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नाइजर में भारतीय बंधक संकट, उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की

नाइजर पश्चिमी अफ्रीकी देश नाइजर के डोसो क्षेत्र में बीती 15 जुलाई को बड़ा आतंकी हमला हुआ था। आतंकियों ने दो भारतीयों की भी हत्या कर दी थी। वहीं जम्मू-कश्मीर के रामबन के रहने वाले रंजीत सिंह को किडनैप कर लिया गया था। अब उनका परिवार मोदी सरकार से मदद की गुहार लगा रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी मोदी सरकार से उन्हें वापस लाने के प्रयास करने की अपील की है। जानकारी के मुताबिक रंजीत सिंह एक कंस्ट्रक्शन साइट पर काम कर रहे थे, तभी हथियारबंद आतंकियों ने हमला कर दिया। उमर अब्दुल्ला के कार्यालय ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, रंजीत सिंह की किडनैपिंग को लेकर सीएम अब्दुल्ला बेहद चिंतित हैं। उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर से मामले में दखल देने की गुजारिश की है ताकि रंजीत सिंह को सुरक्षित वापस लाया जा सके। कौन हैं रंजीत सिंह? रंजीत सिंह की पत्नी शीला देवी ने शनिवार को मोदी सरकार से पति की सुरक्षित वापसी के लिए गुहार लगाई थी। उन्होंने बताया कि रंजीत ट्रांसरेल लाइटिंग लिमिटेड में सेफ्टी ऑफिसर थे। रामबन के चक्काकुंडी गांव में उनका परिवार रहता है। रंजीत सिंह के तीन बच्चे हैं। 15 जुलाई के बाद शीला देवी की पति से बात नहीं हो पाई। शीला ने कहा, 15 जुलाई को उनसे वॉट्सऐप पर बात हुई थी। मैनेजमेंट को फोन किया तो उन्होंने बताया कि साइट पर नेटवर्क नहीं रहते हैं। शीला देवी को पति की किडनैपिंग की जानकारी अगले दिन मिली। उनके एक दोस्त ने आतंकी हमले के बारे में बताया। वहीं मैनेजमेंट का कहना है कि आतंकियों से डरकर वह जंगल में भाग गए हैं। शीला देवी ने कहा, ऐसा लगता है कि उनके पति को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस कंपनी में रंजीत सिंह काम करते थे, उसकी तरफ से भी कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है। शीला देवी ने कहा, अगर विदेश मंत्रालय चाहेगा तभी उनके पति की सकुशल वापसी हो सकती है।  

भारत की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं: ट्रंप के बयान पर धनखड़ ने रखी स्पष्ट राय

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराया है। अब इसको लेकर भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जवाब दिया है। धनखड़ ने कहा कि दुनिया की कोई ताकत भारत को निर्देश नहीं दे सकती। उन्होंने कहा कि लोगों को किसी नैरेटिव से प्रभावित नहीं होना चाहिए। धनखड़ ने कहा कि भारत को पता है कि उसे अपने मामलों को कैसे संभालना है। शीर्ष नेतृत्व लेता है फैसला उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस देश में सभी निर्णय इसके नेतृत्व द्वारा लिए जाते हैं। उपराष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि भारत आपसी सहयोग से काम करता है, परस्पर सम्मान रखता है और अन्य देशों के साथ कूटनीतिक संवाद करता है। उन्होंने कहा कि लेकिन अंततः हम संप्रभु हैं, हम अपने फैसले खुद लेते हैं। विपक्ष मांग रहा है जवाब धनखड़ की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया भारत-पाकिस्तान झड़प में ‘संघर्ष विराम’ कराने के दावे पर सरकार से स्पष्टीकरण की मांग कर रहा है। उन्होंने यहां भारतीय रक्षा संपदा सेवा के प्रशिक्षुओं के एक समूह को संबोधित करते हुए कहा कि बाहरी नैरेटिव्स से निर्देशित न हों। इस देश में, एक संप्रभु राष्ट्र में, सभी निर्णय इसके नेतृत्व द्वारा लिए जाते हैं। दुनिया में ऐसी कोई ताकत नहीं है जो भारत को यह निर्देश दे कि उसे अपने मामलों को कैसे संभालना है। क्रिकेट का दिया उदाहरण उपराष्ट्रपति ने क्रिकेट की शब्दावली में कहा कि हर खराब गेंद को खेलना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि क्या इस बात पर माथापच्ची करने की जरूरत है कि किसने क्या कहा? जो क्रिकेट पिच पर अच्छे रन बनाता है, वह हमेशा खराब गेंदें छोड़ता है। वे लुभाने वाली होती हैं, लेकिन कोशिश नहीं की जातीं। और जो कोशिश करते हैं, उनके लिए आपके पास विकेटकीपर और गली में किसी के दस्ताने होते हैं।  

