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अमरनाथ यात्रा को लेकर हाई अलर्ट, खुफिया एजेंसियों ने आतंकी साजिश की आशंका जताई

श्रीनगर   आगामी अमरनाथ यात्रा को लेकर भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बिगड़ते हालात से ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अमरनाथ यात्रा के दौरान किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की कोशिश कर सकती है। इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होने जा रही है। चौतरफा मुश्किलों से घिरा है पाकिस्तान खुफिया अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के लिए इस समय पीओके, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की स्थिति बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर पीओके में जारी विरोध प्रदर्शनों ने इस्लामाबाद की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अधिकारियों का दावा है कि हाल ही में अफगानिस्तान में पाकिस्तान द्वारा किया गया हवाई हमला भी अंदरूनी दबाव से ध्यान भटकाने की कोशिश का हिस्सा था। इस हवाई हमले में 35 लोगों की मौत हुई। अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की आशंका क्यों? भारतीय एजेंसियों के मुताबिक, इंटरसेप्ट किए गए कुछ इनपुट से संकेत मिले हैं कि पाकिस्तान भारत में भी आतंकी हमले की साजिश रच रहा है। इसके लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई जम्मू-कश्मीर के जंगलों में छिपे कुछ आतंकियों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है। एजेंसियों का मानना है कि इन्हीं आतंकियों के जरिए अमरनाथ यात्रा के दौरान आतंकी हमले की साजिश रची जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान, इन आतंकियों को पहलगाम जैसा बड़ा हमले करने के निर्देश देने की कोशिश कर रहा है। अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने अमरनाथ यात्रा मार्ग पर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। पुलिस ने पूरे मार्ग पर आतंकवाद रोधी तंत्र को और मजबूत किया है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरे और अत्याधुनिक डिजिटल स्कैनिंग सिस्टम भी तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल नजर रखी जा सके। पंजाब भी निशाने पर? एक खुफिया अधिकारी के अनुसार, आईएसआई पिछले कुछ समय से पंजाब और जम्मू-कश्मीर में अपने मॉड्यूल को फिर से सक्रिय करने का प्रयास कर रही है। अधिकारी का दावा है कि पाकिस्तान चाहता है कि भारत में जल्द कोई बड़ी आतंकी घटना हो, ताकि पीओके और अन्य क्षेत्रों में बगावत के हालात से लोगों का ध्यान हटाया जा सके। पीओके के हालात से पाकिस्तान पर बढ़ रहा दबाव खुफिया अधिकारियों का कहना है कि पीओके में जारी विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं। वहां के लोग अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान के भीतर भी बड़ी संख्या में लोग पीओके के लोगों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं, जिससे वहां की सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान पर दबाव बढ़ता जा रहा है।   

गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों की हुई समीक्षा

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने मंगलवार को मंत्रालय में गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण की जाएं। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में लापरवाही और अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा दोषी एजेंसियों और ठेकेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि बावड़िया कला चौराहा (अपोलो सेज अस्पताल) से ऑशिमा मॉल तक प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण कार्य की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तथा इसी माह के अंत तक निर्माण कार्य प्रारंभ होने की संभावना है। इस पर राज्यमंत्री  गौर ने कार्य को गति देने के निर्देश दिए। उन्होंने बाबूलाल गौर सेतु, बावड़िया में प्रस्तावित मरम्मत एवं लेफ्ट टर्न निर्माण कार्य बारिश के बाद तत्काल प्रारंभ करने को कहा। पिपलानी से खजूरी रोड निर्माण कार्य की समीक्षा के दौरान बताया गया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी है तथा नाली निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। लंबे समय से लंबित इस परियोजना पर नाराजगी व्यक्त करते हुए  गौर ने संबंधित ठेकेदार की लापरवाही पर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। खेजड़ा बरामद पहुंच मार्ग के निर्माण कार्य की समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्देशित किया कि पहले सड़क निर्माण पूरा किया जाए, उसके बाद पोल शिफ्टिंग एवं विद्युत व्यवस्था से जुड़े कार्य किए जाएं। ग्लोबल स्किल पार्क के समीप पुलिया एवं अतिक्रमण के कारण मार्ग निर्माण बाधित होने पर पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में शीघ्र अतिक्रमण हटाकर निर्माण कार्य प्रारंभ कराने के निर्देश दिये। राज्यमंत्री  गौर ने पुलिस थाना बागसेवनिया से एचडीएफसी बैंक तक मार्ग, गुलमोहर से आकृति इको सिटी, अरविंद विहार कॉलोनी मार्ग, बागमुगालिया एक्सटेंशन मार्ग, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी कटारा हिल्स-गायत्री विहार-नंदगांव मार्ग, आदर्श नगर-प्रधान मंडपम-साधना एन्क्लेव मार्ग, कुंजन नगर फेस-1 से बागसेवनिया सीसी नहर रोड, अवधपुरी क्रिस्टल आइडियल गेट तक मार्ग, स्वर्ण जयंती पार्क से गुलमोहर मार्ग, बाबरिया चौराहे से विरासा हाइट्स मार्ग, अयोध्या बायपास से ग्राम कोलुआ करारिया मार्ग, एम्स अस्पताल से डीआरएम पहुंच मार्ग तथा साकेत नगर स्थित सागर पब्लिक स्कूल से 9 बीडीए कॉम्प्लेक्स तक क्षतिग्रस्त मार्ग के निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की भी विस्तृत समीक्षा की। राज्यमंत्री  गौर ने निर्देश दिए कि जिन कार्यों की स्वीकृति मिल चुकी है, उन्हें तत्काल प्रारंभ किया जाए और प्रगति पर सतत निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि जनसुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और तय समय-सीमा में कार्य पूर्ण कर जनता को राहत पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक में लोक निर्माण विभाग, नगर निगम तथा विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

