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सीएम योगी ने यूपी को 3 महीने में दी 62 हजार करोड़ से अधिक की 5,551 परियोजनाओं की सौगात

लखनऊ  बीते 9 साल से निरंतर विकास की बुलंदियों को छू रहा उत्तर प्रदेश नित नए कीर्तिमान रच रहा है। यदि वित्तीय वर्ष 2026-27 की बात करें तो पहली तिमाही में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निरंतर जनपदों के दौरे कर विकास की सौगात दे रहे हैं। वे पूर्वांचल, पश्चिमांचल, बुंदेलखंड, मध्याचंल समेत प्रदेश के सभी जनपदों को विकास से जोड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अप्रैल, मई और जून के दौरान प्रदेशभर में आधारभूत ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन, खेल, शहरी विकास, ग्रामीण विकास और कनेक्टिविटी से जुड़ी 5,551 से अधिक विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं पर 62,282 करोड़ से अधिक रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जो प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाती है। सीएम योगी ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में विकास केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर तेजी से क्रियान्वित हो रहा है। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।  हर क्षेत्र में विकास की समान गति इन तीन महीनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में सड़क, पुल, मेडिकल कॉलेज, खेल अवसंरचना, औद्योगिक पार्क, नगर विकास, शिक्षा, पेयजल, पर्यटन और डिजिटल सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं की शुरुआत की गई। योगी सरकार ने केवल बड़े शहरों पर ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्र के जिलों में भी विकास कार्यों को समान प्राथमिकता दी। गंगा एक्सप्रेसवे पर दौड़े विकास के पहिए, जेवर से हुई प्रगति की उड़ान इस अवधि की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले गंगा एक्सप्रेसवे व नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर का लोकार्पण रहा। मेरठ से प्रयागराज तक प्रदेश को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा। वहीं नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर से भी प्रगति की उड़ान हुई। एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले किसान पहली फ्लाइट में बैठकर लखनऊ पहुंचे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संवाद भी किया।  शिक्षा और तकनीक पर विशेष जोर योगी सरकार ने नई शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक तकनीकी शिक्षा को भी प्राथमिकता दी। गोरखपुर में पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत की गई, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और थ्री-डी प्रिंटिंग जैसे भविष्य की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुजफ्फरनगर में भी सेंटर ऑफ इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड ट्रेनिंग की स्थापना के माध्यम से युवाओं को नई तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। स्वास्थ्य सेवाओं का हुआ विस्तार योगी सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए भी अनेक परियोजनाओं की शुरुआत की। ललितपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित स्वास्थ्य अवसंरचना से जुड़ी कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया। विभिन्न जिलों में अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया गया। उद्योग और निवेश को नई ऊर्जा ललितपुर में 1,500 एकड़ में उत्तर प्रदेश का पहला फार्मा पार्क विकसित करने की घोषणा राज्य के औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं विभिन्न जिलों में औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक सुविधाओं और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के माध्यम से निवेश के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को मिला बढ़ावा प्रदेश सरकार पर्यटन विकास को भी प्राथमिकता दे रही। संतकबीर नगर में तामेश्वरनाथ धाम कॉरिडोर, बाबा बैजूनाथ धाम के विकास और बखिरा झील को इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई। महोबा को एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई। इसके साथ ही प्रदेशभर में इको टूरिज्म को लेकर भी बड़े स्तर पर काम चल रहा है। खेल और शहरी सुविधाओं का विस्तार गोरखपुर में लगभग 393 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास किया गया, जिसमें 30 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी। वहीं नगर निगमों में आधुनिक सदन भवन, मल्टीलेवल पार्किंग, टू-लेन ब्रिज, ईको पार्क और अन्य शहरी सुविधाओं के विकास से नागरिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया। सामाजिक समरसता और जनकल्याण को भी प्राथमिकता लखीमपुर खीरी में बांग्लादेश से विस्थापित हिंदू परिवारों, पीलीभीत में हजारों बंगाली परिवारों को नागरिकता और भूमि अधिकार पत्र वितरित किए गए। इस तरह प्रदेश में कई अवसरों पर लोगों को नियुक्ति पत्र व अन्य सुविधाओं से जुड़े पत्र भी वितरित किए गए। वहीं श्रमिक कल्याण योजनाओं, कल्याण मंडपम और अन्य जनसुविधाओं के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया। विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव इसी तरह रामपुर, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, उन्नाव, आजमगढ़, कुशीनगर, गोंडा, बलरामपुर, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़, हाथरस, फिरोजाबाद, ललितपुर और अन्य जिलों में सैकड़ों विकास परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में जिस गति से हजारों विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ, उससे स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में विकास अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर तेजी से क्रियान्वित हो रहा है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, पर्यटन, खेल और शहरी विकास जैसे लगभग सभी क्षेत्रों में एक साथ हो रहे निवेश प्रदेश को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं। एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के तहत सीएम योगी आदित्यनाथ स्वयं लोकार्पण और शिलान्यास से जुड़ी सभी परियोजनाओं को निगरानी करते आ रहे हैं। वहीं एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर, फार्मा पार्क और औद्योगिक क्लस्टर जैसी आधारभूत परियोजनाओं के साथ निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। कृषि, एमएसएमई, पर्यटन, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी जा रही है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने, रोजगार सृजन, कौशल विकास और बेहतर कानून-व्यवस्था के माध्यम से उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य तेज आर्थिक विकास के साथ प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना है। सीएम योगी द्वारा अप्रैल, मई-जून में किए गए प्रमुख लोकार्पण व शिलान्यास अप्रैल-  5 अप्रैल: गोरखपुर-बंधु सिंह पार्क में बने मल्टीलेवल पार्किंग कॉम्प्लेक्स के साथ घंटाघर … Read more

