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अंबाला बना मिसाल: फसल अवशेष प्रबंधन से बढ़ रही मिट्टी की उर्वरता और खेती का लाभ

फरीदाबाद  हरियाणा में गेहूं कटाई के बाद फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर किसानों में काफी जागरूकता देखने को मिल रही है. दरअसल पहले जहां खेतों में बचे डंठलों (फाने) और पराली को जला दिया जाता था. वहीं अब किसान वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहे हैं, बल्कि अपनी भूमि की उर्वरता भी बढ़ा रहे हैं. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फसल अवशेष जलाना खेती के लिए हानिकारक कदम है, क्योंकि इससे मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं. जैविक कार्बन की मात्रा घटती है और खेत की उत्पादक क्षमता प्रभावित होती है. साथ ही इससे निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण और तापमान वृद्धि का कारण बनता है, यही वजह है कि कृषि विभाग लगातार किसानों को जागरूक कर रहा है और इसके साथ ही फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर कई जगह कानूनी कार्रवाई भी की जा रही हैं. पराली को जलाया नहीं बल्कि मिट्टी में मिला दिया बता दे कि इस दिशा में अंबाला जिला पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है. क्योंकि इस वर्ष जिले में गेहूं की कटाई पूरी होने के बाद किसानों ने फसल अवशेषों का प्रबंधन अत्यंत जिम्मेदारी के साथ किया है. फसलों के फाने (डंठलों) को जलाने के बजाय किसानों ने रोटावेटर, हैप्पी सीडर और मल्चर जैसी आधुनिक मशीनों का उपयोग करके उन्हें मिट्टी में मिला दिया. इससे अवशेष धीरे-धीरे सड़कर प्राकृतिक खाद में परिवर्तित हो जाते हैं, जिससे मिट्टी में उर्वरक शक्ति बढ़ती है और जल धारण क्षमता मजबूत होती है. खासतौर पर इस वैज्ञानिक पद्धति से खेत की सेहत सुधरती है और आने वाली फसलों को बेहतर पोषण मिलने के साथ साथ पशुओं के लिए भूसे की व्यवस्था भी होती हैं. ढैंचा की खेती के लिए किया जा रहा जागरूक कृषि विभाग की निरंतर जागरूकता का परिणाम है. कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि गेहूं कटाई के बाद खाली पड़े खेतों का बेहतर उपयोग करने के लिए किसानों को ढैंचा की खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. क्योंकि ढैंचा एक महत्वपूर्ण दलहनी हरी खाद फसल है, जो मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिर करती है और भूमि की प्राकृतिक उर्वरता को बढ़ाती है. इसकी खेती के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 25 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है ओर बुवाई के 30 से 40 दिन बाद इस फसल को खेत में पलटकर मिट्टी में मिला दिया जाता है, जिससे जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है. रासायनिक खाद से कम होती है उर्वरता लगातार यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी के लाभकारी जीवों की संख्या घट रही है, जिससे भूमि की शक्ति कमजोर हो रही है और खेती की लागत बढ़ रही है.उन्होंने कहा कि ऐसे में ढैंचा जैसी हरी खाद फसलें किसानों के लिए कम खर्च में अधिक लाभ देने वाला विकल्प साबित हो रही हैं. सरकार भी इस पहल को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रति एकड़ ढैंचा की खेती पर 1,000 रुपये का अनुदान दे रही है तथा बीज सब्सिडी पर उपलब्ध करा रही है. वहीं अंबाला जिले के किसानों ने यह साबित कर दिया है कि यदि आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और वैज्ञानिक सोच को अपनाया जाए तो खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है. फसल अवशेष न जलाने और हरी खाद को अपनाने की यह पहल हरियाणा के अन्य जिलों के किसानों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है.

