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WhatsApp Update: आया नया चैट फीचर, आपकी निजी बातचीत को मिलेगा अतिरिक्त सुरक्षा कवच

 नई दिल्ली WhatsApp में अब एक नया फीचर मिलेगा, जिसका नाम साइड चैट है. यह मैसेज को सीक्रेट और प्राइवेट रखेगा. यह फीचर Meta AI के साथ काम करता है. दरअसल, बीते महीने मेटा सीईओ मार्क जकरबर्ग ने इनकॉग्निटो चैट को पेश किया था, जो मेटा AI से बातचीत करने का सबसे आसान तरीका है और साइड चैट उसी का एक एक्सटेंड वर्जन है. यह जानकारी Wabetainfo ने शेयर की है।  WhatsApp यूजर्स अब साइड चैट की मदद से किसी स्पेशल चैटिंग पर Meta AI से मदद मांग सकेंगे. ये डेटा लीक नहीं होगा. मेटा ने इस फीचर को अभी चुनिंदा यूजर्स के लिए जारी किया है. आने वाले दिनों में इसको और भी यूजर्स तक विस्तार किया जाएगा।  मेटा AI से बातचीत करने वाले लोगों को अक्सर डर सताता है कि उनकी सीक्रेट चैट्स लीक हो सकती हैं, डिसकी वजह से उनका काफी नुकसान हो सकता है. ऐसे यूजर्स के लिए इनकॉग्निटो चैट एकदम सही ऑप्शन है. इसकी एक लिमिटेशन है कि यह व्हाट्सऐप में हो रही बातचीत को एक्सेस नहीं कर पाता है।  WAbetainfo का पोस्ट  साइड चैट को ओपन करना आसान है व्हाट्सऐप के अंदर साइड चैट को ओपन करना बड़ा ही सिपंल है. यह फीचर यूजर्स को उनकी चैट के पास नजर आएगा, जिसका नाम Ask Privately है. चैट स्क्रीन को लेफ्ट स्वाइप करने पर साइड पैनल ओपन हो जाएगा। डार्क डिजाइन के साथ साइड चैटिंग  साइड चैट पैनल बड़ा ही अट्रैक्टिव है, जिसमें डार्क डिजाइन के साथ अलग स्क्रीन नजर आएगा. यह इनकॉग्निटो चैट इंटरफेस जैसा है. साइड चैट के अंदर वेब सर्च की भी खूबी है. साइड चैट पूरी तरह से प्राइवेट प्रोसेसिंग पर काम करता है, जिसकी वजह से मैसेज और चैट पूरी तरह से सीक्रेट रहती है।  

विंबलडन 2026 में सेरेना विलियम्स की एंट्री, वाइल्ड कार्ड मिला; युवा प्रतिद्वंद्वी से होगी पहली टक्कर