एसआईआर प्रक्रिया झारखंड में शुरू, 29 जुलाई तक चलेगा मतदाता सत्यापन अभियान

रांची  झारखंड में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) आज से गणना चरण के साथ शुरू हो जाएगा। इस चरण में बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं के बीच गणना प्रपत्र (इन्यूमरेशन फार्म) वितरित करेंगे। मतदाताओं को आंशिक रूप से भरे हुए इस प्रपत्र में पिछले एसआईआर से संंबंधित जानकारी भरकर तथा हस्ताक्षर कर बीएलओ को लौटाना होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने सभी मतदाताओं से प्रपत्र मिलते ही आवश्यक जानकारी भरकर एवं हस्ताक्षर कर बीएलओ को लौटाने की अपील की है। यह कार्यक्रम 29 जुलाई तक चलेगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा है कि जब बीएलओ मतदाता के घर-घर जाएं तो मतदाताओं को विगत विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची से उनकी मैपिंग अवश्य सुनिश्चित करा लें। राज्य में एसआईआर कार्यक्रम में वर्ष 2003 में हुए एसआईआर की मतदाता सूची से मैपिंग की विवरणी को नागरिकता हेतु सुपीरियर दस्तावेज के रूप में माना गया है। जिन मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो जाएगी, उन्हें एसआईआर के क्रम में सामान्यतः कोई अन्य दस्तावेज नहीं देना होगा। उन्होंने कहा कि बीएलओ द्वारा मतदाताओं को आंशिक रूप से भरे हुए प्रपत्र की दो प्रति उपलब्ध कराई जाएगी।मतदाता एक प्रति अपने बीएलओ को देंगें और दूसरी प्रति पावती के रूप में अपने पास रखेंगे। जो भी मतदाता गणना प्रपत्र हस्ताक्षर कर लौटाएंगे, उनका नाम पांच अगस्त को प्रकाशित होनेवाली प्रारुप मतदाता सूची में होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि वैसे मतदाता जिनकी अभी भी विगत विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची से मैपिंग नहीं हुई है, वे बीएलओ को अपना विवरण बताकर मैपिंग करा लें। नए मतदाता पंजीकरण के लिए पूरी करें यह प्रक्रिया यदि आप नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना चाहते है और एक अक्टूबर 2026 तक आपकी आयु 18 वर्ष पूरी हो रही है, तो गणना चरण या दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान फॉर्म-6 भरकर अपने संबंधित बीएलओ को जमा करें। फॉर्म के साथ घोषणापत्र और आवश्यक दस्तवेज भी संलग्न करने होंगे। जन्मतिथि के आधार पर आवेदक को स्वयं का अथवा माता-पिता में से किसी एक या दोनों के दस्तावेज जमा करने होंगे। दस्तावेज के रूप में पिछले एसआईआर के दौरान तैयार मतदाता सूची का वह संबंधित पृष्ठ भी मान्य होगा, जिसमें माता-पिता का नाम दर्ज हो। ध्यान में रखें ये महत्वपूर्ण तारीखें     30 जून से 29 जुलाई तक बीएलओ द्वारा घर-घर भ्रमण कर मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा।     