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हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत : राज्यपाल पटेल

हिन्दी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा से युवा प्रेरणा लें : राज्यपाल पटेल सप्रे संग्रहालय में राज्यपाल पटेल की जीवनी का हुआ लोकार्पण राज्यपाल ने पोस्टर प्रदर्शनी : "पुरखों को प्रणाम" का किया अवलोकन भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता का प्रारंभिक काल अत्यंत चुनौती पूर्ण था। कर्मठ पत्रकारों ने ब्रिटिश हुकूमत की अनेक कठिनाईयों के बावजूद पत्रकारिता के आदर्शों और शुचिता को बनाए रखा। हिन्दी पत्रकारिता की इसी गौरवशाली परंपरा से युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए। राज्यपाल पटेल बुधवार को "हिन्दी पत्रकारिता द्वि-शताब्दी महोत्सव, पुरखों को प्रणाम : पोस्टर प्रदर्शनी" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान द्वारा किया गया है। राज्यपाल ने महान पूर्वजों के स्मरण की अनुकरणीय पहल के लिए संस्थान को बधाई और साधुवाद दिया। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि ऐतिहासिक हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं और युग निर्माता संपादकों की पोस्टर प्रदर्शनी, पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक ले जाने का प्रेरक प्रयास है। प्रदर्शनी का आयोजन, राष्ट्र धर्म और जन सेवा के लिए जीवन समर्पित करने वाले युग निर्माता संपादकों के त्याग और समर्पण को सजीव कर दर्शक का मन उन सभी महान विभूतियों की साधना और समर्पण के प्रति आदर भाव से भर देता है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि पत्रकारिता कोई साधारण व्यवसाय नहीं, यह समाज के प्रति उत्तरदायित्व, सत्य के प्रति निष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। गौरव की बात है कि हिन्दी पत्रकारिता ने अपने आरंभ से ही समाचार प्रसार की सीमाओं से आगे बढ़कर कार्य किया। समाज के दिशा दर्शन, जनमत को सशक्त बनाने तथा राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का सशक्त प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन के कठिन दौर में भी हिन्दी पत्रकारिता ने जन जागरण, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करने में कारगर भूमिका निभाई है। यही कारण है कि हिन्दी पत्रकारिता का योगदान केवल स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित नहीं रहा उसने विशाल पाठक वर्ग तैयार कर ज्ञान का प्रसार भी है। हिन्दी पत्रकारिता को डिजिटल माध्यमों और युवाओं से जोड़ना जरूरी राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता आज भी हमारे लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने, नागरिक चेतना जगाने और राष्ट्र निर्माण प्रयासों में प्रभावी भूमिका निभा रही है। विज्ञान और तकनीक के इस दौर में हिन्दी पत्रकारिता को वीडियो, पॉडकास्ट, वेबसाइट और मोबाइल मंचों के माध्यम से युवा पीढ़ी से जोड़ना आवश्यक है। पत्रकारों का आह्वान किया कि युवाओं को पत्रकारिता की विश्वसनीयता, सत्य निष्ठा, निष्पक्षता के मूल्यों की प्रेरणा दें। उनमें नवाचार, कौशल विकास तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भाव और भावनाएं विकसित करें। अपनी लेखनी से सामाजिक सरोकारों और वंचितों के प्रति संवेदनशीलता को मजबूत बनाए। राज्यपाल ने जीवनी के लोकार्पण के लिए माना आभार कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल के जीवन पर आधारित पुस्तक "पीर पराई जाने रे" का लोकार्पण किया गया। पुस्तक का लेखन लोकभवन की कंट्रोलर श्रीमती शिल्पी दिवाकर और मुद्रण-प्रकाशन माधवराव सप्रे संग्रहालय द्वारा किया गया है। राज्यपाल पटेल ने जीवनी लेखन, प्रकाशन से संबंधित सभी लोगों का आभार माना।    पत्रकारिता का इतिहास अत्यंत प्राचीन : महापौर श्रीमती राय महापौर श्रीमती मालती राय ने कहा कि भारत में पत्रकारिता का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। हमारी ज्ञान परंपरा में भी देखा जा सकता है। उन्होंने राज्यपाल पटेल के जन कल्याण प्रयासों में सक्रियता, सहयोग और संवेदनशीलता की सराहना की। वरिष्ठ पत्रकार और संपादक महेश श्रीवास्तव ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, व्यावसायिकता आदि की चुनौतियों के संदर्भ में विचार व्यक्त किए। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने कहा कि देश में पत्रकारिता की समृद्ध संस्कृति है। इसकी झलक पौराणिक ग्रंथों के संदर्भ से लेकर आधुनिक विकास यात्रा मिलती है। महाभारत के पात्र संजय को आधुनिक लाइव प्रसारण का अग्रदूत माना जा सकता है, क्योंकि वे धृतराष्ट्र को युद्ध का प्रत्यक्ष वर्णन सुनाते थे। नारद ऋषि ने लोक-कल्याण के लिए सूचनाओं का आदान-प्रदान किया, उसी परंपरा को आज पत्रकार आगे बढ़ा रहे हैं। राज्यपाल पटेल का माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान के संस्थापक विजयदत्त श्रीधर ने पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल को हिन्दी भवन द्वारा पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित विशेषांक भेंट किया गया। स्वागत उद्बोधन विजयदत्त श्रीधर ने दिया। आभार प्रदर्शन डॉ. मंगला ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में लोकभवन के अधिकारी, जनसंपर्क विभाग के सेवा निवृत्त अपर संचालक सुरेश गुप्ता, हिन्दी पत्रकारिता से जुड़े विद्वान, पत्रकार और साहित्य प्रेमी मौजूद थे।  

