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वन मंत्री केदार कश्यप ने बीजापुर को दी 18 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात

वन मंत्री केदार कश्यप ने  बीजापुर जिले को 18 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों की दी सौगात मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 14वें चरण का शुभारंभ हितग्राहियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का मिला लाभ रायपुर वन एवं जलवायु परिवर्तन, सहकारिता, परिवहन एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने जिले को 18 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 14वें चरण का शुभारंभ करते हुए 16 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक लागत के विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा 2 करोड़ 9 लाख रुपये के विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को सामग्री एवं प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए। 16 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का भूमिपूजन                वन मंत्री कश्यप ने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि एवं अधोसंरचना विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें मिरतुर और बेदरे में ट्रांजिट हॉस्टल निर्माण, उसूर में वरिष्ठ कृषि अधिकारी भवन, आवापल्ली एवं कुटरू में शासकीय महाविद्यालय भवन, भैरमगढ़ महाविद्यालय में अतिरिक्त कक्ष निर्माण तथा दुगईगुड़ा से चिंताकोंटा तक सड़क एवं पुल-पुलिया निर्माण कार्य शामिल हैं।  इन परियोजनाओं से शिक्षा, कृषि सेवाओं और आवागमन सुविधाओं को मजबूती मिलेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को नई गति प्राप्त होगी। जिला अस्पताल सहित कई सुविधाओं का लोकार्पण                लोकार्पित कार्यों में जिला अस्पताल परिसर में रैन बसेरा, दाल-भात केंद्र, अत्याधुनिक अटल आरोग्य लैब, कार्यालय सह गोदाम भवन, विद्यालय भवन, पंचायत भवन, पुलिया निर्माण तथा शैक्षणिक संस्थानों में तार फेंसिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। अटल आरोग्य लैब में अब 134 प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का शुभारंभ               कार्यक्रम के दौरान मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 14वें चरण का शुभारंभ किया गया। अभियान के माध्यम से जिले में मलेरिया नियंत्रण, समय पर जांच और उपचार के लिए विशेष गतिविधियां संचालित की जाएंगी, जिससे लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ               कार्यक्रम में विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। स्वामित्व योजना के अंतर्गत वनाधिकार पट्टों का वितरण किया गया। वहीं निष्क्षय योजना के तहत पोषण आहार फूड बॉक्स, पुनर्वासित परिवारों को आयुष्मान कार्ड, गर्भवती महिलाओं को जच्चा-बच्चा कार्ड तथा दिव्यांगजनों को बैटरी चालित ट्राइसाइकिल प्रदान की गई। विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है बीजापुर                वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बीजापुर में अब विकास की नई धारा बह रही है। पहले जिन क्षेत्रों तक पहुंचना कठिन था, वहां आज सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।  उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जनकल्याण और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। आयुष्मान भारत सहित कई योजनाएं बदल रहीं जीवन               मंत्री कश्यप ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, महतारी वंदन योजना तथा तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए संचालित विभिन्न योजनाएं लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन योजनाओं से समाज के सभी वर्गों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बीजापुर आने वाले वर्षों में विकास और समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छुएगा।               इस अवसर पर बस्तर सांसद महेश कश्यप, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती गीता सोम पुजारी, कलेक्टर विश्वदीप, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, डीएफओ डॉ. सागर यादव, जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चैबे सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

जैविक खेती बनेगी किसानों की समृद्धि का आधार, पर्यावरण को भी मिलेगा फायदा: केदार कश्यप

