samacharsecretary.com

बैंकिंग सेवाएं रहेंगी सुचारु, SBI समेत अन्य बैंकों की प्रस्तावित हड़ताल फिलहाल स्थगित

नई दिल्ली देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों के लिए जरूरी खबर है। बैंक ने बताया कि 25 और 26 मई 2026 को होने वाली बैंक कर्मचारियों की हड़ताल फिलहाल टाल दी गई है। इसका मतलब है कि इन दोनों दिनों में देशभर में SBI की सभी शाखाएं सामान्य रूप से खुली रहेंगी और ग्राहकों को सभी बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के मिलती रहेंगी। SBI ने क्या कहा? SBI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने बयान में कहा, "हम अपने सम्मानित ग्राहकों को सूचित करते हैं कि ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन (AISBISF) द्वारा 25 और 26 मई 2026 को प्रस्तावित हड़ताल टाल दी गई है। हमारी सभी शाखाएं सामान्य रूप से काम करेंगी और सभी नियमित बैंकिंग सेवाएं प्रदान करेंगी।" क्यों टल गई हड़ताल? SBI स्टाफ एसोसिएशन, बंगाल सर्किल के सचिव सुदीप दत्ता ने कहा, ‘प्रबंधन के साथ मुंबई में हुई बैठक पॉजिटिव रही और कर्मचारी महासंघ की कई मांगों पर प्रगति हुई है। इन परिस्थितियों में प्रस्तावित हड़ताल को स्थगित कर दिया गया है।’ SBI कर्मचारी महासंघ के महासचिव एल चंद्रशेखर ने अपने सदस्यों को भेजे संदेश में कहा, “मुंबई स्थित कॉरपोरेट सेंटर में बैंक प्रबंधन और महासंघ के बीच हुई बैठक सकारात्मक रही। हमें यह बताते हुए खुशी है कि हमारी मांगों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। चर्चा के दौरान हुई प्रगति को देखते हुए प्रस्तावित हड़ताल स्थगित कर दी गई है।” क्या थी मांगें? यह हड़ताल All India State Bank of India Staff Federation (AISBISF) ने बुलाई थी। यूनियन का कहना था कि बैंक में कर्मचारियों की कमी, आउटसोर्सिंग, पेंशन से जुड़े मुद्दे और वेतन असमानता जैसे कई मामलों पर लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। यूनियन ने 16 मांगों की एक सूची रखी थी। इसमें नए कर्मचारियों की भर्ती, खाली पदों को भरना, स्थायी नौकरियों में आउटसोर्सिंग बंद करना, NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में ज्यादा लचीलापन देना और कर्मचारियों के ट्रांसफर नियमों में बदलाव जैसी मांगें शामिल थीं। कर्मचारी संगठन का कहना था कि स्टाफ कम होने से मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। साथ ही, कई शाखाओं में सुरक्षा गार्डों की कमी से सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई थी। हालांकि, बैंक प्रबंधन और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद फिलहाल यह आंदोलन वापस ले लिया गया है। इससे बैंकिंग सेवाओं में संभावित रुकावट टल गई है और ग्राहकों को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

UK से पंजाबियों का मोहभंग, महंगाई-वीजा सख्ती ने विदेश जाने का क्रेज किया कम

चंडीगढ़  पंजाब के युवाओं के लिए कभी ब्रिटेन जाना सबसे बड़ा सपना माना जाता था लेकिन हाल ही में जारी रिपोर्ट ने इस ख्वाहिश को झटका दिया है। ब्रिटेन के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की लंदन रिपोर्ट के अनुसार जून 2025 तक एक वर्ष में रिकॉर्ड 74,000 भारतीय ब्रिटेन छोड़कर चले गए। इसमें 51,000 छात्र, 21,000 कामगार और 3,000 अन्य शामिल हैं। यूके के रहने वाले तिरपाल सिंह के मुताबिक ब्रिटेन सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में आव्रजन नियम बेहद सख्त कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय छात्रों और कामकाजी लोगों के लिए अपने परिवार को साथ ले जाना कठिन बना दिया गया है। न्यूनतम वेतन सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे नौकरी पाना मुश्किल हो गया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी न मिलने पर युवाओं को वापस लौटना पड़ रहा है। स्थायी निवास की अवधि बढ़ाने की चर्चाओं ने भी प्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है। यूके की रहने वाली पंजाबी मूल की बलजिंदर कौर का कहना है कि महंगाई ने हालात और खराब कर दिए हैं। घरों का किराया, बिजली, गैस, यात्रा और रोजमर्रा के खर्च इतने बढ़ चुके हैं कि मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए वहां टिक पाना कठिन होता जा रहा है।  रिपोर्ट के बावजूद ब्रिटेन में पंजाबी समुदाय की पहचान मजबूत बनी हुई है। लंदन, बर्मिंघम, वॉल्वरहैम्प्टन और ब्रैडफोर्ड जैसे क्षेत्रों में पंजाबी संस्कृति और भाषाई पहचान कायम है। ब्रिटिश संसद में पंजाबी मूल के सांसदों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आम युवाओं के बीच कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, दुबई और यूरोप के अन्य देशों की ओर रुझान बढ़ता जा रहा है। पुराने प्रवासी भी अपने देश और मिट्टी की ओर लौटने लगे हैं। अब पंजाब के गांवों में ब्रिटेन का पासपोर्ट कभी जैसी प्रतिष्ठा नहीं रखता और विदेश की ख्वाहिश पहले जैसी सुनहरी नहीं रही। 