Aaj Ka Rashifal 1 July 2026: बुधवार का दिन किन राशियों के लिए रहेगा शुभ? जानें करियर, धन और प्रेम का हाल

मेष राशि- खुली बातचीत और समझ के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करें। फालतू तनाव से बचने के लिए फाइनेंशियल मैनेजमेंट पर ध्यान दें। सेहत के लिहाज से, हेल्दी लाइफस्टाइल बनाए रखने से आपका एनर्जी लेवल अच्छा रहेगा। हर दिन को क्लियरिटी के साथ देखें। वृषभ राशि- संतुलन और विकास पर ध्यान केंद्रित करने का समय है। करियर और पर्सनल जीवन में उन्नति के अवसर खुद ही सामने आते हैं, लेकिन सोच-समझकर डिसीजन लेने की आवश्यकता होती है। मिथुन राशि- नई संभावनाओं के लिए खुले रहें, लेकिन फैसले लेने में जल्दबाजी न करें। व्यक्तिगत संबंधों की बात करें तो खुद की सुनें। याद रखें, छोटे कदम महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं। कर्क राशि- अपनी आदतों को बदलाव करके और तनाव के लेवल के प्रति सचेत रहकर अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। आपका ध्यान वर्क लाइफ बैलेंस बनाए रखने पर होना चाहिए। आराम के लिए समय को प्राथमिकता दें। सिंह राशि- प्रोफेशनल रूप से, बदलावों के लिए तैयार रहें। नई स्किल्स सीखने के लिए तैयार रहें। वित्तीय रूप से, यह आपके खर्च और बचत की आदतों पर गौर करने का ये अच्छा समय है। कन्या राशि- दिन वित्तीय रूप से स्टेबिलिटी बनाने के लिए सावधानी बरतें। आपको अपने पर्सनल और पेशेवर जीवन में नए मौके तलाशने पर फोकस करना होगा। आप अपने करीबियों के साथ अपने कनेक्शन को मजबूत होते हुए पा सकते हैं। तुला राशि- खुद को ऐसी सिचूऐशन में पाएंगे, जो पर्सनल व प्रोफेशनल ग्रोथ की ओर ले जाएगी। रिश्तों को स्ट्रॉंग बनाने के लिए ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। पेशेवर रूप से, यह आगे बढ़ने और नए अवसरों की खोज करने का समय है। वृश्चिक राशि- आर्थिक रूप से खर्चों को लेकर सतर्क रहें और बड़ा निवेश करने से पहले दो बार सोचें। वित्तीय संतुलन बनाए रखने और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने पर आपको फोकस करना चाहिए। धनु राशि- धन और स्वास्थ्य पर नजर रखें। कुंभ राशि वालों को संतुलन पर जोर देने की जरूरत है। रिश्तों में ईमानदारी बहुत जरूरी है। पेशेवर तौर पर तनाव को मैनेज करना और कार्यों को प्रभावी ढंग से प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है। मकर राशि- अपने निजी और पेशेवर जीवन में संतुलन पर ध्यान देना चाहिए। बदलाव को अपनाने, रिश्तों को बेहतर बनाने और करियर में विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मोटिवेट किया जाता है। कुंभ राशि- अपने करियर में बदलावों को खुले दिमाग से अपनाएं, क्योंकि नए बिजनेस अप्रत्याशित सफलता की ओर ले जा सकते हैं। आपका वित्तीय दृष्टिकोण बेहतर होगा, लेकिन योजना बनाना और उसके अनुसार बजट बनाना बुद्धिमानी होगी। मीन राशि- प्यार के मामलों में, संचार बंधन को मजबूत करने की कुंजी होगी। अपनी एनर्जी लेवल को स्टेबल रखने के लिए संतुलित दिनचर्या को शामिल करके अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना याद रखें।