‘हमने उसे फिर से जिंदा कर दिया’ – ईरान ने इजरायल को दी खुली चुनौती, डिफेंस सिस्टम को लेकर बड़ा दावा

दुबई  पिछले महीने 12 दिनों के ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान इजरायली सुरक्षा बलों के हमले में ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। अब ईरान ने इजरायल को ललकारते हुए कहा है कि उसने एक महीने के अंदर अपनी वायु वायु रक्षा प्रणालियों को दुरुस्त कर लिया है। ईरान की डेफा प्रेस समाचार एजेंसी ने रविवार को सेना के नियमित संचालन उप प्रमुख महमूद मौसवी के हवाले से बताया है कि ईरान ने पिछले महीने इजरायल के साथ हुए संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त हुई वायु रक्षा प्रणालियों को बदल दिया है। जून में हुए संघर्ष के दौरान, इजरायली वायु सेना ने ईरान के हवाई क्षेत्र पर अपना दबदबा बनाते हुए ईरान की वायु रक्षा प्रणालियों को भारी नुकसान पहुँचाया था। जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरानी सशस्त्र बलों ने भी इजरायली क्षेत्र पर लगातार मिसाइलों और ड्रोनों की बौछार की थी। ईरान के हमलों में भी इजरायल की वायु रक्षा प्रणाली आयरन डोम को भी नुकसान पहुंचा था। इसी वजह से ईरान ने इजरायल के हाइफा और तेल अवीव में सैन्य अड्डों पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमले किए थे। घरेलू संसाधनों का इस्तेमाल कर किया ठीक बहरहाल, मौसवी ने कहा, “हमारी कुछ वायु रक्षा प्रणालियाँ क्षतिग्रस्त हो गई थीं, यह ऐसी बात नहीं है जिसे हम छिपा सकें, लेकिन हमारे सहयोगियों ने घरेलू संसाधनों का उपयोग करके उन्हें पूर्व-निर्धारित प्रणालियों से बदल दिया है जिन्हें हवाई क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए उपयुक्त स्थानों पर रखा गया था।” ईरान के पास रूस निर्मित एस-300 प्रणाली युद्ध से पहले, ईरान के पास रूस निर्मित एस-300 प्रणाली के अलावा, स्वदेश निर्मित लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली बावर-373 भी थी। डेफा प्रेस की रिपोर्ट में पिछले हफ़्तों में ईरान को किसी भी विदेशी वायु रक्षा प्रणाली के आयात का ज़िक्र नहीं है। पिछले अक्टूबर में ईरानी मिसाइल कारखानों पर इज़रायल के सीमित हमलों के बाद, ईरान ने बाद में एक सैन्य अभ्यास में रूस निर्मित वायु रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन किया था ताकि यह दिखाया जा सके कि वह हमले से उबर चुका है।  

हवाई सफर में डरावना मोड़: इंजन में आग लगने पर फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग

लॉस एंजिलिस हवा में उड़ते हुए विमान के इंजन में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद आनन-फानन में विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। डेल्टा एयरलाइन का यह बोइंग विमान लॉस एंजेलिस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अटलांटा जा रहा था। फ्लाइट डीएल446 के इंजन में टेकऑफ के तुरंत बाद आग लग गई। इसका वीडियो भी सामने आया है। इसमें बाएं इंजन से धुआं निकलता दिखाई दे रहा है। हालांकि किसी तरह का हादसा नहीं हुआ और विमान को सुरक्षित एयरपोर्ट पर उतार लिया गया। फिलहाल किसी के घायल होने की जानकारी नहीं है। इमरजेंसी का हुआ था ऐलान रिपोर्ट के मुताबिक विमान में आग लगने की घटना के बाद तुरंत विमान में इमरजेंसी की घोषणा की गई। इसके बाद विमान को वापस एयरपोर्ट पर ले जाने की तैयारी शुरू हो गई। लॉस एंजिलिस एयरपोर्ट पर एटीसी ने विमान को वापस आने के लिए गाइड किया। इसके बाद ग्राउंड की इमरजेंसी सेवाओं की तैनाती का आदेश दे दिया गया। फ्लाइट डीएल446 पहले पैसिफिक के ऊपर गया। इसके बाद वह डॉनी और पैरामाउंट क्षेत्र से नीचे उतरने लगा। इस बीच विमान के क्रू मेंबर्स ने सुरक्षित लैंडिंग की पूरी तैयारी कर ली। इस दौरान विमान की गति और ऊंचाई पूरी तरह से नियंत्रण में थी। यात्रियों को दी गई सूचना विमान में बैठे यात्रियों ने घटना के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि विमान के कैप्टन ने अनाउंस किया कि इंजन में आग की बात को वेरिफाई किया जा रहा है। हालांकि अभी तक आग लगने की वजह पता नहीं है। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने जांच शुरू कर दी है। यह एयरक्राफ्ट करीब 25 साल पुराना है। इसमें दो जीई सीएफ-6 इंजन लगे हुए हैं। पहली बार नहीं यह पहली बार नहीं है जब डेल्टा के विमान में ऐसी समस्या हुई है। अप्रैल में, एक अन्य डेल्टा विमान ने ओरलैंडो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आग पकड़ ली थी। डेल्टा एयरलाइंस की उड़ान 1213 के विमान के इंजन में उस समय आग लग गई थी जब वह अटलांटा के लिए उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था। यह विमान एक एयरबस A330 था, जिसमें उस समय 282 यात्री, 10 विमान परिचारक और दो पायलट थे। हालांकि कोई घायल नहीं हुआ।

रूस में भूकंप का कहर: 7.4 तीव्रता वाला झटका, जारी हुआ सुनामी अलर्ट

रूस रूस के सुदूर पूर्वी इलाके कामचाटका में रविवार को महज़ एक घंटे के अंदर धरती पांच बार कांपी। इन भूकंपों की तीव्रता 6.6 से 7.4 के बीच रही। सबसे बड़ा झटका 7.4 तीव्रता का था, जिसके बाद अमेरिका और रूस के तटीय इलाकों के लिए सुनामी का अलर्ट जारी किया गया है। लोगों को ऊंचाई वाले इलाकों में जाने की सलाह दी गई है। सभी भूकंपों का केंद्र पेत्रोपावलोव्स्क-कामचात्स्की शहर के पूर्व में था और इनकी गहराई केवल 10 किलोमीटर रही, जिससे झटकों का असर ज़मीन पर काफी ज्यादा महसूस हुआ। भूकंप से किसी प्रकार के जाल-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। सुनामी की चेतावनी अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण विभाग (USGS) ने बताया कि 7.4 तीव्रता वाले भूकंप के बाद समुद्र में खतरनाक लहरें उठने की आशंका है। अलर्ट के मुताबिक, भूकंप के केंद्र से 300 किलोमीटर के दायरे में सुनामी लहरें आ सकती हैं। हवाई और रूस के तटीय इलाकों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। कब, कहां और कितनी थी भूकंप की तीव्रता पांचों बड़े भूकंप झटके पेत्रोपावलोव्स्क-कामचात्स्की शहर के पूर्वी हिस्से में महसूस किए गए। पहला झटका 6.6 तीव्रता का था, जो शहर से 147 किलोमीटर पूर्व में आया। इसके तुरंत बाद 151 किलोमीटर पूर्व में 6.7 तीव्रता का दूसरा झटका दर्ज किया गया। तीसरा और सबसे शक्तिशाली भूकंप 7.4 तीव्रता का था, जिसका केंद्र 144 किलोमीटर पूर्व में था। चौथा झटका 130 किलोमीटर पूर्व में 6.7 तीव्रता का रहा, जबकि अंतिम यानी पांचवां झटका 142 किलोमीटर पूर्व में 7.0 तीव्रता का रिकॉर्ड किया गया। सभी भूकंपों की गहराई करीब 10 किलोमीटर रही। बता दें कि भूकंप की बताती है कि क्षेत्र में टेक्टॉनिक प्लेटों की हलचल काफी तेज़ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ घंटों तक आफ्टरशॉक्स भी आ सकते हैं।  