धोनी के नए रोल की चर्चा तेज, रविचंद्रन अश्विन के बयान ने बढ़ाई अटकलें

चेन्नई  IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) के मौजूदा सीजन में खराब प्रदर्शन के बाद चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) में बड़े बदलावों की चर्चा तेज हो गई है. इसी बीच टीम इंडिया के पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के एक बयान ने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया है. अश्विन ने इशारों-इशारों में ऐसा संकेत दिया है, जिसके बाद फैन्स अब महेंद्र सिंह धोनी को चेन्नई सुपर किंग्स का अगला हेड कोच मानने लगे हैं।  आईपीएल 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स का प्रदर्शन उम्मीदों के बिल्कुल उलट रहा. ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी में टीम 14 मैचों में सिर्फ 6 जीत हासिल कर पाई और प्लेऑफ की रेस से बाहर हो गई. लगातार हार और कमजोर प्रदर्शन के बाद अब सबसे ज्यादा सवाल हेड कोच स्टीफन फ्लेमिंग पर उठ रहे हैं. हाल ही में फ्लेमिंग ने भी अपने भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने साफ कहा था कि क्रिकेट में कोच का भविष्य हमेशा रिजल्ट तय करते हैं और आगे क्या होगा, इसका फैसला टीम मैनेजमेंट करेगा।  इसी बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक फैन ने मजाक करते हुए लिखा कि अगर सीएसके नया कोच ढूंढ रही है, तो अश्विन को यह जिम्मेदारी नहीं देनी चाहिए क्योंकि वह मैच से पहले ही अपने यूट्यूब चैनल पर प्लेइंग इलेवन बता देंगे.  अश्विन ने भी अपने खास अंदाज में जवाब देते हुए लिखा, 'मैं पूरी तरह सहमत हूं. मैं प्लेइंग इलेवन ही नहीं, बल्कि विपक्षी टीम को हमारी बल्लेबाजी और गेंदबाजी की पूरी प्लानिंग भी बता दूंगा।  रविचंद्रन अश्विन ने आगे मजाकिया अंदाज में कहा कि ऐसा करने पर एंटी करप्शन यूनिट उन्हें पकड़ लेगी और इससे उनकी खुद की असफलता भी तय हो जाएगी. लेकिन इसके बाद अश्विन ने जो लिखा, उसने इंटरनेट पर सनसनी मचा दी. उन्होंने कहा, 'जब MSD (महेंद्र सिंह धोनी) हैं, तो फिर किसी और को ढूंढने की जरूरत ही क्या है?' बस फिर क्या था… सोशल मीडिया पर फैन्स ने तुरंत चर्चा शुरू कर दी कि क्या भविष्य में एमएस धोनी चेन्नई सुपर किंग्स के हेड कोच बन सकते हैं? एमएस धोनी आईपीएल 2026 में एक भी मैच नहीं खेल पाए. शुरुआत में वह पिंडली की मांसपेशियों में खिंचाव से जूझ रहे थे और वापसी की तैयारी के दौरान अंगूठे की चोट ने उन्हें पूरे सीजन से दूर कर दिया. हालांकि मैदान से बाहर रहने के बावजूद वह टीम सेटअप का अहम हिस्सा बने रहे।  एमएस धोनी को क्रिकेट का सबसे बड़ा मास्टरमाइंड माना जाता है. मैच की स्थिति को पढ़ने की क्षमता, दबाव में शांत रहना और बड़े फैसले लेने की कला उन्हें एक आदर्श कोच बनाती है. सीएसके की संस्कृति, टीम मैनेजमेंट और खिलाड़ियों के साथ उनका रिश्ता भी बेहद मजबूत है। 

जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में आयोजित होगा जिला स्तरीय कार्यक्रम

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत गंगा दशमीं पर के उपलक्ष्य में सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में 25 मई को कार्यक्रम आयोजित होंगे। राज्य शासन ने समस्त जिलों में गंगा दशमी पर्व पर आयोजित गतिविधियों एवं कार्यक्रम में सहभागिता करने वाले मुख्य अतिथियों की सूची जारी की है। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल रीवा, मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह रतलाम, मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय धार, मंत्री श्री प्रहलाद पटेल नरसिंहपुर, मंत्री श्री राकेश सिंह जबलपुर, मंत्री श्री करण सिंह वर्मा सिवनी, मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह नर्मदापुरम, मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट देवास, मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना मुरैना, मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया झाबुआ, मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत सागर, मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग विदिशा, मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह निवाड़ी, मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर शिवपुरी, मंत्री श्री राकेश शुक्ला भिंड, मंत्री श्री चेतन्य काश्यप भोपाल और मंत्री श्री इंदर सिंह परमार आगर-मालवा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसी प्रकार राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर सीहोर, राज्यमंत्री श्री धर्मेन्द्र भावसिंह लोधी खंडवा, राज्यमंत्री श्री दिलीप जायसवाल मंडला, राज्यमंत्री श्री गौतम टेटवाल उज्जैन, राज्यमंत्री श्री लखन पटेल दमोह, राज्यमंत्री श्री नारायण सिंह पंवार राजगढ़, राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी सतना, राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार अनूपपुर और राज्यमंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल बैतूल के कार्यक्रम में शामिल होंगे। लोकसभा सांसद श्री रोड़मल नागर शाजापुर, लोकसभा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा सीधी, लोकसभा सांसद श्री जनार्दन मिश्रा मऊगंज, लोकसभा सांसद सुधीर गुप्ता मंदसौर, लोकसभा सांसद श्री बंटी विवेक साहू छिंदवाड़ा, लोकसभा सांसद श्री भारत सिंह कुशवाह ग्वालियर और लोकसभा सांसद श्री शंकर लालवानी इंदौर और राज्यसभा सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर नीमच, राज्यसभा सांसद श्रीमती माया सिंह नारोलिया पांढुर्णा के कार्यक्रम में शामिल होंगे। विधायक श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह पन्ना, विधायक श्री जयसिंह मरावी शहडोल, विधायक श्री अर्चना चिटनीस बुरहानपुर, विधायक श्री बालकृष्ण पाटीदार खरगौन, विधायक श्री श्रीकांत चतुर्वेदी मैहर, विधायक श्री श्याम बरडे बड़वानी, विधायक श्री हरिशंकर खटीक टीकमगढ़, विधायक श्री पन्नालाल शाक्य गुना, विधायक श्री जगन्नाथ सिंह रघुवंशी अशोकनगर, विधायक श्री शिवनारायण ज्ञान सिंह उमरिया, विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी रायसेन, विधायक श्री प्रदीप अग्रवाल दतिया, विधायक श्रीमती ललिता यादव छतरपुर, विधायक श्री संजय सत्येन्द्र पाठक कटनी और विधायक श्री रामनिवास शाह सिंगरौली के कार्यक्रम में शामिल होंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गुड्डीबाई आदिवासी श्योपुर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री रूदेश परस्ते डिंडोरी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री गजेन्द्र सहाय हरदा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हजरीबाई खरत आलीराजपुर और नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती भारती सुरजीत ठाकुर बालाघाट के कार्यक्रम में शामिल होंगे।  

वक्फ संपत्तियों पर बड़ा एक्शन! उत्तर प्रदेश में 31 हजार से अधिक रजिस्ट्रेशन निरस्त