जैविक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बल – वन मंत्री केदार कश्यप किसानों को जैविक खेती की उन्नत तकनीकों से जोड़ने कृषि कार्यशाला का सफल आयोजन दंतेवाड़ा को जैविक कृषि का मॉडल जिला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रायपुर,  किसानों और कृषि प्रेमियों को रासायनिक खादों व कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक और टिकाऊ खेती करने के लिए प्रशिक्षित करने हेतु आयोजित की गई है। दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय जैविक कृषि कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसानों, ग्रामीण युवाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और कृषि विशेषज्ञों ने भाग लिया। जैविक खेती स्वस्थ समाज और समृद्ध कृषि का आधार                कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती की अपार संभावनाएं हैं। यहां की प्राकृतिक परिस्थितियां और किसानों की मेहनत जैविक कृषि के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि जैविक खेती केवल उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से भी जुड़ी है। जैविक खेती अपनाकर किसान भूमि की उर्वरता बनाए रखने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्यान्न उत्पादन कर सकते हैं। किसानों के लिए संचालित हो रही हैं अनेक योजनाएं                वन मंत्री कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार भी किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण और कृषि विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने किसानों से खेतों की मेड़ों पर अधिक से अधिक पौधारोपण करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे भूमि संरक्षण, जल संवर्धन और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा मिलेगा। जैविक खेती बनेगी दंतेवाड़ा की नई पहचान               क्षेत्रीय विधायक चौतराम अटामी ने कहा कि जिले के किसान जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाकर बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को वैज्ञानिक जानकारी, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर खेती को अधिक उन्नत एवं लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने किसानों से कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संचालित योजनाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अधिकतम लाभ लेने की अपील की। वैज्ञानिकों ने दी उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी              कार्यशाला के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने जैविक खेती, हरी खाद, जैव उर्वरक, वर्मी कम्पोस्ट, प्राकृतिक कीट एवं रोग प्रबंधन, मूल्य संवर्धन तथा जैविक उत्पादों के विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी किसानों को दी। किसानों की समस्याओं का समाधान भी विशेषज्ञों द्वारा किया गया। विभिन्न विभागों ने लगाए जानकारी एवं प्रदर्शनी स्टॉल              कार्यक्रम में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, उद्यानिकी विभाग, पशुपालन विभाग, मत्स्य विभाग तथा भूमगादी संस्था द्वारा स्टॉल लगाकर किसानों को विभिन्न योजनाओं, तकनीकों और कृषि नवाचारों की जानकारी दी गई। साथ ही कृषकों को कृषि आदान सामग्री एवं आम के पौधों का वितरण भी किया गया। महिला स्व-सहायता समूहों ने प्रदर्शित की नवाचार क्षमता               कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों द्वारा रागी से तैयार केक का प्रदर्शन किया गया। मुख्य अतिथि ने केक काटकर महिला समूहों के प्रयासों की सराहना की और मूल्य संवर्धन आधारित गतिविधियों को ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।  कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष अरविन्द कुंजाम, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुनीता भास्कर सहित जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी तथा जिले के विभिन्न गांवों से आए किसान, ग्रामीण युवा और महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।

वन मंत्री केदार कश्यप बोले – जैविक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बल

रायपुर.  किसानों और कृषि प्रेमियों को रासायनिक खादों व कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक और टिकाऊ खेती करने के लिए प्रशिक्षित करने हेतु आयोजित की गई है। दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय जैविक कृषि कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसानों, ग्रामीण युवाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और कृषि विशेषज्ञों ने भाग लिया। जैविक खेती स्वस्थ समाज और समृद्ध कृषि का आधार कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती की अपार संभावनाएं हैं। यहां की प्राकृतिक परिस्थितियां और किसानों की मेहनत जैविक कृषि के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि जैविक खेती केवल उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से भी जुड़ी है। जैविक खेती अपनाकर किसान भूमि की उर्वरता बनाए रखने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्यान्न उत्पादन कर सकते हैं। किसानों के लिए संचालित हो रही हैं अनेक योजनाएं वन मंत्री कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार भी किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण और कृषि विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने किसानों से खेतों की मेड़ों पर अधिक से अधिक पौधारोपण करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे भूमि संरक्षण, जल संवर्धन और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा मिलेगा। जैविक खेती बनेगी दंतेवाड़ा की नई पहचान क्षेत्रीय विधायक चौतराम अटामी ने कहा कि जिले के किसान जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाकर बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को वैज्ञानिक जानकारी, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर खेती को अधिक उन्नत एवं लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने किसानों से कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संचालित योजनाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अधिकतम लाभ लेने की अपील की। वैज्ञानिकों ने दी उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी कार्यशाला के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने जैविक खेती, हरी खाद, जैव उर्वरक, वर्मी कम्पोस्ट, प्राकृतिक कीट एवं रोग प्रबंधन, मूल्य संवर्धन तथा जैविक उत्पादों के विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी किसानों को दी। किसानों की समस्याओं का समाधान भी विशेषज्ञों द्वारा किया गया। विभिन्न विभागों ने लगाए जानकारी एवं प्रदर्शनी स्टॉल कार्यक्रम में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, उद्यानिकी विभाग, पशुपालन विभाग, मत्स्य विभाग तथा भूमगादी संस्था द्वारा स्टॉल लगाकर किसानों को विभिन्न योजनाओं, तकनीकों और कृषि नवाचारों की जानकारी दी गई। साथ ही कृषकों को कृषि आदान सामग्री एवं आम के पौधों का वितरण भी किया गया। महिला स्व-सहायता समूहों ने प्रदर्शित की नवाचार क्षमता कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों द्वारा रागी से तैयार केक का प्रदर्शन किया गया। मुख्य अतिथि ने केक काटकर महिला समूहों के प्रयासों की सराहना की और मूल्य संवर्धन आधारित गतिविधियों को ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।  कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष अरविन्द कुंजाम, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुनीता भास्कर सहित जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी तथा जिले के विभिन्न गांवों से आए किसान, ग्रामीण युवा और महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।

