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मरीजों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं, अनियमितताएं मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई

रायपुर  राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप आम नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन लगातार सतर्क और सक्रिय है। इसी कड़ी में  जीपीएम जिला प्रशासन के निर्देश पर डी.डी. हॉस्पिटल, सेमरा तिराहा पेंड्रारोड का स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा विस्तृत निरीक्षण एवं जांच की गई। जांच के दौरान अस्पताल के संचालन तथा मरीजों को प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जांच में सामने आया कि मृतक मरीज ज्योति सोनवानी एक्लेम्सिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थी, जिसका उपचार चिकित्सा महाविद्यालय स्तर की स्वास्थ्य संस्था में किया जाना आवश्यक था। इसके बावजूद मरीज को अस्पताल में भर्ती कर उपचार किए जाने को नियमानुसार उचित नहीं पाया गया। स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अस्पताल प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा है। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि नर्सिंग होम अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आपातकालीन सेवाओं के लिए चौबीसों घंटे चिकित्सक की उपलब्धता अनिवार्य है, किंतु 17 एवं 18 जून 2026 को अस्पताल में मरीजों की देखरेख के लिए कोई चिकित्सक एवं पर्याप्त दक्ष स्टाफ उपलब्ध नहीं था। यह स्थिति न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल के वार्डों का निरीक्षण किया, जहां सर्जरी के बाद कई मरीज भर्ती पाए गए। ऐसी संवेदनशील परिस्थिति में ऑन ड्यूटी चिकित्सक का अनुपस्थित होना अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को दर्शाता है। जांच में यह भी सामने आया कि शल्य चिकित्सा कार्यों के लिए आवश्यक स्त्री रोग विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सक, निश्चेतना विशेषज्ञ तथा अन्य प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई थी। साथ ही भर्ती मरीजों की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए आवासीय चिकित्सा अधिकारी की व्यवस्था भी नहीं पाई गई। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत उपचार प्राप्त करने वाले मरीजों से निर्धारित पैकेज के अतिरिक्त लगभग एक लाख पचास हजार रुपये की राशि लिए जाने संबंधी शिकायत भी जांच के दौरान सामने आई। स्वास्थ्य विभाग ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच प्रारंभ कर दी है। प्रशासन का स्पष्ट मत है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के पहुंचना चाहिए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि अस्पताल द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम 2010 के अंतर्गत निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया है। अस्पताल प्रबंधन को तीन दिवस के भीतर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होने की स्थिति में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरीजों के जीवन और स्वास्थ्य सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार के मार्गदर्शन में जिले में स्वास्थ्य संस्थाओं की नियमित निगरानी जारी रहेगी तथा निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह कार्रवाई स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मंत्री काश्यप से युवा उद्यमी रत्नेश ने की सौजन्य भेंट

भोपाल  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप ने भोपाल के युवा स्टार्टअप उद्यमी एवं प्रमाणित टी टेस्टर आरिन रत्नेश की अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स अब वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नवाचार आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करने और युवाओं को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। भोपाल स्थित स्टार्टअप कंपनी हरितिमा फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फ्रांस को 46 हजार आईस्ड टी प्रीमिक्स पैक्स का सफल निर्यात किए जाने पर आरिन रत्नेश ने मंत्री काश्यप से उनके कार्यालय में सौजन्य भेंट की तथा उन्हें अपने उत्पादों की श्रृंखला भेंट कर आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव एमएसएमई राघवेंद्र सिंह तथा उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार भी उपस्थित थे। मंत्री काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्यमों के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को ऐसे अवसर उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपने नवाचारों को सफल व्यवसाय में परिवर्तित कर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा सकें। उन्होंने कहा कि आरिन रत्नेश की उपलब्धि प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और यह दर्शाती है कि मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स में वैश्विक प्रतिस्पर्धा की अपार क्षमता है। मंत्री काश्यप ने बताया कि प्रदेश सरकार स्टार्टअप्स को निवेशकों से जोड़ने, विपणन अवसर उपलब्ध कराने तथा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर द्वारा आरिन रत्नेश को वर्ष 2025 में नई दिल्ली में आयोजित India International Trade Fair (IITF-2025) में मध्यप्रदेश पवेलियन के माध्यम से अपने उत्पादों के प्रदर्शन का अवसर उपलब्ध कराया गया था। इससे उनके उत्पादों को व्यापक पहचान मिली और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक संभावनाओं को विस्तार मिला। श्री आरिन रत्नेश ने राज्य शासन एवं एमएसएमई विभाग द्वारा प्राप्त सहयोग और प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी सहायता और उचित मंच मिलने से उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। मंत्री काश्यप ने कहा कि प्रदेश सरकार नवाचार, उद्यमिता और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है तथा ऐसे युवा उद्यमियों की सफलता मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी स्टार्टअप राज्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।  

