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शिवलिंग को इस दिशा में रखकर करें अभिषेक, जीवन बन जाएगा खुशहाल और सिद्धियों से भरपूर

हिंदू धर्म में महादेव को देवों के देव कहा गया है। नए साल के पहले दिन यदि विधि-विधान से घर में शिवलिंग की स्थापना और अभिषेक किया जाए, तो यह न केवल मानसिक शांति लाता है बल्कि रुके हुए कार्यों को भी गति देता है। लेकिन, अक्सर लोग अनजाने में शिवलिंग को गलत दिशा में रख देते हैं, जिससे उन्हें पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। तो आइए जानते हैं साल के पहले दिन किस दिशा में शिवलिंग रखकर करें अभिषेक करें। किस दिशा में रखें शिवलिंग? वास्तु शास्त्र और शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग की स्थापना के लिए उत्तर दिशा सबसे उत्तम मानी गई है। उत्तर दिशा भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थान मानी जाती है। शिवलिंग की जलाधारी का मुख हमेशा उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए। इससे घर में सुख-समृद्धि का प्रवाह निरंतर बना रहता है। भूलकर भी न करें ये दिशा संबंधी गलती शिवलिंग को कभी भी पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुख करके नहीं रखना चाहिए। यदि आप दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करते हैं, तो इसे भी शास्त्रों में वर्जित माना गया है। घर के मंदिर में शिवलिंग को हमेशा ऐसी जगह रखें जहाँ से ऊर्जा का संचार चारों ओर हो सके। नए साल पर अभिषेक की विधि सिद्धियों की प्राप्ति के लिए साल के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से भोलेनाथ का अभिषेक करें। यह जीवन के पांच दोषों को दूर करता है। महादेव को बेलपत्र, धतूरा, और चंदन अर्पित करें। ध्यान रहे कि शिवलिंग पर कभी भी केतकी के फूल या सिंदूर न चढ़ाएं। अंत में गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करते समय 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें। घर में शिवलिंग का आकार शास्त्रों के अनुसार, घर में रखे जाने वाले शिवलिंग का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए अंगूठे के ऊपर के पोर जितना बड़ा शिवलिंग ही सबसे शुभ माना जाता है। इससे अधिक बड़ा शिवलिंग मंदिरों के लिए उपयुक्त होता है। सिद्धि और सफलता के लिए विशेष मंत्र अभिषेक के दौरान यदि आप 'श्री शिवाय नमस्तुभ्यं' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हैं, तो यह आपके स्वास्थ्य और करियर के लिए 'रामबाण' सिद्ध हो सकता है।

पौष पुत्रदा एकादशी 2024: 30 या 31 दिसंबर को व्रत? पढ़ें तिथि, मुहूर्त और महत्व

सनातन धर्म में एकादशी तिथि का खास महत्व है। इस खास अवसर पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विधिपूर्वक पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से साधक को  सभी संकटों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि पौष पुत्रदा एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में। पौष पुत्रदा एकादशी 2025 डेट और शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 30 दिसंबर को सुबह 07 बजकर 50 मिनट पर शुरुआत होगी। वहीं, इसी तिथि का समापन 31 दिसंबर को सुबह 05 बजे होगा। ऐसे में 30 दिसंबर को पौष पुत्रदा एकादशी व्रत किया जाएगा। इस व्रत का पारण 31 दिसंबर को किया जाएगा। पौष पुत्रदा एकादशी व्रत 2025 पारण डेट और टाइम एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर किया जाता है। ऐसे में पौष पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण करने का समय 31 दिसंबर को दोपहर 01 बजकर 29 मिनट से लेकर दोपहर 03 बजकर 33 मिनट तक है। सूर्योदय और सूर्यास्त का समय सूर्योदय – सुबह 07 बजकर 13 मिनट पर सूर्यास्त – शाम 05 बजकर 34 मिनट पर चंद्रोदय का समय – दोपहर 01 बजकर 33 मिनट पर चन्द्रास्त का समय – 31 दिसम्बर को 03 बजकर 43 मिनट पर ब्रह्म मुहूर्त- 05 बजकर 24 मिनट 06 बजकर 19 मिनट पर अभिजित मुहूर्त- 12 बजकर 03 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट विजय मुहूर्त- 02 बजकर 07 मिनट से 02 बजकर 49 मिनट पर गोधूलि मुहूर्त- 05 बजकर 31 मिनट से 05 बजकर 59 मिनट पर करें इन चीजों का दान सनातन धर्म में एकादशी के दिन दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी तिथि पर पीले फल, अन्न, धन और कपड़े समेत आदि चीजों का दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं और जीवन में खुशियों का आगमन होता है। साथ ही साधक को जीवन में किसी भी चीज की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है।  

