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पदमनी और मधु को मिला प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का संबल

महासमुंद/रायपुर. ’मां की मुस्कान, बच्चे का उज्ज्वल भविष्य: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना बनी भरोसे की साथी’मातृत्व का सफर हर महिला के लिए भावनाओं, जिम्मेदारियों और नए सपनों से भरा होता है। इस महत्वपूर्ण दौर में यदि समय पर सहयोग और सुरक्षा का साथ मिल जाए, तो यह अनुभव और भी सुखद बन जाता है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना ऐसी ही एक संवेदनशील पहल है, जो गर्भवती एवं धात्री माताओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके स्वास्थ्य, पोषण और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित कर रही है। महासमुंद जिला के महासमुन्द नगर के वार्ड क्रमांक 11 निवासी पदमनी यादव के जीवन में यह योजना नई उम्मीद लेकर आई। गर्भावस्था के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की सेक्टर सुपरवाइजर शीला प्रधान ने उन्हें योजना की जानकारी दी। पंजीयन के बाद प्रथम संतान के जन्म पर उन्हें 5 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। इस राशि से उन्होंने पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य परीक्षण तथा शिशु की आवश्यक जरूरतों को पूरा किया। पदमनी बताती हैं कि इस सहयोग ने उन्हें मातृत्व के दौरान आर्थिक चिंताओं से राहत दी और बच्चे की बेहतर परवरिश का आत्मविश्वास प्रदान किया। इसी तरह वार्ड क्रमांक 11 की मधु यादव को भी योजना से महत्वपूर्ण सहायता मिली। पहले बच्चे के जन्म पर 5 हजार रुपये तथा बेटी के जन्म के बाद 6 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त होने से उन्हें मातृत्व संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में काफी मदद मिली। मधु कहती हैं कि योजना से मिले सहयोग ने उनके परिवार को संबल दिया और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर विशेष ध्यान देने का अवसर प्रदान किया। आज दोनों माताएं अपने बच्चों की बेहतर देखभाल कर रही हैं और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को अपने जीवन में आए सकारात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण आधार मानती हैं। उनका कहना है कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि मातृत्व के प्रति सरकार की संवेदनशील सोच और महिलाओं के सम्मान का प्रतीक है। महासमुंद शहरी क्षेत्र में अब तक 321 हितग्राही महिलाओं को इस योजना का लाभ मिल चुका है, जबकि जिले में 27 हजार से अधिक महिलाएं इससे लाभान्वित हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के साथ-साथ महिलाओं के सशक्तिकरण और परिवारों के बेहतर भविष्य की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो रही है। योजना से लाभान्वित पदमनी और मधु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता उनके जीवन में खुशियों और आत्मविश्वास की नई रोशनी लेकर आई है।

NFHS-6 रिपोर्ट ने दिखाई बिहार की बदली तस्वीर, बेटियों की पढ़ाई में आया बड़ा सुधार

