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रेडक्रॉस की सेवाओं और मिशन से जनता को करें प्रेरित, राज्यपाल पटेल का आह्वान

रेडक्रॉस के उद्देश्य और सेवा कार्यों से जन-जन को करें प्रेरित : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने विश्व रेडक्रॉस दिवस पर प्रदान किए "सेवा सम्मान" भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीन-दुखियों की सेवा, ईश्वर की सेवा का सशक्त माध्यम है। मानवता की सेवा ही प्रभु की सेवा है। अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार ग़रीब, वंचित और ज़रूरतमंदों की हमेशा मदद करते रहे। उन्होंने कहा कि सेवा का दायरा बहुत विस्तृत है। रेडक्रॉस सदस्य दूरस्थ, ग्रामीण इलाकों जाकर जरूरतमंदों से मिले, उनकी समस्याओं को करीब से देखें, समझे और यथा संभव समाधान के आत्मीय प्रयास करें। हर सदस्य कम से कम 5 व्यक्तियों को रेडक्रॉस से जोड़े। राज्यपाल पटेल ने रेडक्रॉस के सिद्धांतों, उद्देश्यों और कार्यों से जन-जन को प्रेरित करने का आह्वान किया। पीड़ित मानवता के प्रति रेडक्रॉस के संवेदनशील समर्पण से प्रेरणा लेने, वंचितों के उत्थान में सहभागी बनने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की युवाओं से अपील की। राज्यपाल पटेल शुक्रवार को विश्व रेडक्रॉस दिवस पर आयोजित "सेवा सम्मान समारोह" को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने रेडक्रॉस के संस्थापक हेनरी ड्यू-नॉट के जन्म दिवस पर उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। समर्पित कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और समाज सेवी संस्थाओं को सम्मानित किया। मानवता की सेवा कार्यों और प्रयासों के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी। सभी सम्मानित जनों को सम्पूर्ण समाज के सच्चे नायक और प्रेरणा स्रोत बताया। मध्यप्रदेश राज्य रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा कार्यक्रम का आयोजन मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (मेपकास्ट) परिसर में किया गया। रेडक्रॉस की सीख कर्मों में भी झलकनी चाहिए राज्यपाल पटेल ने कहा कि विश्व रेडक्रॉस दिवस, मात्र एक दिवस का उत्सव नहीं, बल्कि मानवता, सेवा, करुणा और समर्पण की निरंतर प्रवाहित धारा का स्मरण है। युद्ध के मैदान में पीड़ा देख कर लिया गया संकल्प, आज पीड़ित मानवता की सेवा का वैश्विक आंदोलन बन गया है, जो हमें बताता है कि "सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।“ उन्होंने कहा कि रेडक्रॉस के 7 मूल सिद्धांत- मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता, स्वतंत्रता, स्वैच्छिक सेवा, एकता और सर्व व्यापकता,  जीवन जीने के सच्चे मार्गदर्शक हैं। इनका मन, वचन और कर्म से 365 दिन पालन ही, समावेशी समाज निर्माण के संकल्प को सिद्ध करने का प्रभावी तरीका है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि रेडक्रॉस की सीख, शब्दों तक सीमित नहीं हो, यह हमारे कर्मों में भी झलकनी चाहिए। इसके लिए समाज को और अधिक संवेदनशील बनाना होगा। सम्मानित लोग, रेडक्रॉस के कार्यों में अपनी निष्ठा, समर्पण, सेवा-भाव के संस्कारों से भावी पीढ़ी को नेतृत्व प्रदान कर प्रोत्साहित करें। मानवता की सेवा के संकल्प के साथ पीड़ितों और वंचितों का दिल खोलकर सहयोग करें। मन, समय और संसाधनों से उनका साथ दें। समाज में पारस्परिक सहयोग तथा संवेदनशीलता की भावना को और अधिक सशक्त बनाएं। जन औषधि योजना हर वर्ग के लिए वरदान राज्यपाल पटेल ने कहा कि जन-औषधि योजना, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अत्यंत संवेदनशील पहल है। यह योजना हर वर्ग के लिए वरदान है। उन्होंने इस अभूतपूर्व योजना के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार जताया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रदेश रेडक्रॉस सोसायटी दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों में अधिक से अधिक जन-औषधि केन्द्र खोलने के प्रयास करें। इस पहल से स्थानीय युवाओं को जोड़े। उन्हें जन-औषधि केन्द्र में उपलब्ध दवाओं, गुणवत्ता और कीमतों की जानकारी दें। राज्यपाल पटेल का समारोह में मध्यप्रदेश रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन डॉ. श्याम सिंह कुमरे और वाइस चेयरमैन मनीष रावल ने शॉल एवं श्रीफल से अभिनंदन किया। चेयरमैन डॉ. कुमरे ने स्वागत उद्बोधन दिया। मध्यप्रदेश रेडक्रॉस सोसायटी के कार्यों और उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई। आभार जनरल सेक्रेटरी रामेन्द्र सिंह ने माना। कार्यक्रम में नगर निगम कमिश्नर श्रीमती संस्कृति जैन, मेपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अमित कोठारी, डॉ. ब्रिजेश श्रीवास्तव, मध्यप्रदेश रेडक्रॉस सोसायटी की राज्य और जिला इकाई के पदाधिकारी, रेडक्रॉस सदस्य, स्वयंसेवक, सम्मान प्राप्तकर्ता और उनके परिजन उपस्थित थे।  