धरती पर लौटे अंतरिक्ष यात्री शुभांशु: ‘स्थिर रहना भी एक कला है

नई दिल्ली भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से लौटने के बाद एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वे माइक्रोग्रैविटी में तैरते हुए नजर आ रहे हैं। इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए इस वीडियो में शुक्ला बिना हिले पूरी तरह स्थिर रहने की कोशिश में लगे हैं। उन्होंने लिखा कि आईएसएस पहुंचने के बाद वे टाइमलाइन का पालन करने और अपने टास्क व प्रयोगों को पूरा करने में व्यस्त थे। शुरू में माइक्रोग्रैविटी में हिलना-डुलना और स्टेशन को समझना थोड़ा मुश्किल था, लेकिन कुछ दिनों बाद उन्होंने अपने शरीर पर नियंत्रण पाना सीख लिया। हालांकि, पूरी तरह स्थिर रहना उनके लिए चुनौती बना रहा। शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष में छोटी सी भी हलचल आपके शरीर को हिला सकती है। ऐसे में बिल्कुल स्थिर रहने के लिए खास कौशल की जरूरत होती है। उन्होंने इसे तेज रफ्तार दुनिया में मन की शांति से जोड़ते हुए कहा कि हमें कभी-कभी रुकना और शांत रहना जरूरी है। शुक्ला ने सुझाव दिया कि तेजी से आगे बढ़ने के लिए कभी-कभी धीमा होना जरूरी होता है। चाहे गुरुत्वाकर्षण हो या न हो, स्थिर रहना एक बड़ी चुनौती है। शुभांशु शुक्ला की कैसी है सेहत शुभांशु शुक्ला स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल ग्रेस में सवार होकर धरती पर लौटे, जो सैन डिएगो के तट पर प्रशांत महासागर में उतरा। लगभग तीन सप्ताह के एक्सियॉम-4 मिशन के दौरान शुक्ला और उनकी टीम ने 31 देशों के 60 से अधिक प्रयोग किए, जिनमें भारत के इसरो के 7 प्रयोग शामिल थे। शुक्ला की वापसी भारत के कॉमर्शियल अंतरिक्ष उड़ान में बढ़ते योगदान का अहम पड़ाव है। इस बीच, इसरो ने बताया कि शुभांशु शुक्ला के मेडिकल टेस्ट से संकेत मिला कि उनकी हालत स्थिर है और तत्काल चिंता की कोई बात नहीं है। अंतरिक्ष यान से बाहर निकलते ही रिकवरी शिप पर अंतरिक्ष यात्रियों की शुरुआती स्वास्थ्य जांच की गई। बाद में, अंतरिक्ष यात्रियों को आगे की मेडिकल जांच के लिए हेलीकॉप्टर से रिकवरी शिप पर ले जाया गया।  

