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मातृ-नवजात मृत्यु दर घटाने छत्तीसगढ़ में ‘सुमन रोडमैप 2030’ पर मंथन: रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित

रायपुर मातृ-नवजात मृत्यु दर घटाने छत्तीसगढ़ में ‘सुमन रोडमैप 2030’ पर मंथन: रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित छत्तीसगढ़ में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा 'झपाइगो' (JHPIEGO) के तकनीकी सहयोग से ‘सुमन (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन) रोडमैप 2030’ पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन रायपुर के होटल बेबीलोन इंटरनेशनल में किया गया। यह आयोजन  संजीव कुमार झा आयुक्त सह संचालक (स्वास्थ्य सेवाएं) एवं मिशन संचालक एन.एच.एम.छत्तीसगढ़ के निर्देशन तथा संयुक्त संचालक (मातृ स्वास्थ्य) डॉ. निर्मला यादव एवं उपसंचालक (मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम) डॉ. स्मृति देवांगन के नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ‘सुमन रोडमैप 2030’ की कार्ययोजना को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप धरातल पर क्रियान्वित करना रहा। इस दौरान विशेषज्ञों ने मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्राथमिकताओं की समीक्षा करते हुए व्यावहारिक अनुभवों और सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों (Best Practices) को साझा किया। 12 हाई-फोकस जिलों पर विशेष ध्यान प्रदेश के 12 प्राथमिकता वाले जिलों—बेमेतरा, बीजापुर, धमतरी, दंतेवाड़ा, कांकेर, केसीजी (खैरागढ़-छुईखदान-गंडई), कोंडागांव, महासमुंद, एमएमएसी (मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी), नारायणपुर, राजनांदगांव एवं सरगुजा के प्रथम संदर्भन इकाइयों (FRUs/DH/CHC) में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और 'जिला कार्ययोजना' (District Action Plan) तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। *प्रमुख रणनीतियां एवं कार्यबिंदु* गुणवत्तापूर्ण मातृत्व सेवाएं: प्रसव पूर्व जांच (ANC), संस्थागत प्रसव तथा प्रसवोत्तर देखभाल (PNC) को शत-प्रतिशत सुरक्षित बनाना। आपातकालीन प्रसूति प्रबंधन: जटिल प्रसव और आपात स्थितियों में त्वरित उपचार के लिए फर्स्ट रेफरल यूनिट्स (FRUs) को सुदृढ़ करना। अंतर-विभागीय समन्वय: जिला स्तर पर स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा तकनीकी व सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करना। *चिकित्सा विशेषज्ञों व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की सहभागिता* इस उच्चस्तरीय कार्यशाला में एम्स (AIIMS) रायपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग (OBGY) विभागाध्यक्ष, प्रदेश के सभी 10 शासकीय व 5 निजी मेडिकल कॉलेजों के विभागाध्यक्ष, समस्त जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), जिला आरसीएच (RCH) नोडल अधिकारी, ब्लॉक नोडल अधिकारी, फॉग्सी (FOGSI) के प्रतिनिधि तथा प्रमुख सहयोगी संस्थाओं (WHO, UNICEF, JHPIEGO, Nutrition International, KPMG, IPAS, Piramal Foundation, Wadhwani AI, Azim Premji Foundation, ARMANN, YosAid) के राज्य प्रमुख उपस्थित रहे। सभी ने वर्ष 2030 तक मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक कमी लाने के लिए समन्वित प्रयास करने का संकल्प लिया।