29 जुलाई तक मतदान केंद्रों का युक्तिकरण (रेशनलाइजेशन) होगा।     05 अगस्त को मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन होगा।     पांच अगस्त से चार सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि है।     पांच अगस्त से तीन अक्टूबर तक नोटिस फेज तथा दावा व आपत्तियों के निस्तारण की अवधि है।     सात अक्टूबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा। गलत घोषणा पत्र भरकर देने पर कानूनी कार्रवाई मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने यह भी कहा कि गणना प्रपत्र में गलत घोषणा पत्र भरकर जमा करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कानूनी रूप से दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि एक भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से नहीं छूटेंगे और एक भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में नहीं जुड़ेंगे। एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी एवं सहभागी है, प्रत्येक फेज की जानकारी सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों एवं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाता है। 74,329 बूथ लेवल एजेंट नियुक्त, सबसे अधिक भाजपा के एसआईआर को लेकर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा विभिन्न मतदान केंद्रों पर कुल 74,320 बीएलए-2 नियुक्त किए गए हैं। सबसे अधिक बीएलए-2 भाजपा द्वारा नियुक्त किए गए हैं। आप ने एक भी एजेंट नियुक्त नहीं किया है। वहीं, बसपा ने महज दो एजेंट नियुक्त किए हैं। सभी मतदान केंद्रों पर बीएलओ एवं बीएलए-2 की एसआईआर के दौरान बैठक की जानी है एवं इस बैठक के फोटो भी बीएलओ ऐप के माध्यम से ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए-2 से अपने बीएलओ के कार्यों में सहयोग करने की अपेक्षा की है। 82 प्रतिशत मतदाताओं की हो चुकी है मैपिंग     कुल मतदाता : 2,64,63,236     जिन मतदाताओं की हो गई मैपिंग : 2,17,20,731     जिनकी नहीं हुई है मैपिंग : 47,42,505     जितने प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी : 82.08 प्रतिशत किस राजनीतिक दल ने नियुक्त किए कितने बीएलए-2? आप : 00 बसपा : 02 भाजपा : 28,217 सीपीआईएम : 103 कांग्रेस : 19,153 आजसू पार्टी : 4,596 झामुमो : 19,269 राजद : 2,980 कुल : 74,320 शिकायत के लिए 1950 हेल्पलाइन पर करें संपर्क निर्वाचन विभाग के अनुसार, एसआईआर से संबंधित किसी भी शिकायत या जानकारी के लिए मतदाता 1950 हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं। इस कॉल सेंटर पर प्रतिदिन औसतन 25 से 30 शिकायतें प्राप्त हो रही है, जिनका त्वरित और प्रभावी ढंग से निस्तारण किया जा रहा है।  

देवास एवं खरगोन में साइबर ठगी के 4 लाख 73 हजार रुपये से अधिक की राशि पीड़ितों को वापस लोटाई