नई पीढ़ी को संस्कृत और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और जीवन मूल्यों को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में भारतीयता का समावेश विकसित भारत की सुदृढ़ आधारशिला है। भारतीय संस्कृति, संस्कार और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन से आत्मनिर्भर, संस्कारित और विकसित भारत का निर्माण होगा। राज्यपाल  पटेल मंगलवार को उज्जैन की कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में पीएचडी की 21 उपाधियों के साथ ही कुल 1 हजार 303 उपाधियां प्रदान की गई। विद्यार्थियों को 16 स्वर्ण पदक, 13 रजत पदक तथा 13 कांस्य पदक, कुल 42 पदक प्रदान किए गए। राज्यपाल  पटेल ने विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित विभिन्न पुस्तकों का विमोचन किया। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि प्राचीन काल में शिक्षा का केन्द्र हमारा देश था। विदेशों से अध्ययन के लिए विद्यार्थी आते थे। आज हमारे बच्चे विदेश जा रहे है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा से विकसित भारत @2047 बनाने की पहल की है। विकसित भारत में बच्चों को शिक्षा के लिए विदेश नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने विश्वविद्यालयों से अपेक्षा है कि संस्कृत की पहचान विश्व में स्थापित करने की दिशा में प्रभावी पहल करें क्योंकि अच्छे संस्कारों के अंकुरण से ही संस्कृति का रक्षण संभव है। आज की पीढ़ी को संस्कृत और परंपराओं के ज्ञान की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्राचीन ज्ञान का बोध संस्कृत के माध्यम से ही संभव हो सकता है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के महान ग्रंथों के अध्ययन के लिए बच्चों को प्रेरित और संस्कारित आचरण की वैज्ञानिकता के बारे में बताने की भी जरूरत बताई है। राज्यपाल  पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में सफलता के बाद भी अपने माता-पिता को कभी नहीं भूलें, क्योंकि उनकी बदौलत ही हमारा जीवन है। राज्यपाल  पटेल ने माता-पिता के प्रति सम्मान, भारतीय परंपराओं के प्रति आस्था तथा चरित्र निर्माण को जीवन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज घरों में ‘मातृ छाया’ और ‘पितृ छाया’ लिखा तो होता है, लेकिन घरों में बुजुर्ग माता-पिता नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे संस्कारों से ही संस्कृति सुरक्षित रहती है। संस्कृति संरक्षण से ही भारत को विकसित बनाने का स्वप्न साकार होगा। भारत होगा दुनिया को उर्जा की पूर्ति करने वाला केंद्र उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और मान्यताओं को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति की वैज्ञानिकता को समझा था। उदाहरण देते हुए बताया कि सौर मंडल में सूर्य की शक्ति की वैज्ञानिकता का प्रतीक सूर्य देव को प्रणाम करने और अर्ध्य देने की परंपराएं है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में उर्जा को लेकर विवाद हो रहा है। वर्ष 2047 तक भारत दुनिया की उर्जा पूर्ति का केन्द्र और विश्व गुरु बनेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा में शामिल करने में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है। समारोह में महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठानम् पुणे के संस्थापक स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज को महामहोपाध्याय (डी.लिट.) और  लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय को विद्यावाचस्पति (डी.लिट.)की मानद उपाधि प्रदान की गई। कार्यक्रम में दीक्षांत भाषण सारस्वत अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति निवास वरखेड़ी ने दिया। कार्यक्रम को स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने भी संबोधित किया। कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र ने स्वागत भाषण देते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियां बताई। समारोह का संचालन डॉ. उपेंद्र भार्गव ने किया और आभार कुल सचिव डॉ. दिलीप सोनी ने माना। समारोह के प्रारंभ में अकादमिक शोभायात्रा निकाली गई। राष्ट्रगान, विश्वविद्यालय कुलगान का गायन हुआ। राज्यपाल सहित सभी अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। दीक्षांत समारोह में सांसद  अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बाल योगी संत  उमेश नाथ महाराज, विधायक  अनिल जैन कालूहेडा, कार्य परिषद् के सदस्य  गौरव धाकड़, डॉ. विश्वास व्यास, डॉ. हरीश व्यास, एडवोकेट गीतांजलि चौरसिया, डॉ. केशर सिंह चौहान एवं विश्वविद्यालय के समस्त संकायाध्यक्ष और विद्यार्थी उपस्थित थे।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभियान को मिली बड़ी सफलता, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के जनस्वास्थ्य संकल्प को मिला बल