विधानसभा की गरिमा पर सवाल: मंत्री गेम में मस्त, विपक्ष ने घेरा

मुंबई महाराष्ट्र में शरद पवार गुट के विधायक ने मंत्री माणिकराव कोकाटे का एक वीडियो एक्स पर पोस्ट किया है। इस वीडियो में मंत्री कोकाटे विधानसभा में मोबाइल पर गेम खेलते नजर आ रहे हैं। राकांपा-शरद पवार के विधायक रोहित पवार ने अजीत पवार की राकांपा की आलोचना की है। उन्होंने रविवार को कहा कि यह पार्टी भाजपा से सलाह-मशविरा किए बिना कोई काम नहीं कर सकती। मंत्री के इस वीडियो पर कांग्रेस ने भी उनके ऊपर निशाना साधा है। कृषि मंत्री के पास काम नहीं राकांपा (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने पोस्ट में लिखा कि सत्तारूढ़ राकांपा गुट भाजपा से सलाह-मशविरा किए बिना काम नहीं कर सकता। यही वजह है कि राज्य में कृषि से जुड़े कई मुद्दे लंबित होने और रोजाना आठ किसानों द्वारा आत्महत्या किए जाने के बावजूद कृषि मंत्री के पास कोई काम नहीं है। वह रमी खेलने में व्यस्त दिखते हैं। बार-बार प्रयास किये जाने के बावजूद राकांपा और मंत्री कोकाटे से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। कांग्रेस ने लगाया धोखेबाजी का आरोप इस बीच, कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने महायुति सरकार पर किसानों के साथ ‘धोखेबाजी’ और ‘विश्वासघात’ करने का आरोप लगाया। वडेट्टीवार ने पत्रकारों से कहा कि राज्य में किसान मर रहे हैं और कृषि मंत्री अपने मोबाइल फोन पर गेम खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस धोखेबाज और विश्वासघाती सरकार को किसानों की कोई चिंता नहीं है। मैं किसानों से अपील करता हूं कि वे उन्हें सबक सिखाएं। फडणवीस ठाकरे मुलाकात पर क्या बोले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे की मुंबई के एक होटल में मुलाकात की खबरों के बारे में पूछे जाने पर वडेट्टीवार ने कहा कि दोनों अलग-अलग कार्यक्रमों के लिए होटल में थे और उनकी मुलाकात नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मुलाकात भी हुई, तो जरूरी नहीं कि सभी मुलाकातें राजनीतिक हों।  

किशमिश खाने वालों के लिए अलर्ट! इस ब्रांड को तुरंत करें वापिस

नई दिल्ली अगर आप स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं और अमेरिकी गोल्डन किशमिश का सेवन करते हैं तो सावधान हो जाइए। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने हाल ही में इसके बारे में एक नोटिस जारी किया है, जिसके तहत बाजार से गोल्डन किशमिश के पैक को वापस करने का आदेश दिया गया है। FDA ने अपने नोटिस में कहा है कि गोल्डन किशमिश के पैक में एक एक ऐसा केमिकल पाया गया है, जिससे किशमिश का सेवन करने वालों को जान का खतरा है। इस आदेश के बाद न्यू जर्सी के निरवाना फुड्स ने अपने 28 औंस के गोल्डन किशमिश के पैकेट्स को बाजार से वापस मंगवा लिया है। FDA के मुताबिक इस किशमिश के पैकेट्स में सल्फाइट्स पाए गए हैं, जो इंसानों में गंभीर एलर्जी पैदा करते हैं। नोटिस में कहा गया है कि इस केमिकल के सेवन से जान को भी खतरा पहुंच सकता है और मरीजों को जानलेवा एनाफिलेक्टिक का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, किशमिश की रिफाइनिंग के दौरान उसके कालेपन और गंदगी को दूर करने के लिए सल्फाइट का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन अमेरिकी सरकार के नियमों के अनुसार गोल्डन किशमिश के पैकेट्स पर इसका स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य है। अस्थमा के मरीजों के लिए काल अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, यह केमिकल इसलिए भी चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि अमेरिका में लगभग 6 फीसदी वयस्क और 8 फीसदी बच्चे एलर्जी रोगों से प्रभावित हैं। निरवाना फुड्स के जिस लॉट्स को बाजार से वापस बुलाया गया है, वह न्यूयॉर्क के महाराजा सुपर मार्केट और न्यू जर्सी एवं न्यूयॉर्क के विलेजर फार्मर्स मार्केट स्टोर्स में बेचे गए थे। CDC के मुताबिक, सल्फाइट के सेवन से किसी बीमार या संवेदनशील व्यक्ति की जान जा सकती है। इसके अलावा आम जन को इससे गले में सूजन, सांस लेने में परेशानी, ब्लड प्रेशर में अचानक गिरावट या बेहोशी जैसी परेशानियां हो सकती हैं, जिसमें तुरंत इलाज की जरूरत है। अस्थमा और दमा के मरीजों के लिए यह काल है। देर करने पर जान जाने का जोखिम होता है। क्यों होता है इस केमिकल का इस्तेमाल? बता दें कि गोल्डन किशमिश के सप्लायर्स किशमिश को सुनहरा रंग देने और उसकी सफाई करने के लिए सल्फरडाइऑक्साइड और सल्फाइट का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, गहरे रंग की गोल्डन किशमिश को इस तरह के केमिकल से सफाई की जरूरत नहीं होती। बड़ी बात यह भी है कि सल्फाइट प्राकृतिक रूप से टमाटर, प्याज और वाइन जैसे पदार्थों में भी पाया जाता है।गोल्डन किशमिश को भारत में सुल्ताना किशमिश भी कहा जाता है। यह बीज रहित किस्म के सूखे सफेद अंगूर होते हैं। ये सुनहरे रंग के होते हैं और अन्य किशमिशों की तुलना में ज़्यादा गाढ़े, मीठे और रसीले होते हैं। यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जिसमें प्रोटीन, आयरन और आवश्यक विटामिन भी होते हैं।  

