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Pakistan से Paris तक फीका पड़ा चीन का एयर डिफेंस, जानिए क्यों घट रही है वैश्विक मांग

बीजिंग  पेरिस में दुनिया के सबसे बड़े ड‍िफेंस फेयर में से एक यूरोसैटरी खत्म हुआ. यहां अमेरिका, फ्रांस, इजरायल, साउथ कोरिया और चीन समेत दुनिया की बड़ी ड‍िफेंस कंपनियां अपने सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम लेकर पहुंचीं. चीन भी पूरे आत्मविश्वास के साथ गया. नोरिन्को ने स्काई ड्रैगन-100, यितियन-II, लेजर वेपन और एंटी-ड्रोन सिस्टम का प्रदर्शन किया. लेकिन क‍िसी ने द‍िलचस्‍पी नहीं द‍िखाई. सवाल ये क‍ि अगर चीनी सिस्टम इतने दमदार हैं, तो यूरोप और नाटो देशों की कतारें चीन के स्टॉल पर क्यों नहीं दिख रहीं? जवाब वॉर जोन में छ‍िपा है।  चीन के एयर डिफेंस सिस्टम का सबसे बड़ा ग्राहक पाकिस्तान है. पाकिस्तान के पास HQ-9/P जैसे लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम हैं, जिन्हें चीन अपनी तकनीकी क्षमता का प्रतीक बताता है. यही वजह है कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ा और भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, तब रक्षा विशेषज्ञों के बीच यह सवाल उठा कि पाकिस्तान के चीनी एयर डिफेंस सिस्टम का प्रदर्शन कैसा रहा।      भारत और पाकिस्तान, दोनों ने इस अभियान के बारे में अलग-अलग दावे किए. भारत ने सबूतों के साथ कहा क‍ि उसने चाइनीज एयर ड‍िफेंस स‍िस्‍टम की धज्‍ज‍ियां उड़ा दीं. इसके बाद से चीनी एयर ड‍िफेंस सिस्‍टम को लेकर शक गहराने लगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल पूछे जाने लगे क‍ि चीनी ड‍िफेंस स‍िस्‍टम क्‍या सच में पाक‍िसतान में प‍िट गया? किसी भी हथियार के लिए वास्तविक युद्ध उसकी सबसे बड़ी परीक्षा होता है और यही परीक्षा चीन के लिए असहज सवाल छोड़ गई।  पेरिस में चीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यूरोसैटरी में चीन का उद्देश्य साफ था ग्लोबल साउथ के अलावा यूरोप में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाना. लेकिन रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह रास्ता आसान नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की सबसे बड़ी ताकत उसकी कम कीमत है. अमेरिका या यूरोप के मुकाबले चीन अपने एयर डिफेंस सिस्टम काफी सस्ते में बेच सकता है. यही कारण है कि पाकिस्तान, मिस्र, अजरबैजान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान जैसे देशों ने चीनी सिस्टम खरीदे हैं. लेकिन यूरोप का बाजार सिर्फ कीमत नहीं देखता. वहां यह भी देखा जाता है कि हथियार असली युद्ध में कितना सफल रहा है, क्या वह नाटो नेटवर्क के साथ काम कर सकता है, उसकी लॉजिस्टिक्स कैसी हैं और लंबे समय तक उसका रखरखाव कितना भरोसेमंद रहेगा।  युद्ध ने बदल दिया एयर डिफेंस का गणित यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दुनिया को दिखा दिया कि अब सिर्फ लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइलें भी युद्ध का चेहरा बदल रही हैं. इसी वजह से एयर डिफेंस बाजार अचानक दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता रक्षा बाजार बन गया है. अमेरिका के THAAD और Patriot, यूरोप के SAMP/T NG तथा दक्षिण कोरिया के M-SAM और L-SAM जैसे सिस्टम चर्चा में हैं।  दक्षिण कोरिया ने इस दौड़ में तेजी से जगह बनाई है. यूएई ने दावा किया कि उसके M-SAM सिस्टम ने ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों के दौरान 30 में से 29 लक्ष्यों को मार गिराया. इसके बाद सऊदी अरब और इराक जैसे देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई।  चीन की असली दिक्कत सिर्फ तकनीक नहीं साउथ चाइना मार्निंग पोस्‍ट की र‍िपोर्ट के मुताबिक- रक्षा विशेषज्ञ बेन्स नेमेथ का कहना है कि कोई भी देश सिर्फ तकनीकी स्पेसिफिकेशन देखकर हथियार नहीं खरीदता. ग्राहक यह भी देखते हैं कि हथियार कितने युद्धों में इस्तेमाल हुआ, उसका रिकॉर्ड कैसा है, ट्रेनिंग और सपोर्ट कैसा मिलेगा और भविष्य में स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता कैसी रहेगी।  यही वजह है कि अमेरिकी और इजरायली सिस्टमों के पास वर्षों का युद्ध अनुभव है. यूरोपीय सिस्टमों के पास नाटो का भरोसा है. दक्षिण कोरिया तेजी से विश्वसनीय विकल्प बन रहा है. चीन के पास कीमत का फायदा जरूर है, लेकिन युद्ध में सिद्ध प्रदर्शन और रणनीतिक भरोसे के मामले में उसे अभी लंबा रास्ता तय करना है।  ईरान ने भी बढ़ाए सवाल विश्लेषकों ने ईरान का उदाहरण भी दिया है. ईरान की एयर ड‍िफेंस में रूसी और कुछ चीनी मूल के उपकरण शामिल हैं. हालिया अमेरिकी और इजरायली हमलों के दौरान ये स‍िस्‍टम ध्‍वस्‍त हो गए. हालांकि किसी एक सिस्टम पर सवाल उठाना ठीक नहीं, लेकिन माना गया क‍ि चीन के हथ‍ियार कामयाब नहीं हुए. ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह दूसरा मौका था, जब चीन के हथ‍ियारों पर सवाल उठे।  यूरोप को पसंद क्‍यों नहीं पेरिस एयर शो और यूरोसैटरी से सबसे बड़ा संदेश यही निकला कि यूरोप अभी भी चीन के बजाय अमेरिका, यूरोप और दक्षिण कोरिया की ओर ज्यादा भरोसा जता रहा है.रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में एयर डिफेंस का बाजार और बड़ा होगा. लेकिन जीत उसी की होगी जो सिर्फ मिसाइल नहीं, बल्कि रडार, सेंसर, कमांड एंड कंट्रोल और एंटी-ड्रोन तकनीक को एकीकृत समाधान के रूप में पेश करेगा।  चीन के लिए चुनौती अब सिर्फ हथियार बनाना नहीं है, बल्कि दुनिया को यह भरोसा दिलाना है कि उसके सिस्टम वास्तविक युद्ध में भी उतने ही प्रभावी हैं जितने वे रक्षा प्रदर्शनियों में दिखाई देते हैं. पाकिस्तान के अनुभव और यूरोप की हिचकिचाहट ने इस चुनौती को और कठिन बना दिया है. इसलिए पेरिस में भले चीन ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम की पूरी दुकान सजा दी हो, लेकिन सबसे बड़े और सबसे भरोसेमंद ग्राहकों का विश्वास जीतना उसके लिए अभी भी सबसे कठिन लड़ाई बना हुआ है।   