लक्ष्मणगढ़, शंकरपुर, कुमदेवा और सायर में मंदिर विकास कार्यों का हुआ भूमिपूजन

रायपुर धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर पैदा होंगे रोजगार के नए अवसर-  अग्रवाल छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश की धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी कड़ी में पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री तथा अंबिकापुर विधायक  राजेश अग्रवाल ने आज सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के अंतर्गत ग्राम लक्ष्मणगढ़, शंकरपुर, कुमदेवा एवं सायर में विभिन्न मंदिरों के जीर्णाेद्धार कार्यों का विधिवत भूमिपूजन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ संपन्न हुए इन कार्यक्रमों के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल देखा गया। धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर पैदा होंगे रोजगार के नए अवसर-  अग्रवाल संस्कृति और सामाजिक एकता के केंद्र हैं मंदिर            ग्राम लक्ष्मणगढ़ में सुआहारिन मंदिर, ग्राम शंकरपुर एवं कुमदेवा में शिव मंदिर तथा ग्राम सायर में मंदिर जीर्णाेद्धार कार्यों के शुभारंभ अवसर पर मंत्री  राजेश अग्रवाल ने क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मंदिर हमारी सनातन संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ऐसे धार्मिक कार्य समाज में श्रद्धा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को और अधिक मजबूत करने का काम करते हैं। धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर पैदा होंगे रोजगार के नए अवसर-  अग्रवाल धार्मिक पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा          मंत्री  अग्रवाल ने रेखांकित किया कि राज्य सरकार प्रदेश की धार्मिक विरासत को सहेजने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंदिरों के जीर्णाेद्धार और विकास से न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर विकास की गति तेज होगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। धार्मिक स्थलों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों और गौरवशाली संस्कृति से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनता है। धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर पैदा होंगे रोजगार के नए अवसर-  अग्रवाल सुख-समृद्धि की मंगलकामना          कार्यक्रम के अंत में धर्मस्व मंत्री ने भगवान भोलेनाथ और क्षेत्र की आराध्य शक्तियों की पूजा कर समस्त प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण की मंगलकामना की। उन्होंने क्षेत्र की निरंतर उन्नति के लिए ईश्वर से आशीर्वाद भी मांगा। विभिन्न गांवों में आयोजित इन कार्यक्रमों को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह था। ग्रामीणों ने मंदिर जीर्णाेद्धार के इस ऐतिहासिक कार्य के लिए राज्य सरकार और मंत्री  राजेश अग्रवाल के प्रति आभार व्यक्त किया।

