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CJI गवई का बड़ा बयान: आरक्षण पर फैसले से क्यों भड़क गए उनके समुदाय के लोग

पणजी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने शनिवार को कहा कि उन्हें अनुसूचित जातियों के आरक्षण में उपवर्गीकरण पर दिए गए अपने ऐतिहासिक फैसले को लेकर भारी आलोचना झेलनी पड़ी है। यहां तक कि उनकी ही जाति के लोग उनके खिलाफ खड़े हुए। गोवा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में बोलते हुए CJI गवई ने कहा, "मेरे समुदाय के लोगों ने भी इस फैसले की आलोचना की। लेकिन मैं मानता हूं कि मुझे अपने निर्णय जनता की अपेक्षाओं के अनुसार नहीं, बल्कि कानून की समझ और अपनी अंतरात्मा के अनुसार लिखने होते हैं।" अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संवैधानिक पीठ ने 6-1 के बहुमत से फैसला सुनाया था कि अनुसूचित जातियां सामाजिक रूप से एक समान वर्ग नहीं हैं और राज्यों को उनमें उपवर्गीकरण करने का अधिकार है, ताकि सबसे वंचित तबकों को आरक्षण का लाभ मिल सके। क्रीमी लेयर पर भी रखी बात CJI गवई ने कहा कि आरक्षण से ‘क्रीमी लेयर’ को बाहर करने की उनकी राय पर भी सवाल उठाए गए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, "क्या मुंबई या दिल्ली के बेहतरीन स्कूलों में पढ़ने वाले किसी IAS अधिकारी के बेटे-बेटी की तुलना उस मजदूर या किसान के बच्चे से की जा सकती है जो गांव की जिला परिषद या ग्राम पंचायत स्कूल में पढ़ रहा है?" उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 14 सभी के बीच समानता नहीं, बल्कि असमानों के बीच असमान व्यवहार कर उन्हें समान बनाना सुनिश्चित करता है। बुलडोजर जस्टिस पर क्या बोले? गवई ने सुप्रीम कोर्ट के उस हालिया फैसले का भी जिक्र किया जिसमें अवैध बुलडोजर कार्रवाई रोकने और नियमित प्रक्रिया का पालन करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए। उन्होंने कहा, "हमें यह देखकर चिंता हुई कि जिन लोगों पर मुकदमा भी नहीं चला, उनके घर तोड़े जा रहे थे। परिवार के सदस्य, जिनकी कोई गलती नहीं, वे भी सजा भुगत रहे थे। इसलिए हमने यह स्पष्ट किया कि कार्यपालिका खुद ही न्यायाधीश नहीं बन सकती।" अपने 22–23 साल के न्यायिक कार्यकाल पर संतोष व्यक्त करते हुए CJI गवई ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उन्होंने भारतीय संविधान की यात्रा में सामाजिक और आर्थिक न्याय की दिशा में थोड़ा योगदान दिया है।  