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित राज्यव्यापी साइबर जागरूकता अभियान "सेफ क्लिक 2.0" के अंतर्गत प्रदेशभर में जहां नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है, वहीं साइबर ठगी का शिकार हुए लोगों को त्वरित राहत पहुंचाने की दिशा में भी प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। अभियान के प्रारंभिक दिनों में ही देवास एवं खरगोन पुलिस ने साइबर फ्रॉड पीड़ितों को उनकी ठगी गई राशि वापस दिलाकर आमजन का विश्वास मजबूत किया है। अभियान के तहत पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी विद्यालयों, महाविद्यालयों, हाट-बाजारों, सार्वजनिक स्थलों तथा पुलिस चौपालों के माध्यम से नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाओं, ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड, मैट्रिमोनियल स्कैम, फर्जी लिंक, ओटीपी फ्रॉड, सोशल मीडिया हैकिंग, क्यूआर कोड फ्रॉड एवं अन्य साइबर अपराधों से बचाव के संबंध में जागरूक कर रहे हैं। साथ ही साइबर अपराध होने की स्थिति में तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 एवं डायल-112 पर शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। देवास जिले में पुलिस अधीक्षक  पुनीत गेहलोद के निर्देशन में अभियान के दौरान विभिन्न थाना क्षेत्रों के 16 साइबर फ्रॉड पीड़ितों की कुल 3 लाख 98 हजार 719 रुपये की राशि वापस कराई गई। शिकायत प्राप्त होते ही थाना स्तर पर पदस्थ साइबर मित्रों एवं जिला साइबर सेल द्वारा एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंकों एवं एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप ठगी गई राशि होल्ड कराकर पीड़ितों के खातों में वापस कराई जा सकी। इसी प्रकार खरगोन जिले में पुलिस अधीक्षक  रविन्द्र वर्मा के निर्देशन में साइबर सेल द्वारा दो अलग-अलग साइबर ठगी प्रकरणों में प्रभावी कार्रवाई करते हुए 74 हजार 956 रुपये की राशि वापस कराई गई। एक प्रकरण में मैट्रिमोनियल वेबसाइट के माध्यम से विदेश से उपहार भेजने का झांसा देकर कस्टम शुल्क के नाम पर ठगी की गई थी, जबकि दूसरे मामले में ऑनलाइन निवेश पर अधिक लाभ का प्रलोभन देकर धोखाधड़ी की गई थी। शिकायत प्राप्त होने पर साइबर सेल ने तत्काल एनसीआरपी पोर्टल पर प्रकरण दर्ज कर संबंधित बैंक खातों को होल्ड कराया तथा आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण कर राशि वापस दिलाई। दोनों जिलों में की गई इन कार्यवाहियों के माध्यम से कुल 4 लाख 73 हजार 675 रुपये की राशि साइबर ठगी के पीड़ितों को वापस कराई गई है। अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने पर नागरिकों ने मध्यप्रदेश पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया है। मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंकिंग अथवा व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। सोशल मीडिया, मैट्रिमोनियल वेबसाइट, निवेश योजनाओं अथवा अन्य ऑनलाइन माध्यमों से प्राप्त आकर्षक ऑफर एवं अधिक मुनाफे के प्रलोभन से सावधान रहें। किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930, डायल-112 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, जिससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर राशि सुरक्षित कराई जा सके।  

जून गया, अब मानसून की एंट्री का इंतजार खत्म! जानिए कब बरसेंगे बादल

जयपुर  राजस्थान में प्री-मानसून की बारिश का दौर थमने के बाद पिछले कुछ दिनों से पारा चढ़ा हुआ है. तापमान 40 से 45 डिग्री तक होने के चलते कई जिले भीषण गर्मी की चपेट में हैं. अब मानसून का इंतजार है और प्रदेशवासियों का इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है. मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून का काउंटडाउन शुरू हो गया है. पिछले 24 घंटों में प्रतापगढ़ के अरनोद में सर्वाधिक 94 मिमी वर्षा दर्ज की गई. वहीं, अगले 3–4 दिनों तक तेज आंधी के साथ बारिश का दौर जारी रह सकता है, जिसमें हवाओं की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है. दक्षिणी-पूर्वी हिस्से में अनुकूल स्थिति मौसम विभाग के अनुसार, 2 जुलाई से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है. जबकि अगले 2–3 दिनों में मानसून की आधिकारिक एंट्री हो सकती है. दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में इसके लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं. पूर्वानुमान के मुताबिक, जयपुर, भरतपुर, कोटा और बीकानेर संभाग में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. जबकि जोधपुर और बीकानेर में फिलहाल उमस भरी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. राजस्थान में 300 से ज्यादा बांध सूखे वहीं, इस साल मानसून की धीमी शुरुआत ने जल संकट के संकेत भी दिए हैं. कुल 693 बांधों में उनकी कुल क्षमता का केवल 44.22% पानी ही उपलब्ध है, जो पिछले साल इसी अवधि में 46.59% था. इनमें से 307 बांध पूरी तरह से सूख चुके हैं, 381 आंशिक रूप से भरे हैं और केवल 5 छोटे बांध ही पूरी तरह लबालब हो पाए हैं. जल संसाधन विभाग की 23 जून की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 23 प्रमुख बड़े बांधों में फिलहाल 56.09% पानी मौजूद है.  इस हफ्ते हो सकती है मध्यम से भारी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा इस समय गुजरात, मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार के कुछ भागों से होकर गुजर रही है. अगले 2-3 दिन में गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ भागों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं. विभाग के मुताबिक, कोटा और उदयपुर संभागों में कुछ भागों में आगामी दिनों में कहीं-कहीं मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना है. 3 से 5 जुलाई तक पूर्वी राजस्थान के कुछ और भागों में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी और कहीं-कहीं मध्यम से भारी बारिश हो सकती है.