मध्यप्रदेश पुलिस का विशेष यातायात अभियान संपन्न

54 हजार से अधिक लापरवाह वाहन चालकों पर कार्रवाई 3 लाख से अधिक नागरिकों एवं विद्यार्थियों को किया सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक भोपाल सड़क दुर्घटनाओं में जनहानि को रोकने और सुरक्षित यातायात संस्कृति को मजबूत करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाया गया प्रदेशव्यापी विशेष प्रवर्तन एवं जन-जागरूकता अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। पुलिस मुख्यालय, भोपाल एवं पुलिस परिवहन एवं शोध संस्थान (PTRI) के निर्देशन में 10 दिनों तक संचालित इस अभियान में नियमों के उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई के साथ-साथ व्यापक जन-जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से नागरिकों को सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार बनाने पर विशेष जोर दिया गया। अभियान के दौरान प्रदेश में स्कूल-कॉलेजों, विभिन्न सार्वजनिक एवं शैक्षणिक स्थानों पर कुल 2,582 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें विद्यार्थियों तथा अन्य नागरिकों सहित लगभग 3 लाख 15 हजार 483 लोगों को सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रमों के माध्यम से हेलमेट एवं सीटबेल्ट के अनिवार्य उपयोग सहित सुरक्षित यातायात व्यवहार अपनाने के लिए नागरिकों को प्रेरित किया गया। स्थानीय टीवी चैनलों के माध्यम से भी प्रचार-प्रसार गतिविधियों के जरिए यातायात नियमों के पालन का संदेश प्रसारित किया गया। सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर चोट एवं मृत्यु की आशंका को कम करने के लिए दोपहिया वाहन चालकों द्वारा हेलमेट तथा चार पहिया वाहन चालकों एवं यात्रियों द्वारा सीटबेल्ट के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। अभियान के दौरान हेलमेट नहीं पहनने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध चालान बनाए गए, जिनसे 1 करोड़ 23 लाख 85 हजार 300 का समन शुल्क वसूला गया। इसी प्रकार सीटबेल्ट का उपयोग नहीं करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध चालान बनाए गए तथा 61 लाख 40 हजार 852 का समन शुल्क वसूल किया गया। इस प्रकार हेलमेट एवं सीटबेल्ट के नियमों का उल्लंघन करने पर कुल 54 हजार 767 चालान बनाए गए और 1 करोड़ 85 लाख 26 हजार 152 का समन शुल्क वसूल किया गया। यातायात नियमों की लगातार अवहेलना करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए 1,812 प्रकरणों में ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए जाने के लिए परिवहन विभाग (RTO) को प्रस्ताव भेजे गए। इससे स्पष्ट है कि अभियान का उद्देश्य केवल मौके पर चालानी कार्रवाई तक सीमित न रहकर नियमों के लगातार उल्लंघन पर प्रभावी वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करना भी रहा। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा इस विशेष अभियान के माध्यम से प्रवर्तन और जन-जागरूकता को साथ लेकर सड़क सुरक्षा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया। सुरक्षित यातायात केवल पुलिस की कार्रवाई से नहीं, बल्कि प्रत्येक सड़क उपयोगकर्ता के जिम्मेदार व्यवहार से सुनिश्चित होता है। इसी उद्देश्य से नागरिकों और विशेषकर युवा वर्ग को हेलमेट, सीट बेल्ट तथा अन्य यातायात नियमों के नियमित पालन के लिए प्रेरित किया गया। मध्यप्रदेश पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि दोपहिया वाहन चलाते समय मानक एवं गुणवत्तापूर्ण हेलमेट अनिवार्य रूप से धारण करें तथा चार पहिया वाहन में यात्रा करते समय सीट बेल्ट का सदैव उपयोग करें। वाहन चलाते समय गति सीमा सहित सभी यातायात नियमों का पालन करें और स्वयं के साथ-साथ सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें। सुरक्षित यातायात व्यवहार को दैनिक जीवन की आदत बनाकर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली जन हानि को रोकने में सहभागी बनें।  

विशेष अभियान की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की समीक्षा, आवेदनों के संधारण एवं ऑनलाइन प्रविष्टि के दिए निर्देश

भोपाल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी म.प्र. संजीव कुमार झा ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रदेश के सभी उप जिला निर्वाचन अधिकारियों से चर्चा कर नए एवं छूट गए  पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए संचालित विशेष अभियान की समीक्षा की। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी झा ने निर्देश दिए कि विशेष अभियान अन्तर्गत आयोजित शिविरों को प्रभावी एवं सार्थक बनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक नए मतदाताओं से फॉर्म-6 प्राप्त किए जा सकें। उन्होंने शिविरों में प्राप्त आवेदनों की जानकारी का व्यवस्थित संधारण करने तथा उन्हें ऑनलाइन दर्ज करने के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया। मध्यप्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में नए एवं वंचित पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने के उद्देश्य से विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि “कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे।” भारत निर्वाचन आयोग एवं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश के निर्देशन में अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। बैठक में जिलेवार जानकारी के संकलन एवं समीक्षा, फॉर्म-6 के माध्यम से प्राप्त आवेदनों की जांच तथा सत्यापन की प्रक्रिया के संबंध में भी चर्चा की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी म.प्र. श्री आर.पी.एस. जादौन, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री राजेश यादव एवं श्री वीरेंद्र सिंह उपस्थित रहे।