रायपुर   प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा 28 फरवरी 2026 को प्रारंभ किए गए राष्ट्रव्यापी निःशुल्क एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। महिलाओं को भविष्य में गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से संचालित इस अभियान में जिले ने 8,785 लक्ष्य आबादी के विरुद्ध 7,931 बालिकाओं का टीकाकरण कर 90 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनस्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रही है। इसी प्रतिबद्धता के अनुरूप बलरामपुर-रामानुजगंज जिले ने एचपीवी टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में अग्रणी स्थान हासिल किया है। कलेक्टर मती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग तथा मैदानी अमले के समन्वित प्रयासों से अभियान को व्यापक जनसहभागिता मिली। दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंच बनाकर पात्र बालिकाओं का टीकाकरण सुनिश्चित किया गया। कलेक्टर मती चंदन संजय त्रिपाठी ने इस उपलब्धि पर सभी संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई देते हुए शत-प्रतिशत एचपीवी टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए छूटी हुई प्रत्येक पात्र बालिका तक पहुंच बनाने के निर्देश दिए हैं। दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों वाला बलरामपुर-रामानुजगंज जिला आज राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन का उदाहरण बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के जनकल्याणकारी विजन, मजबूत प्रशासनिक नेतृत्व, विभागीय समन्वय और जनसहभागिता से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा रहे हैं।

सीएम योगी की मंशा के अनुरूप उपस्थिति का तैयार होगा रोस्टर, आय- जाति- निवास प्रमाणपत्र व खतौनी आदि के लिए होगा त्वरित निस्तारण

