samacharsecretary.com

नारायणपुर के दूरस्थ गांव बागझर में नलकूप खनन पूरा, अब हर घर तक पहुंचेगा साफ पानी

रायपुर छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में अंतिम व्यक्ति तक मूलभूत सुविधाएं पहुँचाने की दिशा में राज्य शासन द्वारा लगातार सशक्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में नारायणपुर जिले के दूरस्थ ग्राम बागझर में नलकूप खनन का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। इस दूरदर्शी पहल से गाँव में पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा और ग्रामीणों को उनके अपने गाँव में ही स्वच्छ व पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। ​कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में उम्मीद की नई किरण ​नारायणपुर के वनांचलों की भौगोलिक परिस्थितियाँ अक्सर बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में बड़ी चुनौती बनती रही हैं। भोजन पकाने, पीने तथा अन्य घरेलू कार्यों के लिए नियमित जल आपूर्ति ग्रामीणों की प्राथमिक आवश्यकता है। इन व्यावहारिक कठिनाइयों को प्राथमिकता पर लेते हुए बागझर में नलकूप खनन कराया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर ही एक मजबूत जलस्रोत तैयार हो गया है। ​महिलाओं व बुजुर्गों के जीवन में आएगा सुलभ बदलाव  ​गाँव में ही जलस्रोत विकसित होने का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को मिलेगा। अब पानी लेने के लिए दूर-दराज़ के क्षेत्रों में भटकना नहीं पड़ेगा, जिससे ग्रामीणों के श्रम और समय दोनों की भारी बचत होगी। समय की बचत होने से ग्रामीण अन्य आजीविका और पारिवारिक कार्यों पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। ​स्वास्थ्य और विकास को मिलेगी नई गति  ​स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल सीधा ग्रामीणों के बेहतर स्वास्थ्य और जीवन स्तर से जुड़ा हुआ है। बागझर में नलकूप खनन का कार्य पूरा होना केवल एक जलस्रोत का निर्माण नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। नलकूप के सुचारू संचालन और जल की गुणवत्ता सुनिश्चित होने से गाँव में जल जनित बीमारियों का खतरा कम होगा और ग्रामीणों का जीवन पहले से अधिक सुविधाजनक एवं खुशहाल बनेगा।

अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव में खोन और कुटियाट्टम से जीवंत हुई रामकथा