Crop Diversity पर जोर: पंजाब में स्थापित होगा बासमती राइस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य में बासमती चावल के लिए एक हाई लेवल ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य क्रॉप डायवर्सिटी को बढ़ावा देना, किसानों की आय में वृद्धि करना और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को कम करना है। मुख्यमंत्री नीदरलैंड दौरे पर गए हैं, जहां उन्होंने कृषि और उद्योग क्षेत्र की एडवांस टेक्नोलॉजी को करीब से देखा और समझा। उन्होंने कहा कि पंजाब के किसानों ने देशहित में लंबे समय तक अपनी उपजाऊ जमीन और जल संसाधनों का अधिक उपयोग किया है, लेकिन अब गेहूं-धान के चक्र से बाहर निकलना समय की मांग है। इस दिशा में क्रॉप डायवर्सिटी को बड़े स्तर पर बढ़ावा देना जरूरी है और इसमें नीदरलैंड महत्वपूर्ण सहयोगी साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री ने रॉटरडैम में LT Foods की फैसिलिटी का दौरा किया, जहां उन्हें कंपनी के ग्लोबल प्रेजेंस और किसानों के साथ उसके मजबूत संबंधों के बारे में पता चला। उन्होंने सस्टेनेबल फार्मिंग पर जोर देते हुए कहा कि इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के मुताबिक उत्पादन के लिए कीटनाशकों के उपयोग में कमी लाना और बासमती चावल को वैश्विक बाजार में बढ़ावा देना आवश्यक है। कंपनी ने पंजाब में बासमती के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने और कम कीटनाशक उपयोग वाली खेती को बढ़ावा देने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने डच कंपनियों और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के बीच रिसर्च और सहयोग को मजबूत करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि घटते मुनाफे के कारण खेती अब कम लाभकारी हो गई है, जिससे किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह केंद्र बासमती चावल का उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में सुधार करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही उन्होंने आल्समीयर स्थित विश्व के सबसे बड़े फूल बाजार का दौरा कर डच मॉडल को पंजाब में अपनाने की इच्छा भी जताई, जिससे कृषि वैल्यू चेन मजबूत होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नीदरलैंड सरकार के कृषि, मत्स्य पालन, खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के साथ बैठक में तकनीक आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए सहयोग पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि पंजाब ऑटोमेशन, एआई, ड्रोन और डेटा आधारित क्रॉप मैनेजमेंट जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार है। ग्रीनहाउस खेती को भी उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए उपयुक्त बताते हुए उन्होंने इसके विस्तार पर जोर दिया। मुख्यमंत्री मान ने डच कंपनियों को पंजाब में निवेश के लिए आमंत्रित किया और राज्य की औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति-2026 तथा फास्टट्रैक पंजाब पोर्टल जैसी पहल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पंजाब निवेश के लिए तेजी से उभरता हुआ केंद्र बन रहा है। अंत में, भगवंत सिंह मान ने तकनीक आधारित, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर एकीकृत कृषि एवं औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

106830 किसानों को आज होगा 407 करोड़ का भुगतान

दुर्ग. जिले के समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने वाले किसानों को अंतर की राशि 407 करोड़ 89 लाख 82 हजार का आज भुगतान होगा. इससे कुल 106830 किसान लाभान्वित होंगे. इसमें कामन धान 15351 व ग्रेड ए पर 14931 रुपए प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि दी जाएगी. योजनांतर्गत जिले में वर्ष 2025-26 के कृषक उन्नति योजनांतर्गत विकासखण्ड- दुर्ग के 25057 कृषकों को 8703.03, पाटन 44122 कृषकों को 16995.87 लाख एवं धमधा के 37651 कृषकों को राशि 15090.54 लाख रुपए भुगतान की जा रही है. खरीफ 2025 में प्रदेश के किसानों से उपार्जित धान की मात्रा पर धान (कॉमन) पर राशि 731 रुपए प्रति क्वि. की दर से अधिकतम राशि रू. 15351 प्रति एकड़ तथा धान (ग्रेड-ए) का राशि 711 रुपए प्रति क्वि. की दर से अधिकतम 14931 रुपए प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान किया जायेगा.

कृषि रथ से किसानों को मिट्टी में मौजूद तत्वों के अनुसार फसल कॉम्बीनेशन की मिल रही जानकारी