पुजारा का करियर समाप्त, 2023 WTC फाइनल रहा आखिरी इंटरनेशनल मैच

 नई दिल्ली भारत के स्टार टेस्ट बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने भारतीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की है। रविवार को उन्होंने एक पोस्ट लिखकर इसका एलान किया। इस भावुक नोट में उन्होंने अपनी भावनाएं जाहिर की हैं। पुजारा ने पोस्ट करते हुए लिखा, 'भारतीय जर्सी पहनना, राष्ट्रगान गाना, और हर बार मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ देना… इसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है कि यह कितना खास था, लेकिन जैसा कि कहा जाता है, हर अच्छी चीज का एक अंत होता है, और अत्यंत आभार के साथ मैं यह घोषणा करता हूं कि मैंने भारतीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का निर्णय लिया है।' पुजारा ने नोट में लिखा, 'राजकोट के एक छोटे से शहर का रहने वाला मैं, बचपन में अपने माता-पिता के साथ सितारों को छूने का सपना देखा और भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बनने का सपना संजोया। मुझे तब यह नहीं पता था कि यह खेल मुझे इतना कुछ देगा। अनमोल अवसर, अनुभव, उद्देश्य, प्रेम, और सबसे बढ़कर अपने राज्य और इस महान राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका। मैं BCCI और सौराष्ट्र क्रिकेट संघ का धन्यवाद करना चाहता हूं, जिन्होंने मुझे अपने क्रिकेट करियर में अवसर और समर्थन दिया। मैं उन सभी टीमों, फ्रेंचाइजियो और काउंटी टीमों का भी आभारी हूं जिनका मैं वर्षों तक हिस्सा रहा।' पुजारा ने लिखा, 'मैं यहां तक नहीं पहुंच पाता यदि मेरे मार्गदर्शकों, कोचों और आध्यात्मिक गुरु का मार्गदर्शन नहीं होता। उनके प्रति मैं सदैव ऋणी रहूंगा। मेरे सभी साथियों, सपोर्ट स्टाफ, नेट बॉलर्स, विश्लेषकों, लॉजिस्टिक्स टीम, अंपायरों, ग्राउंड स्टाफ, स्कोरर्स, मीडिया कर्मियों और उन सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद जो पर्दे के पीछे लगातार मेहनत करते हैं ताकि हम इस खेल को खेल सकें। मेरे प्रायोजकों, भागीदारों और प्रबंधन टीम को, वर्षों से मुझ पर विश्वास जताने और मैदान के बाहर मेरा ध्यान रखने के लिए मैं आपका आभारी हूं। इस खेल ने मुझे दुनिया के कई कोनों में पहुंचाया और प्रशंसकों का जो जुनून और समर्थन मिला वह हमेशा एक स्थायी प्रेरणा रही है। जहां-जहां मैंने खेला, वहां मुझे जो प्यार और समर्थन मिला, उसने मुझे विनम्र बना दिया और मैं इसके लिए सदा आभारी रहूंगा।' पुजारा ने लिखा, 'निश्चित रूप से, यह सब कुछ संभव नहीं हो पाता अगर मुझे मेरे परिवार का अटूट त्याग और समर्थन नहीं मिला होता। मेरे माता-पिता, मेरी पत्नी पूजा, मेरी बेटी अदिति; मेरे ससुराल पक्ष और मेरा पूरा परिवार, जिन्होंने इस यात्रा को सच में सार्थक बना दिया। अब मैं अपने जीवन के अगले चरण की ओर अग्रसर हूं, जहां मैं उनके साथ अधिक समय बिताना और उन्हें प्राथमिकता देना चाहता हूं। आप सभी के प्रेम और समर्थन के लिए धन्यवाद!' पुजारा हाल फिलहाल में इंग्लैंड दौरे पर कमेंट्री करते दिखे थे। उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट जून 2023 में इंग्लैंड में ही खेला था। उनका आखिरी टेस्ट या यूं कहें अंतरराष्ट्रीय मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ केनिंग्टन ओवल में खेला गया विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2023 फाइनल था। ऑस्ट्रेलिया ने इस मुकाबले में भारतीय टीम को शिकस्त दी थी। पुजारा ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 103 टेस्ट और पांच वनडे खेले। टेस्ट में उन्होंने 176 पारियों में 43.61 की औसत से 7195 रन बनाए। इनमें 19 शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 206 रन का रहा वहीं, वनडे में उन्होंने 39.24 की औसत से 51 रन बनाए। इसके अलावा पुजारा आईपीएल में 30 मैच खेल चुके हैं। इसकी 22 पारियों में उन्होंने 99.75 के स्ट्राइक रेट से 390 रन बनाए। इसमें एक अर्धशतक शामिल है।

क्रूरता की हदें पार! पहले पीटा फिर जिंदा आग के हवाले की गई निक्की

ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले के ग्रेटर नोएडा से सनसनीखेज मामला सामने आया है। दादरी थाना इलाके के सिरसा गांव में दहेज की मांग को लेकर विवाहिता की क्रूरता से हत्या कर दी गई। ससुराल पक्ष के लोगों ने विवाहिता को बर्बरता से पीटा और फिर उस पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर जिंदा जला दिया। गंभीर रूप से झुलसने पर महिला की बहन उसे पड़ोसियों की मदद से अस्पताल ले गई, दो अस्पताल बदले, लेकिन इलाज के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया। दिल दहलाने वाली घटना के बाद मृतका महिला की बहन और परिजनों ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रूपबास गांव के रहने वाले भिकारी सिंह ने बताया कि उनकी पुत्री कंचन (29) और निक्की (27) की शादी दिसंबर 2016 में सिरसा गांव के रहने वाले रोहित और उसके भाई विपिन से हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी में स्कॉर्पियो गाड़ी और सभी सामान दिया था लेकिन शादी के बाद से ही ससुराल के लोग 35 लाख रुपये की मांग करने लगे। शादी के बाद से ही पति विपिन भाटी, जेठ रोहित भाटी, सास दया और ससुर सत्यवीर लगातार 35 लाख रुपये अतिरिक्त दहेज मांग रहे थे। पीड़ित परिवार ने आरोपियों की मांग पूरी करने के लिए एक और कार भी दे दी, लेकिन प्रताड़ना का सिलसिला जारी रहा। दोनों बहनों के साथ ससुराल के लोग मारपीट करते थे। कई बार पंचायत कर समझौता किया। लेकिन आरोपियों ने समझौते को नहीं माना। वहीं, मृतका निक्की की बड़ी बहन कंचन का आरोप है कि बृहस्पतिवार की शाम करीब 5:30 बजे उसकी सास दया और देवर विपिन ने मिलकर घटना को अंजाम दिया। आरोप है कि सास दया ने अपने हाथ में ज्वलनशील पदार्थ लिया और विपिन को पकड़ाया। विपिन ने पीड़ित की बहन निक्की के ऊपर डाल दिया। साथ ही बहन के गले पर हमला किया। बर्बरता से उसे पीटा गया। जिसके बाद उनकी बहन बेहोश हो गई। आरोपियों ने उसे जिंदा जला दिया। उसने बहन को बचाने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने उसकी एक न सुनी। कंचन ने इसका विरोध किया तो उसके साथ भी मारपीट की गई। इसी दौरान कंचन ने मारपीट और आग लगाते हुए आरोपियों का वीडियो बना लिया। आनन-फानन निक्की को इलाज के लिए पहले फोर्टिस फिर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उसकी मौत हो गई थी। आरोप है कि घटना के वक्त कंचन का पति रोहित भाटी और ससुर सत्यवीर भी मौके पर मौजूद थे। कंचन की शिकायत पर पुलिस ने नामजद चार आरोपियों के खिलाफ हत्या की धाराओं में केस दर्ज किया है। शनिवार को महिला को आग लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। वहीं एक अन्य वीडियो में मृतका के पुत्र को यह करते हुए सुना जा सकता है कि उसके पापा ने मम्मा को लाइटर से जलाया। पिता का कहना है कि निक्की का एक पुत्र अविश (6) है। निक्की का पति शराब पीकर आए दिन लड़ाई करता है। वहीं, कंचन की एक पुत्री लाव्या (7) व विनीत (4) है। पुत्री की मौत से परिवार में मातम छाया है। मां की मौत से पुत्र का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतका के पति को हिरासत में लिया है। अन्य की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया है। जल्द ही अन्य की गिरफ्तारी की जाएगी। मृतका के परिजन और अन्य व्यक्ति विवेचना में अच्छी तरह कार्रवाई कराए जाने व कार्रवाई में कोई कमी न किए जाने की मांग को लेकर थाना कासना पर आए थे। सभी लोग वार्ता के बाद थाना से वापस चले गए।-सुधीर कुमार, एडीसीपी, ग्रेटर नोएडा जोन