Scholarship 2026: बीड़ी एवं खदान श्रमिकों के बच्चों को मिलेगा छात्रवृत्ति का लाभ, जानें आवेदन की अंतिम तारीख

बीड़ी एवं खदान श्रमिकों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति आवेदन 31 अक्टूबर तक भोपाल श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। योजना के अंतर्गत बीड़ी एवं खदान श्रमिकों के अध्ययनरत संतानों को स्‍कूली शिक्षा से लेकर उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को पात्र विद्यार्थियों तक योजना की जानकारी पहुंचाने तथा समय-सीमा में आवेदन एवं सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। उच्च शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए छात्रवृत्ति आवेदन राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) पर एक जून से प्रारंभ हो चुके हैं। पात्र विद्यार्थी 31 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। विभाग ने महाविद्यालयों से अधिकाधिक पात्र विद्यार्थियों को योजना से जोड़ने और उनके आवेदनों का समयबद्ध सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा है। योजना के अंतर्गत कक्षा एक से लेकर व्यावसायिक पाठ्यक्रमों तक अध्ययनरत विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 1,000 रुपये से 25,000 रुपये तक की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। कक्षा एक से चौथी तक के विद्यार्थियों को 1,000 रुपये, कक्षा 5 से 8 तक 1,500 रुपये, कक्षा 9 एवं 10 के विद्यार्थियों को 2,000 रुपये, कक्षा 11 एवं 12 के विद्यार्थियों को 3,000 रुपये तथा आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं डिग्री पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को 6,000 रुपये की सहायता दी जाती है। वहीं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को 25,000 रुपये प्रतिवर्ष तक की छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाती है। यह सहायता राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से हस्तांतरित की जाती है। योजना का लाभ बीड़ी श्रमिकों, लौह अयस्क, मैंगनीज एवं क्रोम अयस्क खदान श्रमिकों, चूना पत्थर एवं डोलोमाइट खदान श्रमिकों के पात्र बच्चों को दिया जाता है। यह योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है।  

भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से आसान होंगे भूमि रिकॉर्ड, राजस्व सेवाओं में आएगी पारदर्शिता

भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से राजस्व सेवाएँ होंगी अधिक प्रभावी, भूमि रिकॉर्ड प्राप्त करना होगा आसान डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम का जबलपुर एवं नर्मदापुरम संभाग में प्रथम चरण पूर्ण भोपाल एवं सागर संभाग के 11 जिलों में जुलाई से शुरू होगा अगला चरण भोपाल प्रदेश के नागरिकों को भूमि संबंधी सरकारी अभिलेखों की सहज, त्वरित और पारदर्शी उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ पुराने भू-अभिलेखों के सुरक्षित संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत प्रदेश में चरणबद्ध रूप से डिजिटाइजेशन का कार्य किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से राज्य के लगभग 15 करोड़ पुराने भू-अभिलेख रिकॉर्ड का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिसके लिए दस्तावेज प्रबंधन प्रणाली और डीबीईएस सॉफ्टवेयर विकसित किए जा रहे हैं। वर्ष 2008 में शुरू हुए राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम को 1 अप्रैल 2016 से डीआईएलआरएमपी के रूप में पुनर्गठित किया गया था। इसके तहत मॉडर्न रिकॉर्ड रूम (एमआरआर) के अंतर्गत पुराने अभिलेखों के डिजिटाइजेशन की रूपरेखा तैयार की गई। योजना के फेज-1 (2013-2020) में लगभग 3,18,82,222 दस्तावेजों और फेज-2 (2021-22) में लगभग 2,39,24,462 दस्तावेजों की स्कैनिंग का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। अब फेज-3 के तहत 15 करोड़ रिकॉर्ड्स के डिजिटाइजेशन का कार्य किया जा रहा है। परियोजना में जिला स्तर पर अत्याधुनिक स्कैनिंग केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। दस्तावेजों की सुरक्षित स्कैनिंग, मेटा-डाटा एंट्री और भोपाल में डीबीईएस आधारित डबल-बाइंड डेटा एंट्री की व्यवस्था की गई है। आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित क्षेत्र के पटवारी द्वारा ऑनलाइन गुणवत्ता परीक्षण किया जाएगा। अंतिम रूप से सत्यापित रिकॉर्ड ‘भूलेख पोर्टल’ पर ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना के प्रथम चरण में जबलपुर एवं नर्मदापुरम संभाग के 12 जिलों में लगभग 2.70 करोड़ दस्तावेजों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग पूरी कर ली गई है। इन जिलों में डेटा एंट्री का कार्य निरंतर जारी है। दूसरे चरण में भोपाल एवं सागर संभाग के 11 जिलों में जुलाई 2026 से कार्य प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए संबंधित जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से राजस्व व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। साथ ही नागरिकों को अपने भूमि रिकॉर्ड ऑनलाइन देखने और प्राप्त करने में आसानी होगी। इससे भूमि अभिलेखों का सुरक्षित संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ राजस्व सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता में भी वृद्धि होगी।  

मिड-डे मील में गड़बड़ी पर सख्ती, खाली बोरों की राशि जमा नहीं करने पर महालेखाकार की आपत्ति

रांची  पीएम पोषण योजना (मध्याह्न भोजना योजना) के तहत चावल के खाली बोरे की राशि सरस्वती वाहिनी के बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य है। इसे प्रधानाध्यापक या कोई शिक्षक अपने पास नहीं रख सकता। साथ ही स्कूलों को इसका पूरा हिसाब-किताब सरकार को देना है। महालेखाकार द्वारा कई जिलों में बोरे की राशि सरस्वती वाहिनी के बैंक खाते में जमा नहीं होने पर आपत्ति व्यक्त करते हुए हर हाल में राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसे लेकर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने भी सभी जिलों के जिला शिक्षा अधीक्षकों को यह राशि हर हाल में जमा करने को कहा है। महालेखाकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर 2025-26 तक मध्याह्न भोजन में चावल के उपयोग के बाद खाली बोरे के हिसाब-किताब दुरुस्त नहीं होने तथा राशि जमा नहीं होने की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है। इस अवधि में चावल के उपयोग के बाद खाली बोरे के लिए प्रति बोरा 14.40 रुपये जमा किया जाना है। इस राशि का सही तरह से आकलन कर पूरी राशि को सरस्वती वाहिनी की बैंक खाते में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जिलों को इसकी रिपोर्ट देने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस आशय के निर्देश मिलने के बाद कुछ जिलों में इसके पूर्व के वर्षों की राशि का भी हिसाब-किताब लिया जा रहा है। बताते चलें कि स्कूलों को कुकिंग कास्ट के रूप में निर्धारित राशि दी जाती है, जबकि चावल एफसीआई के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं। चावल की राशि एफसीआई को झारखंड मध्याह्न भोजन प्राधिकरण द्वारा दी जाती है, जिसमें केंद्रांश की 60 प्रतिशत तथा राज्यांश की 60 प्रतिशत राशि होती है।

IMD Weather Update: मानसून की धमाकेदार एंट्री, 48 घंटे तक भारी बारिश और तेज तूफान की चेतावनी