काव्य-मानस में शुक्रवार को आमजन को मिलेगा मंच, श्रीरामचंद्र-केंद्रित भजन, गान, कविता एवं रचनाएँ प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर भोपाल संस्कृति विभाग और श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास द्वारा रवींद्र भवन परिसर में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव’ के चौथे दिन दर्शकों को भारत और थाईलैंड की समृद्ध नाट्य परंपराओं के माध्यम से श्रीरामकथा के विविध प्रसंग देखने को मिले। इस अवसर पर यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में शामिल थाईलैंड के 'श्री रामाकेन दल' ने पारंपरिक मुखौटों और मुद्राओं के साथ रामाकिएन पर आधारित मारीच-प्रसंग, सीता-हरण तथा राम-रावण युद्ध का जीवंत मंचन किया। केरल की दो हज़ार वर्ष पुरानी शास्त्रीय परंपरा 'कुटियाट्टम' शैली में शक्तिभद्र-रचित संस्कृत नाटक ‘आश्चर्यचूड़ामणि’ के चतुर्थ अंक ‘जटायुवधम्’ की सशक्त प्रस्तुति दी गई। कुटियाट्टम केंद्र (केरलम) और 'नेपथ्य' संस्था के कलाकारों ने रावण-जटायु संवाद, युद्ध और जटायु के सर्वोच्च बलिदान के मार्मिक दृश्य को पारंपरिक मुद्राओं और भावपूर्ण अभिनय से साकार किया। मंच पर रावण की भूमिका मार्गी मधु चाक्यार, जटायु की भूमिका नेपथ्य राहुल चाक्यार और सीता की भूमिका नेपथ्य आरती ने निभाई, जबकि मिझावु और इडक्का वाद्यों की संगत ने दृश्य को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया। संचालक (संस्कृति) एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एन.पी. नामदेव ने बताया कि इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य विविध कला-विधाओं के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों को आमजन, विशेष रूप से युवाओं तक पहुँचाना है। उत्सव के अंतर्गत तीन दिवसीय 'कौशलेय की वन-गमन गाथा' कथा-वाचन (स्टोरीटेलिंग) सत्र का भी शुभारंभ हुआ। प्रथम सत्र में अलवर के श्री अंकित अवस्थी ने 'श्रीरामचंद्र वन-गमन पथ' पर अपने विचार रखते हुए युवा पीढ़ी (Gen-Z) को रामायणकालीन संस्कृति से जोड़ने और चित्रकूट के त्याग, मर्यादा व पारिवारिक मूल्यों पर प्रकाश डाला। इसके उपरांत मुंबई की सुश्री अमि गणात्रा ने 'वाल्मीकि के हनुमान – बुद्धिमताम् वरिष्ठम्' विषय पर व्याख्यान देते हुए स्पष्ट किया कि वाल्मीकि रामायण में श्रीहनुमान को केवल बाहुबली ही नहीं, बल्कि अपार बौद्धिक क्षमता, संवाद-कुशलता और वेद-व्याकरण के ज्ञाता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उत्सव के पाँचवें दिन शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे से रवींद्र भवन के अंजनी सभागार में ‘काव्य-मानस’ कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें श्रीराम पर केंद्रित भजन, कविता, गान और दोहे प्रस्तुत करने के लिए आमजन निःशुल्क सहभागिता कर सकते हैं। इससे पहले प्रातः 11 बजे 'राम-लेखन कला' (टाइपोग्राफी) कार्यशाला होगी। सायं 5 बजे कथा-वाचन सत्र में श्री संदीप द्विवेदी एवं आचार्य देवव्रत यथिनाथ जी महाराज का व्याख्यान होगा। इसके बाद सायं 7 बजे से कर्नाटक की 'यक्षगान' और ओडिशा की 'ओडिसी' नृत्य-शैली में रामकथा का भव्य मंचन किया जाएगा।  

जनजातीय अंचलों की बेटियों को अंग्रेजी में दक्ष बनाने की पहल 90 दिवसीय विशेष पाठ्यक्रम से बढ़ेगा आत्मविश्वास

रायपुर जनजातीय अंचलों की बेटियों को अंग्रेजी में दक्ष बनाने की पहल उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बिलासपुर में अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के अंग्रेजी भाषा में संप्रेषण कौशल के विकास के लिए एक संभाग स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा आयुक्त मती रीता यादव शामिल हुई। इस कार्यशाला में बिलासपुर संभाग के विभिन्न महाविद्यालयों के 25 प्राचार्यों, 47 प्राध्यापकों और अन्य 17 प्रतिभागियों सहित कुल 89 लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।   कार्यक्रम का शुभारंभ शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य एवं बिलासपुर संभाग के अपर संचालक द्वारा  कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में इसे उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्द्धन और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। इसके बाद, संप्रेषणात्मक अंग्रेजी प्रशिक्षण के राज्य स्तरीय सदस्य तथा बिलासपुर संभाग के नोडल अधिकारी ने प्रशिक्षण की कार्ययोजना और उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।   आयुक्त  रीता यादव ने अपने प्रेरक उद्बोधन में छात्रहित को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में छात्राओं की शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर रविवार व अन्य अवकाश के दिनों में भी शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं, जिसके लिए नियमानुसार प्रतिपूरक अवकाश की सुविधा भी दी जाएगी। उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों में अंग्रेजी भाषा के प्रति आत्मविश्वास विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि उच्च शिक्षा, रोजगार और व्यक्तित्व विकास के उनके अवसर व्यापक हो सकें।   ​कार्यक्रम में डॉ. एम. एस. गुप्ता ने बताया कि छात्राओं के अंग्रेजी संप्रेषण कौशल को निखारने के लिए 90 दिवसीय एक विशेष पाठ्यक्रम की अनुशंसा की गई है, जिसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए शुरू किया गया है। स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सोमाली गुप्ता ने इस पाठ्यक्रम की रूपरेखा, शिक्षण पद्धति और मॉड्यूल तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी दी।