भारत को विकसित बनाने में विद्यार्थी करें सहभागिता

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि समाज की सेवा में ही जीवन की सार्थकता है। समाज सेवा द्वारा वंचित वर्ग का व्यक्ति राज्यपाल बन सकता है। चायवाला प्रधानमंत्री बन सकता है। भारतीय संस्कृति के ध्येय 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के अनुसार शिक्षित व्यक्ति का परम कर्तव्य वंचितों और गरीबों की खुशहाली और उत्थान के लिए कार्य करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा है कि आत्मविश्वासी, नवाचारी और जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी शिक्षा और प्रतिभा के द्वारा आत्मनिर्भर, समृद्ध, सशक्त और विकसित भारत बनाने में सहभागिता करें। राज्यपाल  पटेल एल.एन.सी.टी. विश्वविद्यालय के पाँचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सांसद  रवि किशन, सांसद  राजीव शुक्ला, सांसद  देवूसिंग चौहान, फिल्म अभिनेता एवं कास्टिंग डायरेक्टर  मुकेश छाबड़ा, सेज समूह के चेयरमैन  संजीव अग्रवाल को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी की मानद उपाधि से विभूषित किया। फार्मेसी, विधि, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, पत्रकारिता और मेडिकल साइंस के क्षेत्र में पी.एच.डी. उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की। अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय की दीक्षांत स्मारिका और  जय नारायण चौकसे की आत्मकथा पुस्तक का लोकार्पण किया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीक्षांत शपथ भावी जीवन की मार्गदर्शिका है। प्राप्त उपाधि मन, वचन और कर्म से देश, समाज और मानव जाति की सेवा करने का संकल्प है, जिसका पालन 365 दिन करना दीक्षित विद्यार्थियों का दायित्व है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी द्वारा लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति परिवर्तनकारी कदम है। नीति ने शिक्षण प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी बनाया है। उन्होंने नीति के परिप्रेक्ष्य में तकनीकी संस्थानों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। विश्वविद्यालयों से पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों से आगे बढ़कर आधुनिक आयामों को अपनाने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पाठ्यक्रमों को समयानुकूल बनाएं। शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा जाए। विद्यार्थियों की सृजनात्मकता एवं नवाचार को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बनाएं। उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे ए.आई., डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और हरित तकनीकों को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया। विद्यार्थियों में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक, समसामयिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने विश्वविद्यालय को विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण, इंटर्नशिप, उद्यमिता और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराकर “‘जॉब सीकर’ नहीं, बल्कि ‘जॉब प्रोवाइडर’” बनाने के लिए कहा है। विद्यार्थियों का अपनी प्रतिभा और चिंतन से समाज, राष्ट्र और स्वयं के उत्थान में योगदान देने का आह्वान किया गया। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त घुमन्तु और अर्द्धघुमन्तु कल्याण मती कृष्णा गौर ने कहा कि समारोह में दीक्षित हर विद्यार्थी शिक्षा, संस्कार, नवाचार, कौशल का पुंज है। राष्ट्र के विकास के लिए उत्तरदायी है। उन्होंने कहा कि युग दृष्टा प्रधानमंत्री ने युवा पीढ़ी की योग्यता और दायित्वबोध को पहचानते हुए विकसित भारत एट 2047 का संकल्प लिया है। संकल्प की सफलता के लिए हर युवा को सकारात्मकता, नवाचार और मानवीय मूल्यों के साथ राष्ट्र के लिए समर्पित होना होगा। उन्होंने कहा कि प्राप्त उपाधि समाज के लिए उत्तरदायित्व का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की है कि मंचासीन विभूतियों की सकारात्मकता, मानवीयता और विनम्रता को आत्मसात कर राष्ट्र समाज के उत्थान में योगदान दें। सांसद  देवूसिंह चौहान ने उनके आकाशवाणी के अभियंता की सुरक्षित सेवा का त्याग कर राजनैतिक जीवन में प्रवेश की जानकारी दी। विद्यार्थियों से कहा कि निरंतर मेहनत करना ही जीवन में सफलता का आधार है। सफलता निरंतर प्रयास करने वालों को ही चुनती है। सांसद  राजीव शुक्ला ने स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि जिन्हें पदक नहीं मिले है, वह हताश नहीं हो। हुनर प्राप्त करें। उन्होंने हुनर के साथ वैश्विक प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का उल्लेख कर विद्यार्थियों को प्रेरित किया। अभिनेता अभिनेता एवं सांसद  रवि किशन ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन का लक्ष्य तय करें। उसके लिए निरंतर अथक प्रयास करने पर ही सफलता मिलती है। उन्होंने उनके जीवन के संघर्षों की कथा सुनाते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन एल.एन.सी.टी. समूह के चेयरमैन  जय नारायण चौकसे ने और आभार ज्ञापन सचिव  अनुपम चौकसे ने किया।