परीक्षाओं में नकल पर सख्ती, मध्यप्रदेश के 4 महानगरों में विशेष अदालतें

मध्यप्रदेश शासन ने परीक्षाओं में नकल को रोकने के लिये सख्त कदम उठाते हुए चार महानगरों मे किया फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तत्काल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन के दिये थे आदेश मध्यप्रदेश फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन करने वाला देश का बना सबसे पहला राज्य फास्ट ट्रैक न्यायालयों के लिए विशेष अभियोजकों की हुई नियुक्ति भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के फैसले के बाद मध्यप्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक को रोकने के लिए सरकार और उच्च न्यायालय द्वारा राज्य में पेपर लीक और नकल से जुडे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए चार विशेष अदालतों का गठन किया गया है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन करने वाला भारत का सबसे पहला राज्य मध्यप्रदेश बन गया है। विशेष फास्ट ट्रेक कोर्ट परीक्षाओं मे नकल रोकने के लिए बनाई गई त्वरित जाँच/कानूनी प्रणाली या उडनदस्तों से संबंधित है। इन फास्ट-ट्रैक अदालतों को चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर मामले का निपटारा (ट्रायल पूरा) करने का लक्ष्य दिया गया है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट मे पैरवी विशेष अभियोजक करेंगें। संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व मे एसआईटी का गठन किया गया है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, और जबलपुर महानगरों में बनाई जायेगी, जिनका कार्यक्षेत्र निर्धारित किया गया है। भोपाल : भोपाल मे फास्ट-ट्रेक विशेष न्यायालय के अंर्तगत भोपाल, सीहोर, रायसेन, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, राजगढ़ और विदिशा जिलों के मामलों की सुनवाई करेगी। इंदौर : इंदौर में फास्ट-ट्रेक विशेष न्यायालय के अंर्तगत इंदौर, धार, रतलाम, झाबुआ, मंदसौर, उज्जैन, देवास और आसपास के मालवा-निमाड़ क्षेत्र के मामलों को देखेगी। ग्वालियर : ग्वालियर मे फास्ट-ट्रेक विशेष न्यायालय के अंर्तगत ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, गुना, दतिया, अशोकनगर और टीकमगढ़ जिलों का अधिकार क्षेत्र इसके पास है। जबलपुर : जबलपुर मे फास्ट-ट्रेक विशेष न्यायालय के अंर्तगत जबलपुर, सागर, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा, शहडोल और महाकौशल/बुंदेलखंड के अन्य जिलों के मामले यहां सुने जाएंगे। राज्य शासन ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट के लिए विशेष अभियोजकों की नियुक्ति की है। विशेष अभियोजक इन प्रकरणों में साक्ष्यों के प्रभावी प्रस्तुतिकरण, गवाहों के समुचित प्रबंधन और न्यायालयीन पैरवी पर विशेष ध्यान देंगे। इससे मामलों की सुनवाई अधिक व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने में सहायता मिलेगी। राज्य शासन का यह प्रयास मेहनत और योग्यता के आधार पर परीक्षा देने वाले युवाओं के हितों की रक्षा तथा परीक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पेपर लीक, नकल और परीक्षा से जुड़े अन्य अपराधों के मामलों में प्रभावी अभियोजन के माध्यम से दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा।  

अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में ‘पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास’ पर संगोष्ठी का शुभारंभ