पंजाब का दर्दनाक हादसा: LPG टैंकर ब्लास्ट में 7 लोगों की मौत, कई जिंदगी और मौत से जूझ रहे

होशियारपुर पंजाब के होशियारपुर के मंडियालां गांव के पास हुए एलपीजी टैंकर विस्फोट की वजह से मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। घटना के बाद इलाज के लिए पास के अस्पताल में भर्ती किए गए लोगों में से रविवार सुबह तक दो और लोगों ने अपनी जान गंवा दी। मरने वालों का आंकड़ा अब 7 पर पहुंच गया है। इस हादसे में अभी 30 से ज्यादा लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है। पंजाब के सीएम भगवंत मान ने इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 2-2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। पंजाब सीएम ने हादसे के तुरंत बाद घटना का संज्ञान लेते हुए अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, "जिला होशियारपुर के गांव मंडियालां में देर रात एलपीजी गैस से भरे एक टैंकर के फटने से बड़ा हादसा हो गया है। इस हादसे में लोगों की दर्दनाक मौत होने की भी खबर है। ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों को शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना है। पंजाब सरकार इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों को 2-2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देगी और घायलों का मुफ्त इलाज किया जाएगा।" आपको बता दें मडियालां गांव जालंधर-होशियारपुर हाईवे के पास स्थित है। शुक्रवार देर रात यहां पर एलपीजी भरे ट्रक की एक पिकअप वाहन से टक्कर हो गई। इससे टैंकर में भरी एलपीजी गैस में ब्लास्ट हो गया। रिसाव की वजह से यह गैस पूरे गांव में फैल गई और अपने घरों में सो रहे लोगों को जिंदा ही जला दिया। इस हादसे में दो लोगों की तुरंत ही मौत हो गई थी, जबकि बाकी लोगों को इलाज के लिए ले जाया गया। स्थानीय निवासियों के मुताबिक आग इतनी तेजी से भड़की की उसने पल भर में ही सब कुछ अपने में समा लिया। लोगों को भागने का मौका तक नहीं मिला।  