लंदन  सात बार की विंबलडन चैंपियन अमेरिका की सेरेना विलियम्स चार साल बाद ग्रैंड स्लैम में वापसी करेंगी। टूर्नामेंट के पहले दौर में उनका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की 20 वर्षीय माया जाइंट से होगा। 44 वर्षीय सेरेना को आयोजकों ने वाइल्ड कार्ड दिया है और वह 2022 के बाद पहली बार विंबलडन में सिंगल्स मुकाबला खेलेंगी। सेरेना ने 2022 के अमेरिकी ओपन के बाद कहा था कि वह टेनिस से आगे बढ़ रही हैं। अब वापसी पर उनकी चुनौती आसान नहीं होगी, क्योंकि दुनिया की 53वें नंबर की खिलाड़ी माया जाइंट दो डब्ल्यूटीए खिताब जीत चुकी हैं, जिनमें पिछले साल ईस्टबार्न का ग्रास कोर्ट खिताब भी शामिल है। सबालेंका के सामने कोस्तोविच महिला वर्ग में शीर्ष वरीयता प्राप्त एरिना सबालेंका अपने अभियान की शुरुआत सर्बिया की क्वालीफायर तेओदोरा कोस्तोविच के विरुद्ध करेंगी। मौजूदा चैंपियन इगा स्वियातेक का सामना अमेरिका की टेलर टाउनसेंड से होगा। तीसरी वरीय स्वियातेक और दूसरी वरीय एलेना रिबाकिना एक ही हिस्से में हैं। रिबाकिना पहले दौर में फ्रांस की लोइस बोइसों से भिड़ेंगी। वहीं, पुरुष वर्ग में मौजूदा चैंपियन और शीर्ष वरीय इटली के यानिक सिनर सोमवार को सेंटर कोर्ट पर अपने अभियान की शुरुआत सर्बिया के मियोमिर केचमानोविच के विरुद्ध करेंगे। दूसरी वरीयता प्राप्त और हाल में फ्रेंच ओपन चैंपियन बने अलेक्जेंडर ज्वेरेव का मुकाबला बेल्जियम के अलेक्जेंडर ब्लाक्स से होगा। निकला दिलचस्प ड्रॉ ड्रॉ में कई दिलचस्प मुकाबले भी सामने आए हैं। ब्रिटेन के जैक ड्रेपर का सामना छठी वरीयता प्राप्त अमेरिका के टेलर फ्रिट्ज से होगा, जबकि 41 वर्षीय स्विट्जरलैंड के दिग्गज स्टान वावरिंका अपने आखिरी विंबलडन में पूर्व उपविजेता माटेओ बेरेटिनी से भिड़ेंगे। 39 वर्षीय नोवाक जोकोविक रिकॉर्ड 25वें ग्रैंड स्लैम सिंगल्स खिताब की तलाश में पहले दौर में चीन के वू यीबिंग से खेलेंगे। यदि वह आगे बढ़ते हैं तो सेमीफाइनल में उनकी भिड़ंत सिनर से हो सकती है। सिनर के लिए पहले दौर में केचमानोविच आसान प्रतिद्वंद्वी नहीं होंगे। सिनर बिना किसी ग्रास कोर्ट अभ्यास टूर्नामेंट के विंबलडन पहुंचे हैं और उनकी फिटनेस को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। फ्रेंच ओपन में वह दो सेट की बढ़त गंवाकर अर्जेंटीना के जुआन मैनुअल सेरुंडोलो से हार गए थे। हालांकि, कार्लोस अलकराज के चोट के कारण बाहर होने से सिनर को लगातार दूसरा विंबलडन खिताब जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। क्वार्टर फाइनल में उनका संभावित मुकाबला आठवीं वरीयता प्राप्त दानिल मेदवेदेव से हो सकता है। हालांकि मेदवेदेव को पहले ही दौर में पूर्व उपविजेता मारिन चिलिच से कड़ी चुनौती मिलेगी।

मोदी कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज, किस मंत्री की होगी छुट्टी और कौन बन सकता है नया चेहरा?

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में परिवर्तन की चर्चा काफी समय से हो रही है, लेकिन जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और अमित शाह के राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद ये चर्चा तेज हो गई. कैबिनेट में बदलाव कब होगा, इसको लेकर भी दो तरह की चर्चाएं हो रही हैं. कहा जा रहा है कि 28 या 29 जून को कैबिनेट में फेरबदल हो सकता है या फिर मानसून सत्र के बाद बदलाव होगा. मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेगा, फिर 21 अगस्त के बाद कैबिनेट में बदलाव संभव है।  ये पीएम मोदी के काम करने का स्टाइल है, आखिरी समय तक किसी को कुछ नहीं पता होता कि क्या होने वाला है. कैबिनेट रीशफल में भी यही दिख रहा है. चर्चाएं और कयास लग लग रहे हैं. अब आपको बताते हैं कि मोदी कैबिनेट रीशफल में किस किस को मौका मिल सकता है. और किस-किस का पत्ता कट सकता है।  सूत्रों के मुताबिक कहा जा रहा है कि… * उद्धव गुट और TMC से टूटे कुछ सांसदों को मौका मिल सकता है. * उद्धव गुट से आए संजय दीना पाटिल को जगह मिल सकती है. * एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे को कैबिनेट रैंक दिया जा सकता है. * TMC से आए काकोली घोष, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय की भी चर्चा है. तीनों में से कोई एक कैबिनेट में शामिल हो सकता है. * केंद्रीय मंत्री और यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी को संगठन में भेजा जा सकता है. पंकज चौधरी की जगह नया मंत्री बनाया जा सकता है. * दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को भी संगठन भेजा जा सकता है. हर्ष मल्होत्रा की जगह भी नया मंत्री बनाया जा सकता है. * इसके अलावा कई वरिष्ठ मंत्रियों को संगठन भेजा जा सकता है. * इनकी जगह युवा चेहरों को कैबिनेट में मौका दिया जा सकता है. यानी उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी का साथ छोड़कर आने वाले सांसदों को मौका मिल सकता है. तो वहीं कई पुराने वरिष्ठ नेताओं को वापस संगठन भेजा जा सकता है और उनकी जगह युवाओं को मौका मिल सकता है. यानी एक तरफ उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी हैं, जिनकी पार्टी ही टूट गई है, फिर भी पुराने कैबिनेट में फेरबदल की चर्चाओं के बीच पीएम मोदी ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जन्मदिन की बधाई दी है।  25 जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का जन्मदिन था. पीएम मोदी ने कहा कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी लागू करने में धर्मेंद्र प्रधान की सराहनीय भूमिका है. पीएम मोदी की इस बधाई की बड़ी चर्चा हो रही है क्योंकि इंडी गठबंधन से लेकर कॉक्रोच पार्टी तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रही है. पेपर लीक के मामले पर धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विपक्ष हमलावर है. ऐसे में पीएम मोदी के बधाई संदेश के कई मतलब निकाले जा रहे हैं। 