रिजिजू का दो टूक: ऑपरेशन सिंदूर पर खुली है सरकार, ट्रंप का दावा अलग नजरिए से देखें

नई दिल्ली  केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने रविवार को कहा कि मॉनसून सत्र के दौरान सरकार ऑपरेशन सिंदूर, पहलगाम आतंकी हमला जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। सत्र 21 जुलाई सोमवार से शुरू होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार किसी भी मुद्दे से पीछे नहीं हटेगी और संसद को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रतिबद्ध है। रिजिजू ने ये बातें ऑल पार्टी मीटिंग के बाद कहीं। सर्वदलीय बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में रिजिजू से जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीज़फायर दावे को लेकर विपक्ष के रुख पर सवाल किया गया, तो रिजिजू ने कहा कि सरकार संसद में ही इस पर जवाब देगी, बाहर नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में हमेशा मौजूद रहते हैं जब भी कोई बड़ा मुद्दा उठता है। रिजिजू के मुताबिक, सरकार मॉनसून सत्र में 17 विधेयक (बिल) पेश करने की योजना बना रही है और बहस के दौरान सभी सवालों के जवाब दिए जाएंगे। सर्वदलीय बैठक में 51 दल हुए शामिल उन्होंने कहा, "हम खुले दिल से चर्चा के लिए तैयार हैं। हम संसदीय नियमों और परंपराओं का सम्मान करते हैं।” ऑल पार्टी बैठक में 51 दलों के 54 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिसमें सभी दलों – एनडीए, यूपीए (इंडिया ब्लॉक) और निर्दलीय सांसदों – ने अपने मुद्दे रखे और बहस की मांग की। रिजिजू ने कहा, "हम अलग-अलग विचारधाराओं से हो सकते हैं, लेकिन संसद को ठीक से चलाना सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है।" न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा पर महाभियोग प्रस्ताव किरण रिजिजू ने बताया कि सांसदों द्वारा न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग लाने की मांग की गई है। 100 से अधिक सांसदों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं। सरकार इस मानसून सत्र में ही प्रस्ताव लाएगी, लेकिन इसके पेश किए जाने की तारीख अभी तय नहीं की गई है। उन्होंने कहा, "महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा। टाइमलाइन बाद में बताई जाएगी।" छोटे दलों को कम बोलने के समय मिलने पर भी बोले रिजिजू रिजिजू ने यह भी माना कि जिन दलों के सांसद कम संख्या में हैं, उन्हें अक्सर संसद में बोलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय को लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के समक्ष उठाएगी और इसे बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में शामिल किया जाएगा ताकि सभी को समान अवसर मिल सके।  

ड्रैगन का जल-जाल: भारत के लिए क्यों खतरनाक है चीन का नया मेगा डैम?