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में उम्मीद पोर्टल पर 31 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया. वक्फ संपत्तियों के दस्तावेजों में त्रुटियां और तकनीकी खामियां मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है. बता दें, उम्मीद पोर्टल पर अब तक कुल 31,328 वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन निरस्त किया जा चुका है।  प्रदेश में दर्ज 1,18,302 वक्फ संपत्तियों में से 31,328 का पंजीकरण रद्द हुआ. इनमें से 31,192 संपत्तियों के वक्फ दावों को भी निरस्त कर दिया गया है. जांच के दौरान कई संपत्तियों के खसरा नंबर वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए।  कई मामलों में राजस्व अभिलेखों में दर्ज रकबे में बदलाव पाया गया. दस्तावेजों के मिलान और रिकॉर्ड सत्यापन के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं।  बता दें, वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 'Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency and Development' पोर्टल लॉन्च किया था. इसे संक्षेप में उम्मीद पोर्टल कहा जाता है।  उत्तर प्रदेश ने केंद्र के ‘उम्मीद’ पोर्टल पर वक्फ प्रॉपर्टीज़ के डिजिटल रजिस्ट्रेशन में देश में शीर्ष स्थान हासिल किया. राज्य सरकार ने दिसंबर 2025 तक 92,832 प्रॉपर्टीज़ का प्रोसेस पूरा किया।  केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने 6 जून 2025 को सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि 5 दिसंबर 2025 तक ‘उम्मीद’ पोर्टल पर वक्फ प्रॉपर्टीज का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित किया जाए. हालांकि बाद में डेडलाइन 6 महीने के लिए बढ़ा दी गई, लेकिन उत्तर प्रदेश ने यह काम तय समय से पहले ही पूरा कर लिया। 

प्राइवेट स्कूलों को मिली राहत, नए सत्र में फीस बढ़ाने पर सरकार की अनुमति जरूरी नहीं

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने  शिक्षा निदेशालय (DoE) को बड़ा झटका देते हुए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि दिल्ली के प्राइवेट स्कूल और बिना सरकारी सहायता वाले मान्यता प्राप्त स्कूलों को नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने पर फीस बढ़ाने के लिए शिक्षा निदेशालय से पहले से अनुमति या मंजूरी लेने की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है। एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की बेंच ने साफ किया कि पूर्व अनुमति केवल उसी स्थिति में जरूरी है, जब कोई स्कूल चालू शैक्षणिक सत्र के बीच में अचानक फीस बढ़ाना चाहता हो। कोर्ट ने यह कहा कि किसी स्कूल के खाते में केवल 'सरप्लस फंड' होने का मतलब यह कतई नहीं निकाला जा सकता कि वह स्कूल शिक्षा का व्यावसायीकरण कर रहा है। फीस बढ़ाने की स्वायत्तता पर हाईकोर्ट की मुहर हालांकि, बेंच ने अपने निर्देश में यह भी साफ कर दिया कि DoE को सौंपे गए बयानों में संबंधित स्कूलों द्वारा प्रस्तावित फीस में बढ़ोतरी केवल 2027 के शैक्षणिक सत्र से ही लागू होगी। बेंच ने कहा कि किसी भी स्कूल को पिछले शैक्षणिक सत्रों के लिए फीस या अन्य चार्जेस का कोई भी बकाया पिछली तारीख से मांगने या वसूलने की अनुमति नहीं होगी। DoE का काम स्कूलों के कामकाज को 'माइक्रो-मैनेज' करना नहीं बेंच ने यह साफ किया कि जो स्कूल किसी एकेडमिक सेशन की शुरुआत में फीस बढ़ाते हैं, उन्हें सेशन शुरू होने से पहले DoE को प्रस्तावित फीस का एक स्टेटमेंट जमा करना होगा। हालांकि, जस्टिस भंभानी ने कहा कि प्राइवेट, बिना सरकारी मदद वाले और मान्यता प्राप्त स्कूलों को अपनी वित्तीय आजादी का अधिकार बना रहेगा। शिक्षा निदेशालय का काम स्कूलों के रोजमर्रा के वित्तीय कामकाज को डिक्टेट करना या 'माइक्रो-मैनेज' करना नहीं है। DoE के रेगुलेटरी अधिकार बहुत सीमित हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निजी, बिना सरकारी मदद वाले और मान्यता प्राप्त स्कूलों में फीस तय करने के मामले में DoE के रेगुलेटरी अधिकार बहुत सीमित हैं और वे आम तौर पर दखल देने की इजाजत नहीं देते। कोर्ट ने कहा कि किसी स्कूल के खातों में सिर्फ ज्यादा पैसे होने के आधार पर DoE यह नतीजा नहीं निकाल सकता कि स्कूल कमर्शियलाइजेशन (मुनाफाखोरी) कर रहा है। DoE को 2 महीने में प्रस्तावों पर लेना होगा फैसला हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा कि जहां कोई स्कूल चल रहे एकेडमिक सेशन के दौरान फीस बढ़ाने का प्रस्ताव रखता है, तो उसे अपना प्रस्ताव DoE को उस तारीख से कम से कम दो महीने पहले जमा करना होगा, जिस तारीख से बदली हुई फीस लागू करने की मांग की जा रही है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि DoE को ऐसे प्रस्ताव पर उसी दो महीने के समय में फैसला करना होगा, ऐसा न करने पर प्रस्ताव को मंजूर माना जाएगा। 137 प्राइवेट स्कूलों की याचिका पर आया फैसला यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब दिल्ली के 137 प्राइवेट स्कूलों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इन स्कूलों ने वर्ष 2016-17 से 2022-23 के बीच समय-समय पर फीस बढ़ाने के प्रस्ताव दिए थे, जिन्हें शिक्षा निदेशालय (DoE) ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने सरकार के उन आदेशों को 'गलतफहमी पर आधारित' बताते हुए पूरी तरह से रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने साफ किया कि जिन स्कूलों को सरकारी जमीन 'लैंड क्लॉज' (जमीन आवंटन की शर्त) के तहत मिली है, उन पर भी सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाने के लिए यही नियम लागू होगा।