16 पुलिस थाने एवं कार्यालयों को मिला आईएसओ प्रमाणन

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नागरिकों को बेहतर, पारदर्शी, उत्तरदायी एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप कटनी जिले के 13 पुलिस थाने, 02 अनुविभागीय पुलिस कार्यालय एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालयको अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्यप्रणाली विकसित करने पर आईएसओ (ISO) प्रमाणन प्राप्त हुआ है।जनशिकायतों का निर्धारित समय पर निराकरण, अपराधियों को पकडऩे, थाने के रखरखाव और रिकार्ड कम्प्यूटराइज्ड होने के अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने पर यह प्रमाण पत्र जारी हुआ है। इससे कटनी जिले की प्रदेशभर में अलग ही पहचान बन गई है। 29 जून को आयोजित समारोह में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, जबलपुर जोन  प्रमोद वर्मा, कलेक्टर कटनी  आशीष तिवारी तथा पुलिस अधीक्षक कटनी  अभिनय विश्वकर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में यह प्रमाणन प्रदान किया गया। अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर परखी गई पुलिस कार्यप्रणाली आईएसओ प्रमाणन के लिए पुलिस थानों एवं कार्यालयों का मूल्यांकन अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया गया। इसमें पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों कीव्यवहार कुशलता, शिकायतकर्ताओं के प्रति संवेदनशील एवं सम्मानजनक व्यवहार, शिकायतों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण, समयबद्ध एफआईआर पंजीयन, गुणवत्तापूर्ण विवेचना, नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता, महिला एवं पुरुषों के लिए पृथक व्यवस्थाएं, अभिलेखों एवं रजिस्टरों का वैज्ञानिक एवं अद्यतन संधारण, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन, जप्ती माल एवं अपराध संबंधी अभिलेखों का व्यवस्थित रख-रखाव, सीसीटीएनएस के माध्यम से सूचना का आदान-प्रदान, ऑनलाइन एफआईआर एवं उसकी समयबद्ध उपलब्धता, शिकायतकर्ताओं को कार्रवाई की नियमित जानकारी, उत्तरदायित्व निर्धारण, पारदर्शिता, स्वच्छ एवं सुरक्षित कार्यस्थल तथा सतत गुणवत्ता सुधार जैसे विभिन्न मानकों का गहन परीक्षण किया गया। इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कटनी पुलिस की पुलिस इकाइयों एवं कार्यालयों ने आईएसओ प्रमाणन प्राप्त किया। इन्हें मिला आइएसओ प्रमाणन पुलिस अधीक्षक कार्यालय कटनी, अनुविभागीय अधिकारी पुलिसकार्यालय विजयराघवगढ़ एवं स्लीमनाबाद, थाना कोतवाली, थाना कुठला, थाना माधवनगर, थाना यातायात, थाना एनकेजे, थाना स्लीमनाबाद, थाना उमरिया पान, थाना बहोरीबंद, थाना ढीमरखेड़ा, थाना रीठी, थाना बड़वारा, थाना बरही एवं थाना विजयराघवगढ़ को आईएसओ प्रमाणन प्रदान किया गया। मध्यप्रदेश पुलिस नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग, आधुनिक प्रबंधन प्रणाली तथा सेवा गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। यह उपलब्धि न केवल कटनी पुलिस, बल्कि संपूर्ण मध्यप्रदेश पुलिस के लिए गौरव का विषय है और जनसेवा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल पुलिस को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और जनोन्मुखी बनाने के साथ-साथ प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल सिद्ध होगी।  

