह काम अलग-अलग चिपों के जरिए होता था, लेकिन भविष्‍य में सिर्फ एक चिप से किया जा सकेगा। खास यह भी है कि जिस चिप को डेवलप किया गया है, उसका साइज नाखून जितना है। दावा है कि य‍ह च‍िप अलग-अलग फ्रीक्‍वेंसी के बीच स्विच कर सकती है। चिप की यही खूबियां इसे 6जी नेटवर्क के लिए परफेक्‍ट बनाती हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों पर भी सुपरफास्‍ट इंटरनेट चीन में डेवलप की गई 6जी चिप का कमर्शल इस्‍तेमाल कब से शुरू होगा, इस बारे में अभी जानकारी नहीं है। कहा जाता है कि इसके इस्‍तेमाल से भीड़भाड़ वाली जगहों पर भी हाईस्‍पीड इंटरनेट चलाया जा सकेगा। खासतौर पर किसी कंसर्ट या स्‍पोर्ट्स इवेंट वाली जगह पर।

नई ग्रीनफील्ड सड़क से पटना-देवघर मार्ग पर मिलेगी बड़ी राहत, लागत 481 करोड़

शेखपुरा शेखपुरा जिला मुख्यालय में जाम की समस्या से निजात दिलाने और यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए सरमेरा-भदौस-पचना ग्रीनफील्ड सड़क का निर्माण अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। पथ निर्माण विभाग ने बताया कि इसकी निविदा इसी माह प्रकाशित होगी और 21 सितंबर को टेंडर खुलेगा। पथ निर्माण के कार्यपालक अभियंता देवकांत कुमार ने जानकारी दी कि यह सड़क 9.27 किलोमीटर लंबी और 10 मीटर चौड़ी होगी। यह सड़क नालंदा के सरमेरा से शुरू होकर लखीसराय की सीमा से होते हुए शेखपुरा के भदौस और पचना तक पहुंचेगी। इस सड़क से पटना से लखीसराय, जमुई और देवघर जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। शेखपुरा नगर के जाम से छुटकारा मिल जाएगा और यात्रा सुगम हो जाएगी। यह सड़क शेखपुरा के डीहकुसुंभा, धाटकुसुंभा, पुरैना, मेहुस, पाली गांवों की सड़कों से जुड़ेगी जिससे घाटकुसुंभा और लखीसराय के बड़हिया टाल क्षेत्र के लोगों को भी बेहतर सड़क सुविधा प्रदान करेगी।इस बहुप्रतीक्षित परियोजना की घोषणा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रगति यात्रा के दौरान की थी। पथ निर्माण विभाग ने बताया कि जिले में अन्य सड़कों पर भी तेजी से काम चल रहा है। जखराजस्थान से हुसैनाबाद सड़क का निर्माण अंतिम चरण में है, जबकि शेखपुरा-बरबीघा रोड में नेमदारगंज से रमजानपुर होकर नालंदा के कोनन मोड़ तक सड़क निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया है। सड़क से जुड़ी कुछ अहम बातें     सड़क की लंबाई 9.27 किलोमीटर होगी।     कुल लागत 481 करोड़ रुपये अनुमानित है।     सड़क 10 मीटर चौड़ी बनेगी।     21 सितंबर को टेंडर खुलेगा।  

बिना चीरा, बिना दर्द : एसएमएस मेडिकल कॉलेज में होगा अत्याधुनिक रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट

जयपुर राजधानी जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (एसएमएस) मेडिकल कॉलेज का यूरोलॉजी विभाग एक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। यहां जल्द ही रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने जा रही है।जिसके बाद sms देश के उन चुनिंदा मेडिकल इंस्टीट्यूट में शामिल हो जाएगा जहाँ रोबोट द्वारा किडनी ट्रांसप्लांट किया जा रहा है, SMS मेडिकल कॉलेज के यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ शिवम प्रियदर्शी का कहना है की हमारे यहाँ रीनल यानि किडनी  ट्रांसप्लांट हालात पिछले 20-25 वर्षों से लगातार किया जा रहा है और वर्ष 2015 से कैडेवर ट्रांसप्लांट भी हो रहे हैं, इसी बीच अगले कुछ दिनों बाद में पहला रोबॉटिक किडनी ट्रांसप्लांट करने की भी तैयारी चल रही है, डॉक्टर शिवम का कहना है कि रोबोटिक सर्जरी तकनीक से मरीजों को और अधिक सुरक्षित, सटीक और कम तकलीफ़देह उपचार मिलेगा। बिना चीरा लगाए किडनी ट्रांसप्लांट डॉ. शिवम के अनुसार, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के यूरोलॉजी विभाग में रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करना राजस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। उन्होंने बताया कि पहले किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान पेट में बड़ा चीरा लगाया जाता था, लेकिन इस नई तकनीक में बिना बड़े चीरे के किडनी ट्रांसप्लांट किया जाएगा, जिससे मरीज को कम दर्द होगा। इस प्रक्रिया में डॉक्टर सीधे ऑपरेशन नहीं करते, बल्कि रोबोटिक आर्म्स की मदद से 3-डी विजन और हाई-डेफिनिशन कैमरे द्वारा सर्जरी की जाती है। पारंपरिक तरीकों की तुलना में इसमें केवल छोटे-छोटे चीरे लगते हैं, जिससे रक्तस्राव, दर्द और संक्रमण का खतरा कम होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है। मरीजों के लिए लाभ:     ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर मरीज चल-फिर सकता है।     अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि कम हो जाती है।     बड़ी सर्जरी के निशान नहीं रहते, जिससे दिखने में भी सुधार होता है।     मरीज जल्द सामान्य जीवन में लौट पाता है।     सटीकता में वृद्धि     डॉ. शिवम के अनुसार, रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट जटिल सर्जरी को भी सुरक्षित और कुशल तरीके से करने में मदद करता है। पारंपरिक ट्रांसप्लांट में नसों और रक्त वाहिकाओं को जोड़ने में अधिक समय और जोखिम रहता है, लेकिन रोबोटिक तकनीक से यह प्रक्रिया अधिक सटीक और सरल हो जाती है। वर्तमान में यह सुविधा देश के कुछ चुनिंदा बड़े निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध है। ऐसे में सरकारी स्तर पर इस तकनीक का आरंभ होना मरीजों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा।

रसोई में मां अन्नपूर्णा की कृपा पाने का आसान उपाय: इन रंगों की तस्वीरें करें स्थापित

किचन यानी रसोई घर वह जगह है जहां परिवार के लिए भोजन बनाया जाता है और घर की खुशहाली बनी रहती है। हमारे भारतीय धर्म और परंपरा में मां अन्नपूर्णा को भोजन और अन्न की देवी माना जाता है। उनकी पूजा से घर में अन्न का भंडार कभी खाली नहीं होता और सदैव परिवार में समृद्धि बनी रहती है। वास्तु के अनुसार, कुछ खास रंगों की तस्वीरें किचन की ऊर्जा को सकारात्मक बनाती हैं और मां अन्नपूर्णा की कृपा को बढ़ावा देती हैं। तो आइए जानते हैं कि मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किचन में कौन से रंग की तस्वीरें लगानी चाहिए। लाल रंग की तस्वीर लाल रंग शक्ति, उत्साह और समृद्धि का प्रतीक है। किचन में लाल रंग की मां अन्नपूर्णा की तस्वीर लगाना शुभ होता है क्योंकि यह परिवार में ऊर्जा और खुशहाली लाता है। पीला रंग की तस्वीर पीला रंग ज्ञान, स्पष्टता और सकारात्मकता से जुड़ा होता है। मां अन्नपूर्णा की पीली तस्वीर से किचन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और भोजन में स्वाद भी बढ़ता है। सफेद रंग की तस्वीर सफेद रंग शांति और पवित्रता का प्रतिनिधित्व करता है। सफेद रंग की मां अन्नपूर्णा की तस्वीर से घर में शांति और संतुलन बना रहता है।

अब यूपी के इस जिले में बिजली के लिए करना होगा ये काम, 74 हजार स्मार्ट मीटरों में प्री-पेड शुरू