राज्यपाल पटेल ने नवीन सेंट्रल प्रोसेसिंग लाइन का किया उदघाटन

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया है कि उन्होंने जो ज्ञान हासिल किया है, वह उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि भर नहीं है। यह देश के विकास की अमूल्य निधि है। दीक्षांत भावी जीवन की नई जिम्मेदारियों और नई संभावनाओं का महत्वपूर्ण पड़ाव है। राज्यपाल पटेल गुरूवार को ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के द्वादश (12वें) दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि विश्वविद्यालय में आप सबने जो सीखा है, उन्हें आचरण में भी उतारें। राज्यपाल ने कहा कि अपने ज्ञान का उपयोग कृषि की ऐसी व्यवस्था में करें, जो पर्यावरण के अनुकूल हो और देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर भावी पीढ़ियों का भविष्य संवारे। दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदकों सहित कुल 666 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित हुए दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि दिनेश कुलकर्णी, विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला, प्रमंडल के सदस्यगण, कुलसचिव अजय कौशल एवं विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष मंचासीन थे। इस अवसर पर राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे तथा जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि कृषि शिक्षा की सार्थकता देश की मिट्टी, जल, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा के संरक्षण के साथ करोड़ों किसानों की खुशहाली सुनिश्चित करने में है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कृषि क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। बदलाव के इस दौर में विज्ञान, तकनीक और नए विचारों के सहारे खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। जलवायु परिवर्तन, घटती जोत, मिट्टी की सेहत और जल संकट जैसी वर्तमान चुनौतियों के समाधान खोजकर उत्पादन की अस्थिरता को खत्म करना होगा। राज्यपाल पटेल ने कृषि विद्यार्थियों से कहा कि उनकी प्रतिभा की परीक्षा प्रयोगशाला के शोध पत्रों में नहीं अपितु ड्रोन कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव तकनीक जैसी आधुनिक विधियों को खेतों तक ले जाने में है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में कृषि, शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों से कहा कि कृषि शिक्षा को व्यवहारिक ज्ञान से जोड़कर किसानों की खुशहाली के लिये नए अवसर सृजित कर विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें। राज्यपाल पटेल ने विद्यार्थियों को उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि फास्ट फूड के सेवन से बचें। मिलेट्स (मोटे अनाज) को अपने भोजन में प्रमुख स्थान दें। स्वस्थ रहकर ही सफल जीवन के साथ-साथ समाज और  देश के निर्माण में योगदान दिया जा सकता हैं। राज्यपाल पटेल ने उपाधि प्राप्त सभी विद्यार्थियों को बधाई तथा शुभकामनायें दीं। उन्होंने विद्यार्थियों में शिक्षा, प्रतिभा और समर्पण से कृषि क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर विकसित भारत के संकल्प को गति देने का भरोसा भी जताया। समारोह के विशिष्ट अतिथि कुलकर्णी ने कहा कि खेती केवल व्यवसाय ही नहीं, हमारी संस्कृति की जीवन पद्धति भी है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में समाहित पंच महाभूतों के साथ सामंजस्य स्थापित कर किसानों को खेती के लिये प्रोत्साहित करने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। दीक्षांत समारोह में कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने दीक्षोपदेश दिया। विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन और विश्वविद्यालय में हुए उन्नत कृषि के नवाचारों की जानकारी दी।  दीक्षांत समारोह में गत 01 अक्टूबर 2025 से 30 सितम्बर 2026 के बीच उपाधि पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें स्नातक के 345, स्नातकोत्तर के 294 एवं पीएचडी के 27 विद्यार्थियों सहित कुल 666 विद्यार्थियों को मिली उपाधि शामिल हैं। कृषि महाविद्यालय परिसर में स्थापित यूनिट का किया शुभारंभ राज्यपाल पटेल ने गुरुवार को कृषि महाविद्यालय परिसर स्थित सीएआईई (एग्रीकल्चर इंक्यूबेशन एण्ड एंटरप्रेन्योरशिप) में नवीन सेंट्रल प्रोसेसिंग लाइन का उदघाटन किया। जैविक उत्पादों एवं खाद्य प्रसंस्करण पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। राज्यपाल पटेल को बताया गया कि सेंट्रल प्रोसेसिंग लाइन यूनिट में फूड प्रोसेसिंग और जैविक उत्पादों का प्रशिक्षण स्थानीय किसानों, एफपीओ तथा कृषि विद्यार्थियों को दिया जायेगा।  यूनिट की स्थापना राज्य शासन, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय एवं नाबार्ड के सहयोग से की गई है। चीफ जनरल मैनेजर नाबार्ड श्रीमती एस. सरस्वती भी मौजूद थी।  