लोक भवन में गोवा, सिक्किम एवं तेलंगाना के स्थापना दिवस समारोह हुआ संपन्न

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि स्‍थापना दिवस समारोह केवल राज्यों के प्रशासनिक गठन का स्मरण नहीं, बल्कि उनके संघर्ष, सांस्कृतिक विरासत और विकास यात्रा से प्रेरणा ग्रहण करने का उपक्रम है। भारत की भौगोलिक, भाषाई और सांस्कृतिक विविधताएँ ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति हैं। यही सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत की नींव हैं। उन्होंने कहा कि सिक्किम का पर्यावरणीय मॉडल, गोवा का पर्यटन, मत्स्य उद्योग और तेलंगाना की तकनीकी नवाचार क्षमता राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण आधार स्तंभ हैं। राज्यपाल  पटेल मंगलवार को गोवा, सिक्किम एवं तेलंगाना राज्य के स्थापना दिवस के संयुक्त समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने तीनों राज्यों के निवासियों को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी। लोकभवन के सांदीपनि सभागार में “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” संकल्पना के तहत कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” की भावना देश की एकता, अखंडता और समग्र विकास का सशक्त आधार है। आयोजन प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत निर्माण संकल्प के प्रति राष्ट्रीय एकता की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रदर्शन है। उन्होंने सभी नागरिकों से राष्ट्र के नव निर्माण में अपना सर्वोत्तम योगदान देने तथा “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” की भावना को और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने युवा संगम कार्यक्रम के तहत आई.आई.टी धनबाद से आये युवाओं का स्वागत करते हुए उन्हें झारखंड के अमर शहीद भगवान बिरसा मुंडा से प्रेरणा लेते हुए विकसित भारत @ 2047 में योगदान के लिए प्रेरित किया। कहा कि युवा परिवार और राष्ट्र की आशा के केन्द्र होते है, इसलिए भावी जीवन में सदैव अच्छा व्यक्ति बनने के लिए कार्य करें। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि तेलंगाना राज्य की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक विविधता और आधुनिक विकास का अद्भुत समन्वय भारत की विशिष्ट पहचान को समृद्ध करते है। राज्य की गौरवशाली परंपराएं, स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व देश की अमूल्य धरोहर हैं। लोकतांत्रिक अधिकारों, सामाजिक कल्याण और विकास के क्षेत्र में तेलंगाना की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गोवा की ऐतिहासिक विरासत, समुद्री वैभव, भारतीय और पश्चिमी परंपराओं का सांस्कृतिक समन्वय की विविधता देश की शक्ति है। गोवा केवल प्रमुख पर्यटन केंद्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और औपनिवेशिक शासन से मुक्ति के लिए हुए साहसिक संघर्ष की प्रेरक भूमि भी है। राष्ट्रभक्ति और आत्मसम्मान की भावना को सुदृढ़ करती है। राज्यपाल  पटेल ने स्थापना दिवस समारोह में सिक्किम वासियों को देश का पाँचवाँ पूर्ण साक्षर राज्य बनने की बधाई दी। उन्होंने कहा कि हिमालय की गोद में बसे देश के प्रथम पूर्णतः जैविक राज्य सिक्किम की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक शांति और सतत विकास मॉडल भारत की वैश्विक पहचान को सुदृढ़ करता है। समारोह में सिक्किम के राज्यपाल  ओमप्रकाश माथुर, गोवा के राज्यपाल  पुसापति अशोक गजपति राजू तथा तेलंगाना के राज्यपाल  शिव प्रताप शुक्ला के शुभकामना वीडियो संदेशों का प्रसारण किया गया। कार्यक्रम में गोवा, सिक्किम, तेलंगाना और मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती लघु फिल्में प्रदर्शित की गई। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला में तेलुगु संगमम भोपाल द्वारा अन्नामाचार्य कीर्तनम् पर आधारित एकल नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। युवा, बाल कलाकारों ने राजस्थान और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक विरासत के अनूठे संगम का समूह नृत्य जिसकी जड़ें राजस्थान की बंजारा संस्कृति से जुड़ी हैं और भद्राचलम स्थित प्रसिद्ध  सीता रामचन्द्रस्वामी मंदिर और भगवान राम की भक्ति को समर्पित समूह नृत्यों की प्रस्तुति दी। आई.आई.टी. इंदौर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मृगेन्द्र दुबे ने युवा संगम के संबंध में जानकारी दी। आई.आई.टी. धनबाद के युवाओं के 6 दिवसीय मध्यप्रदेश भ्रमण के समापन अवसर पर लोकभवन के गरिमामय समारोह में शामिल होने को अविस्मरणीय बताया है। राज्यपाल  पटेल का समारोह के प्रारंभ में गोवा समाज के प्रतिनिधि  क्रिस्टोफर एफ. नरोन्हा तथा  पी.वी. फर्नाडिस एवं तेलुगु संगमम भोपाल के  चंद्रमोहन नायडू द्वारा स्मृति-चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। राज्यपाल का स्वागत तेलुगु संगमम के बाल सदस्यों व्ही. साईं सिरिशा, व्ही. साई दीक्षिता और व्ही. साईं कात्यायनी द्वारा पुष्पगुच्छ एवं उनके द्वारा बताई गई कलाकृति भेंट कर किया गया। कार्यक्रम में डिप्टी डायरेक्टर टेक्निकल एजुकेशन डॉ. बी. लक्ष्मीनारायण रेड्डी ने आभार प्रदर्शन किया। कंट्रोलर हाउस होल्ड लोक भवन मती शिल्पी दिवाकर ने संचालन किया।   स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में मध्यप्रदेश की आईपीएस अधिकारी मती कृष्णवेनी देसवतु, राज्यपाल के उप सचिव  सुनील दुबे, आई.आई.टी. धनबाद के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार वाय, संस्थान के 59 युवाओं के प्रतिनिधिमंडल सहित गोवा, तेलंगाना और सिक्किम राज्यों के मूल निवासी सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, प्रशासनिक अधिकारी तथा सांस्कृतिक संगठनों के सदस्य उपस्थित थे।  