हरियर छत्तीसगढ़’ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण सबकी जिम्मेदारी: वन मंत्री केदार कश्यप

हरियर छत्तीसगढ़ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण हमारी जिम्मेदारी- वन मंत्री केदार कश्यप विश्व पर्यावरण दिवस पर वन मंत्री ने प्रदेशवासियों को दी बधाई, पौधा लगाने का किया आह्वान एक पेड़ मां के नाम अभियान बना जनआंदोलन उदंती-सीतानदी में दूधराज का घोंसला समृद्ध जैव विविधता का प्रतीक रायपुर विश्व पर्यावरण दिवस के गरिमामय अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध वन संपदा, अनुपम जैव विविधता और अद्वितीय प्राकृतिक संसाधनों के कारण देश का एक अत्यंत समृद्ध राज्य है। वर्तमान में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है। जनआंदोलन बना एक पेड़ मां के नाम अभियान          वन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण सहित हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए कई प्रभावी योजनाएं चलाई जा रही हैं। ष्एक पेड़ मां के नामष् अभियान के तहत पिछले दो वर्षों में राज्य में करोड़ों पौधों का रोपण किया गया है। आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से अब यह अभियान एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। 44 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पूंजी         मंत्री  कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से ढका है, जो हमारी सबसे बड़ी प्राकृतिक संपदा है। वन विभाग द्वारा वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक पुनर्जनन और व्यापक वृक्षारोपण के माध्यम से इस हरित आवरण को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। सुरक्षित हुए प्राकृतिक आवास, बढ़ा जल स्तर       कश्यप ने वन्यजीवों के संरक्षण पर बात करते हुए बताया कि राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में वन्यप्राणियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाल ही में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में मध्य प्रदेश के राजकीय पक्षी दूधराज द्वारा घोंसला बनाने का दुर्लभ दृश्य देखा गया है, जो हमारी सुरक्षित एवं अनुकूल पर्यावरण प्रणाली का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसके अलावा, वन क्षेत्रों में हज़ारों जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से वन्यजीवों को सालभर पानी मिल रहा है और भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका को बढ़ावा          वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वनाश्रित परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लघु वनोपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य के लिए कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी लें।

रायपुर: वन मंत्री केदार कश्यप ने दी सुविधा, अब एक फोन कॉल पर मिलेगी बाजार और योजनाओं की जानकारी