लखनऊ योगी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिकों को राजस्व संबंधी सेवाएं अधिक सुगम और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप अब प्रत्येक जनपद में लेखपालों की ग्राम सचिवालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। इसको लेकर राजस्व परिषद की ओर से सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी किया गया है। पत्र में रोस्टर तैयार कर 1 जुलाई से नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।  ग्रामीणों को नहीं लगाने पड़ेंगे तहसीलों के बार-बार चक्कर  राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लगातार प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवाओं को गांव स्तर तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में प्रत्येक जनपद में लेखपालों की ग्राम सचिवालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों में पहले से स्थापित ग्राम सचिवालयों का उद्देश्य विभिन्न विभागों की सेवाओं को ग्रामीणों तक एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। पंचायतीराज विभाग के पूर्व आदेशों के अनुरूप ग्राम सचिवालयों में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था की गई है। अब इसी व्यवस्था को और प्रभावी बनाते हुए लेखपालों की नियमित उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि राजस्व विभाग से संबंधित कार्यों का त्वरित निस्तारण हो सके। बता दें कि ग्राम सचिवालयों के माध्यम से पंचायत सहायकों द्वारा संचालित ऑनलाइन सेवाओं में राजस्व विभाग की कई महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। इनमें आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, हैसियत प्रमाणपत्र, खतौनी की नकल सहित लगभग दस प्रमुख सेवाएं शामिल हैं। इन सेवाओं के समयबद्ध निस्तारण में लेखपाल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में ग्राम सचिवालय में उनकी नियमित उपलब्धता से ग्रामीणों को तहसील के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता काफी हद तक कम होगी। ग्राम स्तर पर लेखपालों के बैठने के लिए कोई निश्चित व्यवस्था नहीं होने से लोग होते थे परेशान  राजस्व परिषद ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि लेखपाल केवल प्रमाण पत्रों से जुड़े कार्य ही नहीं करते, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की मजबूत कड़ी के रूप में भी कार्य करते हैं। तहसील दिवस, थाना दिवस, वरासत, स्वामित्व योजना, किसान सम्मान निधि, राहत एवं पुनर्वास, आपदा प्रबंधन, भूमि विवादों का निस्तारण, कृषि गणना, जनगणना, फसल गिरदावरी, प्राकृतिक आपदाओं की रिपोर्ट, अवैध कब्जों की जांच, खनन संबंधी सत्यापन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े सत्यापन तथा धान-गेहूं क्रय केंद्रों के सत्यापन जैसे अनेक महत्वपूर्ण दायित्व भी लेखपाल निभाते हैं। इसके अलावा विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में भी लेखपालों की रिपोर्ट और सत्यापन की आवश्यकता पड़ती है। वहीं ग्राम पंचायत स्तर पर लेखपालों के बैठने के लिए कोई निश्चित व्यवस्था नहीं होने के कारण आम जनता को असुविधा का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों को कई बार लेखपाल से मिलने के लिए तहसील या अन्य स्थानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है। इस समस्या को समाप्त करने के उद्देश्य से अब प्रत्येक जनपद में रोस्टर बनाकर लेखपालों की ग्राम सचिवालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है। 1 जुलाई से लागू होगी व्यवस्था राजस्व परिषद ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे अपने-अपने जनपदों में लेखपालों के बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें और उनकी उपस्थिति का रोस्टर निर्धारित करें। यह व्यवस्था 1 जुलाई से प्रभावी रूप से लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था से ग्राम सचिवालय ग्रामीणों के लिए 'वन स्टॉप सर्विस सेंटर' के रूप में विकसित होंगे। इससे न केवल आमजन को राहत मिलेगी, बल्कि राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली भी अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।

1 जुलाई 2026 से देशभर में लागू होगी योजना, ग्रामीण परिवारों को मिलेगा 125 दिनों के रोजगार की गारंटी

रायपुर  देशभर में 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना लागू हो रही है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका संवर्धन और आधारभूत विकास को नई गति देने के उद्देश्य से प्रारंभ की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत -2047 के विज़न को साकार करने की दिशा में ग्रामीण भारत को सशक्त, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाना है। योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण, आजीविका संवर्धन और गांवों के समग्र विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। राज्य के बजट में 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान       योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को मांग के आधार पर वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना विकास, कृषि आधारित कार्य, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका संवर्धन जैसे टिकाऊ कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। विकसित ग्राम की परिकल्पना को साकार करने के लिए योजना में कुल 318 प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2026-27 के बजट में 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 2 जुलाई को होगा शुभारंभ          छत्तीसगढ़ में योजना के शुभारंभ एवं क्रियान्वयन को लेकर पूरे प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 2 जुलाई 2026 को तिरुपति, आंध्रप्रदेश से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाएगा, जिसमें वे देश के विभिन्न राज्यों से संवाद करेंगे। प्रदेश में यह कार्यक्रम कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ग्रामीणों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़कर संवाद करेंगे। ग्राम सभा की भूमिका होगी सशक्त  इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी मिलेगी, 15 दिवस के भीतर मजदूरी भुगतान की व्यवस्था होगी, कार्य उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते का भी प्रावधान किया गया है। इसी तरह डिजिटल जॉब कार्ड एवं तकनीक आधारित कार्य प्रबंधन प्रणाली, समयबद्ध एवं पारदर्शी भुगतान व्यवस्था के साथ ग्राम सभा की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाया गया है। ग्राम सभा द्वारा तैयार की जाएगी पंचायतों के विकास कार्यों की कार्ययोजना              वीबी जीरामजी में जल संरक्षण, सिंचाई, ग्रामीण सड़क, वृक्षारोपण एवं टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। इस योजना से ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल विकास एवं आजीविका के नए अवसर प्रदान करेगी। सामाजिक अंकेक्षण एवं डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता में भी वृद्धि होगी। नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की कार्ययोजना ग्राम सभा के माध्यम से तैयार की जाएगी, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों का चयन किया जा सकेगा।        विकसित भारत-जी राम जी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और गांवों में विकास की स्थायी आधारशिला तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने का माध्यम बनेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति की बैठक, उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन प्रक्रिया में 156 खिलाड़ी पात्र

