चंडीगढ़.
पीजीआई की न्यू ओपीडी और कार्डियक सेंटर में बनी कैंटीन में ठेकेदारों की ओर से पानी की बोतलों पर एमआरपी बढ़ाकर लोगों से लूट का खेल चल रहा है। मरीजों व तीमारदारों पहले की इलाज के चलते पैसों की किल्लत झेल रहे होते हैं, लेकिन मजबूरी का फायदा उठा कर कैंटीन संचालक उनकी जेब पर सेंधमारी कर रहे है।
न्यू ओपीडी और कार्डियक सेंटर में बनी कैंटीन में 20 रुपये की पानी की बोतल पर 30 रुपये वसूले जा रहे हैं। पूरे शहर में पानी की बोतल 20 रुपये में उपलब्ध है और ऑनलाइन 15 रुपये में उपलब्ध है।
इस प्रकार के कई मामलों की शिकायतें पीजीआई प्रशासन के पास पहुंच चुकी है, लेकिन कैंटीन संचालकों पर किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। हर दिन पीजीआई में इलाज के लिए पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों से 12 से 15 हजार मरीज आते हैं। मरीजों के साथ ही तीमारदारों की संख्या भी इतनी ही है। यानी हर दिन अस्पताल में 28 से 30 हजार लोग आ रहे हैं। ऐसे में कैंटीन संचालकों की ओर से हजारों लोगों को लूटने का काम किया जा रहा है।
बाहर से आने वाले लोगों को आस पास खाने पीने का सामान कहा मिलेगा इसकी जानकारी नहीं होती है, इसका फायदा उठाकर ही कैंटीन संचालक लोगों की जेब पर डाका डाल रहे है। ओवरचार्जिंग के बहुत सारे वीडियो इंटरनेट पर भी वायरल हो चुके है।
प्रिंट रेट पर पानी बेचा जा रहा-
वीडियो बनाने वाले लोग फ्री बहुत है। 20 रुपये प्रिंट रेट वाली बोतल के 20 और 30 रुपए वाली प्रिंट वाली बोतल के 30 रुपये लिए जा रहे है। पीजीआइ के टेंडर के मुताबिक प्रिंट रेट पर पानी बेचा जा रहा है।
-पवन छाबड़ा, कैंटीन संचालक, कार्डियक सेंटर, पीजीआई
प्रीमियम पानी है –
20 रुपये में बिकने वाला पानी सामान्य पानी है, जो हर जगह 20 का ही मिलता है। इसके साथ जो पानी की बोतल 30 रुपये की बेची जा रही है। वही प्रीमियम पानी है।
-धीरज धवन, कैंटीन संचालक, न्यू ओपीडी, पीजीआई
ब्रांच को कार्रवाई के दिए निर्देश-
मामला संज्ञान में आ गया है। संबंधित ब्रांच को कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिए गए है। नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-पंकज राय, डिप्टी डायरेक्टर, पीजीआई
विक्रेता के खिलाफ की जा सकती है कार्रवाई –
उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ एडवोकेट संदीप भारद्वाज बताते हैं कि किसी भी उत्पाद की मूल एमआरपी या लेबल में बदलाव कर अधिक कीमत वसूलना उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आ सकता है। ऐसे मामलों में खरीद का बिल सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य होता है। हर उपभोक्ता को खरीदारी के समय बिल अवश्य लेना चाहिए और उस पर दर्ज कीमत का मिलान उत्पाद पर अंकित एमआरपी से करना चाहिए। यदि अधिक कीमत वसूली गई है तो बिल और उत्पाद की फोटो सुरक्षित रखकर उपभोक्ता आयोग या संबंधित विभाग में शिकायत की जा सकती है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।