रायपुर : अब एक फोन कॉल पर मिलेगी बाजार और योजनाओं की जानकारी- वन मंत्री केदार कश्यप 13 लाख संग्राहक परिवारों को स्थानीय भाषाओं में मिलेगा आजीविका और बाजार भाव का अपडेट रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने वनांचल में रहने वाले वनोपज संग्राहकों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने आज नया रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय से “छत्तीसगढ़ वनोपज संरक्षण वाणी” और आईवीआरएस (IVRS) आधारित सूचना एवं संवाद तंत्र का शुभारंभ किया। यह नवाचार राज्य के 13 लाख से अधिक वनोपज संग्राहक परिवारों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाएगा। यह डिजिटल कदम छत्तीसगढ़ के वनांचल में आर्थिक क्रांति और जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखेगा। कैसे काम करेगी यह व्यवस्था? (मिस्ड कॉल सेवा)          संग्राहकों को जानकारी प्राप्त करने के लिए किसी जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी। संग्राहकों को टोल फ्री नंबर +91-9811125813 पर एक मिस्ड कॉल करना होगा। मिस्ड कॉल के बाद 911 से शुरू होने वाले नंबर से उपयोगकर्ता को कॉल बैक आएगा। कॉल रिसीव करते ही संग्राहक अपनी स्थानीय बोलियों जैसे हल्बी, गोंडी आदि में महत्वपूर्ण जानकारियां सुन सकेंगे। जानकारी सुनने के साथ ही उपयोगकर्ता अपनी राय, अनुभव और सुझाव भी रिकॉर्ड कर सकेंगे। ’प्रमुख लाभ और उद्देश्य’        स्थानीय बोलियों को प्राथमिकता के कारण वनांचल की क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी मिलने से सूचनाओं का प्रसार अधिक प्रभावी होगा। जंगल, वनोपज संरक्षण, सतत संग्रहण, बाजार भाव (Market Rates) और सरकारी योजनाओं की सटीक जानकारी सीधे संग्राहकों तक पहुंचेगी। बाजार भाव और मूल्य संवर्धन की सही जानकारी मिलने से बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और संग्राहकों की आय बढ़ेगी। यह केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि संग्राहकों और शासन के बीच संवाद का एक मजबूत मंच बनेगा। ’मंत्री केदार कश्यप का संदेश’        वनोपज संग्राहकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक जानकारी पहुँचाने का यह प्रयास राज्य के लाखों परिवारों के लिए आजीविका का संबल बनेगा। वनोपज संरक्षण वाणी तकनीक और जनसहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। संचालन और महत्व        यह पहल छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित, रायपुर द्वारा संचालित की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आईवीआरएस आधारित यह संवाद तंत्र राज्य में वनाधारित आजीविका को संगठित और मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित की ईडी- श्रीमती संजीता गुप्ता, डीजीएम जाधव सागर रामचंद्र, महाप्रबंधक सुबीर कुमार दत्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

वन मंत्री केदार कश्यप ने चिल्फी और सरोधा दादर की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की

 रायपुर : चिल्फी और सरोधा दादर की प्राकृतिक सुंदरता से अभिभूत हुए वन मंत्री केदार कश्यप छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के बैगा एथनिक रिजॉर्ट की सराहना भोरमदेव अभ्यारण्य के शुभारंभ पर किया प्रवास  रायपुर छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा संचालित बैगा एथनिक रिजॉर्ट (सरोधा दादर) में प्रवास के दौरान राज्य के उभरते पर्यटन स्थलों की मुक्तकंठ से सराहना की। भोरमदेव अभयारण्य के शुभारंभ के अवसर पर पहुंचे मंत्री कश्यप ने यहाँ एक दिवसीय रात्रि विश्राम किया और चिल्फी घाटी सहित सरोधा दादर की मनमोहक प्राकृतिक छटा का आनंद लिया। मेडिटेशन के लिए उपयुक्त       कश्यप ने कहा कि सरोधा दादर का वातावरण इतना सुकून, शांतिपूर्ण और स्फूर्तिदायक है कि यहाँ एक दिन का प्रवास भी कम प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि यह स्थान मेडिटेशन के लिए उपयुक्त है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यहाँ का मौसम और नैसर्गिक परिवेश मानसिक शांति, योग और ध्यान के लिए सर्वथा उपयुक्त है। पर्यटन विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि नवाचार और सतत विकास के कारण छत्तीसगढ़ अब राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। मंत्री कश्यप ने बताया कि सरोधा दादर जैसे स्थलों का विकास न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि स्थानीय जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली को भी वैश्विक मंच प्रदान कर रहा है। बैगा एथनिक रिजॉर्ट की विशेषता       मंत्री कश्यप ने रिजॉर्ट की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ आने वाले पर्यटकों को प्रकृति के सानिध्य में पारंपरिक जनजातीय जीवनशैली का एक अनूठा और जीवंत अनुभव प्राप्त होता है। प्रवास के अंत में उन्होंने संकेत दिया कि वे शीघ्र ही पुनः इस शांत और सुरम्य स्थल का भ्रमण करेंगे। यह प्रवास क्षेत्र में पर्यटन विकास की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