माँ की जान बचाने में आगे बढ़ा भारत, मध्यप्रदेश की प्रगति राष्ट्रीय औसत से दोगुनी एमएमआर में 38 अंकों की गिरावट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हर माँ और हर नवजात का सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करना हमारी सरकार का संकल्प है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार, आधुनिक तकनीक के उपयोग और जमीनी स्तर तक सेवाओं की पहुँच के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। उन्होंने एसआरएस सर्वे में उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य अमले को बधाई दी है एवं सतत प्रयास करते रहने का आह्वान किया है। तकनीक आधारित निगरानी से प्राप्त हुए सकारात्मक परिणाम: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर में आई ऐतिहासिक गिरावट स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, जमीनी स्तर पर कार्यरत अमले की मेहनत और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली का परिणाम है। भारत सरकार के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार देश में मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 2018–20 के 97 से घटकर 2022–24 में 87 प्रति एक लाख जीवित जन्म पर आ गया है। मध्य प्रदेश ने इस दिशा में राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रदेश का एमएमआर 2018–20 में 173 था, जो 2022–24 में घटकर 135 रह गया है। यह 38 अंकों यानी लगभग 22 प्रतिशत की गिरावट है, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी से भी अधिक है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, प्रशिक्षित डॉक्टरों एवं स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं के विस्तार से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए है। प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया गया है। प्रसव केंद्रों, प्रसूति गहन देखभाल इकाइयों (ऑब्सटेट्रिक एचडीयू), एफआरयू और सीईमॉनसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। ब्लड स्टोरेज यूनिट्स की स्थापना और रेफरल परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने से गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो रहा है। तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं ने भी मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एएनएमओएल 2.0 एप्लीकेशन के माध्यम से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का रियल-टाइम पंजीयन, जांच और फॉलो-अप सुनिश्चित किया जा रहा है। सुमन सखी चैटबॉट के जरिए गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी एवं आवश्यक मार्गदर्शन 24×7 उपलब्ध कराया जा रहा है। सुमन पहल के अंतर्गत हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान, ट्रैकिंग और प्राथमिकता आधारित प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे प्रसव पूर्व, प्रसव के दौरान और प्रसव पश्चात होने वाली जटिलताओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर विस्तार, आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी तथा दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर पहुँच के माध्यम से मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के तहत मातृ मृत्यु अनुपात को 70 से नीचे लाने के लक्ष्य की दिशा में सुगठित प्रयास जारी रहेंगे।  

सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति पर नजर: 31 जनवरी डेडलाइन, अचल संपत्ति विवरण अनिवार्य

रायपुर राज्य सरकार के तमाम अधिकारी-कर्मचारी को 31 जनवरी तक अनिवार्य रूप से अपनी अचल सम्पत्ति का वार्षिक विवरण प्रस्तुत करना होगा. इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से तमाम अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विशेष सचिव को तीन बिंदुओं में निर्देश जारी किया गया है. सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी पत्र में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-19(1) के तहत प्रत्येक शासकीय सेवकों को अपने अचल संपत्ति के संबंध में वार्षिक विवरण 31 जनवरी तक प्रस्तुत करना अनिवार्य बताया है. जनवरी 2026 से समस्त सचिवालय सेवा के अधिकारियों-कर्मचारियों के कैलेण्डर वर्ष 1.1.2025 से 31.12.2025 तक की स्थिति में धारित किए वार्षिक अचल संपत्ति का विवरण एनआईसी द्वारा संचालित SPARROW (epar.cg.gov.in) पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत करना होगा.

राज्य में आधार कार्ड नियमों में बड़ा बदलाव, विभागों को जारी हुई कड़ी गाइडलाइन

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने दस्तावेज़ों की प्रमाणिकता को लेकर बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी सरकारी कार्य में आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण-पत्र के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह निर्णय दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया को अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। नियोजन विभाग ने सभी प्रमुख सचिवों और अपर मुख्य सचिवों को आदेश भेजते हुए बताया कि आगे से उम्र प्रमाणित करने के लिए केवल मान्य दस्तावेज़-जैसे जन्म प्रमाण पत्र, हाईस्कूल सर्टिफिकेट या अन्य अधिकृत प्रमाण-ही मान्य होंगे। इस फैसले की पृष्ठभूमि में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का 31 अक्टूबर को जारी किया गया पत्र है, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि आधार कार्ड पहचान का दस्तावेज़ है, न कि जन्मतिथि का प्रमाणपत्र। UIDAI के इस निर्देश के बावजूद कई विभाग आधार को जन्म तारीख का प्रमाण मानकर चल रहे थे, जिसके बाद यूपी सरकार ने इसे रोकने के लिए औपचारिक आदेश जारी कर दिया। नियोजन विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह ने साफ कहा कि अब राज्य के किसी भी विभाग में आधार को उम्र प्रमाणित करने के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा और सभी कार्यालयों को इस नियम का पालन करना होगा।