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज उनके निवास कार्यालय में उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में उपमुख्यमंत्री  अरुण साव सहित समिति के सदस्यों ने वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 के लिए प्राप्त आवेदनों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया तथा सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन को अंतिम स्वरूप प्रदान किया। इनमें 20 अलग-अलग खेलों के खिलाड़ी शामिल हैं।  बैठक में अनुमोदित 156 खिलाड़ियों की सूची को सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इसे अधिसूचित करने के बाद खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में लेने के लिए आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ होगी। राज्य के खिलाड़ी लंबे समय से इस सूची की प्रतीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री  साय की अध्यक्षता में आज हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद खिलाड़ियों का यह इंतजार जल्द समाप्त हो जाएगा। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए पारदर्शी, समयबद्ध और प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि चयनित उत्कृष्ट खिलाड़ियों को पात्रता के अनुरूप उन्हें शासकीय सेवा में नियुक्ति दिलाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया और व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन खिलाड़ियों का अनुभव और उपलब्धियां प्रदेश की नई खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, इसलिए उनकी सेवाओं का उपयोग खेल प्रशिक्षण, प्रतिभा संवर्धन और खिलाड़ियों के मार्गदर्शन में भी किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल खिलाड़ियों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि ऐसी मजबूत खेल व्यवस्था विकसित करना है, जहां गांव से लेकर राज्य स्तर तक प्रतिभाओं की समय रहते पहचान हो, उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने अधिकारियों से खेल गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने तथा खेल प्रतिभाओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में खेलों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। खेल अधोसंरचना के विस्तार, आधुनिक सुविधाओं के विकास तथा नई खेल अकादमियों की स्थापना की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य ऐसे उत्कृष्ट खिलाड़ी तैयार करना है जो राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि आज चयनित खिलाड़ी भविष्य में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर प्रदेश में खेल संस्कृति को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बैठक में बताया गया कि राज्य में अब तक 182 उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किए जा चुके हैं। इसी क्रम में वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 के लिए पूर्व में विज्ञापन जारी कर आवेदन आमंत्रित किए गए थे। प्राप्त आवेदनों के परीक्षण और निर्धारित मानकों के आधार पर 156 खिलाड़ियों को पात्र पाया गया। बैठक में वन मंत्री  केदार कश्यप, मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव  अविनाश चंपावत, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव  यशवंत कुमार तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक  तनुजा सलाम उपस्थित थीं।

भोपाल मेट्रो परियोजना के स्टेकहोल्डर्स की कोऑर्डिनेशन बैठक हुई

भोपाल भोपाल मेट्रो परियोजना प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसके समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए सभी विभागों का आपसी समन्वय अत्यंत आवश्यक है। विभागीय स्तर पर लंबित प्रकरणों का त्वरित निराकरण करते हुए आपसी समन्वय के साथ कार्यों में गति लाई जाए जिससे नागरिकों को शीघ्र आधुनिक, सुरक्षित एवं सुगम मेट्रो परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त  संकेत भोंडवे ने मंगलवार को भोपाल मेट्रो रेल परियोजना के सुचारू संचालन के लिये विभिन्न विभागों के साथ स्टेकहोल्डर्स कोऑर्डिनेशन बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजना की सफलता सामूहिक उत्तरदायित्व और अंतर-विभागीय सामंजस्य पर ही निर्भर है। आयुक्त  भोंडवे द्वारा मेट्रो परियोजना के निर्माण कार्यों की भौतिक प्रगति की विस्तृत समीक्षा और विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। विभागीय कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आयोजित बैठक में मेट्रो परियोजना से संबंधित बुनियादी अधोसंरचना जैसे सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्यों, जल निकासी तथा ड्रेनेज की सघन सफाई पर विस्तार से चर्चा हुई। वर्षा ऋतु के दृष्टिगत संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों में नागरिकों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक प्रबंध समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही परियोजना के मार्ग में आने वाले अतिक्रमणों को हटाने, सीवर एवं पेयजल पाइपलाइन की शिफ्टिंग, विभिन्न उपयोगिता सेवाओं (यूटिलिटी सर्विसेज) के त्वरित स्थानांतरण तथा होर्डिंग्स एवं वृक्षों के वैज्ञानिक विस्थापन जैसे महत्वपूर्ण विषयों की भी गहन समीक्षा की गई। आयुक्त  भोंडवे ने लंबित कार्यों के शीघ्र निस्तारण के लिए संबंधित विभागों को तत्परता से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जिससे निर्माण कार्य में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो। उन्होंने निर्माण अवधि के दौरान सुगम यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच संवाद को अधिक जीवंत व निरंतर बनाए रखने पर विशेष बल दिया। बैठक में भोपाल मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के वरिष्ठ अधिकारियों सहित आयुक्त नगर निगम भोपाल, जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, पुलिस विभाग, विद्युत विभाग, एनएचएआई एवं एमएसएमई विभाग के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहें।  