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति संरक्षण के लिए कृतज्ञता के भाव से समाज में ऐसी मान्यताएं स्थापित कीं, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। पृथ्वी को माँ मानने की मान्यता हमारे देश की विशिष्ट संस्कृति को दर्शाती है। प्रकृति से उतना ही ग्रहण करना चाहिए, जितना आवश्यक हो। उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ प्रकृति को लौटाने का भाव भी निरंतर बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। यही भारतीय दर्शन और विचार का मूल आधार है। संगोष्ठी में विभिन्न विषयविद, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। उच्च शिक्षा मंत्री परमार अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल एवं मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में विद्यमान मान्यताओं के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को व्यापकता के साथ समाज के सामने लाने की आवश्यकता है। पर्यावरण संरक्षण की भावना केवल विचारों और चर्चाओं तक सीमित न रहे, बल्कि उसे समाज के प्रत्येक व्यक्ति के व्यवहार में उतारना होगा। प्लास्टिक का उपयोग न करने जैसे पर्यावरण-अनुकूल व्यवहारों को जनजीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता के साथ व्यक्तिगत आचरण में भी बदलाव लाना होगा। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के संस्कार विकसित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षकों और प्राध्यापकों की है। वे स्वयं अपने आचरण में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना अपनाएं, ताकि विद्यार्थी भी इन मूल्यों को आत्मसात कर सकें। संपूर्ण समाज को समझना होगा कि भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति और विकास के प्रयासों के कारण वन संपदा नष्ट न हो। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व का भाव विकसित करना समय की आवश्यकता है। माँ सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ संगोष्ठी का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. देव आनंद हिंडोलिया ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कुलसचिव श्रीमती स्वाति वशिष्ठ एवं संगोष्ठी संयोजक डॉ. चित्रलेखा सोनी (कड़ेल) ने अतिथियों का स्वागत किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. अनिल कोठारी ने अपने उद्बोधन में पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की महत्ता पर प्रकाश डाला। तकनीकी सत्रों में पर्यावरणीय चुनौतियों पर विमर्श संगोष्ठी के प्रथम दिवस दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रो. रविन्द्र कान्हेरे ने बीज वक्तव्य किया। प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. गौतम ने पर्यावरण की वैश्विक दृष्टि पर विचार रखे, जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निदेशक डॉ. विद्यार्थी ने पर्यावरण के समक्ष उपस्थित विभिन्न चुनौतियों पर प्रकाश डाला। दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास तथा प्रकृति के प्रति उत्तरदायी जीवनशैली के महत्व पर विमर्श को प्रोत्साहित करना है। कुलसचिव श्रीमती स्वाति वशिष्ठ ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।  

पीएम सूर्य घर योजना से बिजली उपभोक्ता से ऊर्जा उत्पादक बने कृष्ण कुमार गुप्ता, बिजली बिल के खर्च में मिली राहत