पटना. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS)-6 की रिपोर्ट ने बिहार के सामाजिक और शैक्षणिक विकास की सकारात्मक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में छह वर्ष और उससे अधिक आयु की स्कूल जाने वाली लड़कियों की संख्या 61.1 प्रतिशत से बढ़कर 64.1 प्रतिशत हो गई है। यानी छात्राओं की स्कूलिंग में करीब पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके मुकाबले पुरुषों में 10 या उससे अधिक वर्ष की स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वालों की संख्या 42.8 प्रतिशत से बढ़कर 45.9 प्रतिशत हुई है, जो करीब तीन प्रतिशत की वृद्धि है। विशेषज्ञों का मानना है कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, साइकिल योजना और सामाजिक जागरूकता अभियानों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। राजधानी पटना समेत राज्य के शहरी क्षेत्रों में लड़कियों का विद्यालयों और कालेजों में नामांकन लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार बिहार में महिलाओं की शैक्षणिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 33.1 प्रतिशत महिलाओं ने 10 या उससे अधिक वर्षों की स्कूली शिक्षा पूरी की है, जबकि एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 28.8 प्रतिशत था। यानी लगभग 4.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बैंकिंग और डिजिटल पहुंच में भी सुधार एनएफएचएस-6 के आंकड़ों के अनुसार बिहार में 98.5 प्रतिशत परिवारों के कम से कम एक सदस्य के पास बैंक या डाकघर खाता है, जबकि पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 95.5 प्रतिशत था। वहीं इंटरनेट का उपयोग करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 20.6 से बढ़कर 58.4 हो गया है। पुरुषों में यह आंकड़ा 35.4 प्रतिशत से बढ़कर 78.1 प्रतिशत पहुंच गया है।  बाल विवाह और प्रजनन दर में कमी रिपोर्ट के अनुसार 20 से 24 वर्ष आयु वर्ग की उन महिलाओं का प्रतिशत, जिनकी शादी 18 वर्ष से पहले हुई थी, 40.8 प्रतिशत से घटकर 34.6 प्रतिशत हो गया है। वहीं कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 3.0 से घटकर 2.7 पर पहुंच गई है। इसे जनसंख्या स्थिरीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं में सुधार बिहार में बिजली सुविधा वाले घरों की संख्या 96.3 प्रतिशत से बढ़कर 98.5 प्रतिशत हो गई है। बेहतर पेयजल सुविधा प्राप्त करने वाली आबादी का प्रतिशत 99.2 से बढ़कर 99.8 हो गया है। स्वास्थ्य बीमा या वित्तीय सुरक्षा योजना से जुड़े परिवारों का प्रतिशत भी 17.4 से बढ़कर 21.1 दर्ज किया गया है। पटना में दिख रहा बदलाव शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पटना में छात्राओं की स्कूल और उच्च शिक्षा संस्थानों में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और बेटियों को प्रोत्साहन देने वाली योजनाओं का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार एनएफएचएस-6 के आंकड़े संकेत देते हैं कि बिहार में सामाजिक विकास की रफ्तार तेज हुई है और इसमें महिलाओं की भागीदारी निर्णायक भूमिका निभा रही है। बदलाव की गवाही देते आंकड़े स्कूल जाने वाली लड़कियां : 61.1 प्रतिशत से बढ़कर 64.1 प्रतिशत 10 वर्ष या अधिक स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाएं : 28.8 प्रतिशत से बढ़कर 33.1 प्रतिशत 10 वर्ष या अधिक स्कूली शिक्षा प्राप्त पुरुष : 42.8 प्रतिशत से बढ़कर 45.9 प्रतिशत इंटरनेट उपयोग करने वाली महिलाएं : 20.6 प्रतिशत से बढ़कर 58.4 प्रतिशत बैंक खाता वाले परिवार : 95.5 प्रतिशत से बढ़कर 98.5 प्रतिशत बाल विवाह (18 वर्ष से पहले) : 40.8 प्रतिशत से घटकर 34.6 प्रतिशत कुल प्रजनन दर : 3.0 से घटकर 2.7

स्कूल पहुंचे चंडीगढ़ के प्रशासक, मलोया में पैरेंट्स ने शिकायतों की लगा दी झड़ी

चंडीगढ़. शहर के सरकारी स्कूलों में शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का जायजा लेने के लिए मंगलवार को पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया मलोया स्थित सरकारी स्कूलों के निरीक्षण पर पहुंचे। उनके साथ शिक्षा विभाग के सचिव, निदेशक स्कूल शिक्षा सहित प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। हालांकि जून माह में विद्यार्थियों की ग्रीष्मकालीन छुट्टियां चल रही हैं, इसके बावजूद प्रशासक ने स्कूल परिसरों की आधारभूत सुविधाओं, रखरखाव और शैक्षणिक वातावरण का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्कूल भवनों, कक्षाओं, खेल मैदानों और अन्य व्यवस्थाओं की स्थिति की समीक्षा की गई। गौरतलब है कि 25 मई को आयोजित समाधान शिविर के दौरान मलोया क्षेत्र के अभिभावकों ने स्कूलों की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाया था। अभिभावकों ने शिकायत की थी कि स्कूलों के मैदानों में घास उगी हुई है, कई स्थानों पर टूटा-फूटा सामान पड़ा है तथा पुराने कबाड़ और डेस्कों के ढेर लगे हुए हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर को लेकर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई थीं। अभिभावकों का कहना था कि कई विद्यार्थियों की पढ़ने-लिखने की क्षमता अपेक्षित स्तर से काफी नीचे है। शिकायतों के अनुसार आठवीं कक्षा के कुछ विद्यार्थी सामान्य पाठ पढ़ने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, जबकि नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को साधारण प्रार्थना-पत्र लिखने में भी परेशानी हो रही है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासक कटारिया ने स्वयं स्कूलों का दौरा करने की घोषणा की थी। उसी घोषणा के तहत मंगलवार को उन्होंने अधिकारियों के साथ स्कूलों का निरीक्षण किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्कूलों की कमियों को दूर करने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया। निरीक्षण के दौरान शिक्षा की गुणवत्ता और स्कूलों के रखरखाव को बेहतर बनाने पर भी विशेष चर्चा की गई।