पुलिस/जांच में सनसनी: गर्भनिरोधक गोली ने उजागर किया पति का गैरकानूनी रिश्ता

 गुआंग्डोंग  चीन में एक शख्स ने गर्भनिरोधक गोली खरीदने के लिए ऑनलाइन पेमेंट की कोशिश की थी. इस दौरान कुछ ऐसा हुआ  कि अनजाने में ही शख्स की पत्नी के हाथ कुछ सबूत लग गया. पत्नी जब मामले की तह तक गई तो उसे पति के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का पता चला.  साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार,  दक्षिणी चीन में एक चीनी व्यक्ति ने गुप्त रूप से गर्भनिरोधक गोलियां खरीदने का प्रयास किया. जब उसका ई-पेमेंट फेल हो गया, तो फार्मेसी कंपनी के कर्मियों ने भुगतान के लिए अनजाने में ही शख्स की पत्नी से संपर्क किया. इस तरह उस शख्स का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर सब के सामने आ गया.   ऑनलाइन पेमेंट हो गया था फेल व्यक्ति का नाम उजागर नहीं किया गया है. उसने एक वीडियो चीनी सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए बताया कि वह गुआंग्डोंग प्रांत के यांगजियांग में डैशेनलिन फार्मेसी की पिंगगांग शाखा में गया था. अपने मोबाइल भुगतान कोड का उपयोग करके गर्भनिरोधक गोलियों के लिए पेमेंट का प्रयास किया. सिस्टम में समस्या के कारण, 15.8 युआन (2.2 अमेरिकी डॉलर) का भुगतान नहीं हो सका. इसके बाद स्टाफ ने शुल्क वसूलने के लिए उस व्यक्ति के मेंबरशिप वाले कार्ड से जुड़े फोन नंबर पर कॉल किया, लेकिन कॉल गलती से उसकी पत्नी को लग गया.  फॉर्मेसी ने पेमेंट के लिए घर में लगा दिया फोन जब उसकी पत्नी ने खरीदारी के बारे में पूछताछ की, तो स्टाफ ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की कि यह गर्भनिरोधक गोलियों के लिए है. इसके बाद उस व्यक्ति का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर राज नहीं रहा. उसने अपनी प्रेमिका और अपनी पत्नी, दोनों से अपनी शादी और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की बात छुपाई थी.  अब दो परिवार टूटने के कागार पर व्यक्ति ने दावा किया कि इस घटना के कारण दो परिवार टूट गए तथा उसने फार्मेसी से जवाबदेही की मांग की. उसने गुस्से से अपनी पोस्ट में लिखा कि अब मेरी पत्नी को सब पता चल गया है और दो परिवार टूटने की कगार पर हैं. मैं जानना चाहता हूं कि क्या आपकी फार्मेसी की कोई जिम्मेदारी है?  उन्होंने साक्ष्य के तौर पर खरीदी गई दवा की रसीद और स्टोर क्लर्क तथा उनकी पत्नी के बीच हुई बातचीत का स्क्रीनशॉट भी शामिल किया. इसके अतिरिक्त, उन्होंने यांगजियांग सार्वजनिक सुरक्षा ब्यूरो की गाओक्सिन शाखा के अंतर्गत पिंगगांग पुलिस स्टेशन द्वारा 12 अगस्त को जारी की गई एक पुलिस रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई. फॉर्मेसी पर कानूनी कार्रवाई करना होगा मुश्किल हेनान ज़ेजिन लॉ फर्म के निदेशक फू जियान ने एलिफेंट न्यूज को बताया कि हालांकि व्यक्ति अपने अधिकारों की रक्षा करने की कोशिश कर सकता है, लेकिन ऐसा करना बहुत चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. फू ने कहा कि एक ओर, पुरुष की बेवफाई परिवार के टूटने का मुख्य कारण है और उसे अपने कार्यों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए. दूसरी ओर, अगर फार्मेसी ने उसकी निजता का उल्लंघन किया है, तो उसे भी कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर, फार्मेसी कर्मचारियों द्वारा किया गया फोन कॉल वैध प्रतीत होता है और जानकारी लीक करने के इरादे से नहीं किया गया था. इससे उस बेवफा व्यक्ति के लिए अपने अधिकारों के उल्लंघन का दावा करना बेहद मुश्किल हो जाएगा. 