HC का बड़ा आदेश, सरकारी संपत्ति की सुरक्षा में कोताही बर्दाश्त नहीं, दोषी अफसरों पर होगा एक्शन

 जबलपुर  हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने सरकारी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी संपत्ति की रक्षा करना सरकार और उसके अधिकारियों का संवैधानिक दायित्व है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात मानी जाएगी। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा में नाकाम रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की जानी चाहिए। इसके साथ ही आवश्यकता पड़ने पर ऐसे अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर भी दर्ज की जा सकती है। वर्षों तक फाइल दबाए रखने वालों को संदेश हाई कोर्ट का यह आदेश सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में लंबे समय तक कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों के लिए सख्त संदेश माना जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि यदि अधिकारियों की लापरवाही के कारण सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तो केवल सरकारी खजाने पर इसका भार नहीं डाला जा सकता। ऐसी स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। कोर्ट ने प्रशासनिक निष्क्रियता को केवल सामान्य चूक नहीं माना, बल्कि इसे जनता की संपत्ति की सुरक्षा के संवैधानिक दायित्व की अनदेखी बताया। बैतूल की 5.5 हेक्टेयर सरकारी जमीन का मामला यह मामला बैतूल जिले के सूरगांव स्थित करीब 5.5 हेक्टेयर सरकारी भूमि के विवाद से जुड़ा है। इस मामले में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जो वर्ष 2004 के निर्णय के खिलाफ लगभग 12 साल बाद दायर की गई थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि संबंधित अधिकारियों को मामले की पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने समय रहते आवश्यक कानूनी कदम नहीं उठाए। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही माना। सार्वजनिक संसाधनों की सरकार ट्रस्टी अपने आदेश में हाई कोर्ट ने पब्लिक ट्रस्ट डाक्ट्रिन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार सार्वजनिक संसाधनों की मालिक नहीं, बल्कि उनकी ट्रस्टी होती है। इसलिए सरकारी जमीन को निजी हाथों में जाने से रोकना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण में विफल रहने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो। कलेक्टर से पटवारी तक जांच की अनुमति हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को तत्कालीन कलेक्टर, अतिरिक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करने की स्वतंत्रता दी है। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

Pregnancy के बाद बढ़ा घर का किराया! मकान मालिक के फैसले के खिलाफ कोर्ट पहुंचा दंपती