होमस्टे कारोबार को मिलेगा बढ़ावा, बैठक में ऋण सुविधा और पर्यटन संभावनाओं पर चर्चा

रायपुर. छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के अंतर्गत नए हितग्राहियों को जागरूक एवं प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के पर्यटन सूचना केंद्र जगदलपुर द्वारा जिला पंचायत बस्तर के सहयोग से आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में इच्छुक हितग्राहियों ने भाग लिया। ’छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के तहत आयोजित बैठक में हितग्राहियों को व्यवसाय संचालन, ऋण सुविधा एवं पर्यटन संभावनाओं की जानकारी’ दी गई। ’लोगों की आय में वृद्धि और रोजगार सृजन करना’ इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नए हितग्राहियों को होमस्टे व्यवसाय की बारीकियों से परिचित कराना, उन्हें पर्यटन आधारित स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना तथा छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति जागरूक करना था। इस सराहनीय पहल से बस्तर में सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि और रोजगार के नए अवसरों का सृजन होने की प्रबल उम्मीद है। ’पर्यटन स्थलों के विकास पर चर्चा’ बैठक के दौरान उपस्थित हितग्राहियों से उनके प्रस्तावित होमस्टे के संबंध में विस्तृत जानकारी ली गई। अधिकारियों ने विशेष रूप से जाना कि हितग्राही किस स्थान पर होमस्टे स्थापित करना चाहते हैं और उस क्षेत्र के आसपास कौन-कौन से पर्यटन स्थल या आकर्षण मौजूद हैं। अधिकारियों के अनुसार स्थानीय प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध क्षेत्रों में होमस्टे विकसित होने से पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। ’सफल संचालन एवं नीतिगत नियमों की जानकारी’ इस अवसर पर हितग्राहियों को होमस्टे व्यवसाय के सफल संचालन के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया। उन्हें मुख्य मुख्य विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। अतिथि सत्कार के लिए पर्यटकों का स्वागत और आतिथ्य प्रबंधन, स्वच्छता एवं गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन, सुविधाएं व मार्केटिंग के रूप में पर्यटकों को दी जाने वाली आवश्यक सुविधाएं और डिजिटल प्रचार-प्रसार के तरीके, छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के प्रावधान, पात्रता शर्तें एवं आवेदन की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। ’ऋण सुविधा एवं बैंकिंग सहयोग’ बैठक में उपस्थित छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के अधिकारियों ने योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता की जानकारी दी। उन्होंने हितग्राहियों को ऋण सुविधा, ब्याज अनुदान  तथा बैंकिंग प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से समझाया और आश्वस्त किया कि शासन की सहायता तथा बैंकिंग सहयोग से इच्छुक हितग्राही अपने होमस्टे व्यवसाय को सफलतापूर्वक स्थापित कर सकते हैं। ’बस्तर में सामुदायिक पर्यटन की अपार संभावनाएं’ कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित जिला पंचायत बस्तर के सहायक परियोजना अधिकारी तपन डे ने हितग्राहियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति एवं पर्यटन स्थलों की विविधता होमस्टे व्यवसाय के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करती है। उन्होंने सभी हितग्राहियों को पर्यटकों को उच्च गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देने और उन्हें एक बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए प्रेरित किया।

प्रदेश के विकास और जनकल्याण को बड़ी सौगात, 21,485 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी

प्रदेश के चहुँमुखी विकास, जन-कल्याण और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए 21 हजार 485 करोड़ रूपये की स्वीकृति स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 को मिली स्वीकृति अधिकार अभिलेखों पर स्टॉम्प ड्यूटी और पूरा पंजीयन शुल्क माफ करने का हुआ फैसला योजना का वित्तीय भार 3800 करोड़ रूपये का राज्य शासन करेगा वहन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लगभग 17 हजार 59 करोड़ रूपये की स्वीकृति जिला न्यायालय भवन, पिपल्याहाना, इंदौर के निर्माण के लिए पुनरीक्षित लागत 626 करोड़ 61 लाख रूपये की स्वीकृति पहली से 8 वीं तक के विद्यार्थियों को सिली हुई गणवेश प्रदाय करने का निर्णय "मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 (संशोधन) अध्यादेश, 2026" के प्रारूप का अनुमोदन "मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) अध्यादेश 2026" के प्रारूप का किया अनुमोदन "तन्वी द ग्रेट" और "शतकः संघ के 100 वर्ष" को एस.जी.एस.टी. से छूट के निर्णय का अनुसमर्थन बरगी जलाशय दुर्घटना की जांच के लिए न्यायिक जाँच आयोग के गठन का अनुसमर्थन मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। बैठक में प्रदेश के चहुंमुखी विकास, जन-कल्याण और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए 21 हजार 485 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। साथ ही प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के लिए ऐतिहासिक एवं दूरगामी निर्णय लिए गए। मंत्रि-परिषद ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026' के तहत स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क को पूरी तरह माफ करने का फैसला किया है, जिसका संपूर्ण 3800 करोड़ रूपये का वित्तीय भार राज्य शासन द्वारा वहन किया जायेगा। इसके साथ ही प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत 17 हजार 59 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई, जिससे नए चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण और एमबीबीएस तथा पीजी सीटों में बढ़ोतरी का मार्ग प्रशस्त होगा। बैठक में ग्रामीण विकास और वित्तीय सुधारों को गति देने के लिए 'मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम' तथा 'मध्यप्रदेश उपकर अधिनियम' में संशोधन संबंधी अध्यादेशों के प्रारूपों को मंजूरी दी गई। वहां, स्कूली शिक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए सत्र 2026-27 में कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को निविदा प्रक्रिया के माध्यम से सिली-सिलाई गणवेश प्रदाय करने का निर्णय लिया गया। इसके अतिरिक्त इंदौर जिला न्यायालय भवन के पुनरीक्षित लागत, बरगी जलाशय हादसे की न्यायिक जांच के लिए आयोग गठन के निर्णय का अनुसमर्थन तथा 2 प्रमुख फिल्मों को एस.जी.एस.टी. से छूट देने जैसे महत्वपूर्ण फैसलों पर मंत्रि-परिषद द्वारा मुहर लगाई गई। ये सभी निर्णय राज्य में बुनियादी ढांचे के विस्तार और पारदर्शी शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 को स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 की स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद द्वारा निर्णय लिया गया है कि प्रदेश में स्वामित्व योजना में जिन भू-खण्डधारियों के अधिकार अभिलेख निर्मित किए गए हैं उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए इन निर्मित अधिकार अभिलेखों का पंजीयन कराया जाए। इसके लिए डीड ऑफ कन्वेयेंस का निष्पादन एवं पंजीयन किया जाएगा ताकि नागरिक आवश्यकतानुसार गृह निर्माण, व्यवसाय एवं कृषि संक्रियाओं आदि के लिए ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका एवं आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकें। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए विशेष अभियान के तहत कार्यवाही पूर्ण की जाएगी। अब तक कुल 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया गया है। इसमें 48.32 लाख निजी संम्पत्तियां शामिल है। अधिकार अभिलेखों के पंजीयन के लिए नागरिकों से स्टॉम्प ड्यूटी अथवा पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा, संपूर्ण व्यय राशि 3800 करोड़ रूपये का वहन राज्य शासन द्वारा किया जाएगा। मध्यप्रदेश पहला राज्य होगा जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी के नागरिकों के भू-खण्ड संबंधी अधिकार सुरक्षित कर उनकी आर्थिक उन्नति के मार्ग को प्रशस्त किया जा रहा है। स्वामिव योजना में मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी में निवासरत नागरिकों को उनका वैधानिक अधिकार प्रदान करने के लिए अधिकार अभिलेखों का निर्माण ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए किया गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने, प्रक्रिया निर्धारण, समय-समय पर समीक्षा के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जायेगा। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, आयुक्त कोष एवं लेखा, आयुक्त/संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी, सदस्य होंगे एवं आवश्यकतानुसार विषय विशेषज्ञों को संयोजित किया जा सकेगा। योजना के प्रचार-प्रसार, मुद्रण व्यय एवं जन-जागरुकता गतिविधियों के संचालन के लिए राज्य स्तर पर 10 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना का विस्तृत परिपत्र एवं समय-समय पर आवश्यकतानुसार स्पष्टीकरण आदि जारी करने के लिए राजस्व विभाग को अधिकृत किया गया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 17 हजार 59 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 17 हजार 59 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने चिकित्सा महाविद्यालय से सम्बद्ध चिकित्सालय योजना की 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 14,363.95 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के अंतर्गत प्रदेश के जन सामान्य को निशुल्क गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सुविधायें मुहैया कराये जाने एवं प्रदेश में चिकित्सा के लिए मानव संसाधन विकसित किये जाने के लिए 12 जिला मुख्यालयों पर चिकित्सा महाविद्यालयों एवं संबद्ध चिकित्सालयों का संचालन राज्य शासन द्वारा किया जा रहा है। चिकित्सा महाविद्यालय में पी.जी. पाठ्यक्रम के सुदृढ़ीकरण से संबंधित योजना के लिए 657 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अंतर्गत प्रदेश में संचालित चिकित्सा महाविद्यालयों में भारत सरकार के आर्थिक सहयोग से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मापदंडों के अनुरूप अतिरिक्त अधोसंरचना का निर्माण, नवीन मशीनें एवं उपकरणों के प्रतिस्थापन के फलस्वरूप अतिरिक्त स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम सीटों में वृद्धि होगी। इससे राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ जन सामान्य को सुदूर ग्रामीण अंचल से जिला स्तर तक चिकित्सा सुविधा के लिए चिकित्सीय मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण से संबंधित योजना के लिए 1200 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की … Read more