राज्यपाल पटेल ने अपना जन्म दिवस बच्चों के साथ मनाया

राज्यपाल पटेल ने अपना जन्म दिवस बच्चों के साथ मनाया लोक भवन मंदिर में प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अपना जन्म दिवस सोमवार को लोक भवन में बच्चों के साथ मनाया। राज्यपाल पटेल को लोक भवन मंदिर में एकत्रित बच्चों ने उत्साहपूर्वक सामूहिक रुप से लयबद्ध ताली बजा और शुभकामना गीत गाकर जन्म दिवस की बधाई दी। राज्यपाल पटेल ने बच्चों को उपहार और शुभाशीष प्रदान किया। राज्यपाल पटेल ने जन्म दिवस के अवसर पर लोक भवन मंदिर में विधि-विधान से पूजा अर्चना की। उन्होंने ईश्वर से प्रदेश की खुशहाली, शांति, समृद्धि और सर्वांगीण विकास की कामना की है। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, उप सचिव सुनील दुबे सहित लोक भवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।  

राज्यपाल जनजातीय समुदाय से संवाद कार्यक्रम में हुए शामिल

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं ने जनजातीय समुदाय के लिए आवास, आरोग्य और जन कल्याण के प्रभावी कार्य किए है। उन्होंने कार्यक्रम में जनजातीय लोक कलाकारों द्वारा पारंपरिक लोक नृत्य एवं गीतों की आकर्षक प्रस्तुतियां को क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया है। राज्यपाल  पटेल गुरुवार को पांढुर्णा के ग्राम आमला में आयोजित जनजातीय समुदाय से संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए। आमजन को संबोधित किया। राज्यपाल  पटेल ने पांढुर्णा जिले के प्रवास के दौरान ग्राम खुटामा में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के हितग्राही  राजू धुर्वे के घर पर आत्मीय भोज किया। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि आयुष्मान योजना हर व्यक्ति को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने की अभूतपूर्व योजना है। आमजन को गंभीर बीमारियों के उपचार में बड़ी राहत मिल रही है। उन्होंने बताया कि 70 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक व्यक्ति को भी योजना में उपचार का लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि विभिन्न आयोजनों में मिलने वाले परिवार उन्हें बताते है कि पक्के आवास का उनका सपना प्रधानमंत्री आवास योजना ने साकार किया है। उन्होंने सिकल सेल बीमारी की जांच एवं उपचार के लिए प्रदेश में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। मानव स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती अत्यंत उपयोगी राज्यपाल  पटेल ने किसानों द्वारा उत्पादित प्राकृतिक जैविक उत्पादों को मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी एवं लाभकारी बताया हैं। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। राज्यपाल  पटेल ने यह बात ग्राम पंचायत आमला में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा लगाए गए प्राकृतिक जैविक उत्पादों के स्टॉल पर प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों से चर्चा के दौरान कही है। उन्होंने कृषक  मटरूलाल डोंगरे, ग्राम भूम्मा से उनके द्वारा उत्पादित जैविक हल्दी एवं जैविक तुअर दाल तथा कृषक  मोरेश्वर दानवे, सौसर से उनके द्वारा उत्पादित शुगर फ्री जैविक काला आलू एवं प्राकृतिक सोना मोती गेहूं की जानकारी प्राप्त की। विद्यार्थियों ने दी गोंडी नृत्य की प्रस्तुति राज्यपाल  पटेल का सांदीपनि विद्यालय सौंसर के विद्यार्थियों द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत कर अभिनंदन किया गया। शासकीय हाईस्कूल आमला के विद्यार्थियों ने आकर्षक गोंडी नृत्य की प्रस्तुति दी। राज्यपाल  पटेल द्वारा विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किए गए। दिव्यांगता प्रमाण पत्र, क्षय रोगियों को फूड बास्केट, आयुष्मान योजना के हितग्राहियों को कार्ड, भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना के हितग्राहियों को सहायता, किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड और मध्यप्रदेश राज्य आजीविका मिशन तथा पशुपालन विभाग के हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किए गए। इस अवसर पर कलेक्टर  नीरज कुमार वशिष्ठ द्वारा राज्यपाल  पटेल का जामसांवली के प्रसिद्ध  हनुमान मंदिर की प्रतिमा भेंट कर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय सांसद  विवेक बंटी साहू, विधायक  विजय चौरे, विधायक  नीलेश उईके सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल रहे।  