“कृषक कल्याण वर्ष-2026” कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही है वैज्ञानिक कृषि तकनीक की जानकारी कृषि रथ से किसानों को मिट्टी में मौजूद तत्वों के अनुसार फसल कॉम्बीनेशन की मिल रही जानकारी कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही आधुनिक कृषि तकनीकों की ट्रेनिंग और जानकारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। कृषि को आधुनिक तकनीक, परम्परागत ज्ञान और प्राकृतिक संतुलन के साथ नई ऊँचाइयों तक ले जाने तथा अन्नदाता के सम्मान और समग्र उत्थान की दिशा में इस महा अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किया गया है। बुरहानपुर जिले में जिला स्तरीय कार्यक्रम एवं संवाद-सत्र के आयोजन के साथ ‘‘कृषि रथ’’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर बुरहानपुर विधायक मती अर्चना चिटनिस, जनप्रतिनिधि, प्रगतिशील कृषकगण उपस्थित रहे। कृषि रथ द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में पहुंचकर किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग प्रबंधन, फसल विविधिकरण, कृषि को लाभकारी बनाने के उपाय, विभागीय योजना, ई-टोकन उवर्रक वितरण व्यवस्था तथा पराली प्रबंधन संबंधित योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। प्रगतिशील किसानों को उत्पादन लागत को कम करने के लिये सही मिट्टी, सही खेती एवं सही फसल का कॉम्बीनेशन की जानकारी भी दी जा रही है। ग्राम पातोंडा, चिंचाला एवं एमागिर्द में कृषक चौपाल आयोजित बुरहानपुर जिले में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, पशुपालन विभाग, सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम द्वारा ग्राम पंचायत पातोंडा, चिंचाला एवं एमागिर्द में कृषक चौपाल का आयोजन किया गया। कृषक चौपाल में उर्वरक वितरण की ई-टोकन प्रणाली, प्राकृतिक खेती के आधार जैसेः-जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, दसपर्णी अर्क को बनाने की विधि की विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मृदा के स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभावों, मिट्टी नमूना लेने की विधि एवं संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग की अनुशंसा करने की सलाह दी गयी। दलहन एवं तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए जायद फसल उड़द और मूंगफली के बारे में बताया गया एवं बुवाई के लिए प्रेरित भी किया गया। बुरहानपुर जिले के विभिन्न ग्रामों में आयोजित हो रही कृषक चौपालों में पराली प्रबंधन सहित योजनाओं एवं अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर भी जानकारी दी जा रही है। ग्राम बाकड़ी में लगी कृषि चौपाल, योजनाओं की दी जानकारी कृषक कल्याण वर्ष-2026 अंतर्गत बुरहानपुर जिले के ग्राम बाकड़ी में कृषि रथ पहुंचा। इस दौरान विभागीय अधिकारियों द्वारा चौपाल लगाकर ग्रामीणों को उन्नत कृषि एवं तकनीकियों की बारीकी से जानकारी दी गयी। ग्रामीणों को जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कीट व रोग प्रबंधन, फसल विविधीकरण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के उपाय बताये गये। कृषि विभाग द्वारा संचालित कृषि रथ गांव-गांव पहुंचकर किसानों को जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दे रहा है। प्रदेश सरकार के नेतृत्व में जिले में समृद्ध किसान से समृद्ध प्रदेश बनाने के लिये निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रत्येक गुरूवार को ‘‘प्राकृतिक हाट बाजार’’ आयोजित बुरहानपुर जिले में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने एवं उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रति गुरुवार को महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि उपज मंडी, शनवारा में ‘‘प्राकृतिक हाट बाजार’’ का आयोजन किया जा रहा है। हाट बाजार के अवलोकन के दौरान कलेक्टर  हर्ष सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है, इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ सुरक्षित एवं पौष्टिक उत्पाद प्राप्त होते है, अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती करने के लिये प्रोत्साहित करें।  

कश्मीर से कन्याकुमारी तक यात्रा करेंगे किसान: डल्लेवाल

पानीपत/उचाना. किसान नेताजगजीत सिंह डल्लेवाल और अभिमन्यु कोहाड़ ने देशव्यापी किसान यात्रा का एलान किया है। यह यात्रा 7 फरवरी को कन्याकुमारी से शुरू होकर कश्मीर तक जाएगी और 19 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में लाखों किसानों की महापंचायत के साथ समाप्त होगी। सात फरवरी से कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकाले जाने वाली किसान जागृति यात्रा को लेकर उचाना खुर्द बीकेयू (एकता सिधुपूर) राष्ट्रीय अध्यक्ष दलजीत सिंह डल्लेवाल पहुंचे। यहां पर किसानों के साथ बैठक की। मुख्य रूप से राज्य प्रधान अभिमन्यु कोहाड़ मौजूद रहे। किसानों से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। अध्यक्षता जिला महासचिव अनिल बेनीवाल ने की। दलजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि कन्या कुमारी से जो यात्रा शुरू होगी वो कश्मीर जाकर समाप्त होगी। यात्रा से पहले गांव-गांव जाकर किसानों के साथ बातचीत कर रहे हैं। किसानों के करवाए जाएंगे हस्ताक्षर देश के किसानों को जागरूक करने का प्रयास है कि एमएसपी, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट, किसानों की कर्ज मुक्ति, बिजली संशोधन बिल, भूमि अधिग्रहण सहित अन्य मांगों को लेकर एक प्रस्ताव गांवों के किसानों के पास भेजा जाएगा। प्रस्ताव पर किसानों के हस्ताक्षर करवाए जाएंगे। 19 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान बड़ी किसान महापंचायत के साथ यात्रा का समापन होगा। जिन गांव से जितने प्रस्ताव आएंगे वह पीएम नरेन्द्र मोदी को सौपेंगे। आज किसानों को उनकी फसलों का भाव नहीं मिल रहा है। हरियाणा की सरकार कह रही है कि हम एमएसपी पर फसल खरीद रहे हैं। किसानों की एमएसपी पर फसल नहीं बिक रही है। किसान कर्ज के अंदर डूबे हुए हैं। गांव-गांव जाकर किसानों से बातचीत कर रहे हैं। यात्रा के दौरान पैदल, ट्रैक्टर मार्च व गाड़ियों में भी चलेंगे। अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि संगठन को मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं। आज ज़मीन बचाना बहुत जरूरी है। ज़मीन बचेगी, खेती बचेगी तो हमारा भविष्य बचेगा। सरकार आइएमटी सहित अलग-अलग तरीकों से ज़मीनों पर कब्जा करने का प्रयास कर रही है। सरकार की गलत नीतियों का करेंगे विरोध सरकार की जो नीतियां गलत होंगी, उनका विरोध करेंगे। सरकार आज कह रही है कि फैक्ट्री, उद्योग लगाने के लिए ज़मीन अधिग्रहण कर रही है। सच्चाई ये है कि 2004-05 में सेज कानून के तहत सवा लाख से अधिक ज़मीन एक्वायर की गई थी, जिसमें से 60 से 65 प्रतिशत आज भी ज़मीन खाली है। इस मौके पर विक्की ढांडा, सुनील उझाना, कृष्ण, गेजी, सुरेंद्र व बलवंत मौजूद रहे।