पुलिस मुख्यालय परिवार द्वारा 11 सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों को दी गई भावभीनी विदाई

भोपाल  पुलिस मुख्‍यालय की विभिन्‍न शाखाओं से माह जून में सेवानिवृत्‍त 11 कर्मचारियों को पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने मंगलवार  को भावभीनी विदाई दी। पुलिस महानिदेशक ने सभी को पौधे एवं स्मृति चिन्ह भेंट किए और उनके स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना की। सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों को उनके विभिन्‍न स्‍वत्‍व (क्‍लेम) भुगतान के आदेश भी प्रदान किए गये। नवीन पुलिस मुख्‍यालय भवन कॉन्‍फ्रेंस हॉल में आयोजित विदाई समारोह में विशेष पुलिस महानिदेशक श्री आदर्श कटियार,  श्री पंकज श्रीवास्‍तव,  अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक सोलोमन यश कुमार मिंज, पुलिस महानिरीक्षक श्री हरिनारायणचारी मिश्र एवं अन्‍य पुलिस अधिकारी, कर्मचारी एवं सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों के परिजन उपस्थित थे। पुलिस मुख्‍यालय से सेवानिवृत्‍त उप पुलिस अधीक्षक अ.अ.वि.  शहनाज खान, निरीक्षक विशेष शाखा श्री प्रकाश नारायण लाम्‍बे, कार्यवाहक निरीक्षक एससीआरबी श्री संतोष कुमार सेन, कार्यवाहक आंकिक/सूबेदार (एम) प्रशिक्षण श्री जुल्फिकार अली खान, आंकिक/सूबेदार (एम) कार्मिक  सुमन अमोली, उप निरीक्षक अ.अ.वि. श्री आनंदीलाल, उप निरीक्षक अ.अ.वि. श्री भानसिंह यादव, उप निरीक्षक एससीआरबी श्री प्रकाश राजपूत, उप निरीक्षक (एम)  अ.अ.वि.  स्मिता दाणी, कार्यवाहक उप निरीक्षक विशेष शाखा श्री राजेन्‍द्र प्रसाद निगम तथा आरक्षक (एम) रा.औ.सु.बल सुश्री सुषमा रैकवार को पुलिस मुख्‍यालय परिवार ने मंगलवार को भावभीनी विदाई दी। सहायक पुलिस महानिरीक्षक  अंशुमान अग्रवाल ने सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों के कार्यकाल की जानकारी दी। विदाई समारोह में मौजूद अधिकारियों ने सेवानिवृत कर्मचारियों की मेहनत और लगन की सराहना की।  

प्रधानमंत्री के कार्यकाल पर उठा बड़ा सवाल, MP हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब; 3 अगस्त तक का समय