भारत में TikTok की एंट्री पर चर्चा तेज, कंपनी ने साफ किया स्टैंड

नई दिल्ली TikTok की भारत में वापसी! जी हां, आपने भी ये खबर पढ़ी या सुनी होगी कि भारत में चीनी ऐप टिकटॉक वापस आ रहा है। यह वही ऐप है, जिसने सालों पहले कई लोगों को स्टार बना दिया था और उसके बाद भारत में इसे प्राइवेसी के चलत बैन कर दिया गया था। अब एक बार फिर इसकी वापसी को लेकर खबरें आने लगी हैं, जिसे लोगों में काफी उत्साहिता देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया के जरिए कई लोग दावा कर रहे हैं कि टिकटॉक की वेबसाइट को भारत में एक्सेस किया जा रहा है। इस कारण इसकी वापसी की उम्मीद लोगों में जग रही है, लेकिन कंपनी की ओर से यह कन्फर्म कर दिया गया है कि भारत में अभी भी टिकटॉक बैन है। आइये, पूरी डिटेल जानते हैं। TikTok ने कहा- नहीं हटा कोई बैन TechCrunch की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, TikTok के एक प्रवक्ता ने बताया है कि भारत सरकार ने TikTok पर जो बैन लगाया था, वह अभी भी है। भारत में अभी भी TikTok यूज नहीं किया जा सकता है। प्रवक्ता ने TechCrunch को एक ईमेल लिखा है, जिसमें उन्होंने बताया है कि कंपनी ने भारत में TikTok को फिर से शुरू नहीं किया गया है। कंपन भारत सरकार के आदेश का पालन कर रहे हैं। भारतीय अधिकारी ने भी दी जानकारी इतना ही नहीं, भारत के IT मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी ने भी TechCrunch को बताया है कि सरकार ने TikTok पर लगे बैन को नहीं हटाया है। उन्होंने कहा है कि सरकार ने IT एक्ट के सेक्शन 69A के तहत जो बैन लगाया था, उसे अभी तक वापस नहीं लिया गया है। इस कारण अभी भी ऐप का यूज नहीं किया जा सकता है। कई मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि भारत में TikTok वापस आ रहा है। हालांकि, कंपनी और सरकार की तरफ से दिए गए इस बयान से साफ हो गया है कि अभी भी ऐप पर बैन कायम है और इसे हटाने की हाल फिलहाल कोई योजना नहीं है। अगर आपको नहीं पता है तो बता दें कि भारत सरकार ने जून, 2020 में TikTok के साथ और भी कई अन्य चीनी ऐप्स पर बैन लगा दिया था। यह बैन भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव के कारण लगाया गया था। सरकार को डर था कि ये ऐप्स भारतीय यूजर्स का डेटा चीन को भेज सकते हैं।

स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ बढ़ाने के आसान और असरदार उपाय

मॉडर्न स्मार्टफोन यूजर्स के सामने अभी सबसे बड़ा इश्यू है-बैटरी लाइफ। वे दिन गए जब आप बिना चार्जिंग के कुछ दिन तक फोन को साथ रख सकते थे। इन दिनों विशेष तौर पर जब बाजार में मॉडर्न एंड्रायड स्मार्टफोंस उमड़ रहे हंा तो आपको चार्जर या माइक्रोयूएसबी केबल के आस-पास ही रहना होता होगा। यदि नहीं तो आपको बैटरी पैक या बैटरी केस को अपने साथ रखना होता होगा। वास्तव में आप ऐसा चाहते नहीं होंगे पर मजबूरी है फोन को बार-बार चार्ज करना। पर आपको इस चार्जर वाले झंझट से छुटकारा दिलाने को पेश हैं कुछ टिप्स जो आपके स्मार्टफोन को कम से कम एक दिन बिना चार्ज के रख सकती है। -अपना लोकेशन सेटिंग्स ऑफ करें। आपके फोन का जीपीएस हमेशा आपके पोजिशन पर लॉक-इन की कोशिश करेगा और इसमें काफी पावर खर्च होता है। कभी-कभी लोकेशन शेयरिंग ऑटोमैटिक ही ऑन होता है, इसलिए एंड्रायड फोन पर आपको सेटिंग मेन्यू में जाकर इसे ऑफ कर देना चाहिए। -अपने फोन के ब्राइटनेस लेवल को कम रखें। स्क्रीन जितना अधिक ब्राइट होगा, उतना ही अधिक बैटरी खर्च होगा। ब्राइट स्क्रीन अच्छा दिख सकता है लेकिन यह ज्यादा पावर खर्च करता है। आपको ऑटोमैटिक ब्राइटनेस लेवल कुछ इस तरह कनफिगर करना चाहिए जिससे कंटेंट स्पष्ट रूप से दिख पाएं, लेकिन यह ज्यादा ब्राइट न हो। -उपयोग में नहीं आने वाले एप्स को स्विच ऑफ रखें। एंड्रायड फोन पर यदि आप मल्टीपल एप्स पर स्विच कर रहे हैं जैसे कैमरा तो बैकग्राउंड में अन्य एप्स ऑन रहते हैं। ये सभी एप्स अधिक पावर कंज्यूम करते हैं और इसलिए आपके फोन की बैटरी लाइफ कम हो जाती है। -सेटिंग्स मेन्यू में आपको हमेशा एप्स या प्रोसेस पर हमेशा टैब रखना चाहिए, जो ढेर सारा बैटरी तो लेता ही है साथ में डाटा भी। यहां तक कि यदि कोई एप ज्यादा बैटरी नहीं ले रहा तो यह पूरी तरह से 3जी नेटवर्क का उपयोग कर रहा होगा, जो अंततः बैटरी की खपत तेजी से करेगा। फेसबुक एप व गूगल नाउ अच्छे उदाहरण हैं इसलिए अपनी बैटरी बचाने के लिए इन्हें ऑफ कर दें। -जब भी संभव हो वाई-फाई का उपयोग करें। ढेर सारे फोंस पर यह ऑटोमैटिक ही शुरू होता है लेकिन यदि ऐसा न हो तो आपको वाई-फाई नेटवर्क पर स्विच करना चाहिए, इससे बैटरी की खपत कम होती है। -मोबाइल नेटवर्क सेटिंग्स में जाकर 2जी पर स्विच करें। यदि आप डाटा का उपयोग नहीं करते हैं और कॉल व मैसेज के लिए फोन का उपयोग करते हैं तो 2 जी नेटवर्क आपके लिए बेहतर है। -यदि आप क्वालकॉम प्रोसेसर वाला फोन उपयोग करते हैं तो आप एंड्रायड के लिए क्वालकॉम बैटरी गुरु एप डाउनलोड कर सकते हैं। यह एप आपके उपयोग का विश्लेषण करेगी और फोन के सेटिंग को आप्टिमाइज करेगी। -आप अपने डिस्प्ले को हमेशा 15 सेकेंड के बाद स्लिप की सेटिंग पर रखें। कभी यदि आप फोन का उपयोग नहीं कर रहे तो इसका लाइट अप होना भी बैटरी की खपत करता है। -यदि आप सोनी एक्सपीरिया जेड 3, एचटीसी वन एम8 या सैमसंग गैलेक्सी नोट 4 जैसे हाई-एंड फोन का उपयोग करते हैं तो इनबिल्ट सॉफ्टवेयर पर आधारित बैटरी एंहांसमेंट मोड का उपयोग करें।    