राज्यपाल द्वारा सिकल सेल-एनीमिया जांच मशीन “गजेल” लोकार्पित

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवांशिक बीमारी के उन्मूलन में जागरूकता और जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। समय पर जांच और समुचित उपचार से रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। जानकारी के अभाव में यह बीमारी माता-पिता से बच्चों तक पहुंच जाती है, लेकिन सजगता, सहयोग और सावधानी से इसका उन्मूलन संभव है। राज्यपाल  पटेल बुधवार को बैतूल के भीमपुर में सिकल सेल स्वास्थ्य शिविर एवं हितलाभ वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री  दुर्गादास उईके भी मौजूद थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को सिकल सेल मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही हैं। देशभर में लगभग 7 करोड़ से अधिक स्क्रीनिंग की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि आज का आयोजन इसी दिशा में मजबूत कदम है। राज्यपाल  पटेल ने बैतूल जिले में सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों की सराहना की। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबके प्रयास” के संकल्प से सिकल सेल उन्मूलन का आह्वान किया। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि कोई भी बच्चा सिकल सेल से प्रभावित नहीं हो। इसके लिए विवाह से पूर्व लड़का और लड़की के स्वास्थ्य कार्ड का मिलान अवश्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन के लिए एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी में शोध एवं उपचार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्यपाल  पटेल ने सिकल सेल और टी.बी. मरीजों को तैलीय एवं फास्ट फूड नहीं खाने, पौष्टिक आहार लेने, नियमित व्यायाम करने तथा अनुशासित जीवन शैली अपनाने की सलाह दी। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि जनजातीय समुदायों के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बैगा, सहरिया और भारिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना, जनजातीय ग्रामों की अधोसंरचना विकास और मूलभूत सुविधाओं की दृष्टि से अभूतपूर्व है।  उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों का मानचित्र तैयार कर सरकार के प्रयासों को आवश्यकताओं के अनुरूप पहुँचाने के निर्देश दिए।  राज्यपाल  पटेल ने कहा कि शिक्षा ही प्रगति और सफलता का सबसे बड़ा माध्यम है। बेटियों को प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपने बच्चों, विशेषकर बेटियों को अच्छी शिक्षा देने का आग्रह किया। केंद्रीय मंत्री जनजातीय मामले  दुर्गादास उइके ने कहा कि भीमपुर में सिकल सेल जांच मशीन का लोकार्पण जनजातीय एवं वंचित समुदायों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। केंद्रीय मंत्री  उईके ने राज्यपाल  पटेल के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में चल रहे सिकल सेल जागरूकता एवं उन्मूलन प्रयासों की सराहना की। सिकल सेल एवं थैलेसीमिया जांच मशीन “गजेल” का लोकार्पण राज्यपाल पटेल ने कार्यक्रम में सिकल सेल एनीमिया एवं थैलेसीमिया जांच की अत्याधुनिक मशीन “गजेल” का लोकार्पण किया। राज्यपाल  पटेल को बताया गया कि मशीन जनजातीय बाहुल्य भीमपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्थापित की जाएगी। सिकल सेल एनीमिया एवं थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारियों की त्वरित एवं सटीक जांच में सहायक होगी। “मिशन रानी” अभियान का किया शुभारंभ राज्यपाल  पटेल ने कार्यक्रम में “मिशन रानी” अभियान का भी शुभारंभ किया। अभियान में स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा जनजातीय कार्य विभाग संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। यह अभियान महिलाओं, किशोरी बालिकाओं एवं गर्भवती माताओं में एनीमिया नियंत्रण के लिए प्रारंभ किया गया है। अभियान का उद्देश्य एनीमिया में कमी लाना, रक्त में हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार करना तथा सिकल सेल एवं थैलेसीमिया जैसी बीमारियों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करना है। अभियान के तहत हीमोग्लोबिन जांच, संपूर्ण रक्त जांच, सीरम फेरिटिन, विटामिन बी-12 एवं विशेष रक्त परीक्षण किए जाएंगे। हितलाभ वितरण और प्रदर्शनी अवलोकन राज्यपाल  पटेल ने कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया। सिकल मित्र प्रमाण पत्र, जेनेटिक कार्ड, फूड बास्केट, मां गंगा आजीविका स्वयं सहायता समूह, सी.सी.एल. राशि प्रदान की। सी.बी.एस.ई. कक्षा 12वीं में 94 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर सेजल उईके, राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी शिवानी उईके तथा अंतर्राष्ट्रीय कराटे में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कल्याणी कोड़पे को सम्मानित किया। उन्होंने महिला एवं बाल विकास, पशुपालन, राष्ट्रीय आजीविका मिशन, वन और स्वास्थ्य विभाग के स्टालों का भी निरीक्षण किया। विभागीय गतिविधियों, योजनाओं की जानकारी ली। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित थे।  