सैन फ्रांसिस्को सैन फ्रांसिस्को के एक कपल ने अपने मकान मालिक के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है, उनका आरोप है कि मकान मालिक ने उनके घर का किराया करीब 71% तक बढ़ा दिया. सबा और गोकसाल ओनी नाम के इस कपल का दावा है कि महीने के किराए में की गई 10,000 डॉलर (करीब 8.3 लाख रुपये) की यह भारी-भरकम बढ़ोतरी सिर्फ इसलिए की गई ताकि उन्हें मरीना स्थित अपना घर छोड़ने पर मजबूर किया जा सके।  इस जोड़े ने 'सैन फ्रांसिस्को स्टैंडर्ड' को बताया कि वे 'एविला स्ट्रीट' पर स्थित अपने तीन बेडरूम और तीन बाथरूम वाले घर की लीज रिन्यू कराने की तैयारी कर रहे थे. इसी दौरान उन्होंने मकान मालिक को यह जानकारी दी कि उनके घर दूसरा बच्चा आने वाला है. महिला का दावा है कि उसने मकान मालिक को भेजे एक टेक्स्ट मैसेज में लिखा था, “हमारे पास आपके साथ साझा करने के लिए एक बेहद खूबसूरत खबर है, हमारे घर नवंबर में दूसरा बच्चा आने वाला है।  ओनी परिवार करीब 10 महीने पहले ही इस घर में शिफ्ट हुआ था और वे अपनी नन्हीं बेटी के स्वागत के लिए इसी घर में रहना चाहते थे. 42 वर्षीय सबा एक बायोटेक स्टार्टअप की सीईओ हैं, जबकि 36 साल के गोकसाल नौकरी करने के साथ-साथ फैमिली एंड मैरिज थेरेपी में मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रहे  हैं।  खुशखबरी के बाद मिला 'रेंट शॉक' अगस्त में जैसे ही सबा ने मकान मालिक को अपने दूसरे बच्चे की खबर दी, मकान मालिक ने शुरुआत में उन्हें बधाई दी और कहा कि उनका फिलहाल सैन फ्रांसिस्को लौटने का कोई इरादा नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि वे इस प्रॉपर्टी को बेचने पर विचार कर रहे हैं. कुछ ही घंटों बाद बातचीत का रुख पूरी तरह बदल गया. मकान मालिक ने घर बेचने की बात की।   इसके कुछ हफ्ते बाद किराएदारों को नए किराए का एक प्रस्ताव मिला. इसमें कहा गया कि अगर वे एक साल और रुकना चाहते हैं, तो मासिक किराया 14,000 डॉलर से बढ़ाकर 24,000 डॉलर कर दिया जाएगा. मकान मालिकों ने जनवरी तक रुकने के लिए 18,000 डॉलर प्रति माह का एक अस्थायी विकल्प भी दिया।  किराए में इस अचानक और भारी बढ़ोतरी से ओनी परिवार दंग रह गया. कपल ने अपने तीन साल के बेटे का एडमिशन पास के ही एक प्लेस्कूल में करा दिया था और महीनों लगाकर घर को सजाया था. उन्होंने बताया कि किराए की इस मनमानी बढ़ोतरी के कारण उन्हें अपनी बेटी के जन्म से महज कुछ हफ्ते पहले नया घर ढूंढने के लिए मजबूर होना पड़ा. आखिरकार उन्होंने पास में ही एक दूसरा घर खरीद लिया, लेकिन वह आकार में छोटा था और इसके कारण उन्हें उस फर्नीचर को भी बेचना पड़ा जो उन्होंने एविला स्ट्रीट वाले घर के लिए खरीदा था।  कपल ने मकान मालिक के खिलाफ मुकदमा दायर किया. याचिका में आरोप लगाया गया कि मकान मालिकों का इरादा कभी भी बढ़ा हुआ किराया वसूलने का था ही नहीं. बल्कि, उन्होंने किराए की बढ़ोतरी को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया ताकि परिवार को घर से निकाला जा सके और बिना किराएदारों के प्रॉपर्टी को आसानी से बेचा जा सके. उनके वकील  ने कहा कि उनकी फर्म के पास अब ऐसे मामले बहुत आ रहे हैं, जहां मकान मालिक किराएदारों को निकालने के लिए भारी किराया बढ़ा देते हैं।  किराएदारों का कहना है कि मकान मालिक कानूनी बेदखली के खर्च से बचने के लिए इस हथकंडे का इस्तेमाल करते हैं। 

Pakistan से Paris तक फीका पड़ा चीन का एयर डिफेंस, जानिए क्यों घट रही है वैश्विक मांग