रायपुर : माओवाद के बाद विकास की नई राह: पुसपाल बनेगा ईको-टूरिज्म हब

रायपुर : माओवाद के बाद विकास की नई राह: पुसपाल बनेगा ईको-टूरिज्म हब रिसॉर्ट और ओपन रेस्टोरेंट से बढ़ेगा पर्यटन और आजीविका के साधन : मंत्री केदार कश्यप रायपुर कोण्डागांव जिले के पुसपाल क्षेत्र से माओवाद खत्म होने के बाद अब विकास की नई तस्वीर उभर रही है। वर्षों तक प्रभावित रहने के कारण जहां पर्यटन गतिविधियां ठप थीं, वहीं अब केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से क्षेत्र में शांति स्थापित हुई है और पर्यटन की संभावनाएं फिर से जीवंत हो गई हैं। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए वन मंत्री केदार कश्यप ने ग्राम परौदा में लगभग एक करोड़ 45 लाख 96 हजार रूपए की लागत से बनने वाले ईको-टूरिज्म रिसॉर्ट का भूमिपूजन किया। इसके साथ ही पुसपाल क्षेत्र में ही एक करोड़ 70 लाख रुपये की लागत से नदी तट पर बनने वाले ओपन रेस्टोरेंट का भी भूमिपूजन किया। वन मंत्री कश्यप ने कहा कि पुसपाल को विकसित करने का उद्देश्य कोण्डागांव–बस्तर ईको-टूरिज्म सर्किट को मजबूत बनाना है। अभी तक पर्यटक टाटामारी और चित्रकूट तक ही सीमित रहते थे, लेकिन अब पुसपाल में नई गतिविधियां शुरू होने से पर्यटन का दायरा भी बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि यहां भंवरडीह नदी में एटीवी राइड, एडवेंचर स्पोर्ट्स, रिवर राफ्टिंग और बांस राफ्टिंग जैसी गतिविधियां शुरू की जाएंगी। साथ ही पुसपाल वैली में व्यू पॉइंट से सूर्यास्त का अद्भुत नजारा देखने के साथ पर्यटक ईको-कॉटेज में रात्रि में सितारों से भरे आकाश का आनंद लेते हुए विश्राम कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि ईको-टूरिज्म के विकास से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और क्षेत्र की संस्कृति को देश-विदेश में पहचान मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान तेंदूपत्ता संग्राहकों को संग्रहण कार्ड भी वितरित किए गए। मंत्री कश्यप ने संग्राहकों से अपील की कि वे अधिक मात्रा में और अच्छी गुणवत्ता का तेंदूपत्ता संग्रह करें, ताकि उन्हें बेहतर मूल्य और बोनस का लाभ मिल सके। अंत में वन विभाग ने सभी जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से वनों को आग से बचाने, उनकी सुरक्षा करने और अवैध अतिक्रमण रोकने में सहयोग की अपील की। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य श्रीमती यशोदा कश्यप सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों की उपस्थिति रही।

मंत्री केदार कश्यप का बयान: राज्य में वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए हो रहे निरंतर प्रयास

रायपुर : जीवन प्रकृति पर आधारित,राज्य में वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास-मंत्री केदार कश्यप विश्व वानिकी दिवस पर कार्यशाला आयोजित वैज्ञानिक तकनीक, वनीकरण के महत्व और भविष्य के लिए वनों के प्रबंधन पर विशेषज्ञों की चर्चा  विश्व वानिकी दिवस पर कार्यशाला आयोजित रायपुर विश्व वानिकी दिवस 21 मार्च के अवसर पर, वन विभाग और विभिन्न संगठनों द्वारा वन संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरण जागरूकता के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। इन कार्यक्रमों में वैज्ञानिक तकनीक, वनीकरण के महत्व और सतत भविष्य के लिए वनों के प्रबंधन पर विशेषज्ञ चर्चा करते हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप रहे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों का जीवन प्रकृति पर आधारित है और राज्य में वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने वन क्षेत्र में वृद्धि, वन्यजीवों की संख्या में बढ़ोतरी और राज्य की पहली रामसर साइट की उपलब्धि की सराहना की। साथ ही विभागीय योजनाओं को लक्ष्य आधारित और चरणबद्ध तरीके से लागू करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में टीईआरआई नई दिल्ली द्वारा वन पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन, जलवायु परिवर्तन और पारंपरिक ज्ञान से संबंधित पुस्तकों का विमोचन किया गया।                विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा अरण्य भवन, नया रायपुर स्थित दण्डकारण्य सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।  कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड विकास मरकाम ने की। उन्होंने कहा कि वनों को न काटे न कटने दे ये सरकार और हम सभी समाज के लोगों का कर्तव्य भी है। अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।            अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने कहा कि वनों की भूमिका को स्थानीय अर्थव्यवस्था और आजीविका से जोड़ते हुए जैव विविधता संरक्षण के साथ आर्थिक लाभ सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से जुड़े वित्तीय संसाधनों जैसे जीसीएफ, जीईएफ और अन्य योजनाओं के तहत परियोजनाएं तैयार करने पर जोर दिया।            कार्यशाला में तकनीकी सत्र और पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। तकनीकी सत्र में वनों से मिलने वाली पारिस्थितिकी सेवाओं पर प्रस्तुतीकरण, ग्रीन क्लाइमेट फंड परियोजनाओं की जानकारी तथा नाबार्ड द्वारा उपलब्ध वित्तीय सहायता के विकल्पों पर चर्चा की गई। वहीं, पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने वानिकी और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में हो रही प्रगति पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर राष्ट्रीय अनुकूलन कोष परियोजना से जुड़े हितग्राहियों ने भी अपने अनुभव साझा किए।           उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रत्येक वर्ष 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम “वन और अर्थव्यवस्थाएँ” है, जिसका उद्देश्य वनों के आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व को उजागर करना है। यह कार्यशाला राज्य में वन आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

