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फॉरेस्ट रेस्ट हाउस “राम वाटिका” में स्थापित भगवान राम की प्रतिमा को नमन कर प्राप्त किया आशीर्वाद

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने  आज अपने सरगुजा प्रवास के दौरान विकासखंड उदयपुर स्थित रामगढ़ के फॉरेस्ट रेस्ट हाउस "राम वाटिका" में स्थापित भगवान  राम की प्रतिमा को नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की, इसके साथ ही उन्होंने "एक पेड़ माँ के नाम 3.0" अभियान के अंतर्गत रुद्राक्ष का पौधारोपण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान को मातृशक्ति एवं प्रकृति के प्रति श्रद्धा तथा आत्मीय जुड़ाव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि माँ के नाम पर लगाया गया एक पौधा न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित भविष्य की सुदृढ़ आधारशिला भी है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक पौधे लगाएँ तथा उनके संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लें, ताकि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करते हुए प्रकृति के संतुलन को बनाए रखा जा सके। भगवान  राम की प्रतिमा को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु  राम का जीवन मर्यादा, सत्य, त्याग एवं कर्तव्यपरायणता का अनुपम आदर्श है, जो युगों-युगों से समस्त मानवता का मार्गदर्शन करता आ रहा है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से प्रभु  राम द्वारा प्रशस्त आदर्श पथ पर चलते हुए सेवा, सद्भाव एवं समर्पण के भाव से समाज एवं राष्ट्र के उत्थान में सहभागी बनने का आह्वान किया। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल, कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, लुण्ड्रा विधायक  प्रबोध मिंज, सीतापुर विधायक  रामकुमार टोप्पो सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

पंजाब में बढ़ा बिजली बिल? विभाग ने जारी की अहम जानकारी, जानें क्या करें

चंडीगढ़. पंजाब में बिजली उपभोक्ताओं के लिए अहम खबर सामने आई है। मीटर रीडरों की हड़ताल के चलते पी.एस.पी.सी.एल. ने बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य भर में बिजली के बिल स्पीड पोस्ट के जरिए भेजे जाएंगे। इस फैसले से 10.5 लाख से अधिक खपतकार सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। बिजली विभाग ने साफ किया है कि यदि किसी उपभोक्ता का बिजली बिल सामान्य से ज्यादा आया है, बिल पर ‘एन कोड’ लिखा हुआ है या कई महीनों का इकट्ठा बिल मिला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। एन कोड का मतलब है कि मीटर की वास्तविक रीडिंग नहीं ली जा सकी और पिछली खपत के आधार पर अंदाजन (अनुमानित) बिल जारी किया गया है। यह फाइनल बिल नहीं माना जाएगा। पी.एस.पी.सी.एल. के अनुसार, जैसे ही मीटर की असली रीडिंग ली जाएगी, उसी के अनुसार पूरा हिसाब किया जाएगा। अगर किसी उपभोक्ता ने अधिक राशि जमा करवा दी है तो वह रकम अगले बिल में एडजस्ट कर दी जाएगी, वहीं कम भुगतान की स्थिति में बाकी राशि बाद में जोड़ी जाएगी। दरअसल, पंजाब में आउटसोर्स मीटर रीडर अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, जिस कारण कई इलाकों में मीटर रीडिंग नहीं हो सकी। इसी वजह से विभाग को मजबूरी में अनुमानित बिल जारी करने पड़े। फिलहाल मीटर रीडरों की हड़ताल खत्म होने को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है और बातचीत जारी है।

दीपक वोहरा बोले- जन परिषद के गीत आने वाली पीढ़ियों की जुबान पर होंगे”