गजरौला बिजली उपभोक्ताओं के लिए खास खबर है। क्योंकि अब विभाग ने घरों पर लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों में प्री-पेड व्यवस्था भी लागू कर दी है। गजरौला जोन में करीब 74 हजार स्मार्ट मीटरों में अब सितंबर माह से रिचार्ज का काम शुरू होगा। पहले मोबाइल से रिचार्ज करना होगा, फिर घर की बत्ती जलेगी। जहां-जहां मीटर लग चुके हैं। यह व्यवस्था वहां पर लागू हुई है। जहां पर मीटर लग चुके हैं। विभागीय अधिकारी भी मौके पर जाकर उपभोक्ताओं को समझा रहे हैं। अभी तक घर, दुकान और नलकूपों पर बिजली विभाग की रीडिंग से निकलने वाले बिल के मीटर लगे हुए हैं। लेकिन,बिजली विभाग द्वारा इन मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाने का कदम बढ़ाया है। इन स्मार्ट मीटरों में रिचार्ज होगा और जितना रिचार्ज किया जाएगा। उतना ही बिजली का उपयोग होगा। इस मीटर के लगने से कई बिजली विभाग को बिल बकाया, चोरी इत्यादि समस्याओं से मुक्ति मिल जाएगी और उपभोक्ताओं की कम बिजली उपयोग करने पर अधिक बिल निकलना या फिर अधिक रीडिंग निकालने जैसी शिकायतें भी खत्म होगी। खास बात यह है कि पहले विभाग ने उपभोक्ताओं से कहा था कि रिचार्ज वाली व्यवस्था स्मार्ट मीटर का काम पूरा होने के बाद लागू होगी मगर, अब विभाग अपने इस वायदे से पलट गया और बिना काम पूरा किए ही रिचार्ज की व्यवस्था लागू कर दी। गजरौला जोन के आंकड़ों की बात करें तो यहां पर लगभग 11 लाख उपभोक्ताओं के यहां पर स्मार्ट मीटर लगेंगे। जिनमें अमरोहा व बिजनौर जिले में अब तक 74 हजार स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। जो, मीटर लग चुके हैं। उनमें रिचार्ज की व्यवस्था लागू कर दी जा रही है। गजरौला जोन में अमरोहा व बिजनौर जिले के यह डिवीजन हैं शामिल गजरौला जोन में अमरोहा-बिजनौर जनपद के 12 डिवीजन शामिल हैं। जिनमें अमरोहा प्रथम, अमरोहा द्वितीय, गजरौला प्रथम, गजरौला द्वितीय, बिजनौर प्रथम, बिजनौर द्वितीय, चांदपुर प्रथम, चांदपुर द्वितीय, धामपुर प्रथम, धामपुर द्वितीय, नगीना और नजीबाबाद हैं। बकराएदारी पर एक क्लिक से कटेगा कनेक्शन अभी तक क्या होता है कि बिजली विभाग के लोग बकाएदारों के घर पर जाकर सीढ़ी लगाते हुए कनेक्शन काटते हैं लेकिन, जब स्मार्ट मीटर पूरी तरह लग जाएंगे तो फिर इस कार्य से भी मुक्ति मिलेगी। फिर बिजली विभाग तकनीकी उपयोग से ही कनेक्शन काट देगा यानी कम्प्यूटर में ही एक क्लिक करेंगे और बिजली गुल हो जाएगी। मीटर ही नहीं चलेगा। अत्याधुनिक तकनीक से लैस मीटर, ऐसे होगा उपयोग स्मार्ट प्रीपेड मीटर अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। घरों में इस मीटर के लगाए जाने के बाद बाइपास बिजली, मीटर से छेड़छाड़ आदि बिजली चोरी से जुड़े कार्य नहीं किए जा सकेंगे। यदि कोई उपभोक्ता ऐसा करने का प्रयास भी करेगा तो मीटर से सीधे इससे संबंधित मैसेज विभाग के कंट्रोल रूम को मिल जाएगी। मीटर से ठीक वैसे ही उपभोक्ता बिजली का लाभ उठाएंगे, जैसे मोबाइल रिचार्ज कराकर बातचीत करने या इंटरनेट सेवा का लाभ उठाते हैं। स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के सीधे मोबाइल से जुड़ा होगा।  