किसान कल एक बार फिर टोल प्लाजा करवाएंगे फ्री

पटियाला. भारतीय किसान यूनियन एकता भटेड़ी कला के राजपुरा ब्लॉक की एक अहम मीटिंग आयोजित की गई। इसमें कई अहम फैसले लिए गए। मीटिंग के दौरान यह फैसला लिया गया कि 12 जनवरी को 4 घंटे के लिए टोल प्लाजा फ्री किए जाएंगे। यूनियन के नेता बलकार सिंह फौजी जस्सोवाल ने बताया कि धेरडी जट्टां पटियाला, शंभू हरियाणा-पंजाब बॉर्डर और बनूड़ में टोल प्लाजा को टोल फ्री करने के साथ-साथ पंजाब के अन्य टोल प्लाजा भी फ्री करने की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा 13 जनवरी को लोहड़ी के मौके पर बिजली बिल 2025 की कॉपियां जलाकर रोष प्रदर्शन किया जाएगा और साथ ही 21 और 22 जनवरी दूसरे फेज के तहत चिप वाले मीटर निकालकर सब-डिविजन दफ्तरों में जमा करवाए जाएंगे। मीटिंग में यह भी फैसला लिया गया कि जत्थेबंदी द्वारा पहले जारी किए गए सभी पुराने पहचान पत्र रद्द कर दिए गए हैं। अब नए पहचान पत्र जारी किए जाएंगे, जिनमें जत्थेबंदी के प्रदेश अध्यक्ष के हस्ताक्षर सहित स्कैन की गई फोटो लगाई गई है ताकि कोई भी व्यक्ति नकली कार्ड न बना सके। जत्थेबंदी ने सभी सदस्यों से अपील की है कि वे अपने-अपने नेताओं से संपर्क करके नए चिप वाले पहचान पत्र बनवा लें। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर कोई भी व्यक्ति कहीं भी पुराने या नकली कार्ड तैयार करता या पहचान के लिए पुराने कार्ड का इस्तेमाल करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मौके पर गुरदेव सिंह राजपुरा, गुरविंदर सिंह रामपुर खुर्द, गुरदीप सिंह खिजरगढ़ कनौड़, भगवान दास पवरी, मेवा सिंह, खेम सिंह रामपुर, हरि किरसन तख्तू माजरा समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे।

किसानों की मेहनत से भारत ने बनाई नई ऊंचाई, चीन भी रह गया पीछे, जानें क्यों है यह बड़ी खबर