पंचायत पुनर्संरचना: राजस्थान में 3400 नई पंचायतों की अधिसूचना जारी

जयपुर राजस्थान में पंचायतों का नक्शा एक बार फिर से बदल गया है। राज्य सरकार ने शुक्रवार को पंचायतों के पनुर्गठन की अधिसूचना जारी कर दी। इनमें 41 जिलों की पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है। पुनर्गठन में करीब 3400 नई पंचायतों को जोड़ा गया है। इसके बाद प्रदेश में ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़कर लगभग 14 हजार के आस-पास हो गई है। इस पुनर्गठन से पहले प्रदेश में 11194 ग्राम पंचायतें थीं। अब पुनर्गठन के बाद राजस्थान में पंचायती राज का नक्शा पूरी तरह बदल गया है। यह अधिसूचना इसलिए भी अहम है क्योंकि राजस्थान में अगले साल पंचायतों और निकायों के चुनाव होने हैं। नए नई सीमाओं के साथ राजस्थान में पंचायतों की राजनीति भी पर भी असर पड़ना तय है। नई पंचायतों के निर्माण के बाद सरपंच, उपसरपंच और वार्ड पंच के पदों की संख्या बड़े पैमाने पर बढ़ जाएगी। जितनी नई पंचायतें बनी हैं, उतने ही नए पद भी होंगे। अब आगामी चुनाव इन्हीं नई पंचायतों के अनुसार होंगे। रेगिस्तानी जिलों में मापदंडों में छूट के कारण नई पंचायतों की संख्या अधिक रही है। सरकार ने साल भर पहले से पंचायतों के पुनर्गठन का काम शुरू किया था और जिलों से प्रस्ताव मंगवाकर पंचायतीराज व ग्रामीण विकास विभाग को भेजे गए थे। राजनीतिक तौर पर बीजेपी ने भी इस प्रक्रिया के लिए विशेष कमेटी बनाई थी। नई पंचायतों के निर्माण से जनता को सुविधा भी मिलेगी। बाड़मेर, जैसलमेर, फलोदी, बीकानेर, चूरू सहित रेगिस्तानी जिलों और आदिवासी इलाकों में अब पंचायत मुख्यालय के लिए कम दूरी तय करनी होगी। पहले एक पंचायत में तीन-चार गांव होने के कारण लोग कई किलोमीटर की यात्रा करके सरकारी काम निपटाते थे, लेकिन अब इलाके छोटे होने से समय और मेहनत की बचत होगी। इसके साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। नई पंचायतों के साथ ग्राम सचिव, पटवारी और पंचायत सहायकों के पद बढ़ेंगे। इससे शिक्षित बेरोजगारों के लिए नई नियुक्तियों के अवसर खुलेंगे। आगामी भर्तियों में भी इन नई पंचायतों के हिसाब से पदों में वृद्धि की जाएगी। जयपुर में 20 पंचायत समतियों का पुनर्गठन राजधानी जयपुर में 20 पंचायत समितियों  का पुनर्गठन किया गया है। इनमें सीएम भजनलाल शर्मा के विधानसभा क्षेत्र सांगानेर की पंचायत समिति भी शामिल है। जिन पंचायत समितियों का यहां पुनर्गठन किया गया है उनमें जमवारामगढ़, दूदू, फागी, आंधी, चाकसू, कोटखावदा, बस्सी, तूंगा, जालसू, जोबनेर, गोविंदगढ़, शाहपुरा, विराटनगर, मौजमाबाद, माधोराज पुरा, सांभरलेक, झोटवाड़ा, आमेर, सांगानेर व किशनगढ़-रेनवाल शामिल हैं।

भर्ती घोटाला मामला: डबल बेंच का फैसला — 37 चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति पर अब कोई रोक नहीं