राज्यपाल के समक्ष जनजातीय उपयोजना कार्यशाला की अनुशंसाओं पर हुई चर्चा

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि जनजातीय कार्यशाला में प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं को संवेदनशीलता के साथ लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि जनजातीय कल्याण, सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनजातीय सशक्तिकरण के लिए सरकार के दिशा-निर्देशों और मार्गदर्शन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। जनजातीय विकास से संबद्ध विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय अत्यंत आवश्यक है।     प्रदेश के परिदृश्य में हो नवाचारों का अध्ययन।      विकास कार्य, जनजातीय क्षेत्र फोकस्ड हों।     अन्तर्विभागीय समन्वय जरूरी।     क्रियान्वयन में जवाबदारी बढ़ाए।     स्कूलों की गुणवत्ता में पेसा समितियों को जोड़े।  राज्यपाल  पटेल मंगलवार को लोकभवन में जनजातीय प्रकोष्ठ के साथ जनजातीय कार्य विभाग की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि जनजातीय सशक्तिकरण और विकास के लिए प्रावधानित बजट का जनजाति उन्मुख उपयोग हो। राशि को लक्षित उद्देश्य पर ही खर्च किया जाए। राज्यपाल  पटेल ने मैदानी भ्रमण कर जनजातीय विकास प्रयासों की जमीनी हकीकत जानने के और अधिक सघन प्रयासों पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या वाला विस्तृत क्षेत्र है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में निवासरत जनजातियों के विकास एवं कल्याण के कार्य और अधिक क्षेत्र फोकस्ड होना जरूरी है। कार्यशाला में प्राप्त देश के जनजातीय बाहुल्य राज्यों द्वारा जनजातीय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि के क्षेत्र में किए गए नवाचारों का प्रदेश की आवश्यकता के संदर्भ में अध्ययन किया जाए, उन्हें समझ कर अपनाने के प्रयास किए जाने चाहिए। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि कमजोर वर्गों के कल्याण प्रयासों में संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण है। समानुभूति की भावना के साथ किए गए आत्मीय प्रयास सदैव सुफल देते हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय कल्याण प्रयासों में जन प्रतिनिधियों और शासकीय सेवकों की और अधिक संवेदनशीलता तथा सक्रियता जरूरी है। पात्र हितग्राहियों का चयन, योजना का प्रभावी क्रियान्वयन, बजट राशि के समुचित उपयोग की प्रक्रियाओं में और अधिक जवाबदारी होनी चाहिए। जिम्मेदारी के निर्वहन में लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई भी की जानी चाहिए। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि शिक्षा, प्रगति का मार्ग सुनिश्चित करती है। जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण में शिक्षा के प्रसार की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए जरूरी है कि जनजाति क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। पेसा निगरानी समिति के माध्यम से शिक्षकों, शिक्षण, शैक्षणिक गुणवत्ताओं आदि की निगरानी और मूल्यांकन के प्रयास किए जाए।  राज्यपाल  पटेल को बैठक में जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव  गुलशन बामरा ने विगत 16 और 17 अप्रैल 2026 को आयोजित जनजातीय उपयोजना कार्यशाला की अनुशंसाओं की विस्तार से जानकारी दी। लोकभवन के जवाहर खण्ड सभाकक्ष में आयोजित बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष  दीपक खाण्डेकर, राज्यपाल के उप सचिव  सुनील दुबे, जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त सह संचालक डॉ. सतेन्द्र सिंह, जनजातीय कार्य विभाग, जनजातीय प्रकोष्ठ के सदस्य और लोकभवन के अधिकारी उपस्थित थे।  