इंदौर  एक व्यक्ति को एक ही बार प्रधानमंत्री बनाया जाए। देश में वन नेशन-वन पोस्ट की व्यवस्था लागू की जाए। इस मांग के साथ हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सोमवार को जस्टिस संजीव एन. भट्ट की कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने नोटिस जारी कर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह याचिका आलीराजपुर के 70 वर्षीय वकील डॉ. शंकरलाल वागवान ने एमपी हाईकोर्ट इंदौर में दायर की है। याचिका में एक व्यक्ति को एक ही बार PM बनने का आदेश जारी करने की मांग याचिका में उन्होंने केंद्रीय चुनाव विभाग, कानून मंत्री और प्रधानमंत्री को पार्टी बनाया है। इसमें भारतीय संविधान के अनुच्छेदों का उल्लेख करते हुए हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि सभी व्यक्तियों को समानता का अधिकार है। ऐसे में सभी को एक बार देश का प्रधानमंत्री और देश का गृहमंत्री बनने का भी अधिकार है। यह तय करने के लिए कोर्ट वन नेशन-वन पोस्ट को लागू करते हुए एक व्यक्ति को केवल एक बार ही देश का प्रधानमंत्री बनने का आदेश जारी करे। पहले भी लगाई जा चुकी है याचिका बता दें कि इससे पहले भी इससे पूर्व भी उन्होंने याचिका दायर की थी, लेकिन याचिका में डिफेक्ट दूर करने के निर्देश दिए गए थे। डिफेक्ट दूर नहीं करने के चलते याचिका खारिज कर दी गई थी। उसी याचिका को दोबारा रिस्टोर करने के लिए यह याचिका दायर की गई है। सोमवार को याचिकाकर्ता ने अपनी मांग कोर्ट के समक्ष रखी। इस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने कानून मंत्रालय और प्रधानमंत्री को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने 3 अगस्त तक का समय दिया है। इसके बाद के सप्ताह में कोर्ट इस मामले की दोबारा सुनवाई करेगी। क्या भारत में प्रधानमंत्री कार्यकाल की कोई सीमा है? भारतीय संविधान में प्रधानमंत्री का कार्यकाल तो 5 साल का है, लेकिन एक ही व्यक्ति कितनी बार प्रधानमंत्री बनेगा ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसके चलते एक ही व्यक्ति कई बार प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। दरअसल जब किसी व्यक्ति को जब लोकसभा से लगातार बहुमत से समर्थन मिलता रहे तो वह कितनी भी बार प्रधानमंत्री पद ग्रहण कर सकता है। भारतीय संविधान में केवल प्रधानमंत्री की आयु, संसद की सदस्यता और बहुमत के समर्थन जैसी ही शर्तें रखी गई हैं। यही कारण है कि कई नेता कई बार प्रधानमंत्री पद संभालते रहे हैं। दुनिया के वो देश जहां भारत जैसी है प्रधानमंत्री कार्यकाल की स्थिति एक्सपर्ट्स की मानें तो संसदीय लोकतंत्र वाले ज्यादातर देशों में प्रधानमंत्री के कार्यकाल की कोई सीमा तय नहीं है। अगर भारत एक बार एक प्रधानमंत्री जैसी व्यवस्था को लागू करना चाहता है तो इसके लिए संवैधानिक संशोधन सहित व्यापक स्तर पर कानूनी और संसदीय प्रक्रिया की जरूरत पड़ती है। उसके बाद ही यह व्यवस्था लाई जा सकती है।     ब्रिटेन भी ऐसा ही देश है जहां प्रधानमंत्री की संख्या या कार्यकाल की कोई संवैधानिक सीमा नहीं है।     कनाडा में भी एक व्यक्ति कितनी भी बार प्रधानमंत्री बन सकता है, बशर्ते की उसे संसद का विश्वास प्राप्त हो।     आस्ट्रेलिया में भी प्रधानमंत्री के कार्यकाल की कोई सीमा नहीं है।     जापान भी ऐसा ही देश है जहां प्रधानमंत्री के कार्यकाल की कोई सीमा नहीं है। फैक्ट फाइल किसने दायर की याचिका- डॉ. शंकरदयाल वागवान, 70 साल के अधिवक्ता, आलीराजपुर निवासी। क्या है मांग- इन्होंने हाईकोर्ट में दर्ज याचिका में मांग की है कि देश में किसी भी व्यक्ति को केवल एक ही बार प्रधानमंत्री और एक ही बार गृहमंत्री बनाए जाने का आदेश जारी किया जाए। पक्षकार- केंद्रीय चुनाव विभाग, कानून मंत्रालय और प्रधानमंत्री हाईकोर्ट का आदेश- कोर्ट ने नोटिस जारी किया, केंद्र सरकार से 3 अगस्त तक जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई- 3 अगस्त के बाद कोर्ट सुनवाई की तारीख तय करेगा।