बीजिंग  पेरिस में दुनिया के सबसे बड़े ड‍िफेंस फेयर में से एक यूरोसैटरी खत्म हुआ. यहां अमेरिका, फ्रांस, इजरायल, साउथ कोरिया और चीन समेत दुनिया की बड़ी ड‍िफेंस कंपनियां अपने सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम लेकर पहुंचीं. चीन भी पूरे आत्मविश्वास के साथ गया. नोरिन्को ने स्काई ड्रैगन-100, यितियन-II, लेजर वेपन और एंटी-ड्रोन सिस्टम का प्रदर्शन किया. लेकिन क‍िसी ने द‍िलचस्‍पी नहीं द‍िखाई. सवाल ये क‍ि अगर चीनी सिस्टम इतने दमदार हैं, तो यूरोप और नाटो देशों की कतारें चीन के स्टॉल पर क्यों नहीं दिख रहीं? जवाब वॉर जोन में छ‍िपा है।  चीन के एयर डिफेंस सिस्टम का सबसे बड़ा ग्राहक पाकिस्तान है. पाकिस्तान के पास HQ-9/P जैसे लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम हैं, जिन्हें चीन अपनी तकनीकी क्षमता का प्रतीक बताता है. यही वजह है कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ा और भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, तब रक्षा विशेषज्ञों के बीच यह सवाल उठा कि पाकिस्तान के चीनी एयर डिफेंस सिस्टम का प्रदर्शन कैसा रहा।      भारत और पाकिस्तान, दोनों ने इस अभियान के बारे में अलग-अलग दावे किए. भारत ने सबूतों के साथ कहा क‍ि उसने चाइनीज एयर ड‍िफेंस स‍िस्‍टम की धज्‍ज‍ियां उड़ा दीं. इसके बाद से चीनी एयर ड‍िफेंस सिस्‍टम को लेकर शक गहराने लगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल पूछे जाने लगे क‍ि चीनी ड‍िफेंस स‍िस्‍टम क्‍या सच में पाक‍िसतान में प‍िट गया? किसी भी हथियार के लिए वास्तविक युद्ध उसकी सबसे बड़ी परीक्षा होता है और यही परीक्षा चीन के लिए असहज सवाल छोड़ गई।  पेरिस में चीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यूरोसैटरी में चीन का उद्देश्य साफ था ग्लोबल साउथ के अलावा यूरोप में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाना. लेकिन रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह रास्ता आसान नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की सबसे बड़ी ताकत उसकी कम कीमत है. अमेरिका या यूरोप के मुकाबले चीन अपने एयर डिफेंस सिस्टम काफी सस्ते में बेच सकता है. यही कारण है कि पाकिस्तान, मिस्र, अजरबैजान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान जैसे देशों ने चीनी सिस्टम खरीदे हैं. लेकिन यूरोप का बाजार सिर्फ कीमत नहीं देखता. वहां यह भी देखा जाता है कि हथियार असली युद्ध में कितना सफल रहा है, क्या वह नाटो नेटवर्क के साथ काम कर सकता है, उसकी लॉजिस्टिक्स कैसी हैं और लंबे समय तक उसका रखरखाव कितना भरोसेमंद रहेगा।  युद्ध ने बदल दिया एयर डिफेंस का गणित यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दुनिया को दिखा दिया कि अब सिर्फ लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइलें भी युद्ध का चेहरा बदल रही हैं. इसी वजह से एयर डिफेंस बाजार अचानक दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता रक्षा बाजार बन गया है. अमेरिका के THAAD और Patriot, यूरोप के SAMP/T NG तथा दक्षिण कोरिया के M-SAM और L-SAM जैसे सिस्टम चर्चा में हैं।  दक्षिण कोरिया ने इस दौड़ में तेजी से जगह बनाई है. यूएई ने दावा किया कि उसके M-SAM सिस्टम ने ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों के दौरान 30 में से 29 लक्ष्यों को मार गिराया. इसके बाद सऊदी अरब और इराक जैसे देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई।  चीन की असली दिक्कत सिर्फ तकनीक नहीं साउथ चाइना मार्निंग पोस्‍ट की र‍िपोर्ट के मुताबिक- रक्षा विशेषज्ञ बेन्स नेमेथ का कहना है कि कोई भी देश सिर्फ तकनीकी स्पेसिफिकेशन देखकर हथियार नहीं खरीदता. ग्राहक यह भी देखते हैं कि हथियार कितने युद्धों में इस्तेमाल हुआ, उसका रिकॉर्ड कैसा है, ट्रेनिंग और सपोर्ट कैसा मिलेगा और भविष्य में स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता कैसी रहेगी।  यही वजह है कि अमेरिकी और इजरायली सिस्टमों के पास वर्षों का युद्ध अनुभव है. यूरोपीय सिस्टमों के पास नाटो का भरोसा है. दक्षिण कोरिया तेजी से विश्वसनीय विकल्प बन रहा है. चीन के पास कीमत का फायदा जरूर है, लेकिन युद्ध में सिद्ध प्रदर्शन और रणनीतिक भरोसे के मामले में उसे अभी लंबा रास्ता तय करना है।  ईरान ने भी बढ़ाए सवाल विश्लेषकों ने ईरान का उदाहरण भी दिया है. ईरान की एयर ड‍िफेंस में रूसी और कुछ चीनी मूल के उपकरण शामिल हैं. हालिया अमेरिकी और इजरायली हमलों के दौरान ये स‍िस्‍टम ध्‍वस्‍त हो गए. हालांकि किसी एक सिस्टम पर सवाल उठाना ठीक नहीं, लेकिन माना गया क‍ि चीन के हथ‍ियार कामयाब नहीं हुए. ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह दूसरा मौका था, जब चीन के हथ‍ियारों पर सवाल उठे।  यूरोप को पसंद क्‍यों नहीं पेरिस एयर शो और यूरोसैटरी से सबसे बड़ा संदेश यही निकला कि यूरोप अभी भी चीन के बजाय अमेरिका, यूरोप और दक्षिण कोरिया की ओर ज्यादा भरोसा जता रहा है.रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में एयर डिफेंस का बाजार और बड़ा होगा. लेकिन जीत उसी की होगी जो सिर्फ मिसाइल नहीं, बल्कि रडार, सेंसर, कमांड एंड कंट्रोल और एंटी-ड्रोन तकनीक को एकीकृत समाधान के रूप में पेश करेगा।  चीन के लिए चुनौती अब सिर्फ हथियार बनाना नहीं है, बल्कि दुनिया को यह भरोसा दिलाना है कि उसके सिस्टम वास्तविक युद्ध में भी उतने ही प्रभावी हैं जितने वे रक्षा प्रदर्शनियों में दिखाई देते हैं. पाकिस्तान के अनुभव और यूरोप की हिचकिचाहट ने इस चुनौती को और कठिन बना दिया है. इसलिए पेरिस में भले चीन ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम की पूरी दुकान सजा दी हो, लेकिन सबसे बड़े और सबसे भरोसेमंद ग्राहकों का विश्वास जीतना उसके लिए अभी भी सबसे कठिन लड़ाई बना हुआ है।   