वाहन सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों पर जोर कराया जाएगा कड़ाई से पालन – केदार कश्यप

रायपुर : सभी राज्यों के परिवहन मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए मंत्री केदार कश्यप सभी राज्यों के परिवहन मंत्रियों की बैठक वाहन सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों पर जोर कराया जाएगा कड़ाई से पालन – केदार कश्यप केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को मंत्री कश्यप विभागीय कार्यों और उपलब्धियों की दी जानकारी रायपुर परिवहन मंत्री केदार कश्यप आज नई दिल्ली में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित सभी राज्य के परिवहन मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए। बैठक का मुख्य फोकस सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर रहा। गडकरी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली अधिकांश मौतें सुरक्षा उपायों के पालन न करने के कारण होती हैं। उन्होंने सभी राज्यों को निर्देशित किया कि वाहन चालकों एवं सहयात्रियों द्वारा सीट बेल्ट तथा दोपहिया वाहन चालकों द्वारा हेलमेट के उपयोग को सख्ती से लागू किया जाए।               बैठक में परिवहन मंत्री कश्यप ने छत्तीसगढ़ में संचालित परिवहन से संबंधित योजनाओं, परियोजनाओं और उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी केंद्रीय मंत्री गडकरी को दी। इस अवसर पर सचिव, परिवहन विभाग एस. प्रकाश भी उपस्थित थे। ओवरलोडिंग के विरुद्ध कठोर कार्रवाई को सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने का अहम उपाय बताया गया। बैठक में ओवरलोड वाहनों पर नियमित जांच, तकनीकी निगरानी, प्रवर्तन कार्यवाही और कड़े दंडात्मक प्रावधान लागू करने पर सहमति बनी।      सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियानों, सड़क सुरक्षा मित्रों की भागीदारी, तथा स्कूलदृकॉलेज स्तर पर यातायात नियमों के प्रचार-प्रसार पर भी चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों के कैशलेस उपचार, हिट एंड रन मामलों में मुआवजा व्यवस्था, वाहन सुरक्षा के नए प्रावधान, तथा मोटर व्हीकल अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों पर भी विचार-विमर्श किया गया। आरडीटीसी और डीटीसी भवन समय पर पूर्ण करने का लक्ष्य                 मंत्री कश्यप ने केंद्र सरकार की मंशा के अनुरूप सभी स्वीकृत क्षेत्रीय चालक प्रशिक्षण केंद्र (RDTC) और जिला परिवहन केंद्र (DTC) भवनों के निर्माण को तय समय में पूरा करने की जानकारी भी दी। ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटरों से तकनीकी जांच में सुधार                 परिवहन मंत्री कश्यप ने बताया कि राज्य में अब तक 8 ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर (रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, कोरबा, राजनांदगांव, रायगढ़) संचालित हैं। मशीनों से होने वाली फिटनेस जांच पारदर्शी और तकनीकी रूप से सटीक है। इन केंद्रों के संचालन में गुजरात के बाद छत्तीसगढ़ का दूसरा स्थान है। उन्होंने बताया कि जल्द ही जांजगीर-चांपा, बलौदाबाजार, धमतरी, महासमुंद, कांकेर, दंतेवाड़ा, सारंगढ़ और सूरजपुर में भी नए केंद्र स्थापित किए जाएंगे। दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों का कैशलेस उपचार            मंत्री कश्यप ने बताया कि केंद्र सरकार की पहल पर सड़क दुर्घटना पीड़ितों के कैशलेस उपचार योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। बैठक में सड़क दुर्घटना में कमी लाने हिट एंड रन मामलों में मुआवजा,सड़क सुरक्षा अभियान,सड़क सुरक्षा मित्र,‘शून्य प्राणहानि जिला’ के लिए रायपुर का चयन जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। वाहन सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों पर जोर          बैठक में मोटर व्हीकल अधिनियम के नए प्रस्तावित संशोधनों पर भी विचार किया गया। इसके साथ ही नितिन गडकरी जी ने सड़क सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनने,सीट बेल्ट लगाने,वाहनों में ओवरलोडिंग रोकने ट्रैफिक नियमों का पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में प्रस्तुत योजनाओं और प्रस्तावों से स्पष्ट है कि  सरकार सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आधुनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