रेडक्रॉस की सेवाओं और मिशन से जनता को करें प्रेरित, राज्यपाल पटेल का आह्वान

रेडक्रॉस के उद्देश्य और सेवा कार्यों से जन-जन को करें प्रेरित : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने विश्व रेडक्रॉस दिवस पर प्रदान किए "सेवा सम्मान" भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीन-दुखियों की सेवा, ईश्वर की सेवा का सशक्त माध्यम है। मानवता की सेवा ही प्रभु की सेवा है। अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार ग़रीब, वंचित और ज़रूरतमंदों की हमेशा मदद करते रहे। उन्होंने कहा कि सेवा का दायरा बहुत विस्तृत है। रेडक्रॉस सदस्य दूरस्थ, ग्रामीण इलाकों जाकर जरूरतमंदों से मिले, उनकी समस्याओं को करीब से देखें, समझे और यथा संभव समाधान के आत्मीय प्रयास करें। हर सदस्य कम से कम 5 व्यक्तियों को रेडक्रॉस से जोड़े। राज्यपाल पटेल ने रेडक्रॉस के सिद्धांतों, उद्देश्यों और कार्यों से जन-जन को प्रेरित करने का आह्वान किया। पीड़ित मानवता के प्रति रेडक्रॉस के संवेदनशील समर्पण से प्रेरणा लेने, वंचितों के उत्थान में सहभागी बनने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की युवाओं से अपील की। राज्यपाल पटेल शुक्रवार को विश्व रेडक्रॉस दिवस पर आयोजित "सेवा सम्मान समारोह" को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने रेडक्रॉस के संस्थापक हेनरी ड्यू-नॉट के जन्म दिवस पर उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। समर्पित कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और समाज सेवी संस्थाओं को सम्मानित किया। मानवता की सेवा कार्यों और प्रयासों के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी। सभी सम्मानित जनों को सम्पूर्ण समाज के सच्चे नायक और प्रेरणा स्रोत बताया। मध्यप्रदेश राज्य रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा कार्यक्रम का आयोजन मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (मेपकास्ट) परिसर में किया गया। रेडक्रॉस की सीख कर्मों में भी झलकनी चाहिए राज्यपाल पटेल ने कहा कि विश्व रेडक्रॉस दिवस, मात्र एक दिवस का उत्सव नहीं, बल्कि मानवता, सेवा, करुणा और समर्पण की निरंतर प्रवाहित धारा का स्मरण है। युद्ध के मैदान में पीड़ा देख कर लिया गया संकल्प, आज पीड़ित मानवता की सेवा का वैश्विक आंदोलन बन गया है, जो हमें बताता है कि "सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।“ उन्होंने कहा कि रेडक्रॉस के 7 मूल सिद्धांत- मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता, स्वतंत्रता, स्वैच्छिक सेवा, एकता और सर्व व्यापकता,  जीवन जीने के सच्चे मार्गदर्शक हैं। इनका मन, वचन और कर्म से 365 दिन पालन ही, समावेशी समाज निर्माण के संकल्प को सिद्ध करने का प्रभावी तरीका है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि रेडक्रॉस की सीख, शब्दों तक सीमित नहीं हो, यह हमारे कर्मों में भी झलकनी चाहिए। इसके लिए समाज को और अधिक संवेदनशील बनाना होगा। सम्मानित लोग, रेडक्रॉस के कार्यों में अपनी निष्ठा, समर्पण, सेवा-भाव के संस्कारों से भावी पीढ़ी को नेतृत्व प्रदान कर प्रोत्साहित करें। मानवता की सेवा के संकल्प के साथ पीड़ितों और वंचितों का दिल खोलकर सहयोग करें। मन, समय और संसाधनों से उनका साथ दें। समाज में पारस्परिक सहयोग तथा संवेदनशीलता की भावना को और अधिक सशक्त बनाएं। जन औषधि योजना हर वर्ग के लिए वरदान राज्यपाल पटेल ने कहा कि जन-औषधि योजना, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अत्यंत संवेदनशील पहल है। यह योजना हर वर्ग के लिए वरदान है। उन्होंने इस अभूतपूर्व योजना के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार जताया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रदेश रेडक्रॉस सोसायटी दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों में अधिक से अधिक जन-औषधि केन्द्र खोलने के प्रयास करें। इस पहल से स्थानीय युवाओं को जोड़े। उन्हें जन-औषधि केन्द्र में उपलब्ध दवाओं, गुणवत्ता और कीमतों की जानकारी दें। राज्यपाल पटेल का समारोह में मध्यप्रदेश रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन डॉ. श्याम सिंह कुमरे और वाइस चेयरमैन मनीष रावल ने शॉल एवं श्रीफल से अभिनंदन किया। चेयरमैन डॉ. कुमरे ने स्वागत उद्बोधन दिया। मध्यप्रदेश रेडक्रॉस सोसायटी के कार्यों और उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई। आभार जनरल सेक्रेटरी रामेन्द्र सिंह ने माना। कार्यक्रम में नगर निगम कमिश्नर श्रीमती संस्कृति जैन, मेपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अमित कोठारी, डॉ. ब्रिजेश श्रीवास्तव, मध्यप्रदेश रेडक्रॉस सोसायटी की राज्य और जिला इकाई के पदाधिकारी, रेडक्रॉस सदस्य, स्वयंसेवक, सम्मान प्राप्तकर्ता और उनके परिजन उपस्थित थे।  