क्या फिर एक होगी शिवसेना? शिंदे-उद्धव कैंप के नेताओं के बयान से सियासी हलचल

मुंबई  महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर करवट लेने का इशारा दे रही है। चर्चा है कि 2022 में शिवसेना में हुई बड़ी बगावत के ठीक चार साल बाद अब दोनों धड़ वापस साथ आने की तैयारी कर रहे हैं। उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के गुट के बड़े नेताओं ने इशारा दिया है कि दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। छत्रपति संभाजीनगर से दोनों गुटों के 2 बेहद सीनियर नेताओं ने सार्वजनिक रूप से बयान देकर हलचल बढ़ा दी है। पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक जहां शिवसेना (UBT) के नेता अंबादास दानवे ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए इसके संकेत दिए हैं, वहीं इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना के वरिष्ठ नेता अब्दुल सत्तार ने भी कहा कि भाजपा ने जहां शिवसेना (UBT) के हाथ-पैर काट दिए हैं, वहीं छत्रपति संभाजीनगर जिले में शिवसेना का सिर ही काट दिया है। क्या बोले दोनों नेता? जब दोनों नेताओं से सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या शिवसेना के दोनों गुटों को दोबारा मिल जाना चाहिए, इस पर भी उनका जवाब काफी सकारात्मक था। उद्धव गुट के अंबादास दानवे में कहा, "मुझे कई मौकों पर ऐसा महसूस होता है। लेकिन सिर्फ मेरे अकेले चाहने से कुछ नहीं होने वाला, दोनों तरफ से यह इच्छा होनी चाहिए।" वहीं शिवसेना के अब्दुल सत्तार ने कहा, "यह बिल्कुल सही समय है जब हमें एकजुट हो जाना चाहिए। अगर हमारे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे साहब इस बात के लिए रजामंदी दे देते हैं, तो दोनों पार्टियों को एक होने में जरा भी देरी नहीं लगेगी।" भाजपा है असली वजह दरअसल दोनों गुटों के साथ आने की वजह भाजपा है। शिवसेना की दोनों धरों का मानना है कि भाजपा महाराष्ट्र में क्षेत्रीय दलों का वजूद पूरी तरह खत्म करना चाहती है। अंबादास दानवे ने अपने बयान में कहा, “बड़ी मछली हमेशा छोटी मछली को निगल जाती है। बीजेपी इस वक्त महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी (NCP) दोनों के साथ यही खेल खेल रही है। बीजेपी शिवसेना को सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि अपना दुश्मन मानती है और उसका एकमात्र टारगेट शिवसेना के वजूद को पूरी तरह खत्म करना है। जो लोग पार्टी तोड़कर अलग हुए थे, अब उन्हें भी इस कड़वे सच का अहसास हो रहा होगा।” वहीं शिंदे गुट के अब्दुल सत्तार ने अपनी ही सहयोगी बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर हमारा बड़ा भाई (BJP) ही हमें खत्म करने पर आमादा हो तो गठबंधन में रहने का क्या फायदा? उन्होंने आगे कहा, “भाजपा ने जहां शिवसेना (UBT) के हाथ-पैर काट दिए हैं वहीं छत्रपति संभाजीनगर जिले में शिवसेना का सिर ही काट दिया है।" कैसे बदले समीकरण? अब सवाल यह है कि आखिर राज्य में ऐसे हालात क्यों पैदा हो गए कि शिवसेना फिर एक होने की बात कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक शिवसेना के नेताओं की छटपटाहट के पीछे छत्रपति संभाजीनगर और पूरे राज्य में बदल रहे सत्ता के समीकरण हैं। कभी औरंगाबाद नगर निगम और जिला परिषद पर अविभाजित शिवसेना का एकछत्र राज हुआ करता था। हालांकि 2022 की बगावत के बाद आज इन दोनों प्रमुख निकायों पर बीजेपी ने पूरी तरह अपना कब्जा जमा लिया है। दानवे ने बताया कि औरंगाबाद-जालना की सीट पर पिछले 25-30 सालों से हमेशा शिवसेना ही चुनाव लड़ती आ रही थी। लेकिन इस बार बीजेपी ने शिंदे गुट के दावों को दरकिनार करते हुए वहां अपना खुद का उम्मीदवार खड़ा कर दिया है। इस कदम ने शिंदे गुट के नेताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