रायपुर  कभी घर की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह विद्युत आपूर्ति पर निर्भर रहने वाले सरगुजा जिले के अम्बिकापुर निवासी  कृष्ण कुमार गुप्ता अब स्वयं बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत उन्होंने अपने घर की छत पर 5 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित किया है, जिससे प्रतिदिन लगभग 20 यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। यह बिजली उनके परिवार की दैनिक घरेलू खपत से भी अधिक है। सौर ऊर्जा के उपयोग से जहां बिजली बिल के खर्च में राहत मिल रही है, वहीं कृष्ण कुमार अब स्वयं को केवल बिजली उपभोक्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादक के रूप में देख रहे हैं। उनके लिए यह बदलाव आर्थिक बचत के साथ स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की पहल पर शुरू की गई पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से घरों की छतों पर सोलर सिस्टम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में भी नागरिकों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहन एवं निर्धारित प्रावधानों के अनुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत सामने आई कृष्ण कुमार गुप्ता की कहानी दर्शाती है कि शासकीय सहयोग और आधुनिक तकनीक के उपयोग से परिवार अपनी बिजली जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा स्वयं पूरा करने के साथ बिजली खर्च में बचत कर सकते हैं। पांच किलोवाट का सोलर सिस्टम बना बिजली बचत का आधार अम्बिकापुर के प्रतापपुर रोड निवासी कृष्ण कुमार गुप्ता बताते हैं कि पहले उनके परिवार की बिजली संबंधी सभी आवश्यकताएं सामान्य विद्युत आपूर्ति से पूरी होती थीं। घरेलू उपकरणों के उपयोग और बिजली की खपत के अनुसार उन्हें हर महीने बिल का भुगतान करना पड़ता था। इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के संबंध में जानकारी मिली। योजना के अंतर्गत सोलर सिस्टम लगाने पर मिलने वाली आर्थिक सहायता और भविष्य में बिजली खर्च कम होने की संभावना को देखते हुए उन्होंने अपने घर की छत पर 5 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित कराने का निर्णय लिया। कृष्ण कुमार के अनुसार, सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद उनके घर में प्रतिदिन लगभग 20 यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। यह उत्पादन उनके परिवार की दैनिक घरेलू जरूरत से अधिक है, जिससे बिजली पर होने वाले खर्च में कमी आई है। वे बताते हैं कि पहले बिजली का उपयोग करने के लिए उन्हें पूरी तरह बाहरी आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब घर की छत पर लगा सोलर सिस्टम स्वयं बिजली उत्पन्न कर रहा है। इस व्यवस्था से उन्हें आर्थिक राहत मिलने के साथ सौर ऊर्जा के उपयोग का प्रत्यक्ष लाभ भी मिल रहा है। 1.08 लाख रुपये की सब्सिडी से सोलर सिस्टम स्थापित करने में मिली सहायता कृष्ण कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कुल 1 लाख 8 हजार रुपये की सब्सिडी का प्रावधान है। इस आर्थिक सहायता से घर की छत पर सोलर सिस्टम स्थापित करने में होने वाले खर्च का बोझ कम होता है। योजना के अंतर्गत पात्रता और निर्धारित शर्तों के अनुसार मिलने वाली सहायता नागरिकों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने बताया कि सोलर सिस्टम लगाने के लिए सब्सिडी के अतिरिक्त आवश्यक राशि की व्यवस्था बैंक ऋण के माध्यम से भी की जा सकती है। बैंक से ऋण लेकर किस्तों में भुगतान करने का विकल्प होने से इच्छुक परिवारों को एकमुश्त पूरी राशि जुटाने की आवश्यकता कम हो सकती है। हालांकि ऋण की उपलब्धता और उसकी शर्तें संबंधित बैंक के प्रावधानों पर निर्भर करती हैं। कृष्ण कुमार का मानना है कि शासकीय सब्सिडी और वित्तीय सुविधाओं की जानकारी मिलने से अधिक परिवार सौर ऊर्जा अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। पहले बिजली के उपभोक्ता थे, अब ऊर्जा उत्पादक बनने की खुशी अपने घर पर सोलर सिस्टम लगवाने के बाद कृष्ण कुमार गुप्ता काफी उत्साहित हैं। वे कहते हैं, “पहले हम ऊर्जा उपभोक्ता थे, अब ऊर्जा दाता बन गए हैं। हमारे घर में जितनी बिजली की जरूरत है, उससे अधिक बिजली सोलर सिस्टम से मिल रही है।” उनके अनुसार, प्रतिदिन लगभग 20 यूनिट बिजली का उत्पादन होने से परिवार को बिजली खर्च में राहत मिल रही है और स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करने की खुशी भी है। कृष्ण कुमार का अनुभव बताता है कि घरों की छतों पर सोलर सिस्टम स्थापित कर नागरिक अपनी बिजली जरूरतों को पूरा करने में अधिक आत्मनिर्भर बन सकते हैं। सौर ऊर्जा के माध्यम से उत्पादित बिजली का उपयोग घरेलू आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है, जबकि अतिरिक्त उत्पादन का समायोजन लागू नेट मीटरिंग व्यवस्था और विद्युत वितरण कंपनी के नियमों के अनुसार होता है। वास्तविक बिजली बिल में बचत सौर ऊर्जा उत्पादन, घरेलू खपत और लागू विद्युत दरों पर निर्भर करती है। सौर ऊर्जा अपनाने के लिए अन्य नागरिकों को भी कर रहे प्रेरित कृष्ण कुमार गुप्ता ने योजना से मिले लाभ पर खुशी व्यक्त करते हुए अन्य नागरिकों से भी प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी प्राप्त करने और पात्रता के अनुसार इसका लाभ उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि सोलर सिस्टम स्थापित करने से घरेलू बिजली खर्च कम करने के साथ स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने नागरिकों को अपने घरों की छतों पर उपलब्ध स्थान और बिजली की जरूरत के अनुसार सोलर सिस्टम लगवाने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए प्रेरित किया। सौर ऊर्जा के उपयोग से पारंपरिक विद्युत स्रोतों पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। घरेलू स्तर पर सोलर सिस्टम लगाने से परिवार बिजली उत्पादन में भागीदार बन सकते हैं। कृष्ण कुमार की पहल इस बात का उदाहरण है कि शासकीय योजनाओं की जानकारी और उपलब्ध आर्थिक सहायता का उपयोग कर नागरिक ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। योजना से मिली राहत, केंद्र और राज्य सरकार के प्रति जताया आभार प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ मिलने पर कृष्ण कुमार गुप्ता ने केंद्र … Read more