भोपाल  जन परिषद के 37वें वार्षिक एवं सम्मान समारोह का आयोजन रवीन्द्र भवन, भोपाल में अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह में भारत के पूर्व राजदूत एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अग्रणी ज्ञातादीपक वोहरा,  डीजीपी ** कैलाश मकवाना, एसीएस ** अनुपम राजन तथा एयर मार्शलप्रमोद वास्तव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों का सम्मान भी किया गया।समारोह एल आई सी और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से आयोजित किया गया । अपने प्रेरक उद्बोधन में पूर्व राजदूतदीपक वोहरा ने कहा कि जन परिषद की 37 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उसके सेवा कार्यों तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित पहचान को देखते हुए यह विश्वासपूर्वक कहा जा सकता है कि आने वाली पीढ़ियां जन परिषद के रचनात्मक गीतों को गुनगुनाएंगी। उन्होंने कहा कि आज विश्व अनेक चुनौतियों और अस्थिरताओं के दौर से गुजर रहा है, ऐसे समय में जन परिषद जैसी संस्थाएं समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान कर रही हैं।  वोहरा ने कहा कि वे इन दिनों अत्यंत व्यस्त थे और भोपाल आने की स्थिति में भी नहीं थे, लेकिन जब उन्होंने जन परिषद के इतिहास, उपलब्धियों और कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा भोपाल के अपने मित्रों से संस्था के संबंध में चर्चा की, तो सभी ने जन परिषद की इतनी प्रशंसा की कि वे स्वयं को इस कार्यक्रम में आने से रोक नहीं सके। उन्होंने जन परिषद के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी संस्था के लिए 37 वर्षों तक निरंतर सक्रिय और प्रभावी बने रहना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।दीपक वोहरा जी ने आचार्य चाणक्य के छह सूत्रों को सरल एवं प्रेरक ढंग से प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व की ओर नहीं देख रहा है, बल्कि पूरा विश्व आशा और विश्वास की दृष्टि से भारत की ओर देख रहा है। उन्होंने उपस्थित जनों से आग्रह किया कि वे इन सूत्रों को अपने घरों तक पहुँचाएँ और अपने बच्चों को भी इनके बारे में अवश्य बताएं, ताकि उनमें संस्कार, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित हो। उन्होंने बताया कि जन परिषद ने देशभर में 300 से अधिक इकाइयों एवं सहयोगी संगठनों का मजबूत नेटवर्क विकसित किया है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। यदि देश में जन परिषद जैसी सैकड़ों संस्थाएं और विकसित हो जाएं, तो राष्ट्र के सामाजिक और रचनात्मक वातावरण में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन संभव है। उन्होंने जन परिषद को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया। एसीएसअनुपम राजन ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज के विकास में जनभागीदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जन परिषद ने विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाने का जो प्रयास किया है, वह अनुकरणीय है। एयर मार्शलप्रमोद वास्तव ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और समर्पण अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने युवाओं को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संदेश दिया। कार्यक्रम के प्रारंभ में जन परिषद के अध्यक्ष एवं पूर्व डीजीपीएन.के. त्रिपाठी ने स्वागत भाषण देते हुए संस्था की 37 वर्षों की यात्रा, उपलब्धियों और भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जन परिषद समाज, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसशक्तिकरण के क्षेत्र में निरंतर कार्य करती रहेगी। कार्यक्रम का वार्षिक प्रतिवेदन महेंद्र जोशी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें संस्था की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों, सामाजिक अभियानों, पर्यावरण संरक्षण, जनजागरण तथा सेवा परियोजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन संयोजकरामजी वास्तव ने किया तथा अंत मेंअजय वास्तव (नीलू जी) ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह में जन परिषद के पदाधिकारी, सदस्यगण, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी, पत्रकार एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। विभिन्न सम्मानों से सम्मानित विभूतियां समारोह में एंबेसडर ऑफ एक्सीलेंस सम्मान से पूर्व राजदूतदीपक वोहरा (नई दिल्ली) को सम्मानित किया गया। एक्सीलेंट गार्जियन ऑफ द हार्ट सम्मान से डॉ. सुब्रतो मंडल को सम्मानित किया गया। कवि प्रदीप चौबे सम्मानप्रेमचंद द्वितीय (बड़नगर) को, सांसद विजय खंडेलवाल सम्मानमनोज तिवारी (गढ़ाकोटा) को तथा ललित वास्तव सम्मानमोहन परिहार को प्रदान किया गया। कुलभूषण दल्लौरी सम्मान सेललित अग्रवाल (इंदौर),अमित शर्मा एवंआशीष वास्तव को सम्मानित किया गया। राजकमल वास्तव सम्मान डॉ. रूबी खान को प्रदान किया गया। मां प्रभादेवी सम्मान सेउरज मिश्रा, मती शिल्पी अभिषेक भार्गव (गढ़ाकोटा),अतुल बनारसी,अंशुमन खरे, डॉ. प्रगति सेठ (झांसी)तथामोहन अग्रवाल को सम्मानित किया गया। लक्ष्मी रायकवार सम्मानकमल सिंह को, डॉ. मंगल प्रसाद अग्रवाल सम्मानभरत तिवारी (सागर) को तथा प्रकाश प्रलय सम्मानगौरीशंकर धाकड़ (बरेली) को प्रदान किया गया। पत्रकार के.के. अग्निहोत्री सम्मान सेधर्मेंद्र सिंह (भोपाल) एवंओमप्रकाश चौरसिया (गंजबासोदा) को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बेस्ट चैप्टर सम्मान आष्टा, छिंदवाड़ा, सागर एवं मुलताई चैप्टर्स को प्रदान किया गया। वहीं एक्टिव मेंबर्स ऑफ द ईयर के रूप मेंविनोद वास्तव,दुर्गेश रैकवार,नितिन वास्तव,संदीप गोलू तथारामेश्वर को सम्मानित किया गया।  