माओवाद की हर निशानी मिटाकर बनाएंगे खुशहाल बस्तर’, अमित शाह बोले- 8,526 माओवादियों ने छोड़ा रास्ता

रायपुर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि माओवादी हिंसा से मिले घावों पर मरहम लगाकर हर पीड़ित को सम्मानपूर्ण जीवन देना सरकार का संकल्प है। माओवादियों की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हंसता-खेलता और खुशहाल बनाया जाएगा। हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए केंद्र सरकार, छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है। शाह ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत दंतेवाड़ा में आयोजित निश्शुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण दिए कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी शामिल हुए। शाह ने बताया कि दंतेवाड़ा में तीन दिवसीय शिविर के पहले चरण में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण दिए गए। इससे पहले जगदलपुर शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे।  

भरत यादव ने सचिव जनसंपर्क विभाग का कार्यभार ग्रहण किया

भोपाल भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी भरत यादव ने गुरुवार को मंत्रालय,वल्लभ भवन में सचिव जनसंपर्क विभाग का पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उप सचिव कैलाश बुन्देला ने  यादव का स्वागत किया। नवागत सचिव श्री भरत यादव ने विभागीय कार्यों की जानकारी भी ली तथा आवश्यक निर्देश दिये।विभाग के कर्मचारी भी इस अवसर पर मौजूद थे।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल का संदेश: ‘डिग्री के साथ संस्कार मिले, तभी सार्थक है शिक्षा’

ग्वालियर  शिक्षा तभी सार्थक होती है जब डिग्री संग छात्र संस्कारी हो। साथ ही उसकी शिक्षा का उपयोग उसके लिए तो हो ही, साथ ही समाज को भी लाभ मिले और समाज में बदलाव आए। यह बात प्रदेश के राज्यपाल व कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने राजमाता विजायराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के 12 वें दीक्षांत समारोह में छात्रों व मौजूद गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए कही। दीक्षांत समारोह में 666 विद्यार्थियों को मिली उपाधि राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि संस्कार, नैतिकता, संवेदनशीलता और समाज के प्रति समर्पण का भाव विकसित करना है। शोध और नवाचार की सार्थकता भी तभी है, जब उसका लाभ प्रयोगशालाओं और पुस्तकों से निकलकर खेतों तक पहुंचे और किसान से लेकर समाज के प्रत्येक व्यक्ति का जीवन बेहतर बनाए। समारोह को समारोह के विशिष्ट अतिथि भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने भी संबोधित किया। दीक्षांत समारोह में 666 विद्यार्थियों को उपाधि मिली। चार छात्रों को स्वर्ण पदक दिए गए। साथ ही तीन छात्रों को सरताज बहादुर सिन्हा स्मृति पुरस्कार दिए गए।  