भारत को विकसित बनाने में विद्यार्थी करें सहभागिता

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि समाज की सेवा में ही जीवन की सार्थकता है। समाज सेवा द्वारा वंचित वर्ग का व्यक्ति राज्यपाल बन सकता है। चायवाला प्रधानमंत्री बन सकता है। भारतीय संस्कृति के ध्येय 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के अनुसार शिक्षित व्यक्ति का परम कर्तव्य वंचितों और गरीबों की खुशहाली और उत्थान के लिए कार्य करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा है कि आत्मविश्वासी, नवाचारी और जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी शिक्षा और प्रतिभा के द्वारा आत्मनिर्भर, समृद्ध, सशक्त और विकसित भारत बनाने में सहभागिता करें। राज्यपाल  पटेल एल.एन.सी.टी. विश्वविद्यालय के पाँचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सांसद  रवि किशन, सांसद  राजीव शुक्ला, सांसद  देवूसिंग चौहान, फिल्म अभिनेता एवं कास्टिंग डायरेक्टर  मुकेश छाबड़ा, सेज समूह के चेयरमैन  संजीव अग्रवाल को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी की मानद उपाधि से विभूषित किया। फार्मेसी, विधि, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, पत्रकारिता और मेडिकल साइंस के क्षेत्र में पी.एच.डी. उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की। अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय की दीक्षांत स्मारिका और  जय नारायण चौकसे की आत्मकथा पुस्तक का लोकार्पण किया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीक्षांत शपथ भावी जीवन की मार्गदर्शिका है। प्राप्त उपाधि मन, वचन और कर्म से देश, समाज और मानव जाति की सेवा करने का संकल्प है, जिसका पालन 365 दिन करना दीक्षित विद्यार्थियों का दायित्व है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी द्वारा लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति परिवर्तनकारी कदम है। नीति ने शिक्षण प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी बनाया है। उन्होंने नीति के परिप्रेक्ष्य में तकनीकी संस्थानों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। विश्वविद्यालयों से पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों से आगे बढ़कर आधुनिक आयामों को अपनाने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पाठ्यक्रमों को समयानुकूल बनाएं। शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा जाए। विद्यार्थियों की सृजनात्मकता एवं नवाचार को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बनाएं। उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे ए.आई., डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और हरित तकनीकों को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया। विद्यार्थियों में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक, समसामयिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने विश्वविद्यालय को विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण, इंटर्नशिप, उद्यमिता और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराकर “‘जॉब सीकर’ नहीं, बल्कि ‘जॉब प्रोवाइडर’” बनाने के लिए कहा है। विद्यार्थियों का अपनी प्रतिभा और चिंतन से समाज, राष्ट्र और स्वयं के उत्थान में योगदान देने का आह्वान किया गया। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त घुमन्तु और अर्द्धघुमन्तु कल्याण मती कृष्णा गौर ने कहा कि समारोह में दीक्षित हर विद्यार्थी शिक्षा, संस्कार, नवाचार, कौशल का पुंज है। राष्ट्र के विकास के लिए उत्तरदायी है। उन्होंने कहा कि युग दृष्टा प्रधानमंत्री ने युवा पीढ़ी की योग्यता और दायित्वबोध को पहचानते हुए विकसित भारत एट 2047 का संकल्प लिया है। संकल्प की सफलता के लिए हर युवा को सकारात्मकता, नवाचार और मानवीय मूल्यों के साथ राष्ट्र के लिए समर्पित होना होगा। उन्होंने कहा कि प्राप्त उपाधि समाज के लिए उत्तरदायित्व का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की है कि मंचासीन विभूतियों की सकारात्मकता, मानवीयता और विनम्रता को आत्मसात कर राष्ट्र समाज के उत्थान में योगदान दें। सांसद  देवूसिंह चौहान ने उनके आकाशवाणी के अभियंता की सुरक्षित सेवा का त्याग कर राजनैतिक जीवन में प्रवेश की जानकारी दी। विद्यार्थियों से कहा कि निरंतर मेहनत करना ही जीवन में सफलता का आधार है। सफलता निरंतर प्रयास करने वालों को ही चुनती है। सांसद  राजीव शुक्ला ने स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि जिन्हें पदक नहीं मिले है, वह हताश नहीं हो। हुनर प्राप्त करें। उन्होंने हुनर के साथ वैश्विक प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का उल्लेख कर विद्यार्थियों को प्रेरित किया। अभिनेता अभिनेता एवं सांसद  रवि किशन ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन का लक्ष्य तय करें। उसके लिए निरंतर अथक प्रयास करने पर ही सफलता मिलती है। उन्होंने उनके जीवन के संघर्षों की कथा सुनाते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन एल.एन.सी.टी. समूह के चेयरमैन  जय नारायण चौकसे ने और आभार ज्ञापन सचिव  अनुपम चौकसे ने किया।

राज्यपाल के समक्ष जनजातीय उपयोजना कार्यशाला की अनुशंसाओं पर हुई चर्चा

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि जनजातीय कार्यशाला में प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं को संवेदनशीलता के साथ लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि जनजातीय कल्याण, सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनजातीय सशक्तिकरण के लिए सरकार के दिशा-निर्देशों और मार्गदर्शन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। जनजातीय विकास से संबद्ध विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय अत्यंत आवश्यक है।     प्रदेश के परिदृश्य में हो नवाचारों का अध्ययन।      विकास कार्य, जनजातीय क्षेत्र फोकस्ड हों।     अन्तर्विभागीय समन्वय जरूरी।     क्रियान्वयन में जवाबदारी बढ़ाए।     स्कूलों की गुणवत्ता में पेसा समितियों को जोड़े।  राज्यपाल  पटेल मंगलवार को लोकभवन में जनजातीय प्रकोष्ठ के साथ जनजातीय कार्य विभाग की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि जनजातीय सशक्तिकरण और विकास के लिए प्रावधानित बजट का जनजाति उन्मुख उपयोग हो। राशि को लक्षित उद्देश्य पर ही खर्च किया जाए। राज्यपाल  पटेल ने मैदानी भ्रमण कर जनजातीय विकास प्रयासों की जमीनी हकीकत जानने के और अधिक सघन प्रयासों पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या वाला विस्तृत क्षेत्र है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में निवासरत जनजातियों के विकास एवं कल्याण के कार्य और अधिक क्षेत्र फोकस्ड होना जरूरी है। कार्यशाला में प्राप्त देश के जनजातीय बाहुल्य राज्यों द्वारा जनजातीय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि के क्षेत्र में किए गए नवाचारों का प्रदेश की आवश्यकता के संदर्भ में अध्ययन किया जाए, उन्हें समझ कर अपनाने के प्रयास किए जाने चाहिए। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि कमजोर वर्गों के कल्याण प्रयासों में संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण है। समानुभूति की भावना के साथ किए गए आत्मीय प्रयास सदैव सुफल देते हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय कल्याण प्रयासों में जन प्रतिनिधियों और शासकीय सेवकों की और अधिक संवेदनशीलता तथा सक्रियता जरूरी है। पात्र हितग्राहियों का चयन, योजना का प्रभावी क्रियान्वयन, बजट राशि के समुचित उपयोग की प्रक्रियाओं में और अधिक जवाबदारी होनी चाहिए। जिम्मेदारी के निर्वहन में लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई भी की जानी चाहिए। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि शिक्षा, प्रगति का मार्ग सुनिश्चित करती है। जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण में शिक्षा के प्रसार की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए जरूरी है कि जनजाति क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। पेसा निगरानी समिति के माध्यम से शिक्षकों, शिक्षण, शैक्षणिक गुणवत्ताओं आदि की निगरानी और मूल्यांकन के प्रयास किए जाए।  राज्यपाल  पटेल को बैठक में जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव  गुलशन बामरा ने विगत 16 और 17 अप्रैल 2026 को आयोजित जनजातीय उपयोजना कार्यशाला की अनुशंसाओं की विस्तार से जानकारी दी। लोकभवन के जवाहर खण्ड सभाकक्ष में आयोजित बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष  दीपक खाण्डेकर, राज्यपाल के उप सचिव  सुनील दुबे, जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त सह संचालक डॉ. सतेन्द्र सिंह, जनजातीय कार्य विभाग, जनजातीय प्रकोष्ठ के सदस्य और लोकभवन के अधिकारी उपस्थित थे।  