अवैध मकानों को खाली करने के नोटिस पर धमतरी में बवाल, ग्रामीणों ने राजस्व अमले का किया घेराव

धमतरी. रायपुर के नकटी गांव के बाद धमतरी के कोलियारी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर मंगलवार को माहौल तनावपूर्ण हो गया। 50 से अधिक मकानों को खाली करने के लिए राजस्व विभाग द्वारा अल्टीमेटम दिए जाने के बाद ग्रामीणों और राजस्व टीम के बीच तीखी बहस और नोकझोंक हुई। मौके पर कुछ समय के लिए स्थिति गर्मा गई। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की यह कार्रवाई पूरी तरह गलत है। उनका कहना है कि एक निजी संस्थान को जमीन उपलब्ध कराने के लिए राजस्व विभाग दबाव बनाकर लोगों को उनके घरों से हटाने की कोशिश कर रहा है। धमतरी में भी रायपुर के नकटी गांव जैसी स्थिति पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं राजस्व विभाग का कहना है कि संबंधित भूमि पर 50 से अधिक मकान अतिक्रमण कर बनाए गए हैं। नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया के तहत संबंधित लोगों को घर खाली करने का नोटिस और अल्टीमेटम दिया गया है। नोटिस मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और कार्रवाई का विरोध जताने लगे। इस दौरान राजस्व अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। जल्द घर खाली करने के निर्देश राजस्व अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संबंधित लोगों को जल्द से जल्द अतिक्रमित भूमि खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। फिलहाल मामले को लेकर क्षेत्र में तनाव का माहौल बना है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

डॉ. वर्णिका शर्मा की चेतावनी: खुले गड्ढों से बच्चों को बचाने के लिए नगरीय प्रशासन तत्काल करे व्यवस्था

रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने आज नगरीय प्रशासन विभाग, जिला कलेक्टर व नगरीय निकायों के उच्चाधिकारियों को एक बेहद सख्त अनुशंसा भेजते हुए लेख किया है कि आयोग के समक्ष इस प्रकार के प्रकरण देखने में आये हैं, जिसमें कि कॉलोनी में निर्माणाधीन गढ्ढे खुुले होने, सड़कों पर गढ्ढे खुले होने अथवा बारिश में नालियों के ढक जाने के कारण उसमें बच्चे गिर पड़े हैं एवं उनके जीवन का अंत हो गया है।  आयोग ने इसे बेहद दुःखद माना है एवं आयोग द्वारा बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 की धारा 13 तथा सहपठित धारा 15 के तहत बच्चों के जीवन के अधिकार की रक्षा को देखते हुए यह अनुशंसा क्रमांक आर-191/30.06.2026 की है कि, नगरीय क्षेत्र में तत्काल एक सर्वेक्षण अभियान चलाकर ऐसे खुले गढ्ढों, नालियों या निर्माणाधीन स्थलों कोे चिन्हाँकित कर लिया जाये और उन्हें या तो भर दिया अथवा उनके चारो ओर सुरक्षा कवच के रूप में बल्ली आदि से बाड़ी लगा दी जाये जिससे बच्चे उसमें न गिरने पायें, समस्त निर्माण एजेन्सियों तथा आवासीय कॉलोनियों को यह निर्देश जारी किये जाये कि किसी भी प्रकार से निर्माण के लिए खोदे गये नींव स्थल/कॉलम स्थल/अन्य कारणों से खोदे गये गढ्ढों के चारों ओर सुरक्षा घेरा लगाकर इस प्रकार बंद करना कि वहाँ बच्चे आवाजाही करते समय न गिरें यह सुनिश्चित करें, संवेदनशील निर्माणाधीन स्थलों पर निर्माण एजेन्सियाँ एक चौकीदार/सुरक्षाकर्मी भी इस हेतु तैनात करें जो बच्चों को जोखिम से बचाने में सहायक हो सके।  अनुशंसा में यह भी लेख है कि बारिश में खेलते समय या शाला आते जाते समय पैदल चलते बच्चों को बारिश के छोटे गढ्ढे अथवा बड़े गढ्ढों में अंतर समझ में नहीं आता है एवं बच्चों को अनजाने में ही जान का खतरा उत्पन्न हो जाता है। अतः इस विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए मंत्रालय तथा विभागाध्यक्ष स्तर से पर्याप्त निर्देश प्रसारित किये जायें एवं जिला स्तर पर जिला कलेक्टर व नगरीय निकाय के उच्चाधिकारी तत्काल इस विषय पर पहल करें एवं इसे नियमित साप्ताहिक समय सीमा के पत्रों पर कार्यवाही की समीक्षा के विषय के रूप में शामिल किया जाये। आयोग ने उक्तानुसार अनुशंसा पर कार्यवाही करते हुए निर्देश प्रसारित कर आयोग को दिनांक 07 जुलाई 2026 तक लिखित में अवगत कराने का भी लेख किया है।

प्रशिक्षण व्यावहारिक, सार्थक एवं प्रभावी होना चाहिए : राज्यमंत्री बागरी

नमामि गंगे मिशन अंतर्गत बेतवा नदी के वैज्ञानिक एवं समग्र पुनर्जीवन के लिये क्षमता वर्धन कार्यशाला प्रशिक्षण व्यावहारिक, सार्थक एवं प्रभावी होना चाहिए : राज्यमंत्री बागरी भोपाल राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी के मुख्य आतिथ्य में नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत बेतवा नदी के वैज्ञानिक एवं समग्र पुनर्जीवन के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने संबंधी दो दिवसीय क्षमता वर्धन कार्यशाला का शुभारंभ भोपाल में किया गया। राज्यमंत्री श्रीमती बागरी ने कहा कि भारत में नदियाँ केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति का केंद्र हैं। आमजन नदियों के जल को सर्वाधिक शुद्ध एवं पवित्र मानते हैं। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में डीपीआर तैयार करने संबंधी दिया जाने वाला प्रशिक्षण व्यावहारिक, सार्थक एवं प्रभावी होना चाहिए, जिससे भविष्य में तैयार होने वाली परियोजनाएँ नदी संरक्षण के उद्देश्य को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें। राज्यमंत्री श्रीमती बागरी ने कहा कि डीपीआर तैयार करते समय प्राकृतिक स्रोतों की उपयोगिता तथा उनके संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में प्रकृति की पूजा का मूल उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण है, क्योंकि नदियों और वृक्षों के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। वृक्ष प्राकृतिक रूप से नदियों को स्वच्छ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बरसाती नालों की नियमित सफाई पर भी विशेष जोर देते हुए कहा कि इससे नदियों को प्रदूषण से बचाने में प्रभावी सहायता मिलती है। उन्होंने बहुउद्देशीय कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएँ दीं। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के कार्यकारी निदेशक बृजेन्द्र स्वरूप ने कहा कि नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत गंगा की सहायक नदियों, विशेष रूप से बेतवा नदी के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप नमामि गंगे मिशन कार्य कर रहा है। उन्होंने मिशन के पाँच प्रमुख स्तंभों— अविरल गंगा, निर्मल गंगा, जन गंगा, ज्ञान गंगा और अर्थ गंगा—की जानकारी देते हुए इनके महत्व पर प्रकाश डाला। नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे ने सभी आमंत्रित विषय विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित यह दो दिवसीय कार्यशाला बेतवा नदी के पुनर्जीवन के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगी। कार्यक्रम में नमामि गंगे मिशन के निदेशक धीरज जोशी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रमुख अभियंता प्रदीप मिश्रा भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय पर्यावरण विशेषज्ञ सीताराम टैगोर ने किया।  