नारायणपुर के दूरस्थ गांव बागझर में नलकूप खनन पूरा, अब हर घर तक पहुंचेगा साफ पानी

रायपुर छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में अंतिम व्यक्ति तक मूलभूत सुविधाएं पहुँचाने की दिशा में राज्य शासन द्वारा लगातार सशक्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में नारायणपुर जिले के दूरस्थ ग्राम बागझर में नलकूप खनन का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। इस दूरदर्शी पहल से गाँव में पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा और ग्रामीणों को उनके अपने गाँव में ही स्वच्छ व पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। ​कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में उम्मीद की नई किरण ​नारायणपुर के वनांचलों की भौगोलिक परिस्थितियाँ अक्सर बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में बड़ी चुनौती बनती रही हैं। भोजन पकाने, पीने तथा अन्य घरेलू कार्यों के लिए नियमित जल आपूर्ति ग्रामीणों की प्राथमिक आवश्यकता है। इन व्यावहारिक कठिनाइयों को प्राथमिकता पर लेते हुए बागझर में नलकूप खनन कराया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर ही एक मजबूत जलस्रोत तैयार हो गया है। ​महिलाओं व बुजुर्गों के जीवन में आएगा सुलभ बदलाव  ​गाँव में ही जलस्रोत विकसित होने का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को मिलेगा। अब पानी लेने के लिए दूर-दराज़ के क्षेत्रों में भटकना नहीं पड़ेगा, जिससे ग्रामीणों के श्रम और समय दोनों की भारी बचत होगी। समय की बचत होने से ग्रामीण अन्य आजीविका और पारिवारिक कार्यों पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। ​स्वास्थ्य और विकास को मिलेगी नई गति  ​स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल सीधा ग्रामीणों के बेहतर स्वास्थ्य और जीवन स्तर से जुड़ा हुआ है। बागझर में नलकूप खनन का कार्य पूरा होना केवल एक जलस्रोत का निर्माण नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। नलकूप के सुचारू संचालन और जल की गुणवत्ता सुनिश्चित होने से गाँव में जल जनित बीमारियों का खतरा कम होगा और ग्रामीणों का जीवन पहले से अधिक सुविधाजनक एवं खुशहाल बनेगा।

अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव में खोन और कुटियाट्टम से जीवंत हुई रामकथा

काव्य-मानस में शुक्रवार को आमजन को मिलेगा मंच, श्रीरामचंद्र-केंद्रित भजन, गान, कविता एवं रचनाएँ प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर भोपाल संस्कृति विभाग और श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास द्वारा रवींद्र भवन परिसर में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव’ के चौथे दिन दर्शकों को भारत और थाईलैंड की समृद्ध नाट्य परंपराओं के माध्यम से श्रीरामकथा के विविध प्रसंग देखने को मिले। इस अवसर पर यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में शामिल थाईलैंड के 'श्री रामाकेन दल' ने पारंपरिक मुखौटों और मुद्राओं के साथ रामाकिएन पर आधारित मारीच-प्रसंग, सीता-हरण तथा राम-रावण युद्ध का जीवंत मंचन किया। केरल की दो हज़ार वर्ष पुरानी शास्त्रीय परंपरा 'कुटियाट्टम' शैली में शक्तिभद्र-रचित संस्कृत नाटक ‘आश्चर्यचूड़ामणि’ के चतुर्थ अंक ‘जटायुवधम्’ की सशक्त प्रस्तुति दी गई। कुटियाट्टम केंद्र (केरलम) और 'नेपथ्य' संस्था के कलाकारों ने रावण-जटायु संवाद, युद्ध और जटायु के सर्वोच्च बलिदान के मार्मिक दृश्य को पारंपरिक मुद्राओं और भावपूर्ण अभिनय से साकार किया। मंच पर रावण की भूमिका मार्गी मधु चाक्यार, जटायु की भूमिका नेपथ्य राहुल चाक्यार और सीता की भूमिका नेपथ्य आरती ने निभाई, जबकि मिझावु और इडक्का वाद्यों की संगत ने दृश्य को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया। संचालक (संस्कृति) एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एन.पी. नामदेव ने बताया कि इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य विविध कला-विधाओं के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों को आमजन, विशेष रूप से युवाओं तक पहुँचाना है। उत्सव के अंतर्गत तीन दिवसीय 'कौशलेय की वन-गमन गाथा' कथा-वाचन (स्टोरीटेलिंग) सत्र का भी शुभारंभ हुआ। प्रथम सत्र में अलवर के श्री अंकित अवस्थी ने 'श्रीरामचंद्र वन-गमन पथ' पर अपने विचार रखते हुए युवा पीढ़ी (Gen-Z) को रामायणकालीन संस्कृति से जोड़ने और चित्रकूट के त्याग, मर्यादा व पारिवारिक मूल्यों पर प्रकाश डाला। इसके उपरांत मुंबई की सुश्री अमि गणात्रा ने 'वाल्मीकि के हनुमान – बुद्धिमताम् वरिष्ठम्' विषय पर व्याख्यान देते हुए स्पष्ट किया कि वाल्मीकि रामायण में श्रीहनुमान को केवल बाहुबली ही नहीं, बल्कि अपार बौद्धिक क्षमता, संवाद-कुशलता और वेद-व्याकरण के ज्ञाता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उत्सव के पाँचवें दिन शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे से रवींद्र भवन के अंजनी सभागार में ‘काव्य-मानस’ कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें श्रीराम पर केंद्रित भजन, कविता, गान और दोहे प्रस्तुत करने के लिए आमजन निःशुल्क सहभागिता कर सकते हैं। इससे पहले प्रातः 11 बजे 'राम-लेखन कला' (टाइपोग्राफी) कार्यशाला होगी। सायं 5 बजे कथा-वाचन सत्र में श्री संदीप द्विवेदी एवं आचार्य देवव्रत यथिनाथ जी महाराज का व्याख्यान होगा। इसके बाद सायं 7 बजे से कर्नाटक की 'यक्षगान' और ओडिशा की 'ओडिसी' नृत्य-शैली में रामकथा का भव्य मंचन किया जाएगा।  

