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भाजपा की नई प्रदेश टीम लगभग तैयार, क्षेत्रीय अध्यक्षों को लेकर सबसे ज्यादा कश्मकश

 लखनऊ

उत्तर प्रदेश भाजपा की नई टीम का खाका लगभग तैयार हो चुका है। दिल्ली में इसे अंतिम रूप देने की कवायद बीते चार दिनों से चल रही है। माना जा रहा है कि रविवार को इस पर फाइनल बैठक हो सकती है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के दिल्ली से बाहर होने के चलते अंतिम मुहर नहीं लग सकी है। आज मुहर लगने की पूरी संभावना जताई जा रही है। अध्यक्ष की हरी झंडी मिलने पर कल के बाद कभी भी इसका ऐलान हो सकता है। तमाम दावेदार भी दिल्ली में डेरा डाले हैं। सबसे ज्यादा कश्मकश क्षेत्रीय अध्यक्षों को लेकर है। वहीं विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी करने वाले कुछ चेहरे प्रदेश टीम से बाहर हो सकते हैं। कुछ मौजूदा प्रदेश महामंत्रियों की भूमिका बदलना भी तय माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि उन्हें उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है।

भाजपा के राज्य मुख्यालय पर इन दिनों सन्नाटा है। यूपी के भाजपाई दिल्ली की ओर टकटकी लगाए हैं। दरअसल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम के गठन की कवायद चल रही है। लखनऊ में लंबी मशक्कत के बाद अब गेंद दिल्ली के पाले में है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह कई दिन से दिल्ली में ही हैं।

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष के साथ वार्ता हो चुकी है। मगर राष्ट्रीय अध्यक्ष के बाहर जाने के चलते फिर बैठक नहीं हो सकी है। प्रदेश की नई टीम और क्षेत्रीय अध्यक्षों के साथ ही भाजपा की नई मीडिया टीम को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। दरअसल मौजूदा मीडिया टीम में कई चेहरे प्रदेश पदाधिकारी बनने की दौड़ में पूरी शिद्दत से जुटे हैं।

टिकट के लिए ताल ठोंकने वाले हो सकते हैं बाहर
दरअसल पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए नई टीम के गठन की कवायद में जुटी है। यही कारण है कि आमूल-चूल परिवर्तन की जगह नए और पुरानों का सामंजस्य बनाने की तैयारी है। कुछ मौजूदा पदाधिकारियों का टीम से बाहर होना तय माना जा रहा है। इनमें कुछ ऐसे चेहरे भी शामिल हैं जिन्हें या तो पार्टी चुनाव लड़ाने का मन बना रही है या फिर वे खुद टिकट के लिए ताल ठोंक रहे हैं। वहीं कुछ मौजूदा प्रदेश महामंत्रियों को उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है। एक मौजूदा प्रदेश मंत्री दिल्ली की डोर के सहारे प्रमोशन की दौड़ में है। पार्टी प्रदेश की नई टीम और क्षेत्रीय अध्यक्षों के जरिए सामाजिक समीकरण भी साधेगी।

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