मंत्री केदार कश्यप बोले- आदिवासी समाज के सशक्त नेतृत्व और शिक्षा से बन रहा नया छत्तीसगढ़

आदिवासी समाज के सशक्त नेतृत्व और शिक्षा से नए छत्तीसगढ़ का निर्माण हो रहा है : मंत्री केदार कश्यप छत्तीसगढ़ कंडरा आदिवासी समाज के सामाजिक भवन का हुआ लोकार्पण, उत्कृष्ट प्रतिभाओं का सम्मान शिक्षा, संगठन और संस्कार से समाज होगा मजबूत, युवाओं से आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार रायपुर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप आज रायपुर के महादेव घाट में आयोजित छत्तीसगढ़ कंडरा आदिवासी समाज के सामाजिक भवन लोकार्पण, सम्मान समारोह एवं वार्षिक अधिवेशन में शामिल हुए। उन्होंने नवनिर्मित सामाजिक भवन का लोकार्पण किया और शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा तथा विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले समाज के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों एवं प्रतिभाओं को सम्मानित किया। शिक्षा और संगठन समाज की सबसे बड़ी ताकत               मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक ताकत उसकी शिक्षा, संगठन और संस्कार होते हैं। आज आदिवासी समाज के युवा शिक्षा, प्रशासन, तकनीक, व्यवसाय, खेल और जनप्रतिनिधित्व सहित अनेक क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। यह नए और विकसित होते छत्तीसगढ़ का सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि आज दूरस्थ क्षेत्रों के आदिवासी युवा डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, उद्यमी और जनप्रतिनिधि बनकर समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। सामाजिक भवन बनेगा विकास और मार्गदर्शन का केंद्र               मंत्री कश्यप ने कहा कि सामाजिक भवन केवल एक भवन नहीं, बल्कि समाज की एकता, संवाद, संस्कार और नई पीढ़ी के मार्गदर्शन का केंद्र है। यहां विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, सांस्कृतिक गतिविधियों, सामाजिक कार्यक्रमों और समाज के विकास से जुड़े कार्यों के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे। शासकीय योजनाओं से आदिवासी समाज को मिल रहा सशक्त आधार               कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। नई शिक्षा नीति, छात्रवृत्ति, आवासीय विद्यालय, कौशल विकास, वनाधिकार, स्वरोजगार, लघु वनोपज का बेहतर मूल्य तथा महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण जैसी योजनाओं से आदिवासी समाज को आगे बढ़ाया जा रहा है। युवाओं को आगे बढ़ाने का किया आह्वान              मंत्री केदार कश्यप ने समाज के वरिष्ठजनों से अपनी समृद्ध परंपराओं और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आग्रह किया। उन्होंने युवाओं को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, डिजिटल तकनीक और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने की अपील की।             कार्यक्रम के अंत में मंत्री केदार कश्यप ने सामाजिक भवन के निर्माण के लिए समाज को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि संगठित समाज, शिक्षित युवा और सशक्त नेतृत्व के बल पर छत्तीसगढ़ कंडरा आदिवासी समाज विकास और प्रगति की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