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, 8वें वेतन आयोग में हो सकता है जबरदस्त वेतन इजाफा

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारी कई बड़ी मांग कर रहे हैं. खासकर बेसिक सैलरी, फिटमेंट फैटक्‍टर और महंगाई भत्ता को लेकर मांगे उठ रही हैं. अगर ये मांगे मान ली जाती हैं तो केंद्रीय कर्मचारियों की मौज हो सकती है, जिनकी सैलरी में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।  रेलवे कर्मचारियों की मांग इस बीच, रेलवे के कर्मचारियों की ओर से मांग उठी है कि उनकी मिनिमम बेसिक सैलरी बढ़ाकर ₹52,000 कर दिया जाए. इसके साथ ही फिटमेंट फैक्‍टर 4.38 तक बढ़ाने, HRA में भारी इजाफा और पुरानी पेंशन योजना लागू करने जैसी मांगें रखी हैं।  रेलवे की ये संस्‍था कर रही मांग अगर रेवले कर्मचारियों की ये मांगे मान ली जाती हैं तो जूनियर इंजीनियर, सीनियर सेक्शन इंजीनियर, असिस्टेंट मैनेजर और दूसरे तकनीकी कर्मचारियों के लिए 8वां वेतन आयोग बड़ी खुशखबरी ला सकता है. यह मांग इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन (IRTSA) की ओर से की गई है।  अलग-अलग फिटमेंट फैक्‍टर की मांग IRTSA संगठन ने अलग-अलग लेवल के कर्मचारियों के लिए अलग फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दिया है. L-1 से L-5 के लिए 2.92, L-6 से L-8 के लिए 3.50, L-9 से L-12 के लिए 3.80, L-13 से L-16 के लिए 4.09 और L-17 और L-18 के लिए 4.38 फिटमेंट फैक्‍टर रखा गया है।  कितनी बढ़ेगी सैलरी अगर मांगे मान ली जाती हैं तो मिनिमम बेसिक सैलरी ₹52,000 होगी और अधिकमत करीब ₹9.85 लाख रुपये तक की सैलरी हो जाएगी।  एचआरए में बढ़ोतरी की मांग रेलवे कर्मचारी संगठन ने एचआरए में भी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है, जो बढ़कर 40 फीसदी तक हो सकता है. संगठन का कहना है कि बड़े शहरों में रहने का खर्च तेजी से बढ़ा है, इसलिए HRA में बढ़ोतरी जरूरी है।  हाउस रेंट अलाउंस पर प्रस्ताव IRTSA ने कहा है कि 5वें वेतन आयोग द्वारा निर्धारित उस सिद्धांत का पालन 8वें वेतन आयोग में भी किया जाना चाहिए, जिसके तहत 50% DA को मूल वेतन के साथ मिला दिया जाता है। कर्मचारी संगठन ने यह सिफारिश की है कि DA पर टैक्स की राहत मिलनी चाहिए। IRTSA ने 8वें वेतन आयोग के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की दरों में बढ़ोतरी का सुझाव दिया है। 7वें वेतन आयोग में HRA की दरें 8%, 16% और 24% थीं, जिन्हें 2024 में DA के 50% तक पहुंचने के बाद बढ़ाकर 10%, 20% और 30% कर दिया गया था। अब इसे चार श्रेणियों में बांटने की मांग की गई है। 50 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में 40 प्रतिशत HRA, 20 से 50 लाख आबादी वाले शहरों में 30 प्रतिशत, 5 से 20 लाख आबादी वाले शहरों में 20 प्रतिशत और 5 लाख से कम आबादी वाले शहरों में 10 प्रतिशत HRA देने की मांग रखी गई। इसके अलावा नाइट ड्यूटी अलाउंस की सीमा हटाने और ट्रांसपोर्ट अलाउंस को तीन गुना बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया गया। करियर प्रगति को लेकर IRTSA ने मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) योजना में बड़ा बदलाव सुझाया। संगठन चाहता है कि कर्मचारियों को 30 साल की सेवा में पांच प्रमोशन मिलें। ये प्रमोशन 6, 12, 18, 24 और 30 वर्ष की सेवा पूरी होने पर दिए जाएं। साथ ही जूनियर इंजीनियर (JE), सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE) और अन्य तकनीकी कर्मचारियों की ट्रेनिंग अवधि को भी MACP के लिए सेवा अवधि में जोड़ा जाए। वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग भी प्रमुख रही। IRTSA ने जूनियर इंजीनियरों को उनके अधीन काम करने वाले वरिष्ठ तकनीशियनों से अधिक ग्रेड पे देने, SSE के वेतन स्तर को बढ़ाने और तकनीकी कर्मचारियों के लिए अलग वेतन संरचना बनाने की मांग की। 