खोड़ा में पसरा सन्नाटा: सूर्या चौहान मर्डर केस में एनकाउंटर, बुलडोजर कार्रवाई और बकरीद कनेक्शन से सनसनी

 गाजियाबाद गाजियाबाद के खोड़ा स्थित नवनीत विहार निवासी 17 वर्षीय सूर्या प्रताप चौहान की बकरीद के दिन असद और उसके साथियों ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी. पुलिस की कई टीमों ने इस संवेदनशील मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए हत्या की साजिश में शामिल मुख्य आरोपी के पिता नवाब, फरहान और आतिफ को गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद 30 और 31 मई की रात मुठभेड़ के दौरान पुलिस ने जवाबी फायरिंग में मुख्य आरोपी 50 हजार के इनामी असद को मार गिराया. प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे खोड़ा क्षेत्र में तीन दिवसीय विशेष 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' चलाकर अपराधियों के खिलाफ कड़ा एक्शन शुरू कर दिया है।  फोन कर बुलाया और ताबड़तोड़ चलाए चाकू बीती 28 मई की दोपहर करीब साढ़े तीन बजे खोड़ा के नवनीत विहार इलाके में सूर्या प्रताप चौहान को फोन करके बुलाया गया था. वहां पहले से जाल बिछाकर बैठे असद, उसके पिता नवाब, फरहान, आतिफ, सारिक और अन्य लोगों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया. बाइक चलाने की मामूली कहासुनी और पुरानी रंजिश के चलते सूर्या पर ताबड़तोड़ चाकू से वार किए गए. लहूलुहान हालत में सूर्या को नोएडा के फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया, जहां कई घंटों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उसने दम तोड़ दिया. किशोर की मौत से पूरे खोड़ा में भारी आक्रोश फैल गया।  पिता ने उकसाया और दोस्त ने लाकर दिया चाकू पुलिस जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि वारदात से कुछ समय पहले भी असद और सूर्या के बीच विवाद हुआ था. घटना वाले दिन भी दोनों में बहस हुई, जिसके बाद असद ने अपने पिता नवाब और दोस्तों को इसकी जानकारी दी. इसके बाद सूर्या को सबक सिखाने की खूनी योजना बनाई गई. गिरफ्त में आए आरोपियों ने खुलासा किया कि फरहान ने असद को चाकू लाकर दिया था, जबकि उसके पिता नवाब ने उसे हमले के लिए उकसाया था. इसके बाद वारदात को अंजाम देकर आरोपी फरार हो गए।  50 हजार का इनामी मुख्य आरोपी असद एनकाउंटर में ढेर सूर्या की मौत के बाद मुख्य आरोपी असद लगातार पुलिस को छका रहा था. पुलिस ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर पूरे ट्रांस हिंडन क्षेत्र में तलाश तेज कर दी थी. 30 और 31 मई की रात को पुलिस को सूचना मिली कि असद आर्थिक मदद लेकर शहर से भागने की फिराक में है. खोड़ा और इंदिरापुरम पुलिस की संयुक्त टीम ने घेराबंदी की, तो असद ने पुलिस पर गोलियां बरसाना शुरू कर दिया. जवाबी कार्रवाई में गोली लगने से असद घायल हो गया और अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।  अपराधियों के घरों पर चला 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' एनकाउंटर के अगले ही दिन प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य आरोपी असद के पिता नवाब के बंद पड़े घर पर एसडीएम की मौजूदगी में अवैध कब्जे और निर्माण का नोटिस चस्पा कर दिया. इसके बाद पूरे खोड़ा क्षेत्र में तीन दिनों का विशेष 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' शुरू किया गया. डीएम रविन्द्र कुमार मांदड़, एडिशनल पुलिस कमिश्नर राज करन नैय्यर और डीसीपी धवल जायसवाल खुद मौके पर उतरे. ड्रोन कैमरों, स्नाइपर डॉग और आधुनिक उपकरणों के जरिए हिस्ट्रीशीटरों के ठिकानों पर सघन सर्च ऑपरेशन चलाया गया।  नम आंखों से विदाई, आर्थिक मदद और नौकरी की घोषणा दूसरी तरफ, दिवंगत सूर्या चौहान की अस्थियों को हरिद्वार में गंगा नदी में विसर्जित कर दिया गया, जहां परिजनों ने नम आंखों से उसे अंतिम विदाई दी. मामले के तूल पकड़ने पर पूर्व भाजपा विधायक संगीत सोम ने पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक मदद दी. भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर और कैबिनेट मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने भी परिवार को न्याय का भरोसा दिया. खोड़ा नगर पालिका चेयरमैन पति अमरपाल शर्मा ने सूर्या के बड़े भाई को नौकरी देने और क्षेत्र की एक सड़क का नाम सूर्या के नाम पर रखने की बड़ी घोषणा की है।  मुस्लिम समाज ने भी एनकाउंटर को बताया सही, बाजार अब भी बंद मुख्य आरोपी असद के पड़ोसी जावेद खान ने बताया कि असद अक्सर नशेबाजी और उधमबाजी में शामिल रहता था, जिससे मोहल्ले के लोग परेशान थे. इलाके के मुस्लिम समाज के लोगों ने भी इस जघन्य हत्याकांड को पूरी तरह गलत ठहराया है. समाज के लोगों का स्पष्ट कहना है कि जो जैसा करेगा वो वैसा ही भुगतेगा और उन्होंने असद के एनकाउंटर को सही बताया है. हालांकि, नवनीत विहार के बाजारों में अब भी सन्नाटा है. तनाव और सुरक्षा कारणों से कई व्यापारी अपनी दुकानें खोलने से लगातार बच रहे हैं।  फरार सारिक की तलाश जारी, पूर्ण न्याय चाहता है पीड़ित परिवार असद के एनकाउंटर और तीन करीबियों की गिरफ्तारी के बाद भी आरोपी सारिक मेवाती अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है. मुख्य आरोपी के मारे जाने के बाद भी मृतक सूर्या चौहान का परिवार पूरी तरह संतुष्ट नहीं है. परिवार का साफ कहना है कि हत्या में शामिल सभी अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दी जाए. मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पुलिस लगातार फ्लैग मार्च कर हालात काबू में करने की कोशिश कर रही है। 