डॉलर पर बढ़ा वैश्विक दबाव! सेंट्रल बैंक घटा सकते हैं होल्डिंग्स, बदल सकता है आर्थिक समीकरण

न्यूयॉर्क क्‍या डॉलर के बुरे दिन शुरू होने वाले हैं, अब डॉलर दुनिया में दबदबे वाली करेंसी नहीं रहेगी या क्‍या दुनिया को डॉलर का विकल्‍प मिल गया है? एक रिपोर्ट में ऐसा खुलासा किया गया है, जिसके बाद आपके भी मन में ये सभी सवाल घूमने लगेंगे. रॉयटर्स की रिपोर्ट में एक सर्वे के हवाले से कहा गया है कि दुनिया अब डॉलर रिजर्व को कम करने की तैयारी कर रही है. दुनिया में ऐसा पहली बार होने जा रहा है।  यह सर्वे ऑफिशियल मॉनिटरी एंड फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशंस फोरम (OMFIF) की ओर से की गई है. इस सर्वे में कहा गया है कि पहली बार दुनिया के केंद्रीय बैंक आने वाले 10 सालों में अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में अमेरिकी डॉलर की हिस्‍सेदारी बढ़ाने के बजाय घटाने की योजना बना रहे हैं, जो यह संकेत देता है कि फॉरेक्‍स रिजर्व पोर्टफोलियो को दुनिया डाइवर्सिफाइड रखना चाहती है।  पहले क्‍यों होती थी सिर्फ डॉलर बढ़ाने की बात?  दरअसल, दुनिया में सबसे स्थिर करेंसी डॉलर मानी जाती रही है और पूरी दुनिया डॉलर में ही एक दूसरे देश से कारोबार कर रहे हैं. चाहे तेल का आयात हो या किसी फूड आइटम्‍स का निर्यात डॉलर में ही लेनदेन होता रहा है, लेकिन अब स्थिति‍ धीरे-धीरे बदल रही है. कई देश लोकल करेंसी में आयात-निर्यात करना शुरू कर चुके हैं और अमेरिका के दबाव वाली राजनीति से नाराज भी दिख रहे हैं. सर्वे में खुलासा हुआ है कि ऐसा पहली बार है कि ज्‍यादातर देश डॉलर होल्डिंग्‍स को अगले 10 साल में कम करने जा रहे हैं।  क्‍यों हो रही डॉलर घटाने की बात?  सर्वे के अनुसार, केंद्रीय बैंकों को तीन बड़े रिस्‍क दिखाई दे रहे हैं, जो डॉलर को लेकर पैदा हुए हैं. इसमें सबसे बड़ा अमेरिकी राजनीतिक अनिश्‍चतता, जिससे डॉलर की स्थिर रहने पर सवाल खड़ा हुआ है. दुसरा कई देशों के साथ अमेरिका का जियो-पॉलिटिकल टेंशन, जिस कारण डॉलर में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. खासकर ईरान जंग के दौरान डॉलर में अस्थिरता काफी दिखाई दी है. तीसरी सबसे बड़ी वजह ग्‍लोबल फाइनेंशियल सिस्‍टम का मल्‍टीपोलर होना यानी ज्‍यादातर देश अब सिर्फ डॉलर नहीं, बल्कि अलग-अलग करेंसी में एक दूसरे के साथ ट्रेड कर रहे हैं. इसका सीधा मतलब है कि दुनियाभर के देश अब सिर्फ डॉलर पर निर्भर नहीं रहना चाहते हैं।  डॉलर की जगह कौन-कौन सी करेंसी ज्‍यादा पसंद हैं  अभी डॉलर का विकल्‍प स्‍पष्‍ट तौर पर दिखाई नहीं देता है, लेकिन अगर ऐसा ही रहा तो बहुत जल्‍द दुनिया डॉलर को पीछे छोड़कर किसी दूसरे करेंसी की ओर बढ़ेगी. सर्वे में कहा गया है कि डॉलर की जगह सबसे ज्‍यादा पसंद किए जाने वाली चीजों में सोना, यूरो, ब्रिटिश पाउंड, चीनी युआन, नॉर्वे की क्रोन और न्‍यूजीलैंड डॉलर है. हालांकि, सर्वे का यह भी कहना है कि यूरो और युआन की अपनी लिमिटेशन हैं, यही कारण है कि वे डॉलर का पूर्ण विकल्‍प नहीं बन पाए हैं।  सोने का बढ़ रहा रिजर्व रॉयटर्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस सर्वे से पहले एक अन्‍य सर्वे में कहा गया है कि रिकॉर्ड संख्या में केंद्रीय बैंक अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाने की योजना बना रहे हैं. कई देशों के लिए सोना अब जियो-पॉलिटिकल रिस्‍क के खिलाफ सुरक्षा और रिजर्व को डाइवर्सिफाई रखने का प्रमुख साधन बनता जा रहा है।  डॉलर का वजूद मिट जाएगा? रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी तक ऐसा नहीं दिखाई देता है कि डॉलर का प्रभुत्‍व दुनिया से खत्‍म हो जाएगा, क्‍यों डॉलर अभी दुनिया की सबसे बड़ी रिजर्व करेंसी है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और सुरक्षित निवेश के रूप में उसकी भूमिका बहुत मजबूत बनी हुई है. बदलाव अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे हो रहा है।  भारत पर क्‍या असर होगा?  अगर डॉलर से निर्भरता कम होती है तो भारत जैसे देश अपनी करेंसी को बढ़ावा दे सकते हैं और दुनिया के साथ रुपये में कारोबार बढ़ सकता है. साथ ही अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने और अन्य मुद्राओं का हिस्सा बढ़ा सकते हैं. हालांकि, ये अचानक नहीं होगा, बल्कि डॉलर का दबदबा धीरे-धीरे कम हो सकता है। 