Google TV vs Fire TV: हजारों खर्च करने से पहले ये बातें जरूर जानें

नई दिल्ली त्‍योहारों का आगाज होने वाला है और इस सीजन में लोग इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स आइटमों से लेकर नए स्‍मार्टफोन खरीदते हैं। स्‍मार्ट टीवी भी ऐसा सेगमेंट है, जिसकी खूब बिक्री होती है। हालांकि लोग जितना स्‍मार्टफोन्‍स की जानकारी रखते हैं, उतनी ही कम जानकारी उन्‍हें स्‍मार्ट टीवी के बारे में होती है। क्‍या आपको पता है कि स्‍मार्ट टीवी अलग-अलग ऑपरेटिंग सिस्‍टमों पर चलते हैं। मौजूदा वक्‍त में गूगल टीवी सबसे ज्‍यादा लोकप्रिय हैं। इसके अलावा Fire TV ओएस वाले स्‍मार्ट टीवी भी लोग पसंद कर रहे हैं। दोनों के अपने-अपने फायदे हैं। अगर आप नया स्‍मार्ट टीवी खरीदने जा रहे हैं तो गूगल टीवी और फायर टीवी के बीच का फर्क जान लेना चाहिए। Google TV क्‍या होता है? जैसाकि नाम से ही पता चलता है गूगल टीवी को गूगल ने बनाया है। दुनियाभर में सबसे ज्‍यादा स्‍मार्ट टीवी एंड्रॉयड टीवी और गूगल टीवी पर रन करते हैं। गूगल ने साल 2014 में इसे डेवलप किया था। गूगल टीवी रन करते हैं एंड्रॉयड टीवी ओएस पर। यह ऑपरेटिंग सिस्‍टम स्‍मार्ट टीवी के अलावा, ड‍िजिटल मीडिया प्‍लेयर्स, साउंडबार और सेट-टॉप बॉक्‍स में भी इस्‍तेमाल होता है। Fire TV क्‍या होता है? Fire TV ओएस को भी साल 2014 में रिलीज किया गया था। इसे एमेजॉन ने डेवलप किया है। फायर टीवी दो तरह से काम करता है। पहला- यह एक स्‍ट्रीमिंग डिवाइस की तरह यूज किया जाता है, जिसे आप अपने नॉन स्‍मार्ट टीवी में लगाकर उसे स्‍मार्ट बना सकते हो। दूसरा- फायर टीवी को टीवी में इन-बिल्‍ट करके उसे स्‍मार्ट टीवी बना दिया जाता है। शाओमी अपने कई रेडमी टीवी मॉडलों को फायर टीवी ओएस के साथ पेश करती है। Google TV और Fire TV में फर्क दोनों ही ऑपरेटिंग सिस्‍टमों के काम करने का तरीका अलग है। गूगल टीवी में आप जो भी ऐप्‍स इंस्‍टॉल करते हैं उन्‍हें गूगल प्‍ले स्‍टोर से डाउनलोड किया जाता है, जिसमें 70 करोड़ से ज्‍यादा पॉपुलर ऐप्‍स की मौजूदगी है। इसमें गूगल अस‍िस्‍टेंट वॉइस फीचर मिलता है और ऐपल टीवी प्‍लस को भी एक्‍सेस किया जा सकता है। वहीं, फायर टीवी रन करता है फायर ओएस पर। इसमें भी आप ढेर सारे पसंदीदा ऐप्‍स को डाउनलोड और इंस्‍टॉल कर सकते हो। फायर टीवी में वॉइस असिस्‍टेंट के तौर पर एमेजॉन एलेक्‍सा का सपोर्ट दिया जाता है। Google TV और Fire TV में कौन बेहतर चाहे आप Google TV खरीदें या फायर ओएस पर बेस्‍ड फायर टीवी, दोनों ही अपने-अपने लेवल पर अच्‍छे हैं। आप तमाम लोकप्रिय ऐप्‍स जैसे- नेटफ्लिक्‍स, एमेजॉन प्राइम, जी5, सोनी लिव, जियोहॉटस्‍टार को इंस्‍टॉल कर पाएंगे। मार्केट में गूगल टीवी की लोकप्र‍ियता और डिमांड अधिक है। फायर टीवी मुख्‍य रूप से नॉन स्‍मार्ट टीवी को स्‍मार्ट बनाने के लिए खरीदा जाता है एक स्‍ट्रीमिंग डिवाइस के तौर पर, लेकिन अगर आप फायर टीवी ओएस पर चलने वाला स्‍मार्ट टीवी लेना चाहते हो, तो वह भी मिल जाता है। टीवी खरीदते समय अगर आपको मनमुताबिक फीचर और स्‍पेसिफ‍िकेशंस अपने पसंदीदा ब्रैंड में मिल रहे हैं तो आप गूगल या फायर टीवी में से कोई भी चुन सकते हो। दोनों ही स्‍मार्ट टीवी अच्‍छा एक्‍सपीरियंस ऑफर करते हैं।