रायपुर: गिधवा-परसदा में बनेगा देश का प्रमुख पक्षी संरक्षण केंद्र, वन मंत्री केदार कश्यप की घोषणा

रायपुर : गिधवा-परसदा बनेगा देश का प्रमुख पक्षी संरक्षण केंद्र: वन मंत्री केदार कश्यप बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर का लोकार्पण एवं बर्ड सफारी का शुभारंभ 270 से अधिक पक्षी प्रजातियों को मिलेगा सुरक्षित प्राकृतिक आवास रायपुर प्रदेश के प्रसिद्ध प्रवासी पक्षी आश्रयस्थल गिधवा-परसदा क्षेत्र में आज छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर का लोकार्पण एवं बर्ड सफारी का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में हजारों ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और पर्यावरण प्रेमियों की उपस्थिति ने इस ऐतिहासिक क्षण को विशेष बना दिया। मंत्री  कश्यप ने कहा कि गिधवा-परसदा पक्षियों के संवर्धन, संरक्षण और पर्यटन के क्षेत्र में देश में नया कीर्तिमान स्थापित करेगा। यह क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाएगा। विदेशी और दुर्लभ पक्षियों का सुरक्षित आश्रय मंत्री  कश्यप ने बताया कि इस क्षेत्र में 270 से अधिक प्रजातियों के विदेशी व स्वदेशी पक्षी नियमित रूप से प्रवास करते हैं और स्थानीय जैव विविधता को समृद्ध बनाते हैं। दशकों से यह क्षेत्र साइबेरिया, यूरोप और मध्य एशिया से आए पक्षियों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास रहा है। उन्होंने कहा कि बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर के माध्यम से पर्यटक अब पक्षियों के जीवन, व्यवहार, प्रवास चक्र और जैव विविधता को वैज्ञानिक दृष्टि से समझ सकेंगे। उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्रवासियों की संवेदनशीलता और भावनात्मक जुड़ाव के कारण यह क्षेत्र देश का अनोखा वेटलैंड बन सका है। आने वाले समय में यह क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा बर्ड-वॉचिंग हब बनेगा। पर्यटन एवं रोजगार को मिलेगा बढ़ावा  कश्यप ने कहा कि बर्ड सफारी के संचालन से स्थानीय युवाओं को होम-स्टे, गाइडिंग, बोटिंग, ईको-टूरिज्म, लोकल उत्पाद बिक्री और ट्रांसपोर्ट सेवाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध होगा। उन्होंने बताया कि वेटलैंड क्षेत्र को और विकसित करने हेतु सोलर लाइटिंग, बर्ड वॉचिंग टॉवर, सूचना केंद्र, जैवविविधता अध्ययन केंद्र, पार्किंग स्थल और पर्यटक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। भारतीय संस्कृति में पक्षियों का महत्व वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पक्षियों और जीव-जंतुओं को हमेशा पूजनीय स्थान प्राप्त रहा है। वैदिक काल से लेकर आधुनिक युग तक पक्षियों को शुभता, समृद्धि और पर्यावरण संतुलन का प्रतीक माना गया है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे जैव विविधता के संरक्षण में जिम्मेदार भूमिका निभाएं। खाद्य मंत्री  दयालदास बघेल बोले-आज क्षेत्रवासियों का सपना साकार हुआ कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री  दयालदास बघेल ने कहा कि वे स्वयं इस क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और बचपन से यहां पक्षियों के विचरण को देखते आए हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों ने वर्षों पहले संकल्प लिया था कि किसी भी प्रवासी पक्षी को क्षति नहीं पहुंचानी है। इसी संकल्प ने गिधवा-परसदा को पक्षी विहार के रूप में विकसित कर दिया है। उन्होंने कहा कि आज का दिन केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि क्षेत्रवासियों के लिए गौरव और उत्साह का पर्व है। यह स्थल अब देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करेगा। कार्यक्रम को विधायक  ईश्वर साहू और कलेक्टर  रनवीर शर्मा ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। भारत का उभरता हुआ अंतर्राष्ट्रीय बर्ड-वॉचिंग सर्किट गिधवा-परसदा वेटलैंड का भूगोल प्राकृतिक जलाशयों, विशाल आर्द्रभूमियों तथा शांत वातावरण से समृद्ध है, जो प्रवासी पक्षियों हेतु आदर्श माना जाता है। यहाँ हर वर्ष सितंबर से मार्च के मध्य बारहेड गूज, कॉमन टील, पिंटेल डक, नॉर्दर्न शवलर, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, पेंटेड स्टॉर्क, ओपनबिल्ड स्टॉर्क, सारस क्रेन सहित 270 प्रजातियों के पक्षी विचरण करने आते हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि गिधवा-परसदा को राष्ट्रीय बर्ड-वॉचिंग साइट के रूप में मान्यता मिले इसे अंतर्राष्ट्रीय बर्ड-वॉचिंग सर्किट में शामिल किया जाए इस क्षेत्र को रैमसर साइट के रूप में प्रस्तावित करने की प्रक्रिया और तेज की जाए। अंतर्राष्ट्रीय बर्ड-वॉचिंग सर्किट में शामिल बर्ड वॉचिंग टॉवर, इंटरप्रिटेशन गैलरी, पर्यटक स्वागत केंद्र, प्रकृति अध्ययन केंद्र, सोलर पाथवे, नाव संचलन व्यवस्था, सुरक्षित पक्षी दमेजपदह ्रवदम , डिजिटल मॉनिटरिंग और जियो-टैगिंग प्रणाली शामिल होंगें। कार्यक्रम में विधायक  दीपेश साहू, रजककार विकास बोर्ड अध्यक्ष  प्रहलाद रजक, जनपद अध्यक्ष हेमा दिवाकर, जनपद अध्यक्ष खोरबाहरा राम साहू, जिला अध्यक्ष अजय साहू, पूर्व विधायक अवधेश चंदेल, एसडीएम नवागढ़ दिव्या पोटाई, जिला पंचायत सदस्य मधु राय  प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  वी. निवास राव, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक  अरुण पांडे, मुख्य वन संरक्षक दुर्ग सु एम. मर्सीबेला, दुर्ग संभाग के सभी मुख्य वनमंडलाधिकारी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, स्कूली बच्चे तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। 270 प्रजाति के पक्षी विचरण करने आते हैं गिधवा-परसदा में  उल्लेखनीय है कि यह क्षेत्र अपने प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण तथा हर वर्ष बड़ी संख्या में आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए जाना जाता है। यहां विभिन्न तालाबों, प्राकृतिक आर्द्रभूमि, संरक्षण क्षेत्रों तथा प्रवासी पक्षियों के आसरे का उपयुक्त स्थल है। वर्तमान मौसम में गिधवा-परसदा पहुंची पक्षी मार्च माह तक यहां विचरण कर अपने मुल्क वापस होंगी। यहां विशेष रूप से बारहेड गूज, नॉर्दर्न शवलर, कॉमन टील, पिनटेल डक, पेंटेड स्टॉर्क, ओपनबिल्ड स्टॉर्क, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, सारस क्रेन सहित 270 प्रजाति के पक्षी विचरण करते हैं। गिधवा-परसदा वेटलैंड राज्य ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख बर्ड-वॉचिंग स्थल के रूप में उभर रहा है। गिधवा-परसदा को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने का लक्ष्य राज्य सरकार की मंशा है। गिधवा-परसदा पक्षी विहार को राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय बर्ड-वॉचिंग सर्किट में भी शामिल किया जा सके। इसके लिए आधारभूत सुविधाओं का विकास, सूचनात्मक साइनबोर्ड, बर्ड वॉचिंग टॉवर, सोलर लाइटिंग, जैवविविधता अध्ययन केंद्र जैसी योजनाओं पर विस्तार से कार्य किया जाएगा। भारत को प्रमुख पक्षियों का स्वर्ग बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम  गिधवा-परसदा में बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर और बर्ड सफारी का शुभारंभ न केवल छत्तीसगढ़ की जैव विविधता को संरक्षित करेगा, बल्कि प्रदेश के पर्यटन, शोध, शिक्षा और पर्यावरणीय संवर्धन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचेगा। यह पहल निश्चित रूप से गिधवा-परसदा को भारत का प्रमुख पक्षी स्वर्ग बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। शीघ्र निराकरण हेतु पत्र सादर प्रेषित है।