नल जल योजना को रफ्तार, स्पर्श पोर्टल पर डेटा अपलोड से फंड रिलीज की तैयारी

रांची   झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक नल से शुद्ध जल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना को गति देने के लिए राज्य सरकार ने अपनी कवायद को बेहद तेज कर दी है. केंद्र सरकार से जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत लंबित पड़ी भारी-भरकम राशि को हासिल करने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग युद्ध स्तर पर काम कर रहा है. इसी सिलसिले में केंद्र सरकार के ‘एसएनए स्पर्श पोर्टल’ (SNA Sparsh Portal) पर जल जीवन मिशन की उन तमाम चालू और पूरी हो चुकी योजनाओं का विस्तृत विवरण अपलोड किया जा रहा है, जिनमें झारखंड सरकार अपने कोटे की राशि (राज्यांश) पहले ही खर्च कर चुकी है. डेटा अपलोडिंग के साथ-साथ इन सभी योजनाओं के उपयोगिता और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी पोर्टल पर डाले जा रहे हैं, ताकि वित्तीय लेन-देन में कोई तकनीकी अड़चन न रहे. दिल्ली में MOU के बाद बनी सहमति इस पूरी कवायद की पृष्ठभूमि हाल ही में नई दिल्ली में तैयार हुई थी. बीते 2 जून को नई दिल्ली में ‘जल जीवन मिशन 2.0’ को लेकर केंद्र और झारखंड सरकार के बीच एक उच्चस्तरीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे. इस महत्वपूर्ण बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के सामने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए राज्य की लगभग 6,500 करोड़ रुपये की लंबित केंद्रीय सहायता राशि को जल्द से जल्द जारी करने का आग्रह किया था. इस पर केंद्रीय अधिकारियों ने भरोसा दिया था कि एनओसी और अन्य कागजी प्रक्रियाओं में केंद्र पूरा सहयोग करेगा, बशर्ते राज्य सरकार निर्धारित मानकों और अपनी 50 प्रतिशत राज्यांश की हिस्सेदारी का कड़ाई से पालन करे. एमओयू की है कड़ी शर्त जल शक्ति मंत्रालय के नियमों और एमओयू की शर्तों के अनुसार, केंद्र सरकार से फंड की अगली किस्त पाने के लिए झारखंड को पहले अपने हिस्से की मैचिंग ग्रांट (राज्यांश) को धरातल पर खर्च करके दिखाना होगा. दिल्ली में हुए एमओयू के करीब एक महीना बीतने को है, लेकिन अब तक एसएनए स्पर्श पोर्टल पर झारखंड का पूरा तकनीकी डेटा और एनओसी समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण केंद्र की ओर से राशि जारी नहीं हो पाई है. इस देरी को गंभीरता से लेते हुए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के आलाधिकारियों ने पूरी कागजी और तकनीकी प्रक्रिया को फास्ट-ट्रैक मोड पर डाल दिया है ताकि केंद्र से मिलने वाला फंड बिना किसी देरी के सीधे राज्य के खाते में आ सके. जेजेएम 2.0 में मिला 2,500 करोड़ का विशेष बोनस झारखंड सरकार इस मेगा मिशन के तहत दिसंबर 2028 तक राज्य के शत-प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाने के बड़े और ऐतिहासिक लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही है. भौगोलिक रूप से कठिन माने जाने वाले झारखंड के पठारी इलाकों में इस लक्ष्य को समय पर हासिल करने के लिए ‘जेजेएम 2.0’ के तहत केंद्र सरकार ने झारखंड को 2,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त विशेष आवंटन (बोनस फंड) भी मंजूर किया है. विभाग का प्रयास यह है कि इस महीने के अंत तक सभी तकनीकी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं, ताकि जैसे ही फंड रिलीज हो, वैसे ही ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के निर्माण कार्य की गति को दोगुना किया जा सके. विभागीय मंत्री का आधिकारिक बयान मामले की जानकारी देते हुए झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि जेजेएम 2.0 को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच एमओयू की सभी आधिकारिक प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं. हमारी सरकार केंद्रांश की बड़ी राशि को समय पर प्राप्त करने के लिए अनिवार्य तकनीकी और कागजी प्रक्रियाएं पूरी करने में जुटी है. विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे दिन-रात काम करके स्पर्श पोर्टल पर डेटा फीडिंग पूरी करें, ताकि ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को बिना किसी बजटीय रुकावट के तेजी से पूरा किया जा सके.0 करोड़ के विकास कार्य, असुरक्षित भवनों पर तत्काल रोक लगाने का आदेश