योगी सरकार के प्रयासों से UP में आर्द्रभूमियों का संरक्षण तेज, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई रफ्तार

योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहा आर्द्रभूमियों का संरक्षण 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियां हो चुकी हैं अधिसूचित, 36 जिलों से नए प्रस्ताव मिले जल संरक्षण, पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने के लिए सरकार चला रही विशेष अभियान लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण और विकास पर लगातार काम कर रही है। वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत प्रदेशभर में आर्द्रभूमियों की पहचान, सीमांकन और अधिसूचना की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है।      मुख्य सचिव के समक्ष हुए प्रस्तुतीकरण के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में से 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियों को अब तक अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें कानपुर नगर सहित गोरखपुर, बाराबंकी, महाराजगंज, प्रयागराज, आगरा, सहारनपुर, कुशीनगर, उन्नाव और अन्य जिले शामिल हैं। इन आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2750 हेक्टेयर है। वहीं 36 जिलों से 44 नई आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने के प्रस्ताव भी सरकार को प्राप्त हुए हैं। इसलिए जरूरी हैं आर्द्रभूमियां आर्द्रभूमियां केवल तालाब या झील नहीं होतीं, बल्कि ये प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने, भूजल स्तर बनाए रखने, सिंचाई में मदद करने, बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने, मछली पालन और अन्य आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करती हैं। इसके अलावा ये पर्यावरण को संतुलित रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। सीमांकन और संरक्षण पर विशेष जोर योगी सरकार आर्द्रभूमियों की सीमाओं का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण भी करा रही है ताकि उन पर अतिक्रमण न हो और उनका संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सके। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 14,562 स्थानों पर सीमा निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी सरकार राज्य की प्रमुख आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके लिए रामसर साइट के मानकों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेज, मानचित्र, फोटोग्राफ और अन्य तकनीकी जानकारी तैयार की जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश की अधिक से अधिक आर्द्रभूमियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