गुरु के पुष्य नक्षत्र में प्रवेश से 3 राशियों पर बरसेगी किस्मत, मिलेगा धन-करियर में फायदा

 ज्योतिष शास्त्र में भाग्य और संतान के कारक गुरु ग्रह का गोचर अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. वर्तमान में गुरु धीमी गति से चलते हुए कर्क राशि में प्रवेश कर चुके हैं. पंचांग के अनुसार, अभी गुरु पुनर्वसु नक्षत्र में स्थित हैं, लेकिन जल्द ही वे अपना नक्षत्र परिवर्तन करेंगे. 18 जून, 2026 की रात 9:32 बजे गुरु शनि के स्वामित्व वाले पुष्य नक्षत्र में गोचर करेंगे और 18 अगस्त तक इसी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे.  शनि के नक्षत्र में गुरु का यह गोचर कुछ राशियों के लिए विशेष लाभ और सकारात्मक बदलाव लेकर आ रहा है।  धनु राशि धनु राशि के जातकों के लिए गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन अत्यंत शुभ माना जा रहा है.  गुरु के प्रभाव से आपको बैंक बैलेंस बढ़ाने के नए मौके मिलेंगे. विद्यार्थियों के लिए यह समय विशेष रूप से फलदायी है.  प्रोफेशनल लाइफ में करियर के नए रास्ते खुलेंगे. आप सकारात्मक ऊर्जा से भरे रहेंगे।  कर्क राशि कर्क राशि के लोगों के लिए शनि के पुष्य नक्षत्र में गुरु का गोचर बेहद लाभदायक सिद्ध होगा. आपका मन धार्मिक गतिविधियों में अधिक लगेगा. लव लाइफ सुखद रहेगी,  लोगों के साथ मेल-जोल बढ़ाने में आप सक्षम होंगे. नौकरीपेशा लोगों की पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी.  प्रमोशन के नए द्वार खुल सकते हैं।  कन्या राशि कन्या राशि के जातकों के लिए गुरु का यह गोचर सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा. आपको परिवार के सदस्यों का पूर्ण सहयोग मिलेगा. आप आत्मविश्वास से भरपूर महसूस करेंगे . मित्रों की भरपूर सहायता मिलेगी. इस दौरान कोई शुभ समाचार मिल सकता है.  हालांकि, अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।   