कौशल और सामाजिक उद्यमिता से होगा भारत विकसित: राज्यपाल पटेल का बयान

कौशल और सामाजिक उद्यमिता से होगा भारत विकसित : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने पांचवें "समर्थ भारत कॉन्क्लेव" का किया शुभारंभ भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि कौशल आधारित सामाजिक उद्यमिता विकसित भारत का पथ है। इस दिशा में वैचारिक स्तर पर चिंतन की पहल समसामयिक और सराहनीय है। कॉन्क्लेव, शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी की समाप्ति के लिए समाधान का वैचारिक मंच बने। उन्होंने कहा कि कौशल और सामाजिक उद्यमिता से विकसित भारत निर्माण के चिंतन में सामाजिक एवं पर्यावरणीय चुनौतियों जैसे स्वच्छता, शिक्षा, जल संरक्षण, लैंगिक समानता, प्राथमिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के समाधान खोजने का प्रयास किया जाना चाहिए। राज्यपाल पटेल बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में पांचवें "समर्थ भारत कॉन्क्लेव" के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कॉन्क्लेव का आयोजन  “विकसित  भारत  के  निर्माण में कौशल विकास और सामाजिक उद्यमिता”  विषय पर किया गया है। राज्यपाल पटेल ने कॉन्क्लेव से पहले कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।    राज्यपाल पटेल ने कहा कि कॉन्क्लेव में कौशल विकास की प्रासंगिकता, शिक्षा–उद्योग-समन्वय, सामाजिक उद्यमिता विस्तार, ग्रामीण युवाओं के सशक्तिकरण, स्टार्ट-अप इको सिस्टम की मजबूती, महिला और वंचित वर्गों की सहभागिता का पथ प्रदर्शन पर बल दिया जाए। डिजिटल एवं तकनीकी कौशल, नीतिगत सहयोग और सतत विकास के संतुलित मॉडल पर विचार जरूरी है, ताकि आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता के ठोस उपाय खोंजें जाए। उन्होंने कहा समय की आवश्यकता है कि सरकारी, कॉर्पोरेट क्षेत्र एवं गैर-लाभकारी संगठन के समन्वित और एकजुट प्रयासों को नवाचारी सोच और सतत विकास के लिए, उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए। राज्यपाल पटेल ने प्रतिभागियों से कौशल आधारित सामाजिक उद्यमिता के द्वारा समाज की समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशील और व्यवहारिक नवाचारों पर चिंतन का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर, समृद्ध, सशक्त और विकसित भारत की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है। स्किल इंडिया मिशन, स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया आदि योजनाओं से देश में सशक्त स्टार्ट-अप इको सिस्टम बना है। उन्होंने कहा कि जरूरी है कि हम समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने नए और उपयोगी तरीके विकसित करें, ताकि गरीब और वंचित लोगों के जीवन में वास्तविक सुधार एवं खुशहाली आए। युवाओं को समावेशी विकास का सहभागी बनाएं राज्यपाल पटेल ने कहा कि हमारी लगभग 65 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। युवाओं को जमीनी स्तर से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्हें पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर, नई और रचनात्मक पहल के द्वारा आर्थिक परिवर्तन का माध्यम तथा समावेशी विकास का सहभागी बनाना होगा। डिजिटल एवं तकनीकी कौशल, नीतिगत सहयोग और सतत विकास के संतुलित मॉडल और आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता के ठोस उपायों से परिचय करना होगा। राज्यपाल पटेल ने कहा कि तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था के लिए कौशलयुक्त मानव संसाधन और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली सोच समय की मांग है। शिक्षण संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि शिक्षा व्यवस्था तकनीकी, प्रबंधकीय और उद्यमशील क्षमतावान ऐसे युवा तैयार करें, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सफल हो सकें। राज्यपाल पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर 2 दिवसीय आयोजन का शुभारंभ किया। वोकेशनल ट्रेनर्स को सम्मानित किया। उनका आईसेक्ट के चान्सलर संतोष चौबे ने पुष्प-गुच्छ और अंगवस्त्रम् भेंट कर स्वागत किया। स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। स्वागत उद्बोधन, स्कोप ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी के चान्सलर डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने दिया। आईसेक्ट के चान्सलर संतोष चौबे ने संस्थान की स्थापना से दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए कौशल और सामाजिक उद्यमिता प्रयासों की विस्तार से चर्चा की। आभार स्कोप ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी के कुलगुरू डॉ. विजय सिंह ने व्यक्त किया। इस अवसर पर रविन्द्र नाथ टैगोर यूनिवर्सिटी के वी.सी. डॉ. आर.पी. दुबे, वाधवानी फाउंडेशन के कर्नल संतोष, प्रो. चान्सलर डॉ. अदिति चतुर्वेदी और विषय-विशेषज्ञ उपस्थित थे।  

राज्यपाल पटेल का बयान: प्रकृति और स्थानीय जीवन के कल्याण में ही सेवा का असली उद्देश्य