शिव की तीसरी आंख से जुड़ी कथाएं और आध्यात्मिक महत्व

परमेश्वर शिव त्रिकाल दृष्टा, त्रिनेत्र, आशुतोष, अवढरदानी, जगतपिता आदि अनेक नामों से जानें जाते हैं। महाप्रलय के समय शिव ही अपने तीसरे नेत्र से सृष्टि का संहार करते हैं परंतु जगतपिता होकर भी शिव परम सरल व शीघ्रता से प्रसन्न होने वाले हैं। संसार की सर्व मनोकामना पूर्ण करने वाले शिव को स्वयं के लिए न ऐश्वर्य की आवश्यकता है न अन्य पदार्थों की। वे तो प्रकृति के मध्य ही निवासते हैं। कन्दमूल ही जिन्हें प्रिय हैं व जो मात्र जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं। जहां अन्य देवों को प्रसन्न करने हेतु कठिन अनुष्ठान किया जाता है वहीं शिव मात्र जलाभिषेक से ही प्रसन्न होते हैं। शिव का स्वरूप स्वयं में अद्भुत तथा रहस्यमय हैं। चाहे उनके शिखर पर चंद्रमा हो या उनके गले की सर्प माला हो या मृग छाला हो, हर वस्तु जो भगवान शंकर ने धारण कर रखी है, उसके पीछे गूढ़ रहस्य है। शास्त्रनुसार सभी देवताओं की दो आंखें हैं पर शिव के तीन नेत्र हैं। इस लेख के माध्यम से हम अपने पाठकों को बताते हैं क्यों हैं शिव के तीन नेत्र तथा इसके पीछे क्या रहस्य है।   श्लोकः त्वं ब्रह्मा सृष्टिकर्ता च त्वं विष्णुः परिपालकः। त्वं शिवः शिवदोऽनन्तः सर्वसंहारकः।।   भगवान शंकर का एक नाम त्रिलोचन भी है। त्रिलोचन का अर्थ होता है तीन आंखों वाला क्योंकि एक मात्र भगवान शंकर ही ऐसे हैं जिनकी तीन आंखें हैं। शिव के दो नेत्र तो सामान्य रुप से खुलते और बंद होते रहते हैं, शिव के दो नेत्रों को शास्त्रों ने चंद्रमा व सूर्य कहकर संबोधित किया है परंतु तीसरा नेत्र कुछ अलग संज्ञा लिए हुए होता है। वेदों ने शिव के तीसरे नेत्र को प्रलय की संज्ञा दी है। वास्तविकता में शिव के ये तीन नेत्र त्रिगुण को संबोधित है। दक्षिण नेत्र अर्थात दायां नेत्र सत्वगुण को संबोधित है। वाम नेत्र अर्थात बायां नेत्र रजोगुण को संबोधित है तथा ललाट पर स्थित तीसरा नेत्र तमोगुण को संबोधित करता है। इसी प्रकार शिव के तीन नेत्र त्रिकाल के प्रतीक है ये नेत्र भूत, वर्तमान, भविष्य को संबोधित करते हैं। इसी कारण शिव को त्रिकाल दृष्टा कहा जाता है। इनहीं तीन नेत्रों में त्रिलोक बस्ता है अर्थात स्वर्गलोक, मृत्युलोक व पाताललोक अर्थात शिव के तीन नेत्र तीन लोकों के प्रतीक हैं। इसी कारण शिव त्रिलोक के स्वामी माने जाते हैं।   त्रीद्लं त्रिगुनाकारम त्रिनेत्रम च त्रिधायुतम। त्रीजन्म पापसंहारम एक बिल्व शिव अर्पिन।।   शिव को परमब्रह्म माना जाता है। संसार की आंखें जिस सत्य का दर्शन नहीं कर सकतीं, वह सत्य शिव के नेत्रों से कभी ओझल नहीं हो सकता क्योंकि सम्पूर्ण संसार शिव की एक रचना मात्र है। इसी कारण तीन लोक इनके अधीन हैं। शिव का तीसरा नेत्र ज्ञान चक्षु है। यह विवेक का प्रतीक है। ज्ञान चक्षु खुलते ही काम जल कर भस्म हो जाता है। जैसे विवेक अपना ऋषित्व स्थिर रखते हुए दुष्टता को उन्मुक्त रूप में विचारने नहीं देता है तथा उसका मद-मर्दन करके ही रहता है। इसी कारण शिव के तीसरे नेत्र खुलने पर कामदेव जलकर भस्म हो गए थे।   शिव का तीसरा चक्षु आज्ञाचक्र पर स्थित है। आज्ञाचक्र ही विवेकबुद्धि का स्रोत है। तृतीय नेत्र खुल जाने पर सामान्य बीज रूपी मनुष्य की सम्भावनाएं वट वृक्ष का आकार ले लेती हैं। धार्मिक दृष्टि से शिव अपना तीसरा नेत्र सदैव बंद रखते हैं। तीसरी आंख शिव जी तभी खोलते हैं जब उनका क्रोध अपने प्रचुरतम सीमा से परे होता है। तीसरे नेत्र के खुलने का तात्पर्य है प्रलय का आगमन।   सूर्यस्त्वं सृष्टिजनक आधारः सर्वतेजसाम्। सोमस्त्वं सस्यपाता च सततं शीतरश्मिना।।   वास्तवक्ता में परमेश्वर शिव ने यह तीरा नेत्र प्रत्येक व्यक्ति को दिया है। यह विवेक अतःप्रेरणा के रूप में हमारे अंदर ही रहता है। बस जरुरत है उसे जगाने की। शिव के ज्ञान रुपी तीसरे नेत्र से ये प्रेरणा मिलती है कि मनुष्य धरती पर रहकर ज्ञान के द्वारा अपनी काम और वासनाओं पर काबू पाकर मुक्ति प्राप्त कर सके। अगर सांसरिक दृष्टि से देखा जाए तो नेत्रों का कार्य होता है मार्ग दिखाना व मार्ग में आने वाली मुसीबतों से सावधान करना। जीवन में कई बार ऐसे संकट भी शिव जी द्वारा दिए तीनों नेत्र संयम से प्रयोग में लेने चाहिए। काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह व अहंकार इसी तीसरे नेत्र से हम में प्रवेश करते हैं तथा इसी तीसरे नेत्र से हम इन्हे भस्म भी कर सकते हैं। मकसद है इस आज्ञा चक्र को जाग्रत करके सही मार्ग पर ले जाने की।  