चीनी मिल में स्क्रैप कटाई से भड़के किसान, बिहार में आंदोलन की चेतावनी

गोपालगंज. छह वर्षों से बंद पड़ी सासामुसा चीनी मिल के पुनः संचालन की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) की प्रक्रिया के तहत खरीदे गए स्क्रैप की कटाई की तैयारी मिल परिसर में शुरू हो गई है। एक ओर बिहार सरकार गन्ना उद्योग विभाग के माध्यम से मिल चालू कराने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्क्रैप हटाने और परिसंपत्तियों की नीलामी तेज होने से किसानों और पूर्व मिलकर्मियों की चिंता बढ़ गई है। मंत्री से मिलेंगे किसान, कार्रवाई नहीं रुकी तो आंदोलन स्क्रैप कटाई की सूचना मिलते ही किसान संघर्ष समिति सक्रिय हो गई है। समिति के अध्यक्ष मोहम्मद तौहीद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल पटना रवाना हुआ है। किसान गन्ना उद्योग मंत्री और विभागीय अधिकारियों से मिलकर स्क्रैप कटाई रोकने तथा मिल के पुनः संचालन पर ठोस निर्णय लेने की मांग करेंगे। किसानों ने चेतावनी दी है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो चरणबद्ध आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा। 2020 से बंद है मिल, लगातार उठ रही संचालन की मांग सासामुसा चीनी मिल वर्ष 2020 से बंद पड़ी है। तब से हजारों गन्ना उत्पादक किसान और पूर्व मिलकर्मी इसके पुनः संचालन की मांग कर रहे हैं। कई बार जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार को ज्ञापन देने के साथ मिल गेट पर धरना-प्रदर्शन भी किया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका। 40 करोड़ के बैंक बकाया से शुरू हुआ पूरा विवाद विवाद की शुरुआत मिल पर सेंट्रल बैंक के करीब 40 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान से हुई। बैंक ने वसूली के लिए एनसीएलटी का दरवाजा खटखटाया था। ट्रिब्यूनल ने पिछले वर्ष नवंबर में मिल का स्क्रैप करीब 18.50 करोड़ रुपये में बेचकर बैंक का बकाया चुकाने का आदेश दिया। इसके विरोध में किसानों ने 14 दिसंबर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया, जिसे मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद स्थगित किया गया था। चार निवेशकों ने दिखाई रुचि, लेकिन नहीं बन सकी बात गन्ना उद्योग विभाग की पहल पर मार्च और अप्रैल में चार निवेशक कंपनियों ने मिल परिसर का निरीक्षण किया और संचालन में रुचि दिखाई। हालांकि भूमि की सीमित उपलब्धता तथा तकनीकी और वित्तीय कारणों से कोई भी निवेशक अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंच सका। इस बीच राज्य सरकार ने किसानों के लगभग 43 करोड़ रुपये बकाया भुगतान की स्वीकृति भी दी है। स्क्रैप हटाने का विरोध जारी, पुनर्जीवन की उम्मीद पर संकट स्क्रैप की नीलामी लेने वाली कंपनी के कर्मी मिल परिसर में पहुंचकर साफ-सफाई शुरू कर चुके हैं और जल्द मशीनों की कटाई शुरू होने की संभावना है। किसान संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि किसानों और मिलकर्मियों का बकाया भुगतान तथा मिल के भविष्य पर स्पष्ट निर्णय होने तक स्क्रैप बाहर ले जाने का विरोध जारी रहेगा। किसानों का कहना है कि सरकार ने अब भी हस्तक्षेप नहीं किया तो सासामुसा चीनी मिल के पुनर्जीवन की उम्मीद हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।  