कौशल और सामाजिक उद्यमिता से होगा भारत विकसित: राज्यपाल पटेल का बयान

कौशल और सामाजिक उद्यमिता से होगा भारत विकसित : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने पांचवें "समर्थ भारत कॉन्क्लेव" का किया शुभारंभ भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि कौशल आधारित सामाजिक उद्यमिता विकसित भारत का पथ है। इस दिशा में वैचारिक स्तर पर चिंतन की पहल समसामयिक और सराहनीय है। कॉन्क्लेव, शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी की समाप्ति के लिए समाधान का वैचारिक मंच बने। उन्होंने कहा कि कौशल और सामाजिक उद्यमिता से विकसित भारत निर्माण के चिंतन में सामाजिक एवं पर्यावरणीय चुनौतियों जैसे स्वच्छता, शिक्षा, जल संरक्षण, लैंगिक समानता, प्राथमिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के समाधान खोजने का प्रयास किया जाना चाहिए। राज्यपाल पटेल बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में पांचवें "समर्थ भारत कॉन्क्लेव" के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कॉन्क्लेव का आयोजन  “विकसित  भारत  के  निर्माण में कौशल विकास और सामाजिक उद्यमिता”  विषय पर किया गया है। राज्यपाल पटेल ने कॉन्क्लेव से पहले कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।    राज्यपाल पटेल ने कहा कि कॉन्क्लेव में कौशल विकास की प्रासंगिकता, शिक्षा–उद्योग-समन्वय, सामाजिक उद्यमिता विस्तार, ग्रामीण युवाओं के सशक्तिकरण, स्टार्ट-अप इको सिस्टम की मजबूती, महिला और वंचित वर्गों की सहभागिता का पथ प्रदर्शन पर बल दिया जाए। डिजिटल एवं तकनीकी कौशल, नीतिगत सहयोग और सतत विकास के संतुलित मॉडल पर विचार जरूरी है, ताकि आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता के ठोस उपाय खोंजें जाए। उन्होंने कहा समय की आवश्यकता है कि सरकारी, कॉर्पोरेट क्षेत्र एवं गैर-लाभकारी संगठन के समन्वित और एकजुट प्रयासों को नवाचारी सोच और सतत विकास के लिए, उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए। राज्यपाल पटेल ने प्रतिभागियों से कौशल आधारित सामाजिक उद्यमिता के द्वारा समाज की समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशील और व्यवहारिक नवाचारों पर चिंतन का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर, समृद्ध, सशक्त और विकसित भारत की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है। स्किल इंडिया मिशन, स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया आदि योजनाओं से देश में सशक्त स्टार्ट-अप इको सिस्टम बना है। उन्होंने कहा कि जरूरी है कि हम समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने नए और उपयोगी तरीके विकसित करें, ताकि गरीब और वंचित लोगों के जीवन में वास्तविक सुधार एवं खुशहाली आए। युवाओं को समावेशी विकास का सहभागी बनाएं राज्यपाल पटेल ने कहा कि हमारी लगभग 65 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। युवाओं को जमीनी स्तर से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्हें पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर, नई और रचनात्मक पहल के द्वारा आर्थिक परिवर्तन का माध्यम तथा समावेशी विकास का सहभागी बनाना होगा। डिजिटल एवं तकनीकी कौशल, नीतिगत सहयोग और सतत विकास के संतुलित मॉडल और आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता के ठोस उपायों से परिचय करना होगा। राज्यपाल पटेल ने कहा कि तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था के लिए कौशलयुक्त मानव संसाधन और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली सोच समय की मांग है। शिक्षण संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि शिक्षा व्यवस्था तकनीकी, प्रबंधकीय और उद्यमशील क्षमतावान ऐसे युवा तैयार करें, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सफल हो सकें। राज्यपाल पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर 2 दिवसीय आयोजन का शुभारंभ किया। वोकेशनल ट्रेनर्स को सम्मानित किया। उनका आईसेक्ट के चान्सलर संतोष चौबे ने पुष्प-गुच्छ और अंगवस्त्रम् भेंट कर स्वागत किया। स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। स्वागत उद्बोधन, स्कोप ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी के चान्सलर डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने दिया। आईसेक्ट के चान्सलर संतोष चौबे ने संस्थान की स्थापना से दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए कौशल और सामाजिक उद्यमिता प्रयासों की विस्तार से चर्चा की। आभार स्कोप ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी के कुलगुरू डॉ. विजय सिंह ने व्यक्त किया। इस अवसर पर रविन्द्र नाथ टैगोर यूनिवर्सिटी के वी.सी. डॉ. आर.पी. दुबे, वाधवानी फाउंडेशन के कर्नल संतोष, प्रो. चान्सलर डॉ. अदिति चतुर्वेदी और विषय-विशेषज्ञ उपस्थित थे।  