नई दिल्ली  नए साल की शुरुआत इससे बेहतर नहीं हो सकती. जब हम और आप जश्न में डूबे हैं, तभी भारत के खेतों से एक ऐसी खबर आई है, जिसने हर हिंदुस्तान का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है. यह खबर सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वाभिमान, संघर्ष और जीत की एक महागाथा है. भारत अब चावल उत्पादन में चीन को पछाड़कर दुनिया का नंबर 1 देश बन गया है. जी हां, वही चीन जो अब तक कृषि और मैन्‍यूफैक्‍चर‍िंग में दुनिया का सिरमौर माना जाता था, उसे हमारे अन्नदाताओं ने अपनी मेहनत के दम पर पीछे छोड़ दिया है. खुद कृष‍ि मंत्री श‍िवराज सिंह चौहान ने यह खुशखबरी शेयर की है. यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक और भावुक करने वाली है क्योंकि एक वक्त था जब भारत अपनी आबादी का पेट भरने के लिए अमेरिका के जहाजों का इंतजार करता था, और आज वही भारत दुनिया के कुल चावल उत्पादन का 28 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अपने खेतों में उगा रहा है. आज की युवा पीढ़ी शायद उस दर्द को महसूस न कर पाए, लेकिन हमारे बुजुर्गों की आंखों में वो मंजर आज भी तैरता है. 1960 के दशक की बात है. भारत आजाद तो हो गया था, लेकिन हमारे पास अपने लोगों को खिलाने के लिए पर्याप्त अनाज नहीं था. अकाल और सूखे ने देश की कमर तोड़ दी थी. हालत यह थी कि भारत को अमेरिका के साथ PL-480 समझौते के तहत अनाज मांगना पड़ता था. अमेरिका से जो गेहूं आता था, वह लाल रंग का होता था और अक्सर उसकी गुणवत्ता इतनी खराब होती थी कि उसे वहां जानवरों को खिलाया जाता था. लेकिन भूख से जूझ रहे भारत के पास कोई विकल्प नहीं था. इसे ‘शिप टू माउथ’की स्थिति कहा जाता था यानी जब जहाज बंदरगाह पर आएगा, तभी देश के लोगों के मुंह तक निवाला पहुंचेगा. तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देश की नाजुक हालत को देखते हुए देशवासियों से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने की अपील की थी. वह भारत की बेबसी का दौर था. दुनिया के कई देशों को लगता था कि भारत कभी अपनी भूख नहीं मिटा पाएगा और बिखर जाएगा. 2026 का भारत… अब हम दुनिया को खिलाते हैं अब उस ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर को हटाकर आज के रंगीन और समृद्ध भारत को देखिए. आज वही भारत, किसी के आगे हाथ नहीं फैलाता, बल्कि दुनिया का पेट भरता है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्‍स पर ल‍िखा, अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है कि भारत ने चावल उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है. चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत चावल उत्पादन में विश्व का सबसे अग्रणी देश बना है. सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि आज दुनिया में चावल की जितनी खेती होती है, उसका 28 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले भारत का है. यानी दुनिया की हर चौथी चावल की थाली में भारतीय चावल की महक है. चीन को पछाड़ना क्यों है बड़ी बात? चीन, दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के साथ-साथ कृषि तकनीकों में भी काफी आगे रहा है. दशकों से चावल उत्पादन में चीन का दबदबा था. चीन के पास हाइब्रिड चावल की उन्नत तकनीक और प्रति हेक्टेयर ज्यादा उपज की क्षमता थी. ऐसे में, भारत का चीन से आगे निकलना यह साबित करता है कि अब हम तकनीक और उत्पादन क्षमता में महाशक्तियों को टक्कर दे रहे हैं. यह भारत की फूड स‍िक्‍योरिटी के साथ-साथ खाद्य आत्‍मनिर्भरता की जीत है. अब हमें अपनी शर्तों पर दुनिया से व्यापार करने की ताकत मिल गई है. यह चमत्कार हुआ कैसे?     ‘शिप टू माउथ’ से ‘वर्ल्ड लीडर’ बनने तक का यह सफर आसान नहीं था. इसके पीछे कई दशकों का संघर्ष और मौजूदा सरकार की रणनीतियां शामिल हैं. कृषि मंत्री ने इस सफलता का श्रेय तीन प्रमुख स्तंभों को दिया है. सबसे बड़ा श्रेय हमारे किसान भाइयों और बहनों को जाता है. चाहे पंजाब-हरियाणा के खेत हों, या दक्षिण भारत के धान के कटोरे, या फिर पूर्वी भारत के उपजाऊ मैदान, किसानों ने सर्दी, गर्मी और बरसात की परवाह किए बिना खेतों में सोना उगाया है. मंत्री ने इसे अन्नदाताओं के अथक परिश्रम का परिणाम बताया.     अब खेती केवल परंपरा नहीं, साइंस बन गई है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिकों ने चावल की ऐसी किस्में विकसित कीं जो कम पानी में ज्यादा उपज देती हैं, और जो बीमारियों से लड़ सकती हैं. उन्नत वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों ने उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई.     सरकार की नीतियों ने उत्प्रेरक का काम किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘बीज से बाजार तक’ की रणनीति अपनाई गई. स्‍वॉयल हेल्‍थ कार्ड, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, और एमएसपी (MSP) में लगातार वृद्धि ने किसानों को सुरक्षा और प्रोत्साहन दिया. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम मोदी के सतत प्रयासों के आज “ठोस और सकारात्मक परिणाम” दिख रहे हैं. विश्व पटल पर भारत की धमक भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है. वैश्विक चावल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 40% से अधिक है. अब उत्पादन में नंबर 1 बनने के बाद, दुनिया के कई देश अपनी खाद्य सुरक्षा के लिए भारत पर निर्भर होंगे. भारत का बासमती चावल खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका और यूरोप तक अमीरों की पहली पसंद है. यह भारत की सॉफ्ट पावर है. जब दुनिया में कोरोना का संकट आया या युद्ध के कारण सप्लाई चेन टूटी, तब भारत ने कई गरीब देशों को अनाज भेजा. अब नंबर 1 बनकर भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज और सहारा बनकर उभरेगा.