प्रकृति और स्थानीय जीवन के कल्याण प्रयासों में ही सेवा की सार्थकता : राज्यपाल पटेल राज्यपाल से भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी मिले लोकभवन में भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारतीय वन सेवा, महज प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि मानवता, प्रकृति, वन्य जीव, सांस्कृतिक धरोहर और भावी पीढ़ियों के प्रति भी एक उत्तरदायित्व है। आप सभी सौभाग्यशाली है, जिन्हें जीवन भर प्रकृति की गोद में रहकर उसके संरक्षण और संवर्धन का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारी, वन कानूनों और जनजातीय कल्याण के प्रावधानों का गहनता से अध्ययन करें, उन्हें समझे और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लागू करें। प्रशिक्षण की सीख को प्रकृति, वन, वन्य जीव और स्थानीय जन जीवन की बेहतरी में उपयोग करें। उनके कल्याण प्रयासों में ही आपकी सेवा की सार्थकता है। यह याद रखें कि आपका आत्मीय व्यवहार, वंचितों के प्रति समानुभूति और संवेदनशीलता ही आपकी सफलता का अंतिम पैमाना होगी। राज्यपाल पटेल सोमवार को भारतीय वन सेवा के 2024-26 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों के सौजन्य भेंट कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को अखिल भारतीय सेवा में चयन की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। लोकभवन के बैंक्वेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। पर्यावरण संरक्षण के लिए सोच, संकल्प और सेवा भाव जरूरी राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्राकृतिक असंतुलन, पर्यावरणीय चुनौतियों आदि के कारण वन एवं वन्य जीवन के संकट का समाधान अत्यंत जरूरी है। वन अधिकारी के रूप में पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन आपका प्राथमिक दायित्व है। इसके लिए आपकी सोच, संकल्प और सेवा का भाव सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ हमेशा आत्मीय, सरल और सहज व्यवहार करें। अपने अच्छे व्यवहार और सहयोग से उनका विश्वास जीते। वनों की अवैधानिक कटाई, शिकार आदि समस्याओं के समाधान में स्थानीय लोगों का सहयोग प्राप्त करें। राज्यपाल पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “एक पेड़-माँ के नाम” अभियान की चर्चा की। इसे स्थानीय सहभागिता से प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन की सराहनीय पहल बताया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहाँ की वन भूमि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के साथ हमारी गौरवशाली सभ्यता, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी संजोए हुए हैं। प्रदेश में विस्तृत और विश्व प्रसिद्ध वन, अनेक राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण्य है। मध्यप्रदेश बाघ, चीतल, तेंदुआ, गिद्ध, घड़ियाल और चीता स्टेट के रूप में प्रसिद्ध है। राज्य में गैंडा, हाथी आदि वन्य जीवों के पुनर्वास के अभूतपूर्व प्रयास भी चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग के वैज्ञानिक प्रबंधन प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश आज वन-वन्य जीव प्रबंधन में अग्रणी राज्य है। सतत्-समावेशी विकास और संरक्षण, आपकी जिम्मेदारी राज्यपाल पटेल ने कहा कि देश में जनजातीय आबादी और वनों में मध्यप्रदेश प्रथम है। यहाँ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सतत्-समावेशी विकास और संरक्षण के द्वारा और अधिक समृद्ध बनाना आपकी जिम्मेदारी है। जनजातीय संस्कृति, परंपराओं, विश्वास, मान्यताओं और मौलिकता के प्रति सम्मान के भाव के साथ कार्य करना, आपका नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय के प्राकृतिक और संवैधानिक अधिकारों के रक्षक के रूप में उनके सशक्तिकरण और कल्याण में आपकी भूमिका बहुत प्रभावी है। अपनी प्रतिभा और ज्ञान का उपयोग पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन, घटते वन क्षेत्र, जैव विविधता के संकटों के समाधान में करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आउट ऑफ बॉक्स थिंकिंग के साथ वन, वन्य जीवों और स्थानीय लोगों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य करें। जनजातीय समुदाय की प्रकृति आधारित जीवन शैली, जड़ी-बूटियों के ज्ञान और कला की मौलिकता से आधुनिक जगत को परिचित कराएं। उनके लिए सतत आजीविका के प्रयासों में सहयोग करें। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का महत्व बताएं राज्यपाल पटेल ने कहा कि जब भी मैदानी भ्रमण पर जाएं तो स्थानीय लोगों से उनके बच्चों की शिक्षा की जानकारी जरूर लें। उन्हें शिक्षा का महत्व बताएं। अभिभावकों और बच्चों के साथ शिक्षा से जीवन में होने वाले बदलावों के संबंध में प्रेरक संवाद करें। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय की नई पीढ़ी को शिक्षा, कौशल उन्नयन तथा स्वास्थ्य और आजीविका की कल्याणकारी योजनाओं, कानूनों और प्रावधानों का लाभ लेने प्रेरित और प्रोत्साहित करें। राज्यपाल पटेल का प्रमुख सचिव वन संदीप यादव ने पुष्प गुच्छ से स्वागत किया। उनका यादव और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल पटेल ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों से परिचय प्राप्त किया। स्वागत उद्बोधन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एच.आर.डी.) डॉ. बी.एस अन्निगेरी ने दिया। प्रशिक्षु अधिकारी सुसौम्या ने प्रशिक्षण के अनुभवों को साझा किया। उप वन संरक्षक मयंक सिंह गुर्जर ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन, वन विभाग-लोकभवन के अधिकारी और प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित रहे।  

शहीद के संघर्ष और बलिदान की गाथा भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा : राज्यपाल पटेल