Scholarship 2026: बीड़ी एवं खदान श्रमिकों के बच्चों को मिलेगा छात्रवृत्ति का लाभ, जानें आवेदन की अंतिम तारीख

बीड़ी एवं खदान श्रमिकों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति आवेदन 31 अक्टूबर तक भोपाल श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। योजना के अंतर्गत बीड़ी एवं खदान श्रमिकों के अध्ययनरत संतानों को स्‍कूली शिक्षा से लेकर उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को पात्र विद्यार्थियों तक योजना की जानकारी पहुंचाने तथा समय-सीमा में आवेदन एवं सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। उच्च शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए छात्रवृत्ति आवेदन राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) पर एक जून से प्रारंभ हो चुके हैं। पात्र विद्यार्थी 31 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। विभाग ने महाविद्यालयों से अधिकाधिक पात्र विद्यार्थियों को योजना से जोड़ने और उनके आवेदनों का समयबद्ध सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा है। योजना के अंतर्गत कक्षा एक से लेकर व्यावसायिक पाठ्यक्रमों तक अध्ययनरत विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 1,000 रुपये से 25,000 रुपये तक की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। कक्षा एक से चौथी तक के विद्यार्थियों को 1,000 रुपये, कक्षा 5 से 8 तक 1,500 रुपये, कक्षा 9 एवं 10 के विद्यार्थियों को 2,000 रुपये, कक्षा 11 एवं 12 के विद्यार्थियों को 3,000 रुपये तथा आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं डिग्री पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को 6,000 रुपये की सहायता दी जाती है। वहीं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को 25,000 रुपये प्रतिवर्ष तक की छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाती है। यह सहायता राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से हस्तांतरित की जाती है। योजना का लाभ बीड़ी श्रमिकों, लौह अयस्क, मैंगनीज एवं क्रोम अयस्क खदान श्रमिकों, चूना पत्थर एवं डोलोमाइट खदान श्रमिकों के पात्र बच्चों को दिया जाता है। यह योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है।  

भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से आसान होंगे भूमि रिकॉर्ड, राजस्व सेवाओं में आएगी पारदर्शिता

भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से राजस्व सेवाएँ होंगी अधिक प्रभावी, भूमि रिकॉर्ड प्राप्त करना होगा आसान डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम का जबलपुर एवं नर्मदापुरम संभाग में प्रथम चरण पूर्ण भोपाल एवं सागर संभाग के 11 जिलों में जुलाई से शुरू होगा अगला चरण भोपाल प्रदेश के नागरिकों को भूमि संबंधी सरकारी अभिलेखों की सहज, त्वरित और पारदर्शी उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ पुराने भू-अभिलेखों के सुरक्षित संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत प्रदेश में चरणबद्ध रूप से डिजिटाइजेशन का कार्य किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से राज्य के लगभग 15 करोड़ पुराने भू-अभिलेख रिकॉर्ड का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिसके लिए दस्तावेज प्रबंधन प्रणाली और डीबीईएस सॉफ्टवेयर विकसित किए जा रहे हैं। वर्ष 2008 में शुरू हुए राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम को 1 अप्रैल 2016 से डीआईएलआरएमपी के रूप में पुनर्गठित किया गया था। इसके तहत मॉडर्न रिकॉर्ड रूम (एमआरआर) के अंतर्गत पुराने अभिलेखों के डिजिटाइजेशन की रूपरेखा तैयार की गई। योजना के फेज-1 (2013-2020) में लगभग 3,18,82,222 दस्तावेजों और फेज-2 (2021-22) में लगभग 2,39,24,462 दस्तावेजों की स्कैनिंग का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। अब फेज-3 के तहत 15 करोड़ रिकॉर्ड्स के डिजिटाइजेशन का कार्य किया जा रहा है। परियोजना में जिला स्तर पर अत्याधुनिक स्कैनिंग केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। दस्तावेजों की सुरक्षित स्कैनिंग, मेटा-डाटा एंट्री और भोपाल में डीबीईएस आधारित डबल-बाइंड डेटा एंट्री की व्यवस्था की गई है। आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित क्षेत्र के पटवारी द्वारा ऑनलाइन गुणवत्ता परीक्षण किया जाएगा। अंतिम रूप से सत्यापित रिकॉर्ड ‘भूलेख पोर्टल’ पर ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना के प्रथम चरण में जबलपुर एवं नर्मदापुरम संभाग के 12 जिलों में लगभग 2.70 करोड़ दस्तावेजों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग पूरी कर ली गई है। इन जिलों में डेटा एंट्री का कार्य निरंतर जारी है। दूसरे चरण में भोपाल एवं सागर संभाग के 11 जिलों में जुलाई 2026 से कार्य प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए संबंधित जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से राजस्व व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। साथ ही नागरिकों को अपने भूमि रिकॉर्ड ऑनलाइन देखने और प्राप्त करने में आसानी होगी। इससे भूमि अभिलेखों का सुरक्षित संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ राजस्व सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता में भी वृद्धि होगी।  

मिड-डे मील में गड़बड़ी पर सख्ती, खाली बोरों की राशि जमा नहीं करने पर महालेखाकार की आपत्ति