नई दिल्ली चीन ने भारतीय सीमा पर नया बांध बनाना शुरू कर दिया है। यह बांध तिब्बत में ब्रह्मपुत्र पर बनाया जा रहा है। चीनी परिषद ने अपनी वेबसाइट पर इस बांध को लेकर जानकारी दी है।बनकर तैयार होने के बाद यह दुनिया का सबसे बड़ा बांध होगा। चीन की इस हरकत ने भारत ने माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं। इसके पीछे कई वजहें हैं। असल में यह बांध नहीं, बल्कि चीन का एक वॉटर बम है, जिसे वह भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर सकता है। इसके अलावा इस बांध की लोकेशन ऐसी है जो भारत के लिए रणनीतिक लिहाज से काफी अहम है। इसके अलावा इस लोकेशन पर टैक्टोनिक प्लेट्स के टकराने से भूकंप का खतरा भी बना रहता है। भारतीय सीमा के करीब चीन भारतीय सीमा के नजदीक यह बांध बना रहा है। चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग ने इस बांध के निर्माण का ऐलान कर दिया है। यह बांध चीन के न्यिंगची शहर में ब्रह्मपुत्र नदी के निचले क्षेत्र में बनाया जा रहा है। यह बांध हिमालय पर्वतमाला में एक विशाल घाटी पर बनाया जाएगा। इसी जगह पर ब्रह्मपुत्र नदी एक विशाल ‘यू-टर्न’ लेकर अरुणाचल प्रदेश और फिर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। ब्रह्मपुत्र नदी चीन में सांगपो के नाम से जानी जाती है। यह नदी दक्षिण-पश्चिमी तिब्बत में कैलाश पर्वत के पास जिमा यांगजोंग ग्लेशियर से निकलती है। इसकी लंबाई 1,700 किलोमीटर है। यह भारत में अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी में, फिर असम में ब्रह्मपुत्र और बाद में बांग्लादेश पहुंचती है। भारत के लिए क्यों चिंता भारत में इस बात को लेकर चिंताएं उत्पन्न हो गईं कि बांध के आकार और पैमाने के कारण चीन को जल प्रवाह को नियंत्रित करने का अधिकार तो मिलेगा ही, साथ ही इससे बीजिंग को युद्ध के समय सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ लाने के लिए बड़ी मात्रा में पानी छोड़ने में भी मदद मिलेगी। साल 2020 में एक ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक ने रिपोर्ट पब्लिश की थी। इसके मुताबिक चीन तिब्बत के पठार की नदियों को कंट्रोल करके भारत को परेशानी में डाल सकता है। इतनी है लागत यह बांध 167.8 अरब डॉलर की लागत से बनाया जा रहा है। यहां पर पांच हाइड्रोपॉवर स्टेशंस बनेंगे। यहां बने जल विद्युत स्टेशन से हर साल 300 अरब किलोवाट घंटे से अधिक बिजली पैदा होने की उम्मीद है। इससे चीन में करीब 30 करोड़ लोगों को फायदा मिलेगा। अभी तक चीन में यांग्ज्ती नदी पर बना था, जहां सबसे ज्यादा बिजली पैदा होती है। भारत की क्या तैयारी भारत भी अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बना रहा है। भारत और चीन ने सीमा पार नदियों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए 2006 में विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र (ईएलएम) बनाया थ्ज्ञा। जिसके तहत चीन बाढ़ के मौसम के दौरान भारत को ब्रह्मपुत्र नदी और सतलुज नदी पर जल विज्ञान संबंधी जानकारी प्रदान करता है। लेकिन यह बांध बन जाने के बाद यह सिस्टम कितना काम करेगा यह देखने वाली बात होगी।