चंडीगढ़
लगातार गिरते भू-जलस्तर से जूझ रहे हरियाणा में अब प्रदेश सरकार ने किसानों को धान की सीधी बिजाई या फिर कम पानी लेने वाली फसलों को लगाने के लिए प्रोत्साहित करने को 'मेरा पानी-मेरी विरासत' तथा 'फसल विविधीकरण और जल संरक्षण' योजना का विस्तार किया है। दोनों योजनाओं में पंजीकरण कराने वाले किसानों की प्रोत्साहन राशि पांच वर्षों तक हर साल बढ़ती जाएगी।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी को मंजूरी प्रदान की है, जिसके बाद कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार ने अधिसूचना जारी कर दी है।
मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत धान की बजाय वैकल्पिक फसलें लगाने वाले किसानों को पहले साल 8000 रुपये, दूसरे वर्ष 8300 रुपये, तीसरे वर्ष 8800 रुपये, चौथे वर्ष 9400 रुपये और पांचवें साल 10,000 रुपये दिए जाएंगे। इतना ही नहीं, दालें, तिलहन और कपास लगाने पर दो हजार रुपये का बोनस अलग से मिलेगा।
इसी तरह धान की सीधी बिजाई पर पहले साल 4500, दूसरे साल 4700, तीसरे साल 5000, चौथे साल 5400 और पांचवें साल 6000 रुपये मिलेंगे। बढ़ी प्रोत्साहन राशि का लाभ उठाने के लिए मेरी फसल-मेरा ब्याेरा पोर्टल पर किला नंबर वही दर्ज होना चाहिए।
मेरा पानी-मेरी विरासत योजना में पहली बार धान की बजाय खेत में मक्का, कपास, खरीफ की दालें (अरहर, मूंग, मोठ, उड़द, ग्वार, सोयाबीन), खरीफ के तिलहन (तिल, अरंडी, मूंगफली), चारे की फसलें, कृषि-वानिकी (पापुलर और सफेदा) तथा खरीफ की प्याज सहित बागवानी फसलें व सब्जियां लगाने पर किसानों के बैंक खातों में आठ हजार रुपये डाले जाएंगे।
इसके बाद किसान जैसे-जैस वैकल्पिक फसलें लगाते रहेंगे, उनकी प्रोत्साहन राशि बढ़ती जाएगी। वे किसान भी लाभान्वित होंगे, जिन्होंने धान लगाने की बजाय अपने खेतों को खाली छोड़ा है।
फिलहाल योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिन्होंने पिछले साल धान उगाया था और इस साल उसी खेत में स्वीकृत वैकल्पिक फसलों में से कोई एक फसल लगाई है। वे किसान, जिन्होंने पिछले चार वर्षों में से किसी भी वर्ष उसी खेत में वैकल्पिक फसलें उगाई थीं, वे पात्र नहीं होंगे।
जिस किसानों ने पिछले खरीफ सीजन में मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत फसल विविधीकरण अपनाया था, वह इस साल भी योजना का लाभ उठा सकेंगे, बशर्ते कि उसी खेत में मंजूर की गईं वैकल्पिक फसलें उगाएं।
यदि कोई किसान किसी बाद के वर्ष में उस 'किला नंबर' पर वैकल्पिक फसलें लगाना बंद कर देता है, तो वह उस विशिष्ट वर्ष में प्रोत्साहन के लिए पात्र नहीं होगा। यदि किसान एक साल के अंतराल के बाद उसी किला नंबर पर वैकल्पिक फसल अपनाता है, तो इसे नया नामांकन माना जाएगा और उसे प्रति एकड़ 8000 रुपये का शुरुआती वर्ष का प्रोत्साहन मिलेगा।
डीएसआर मशीन पर मिलेगी 40 हजार रुपये तक सब्सिडी
धान की सीधी बिजाई के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डीएसआर मशीन पर सब्सिडी कीमत की 50 प्रतिशत या 40 हजार रुपये (जो भी कम हो) के हिसाब से दी जाएगी। सभी लाभार्थियों के बैंक खातों में यह राशि डीबीटी के माध्यम से डाली जाएगी।
हरी खाद लगाने पर प्रति एकड़ मिलेंगे एक हजार रुपये
किसानों को खेतों में हरी खाद तैयार करने के लिए एक हजार रुपये प्रति एकड़ दिए जाएंगे। ढैंचा, गर्मी की मूंग, उड़द, लोबिया, मोठ, अरहर और सोयाबीन तथा ग्वार लगाने पर यह प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।




