samacharsecretary.com

ट्रंप-मोदी की दोस्ती पर बड़ा खुलासा, सर्जियो गोर बोले- सुबह 6 बजे अचानक किया PM मोदी को फोन

 नई दिल्ली

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलने को लेकर हुए विवाद को खारिज करते हुए कहा कि "लेटरहेड पर लिखे नाम" से कोई फर्क नहीं पड़ता, बल्कि यह देखना चाहिए कि अमेरिका असल में क्या कर रहा है. अमेरिकी राजदूत ने इस बात को खारिज किया कि भारत-अमेरिका के बीच संबंध कमजोर हो रहे हैं। 

US-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए गोर ने कहा कि भारत आज भी किसी भी अन्य देश की तुलना में अमेरिका के साथ ज़्यादा सैन्य अभ्यास करता है और रक्षा अधिकारियों के बीच नियमित द्विपक्षीय दौरे होते हैं। 

गोर की ये टिप्पणी 'इंडो-पैसिफिक कमांड' से 'इंडो' शब्द हटाने को लेकर हुए विवाद के बाद सामने आई हैं. 1947 में बनी US पैसिफिक कमांड अमेरिका की सबसे पुरानी यूनिफाइड कमांड्स में से एक है, जिसका दायरा अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला है। 

लेटरहेड से क्या फर्क पड़ता है
US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती अहमियत को देखते हुए पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर 'इंडो-पैसिफिक कमांड' कर दिया गया था. इस महीने की शुरुआत में, अमेरिका ने इस यूनिफाइड कमांड का पुराना नाम बहाल कर दिया।  

गोर ने कहा, "मैं बस एक बात कहना चाहता हूं क्योंकि नाम बदलने को लेकर बहुत से लोगों ने काफी हंगामा किया था. मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लेटरहेड पर क्या नाम लिखा है, बल्कि यह देखना चाहिए कि अमेरिका असल में क्या कर रहा है। 

अमेरिकी राजदूत ने कहा, "हां, नाम बदला गया; लेकिन हम अभी भी वहां मौजूद हैं. भारत आज भी किसी भी दूसरे देश की तुलना में अमेरिका के साथ कहीं ज़्यादा मिलिट्री एक्सरसाइज़ करता ह. हर महीने कुछ न कुछ होता रहता है, चाहे भारतीय सैनिक यहां आएं या अमेरिकी सैनिक उस क्षेत्र में जाएं।

उन्होंने कहा कि अगले दो हफ़्तों में भारतीय नौसेना का एक प्रतिनिधिमंडल अमेरिका का दौरा करेगा। 

कमजोर नहीं हुए हैं भारत-अमेरिका के संबंध
गोर ने उन सुझावों को भी खारिज कर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंध कमजोर हो गए हैं; उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर रिश्ते मजबूत स्थिति में हैं। उन्होंने कहा, "तो जो विशेषज्ञ ऑनलाइन बैठकर ट्वीट करते हैं और कहते हैं कि यह रिश्ता मुश्किल में है, उन्हें असलियत देखनी चाहिए. चाहे व्यापार हो, रक्षा हो या लोगों के बीच आपसी संबंध हों. हर मामले में यह रिश्ता मजबूत स्थिति में है। 

गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत के साथ संबंधों को बहुत महत्व देते हैं और व्यापार, तकनीक, रक्षा और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 

भारत में अमेरिकी राजदूत ने एक घटना का जिक्र किया जब ट्रंप ने मियामी से मोदी को फोन करने का फैसला किया; ये तब हुआ था जब ट्रंप वहां 'अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप' (UFC) के मुकाबले देख रहे थे। 

भारत में सुबह 6 बज रहे थे, ट्रंप बोले- PM मोदी को फोन लगाइए…
गोर ने बताया, "यह कुछ महीने पहले की बात है. राष्ट्रपति मियामी में UFC कार्यक्रम में थे और हम बैकस्टेज बैठे थे, तभी उन्होंने मुझसे कहा, 'चलो प्रधानमंत्री मोदी को फोन करते हैं। 

गोर ने ट्रंप की बात याद करते हुए कहा, "मैंने कहा सर वहां (भारत में) सुबह के 6 बजे हैं.' उन्होंने कहा, 'वह (मोदी) जाग रहे होंगे. वह (मोदी) मेरी तरह ही हैं। 

गोर ने बताया कि जब तक वह नई दिल्ली में कुछ लोगों से बात कर पाते, तब तक ट्रंप UFC के मंच पर पहुंच चुके थे और आखिरकार मोदी के साथ बातचीत अगले दिन के लिए तय की गई। 

गोर ने कहा कि इस घटना से ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच के रिश्ते की असलियत पता चलती है। 

अमेरिकी राजदूत गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा, "इस कहानी का मुख्य संदेश यह है कि जब आप किसी के दोस्त होते हैं, तो हर चीज पहले से तय करने की ज़रूरत नहीं होती." उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति सच में प्रधानमंत्री को अपना दोस्त मानते हैं। 

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के साथ उनका जुड़ाव उनके पहले कार्यकाल से ही है. भारत से जुड़ी उनकी अच्छी यादें हैं. और यह एक बहुत बड़ा फायदा है। 

गोर ने कहा, "अमेरिका भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है." उन्होंने आगे कहा कि आने वाले दो साल दशकों तक चलने वाले द्विपक्षीय संबंधों को आकार देने के लिए बहुत अहम होंगे। 

गोर ने बताया कि ये अगले दो साल रिश्ते को आने वाले कई दशकों के लिए एक नई दिशा देंगे. इसलिए जो भी इसमें शामिल हो रहा है, वह इसे एक लंबे समय के प्रोजेक्ट के तौर पर देखे. यह एक या दो साल का मामला नहीं है, बल्कि हम आज जो बोएंगे, वही हमें आने वाले दशकों तक आगे ले जाएगा। 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here