STDW की प्रशिक्षित बेटियों से किया संवाद; हस्तनिर्मित उपहारों ने जीता विदेशी प्रतिनिधिमंडल का दिल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 'महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा' के विज़न को साकार करते हुए एमपी टूरिज्म बोर्ड द्वारा 'महिलाओं के लिए सुरक्षित पर्यटन स्थल (STDW)' परियोजना चलाई जा रही है। इसी क्रम में टूरिज्म बोर्ड में एक विशेष सत्र में यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव सु शोको इशिकावा ने परियोजना की प्रशिक्षित बालिकाओं से सीधा संवाद किया और उनके अनुभवों व उपलब्धियों को जाना। यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव सु शोको इशिकावा ने प्रशिक्षित बालिकाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और कौशल की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के लिए सुरक्षित और समावेशी पर्यटन के वैश्विक दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत है महिला पर्यटकों के लिए सबसे सुरक्षित राज्य बनाने का संकल्प एमपी टूरिज्म बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक  अभय अरविंद बेडेकर ने कहा कि हमारा लक्ष्य मध्यप्रदेश को महिला पर्यटकों के लिए देश का सबसे सुरक्षित और संवेदनशील पर्यटन गंतव्य बनाना है। प्रदेश में सुरक्षा, कौशल विकास और सामुदायिक सहभागिता के समन्वित प्रयासों से महिलाओं के लिए नए अवसर सृजित हो रहे हैं तथा पर्यटन क्षेत्र अधिक समावेशी बन रहा है। हस्तनिर्मित उपहारों में दिखी आत्मनिर्भरता की झलक STDW प्रोजेक्ट पर हुए संवाद के दौरान परियोजना से जुड़ी महिलाओं एवं बालिकाओं ने अपने कौशल का परिचय देते हुए अतिथियों को स्वयं निर्मित हस्तशिल्प भेंट किए। इनमें हस्तनिर्मित स्मृति चिन्ह, फैब्रिक ज्वेलरी, फेंगशुई कलाकृतियां शामिल हैं। इन उत्पादों ने न केवल स्थानीय कला और रचनात्मकता को प्रदर्शित किया, बल्कि यह भी दर्शाया कि परियोजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी रूप से कार्य कर रही है। बैठक के दौरान यूएन विमेन के प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना के तहत विकसित कौशल प्रशिक्षण मॉडल, सामुदायिक सहभागिता और महिलाओं के आत्मविश्वास में आए सकारात्मक बदलावों की सराहना करते हुए इसे एक प्रभावी और प्रेरणादायक पहल बताया। इस अवसर पर यूएन विमेन इंडिया की कंट्री डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव सु कांता सिंह और स्टेट रिप्रेजेंटेटिव सु जोयात्री राय भी उपस्थित रहीं।  

विद्यालयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, सभी भवनों की जांच और मरम्मत के सख्त निर्देश जारी

 जयपुर  प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव  राजेश कुमार यादव ने मंगलवार को शासन सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य के सभी राजकीय विद्यालयों के भवनों की सुरक्षा, मरम्मत कार्यों, निर्माणाधीन परियोजनाओं तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में जर्जर अथवा असुरक्षित भवनों का उपयोग नहीं किया जाए। बैठक में एसीएस ने निर्देश दिए कि पूर्व में चिन्हित जर्जर विद्यालय भवनों के साथ-साथ वर्तमान में उपयोग में लिए जा रहे सभी विद्यालय भवनों की पुनः गहनता से जांच कराई जाए। प्रत्येक भवन की सुरक्षा का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जाए तथा सुरक्षा संबंधी सभी मानकों और नियमों की पूर्ण पालना की जाए। उन्होंने कहा कि जो भवन या कक्ष किसी भी दृष्टि से असुरक्षित पाए जाएं, उन्हें तत्काल प्रभाव से लॉक किया जाए, बैरिकेडिंग कर उपयोग से बाहर किया जाए तथा उनकी यथास्थिति की विस्तृत रिपोर्ट पुनः प्रस्तुत की जाए। अधिकारियों को निर्देशित किया कि विद्यालय भवनों के मरम्मत कार्यों एवं नवीन भवनों के निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि इन कार्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है, इसलिए कार्यों में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। बैठक में शिक्षा विभाग की विभिन्न प्रमुख योजनाओं, गतिविधियों एवं अन्य महत्वपूर्ण विषयों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाने के लिए शिक्षा विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा, जिससे योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से विद्यार्थियों तक पहुंच सके। उन्होंने बताया कि बजट घोषणाओं के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में राज्यभर में 2,000 से अधिक विद्यालयों से संबंधित विकास एवं निर्माण कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। वहीं वर्ष 2026-27 में लगभग 550 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्य कराए जाएंगे। इसके अतिरिक्त विद्यालयों के विकास के लिए भामाशाहों, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) तथा अन्य उपलब्ध मदों से भी सहयोग एवं वित्तीय संसाधनों का उपयोग किया जाएगा, ताकि राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में आवश्यक विकास एवं आधारभूत सुविधाओं के कार्य प्रभावी ढंग से कराए जा सकें।