जनजातीय अंचलों की बेटियों को अंग्रेजी में दक्ष बनाने की पहल 90 दिवसीय विशेष पाठ्यक्रम से बढ़ेगा आत्मविश्वास

रायपुर जनजातीय अंचलों की बेटियों को अंग्रेजी में दक्ष बनाने की पहल उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बिलासपुर में अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के अंग्रेजी भाषा में संप्रेषण कौशल के विकास के लिए एक संभाग स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा आयुक्त मती रीता यादव शामिल हुई। इस कार्यशाला में बिलासपुर संभाग के विभिन्न महाविद्यालयों के 25 प्राचार्यों, 47 प्राध्यापकों और अन्य 17 प्रतिभागियों सहित कुल 89 लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।   कार्यक्रम का शुभारंभ शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य एवं बिलासपुर संभाग के अपर संचालक द्वारा  कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में इसे उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्द्धन और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। इसके बाद, संप्रेषणात्मक अंग्रेजी प्रशिक्षण के राज्य स्तरीय सदस्य तथा बिलासपुर संभाग के नोडल अधिकारी ने प्रशिक्षण की कार्ययोजना और उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।   आयुक्त  रीता यादव ने अपने प्रेरक उद्बोधन में छात्रहित को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में छात्राओं की शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर रविवार व अन्य अवकाश के दिनों में भी शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं, जिसके लिए नियमानुसार प्रतिपूरक अवकाश की सुविधा भी दी जाएगी। उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों में अंग्रेजी भाषा के प्रति आत्मविश्वास विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि उच्च शिक्षा, रोजगार और व्यक्तित्व विकास के उनके अवसर व्यापक हो सकें।   ​कार्यक्रम में डॉ. एम. एस. गुप्ता ने बताया कि छात्राओं के अंग्रेजी संप्रेषण कौशल को निखारने के लिए 90 दिवसीय एक विशेष पाठ्यक्रम की अनुशंसा की गई है, जिसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए शुरू किया गया है। स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सोमाली गुप्ता ने इस पाठ्यक्रम की रूपरेखा, शिक्षण पद्धति और मॉड्यूल तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी दी।