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने धार जिले के गौरव, अमर शहीद नायब सूबेदार रवींद्र सिंह राठौर की प्रतिमा का रविवार को अनावरण किया। शहीद की वीरता को नमन करते हुए उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शहीद की स्मृति को चिरस्थाई बनाने की यह पहल और अटूट निष्ठा अनुकरणीय है। राज्यपाल द्वारा शहीद की पत्नी  प्रताप कंवर और उनके परिवारजन का आत्मीय सम्मान किया गया। नगर परिषद द्वारा बदनावर की माथुर कॉलोनी में नवनिर्मित शहीद पार्क में समारोह का भव्य आयोजन किया गया था। राज्यपाल  पटेल ने शहीद रवींद्र सिंह के जीवन संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्राम पाना के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे रवींद्र सिंह ने सेना में भर्ती होने के लिए लगातार तीन बार प्रयास किए। उनकी यह जिद और देश सेवा का जज्बा ही उन्हें सेना तक ले गया। उन्होने बताया कि 9 जुलाई 2001 को जम्मू की सुरनकोट तहसील के जंगलों में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उनका बलिदान धार जिले सहित पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने परिसर में पौध-रोपण कर पर्यावरण-संरक्षण का संदेश दिया। समारोह में केंद्रीय राज्यमंत्री  सावित्री ठाकुर, क्षेत्रीय विधायक  नीना वर्मा, पूर्व मंत्री  राजवर्धनसिंह दत्तीगांव, नगर परिषद अध्यक्ष मीना शेखर यादव सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।  

योजनाएं जनजातीय समाज के समग्र विकास और सशक्तिकरण की पहल- राज्यपाल पटेल

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि वर्तमान समय जनजातीय समाज के विकास का अभूतपूर्व काल है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जनजातीय वर्ग का समग्र विकास, स्वास्थ्य सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन), धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान जनजातीय समाज के समग्र विकास और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह बात राज्यपाल  पटेल ने बुधवार को मंडला जिले के बिछिया विकासखंड के कन्हारीकला में दुधारू पशु वितरण एवं स्वास्थ्य शिविर के आयोजन में जनसमूह को संबोधित करते हुए कही। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि दूध का पहले बच्चों के पोषण में उसके बाद अतिरिक्त दूध को बेचकर आय बढ़ाने में उपयोग करें। पशुओं की देखभाल बच्चों की तरह ही करनी चाहिए। समय पर चारा, पानी और बीमारी होने पर दवाइयों का ध्यान रखना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़े स्तर पर सिकलसेल जांच अभियान चलाया जा रहा है। अब तक एक करोड़ 28 लाख लोगों की जांच की जा चुकी है।  उन्होंने जेनेटिक कार्ड को बीमारी की रोकथाम का तरीका बताया। कार्ड का मिलान कर विवाह करने का परामर्श दिया। उन्होंने बताया कि गर्भस्थ और प्रसूति के 72 घंटे के भीतर नवजात शिशुओं की भी जांच संभव है। जांच के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि इन प्रयासों से बच्चों का वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों का स्वास्थ्य और भविष्य सुरक्षित होगा। सामाजिक कार्यकर्ताओं से जनजातीय क्षेत्रों में जाकर लोगों को बीमारी के लक्षण और जांच के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए कहा। राज्यपाल  पटेल ने कार्यक्रम के दौरान बैगा जनजातीय नृत्य प्रस्तुति की सराहना की। जनजातीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर को संरक्षित और प्रोत्साहित करना सभी की जिम्मेदारी बताई। प्रवास के दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य शिविर, पशु मेले एवं प्रदर्शनी का अवलोकन किया और गो-पूजन किया। गो-माता को फूल माला पहनाई और गुड़-केला खिलाया। संबंधितों के साथ चर्चा में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और पर्यावरण के समन्वित विकास पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की पहली पाठशाला आंगनवाडी हैं, जहां उनके समग्र विकास की मजबूत नींव रखी जाती है। उन्होंने कहा कि हरित भविष्य के लिए पौधारोपण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जल संरक्षण के साथ बच्चों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए घर में उपयोग किए गए पानी से आंगनवाड़ी की पोषण वाटिका की सिंचाई करने के लिए कहा है। राज्यपाल के आंगनवाड़ी आगमन पर आत्मीयता, संस्कार और उत्सव का समन्वय देखने को मिला। राज्यपाल की आंगनवाड़ी में उपस्थिति पर नन्ही बच्ची प्रिया भारतीय और राज्यमंत्री  लखन पटेल ने जन्मदिवस की खुशियों को केक काटकर साझा किया। राज्यपाल ने परिसर में अशोक का पौधा रोपित किया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे जनजातीय समाज तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी की पहल से महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही है। उन्होंने  किसानों को पशुपालन अपनाकर आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। राज्यपाल  पटेल का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्यपाल सुनिश्चित कर रहे हैं कि शासन की योजनाएं धरातल पर सही तरीके से लागू हो। उन्होंने कहा कि पहले जनजातीय क्षेत्रों में सिकलसेल की जानकारी नहीं हो पाती थी, लेकिन अब लगातार जांच शिविर आयोजित होने से लोग जागरूक हुए है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य शिविरों में जाकर जांच कराने की अपील की है। पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल ने कहा कि यह कार्यक्रम जनजातीय समाज के विकास का मील का पत्थर और एक नई शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने राज्यपाल  पटेल द्वारा जनजातीय कल्याण के लिये किए जा रहे कार्यों की सराहना की। सरकार द्वारा पशुपालन से बैगा परिवारों को रोजगार द्वारा उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने का प्रयास बताते हुए दुग्ध उत्पादन को आय और स्वास्थ्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण बताया। पशुपालकों से पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण और बीमा पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। राज्यपाल  पटेल ने किया हितलाभ वितरण कार्यक्रम में बैगा समाज के प्रतिनिधि द्वारा राज्यपाल  पटेल का पारंपरिक तरीके से सम्मान भी किया गया। राज्यपाल  पटेल ने मंडला जिले के 50, डिंडौरी जिले के 24 एवं बालाघाट जिले के 20 बैगा जनजाति के कुल 94 हितग्राहियों को मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के तहत पशु प्रदाय किए। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, टीबी फूड बास्केट,  एचवीपी प्रमाण पत्र, वन काष्ठ लाभांश भी प्रदान किए।  