नई कृषि क्रांति की तैयारी – ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से होगी स्मार्ट खेती

नई दिल्ली.  भारत में कृषि अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि तकनीक का संगम बन चुकी है. एग्री-टेक यानी कृषि प्रौद्योगिकी ने किसानों की मेहनत को आधुनिक साधनों से जोड़कर खेती को लाभकारी बना दिया है. ड्रोन से लेकर सेंसर्स, डेटा एनालिटिक्स और मोबाइल ऐप्स तक- हर स्तर पर तकनीक का असर दिखने लगा है. अब किसान मौसम की सटीक जानकारी, मिट्टी की गुणवत्ता और फसल की पैदावार का अनुमान डिजिटल साधनों से कर पा रहे हैं. इससे न सिर्फ उत्पादकता बढ़ रही है, बल्कि लागत में भी बड़ी कमी आई है. केंद्र सरकार की योजना परवान चढ़ी तो देश में कृषि अब हल-बैल से नहीं, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ), रोबोट और बीजों की जीन एडिटिंग से चलेगी। पानी की बर्बादी शून्य होगी और भरपूर पैदावार से अन्नदाता किसान की आय मौजूदा स्तर से दोगुनी हो सकती है। नीति आयोग ने अगले पांच साल के लिए देश में खेती का रोडमैप जारी करते हुए यह सपना दिखाया है जो सच भी हो सकता है। नीति आयोग ने रोडमैप के रूप में विजन डॉक्यूमेंट ‘रीइमैजिनिंग एग्रीकल्चर : रोडमैप फॉर फ्रंटियर टेक्नोलॉजी लेड ट्रांसफॉर्मेशन’ तैयार किया है। इस डॉक्यूमेंट में कृषि में 100 प्रतिशत आत्मनिर्भता लाने के लिए ऐसी तकनीकों को चुना है, जिसके जरिए देश की कृषि में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। ये तकनीकें क्लाइमेट चेंज, पानी की कमी, मिट्टी की थकान और बाजार की अनिश्चितता को खत्म करने में मददगार बनेगी। रोडमैप पर प्रभावी अमल से अगले 5 साल में देश मेें कृषि लागत 40 प्रतिशत घटने का अनुमान जताया गया है। कृषि लागत को ही किसानों की खुशहाली और खेती को लाभकारी बनाने में सबसे बड़ी बाधा माना जाता है। रोडमैप से कृषि उत्पादन में 60 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी। स्मार्ट फार्मिंग: खेतों से जुड़ी स्मार्ट सोच ‘स्मार्ट फार्मिंग’ अब भारतीय गांवों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यह तकनीक खेती के हर चरण में वैज्ञानिक नजरिया अपनाने पर आधारित है. उदाहरण के लिए, ड्रोन के जरिए फसलों पर छिड़काव से समय और पानी दोनों की बचत होती है. वहीं, सेंसर से मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों की निगरानी कर किसान तय कर सकते हैं कि किस समय कितनी सिंचाई या खाद की जरूरत है. कई स्टार्टअप्स किसानों को मोबाइल ऐप्स के माध्यम से बाजार भाव, बीज चयन, और फसल बीमा की जानकारी भी दे रहे हैं. इससे किसान पहले से ज्यादा आत्मनिर्भर और जागरूक हो रहे हैं. डिजिटल एग्रीकल्चर से नए अवसर सरकार और निजी कंपनियां मिलकर ‘डिजिटल एग्रीकल्चर’ को तेजी से बढ़ावा दे रही हैं. प्रधानमंत्री किसान ड्रोन योजना, डिजिटल किसान पोर्टल, और ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) जैसी पहलों ने किसानों के लिए तकनीक को सुलभ बना दिया है. आज किसान अपने स्मार्टफोन से सीधे मंडियों से जुड़ सकते हैं और बिचौलियों से बचकर बेहतर दाम पा सकते हैं. इसके अलावा, सैटेलाइट इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकें फसलों की स्थिति पर नज़र रखती हैं और समय रहते चेतावनी भी देती हैं. इससे फसल नुकसान की संभावना काफी घट गई है. आधुनिक तकनीक से आत्मनिर्भर