लखनऊ  भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और उमस से उत्तर प्रदेश के लोगों को राहत मिलने की बारी आ गई है. मौसम का मिजाज करवट बदलने जा रहा है. मौसम विभाग की ताजा बुलेटिन के अनुसार, मानसूनी हवाओं ने उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर दस्तक दे दी हैं, जिससे अगले दो दिनों के भीतर प्रदेश का मौसम पूरी तरह सुहावना हो जाएगा।  आधिकारिक मौसम विभाग की बुलेटिन के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटों के भीतर मानसून उत्तर प्रदेश में पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा. 30 जून से ही राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मानसूनी बारिश शुरू हो जाएगा. जुलाई के पहले सप्ताह तक मानसून की रफ्तार इतनी तेज होगी कि यह पूरे उत्तर प्रदेश को अपनी आगोश में ले लेगा और झमाझम बारिश से सूबे को सराबोर कर देगा।  तापमान 10 डिग्री तक की भारी गिरावट मौसम विभाग का कहना है कि मानसून के सक्रिय होते ही उमस भरी गर्मी से राहत मिली. अधिकतम तापमान में भी 7 से 10 डिग्री सेल्सियस तक की बड़ी गिरावट दर्ज होने की संभावना है. हालांकि, सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली जैसे सुदूर दक्षिणी जिलों के निवासियों को अभी अगले दो दिनों तक थोड़ी तपिश और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है, जिसके बाद वहां भी मौसम साफ और ठंडा हो जाएगा।  66 जिलों में गरज-चमक और बिजली गिरने का अलर्ट मौसम के बदलते रुख को देखते हुए विभाग ने उत्तर प्रदेश के 66 जिलों में विशेष चेतावनी जारी की है. इन जिलों में तेज हवाएं चलने, गरज-चमक होने और अचानक वज्रपात (आकाशीय बिजली गिरने) की आशंका जताई गई है. खासकर तराई के इलाकों (नेपाल सीमा से सटे जिलों) में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है, जिसके लिए स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने को कहा गया है।  पश्चिमी विक्षोभ भी बढ़ाएगा बारिश की रफ्तार मौसम वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने विशेष जानकारी देते हुए बताया कि पिछले कई दिनों से शुष्क और भीषण गर्मी का जो दौर चल रहा था, वह अब खत्म होने की कगार पर है क्योंकि ‘मॉनसूनल फ्लो’ (मानसूनी हवाओं का प्रवाह) काफी मजबूत हो चुका है. इसके साथ ही, आगामी 2 जुलाई को एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय होने जा रहा है. इन दोनों मौसमी प्रणालियों के एक साथ मिलने के कारण उत्तर प्रदेश में मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो चुकी हैं और बारिश का यह दौर लंबा खिंचेगा। 

रोजगार बढ़ाने की बड़ी पहल: उद्योगों की जरूरत के अनुरूप मिलेगा प्रशिक्षण, तय हुए कड़े मानक

लखनऊ प्रदेश में युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित कर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए कौशल विकास व्यवस्था का विस्तार किया गया है। प्रदेश में 800 से अधिक प्रशिक्षण साझेदारों को जोड़ा गया है, जिनके माध्यम से युवाओं को नई तकनीक, आधुनिक उद्योगों और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण मिलेगा। प्रशिक्षण व्यवस्था में निजी संस्थानों के साथ बड़े औद्योगिक समूहों, सरकारी संस्थानों और स्टार्टअप को भी शामिल किया गया है। सभी श्रेणियों के प्रशिक्षण साझेदारों के लिए कड़े पात्रता मानक तय किए गए हैं, ताकि प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार सुनिश्चित किया जा सके। नई तकनीक और भविष्य की जरूरतों वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने के लिए न्यू एज ट्रेनिंग पार्टनर्स (एनटीपी) को शामिल किया गया है। इनके लिए कम से कम तीन वर्ष पुराना पंजीकरण, एक करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार, 500 प्रशिक्षित अभ्यर्थी, 50 प्रतिशत प्लेसमेंट और कम से कम दो संचालित प्रशिक्षण केंद्र होना अनिवार्य किया गया है। प्राइवेट ट्रेनिंग पार्टनर्स (पीटीपी) के तहत 500 से अधिक संस्थानों को पैनल में शामिल किया गया है। इनके लिए तीन वर्ष का अनुभव, पिछले तीन वर्षों में औसतन दो करोड़ रुपये का कारोबार, कम से कम 2,000 युवाओं को प्रशिक्षण और 1,000 को रोजगार दिलाने का अनुभव जरूरी है। इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग पार्टनर्स (आइटीपी) के रूप में 35 प्रतिष्ठित औद्योगिक समूहों को फ्लेक्सी एमओयू के माध्यम से जोड़ा गया है। इनमें रेमंड, काफी डे ग्लोबल लिमिटेड, मारुति इंडिया लिमिटेड और फ्यूचर शार्प स्किल्स लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं। इनके लिए 100 करोड़ रुपये का औसत कारोबार, हर वर्ष कम से कम 500 युवाओं को प्रशिक्षण, न्यूनतम तीन वर्ष का अनुबंध और 80 प्रतिशत प्लेसमेंट सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इसके अलावा 300 से अधिक सरकारी ट्रेनिंग पार्टनर्स (जीटीपी) भी इस अभियान से जुड़े हैं। वहीं, स्टार्टअप ट्रेनिंग पार्टनर्स (एसटीपी) के माध्यम से नवाचार आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। इनके लिए वैध पंजीकरण, कम से कम 25 लाख रुपये का कारोबार, पर्याप्त प्रशिक्षण ढांचा, प्रशिक्षित प्रशिक्षक, ब्लैकलिस्ट न होने व राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप पाठ्यक्रम संचालित करने जैसी शर्तें निर्धारित की गई हैं।