40 पार मां बनना चाहती हैं, तो रखें इन बातों का ध्यान

एक अध्यकयन से पता चला है कि 95 फीसदी महिलाएं करियर और परिवार के बीच में परिवार को ही चुनती हैं। करियर के पीक की तरफ बढने के दौरान, महिलाओं पर मां बनने का भी दबाव होता है क्योंकि इसमें देरी करने पर उम्र बढ़ने से मां बनने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह से वे अपने करियर में सहयोगियों से बेहतर होते हुए भी पिछड़ती जाती हैं।   लेकिन कुछ महिलाएं अपना करियर बीच मे नहीं छोड़तीं और 40 पार कर जाने के बाद भी मां बनने के सपने को साकार करना चाहती हैं। लेकिन महिलाओं की प्रजनन क्षमता 35 की उम्र आते-आते कम होनी शुरू हो जाती है। ऐसा नहीं है कि वे इस उम्र के बाद प्रेगनेंट नहीं हो सकतीं। आप अगर 40 पार भी मां बनने की इच्छा रखती हैं, तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आपकी प्रजनन क्षमता बरकरार रहे…   -उम्र बढने के साथ एग की क्वांटिटी और क्वालिटी दोनों कम होती जाती है। 25 से 30 वर्ष की उम्र में अपना एग फ्रीज कराकर अपने मां बनने के सपने को 40 साल की उम्र में भी पूरा कर सकती हैं।   -सही प्रकार के प्रोटीन प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैंय टोफू, चिकन, अंडे, और कुछ सी-फूड्स में उच्च स्तर पर ओमेगा-3 फैटी एसिड, लोह-तत्व, सेलेनियम इत्यादि पाए जाते हैं।   -आपके विटामिन में फोलिक एसिड, कैल्शियम और लोह-तत्व मौजूद हों। इसके लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, साबुत अनाज और दालें खाएं।   -किसी भी तरह के यौन रोग न हों, इसके लिए सेफ सेक्स पर गौर करें।   -वजन कम करें। अध्ययन बताते हैं की मोटापे से ग्रस्त महिलाओं को गर्भधारण करने में ज्यादा कठिनाई आती है और उन्हें गर्भावस्था के दौरान अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि आपका बॉडी मास इंडेक्स (बी.एम.आई.) थोड़ा अधिक है, तो डाइट ठीक करें और साथ ही एक्सरसाइज भी करें या फिर योगाभ्यास शुरू करें।   -धूम्रपान त्यागें। यह न सिर्फ गर्भावस्था के लिए हानिकारक है अपितु यह गर्भ धारण करने में भी बाधा पैदा कर सकता है।   -एक कहावत है कि हंसी सबसे अच्छी दवा है। अधिकांश डॉंक्टर भी मानते हैं कि यह 100 प्रतिशत सही है। तो फिर दिल से क्यों न हंसा जाए। अगर आप जोर से हंसती हैं या मुस्कराती भी हैं तो आपके शरीर में फील गुड हारमोन्स का स्रव होता है, जो तनाव पैदा करने वाले कोर्टीसोल नामक हार्मोन को नष्ट करता है। इससे आप ज्यादा सेहतमंद रह पाएंगी। हंसने से चेहरे की माशपेशियों का भी व्यायाम हो जाता है।   -35 की उम्र के बाद समय-समय पर रैगुलर टैस्ट्स के अलावा फर्टिलिटी जांच करवाती रहें। गोनोरिया और कैलामाइडिया नामक यौन संचारित रोग हो तो जल्दी ट्रीटमेंट करवाना जरूरी है। वरना पेडू में सूजन की बीमारी हो सकती है जिससे फैलोपियन ट्यूब में घाव हो जाता है, जिससे बांझपन की संभावना बढ़ती है।  