राज्यपाल पटेल का बयान: प्रकृति और स्थानीय जीवन के कल्याण में ही सेवा का असली उद्देश्य

प्रकृति और स्थानीय जीवन के कल्याण प्रयासों में ही सेवा की सार्थकता : राज्यपाल पटेल राज्यपाल से भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी मिले लोकभवन में भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारतीय वन सेवा, महज प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि मानवता, प्रकृति, वन्य जीव, सांस्कृतिक धरोहर और भावी पीढ़ियों के प्रति भी एक उत्तरदायित्व है। आप सभी सौभाग्यशाली है, जिन्हें जीवन भर प्रकृति की गोद में रहकर उसके संरक्षण और संवर्धन का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारी, वन कानूनों और जनजातीय कल्याण के प्रावधानों का गहनता से अध्ययन करें, उन्हें समझे और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लागू करें। प्रशिक्षण की सीख को प्रकृति, वन, वन्य जीव और स्थानीय जन जीवन की बेहतरी में उपयोग करें। उनके कल्याण प्रयासों में ही आपकी सेवा की सार्थकता है। यह याद रखें कि आपका आत्मीय व्यवहार, वंचितों के प्रति समानुभूति और संवेदनशीलता ही आपकी सफलता का अंतिम पैमाना होगी। राज्यपाल पटेल सोमवार को भारतीय वन सेवा के 2024-26 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों के सौजन्य भेंट कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को अखिल भारतीय सेवा में चयन की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। लोकभवन के बैंक्वेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। पर्यावरण संरक्षण के लिए सोच, संकल्प और सेवा भाव जरूरी राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्राकृतिक असंतुलन, पर्यावरणीय चुनौतियों आदि के कारण वन एवं वन्य जीवन के संकट का समाधान अत्यंत जरूरी है। वन अधिकारी के रूप में पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन आपका प्राथमिक दायित्व है। इसके लिए आपकी सोच, संकल्प और सेवा का भाव सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ हमेशा आत्मीय, सरल और सहज व्यवहार करें। अपने अच्छे व्यवहार और सहयोग से उनका विश्वास जीते। वनों की अवैधानिक कटाई, शिकार आदि समस्याओं के समाधान में स्थानीय लोगों का सहयोग प्राप्त करें। राज्यपाल पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “एक पेड़-माँ के नाम” अभियान की चर्चा की। इसे स्थानीय सहभागिता से प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन की सराहनीय पहल बताया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहाँ की वन भूमि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के साथ हमारी गौरवशाली सभ्यता, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी संजोए हुए हैं। प्रदेश में विस्तृत और विश्व प्रसिद्ध वन, अनेक राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण्य है। मध्यप्रदेश बाघ, चीतल, तेंदुआ, गिद्ध, घड़ियाल और चीता स्टेट के रूप में प्रसिद्ध है। राज्य में गैंडा, हाथी आदि वन्य जीवों के पुनर्वास के अभूतपूर्व प्रयास भी चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग के वैज्ञानिक प्रबंधन प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश आज वन-वन्य जीव प्रबंधन में अग्रणी राज्य है। सतत्-समावेशी विकास और संरक्षण, आपकी जिम्मेदारी राज्यपाल पटेल ने कहा कि देश में जनजातीय आबादी और वनों में मध्यप्रदेश प्रथम है। यहाँ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सतत्-समावेशी विकास और संरक्षण के द्वारा और अधिक समृद्ध बनाना आपकी जिम्मेदारी है। जनजातीय संस्कृति, परंपराओं, विश्वास, मान्यताओं और मौलिकता के प्रति सम्मान के भाव के साथ कार्य करना, आपका नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय के प्राकृतिक और संवैधानिक अधिकारों के रक्षक के रूप में उनके सशक्तिकरण और कल्याण में आपकी भूमिका बहुत प्रभावी है। अपनी प्रतिभा और ज्ञान का उपयोग पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन, घटते वन क्षेत्र, जैव विविधता के संकटों के समाधान में करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आउट ऑफ बॉक्स थिंकिंग के साथ वन, वन्य जीवों और स्थानीय लोगों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य करें। जनजातीय समुदाय की प्रकृति आधारित जीवन शैली, जड़ी-बूटियों के ज्ञान और कला की मौलिकता से आधुनिक जगत को परिचित कराएं। उनके लिए सतत आजीविका के प्रयासों में सहयोग करें। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का महत्व बताएं राज्यपाल पटेल ने कहा कि जब भी मैदानी भ्रमण पर जाएं तो स्थानीय लोगों से उनके बच्चों की शिक्षा की जानकारी जरूर लें। उन्हें शिक्षा का महत्व बताएं। अभिभावकों और बच्चों के साथ शिक्षा से जीवन में होने वाले बदलावों के संबंध में प्रेरक संवाद करें। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय की नई पीढ़ी को शिक्षा, कौशल उन्नयन तथा स्वास्थ्य और आजीविका की कल्याणकारी योजनाओं, कानूनों और प्रावधानों का लाभ लेने प्रेरित और प्रोत्साहित करें। राज्यपाल पटेल का प्रमुख सचिव वन संदीप यादव ने पुष्प गुच्छ से स्वागत किया। उनका यादव और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल पटेल ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों से परिचय प्राप्त किया। स्वागत उद्बोधन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एच.आर.डी.) डॉ. बी.एस अन्निगेरी ने दिया। प्रशिक्षु अधिकारी सुसौम्या ने प्रशिक्षण के अनुभवों को साझा किया। उप वन संरक्षक मयंक सिंह गुर्जर ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन, वन विभाग-लोकभवन के अधिकारी और प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित रहे।