राज्यपाल पटेल ने नवीन सेंट्रल प्रोसेसिंग लाइन का किया उदघाटन

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया है कि उन्होंने जो ज्ञान हासिल किया है, वह उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि भर नहीं है। यह देश के विकास की अमूल्य निधि है। दीक्षांत भावी जीवन की नई जिम्मेदारियों और नई संभावनाओं का महत्वपूर्ण पड़ाव है। राज्यपाल पटेल गुरूवार को ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के द्वादश (12वें) दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि विश्वविद्यालय में आप सबने जो सीखा है, उन्हें आचरण में भी उतारें। राज्यपाल ने कहा कि अपने ज्ञान का उपयोग कृषि की ऐसी व्यवस्था में करें, जो पर्यावरण के अनुकूल हो और देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर भावी पीढ़ियों का भविष्य संवारे। दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदकों सहित कुल 666 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित हुए दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि दिनेश कुलकर्णी, विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला, प्रमंडल के सदस्यगण, कुलसचिव अजय कौशल एवं विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष मंचासीन थे। इस अवसर पर राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे तथा जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि कृषि शिक्षा की सार्थकता देश की मिट्टी, जल, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा के संरक्षण के साथ करोड़ों किसानों की खुशहाली सुनिश्चित करने में है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कृषि क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। बदलाव के इस दौर में विज्ञान, तकनीक और नए विचारों के सहारे खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। जलवायु परिवर्तन, घटती जोत, मिट्टी की सेहत और जल संकट जैसी वर्तमान चुनौतियों के समाधान खोजकर उत्पादन की अस्थिरता को खत्म करना होगा। राज्यपाल पटेल ने कृषि विद्यार्थियों से कहा कि उनकी प्रतिभा की परीक्षा प्रयोगशाला के शोध पत्रों में नहीं अपितु ड्रोन कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव तकनीक जैसी आधुनिक विधियों को खेतों तक ले जाने में है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में कृषि, शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों से कहा कि कृषि शिक्षा को व्यवहारिक ज्ञान से जोड़कर किसानों की खुशहाली के लिये नए अवसर सृजित कर विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें। राज्यपाल पटेल ने विद्यार्थियों को उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि फास्ट फूड के सेवन से बचें। मिलेट्स (मोटे अनाज) को अपने भोजन में प्रमुख स्थान दें। स्वस्थ रहकर ही सफल जीवन के साथ-साथ समाज और  देश के निर्माण में योगदान दिया जा सकता हैं। राज्यपाल पटेल ने उपाधि प्राप्त सभी विद्यार्थियों को बधाई तथा शुभकामनायें दीं। उन्होंने विद्यार्थियों में शिक्षा, प्रतिभा और समर्पण से कृषि क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर विकसित भारत के संकल्प को गति देने का भरोसा भी जताया। समारोह के विशिष्ट अतिथि कुलकर्णी ने कहा कि खेती केवल व्यवसाय ही नहीं, हमारी संस्कृति की जीवन पद्धति भी है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में समाहित पंच महाभूतों के साथ सामंजस्य स्थापित कर किसानों को खेती के लिये प्रोत्साहित करने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। दीक्षांत समारोह में कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने दीक्षोपदेश दिया। विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन और विश्वविद्यालय में हुए उन्नत कृषि के नवाचारों की जानकारी दी।  दीक्षांत समारोह में गत 01 अक्टूबर 2025 से 30 सितम्बर 2026 के बीच उपाधि पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें स्नातक के 345, स्नातकोत्तर के 294 एवं पीएचडी के 27 विद्यार्थियों सहित कुल 666 विद्यार्थियों को मिली उपाधि शामिल हैं। कृषि महाविद्यालय परिसर में स्थापित यूनिट का किया शुभारंभ राज्यपाल पटेल ने गुरुवार को कृषि महाविद्यालय परिसर स्थित सीएआईई (एग्रीकल्चर इंक्यूबेशन एण्ड एंटरप्रेन्योरशिप) में नवीन सेंट्रल प्रोसेसिंग लाइन का उदघाटन किया। जैविक उत्पादों एवं खाद्य प्रसंस्करण पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। राज्यपाल पटेल को बताया गया कि सेंट्रल प्रोसेसिंग लाइन यूनिट में फूड प्रोसेसिंग और जैविक उत्पादों का प्रशिक्षण स्थानीय किसानों, एफपीओ तथा कृषि विद्यार्थियों को दिया जायेगा।  यूनिट की स्थापना राज्य शासन, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय एवं नाबार्ड के सहयोग से की गई है। चीफ जनरल मैनेजर नाबार्ड श्रीमती एस. सरस्वती भी मौजूद थी।