उपराज्यपाल की समीक्षा के बाद दिल्ली में घटा ट्रैफिक जाम, डिजिटल सिस्टम से मिला सुधार

नई दिल्ली दिल्ली में ट्रैफिक नियमों के कड़ाई से पालन करने के चलते बीते तीन महीनों के दौरान जाम की समस्या करीब एक तिहाई कम हुई।उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने यातायात जाम से निपटने के उपायों की समीक्षा की और पुलिस को एआई और डिजिटल यातायात प्रबंधन प्रणाली का तेजी से विस्तार करने का निर्देश दिया। संधू ने पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा और यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मकसद दो अप्रैल को टोडापुर स्थित दिल्ली यातायात पुलिस मुख्यालय के दौरे के दौरान दिए गए निर्देशों के पालन का जायज़ा लेना था। अधिकारियों के अनुसार, गूगल मैप के जरिए हर 15 मिनट पर दर्ज किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से 25 जून के बीच शहर में औसत जाम की लंबाई घटकर 32.43 किलोमीटर रह गई, जबकि जनवरी-मार्च के दौरान यह 48.25 किलोमीटर थी। यातायात पुलिसकर्मियों की सड़कों पर बढ़ेगी तैनाती उन्होंने बताया कि यातायात पुलिसकर्मियों की सड़कों पर बढ़ी मौजूदगी, पैदल गश्त, इंजीनियरिंग संबंधी सुधारों और प्रौद्योगिकी आधारित प्रवर्तन उपायों के कारण स्थिति में सुधार आया है। दिल्ली यातायात पुलिस की नागरिक-केंद्रित 'प्रोजेक्ट संगम' पहल के तहत चिह्नित 62 प्राथमिक यातायात 'हॉटस्पॉट' में से 34 स्थानों पर महीने-दर-महीने जाम में कमी दर्ज की गई।     उनके मुताबिक, कैलाश नगर में पुश्ता रोड पर यातायात जाम में 82.59 प्रतिशत की कमी आई, जबकि खजूरी चौक पर 74.29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। तीन मूर्ति गोलचक्कर पर भी यातायात प्रवाह में 66.01 प्रतिशत का सुधार देखा गया।     हालांकि, सड़क निर्माण और अन्य कारकों के कारण चार स्थानों पर जाम बढ़ गया। इनमें नारायणा फ्लाईओवर भी शामिल है, जहां जाम 1.28 प्रतिशत बढ़ा। इसके अलावा साउथ एक्सटेंशन पार्ट-1 में 7.55 प्रतिशत, मैक्स अस्पताल, साकेत में 14.93 प्रतिशत और भवभूति मार्ग पर जाम 349.87 प्रतिशत बढ़ा।     अधिकारियों ने द्वारका मोड़, सराय काले खां, मुकरबा चौक और डाबड़ी गोल चक्कर को भी लगातार जाम लगने वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया, जिसके लिए तत्काल बुनियादी ढांचे और परिचालन हस्तक्षेप की आवश्यकता है। अतिक्रमण पर एजेंसियों का एक्शन उपराज्यपाल को सूचित किया गया कि अतिक्रमण हटाने और यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी), नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) जैसी नगर निकाय एजेंसियों के साथ संयुक्त सर्वेक्षण और नियमित समन्वय बैठकें शुरू की गई हैं।     बैठक के दौरान, संधू ने यातायात नियमों के उल्लंघनों की चौबीसों घंटे निगरानी और बेहतर जाम प्रबंधन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित और डिजिटल प्रवर्तन प्रणालियों को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।     उन्होंने कहा कि यातायात जाम से न केवल समय और ईंधन की बर्बादी होती है, बल्कि शहर में प्रदूषण का स्तर भी काफी बढ़ जाता है।