सरकार ने दी राहत: NPS से UPS में स्विच की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2025

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग ने एक अहम आदेश जारी किया है, जिसके अनुसार राज्य के सभी अखिल भारतीय सेवा (IAS/IPS/IFS) अधिकारियों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के अंतर्गत एक विकल्प के रुप में एकीकृत पेंशन योजना (UPS) चुनने की सुविधा दी गई है। यह आदेश केंद्र सरकार के हालिया निर्णय और वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुरूप है। बता दें कि इससे पहले NPS के अंतर्गत UPS का विकल्प प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 30 जून 2025 थी, जिसे अब बढ़ाकर 30 सितंबर 2025 कर दिया गया है। नामांकन प्रक्रिया UPS का विकल्प चुनने वाले राज्य के सभी अखिल भारतीय सेवा अधिकारी अपने चयन को सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर में निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से जमा कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव अन्वेष धृतलहरे से इस नंबर पर 9958838344 संपर्क किया जा सकता है। देखें वित्त विभाग की ओर से जारी आदेश गौरतलब है कि वित्त विभाग ने इस कदम को कर्मचारियों की पेंशन सुरक्षा और विकल्प की सुविधा बढ़ाने के लिए उठाया है। 20 जुलाई तक लगभग 31,555 केंद्रीय कर्मचारी UPS का विकल्प चुन चुके हैं। अब शेष अधिकारी अपने विकल्प जमा कर 30 सितंबर 2025 तक इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

जमीन अधिग्रहण की खबर से खरीदारों को झटका, पश्चिम रिंग रोड का नया विवाद

इंदौर प्रस्तावित पश्चिम रिंगरोड में नया पेच आ गया है। 64 किमी लंबे पश्चिमी रिंगरोड के लिए जमीन अधिग्रहण करते हुए जिम्मेदारों ने एक वैध कालोनी को भी अधिग्रहण की सूची में शामिल कर लिया। कॉलोनी की जमीन को कृषि भूमि मानकर अवार्ड की तैयारी भी कर ली गई। कॉलोनी के प्लाटधारकों को नोटिस जारी हुआ न ही उनका पक्ष सुना गया। मंहगे दाम पर प्लाट खरीदने वालों को कॉलोनी की जमीन अधिग्रहण की जानकारी लगी तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए न्याय की गुहार लगाई। 70 से ज्यादा याचिकाएं हाई कोर्ट में दायर हुईं। सोमवार को इन सभी में एक साथ सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं।   मामला देपालपुर तहसील के मोहना और बेटमाखुर्द गांव में आने वाली नेचुरल वैली कॉलोनी का है। इस कॉलोनी में प्लाट खरीदने वालों के संघर्ष की कहानी भी अजीब है। कॉलोनी विकासकर्ता और उनके मार्केटिंग एजेंट ने लोगों से प्लाट के पैसे तो लिए लेकिन वे रजिस्ट्री से मुकर गए। प्लाट खरीदने वालों ने न्यायालय में याचिकाएं दायर की। लंबी जद्दोजहद के बाद इन प्लाटों की रजिस्ट्रियां हो सकीं। शासन ने रजिस्ट्री के वक्त प्रति वर्गफीट के हिसाब से स्टाम्प शुल्क भी खरीदारों से वसूला। रजिस्ट्री के बाद खरीदार यह सोचकर खुश थे कि आखिर उनका संघर्ष अंजाम तक पहुंच गया, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, दूसरी परेशानी उनका इंतजार कर रही थी। प्लाटों की रजिस्ट्री के कुछ दिन बाद ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने पश्चिम रिंग रोड के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमियों के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी। नेचुरल वैली कॉलोनी को भी अधिग्रहण की जाने वाली सूची में शामिल किया गया। विडंबना यह कि प्लाट मालिकों को भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना में स्वामी ही नहीं माना गया बल्कि उस विकासकर्ता को जिसने रजिस्ट्री खरीदारों के नाम की थी उसे स्वामी माना गया।   आवासीय कॉलोनी को प्राधिकरण मान रहा कृषि भूमि प्लाट खरीदारों की ओर से हाई कोर्ट में पैरवी कर रहे एडवोकेट अमित दुबे ने बताया कि यह वैध आवासीय कालोनी है। विधिवत अलग-अलग विभागों से अनुमति प्राप्त की गई थी, बावजूद इसके राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कालोनी की जमीन को कृषि भूमि मान रहा है। जिम्मेदारों ने यह तक पता लगाने की कोशिश नहीं की कि अधिग्रहित की जा रही भूमि आवासीय या कृषि। प्लाट स्वामियों ने प्राधिकरण के समक्ष आपत्ति भी जताई, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इस पर उन्होंने हाई कोर्ट की शरण ली। यह है पश्चिम रिंगरोड प्रस्तावित पश्चिम रिंगरोड 64 किमी लंबा है। यह शिप्रा से पीथमपुर नेट्रेक्स तक बनया जाना है और इसका निर्माण दो हिस्से में करने की योजना है। एक हजार करोड़ रुपये मुआवजा पश्चिम रिंगरोड में इंदौर और धार जिलों की जमीन आ रही है। इंदौर जिले की तीन तहसील और धार जिले की एक तहसील इसमें शामिल है। पश्चिम रिंगरोड की जद में आ रही जमीनों के लिए केंद्र शासन करीब एक हजार करोड़ रुपये की मुआवजा राशि तय कर चुका है। इंदौर जिले में 795 करोड़ और धार जिले में 200 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाना है। इंदौर जिले में 998 किसानों की जमीन पश्चिम रिंगरोड की जद में आ रही है।