मोदी कैबिनेट विस्तार में MP की बढ़ेगी हिस्सेदारी? महिला सांसद की दावेदारी मजबूत, कई दिग्गजों की बढ़ी बेचैनी

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कई नए चेहरों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दे सकती है। मध्य प्रदेश से भी कुछ सांसदों के नाम गंभीरता से चर्चा में हैं, जिनमें भिंड सांसद संध्या राय और हाल ही में राज्यसभा पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग प्रमुख माने जा रहे हैं। जाटव वोट बैंक पर नजर, संध्या राय का नाम सबसे आगे भिंड से दूसरी बार सांसद बनीं संध्या राय को संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में राज्यमंत्री बनाया जा सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जाटव समाज से आने वाली संध्या राय को केंद्रीय जिम्मेदारी देकर भाजपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले दलित और जाटव मतदाताओं तक मजबूत संदेश देना चाहती है। भिंड का भौगोलिक और सामाजिक समीकरण उत्तर प्रदेश से जुड़ता है, इसलिए उनका राजनीतिक उपयोग केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं माना जा रहा। तरुण चुग को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और हाल ही में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद बने तरुण चुग का नाम भी केंद्रीय मंत्रिमंडल के लिए मजबूत दावेदारों में शामिल है। संगठन में लंबे अनुभव और पंजाब की राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए उन्हें कैबिनेट स्तर की जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव की रणनीति में भी उन्हें अहम भूमिका सौंपी जा सकती है। पुराने चेहरों की भूमिका बदलने की चर्चा सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार केवल नए मंत्रियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव संभव है। लंबे समय से केंद्र में मंत्री रहे कुछ नेताओं को संगठन में नई भूमिका दी जा सकती है, जबकि उनकी जगह नए सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व वाले चेहरों को अवसर मिल सकता है। वीडी शर्मा और गणेश सिंह भी चर्चा में खजुराहो सांसद एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का नाम भी लगातार चर्चाओं में बना हुआ है। संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर उनकी भूमिका को लेकर मंथन जारी बताया जा रहा है। वहीं सतना से लगातार पांचवीं बार सांसद गणेश सिंह को भी कुर्मी-पटेल समाज के प्रभावशाली प्रतिनिधि के रूप में देखा जा रहा है। यदि भाजपा सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता देती है तो उन्हें भी मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है। आदिवासी प्रतिनिधित्व पर भी नजर यदि आदिवासी नेतृत्व में बदलाव होता है तो शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और खरगोन सांसद गजेन्द्र सिंह पटेल के नाम भी सामने आ सकते हैं। दोनों नेताओं की संगठन में सक्रियता और अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक पकड़ को भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। चुनावी रणनीति से जुड़ा हो सकता है विस्तार राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संभावित मंत्रिमंडल विस्तार केवल प्रशासनिक फैसला नहीं होगा, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश, पंजाब और अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर सामाजिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश भी होगी। ऐसे में मध्य प्रदेश के कई सांसदों की राजनीतिक भूमिका आने वाले दिनों में बदल सकती है।हालांकि, केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित नामों को लेकर अभी तक भाजपा या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अंतिम फैसला प्रधानमंत्री और पार्टी नेतृत्व की सहमति के बाद ही सामने आएगा। भाजपा विधायक रीति पाठक बनने वाली हैं मंत्री? वायरल खबरों के बीच खुद बता दी पूरी सच्चाई मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। इसी बीच सीधी से भाजपा विधायक और दो बार की पूर्व सांसद रीति पाठक का बयान सामने आने के बाद इन अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनके मंत्री बनाए जाने की चर्चाएं तेज थीं, लेकिन उन्होंने स्वयं इन खबरों को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी की ओर से उन्हें इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई है। रीति पाठक ने कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी की एक समर्पित कार्यकर्ता हैं और संगठन जिस भी जिम्मेदारी का निर्णय करेगा, उसका पूरी निष्ठा और ईमानदारी से पालन करेंगी। उन्होंने कहा कि मंत्री पद को लेकर जो खबरें सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही हैं, उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर भी अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लिखा कि पिछले कुछ दिनों से मंत्री बनाए जाने को लेकर भ्रामक और तथ्यहीन खबरें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि ऐसी मनगढ़ंत अफवाहें फैलाने वालों से उनका कोई संबंध नहीं है और जनता को ऐसी खबरों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। गौरतलब है कि रीति पाठक वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में सीधी सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुई थीं। इससे पहले वह इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए दो बार लोकसभा सदस्य भी रह चुकी हैं। विधानसभा में आने के बाद से समय-समय पर उनके राज्य मंत्रिमंडल में शामिल होने की चर्चाएं उठती रही हैं, लेकिन अब उनके ताजा बयान ने इन सभी अटकलों को फिलहाल विराम दे दिया है। हालांकि राज्य सरकार या भाजपा संगठन की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में चर्चाएं भले जारी हों, लेकिन फिलहाल मंत्री पद को लेकर सामने आ रही खबरों की पुष्टि नहीं हुई है।