भोपाल में होगा भारतीय सेना का ऐतिहासिक राष्ट्रीय समारोह

आपकी सेना–आपके पास" थीम के साथ सेना के शौर्य और सामर्थ्य का साक्षी बनेगा भोपाल भोपाल मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार भोपाल में भारतीय सेना के राष्ट्रीय स्तर का गौरवशाली आयोजन होने जा रहा है, जो प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि और गर्व का अवसर होगा। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि यह समारोह देश के वीर सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण को करीब से जानने का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही, नागरिकों में राष्ट्रभक्ति, सैन्य सेवाओं के प्रति सम्मान और देश की सुरक्षा के प्रति जागरूकता का भाव सुदृढ़ करेगा। आगामी 15 जनवरी 2027 को भोपाल में आयोजित होने वाले भारतीय सेना दिवस के राष्ट्रीय समारोह को लेकर गुरुवार को मंत्री सारंग ने टीटी नगर स्टेडियम स्थित मेजर ध्यानचंद हॉल में उच्च स्तरीय बैठक ली। बैठक में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, खेल और युवा कल्याण विभाग, संस्कृति सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ आयोजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध रूप से तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रीय सैन्य आयोजनों को दिल्ली से बाहर देश के विभिन्न हिस्सों तक ले जाने के दृष्टिकोण के अनुरूप भारतीय सेना ने भोपाल में सेना दिवस समारोह आयोजित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस आयोजन की मुख्य थीम "आपकी सेना–आपके पास" रखी गई है, जो भारतीय सेना और आम नागरिकों के बीच आत्मीय जुड़ाव को और मजबूत करेगी। भोपाल के विभिन्न स्थलों पर दिखेगा भारतीय सेना का सामर्थ्य सेना दिवस-2027 के अवसर पर भोपाल के विभिन्न प्रमुख स्थलों पर मुख्य परेड के साथ अनेक भव्य एवं रोमांचक कार्यक्रम होंगे। बीएचईएल स्थित कालीबाड़ी मार्ग में मुख्य आर्मी-डे परेड आयोजित होगी, जिसमें भारतीय सेना के अनुशासित दस्तों और सैन्य सामर्थ्य का भव्य प्रदर्शन होगा। टीटी नगर स्टेडियम, भोपाल में शौर्य संध्या ‘रणहुंकार’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों के साथ मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें आड़ा-खड़ा और भगोरिया जैसे पारंपरिक लोकनृत्य आकर्षण का केंद्र होंगे। वहीं जंबूरी मैदान में भारतीय सेना के अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों का स्टेटिक एवं डायनेमिक डिस्प्ले होगा। नागरिकों को आधुनिक सैन्य प्रणालियों को करीब से देखने तथा उनकी कार्यक्षमता और संचालन को समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही बड़े तालाब के वीआईपी बोट क्लब क्षेत्र में इंटीग्रेटेड कॉम्बैट डिस्प्ले के माध्यम से भारतीय सेना की सामरिक क्षमता, रणनीतिक कौशल और समन्वित सैन्य कार्रवाई का प्रदर्शन किया जाएगा। सेना दिवस से जुड़े मुख्य कार्यक्रम और तिथियां 1 नवंबर 2026 (मध्य प्रदेश स्थापना दिवस) से मेरी माटी अभियान की शुरुआत होगी, जिसके तहत विभिन्न जिलों से मिट्टी एकत्रित कर शौर्य स्मारक में संकल्प वृक्ष लगाया जाएगा। सेना दिवस से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत 9 जनवरी 2027 से होगी। 9 से 12 जनवरी के बीच सैन्य उपकरणों की प्रदर्शनी, लाइव डेमो और एयर-शो/वाटर स्पोर्ट्स बड़ा तालाब, अटल पथ, जंबूरी मैदान में की जाएगी। 15 जनवरी सेना दिवस पर मुख्य परेड भोपाल के भेल क्षेत्र में कालीबाड़ी मार्ग पर होगी। साथ ही टीटी नगर स्टेडियम में 15 जनवरी की शाम देशभक्ति से ओतप्रोत शौर्य संध्या (रणहुंकार) का आयोजन किया जाएगा। पहली बार शहर के सार्वजनिक क्षेत्र में दिखेगा सेना दिवस का भव्य आयोजन भोपाल में आयोजित होने वाला यह राष्ट्रीय समारोह इसलिए भी विशेष है, क्योंकि आर्मी-डे परेड किसी सैन्य छावनी तक सीमित नहीं रहकर शहर के सार्वजनिक क्षेत्र में आयोजित की जाएगी। सेना के विभिन्न दस्तों, टैंकों, ड्रोन और अत्याधुनिक सैन्य प्रणालियों के प्रदर्शन से नागरिकों को भारतीय सेना की कार्यप्रणाली, आधुनिक तकनीक और सामरिक क्षमताओं को नजदीक से जानने का अवसर मिलेगा। बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालक चंचल शेखर, संस्कृति विभाग के संचालक एन.पी. नामदेव, अपर सचिव (खेल एवं युवा कल्याण) अजय श्रीवास्तव, भारतीय सेना के पश्चिम मध्यप्रदेश सब एरिया के मेजर जनरल विकास लाल, कर्नल सुब्रत मिश्रा सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।  