बेंगलुरु के रेंटल रेट्स पर हंगामा, 70,000 किराया-5 लाख डिपॉजिट से भड़की बहस

बेंगलुरु बेंगलुरु में घरों का किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसने एक बार फिर बहस छेड़ दी है. हाल ही में, शहर के एक इलाके में एक अपार्टमेंट की लिस्टिंग ने Reddit पर खूब हलचल मचाई. पूर्वी बेंगलुरु के Panathur इलाके में एक 2BHK फ्लैट का मासिक किराया 70,000 और 5 लाख का डिपॉजिट मांगा गया है. Reddit पर शेयर की गई इस पोस्ट पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि पहले से ही आवास संकट से जूझ रहे टेक हब में इतना महंगा किराया कौन दे पाएगा.  लोग यूरोप से कर रहे हैं तुलना लोग इस फ्लैट की तुलना यूरोपीय शहरों से कर रहे हैं. वे मजाक उड़ाते हुए कह रहे हैं कि मकान मालिक को लगता है कि महंगा फर्नीचर लगा देने से किराया दोगुना करना जायज है. कुछ लोगों का मानना है कि अब 'बेंगलुरु और मुंबई में कोई फर्क नहीं रह गया है. यह मामला तब सामने आया जब एक Reddit यूजर ने 'इंडियन रियल एस्टेट' कम्युनिटी में इसका स्क्रीनशॉट शेयर किया. लोगों का गुस्सा इस बात पर था कि यह फ्लैट ऐसे इलाके में है, जो अपने ट्रैफिक जाम और बाढ़ की समस्या के लिए बदनाम है, फिर भी इसका किराया इतना ज्यादा है. इस लिस्टिंग ने बेंगलुरु में रहने की बढ़ती लागत और मकान मालिकों की मनमानी पर एक नई बहस को जन्म दिया है.  जिस Reddit यूजर ने यह पोस्ट किया था, उसने लिखा, "₹70,000 का किराया? यह तो कई यूरोपीय अपार्टमेंट से भी ज्यादा है." उसने Panathur को "सोमालियाई भारत की परिभाषा" बताया और इस किराए को "पूरी तरह से बेतुका" कहा. इस पोस्ट पर सैकड़ों लोगों ने प्रतिक्रिया दी. कई लोगों ने इस कीमत का मजाक उड़ाया और इसकी वजह पर सवाल उठाए. एक व्यक्ति ने टिप्पणी की, "लोग अपनी ऑफिस के पास होने के कारण इस छोटे से घर के लिए इतना ज्यादा पैसा देते हैं, लेकिन रेलवे अंडरपास पर फंस जाते हैं." इस इलाके में अक्सर लगा रहता है जाम एक और व्यक्ति ने लिखा, "एक ऐसे इलाके के लिए ₹70,000 का किराया, जहां हमेशा ट्रैफिक जाम रहता है… वाह! मालिक को सलाम". कुछ स्थानीय लोगों ने भी इस पर अपनी राय दी. एक यूजर ने बताया, "मैं SDA में रहता हूं और 41,000 किराया देता हूं. मुझे नहीं लगता कि कोई यहां 70,000 किराया देगा." उसने यह भी अनुमान लगाया कि जल्द ही इस कीमत को कम करना पड़ेगा. Panathur में इसी तरह के अपार्टमेंट का किराया आमतौर पर 40,000 से 45,000 के बीच रहता है, जिससे 70,000 का किराया और इतना ज्यादा डिपॉजिट काफी अजीब लगता है. इस वायरल पोस्ट ने एक बार फिर से बेंगलुरु में घर ढूंढने की समस्या को उजागर किया है, खासकर उन इलाकों में जो टेक कंपनियों के पास हैं. इन जगहों पर मांग तो बहुत है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर खराब है और किराए की कीमतें भी मनमानी हैं.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद MP में सख्ती, HSRP नहीं लगवाई तो गाड़ी से जुड़ी सेवाएं ठप