MP में 125 दिन रोजगार की गारंटी वाली ‘VB-G राम जी’ योजना होगी लागू, जिलों को नई कार्ययोजना बनाने के निर्दे

भोपाल  मनरेगा की जगह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण (वीबी जीराम जी) योजना एक जुलाई से स्थान लेने जा रही है। मध्य प्रदेश में इसकी तैयारी हो गई है। सभी जिलों को एक्शन प्लान बनाने के लिए कहा गया है। इसके पहले मनरेगा के अंतर्गत उन कार्यों को 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य है, जो नई योजना में नहीं है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि इस अवधि तक काम पूरे नहीं हुए तो बचे कार्यों पर खर्च होने वाली राशि का बोझ राज्य सरकार पर आएगा। इनमें गैर अनुमत कार्य जैसे तालाबों में पानी का कटाव रोकने के लिए पत्थर का बधान बनाना आदि शामिल हैं। नई योजना में कई अहम बदलाव नई योजना लागू होने के बाद कई बड़े परिवर्तन होने जा रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा यह कि मनरेगा में 266 तरह के कार्य थे, जबकि नई योजना में 318 तरह के सम्मिलित किए गए हैं। वर्ष में 125 दिन रोजगार की गारंटी रहे है, जबकि मनरेगा में सौ दिन की थी। वर्ष में 60 दिन का ड्राई पीरियड रहेगा, यानी इस अवधि में काम नहीं होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अभी इस पर निर्णय नहीं हुआ है। हालांकि, खेती की कटाई का समय इसके लिए रखा जा सकता है। कारण, इस समय मजदूर कटाई में व्यस्त रहते हैं। ग्रामीण मजदूरों को अब 100 की जगह 125 दिन का मिलेगा रोजगार उन्होंने कहा कि एकाध राज्य सरकारों ने बताया है कि "जी राम जी" कानून को नोटिफाई करने की तैयारी चल रही है, इसके बावजूद योजना 1 जुलाई से लॉन्च हो जाएगी. जी राम जी कानून के लागू होने के बाद 01 जुलाई से ग्रामीण मज़दूरों को 100 दिन की जगह 125 दिन का रोजगार मिलने लगेगा. इस योजना को कार्यान्वित करने के लिए सरपंचों को ट्रेनिंग दी गयी है, ग्राम पंचायत कैसे ग्रामीण विकास की योजनाएं बनाएंगे उससे जुड़ी औपचारिकताएं पूरी कर ली गयी हैं।  भारत सरकार ने विकसित भारत-जी राम जी कानून को लागु करने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹95,692.31 करोड़ का बजटीय आवंटन किया है. सभी राज्यों को फंड आवंटित कर दिया गया है. राज्य भी तैयार है, केंद्र भी तैयार है.राज्यों के संभावित राज्यांश सहित इस कार्यक्रम का कुल परिव्यय ₹1.51 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है।  जल संग्रहण जरूरी है शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमने लगातार यह कोशिश की है और निर्देश दिए हैं कि जो पुरानी वॉटर बॉडीज है उनको समय पर ठीक कर लिया जाए. जितनी नयी वॉटर बॉडीज बन सकती हैं बनायीं जाएं. छोटी-छोटी वाटर बॉडीज जैसी संरचनाएं तैयार की जाएं और जल के संरक्षण के जितने भी प्रकार के काम हैं. उनको इस योजना के तहत सर्वोच्च वरीयता दी जाए जिससे अगर पानी कम भी गिरे तो हम बारिश के पानी को संग्रहित कर सकें और इसका उपयोग खेती के लिए और पीने के पानी के लिए भी हम सही उपयोग कर सकें।  अल नीनो से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों की कर ली है पहचान उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उन 111 ज़िलों की पहचान कर ली है जहां अल नीनो का ज्यादा असर पढ़ने की आशंका है. लेकिन असर 300 जिलों से ज्यादा पर पड़ने की आशंका है.हमने राज्यों को पूरी जानकारी दे दी है कि उनके यहां कौन-कौन से ज़िले या इलाके संवेदनशील हैं. इन सभी प्रभावित होने वाले ज़िलों में उन्हें खेती या रोजगार में जहां भी कमी आएगी "जी राम जी" कानून के तहत सभी प्रभावित लोगों को रोजगार देने के लिए तैयार रहना होगा. हमारी तैयारी है कि बिना किसी परेशानी के ये ट्रांजीशन मनरेगा से "जी राम जी" कानून में हो जाएगा. हमारी कोशिश है कि कोई भी मजदूर एक दिन तो क्या 1 घंटे भी बिना रोजगार के ना रहे. कोई परेशानी उसको ना आए. E-KYC में अगर कहीं कमी रह गयी है तो सारे रास्ते हमने निकाल लिए हैं.  हमने यह सुनिश्चित कर लिया है।  बनेंगे नए जॉब कार्ड मजदूरों के नए जॉब कार्ड बनाए जाएंगे, लेकिन जब तक नहीं बनते पुराने कार्ड के आधार पर ही उन्हें रोजगार दिया जाएगा। पंचायतों को तीन श्रेणी में बांटकर विकास कार्य कराए जाएंगे। पिछड़ी, जिला मुख्यालय से दूर और अधिक एससी-एसटी आबादी वाली पंचायतों को 'सी' श्रेणी में रखा जाएगा। यानी, यहां ज्यादा काम कराए जाएंगे। इसके बाद बी श्रेणी की पंचायतों में इससे कम और ए श्रेणी वाली में सबसे कम काम होंगे। वर्गीकरण का आधार अभी तक हुए विकास कार्य होंगे।  