किसान एग्री-टेक ने भारतीय कृषि को नई दिशा दी है. जहां पहले खेती को जोखिम भरा माना जाता था, वहीं अब यह इनोवेशन और उद्यमिता का क्षेत्र बन चुका है. युवा किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ जैविक, हाइड्रोपोनिक और प्रिसिशन फार्मिंग जैसी तकनीकों को अपना रहे हैं. इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है. भारत धीरे-धीरे ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर इकोनॉमी’ की ओर बढ़ रहा है, जहां तकनीक और परंपरा मिलकर एक स्थायी कृषि भविष्य की नींव रख रहे हैं. संक्षेप में भारत में एग्री-टेक सिर्फ खेती का आधुनिकीकरण नहीं, बल्कि किसानों की जिंदगी में नई उम्मीदों की बुआई है. तकनीक ने साबित कर दिया है कि अगर सही जानकारी और संसाधन मिलें, तो खेत भी डिजिटल इंडिया की ताकत बन सकते हैं. फ्रंटियर टेक्नोलॉजी : खेत से लैब तक ड्रोन फार्मिंग : एक घंटे में 50 एकड़ पर कीटनाशक छिड़काव, 80% दवा बचत। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व मशीन लर्निंग (एआइ/एमएल): मौसम, कीट, बीमारी का 100% सटीक पूर्वानुमान। इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी) : मिट्टी की नमी, पीएच, पोषक तत्व 24 घंटे सातों दिवस मोबाइल पर। सैटेलाइट इमेजरी : बादल पार कर फसल की लाइव तस्वीर, सूखा-बाढ़ अलर्ट। ब्लॉकचेन : बीज से बाजार तक पारदर्शी चेन, नकली खाद-बीज खत्म। रोबोटिक्स : बुवाई, निराई, कटाई सब ऑटोमैटिक, मजदूरों की कमी दूर। जीन एडिटिंग (सीआरआइएसपीआर ) : 2 साल में सूखा, कीट, नमक रोधी नई किस्में। प्रिसिजन फार्मिंग : हर पौधे को अलग खाद-पानी, 30% लागत में होगी बचत। वर्टिकल फार्मिंग : शहरों में की छतों पर 10 मंजिला खेत, 1 एकड़ यानी 10 एकड़ यील्ड पर फॉर्मिंग। हाइड्रोपोनिक्स : बिना मिट्टी, 90 प्रतिशत कम पानी, साल भर फसल। एरोपोनिक्स : हवा में उगाएं सब्जी, पानी की बूंद भी न बर्बाद। बिग डेटा एनालिटिक्स : हर गांव, हर फसल का अलग ‘डिजिटल फॉर्मूला’। साल दर साल ऐसे कदम वर्ष –लक्ष्य — यह होगा 2026- पायलट प्रोजेक्ट – 10 राज्यों में ड्रोन एआइ हब, 1 लाख एकड़ कवर 2027- डिजिटल पहुंच – 50 प्रतिशत किसानों को मुफ्त ऐप, सैटेलाइट डेटा, आइओटी किट मिलेंगे 2028 –ग्लोबल मार्केट- ब्लॉक चेन से सीधे निर्यात, 10 लाख टन ऑर्गेनिक 2029—रोबोट क्रांति-— 500 रुपए /दिन रोबोट किराया, 50,000 यूनिट डिप्लॉय 2030—स्मार्ट विलेज-–हर गांव में ‘डिजिटल खेत’, आय दोगुनी की गारंटी किसानो को ऐसे लाभ आय: 1 एकड़ में गेहूं से मौजूदा 25,000 रुपए से बढ़कर 2030 में 70,000 रुपए लागत कम: 40% कम होगी (खाद-पानी-दवा) उत्पादन बढ़ेगा : 60% बढ़ेगा पानी बचत : 90% (हाइड्रो/एरोपोनिक्स) बाजार उपलब्धता: 100% (ब्लॉकचेन) फंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर : कृषि-टेक फंड : 50,000 करोड़ रुपए ड्रोन दीदी : 1 लाख महिलाओं को ट्रेनिंग। एआइ लैब: हर जिले में 1 एआइ लैब बनेगी। फ्री स्मार्टफोन: 10 करोड़ किसानों को रोबोट बैंक: 1 लाख यूनिट रेंट पर खुलेगा। सब साथ आएंगे होंगे सफल यह यात्रा अकेले सरकार की नहीं है। यह तभी सफल होगी जब किसान, वैज्ञानिक, उद्यमी, निवेशक और नीति-निर्माता एक साथ आएं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि खेतों तक पहुंचे। जहां यह वास्तव में बदलाव ला सकें। यह रोडमैप ऐसे भविष्य का एक आह्वान है, जहां भारत … Read more