भोपाल  सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सभी नए पुराने वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट और व्हीकल रजिस्ट्रेशन कार्ड सहित ड्राइविंग लाइसेंस से वाहन मालिक का एक्टिव मोबाइल नंबर अपडेट होना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि आपके वाहन के साथ ये सुविधाएं अपडेट नहीं हैं तो, जल्द ही आपको परिवहन विभाग की सभी सेवाओं से वंचित कर दिया जाएगा। भोपाल में 18.5 लाख वाहन रजिस्टर्ड भोपाल जिले में इस वक्त 18.5 लाख वाहन रजिस्टर्ड हैं जिनमें से 40 प्रतिशत के पास अभी भी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं है। ऐसे वाहन मालिक फिलहाल घर बैठे ही सुविधाओं को अपडेट करवा सकते हैं। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (High Security Number Plate) मंगवाने और मोबाइल नंबर को अपडेट करने के लिए आरटीओ के वाहन पोर्टल या सारथी एप के जरिए आवेदन किए जा सकेंगे। ओटीपी के आधार पर मोबाइल नंबर गाड़ी की डिटेल्स के साथ लिंक हो जाएगा। एचएसआरपी नंबर प्लेट नजदीकी डीलर के यहां से फिट करवा सकेंगे। मध्यप्रदेश में 15 साल पुराने वाहन कार-88,529 मोपेड – 20,162 जीप – 21,607 ट्रैक्टर -74,794 आटो रिक्शा – 46,999 गुड्स ट्रक -72, 502 बस – 14,813 टैक्सी -1,098 बाइक -2,08054 स्कूटर -76,188 इसलिए जरूरी मोबाइल नंबर ये मुहिम इसलिए चलाई जा रही है क्योंकि बड़े पैमाने पर व्हीकल रजिस्ट्रेशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड में दर्ज नंबर में भिन्नता पाई जा रही थी। ऐसी स्थिति में किसी भी गाड़ी को किसी भी अन्य व्यक्ति के नाम ट्रांसफर आसानी से करवाया जा सकता था। कई ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें असल गाड़ी मालिक ने बगैर अनापत्ति प्रमाण पत्र के जबरन दूसरे पक्ष पर गाड़ी अपने नाम पर ट्रांसफर करवा लेने के आरोप भी लगाए। मोबाइल नंबर अपडेट होने के बाद अब जब तक आवेदक वन टाइम पासवर्ड नहीं बताएगा तब तक किसी भी प्रकार के आवेदन पर कार्रवाई पूरी नहीं मानी जाएगी।