छात्रों-शिक्षकों को बड़ी राहत, बिहार सरकार ने स्कूलों में पुरानी हाफ-डे व्यवस्था लौटाने का लिया फैसला

पटना बिहार के सरकारी स्कूलों के समय और कार्यदिवसों को लेकर पिछले कई महीनों से चल रहे विवाद पर अब सम्राट सरकार पूर्णविराम लगाने जा रही है. राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों और शिक्षकों के हित में एक और बड़ा कदम उठाते हुए शनिवार को आधे दिन के कार्यदिवस वाली पुरानी व्यवस्था फिर से बहाल करने का निर्णय लिया है. सूत्रों के अनुसार, नए निर्णय के के तहत अब बिहार के सभी सरकारी स्कूलों में शनिवार को ‘हाफ डे’ यानी आधे दिन की पढ़ाई होगी. बताया जा रहा है कि शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक और नए शेड्यूल की गहन समीक्षा के बाद इस प्रस्ताव पर अंतिम सहमति बन गई है, और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी जल्द ही इस नई व्यवस्था की आधिकारिक घोषणा करेंगे।  पौने छह लाख शिक्षकों और करोड़ों छात्रों को मिलेगी राहत बता दें कि पिछले कुछ समय से राज्य के पौने छह लाख सरकारी शिक्षक और विभिन्न शिक्षक संघ लगातार यह मांग उठा रहे थे कि शनिवार को फुल डे की जगह हाफ डे की व्यवस्था दोबारा शुरू की जाए. खासकर मई महीने की इस भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच पूरे दिन स्कूल संचालन से बच्चों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा था. इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के करोड़ों छात्र-छात्राओं को राहत मिलेगी, बल्कि मानसिक तनाव से जूझ रहे शिक्षकों को भी वीकेंड पर अपने जरूरी कार्यों को निपटाने का समय मिल सकेगा।  31 मई तक जारी हो जाएगी आधिकारिक अधिसूचना शिक्षा विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस नए स्कूल शेड्यूल और समय सारिणी यानी टाइम टेबल (Time Table) को लेकर ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है. विभाग आगामी 31 मई तक इस संबंध में विधिवत अधिसूचना जारी कर देगा. सम्राट सरकार का यह फैसला इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकार लगातार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ शिक्षकों और छात्रों के अनुकूल माहौल तैयार करने की कोशिशों में जुटी है. माना जा रहा है कि जून महीने में स्कूल खुलने के साथ ही यह व्यवस्था पूरी तरह से जमीन पर प्रभावी हो जाएगी।   

PM मोदी के सामने आया मंत्रियों का परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड, किस मंत्रालय ने मारी बाजी?