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: फसल सर्वे और गिरदावरी सत्यापन की डेडलाइन में बढ़ोतरी

रायपुर छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए खुशखबरी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के समस्त जिलों के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी के मोबाईल PV ऐप के माध्यम से सत्यापन की समय सीमा को एक माह के लिए बढ़ा दिया है। अब यह प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2025 की बजाय 30 नवंबर 2025 तक की जा सकेगी। बता दें कि इस संबंध में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा आज सभी कलेक्टरों को पत्र जारी किया गया है। विभाग ने पत्र में अपने 11 सितंबर 2025 के आदेश का संदर्भ देते हुए बताया कि पूर्व में यह प्रावधान किया गया था कि गिरदावरी एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे के संशोधन की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2025 तक रहेगी। इसके बाद केवल PV ऐप के माध्यम से भौतिक सत्यापन के बाद ही प्रविष्टियों में संशोधन किया जा सकेगा। यह ऐप 15 सितंबर 2025 से Go Live किया गया था, जिसके माध्यम से 31 अक्टूबर 2025 तक प्रविष्टियों में बदलाव करने की अनुमति थी। अब शासन ने किसानों की सुविधा और प्रशासनिक कार्यों को ध्यान में रखते हुए इस अवधि को 30 नवंबर 2025 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस अवधि में संबंधित अधिकारी PV ऐप के जरिए भौतिक सत्यापन उपरांत डेटा संशोधन कर सकेंगे। गौरतलब है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी का यह ऑनलाइन सत्यापन अभियान राज्य में कृषि डेटा के डिजिटलीकरण और पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम है। इससे फसलों के वास्तविक रकबे का सटीक आंकलन किया जा सकेगा, जो आगे धान खरीदी, बीमा, एवं अन्य कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होगा।

पराली जलाने से प्रदूषण बढ़ा, पंजाब में अब तक 266 FIR और 17 लाख का जुर्माना लगाया गया

तरनतारन  पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिली है. पराली जलाने के कारण पर्यावरण पर इसका असर हो रहा है. पंजाब के कई शहरों में पराली जलाने के कारण AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) भी बढ़ रहा है. ताजा जानकारी के मुताबिक, पराली जलाने वाले किसानों पर अब तक 16 लाख से ज्यादा का जुर्माना तक लगा दिया गया है लेकिन फिर भी इन मामलों में कमी नहीं है. पराली जलाने का मुख्य कारण रबी की फसल के लिए खेत जल्दी तैयार करना माना जाता है. इन मामलों के पीछे पारंपरिक आदतें और जागरूकता की कमी भी है. जुर्माने के बावजूद पराली के मामलों में तेजी  इस सीजन में सबसे अधिक पराली जलाने के मामले सामने आए हैं. रविवार को 122 नए मामलों आए हैं. इन मामलों के साथ पंजाब में इस सीजन पराली जलाने के कुल मामले 743 हो गए हैं. पंजाब के तरनतारन जिले में अब तक 224 मामले सामने आए हैं और ये जिला पराली जलाने में टॉप पर है. इसके बाद अमृतसर में अब तक कुल 154 मामले सामने आ चुके हैं. वहीं, पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ अब तक 16 लाख 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है और 266 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है और 296 मामलों में किसानों की जमीन के रेवेन्यू रिकॉर्ड में रेड एंट्री भी की गई है.  पराली जलाने का AQI पर असर पिछले 6 दिन में ही पराली जलाने के कुल 328 मामले पंजाब में सामने आए हैं. बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में धान की कटाई तेजी से होगी ऐसे में इन मामलों की संख्या और ज्यादा बढ़ सकती है. इन पराली जलाने के मामलों से लगातार पंजाब के कई शहरों का AQI बेहद खराब हो रहा है. रविवार को जालंधर का AQI 439, बठिंडा का 321, लुधियाना का 260, अमृतसर का 257, पटियाला का 195 और मंडी गोबिंदगढ़ का AQI 153 रिकॉर्ड किया गया.