भक्ति की मिसाल: इंदौर का परिवार 11 वर्षों से मुफ्त बांट रहा मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं

इंदौर अहिल्या की नगरी में भक्तों को बिना मोल भाव से एक परिवार पुणे की साडू की माटी से बने गणेश मूर्तियां दे रहा है। परिवार की भक्ति की अनूठी पहल एक दो दिन नहीं बल्कि पिछले 11 वर्ष से चलाई जा रही है। परिवार के छोटे-बड़े सभी पांच सदस्य मूर्ति निर्माण गुड़ी पड़वा पर पुणे से मिट्टी मंगवाकर विघ्न हर्ता की अनूठी आराधना में जुट जाते है। भक्तों ने दक्षिणा गणेश का नाम दिया इस परिवार की इस भक्ति को देख भक्तों ने उनके द्वारा बनाए जा रहे गणेश को दक्षिणा गणेश का नाम दिया है। आज के समय में पाई-पाई के लिए आप धापी मची हुई है, लेकिन यह न्यू राजाराम नगर स्कीम नंबर 51 में रहने वाला यह परिवार श्रद्धा के अनुरूप मिली दक्षिणा के बदले बगैर किसी मोल भाव के गणेश मूर्तियां दे रहा है।   इनकी संख्या भी हर वर्ष 500 से ऊपर जाती है। मूर्ति ले जाने वाले लोग अपनी इच्छा के अनुरूप मूर्ति के बदले मूर्ति के स्थान पर रख देता है। पर्यावरण हितैषी मूर्तियां सुंदर मूर्तियां संदीप पडोले को बनाता है। अपनी मन पसंद की मूर्ति पसंद कर अपनी श्रद्धा के मुताबिक दक्षिणा रख, लकड़ी के पाठ पर रख सम्मान के साथ अपने घर चले जाते हैं। पहल शुरू की तब जागरूकता का अभाव मूर्ति बनाने वाले संदीप किशोर पडोले बताते है कि जब हमने माटी के गणेश की मूर्ति बनाना शुरू की तो उस समय माटी के मूर्ति बनाने को लेकर लोगों में जागरुकता का अभाव था। उस समय हमने पुणे से इंदौर साढू की माटी और प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर एक से बढ़कर एक गणेश मूर्तियां तैयार करना शुरू की। इसमें शुरुआत में हमने पांच के करीब शुरुआत की थी। इसमें पिता किशोर, पत्नी मनीषा पडोले, बेटा नैतिक और भाई अमित हाथ बटा रहे है। ऐसी हुई इसकी की शुरुआत परिवार के सदस्य बताते है कि इसकी शुरुआत व्यवसायिक नहीं की गई। 11 साल पहले उन्होंने अपने माटी के गणेश बनाए, पास की आंटी को पसंद आए, वो ले गई। इसके बाद चार प्रतिमाएं बनाई वो भी आस पास के लोग गणेश उत्सव के लिए स्थापित करने के ले गए। इसके बाद उत्साह बढ़ा और मूर्तियां बनाना शुरू की। हमारे द्वारा बनाए गए मूर्तियां का नाम लोगों ने खुद ही दक्षिणा गणेश रख दिया। इस प्राप्त दक्षिण का उपयोग सेवा कार्य के लिए किया जाता है।