सौर ऊर्जा से बिजली बिल में राहत, छात्रवृत्ति से उच्च शिक्षा को संबल और स्वरोजगार से खुल रहे आर्थिक उन्नति के नए रास्ते

रायपुर  विकास की वास्तविक पहचान केवल सड़कों, भवनों और अधोसंरचनाओं के निर्माण से नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलाव से होती है। जब किसी परिवार का बिजली खर्च कम होने लगे, आर्थिक कठिनाइयों के बीच विद्यार्थी उच्च शिक्षा जारी रख सके, कोई महिला स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर परिवार की जिम्मेदारियां संभाले और एक उद्यमी उद्योग लगाकर रोजगार के अवसर विकसित करे, तब जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक प्रभाव दिखाई देता है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित परिवारों की कहानियां ऐसे ही बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की पहल पर संचालित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं तथा मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी पहलों से नागरिकों को शिक्षा, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, छात्रवृत्ति योजनाएं, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना और महतारी वंदन योजना जैसी पहलें जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनकी क्षमताओं को विकसित करने में भी सहायक बन रही हैं। सरगुजा के पांच हितग्राहियों के अनुभव बताते हैं कि योजनाओं का लाभ जब लोगों की वास्तविक जरूरतों से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को नई दिशा मिलती है। पीएम सूर्य घर योजना: कभी चार से पांच हजार रुपये आता था बिजली बिल, अब सौर ऊर्जा से मिल रही राहत बढ़ती घरेलू बिजली जरूरतों के बीच सौर ऊर्जा नागरिकों के लिए बिजली खर्च कम करने का उपयोगी विकल्प बन रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से घरों की छतों पर सोलर सिस्टम स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अम्बिकापुर के बिलासपुर रोड स्थित मठपारा निवासी  पंकज साहू ने इस योजना का लाभ लेकर अपने घर की छत पर तीन किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित कराया है। पंकज साहू बताते हैं कि पहले गर्मी के दिनों में उनके घर का मासिक बिजली बिल लगभग चार से पांच हजार रुपये तक पहुंच जाता था। घरेलू बिजली खर्च कम करने के उद्देश्य से उन्होंने योजना के पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया और सोलर सिस्टम लगवाया। इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस प्रकार कुल एक लाख आठ हजार रुपये की आर्थिक सहायता से सोलर सिस्टम स्थापित करने का खर्च कम हुआ। सोलर सिस्टम लगने के बाद उनके बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है। पंकज साहू के अनुसार, कई बार घरेलू आवश्यकता से अधिक उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजे जाने के कारण उनका बिजली खाता क्रेडिट में भी दिखाई देता है। पहले जहां बिजली बिल परिवार के नियमित खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा था, वहीं अब घर की छत पर स्थापित सोलर सिस्टम बिजली खर्च में राहत देने के साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का माध्यम बन गया है। पंकज साहू का अनुभव दर्शाता है कि सौर ऊर्जा के उपयोग से परिवार अपनी बिजली जरूरतों का एक हिस्सा स्वयं पूरा कर सकते हैं। इससे घरेलू खर्च कम करने के साथ पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा को भी प्रोत्साहन मिलता है। छात्रवृत्ति बनी कृष्णा यादव की उच्च शिक्षा का सहारा, किताबों और कॉलेज आने-जाने के खर्च में मिली मदद शिक्षा किसी भी परिवार की सामाजिक और आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन सीमित आय वाले परिवारों के लिए उच्च शिक्षा से जुड़े खर्चों की व्यवस्था करना आसान नहीं होता। ऐसे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं पढ़ाई जारी रखने का महत्वपूर्ण सहारा बन रही हैं। अम्बिकापुर के राजीव गांधी पीजी कॉलेज में बीएससी प्रथम सेमेस्टर के छात्र कृष्णा यादव की कहानी इसका उदाहरण है। कृष्णा के पिता कृषि कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। खेती से प्राप्त सीमित आय में परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों के साथ कॉलेज की पढ़ाई का खर्च उठाना चुनौतीपूर्ण होता है। किताबें, कॉपियां, अध्ययन सामग्री और कॉलेज आने-जाने पर होने वाला खर्च परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को बढ़ा देता है। ऐसे में छात्रवृत्ति से मिलने वाली सहायता कृष्णा की शिक्षा को निरंतर जारी रखने में उपयोगी साबित हो रही है। कृष्णा छात्रवृत्ति की राशि का उपयोग पढ़ाई से संबंधित आवश्यक सामग्री खरीदने और आवागमन के खर्च में करते हैं। इससे उनके परिवार पर आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिल रही है। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त करने का उनका प्रयास दर्शाता है कि छात्रवृत्ति योजनाएं जरूरतमंद विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा विकसित करने और भविष्य के लिए बेहतर अवसर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। पीएमईजीपी से हर्षिता खत्री बनीं उद्यमी, 25 लाख रुपये के ऋण से स्थापित किया फर्नीचर निर्माण उद्योग आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में स्वरोजगार और उद्यमिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के माध्यम से इच्छुक उद्यमियों को स्वयं का उद्योग या व्यवसाय स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने का अवसर मिलता है। अम्बिकापुर की मती हर्षिता खत्री ने इस योजना के अंतर्गत 25 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर फर्नीचर निर्माण उद्योग स्थापित किया है। मती हर्षिता खत्री  साईं इंडस्ट्रीज एंड प्रोडक्ट की प्रोपराइटर हैं। उनके पति  दिलीप खत्री उद्योग के संचालन और प्रबंधन में सहयोग करते हैं। परिवार लंबे समय से स्वयं का व्यवसाय स्थापित करना चाहता था, लेकिन पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा था। जिला व्यापार एवं उद्योग कार्यालय से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी मिलने के बाद हर्षिता खत्री के नाम से ऋण के लिए आवेदन किया गया। ऋण स्वीकृत होने पर फर्नीचर निर्माण इकाई की स्थापना संभव हो सकी। इस इकाई में पार्टिकल बोर्ड से टेबल, ऑफिस टेबल, ड्रेसिंग टेबल, सोफा, पलंग और अलमारी सहित विभिन्न प्रकार के फर्नीचर तैयार किए जाते हैं। उद्योग स्थापना से हर्षिता खत्री के परिवार को स्वरोजगार का अवसर मिला है, वहीं इकाई से जुड़े कर्मचारियों की आजीविका को भी सहारा मिल रहा है। हर्षिता की सफलता बताती है कि उद्यमिता के लिए आवश्यक वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध होने पर लोग अपने व्यावसायिक विचारों को वास्तविक उद्योग में … Read more

सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत लगाए गए एक हजार 345 शिविर

इन्दौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, झाबुआ एवं आलीराजपुर में बनाई गई हृयूमन रंगोली मुख्यमंत्री ने डॉ. ढालसिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त होने पर दी बधाई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के सफल और उपलब्धियों से भरे 25 वर्ष पूर्ण होने पर आरंभ सेवा सेतु अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 01 हजार 345 शिविर लगाए गए। इन शिविरों में 17 लाख 18 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए तथा 15 लाख 83 हजार आवेदकों को हितलाभ मिला है। उन्होंने बताया कि सेवा ज्योति यात्रा में लगभग 01 हजार 600 यात्राएं निकालीं गईं। यात्राएं लगभग 15 हजार ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र में निकाली गई। इन यात्राओं में 11 लाख से अधिक नागरिकों ने सहभागिता की। सेवा मेरा योगदान अंतर्गत कुल 11 प्रकार की सेवाओं में 50 लाख से अधिक नागरिकों ने सहभागिता की। नमो सेवा में 665 नुक्कड़ टोलियाँ बनीं, जिनकी 03 हजार 700 से अधिक प्रस्तुतियाँ हुई। सेवा के रंग – राष्ट्र के संग के अंतर्गत 06 जिलों इन्दौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, झाबुआ एवं आलीराजपुर में हृयूमन रंगोली बनाई गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट-सिवनी लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद और प्रदेश के वरिष्ठ नेता डॉ. ढालसिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई दी। पी.एम. आवास योजना शहरी में मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश के 05 जिलों क्रमश: डिण्डौरी, सीधी, उमरिया टीकमगढ़ एवं शहडोल को पी.एम. धन-धान्य कृषि योजना में बेहतर प्रदर्शन के लिए भारत सरकार सम्मानित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस उपलब्धि के लिए कृषि मंत्री सहित संबंधित जिलों के कलेक्टर और कृषि विभाग के अधिकारियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय पोषण माह-2026 में मध्यप्रदेश ने देश में तीसरा स्थान हासिल किया है। प्रदेश में पोषण जागरुकता से जुड़ी लगभग 2 करोड़ गतिविधियों की प्रविष्टियां दर्ज की गईं। मंदसौर और नीमच ने राष्ट्रीय स्तर पर क्रमशः पहला और दूसरा स्थान हासिल किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पी.एम. आवास योजना शहरी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भारत सरकार ने मध्यप्रदेश को पुरस्कृत किया है। इस योजना में मध्यप्रदेश पूरे देश में तीसरे स्थान पर रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए विभाग को बधाई दी। उद्योग में 90 हजार करोड़ और पर्यटन 3,729 करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि गत दिवस हुए मुम्बई रोड शो में अक्षय ऊर्जा और भंडारण, फार्मास्युटिकल, ई-बस, बायोगैस, स्मार्ट मीटर सहित अन्य मूलभूतउ उद्योग सेक्टरों में लगभग 90 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इससे लगभग 20 हजार से अधिक रोजगार सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि म.प्र. पर्यटन द्वारा प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए आयोजित ट्रेवल मार्ट सफल रहा। इसमें 34 देशों के 100 से अधिक एवं भारत के 180 से अधिक पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। दस हजार से अधिक बी2बी मीटिंग्स ने असीम पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक पहचान दिलाई। मार्ट में लगभग 3,729 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जो निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं। ये प्रस्ताव लक्जरी होटलों, वेलनेस रिसॉर्ट्स, गोल्फ कोर्स, वॉटरफ्रंट रिट्रीट्स और वन्यजीव लॉज के विकास से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सफल आयोजन के लिए पर्यटन विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मार्ट की सफलता को देखते हुए एक तिथि निर्धारित कर प्रतिवर्ष यह आयोजन उस तिथि पर ही किया जाएगा। धार्मिक पर्यटन में उज्जैन सबसे आगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि देश के घरेलू पर्यटन पर हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में वर्ष-2021 में 4 करोड़ 88 लाख पर्यटक आये। वर्ष – 2025 में यह संख्या बढ़कर लगभग 21 करोड़ हो गई है, इनमें सबसे बड़ा आँकड़ा धार्मिक पर्यटन का है। उज्जैन में सर्वाधिक 08 करोड़ धार्मिक पर्यटक आये। प्रसन्नता का विषय है कि प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। तेजी से हो स्वामित्व योजना का काम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामित्व योजना को लेकर बना गतिरोध अब समाप्त हो गया है। प्रसन्नता है कि पटवारी संवाद के बाद एक बार फिर अपने काम पर लौट रहे हैं। कर्मचारी हमारे कर्मयोगी है और सरकार उनके वाजिब हितों को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पटवारियों से तेजी से काम प्रारंभ कर समय-सीमा में लक्ष्य पूर्ण करने की अपील की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओबोसी आरक्षण के संबंध में कहा कि राज्य सरकार ओबीसी के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए सुश्री नवी पिल्ले को बधाई दी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सुश्री नवी पिल्ले को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। वे दक्षिण अफ्रीका में जन्मीं है लेकिन भारतीय मूल की है। उनके दादा, परदादा भारत से दक्षिण अफ्रीका गए थे। उन्होंने जीवनभर युद्ध, नरसंहार, मानवता के खिलाफ होने वाले अपराधों के विरूद्ध और मानव अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुश्री पिल्ले को हार्दिक बधाई दी।