1 अप्रैल को मंडला के ग्राम कान्हारी कला में होगा कार्यक्रम

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल 1 अपैल को मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को दुधारू पशुओं की सौगात देंगे। कार्यक्रम मंडला जिले के विकासखंड बिछिया के ग्राम कान्हारी कला में होगा। कार्यक्रम में पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार  लखन पटेल भी उपस्थित रहेंगे। बुधवार को पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार पटेल ने लोकभवन पहुंचकर राज्यपाल  पटेल से भेंट की। उन्होंने आगामी 1 अप्रैल को मंडला जिले के विकासखंड बिछिया के ग्राम कान्हारी कला में होने वाले मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना कार्यक्रम के बारे में राज्यपाल  पटेल को जानकारी दी और उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। राज्यपाल  पटेल ने आमंत्रण को स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति प्रदान की। इस अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी प्रमुख सचिव  उमाकांत उमराव भी उपस्थित रहे। प्रदेश सरकार द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातीय बैगा, सहरिया एवं भारिया समुदाय के समग्र विकास, आर्थिक सशक्तिकरण के लिये मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना संचालित की जा रही है। योजना में प्रदेश सरकार द्वारा हितग्राही को इकाई लागत का 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है, जबकि 10 प्रतिशत राशि हितग्राही को जमा करनी होती है। योजना का क्रियान्वयन डिंडोरी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, मंडला, बालाघाट, छिंदवाड़ा, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, श्योपुर, मुरैना और भिंड जिले में किया जा रहा है। 

उपलब्धियों का उत्सव भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों की शुरुआत है : राज्यपाल पटेल

उपलब्धियों के उत्सव से शुरू होती भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियाँ : राज्यपाल  पटेल गरीब और वंचितों का जीवन बेहतर बनाने में ज्ञान से करें सहयोग भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने युवाओं से कहा कि आज का समारोह उनके जीवन की उपलब्धियों का उत्सव तो है, लेकिन यह उनके भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों की शुरुआत भी है। उन्होंने युवाओं से अपेक्षा की कि वे संवेदना, सेवा और सहयोग के पथ पर निरंतर अग्रसर रहें और अपने हौसले तथा हुनर से गरीब, वंचित और जरूरतमंदों का जीवन बेहतर बनाने में योगदान दें। गरीब बस्तियों में जाकर जरूरतमंदों की मदद को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं और अपने ज्ञान को सार्थकता प्रदान करें। राज्यपाल  पटेल ने  स्वशासी संस्थान टेक्नोक्रेट्स ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस (टी.आई.टी.) के वार्षिक ‘प्लेसमेंट डे’ समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल  पटेल ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उनका स्मृति-चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया गया।राज्यपाल  पटेल ने समारोह में प्लेसमेंट प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और हायरिंग कम्पनियों के प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया। राज्यपाल  पटेल ने ‘प्लेसमेंट डे’ के अवसर पर रोजगार प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, उनके गुरुजनों और अभिभावकों को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी युवाओं को विकसित भारत का कर्णधार मानते हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, स्टार्टअप, कौशल विकास और डिजिटल इंडिया जैसे अभिनव कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं की प्रतिभा को नए पंख मिले हैं। उन्होंने वैश्विक मानकों और अपेक्षाओं के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करने के प्रयासों के लिए टी.आई.टी. ग्रुप से जुड़े सभी सहयोगियों को साधुवाद दिया। पूर्व मंत्री एवं विधायक  अजय विश्नोई ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने सामान्य हवा और हीलियम से भरे गुब्बारों के प्रसंग के माध्यम से विद्यार्थियों को ज्ञान की शक्ति का महत्व बताया। उन्होंने असफलता को सफलता में बदलने के लिए स्वयं की कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम को बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. एस.के. जैन, संस्थान की अध्यक्ष मती साधना करसोलिया और विभिन्न कंपनियों के कैंपस हायरिंग प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर संस्थान के मुख्य संरक्षक  रामराज करसोलिया भी मंचासीन थे।  