अमजोत सुसाइड केस में बड़ा खुलासा, प्रिंसिपल पर निजी काम करवाने और धमकाने के आरोप; सरकार सख्त

अमृतसर अमृतसर में 12वीं कक्षा की छात्रा के आत्महत्या करने के मामले में सरकार एक्शन में आ गई है। शिक्षामंत्री हरजोत बैंस ने बताया कि इस मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कर लिया गया है। स्कूल प्रशासन और मामले से जुड़े हर दोषी व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।  स्कूल प्रबंधन की ओर से फीस न देने सहित कई अन्य तरीके से परेशान किए जाने कारण जहर निगल कर खुदकुशी करने वाली छात्रा अमजोत कौर मामले में पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत प्रिंसिपल शबनम शर्मा और क्लास अध्यापिका अकांक्षा शर्मा के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। हालांकि किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। एसीपी गगनदीप सिंह ने बताया कि आरोपियों को पकड़ने के लिए रेड की जा रही है।  दसवीं का सर्टिफिकेट नहीं दे रहा था स्कूल अमजोत कौर ने डीडीआईएस स्कूल फतेहगढ़ चूडियां रोड से ग्यारहवीं कक्षा पास की थी और स्कूल प्रबंधन की ओर से उसे दसवीं का सर्टीफिकेट मुहैया नहीं करवाया जा रहा था। चरित्र पर उठाए जाते थे सवाल वहीं अब मामले में एक नया खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि छात्रा के चरित्र पर लगातार सवाल उठाए जाते थे। इतना ही नहीं स्कूल में प्रिंसिपल और क्लास अध्यापिका की ओर से लगातार अपने निजी और घरेलू काम करवाए जाते थे। परिवार का आरोप है कि जब छात्रा ऐसे काम करने से इन्कार करती थी तो उसे परीक्षा में फेल करने और नंबरों को प्रभावित करने की धमकियां दी जाती थीं। इससे वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगी। इसी कारण परेशान होकर उसने जहरीला पदार्थ निगल लिया था। अमजोत कौर अपनी मासी सरबजीत कौर के पास रहती थी।  

आयुष्मान योजना पर संकट के बादल, कुरुक्षेत्र के निजी अस्पतालों ने इलाज रोकने का किया ऐलान

कुरुक्षेत्र. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) ने चार की रात्रि या पांच जून की सुबह को आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का उपचार बंद करने का ऐलान एक बार फिर से किया है। आइएमए के पूर्व प्रधान ड. सुरेंद्र मेहता के मेहता नर्सिंग होम पर आइएमए की बैठक हुई। बैठक के बाद चिकित्सकों ने बताया कि आठ माह से आयुष्मान योजना में इलाज देने वाले अस्पतालों का बकाया नहीं दिया गया है। चिकित्सकों ने बताया कि जिले के निजी अस्पतालों को 45 करोड़ रुपये बकाया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सुरेंद्र मेहता ने कहा कि फरवरी 2025 में सरकार के साथ आइएमए का एमओयू हुआ था, जिसमें 15 दिन के अंदर-अंदर अायुष्मान योजना में इलाज देने वाले मरीजों की पेमेंट जारी करने का आश्वासन दिया गया था। मगर ऐसा नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि इस योजना में वर्ष 2024 के बाद जब चिरायु कार्ड बने उसके बाद समस्या शुरू हुई, जब एक बड़ी संख्या में लोगों के कार्ड बना दिए गए। सरकार ने फरवरी में आश्वासन दिया था कि अप्रैल तक पेमेंट आ जाएगी मगर ऐसा नहीं हुआ। अब जनवरी 2026 से निजी अस्पताल संचालकों की पेमेंट बकाया है। आइएमए भी चाहती है कि सरकार के साथ चलें। मगर इसके लिए विशेष तौर पर चिकित्सक लगाएं ताकि बकाया दिया जा सके। चार की रात को या पांच की सुबह से मरीज लेने बंद करने पड़ेंगे। इस दौरान अग्रवाल नर्सिंग होम से डॉ. अमन अग्रवाल, नंन लाल अस्पताल से डा. अंशुल ग्रोवर, श्रीबालाजी आरोग्यम अस्पताल से डा. अनुराग कौशल, मेहता नर्सिंग होम से डा. सुरेंद्र मेहता, डॉ. प्रियंका गुप्ता मौजूद रहे।