 बिलासपुर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) 2021-22 भर्ती घोटाले से जुड़ा मामला अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज करते हुए उन 37 चयनित अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया है, जिनके खिलाफ अब तक सीबीआई (CBI) ने कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्ति (ज्वाइनिंग) दी जाए। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच में हुई। इस दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी। सिंगल बेंच ने पहले ही इन 37 अभ्यर्थियों के पक्ष में आदेश दिया था, जिसके अनुसार जिन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है या चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है, उन्हें ज्वाइनिंग दी जानी चाहिए। मामला CGPSC द्वारा 2021-22 में आयोजित विभिन्न सरकारी पदों की परीक्षा और चयन प्रक्रिया से जुड़ा है। चयन प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आने के बाद सरकार ने इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी थी। जांच में कुछ उम्मीदवारों पर संदेह जताया गया और कुछ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि बाकी अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग पर रोक लगा दी गई थी। लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे 37 अभ्यर्थियों, जिनमें अमित कुमार समेत अन्य चयनित उम्मीदवार शामिल हैं, ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने दलील दी थी कि केवल जांच के नाम पर बिना चार्जशीट के उनकी नियुक्ति रोकना अनुचित है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला देते हुए राज्य सरकार को ज्वाइनिंग देने का निर्देश दिया था। हालांकि, सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए डबल बेंच में अपील की। अब डबल बेंच ने भी सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखते हुए सरकार की याचिका खारिज कर दी है। डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि, “जब तक किसी अभ्यर्थी के खिलाफ आपराधिक चार्जशीट दाखिल नहीं होती, उसे नियुक्ति से वंचित रखना न्यायोचित नहीं है।” इस फैसले के बाद अब उन सभी 37 चयनित उम्मीदवारों के लिए राहत का रास्ता साफ हो गया है, जो लंबे समय से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे। इस निर्णय को न केवल अभ्यर्थियों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता और न्यायिक निष्पक्षता का उदाहरण भी पेश करता है। अब राज्य सरकार को हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, उन सभी उम्मीदवारों को जल्द ज्वाइनिंग देने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी, जिनके खिलाफ सीबीआई ने अब तक कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की है।

स्थिति बेहद खराब — मेकाहारा अस्पताल पर भड़का हाईकोर्ट, एक बेड पर दो प्रसूताओं का मामला गंभीर

बिलासपुर रायपुर के मेकाहारा अस्पताल के गायनिक वार्ड में दो प्रसूताओं को एक ही बेड पर भर्ती किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं इस मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने कहा, स्थिति बेहद ही खराब है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और 6 नवंबर तक एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को शपथ पत्र में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की बेंच ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा, अगर राजधानी के प्रमुख अस्पताल की यह स्थिति है तो प्रदेश के अन्य जिलों में हालात की कल्पना की जा सकती है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) को 6 नवंबर तक शपथपत्र प्रस्तुत करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसी घटनाएं मानव गरिमा के विपरीत है और प्रशासन को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। सरकारी सिस्टम पर उठे सवाल इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जनता अब यह सवाल उठा रही है कि जब राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का यह हाल है तो ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में मरीजों का क्या हाल होगा?

राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: नवा रायपुर में निवेश और विकास कार्यों की प्रगति

रायपुर नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण में आज वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी की अध्यक्षता में निवेश, अधोसंरचना विकास और जनसुविधाओं से संबंधित कार्यों की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में मंत्री चौधरी ने अधिकारियों से शहर के योजनाबद्ध और तीव्र विकास पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि नवा रायपुर का संतुलित, आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि चल रही परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए, ताकि नागरिकों को बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। उन्होंने बताया कि विकास कार्यों में गति लाने के लिए इस वर्ष राज्य शासन के बजट अंतर्गत पूंजीगत व्यय का लक्ष्य 1000 करोड़ रुपये रखा गया है। सभी इस लक्ष्य को गुणवत्तापूर्वक पूरा करने के लिए समर्पण भाव से कार्य करें। मंत्री चौधरी ने यह भी निर्देश दिए कि शासकीय एवं निजी संस्थानों तथा बिल्डर्स को आवंटित भूमि पर हो रहे निर्माण कार्यों को समन्वयपूर्वक और शीघ्र गति से पूरा किया जाए, ताकि नवा रायपुर के इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके। बैठक में निवेश को प्रोत्साहन देने, पर्यावरण संरक्षण, अधोसंरचना विकास और शहरी जनसुविधाओं के उन्नयन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर प्राधिकरण के चेयरमैन अंकित आनंद, मुख्य कार्यपालन अधिकारी चंदन कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।