खेल महोत्सव मानवीय संकल्प और आत्मविश्वास का प्रतीक, बोले राज्यपाल पटेल

खेल महोत्सव मानवीय संकल्प, आत्मविश्वास और अदम्य साहस का प्रदर्शन : राज्यपाल  पटेल राज्यपाल राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव- 2026 नॉट आउट @100 के समापन समारोह में शामिल हुए भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि मानवीय संकल्प, आत्मविश्वास और अदम्य साहस के अद्भुत प्रदर्शन का मंच है। राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव- 2026  नॉट  आउट @100 का समापन केवल समारोह भर नहीं है, यह आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन का उत्सव है। प्रतियोगिता के प्रत्येक प्रतिभागी खिलाड़ी ने अपनी क्षमता, धैर्य और परिश्रम से यह सिद्ध किया है कि सीमाएँ हमारे विचारों में होती हैं, संकल्प के सामने सब समाप्त हो जाती हैं। राज्यपाल  पटेल गुरुवार को राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव- 2026  नॉट  आउट @100 के समापन कार्यक्रम को पुलिस लाइन स्टेडियम में संबोधित कर रहे थे। प्रतियोगिता का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे न्यास, टास्क इंटरनेशनल, ध्यान-विज्ञान परमार्थ संस्थान एवं विवेकानंद विधिक न्याय केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि संवेदनशील प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने “विकलांग” के स्थान पर “दिव्यांग” शब्द का प्रयोग कर समाज की सोच में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने खेल और खिलाड़ी का परिवार के मुखिया के रूप में सहयोग और प्रोत्साहन दिया है। राज्यपाल ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी जी के मंत्रीमण्डल में उन्होंने 14 वर्ष कार्य किया है। गुजरात में खेल प्रतियोगिताओं का व्यापक स्तर पर आयोजन मोदी जी ने शुरू कराया था। आज खेलों इंडिया में सारा देश खेल रहा है। उन्होंने खेल और क्रिकेट के प्रति अपनी अभिरूचि को बताते हुए खेल प्रतियोगिता के मुकाबलों को नहीं देख पाने का अफसोस करते हुए बताया कि कार्यक्रम में समय से पूर्व पहुँचने के उनके प्रयास विपरीत मौसम के कारण सफल नहीं हो सके। बावजूद इसके कि वह समापन समारोह में सीधे विमानतल से आयें है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे के मार्गदर्शन में कार्य की स्मृतियों को बताते हुए कहा कि समाज सेवा के कार्यों में वे उनके प्रेरणा स्त्रोत है। उन्होंने दिव्यांगजन की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के प्रयासों की सराहना करते हुए आयोजनों की निरंतरता की बात कही है।   राज्यपाल दिव्यांग कलाकारों की प्रस्तुतियों से हुए अभिभूत  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने मंचासीन दिव्यांग खिलाड़ी  प्रियेश कुमार ने स्वरबद्ध काव्य का पाठ किया। राज्यपाल  पटेल ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि ईश्‍वर ने उनको दिव्य कंठ प्रदान किया है। उन्होंने प्रियेश कुमार की काव्य रचना को उत्कृष्ट बताते हुए उनकी रचनात्मकता को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। उन्होंने समारोह में जन-गण-मन और वन्दे मातरम् गीत का गायन करने वाली दिव्यांग कलाकार सु फाल्गुनी को मंच पर आमंत्रित कर पौधा और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। मंचासीन अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी  शैलेन्द्र यादव ने भी विचार व्यक्त किए। प्रदेश अध्यक्ष भाजपा, विधायक  हेमंत खंडेलवाल  ने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान दिव्यांग भाई-बहनों का हौसला अनुकरणीय है। उन्होंने 100 घंटे क्रिकेट को अनूठा आयोजन बताते हुए कहा कि यह अभिनंदनीय है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के विकास में दिव्यांगजनों के योगदान के अवसर उपलब्ध कराने और उनकी प्रतिभा को पहचानने के प्रयास समाज को मिलकर करने चाहिए। उन्होंने आयोजन के परिकल्पना की सराहना करते हुए आयोजकों को बधाई दी। प्रतियोगिता के संयोजक डॉ. राघवेन्द्र शर्मा ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि खेल प्रतियोगिता एक संकल्प था, आत्मविश्वास का साझा उत्सव और साधना थी। प्रतिभागियों ने दिखा दिया कि सीमाएँ परिस्थितियों में हो सकती है, संकल्प में नहीं। उन्होंने बताया कि खेल महोत्सव में 6 प्रकार की दिव्यांगता के कुल 754 खिलाड़ियों ने भाग लिया इसमें 100 से अधिक महिला दिव्यांग खिलाड़ियों ने भी अपनी खेल-कौशल का परिचय दिया। महोत्सव में 32 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के प्रारंभ में मंचासीन अतिथियों का शॉल एवं पौधा भेंट कर अभिनंदन किया गया। राज्यपाल को स्मृति प्रतीक के रूप में ट्रॉफी भेंट की। समापन समारोह में इंडिया एशिया बुक के प्रतिनिधि द्वारा प्रतियोगिता को इंडिया एशिया बुक में विश्व कीर्तिमान के रूप में दर्ज करने की घोषणा की। आभार प्रदर्शन  राम मनोहर सिंह ने किया।