1 जुलाई से आपकी जेब पर असर! LPG, Credit Card और कारों से जुड़े 5 बड़े बदलाव जानिए

नई दिल्ली जून का महीना खत्म होने वाला है और 5 दिन बाद जुलाई महीने की शुरुआत हो जाएगी. हर महीने की तरह अगला महीना भी अपने साथ कई बड़े बदलावों (Rule Change From 1st July) को लेकर शुरू होने जा रहा है. इनमें एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव के साथ ही क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियम भी बदलने जा रहे हैं. इसके अलावा कार के शौकीनों को महंगाई का झटका लगने वाला है. आइए ऐसे ही 5 बड़े बदलावों के बारे में जानते हैं।  पहला बदलाव: LPG सिलेंडर के दाम बदलेंगे हर महीने की पहली तारीख को देश के लोगों की नजर तेल कंपनियों द्वारा एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में किए जाने वाले संशोधन पर टिकी होती है, क्योंकि ये मामला सीधे घर की रसोई के बजट से जुड़ा हुआ है. अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते गहराई मिडिल ईस्‍ट टेंशन के बीच LPG Price Hike का कई बार झटका लगा. बीते 1 जून को भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 53.50 रुपये महंगा हुआ था, जिसके बाद 19 Kg LPG Cylinder Price In Delhi 3113.50 रुपये का हो गया था. वहीं 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर पर भी महंगाई का बम फूटा था. हालांकि, 14 किलोग्राम वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें स्थिर रखी गई थीं।  दूसरा बदलाव: ATF की कीमतों में संशोधन जुलाई महीने की पहली तारीख से दूसरा बड़ा बदलाव हवाई सफर करने वाले यात्रियों से जुड़ा है. दरअसल, तेल कंपनियां न सिर्फ एलपीजी की कीमतों में संशोधन (LPG Price Change) करती हैं, बल्कि एयर टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के दाम में भी बदलाव करती हैं. इसकी कीमत में होने वाली बढ़ोतरी हवाई यात्रा के खर्च में बढ़ोतरी करने वाली साबित होती है, तो वहीं इसमें गिरावट खर्च में कटौती का कारण बनती है।  तीसरा बदलाव: HDFC क्रेडिट कार्ड रूल  HDFC Bank का क्रेडिट कार्ड यूज करते हैं, तो फिर आपके लिए भी 1 जुलाई 2026 की तारीख बदलाव (Credit Card Rule Change) लेकर आ रही है. दरअसल, एचडीएफसी बैंक रेगैलिया गोल्ड क्रेडिट कार्ड यूजर्स को घरेलू एयरपोर्ट लाउंज की फ्री सर्विस जारी रखने के लिए तिमाही खर्च की नई लिमिट पूरी करनी होगी. ताजा संशोधन के मुताबिक, इस क्रेडिट कार्ड के यूजर्स को अगली तिमाही में इस फ्री सर्विस का लाभ लेने के लिए पिछली तिमाही में मिनिमम 60,000 रुपये खर्च करने होंगे।  चौथा बदलाव: फ्री में आधार अपडेट  जुलाई की पहली तारीख से UIDAI आधार कार्ड यूजर्स को राहत देने जा रहा है. रेग्युलेटर की ओर से जारी नोटिफिकेशन को देखें, तो Aadhaar Card पर आपकी ईमेल आईडी अपडेट नहीं है, तो 1 जुलाई से यह काम फ्री में होने वाला है. यूआईडीएआई आधार में ईमेल को अपडेट करने के लिए दिसंबर तक यानी 6 महीने के लिए फ्री सर्विस दे रहा है. इससे पहले इस काम को करने के लिए 75 रुपये का चार्ज लागू था।  पांचवां बदलाव: कार खरीदना होगा महंगा जुलाई के पहले दिन से कार खरीदारों को झटका लगने वाला है. KIA मोटर्स समेत कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी कारों के दाम बढ़ाने जा रही हैं. किआ ने अपनी कारों की कीमतों में 2 फीसदी तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है, तो वहीं Tata Motors भी ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) और EV मॉडल्स की कीमतों में 1.5% तक की बढ़ोतरी करने की तैयारी में है। 