रांची  पीएम पोषण योजना (मध्याह्न भोजना योजना) के तहत चावल के खाली बोरे की राशि सरस्वती वाहिनी के बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य है। इसे प्रधानाध्यापक या कोई शिक्षक अपने पास नहीं रख सकता। साथ ही स्कूलों को इसका पूरा हिसाब-किताब सरकार को देना है। महालेखाकार द्वारा कई जिलों में बोरे की राशि सरस्वती वाहिनी के बैंक खाते में जमा नहीं होने पर आपत्ति व्यक्त करते हुए हर हाल में राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसे लेकर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने भी सभी जिलों के जिला शिक्षा अधीक्षकों को यह राशि हर हाल में जमा करने को कहा है। महालेखाकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर 2025-26 तक मध्याह्न भोजन में चावल के उपयोग के बाद खाली बोरे के हिसाब-किताब दुरुस्त नहीं होने तथा राशि जमा नहीं होने की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है। इस अवधि में चावल के उपयोग के बाद खाली बोरे के लिए प्रति बोरा 14.40 रुपये जमा किया जाना है। इस राशि का सही तरह से आकलन कर पूरी राशि को सरस्वती वाहिनी की बैंक खाते में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जिलों को इसकी रिपोर्ट देने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस आशय के निर्देश मिलने के बाद कुछ जिलों में इसके पूर्व के वर्षों की राशि का भी हिसाब-किताब लिया जा रहा है। बताते चलें कि स्कूलों को कुकिंग कास्ट के रूप में निर्धारित राशि दी जाती है, जबकि चावल एफसीआई के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं। चावल की राशि एफसीआई को झारखंड मध्याह्न भोजन प्राधिकरण द्वारा दी जाती है, जिसमें केंद्रांश की 60 प्रतिशत तथा राज्यांश की 60 प्रतिशत राशि होती है।

IMD Weather Update: मानसून की धमाकेदार एंट्री, 48 घंटे तक भारी बारिश और तेज तूफान की चेतावनी

लखनऊ  भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और उमस से उत्तर प्रदेश के लोगों को राहत मिलने की बारी आ गई है. मौसम का मिजाज करवट बदलने जा रहा है. मौसम विभाग की ताजा बुलेटिन के अनुसार, मानसूनी हवाओं ने उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर दस्तक दे दी हैं, जिससे अगले दो दिनों के भीतर प्रदेश का मौसम पूरी तरह सुहावना हो जाएगा।  आधिकारिक मौसम विभाग की बुलेटिन के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटों के भीतर मानसून उत्तर प्रदेश में पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा. 30 जून से ही राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मानसूनी बारिश शुरू हो जाएगा. जुलाई के पहले सप्ताह तक मानसून की रफ्तार इतनी तेज होगी कि यह पूरे उत्तर प्रदेश को अपनी आगोश में ले लेगा और झमाझम बारिश से सूबे को सराबोर कर देगा।  तापमान 10 डिग्री तक की भारी गिरावट मौसम विभाग का कहना है कि मानसून के सक्रिय होते ही उमस भरी गर्मी से राहत मिली. अधिकतम तापमान में भी 7 से 10 डिग्री सेल्सियस तक की बड़ी गिरावट दर्ज होने की संभावना है. हालांकि, सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली जैसे सुदूर दक्षिणी जिलों के निवासियों को अभी अगले दो दिनों तक थोड़ी तपिश और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है, जिसके बाद वहां भी मौसम साफ और ठंडा हो जाएगा।  66 जिलों में गरज-चमक और बिजली गिरने का अलर्ट मौसम के बदलते रुख को देखते हुए विभाग ने उत्तर प्रदेश के 66 जिलों में विशेष चेतावनी जारी की है. इन जिलों में तेज हवाएं चलने, गरज-चमक होने और अचानक वज्रपात (आकाशीय बिजली गिरने) की आशंका जताई गई है. खासकर तराई के इलाकों (नेपाल सीमा से सटे जिलों) में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है, जिसके लिए स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने को कहा गया है।  पश्चिमी विक्षोभ भी बढ़ाएगा बारिश की रफ्तार मौसम वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने विशेष जानकारी देते हुए बताया कि पिछले कई दिनों से शुष्क और भीषण गर्मी का जो दौर चल रहा था, वह अब खत्म होने की कगार पर है क्योंकि ‘मॉनसूनल फ्लो’ (मानसूनी हवाओं का प्रवाह) काफी मजबूत हो चुका है. इसके साथ ही, आगामी 2 जुलाई को एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय होने जा रहा है. इन दोनों मौसमी प्रणालियों के एक साथ मिलने के कारण उत्तर प्रदेश में मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो चुकी हैं और बारिश का यह दौर लंबा खिंचेगा।