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सभी मंत्रालयों के कामकाज का लेखा-जोखा रखा गया। कैबिनेट सचिवालय द्वारा तैयार किए गए इस नए असेसमेंट सिस्टम के तहत साल 2025 के प्रदर्शन के आधार पर मंत्रालयों का 'रिपोर्ट कार्ड' पेश किया गया। इसमें विभिन्न श्रेणियों में सबसे अच्छा और सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों की पहचान की गई है। इस दौरान पीएम मोदी ने मंत्रियों को खर्चों पर लगाम लगाने और फिजूलखर्ची से बचने के सख्त निर्देश भी दिए हैं। नई मूल्यांकन प्रणाली: 2025 में कैसे तय हुई परफॉर्मेंस? कैबिनेट सचिवालय द्वारा तैयार किए गए इस नए असेसमेंट सिस्टम के तहत मंत्रालयों के प्रदर्शन की बारीकी से समीक्षा की गई। इस दौरान कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने सभी मंत्रालयों का विस्तृत स्कोरकार्ड पेश किया। बैठक में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी कामकाज को नागरिकों के लिए अधिक सुलभ कैसे बनाया जाए। किन पैमानों पर कसा गया मंत्रालयों को? मूल्यांकन के दौरान मंत्रालयों को सिर्फ उनके कोर काम पर नहीं, बल्कि संकट की स्थिति में उनकी सक्रियता पर भी परखा गया। शिकायत निवारण: आम जनता की समस्याओं को कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से सुलझाया गया। फाइल मैनेजमेंट: दफ्तरों में अटकी हुई फाइलों का निपटारा कितनी तेजी से हुआ। रणनीतिक सूझबूझ: अंतर-मंत्रालयी मामलों में सटीक और अहम सुझाव देना। संकट प्रबंधन: पश्चिम एशिया युद्ध जैसे वैश्विक संकट के बीच देश के हितों को सुरक्षित रखना। बेस्ट और वर्स्ट परफॉर्मर: किस मंत्रालय ने मारी बाजी? इस कड़ी समीक्षा में कुछ मंत्रालयों ने बेहतरीन काम कर टॉप स्कोर हासिल किया है, जबकि खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों को सुधार के लिए चिन्हित किया गया है ताकि खामियों को दूर किया जा सके। खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों के नाम सामने नहीं आए हैं। यहां सबसे अच्छा परफॉर्म करने वाले मंत्रालयों की लिस्ट है। मंत्रालय शानदार प्रदर्शन का क्षेत्र (Top Category) उपभोक्ता मामले मंत्रालय जन शिकायत निवारण और पश्चिम एशिया संकट प्रबंधन कोयला मंत्रालय फाइलों का त्वरित निपटान और उत्कृष्ट विभागीय प्रबंधन ऊर्जा मंत्रालय ऊर्जा सुरक्षा और लक्ष्यों की समय पर प्राप्ति स्वास्थ्य मंत्रालय स्वास्थ्य सुविधाओं और नीतिगत मोर्चे पर शानदार काम पीएम मोदी का सख्त निर्देश: फिजूलखर्ची पर लगेगी लगाम चार घंटे से अधिक चली इस बैठक में मोदी 3.0 की दूसरी वर्षगांठ (9 जून) से पहले सरकार की दिशा तय कर दी गई है। प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों को वीआईपी कल्चर से दूर रहने की सख्त सलाह दी है। बैकग्राउंड और पीएम के प्रमुख निर्देश: विदेशी दौरों पर पाबंदी: जब तक देश के हित में बहुत जरूरी न हो या भारत के भविष्य के लिए अहम न हो, विदेशी यात्राएं नहीं होंगी। बड़े काफिलों से परहेज: मंत्रियों को अपने बड़े काफिलों को छोटा करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही इसके लिए एक नया अभियान शुरू हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय समिट रद्द: फिजूलखर्ची रोकने के लिए अफ्रीका और 'बिग कैट एलायंस' जैसी इंटरनेशनल मीटिंग्स फिलहाल टाल दी गई हैं। ऊर्जा संकट पर फोकस: पश्चिम एशिया के तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के गतिरोध को देखते हुए बायोगैस व नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल पर फोकस करने को कहा गया है। आम जनता के लिए इसका क्या मतलब है? अक्सर आम लोग सरकारी दफ्तरों में लटकती फाइलों और लेट-लतीफी से परेशान रहते हैं। इस 'रिपोर्ट कार्ड' सिस्टम से नौकरशाही और मंत्रियों को सीधा संदेश गया है कि उनकी कुर्सी 'परफॉर्मेंस' से तय होगी। इससे पब्लिक के लिए सरकारी योजनाओं का फायदा बिना किसी रुकावट के पहुंचने का रास्ता साफ होगा। साथ ही, अनावश्यक खर्चों पर रोक लगने से देश का पैसा सीधे विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे पर खर्च हो सकेगा।

शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ा फैसला, मेरिट आधार पर होगा चयन

 भोपाल मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब शिक्षक भर्ती के लिए अलग से चयन परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। उम्मीदवारों को केवल शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करनी होगी और उसी के आधार पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस नई व्यवस्था की तैयारी शुरू कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मप्र कर्मचारी चयन मंडल (ESB) के लिए “कनिष्ठ सेवा संयुक्त परीक्षा नियम-2026” का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। संभावना है कि यह नियम अगले एक माह के भीतर लागू कर दिए जाएंगे। जुलाई व अगस्त में माध्यमिक व प्राथमिक पात्रता परीक्षा से इसकी शुरुआत होगी। दोहरी परीक्षा प्रणाली होगी समाप्त अब तक उच्च माध्यमिक, माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पहले पात्रता परीक्षा और उसके बाद चयन परीक्षा आयोजित की जाती थी। इस व्यवस्था के कारण अभ्यर्थियों को दो बार आवेदन करना पड़ता था और अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती थी। नई प्रणाली लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया आसान हो जाएगी और केवल एक परीक्षा के आधार पर भर्ती की जाएगी। वर्ष 2018 में आयोजित उच्च माध्यमिक और माध्यमिक शिक्षक भर्ती में भी एकल परीक्षा प्रणाली अपनाई गई थी। उस समय करीब 21 हजार पदों पर भर्ती की गई थी। हालांकि बाद में शिक्षक भर्ती-2023 और प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2024 में फिर दो चरणों वाली परीक्षा प्रणाली लागू कर दी गई थी। अब विभाग फिर से पुरानी एकल परीक्षा व्यवस्था लागू करने जा रहा है। सरकारी शिक्षकों के लिए स्कोर कार्ड की वैधता दो वर्ष नई व्यवस्था के तहत सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए जारी स्कोर कार्ड की वैधता दो वर्ष तक रहेगी। यदि इस अवधि में अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं मिलती है तो उसे दोबारा परीक्षा देनी होगी। भर्ती के लिए विभागीय पोर्टल पर रिक्त पदों की जानकारी जारी की जाएगी और मेरिट के आधार पर चयन किया जाएगा। निजी स्कूलों में भी पात्रता परीक्षा अनिवार्य निजी स्कूलों में भी अब केवल पात्रता परीक्षा पास अभ्यर्थियों की ही नियुक्ति की जाएगी। हालांकि निजी विद्यालय किसी भी वर्ष की पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण उम्मीदवार को नियुक्त कर सकेंगे। निजी स्कूलों के लिए स्कोर कार्ड की वैधता आजीवन रहेगी। अभ्यर्थियों को आर्थिक राहत नई व्यवस्था से अभ्यर्थियों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा। पहले सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को पात्रता परीक्षा और चयन परीक्षा दोनों के लिए अलग-अलग 500 रुपये शुल्क देना पड़ता था। हर वर्ष लगभग पांच से छह लाख अभ्यर्थी इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। अब एक ही परीक्षा होने से समय और धन दोनों की बचत होगी। स्कोर सुधारने का मिलेगा मौका ईएसबी अधिकारियों के अनुसार नई प्रणाली में अभ्यर्थियों को भविष्य में अपने स्कोर में सुधार करने का अवसर भी मिलेगा। उम्मीदवार चाहें तो दोबारा परीक्षा देकर बेहतर अंक प्राप्त कर सकते हैं। अब शिक्षक भर्ती के लिए सिर्फ पात्रता परीक्षा होगी। चयन परीक्षा नहीं होगी। आजीवन वैध रहेगा, लेकिन अभ्यर्थी चाहें तो अपने स्कोर में सुधार के लिए दोबारा परीक्षा दे सकते हैं।- केके द्विवेदी, संचालक, स्कूल शिक्षा विभाग