1 जुलाई से बदल जाएंगे LPG के कई नियम, गैस कनेक्शन, KYC और सिलेंडर बुकिंग पर पड़ेगा असर

 नई दिल्‍ली इंडेन गैस, भारत पेट्रोलियम और भारत गैस के LPG कस्‍टमर्स को बड़ा झटका लगने वाला है, क्‍योंकि 1 जुलाई से नया नियम लागू हो रहा है. आपको बुकिंग मे दिक्‍कत, गैस नेक्‍शन कटना और अन्‍य परेशानियां उठानी पड़ सकती है. लेकिन यह सभी एलपीजी यूजर्स के लिए नहीं होगी।  केंद्र सरकार ने हाल ही में एलपीजी नियम में संशोधन आदेश लागू किया है. नए नियम के तहत, जिनके पास पहले से ही PNG कनेक्शन है, उनका HP, Inden या भारत गैस LPG कनेक्शन एक महीने के भीतर काट दिया जाएगा, जो लोग स्वेच्छा से अपना LPG कनेक्शन छोड़ देते हैं, उन्हें पूरी तरह से नुकसान नहीं होगा. उन्हें एक कूपन मिलेगा जिससे वे जरूरत पड़ने पर बाद में अपना एलपीजी कनेक्शन फिर से एक्टिव कर सकेंगे।  मार्च में ही सरकार ने निर्देश दिया था कि जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचाने का बुनियादी ढांचा मौजूद है, वहां LPG यूजर्स को तीन महीने के भीतर PNG सिस्‍टम में बदलना होगा, नहीं तो उनका एलपीजी कनेक्शन काट दिया जाएगा. यह समय सीमा जून के अंत तक समाप्त हो रही है।  अगर पीएनजी सिस्‍टम वाले किसी भी क्षेत्र में रहने वाले जिन लोगों ने अभी तक स्विच नहीं किया है, उन्हें जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए. इसके लिए आप अपने नजदीकी पीएनजी गैस कनेक्‍शन वाली कंपनी से संपर्क कर सकते हैं।  30 जून E-KYC जमा करने की लास्‍ट डेट इस नियम के अलावा, सभी एलपीजी कनेक्‍शन होल्‍डर्स के लिए ई-केवाईसी वेरिफाई करना भी जरूरी है, जिसकी लॉस्‍ट डेट 30 जून है. अगर आप इसे पूरा नहीं करते हैं, तो आपका कनेक्‍शन काटा जा सकता है. जिस कारण अगले सिलेंडर की बुकिंग करना मुश्किल हो जाएगा. जिन कस्‍टमर्स ने पहले ही अपना ई-केवाईसी पूरा कर लिया है, उन्‍हें आगे कुछ भी करने की आवश्‍यकता नहीं है।  कमर्शियल एलपीजी के पाबंदियों में छूट  सरकार ने पश्चिम एशिया में तनाव कम होने का हवाला देते हुए कमर्शियल एलपीजी सप्‍लाई पर लगे प्रतिबंधों को पहले ही हटा दिया है. इस कदम से अब घरेलू एलपीजी नियमों में भी इसी तरह की राहत मिलने की उम्मीदें बढ़ रही हैं।  दोबारा बुकिंग के नियम  फिलहाल, ग्राहकों को दोबारा बुकिंग कराने से पहले शहरों में 25 दिन और गांवों में 45 दिन का इंतजार करना पड़ता है. यह प्रतिबंध सरकार ने युद्ध के दौरान जमाखोरी रोकने और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लागू किया था.  होर्मुज में परिचालन सामान्य होने के साथ ही, यह उम्मीद बढ़ रही है कि 1 जुलाई से यह अंतराल कम हो सकता है. हालांकि अभी तक इसकी कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है।