क्या एक गोत्र में शादी करने से जीवन में आती हैं परेशानियां? शास्त्र और मान्यताओं की पड़ताल

हिंदू धर्म में विवाह 16 संस्कारों में से एक माना जाता है. विवाह के बाद गृहस्थ जीवन की शुरुआत होती है. हिंदू धर्म में विवाह में कई परंपराएं होती है. विवाह के दौरान कई बातों का ध्यान रखा जाता है. इन्हीं महत्वपूर्ण बातों में शामिल है गोत्र. हिंदू धर्म में कभी भी एक ही गोत्र में विवाह नहीं किया जाता है, लेकिन ऐसा क्यों है? आइए विस्तार से जानते हैं. गोत्र का शाब्दिक अर्थ होता है वंश या कुल. प्राचीन समय में जो ऋषि-मुनियों के वंशज थे, उनको गोत्रों में बांटा गया था. हर गोत्र का एक मूल ऋषि होता है, जिसके नाम से उस गोत्र की पहचान होती है. उदाहरण के तौर पर कश्यप गोत्र, भारद्वाज गोत्र, गौतम गोत्र. एक गोत्र के लोगों को एक ही पूर्वज का वंशज माना जाता है, इसलिए कहा जाता है कि उनमें खून का रिश्ता यानी रक्त संबंध होता है. एक गोत्र में विवाह न करने का धार्मिक कारण एक गोत्र में विवाह न करने के पीछे कारण हैं. हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, एक ही गोत्र के लोग भाई-बहन लगते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि उनको एक ही ऋषि का वंशज माना जाता है. ऐसे में एक गोत्र में विवाह ऋषि परंपरा का उल्लंघन माना जाता है. मान्यता है कि एक ही गोत्र में विवाह करने से विवाह दोष होता है, जिससे वर-वधू के जीवन में परेशानियां आती हैं. यही नहीं कहा जाता है कि समान गोत्र में विवाह करने के बाद जो संतान होती है, उसमें शारीरिक और मानसिक रोग होने की संभावना रहती है. ये है वैज्ञानिक कारण विज्ञान ने भी इस बात को माना है कि अगर एक गोत्र में विवाह किया जाता है, तो कई परेशानियां हो सकती हैं. विज्ञान के अनुसार, एक ही गोत्र या कुल में विवाह करने पर संतान में आनुवांशिक दोष हो सकते हैं. ऐसे दंपत्ति की जो संतान होती है, उसमें कुछ नयापन देखने को नहीं मिलता.

24 दिसंबर का राशिफल: सभी राशियों के लिए आज का भविष्यफल, जानें क्या कहती है सितारे

मेष आज दिन की शुरुआत थोड़ी भारी लग सकती है। मन में कई बातें एक साथ चलेंगी, जिससे ध्यान भटक सकता है। कामकाज में जल्दबाज़ी नुकसान दे सकती है, इसलिए हर काम सोचकर करें। किसी करीबी से कहा-सुना हो सकता है, लेकिन बात को बढ़ाने से बचें। पैसों के मामले में आज जोखिम लेना ठीक नहीं। शाम के समय हालात संभलेंगे और मन हल्का होगा। वृषभ आज का दिन शांत और संतुलित रहने वाला है। रोजमर्रा के काम आराम से निपटेंगे। घर के किसी सदस्य से बातचीत मन को अच्छा करेगी। खर्च ज़रूरत के हिसाब से करें, दिखावे से दूर रहें। सेहत ठीक रहेगी, बस आलस हावी न होने दें। दिन के अंत में सुकून महसूस होगा। मिथुन आज बातचीत में सावधानी जरूरी है। आपकी बात का मतलब गलत निकाला जा सकता है। ऑफिस या कामकाज में व्यस्तता बनी रहेगी। फोन या मैसेज पर बहस से दूरी रखें। किसी पुराने काम को पूरा करने का मौका मिल सकता है। शाम को थोड़ी राहत मिलेगी और दिमाग शांत होगा। कर्क आज भावनाएं ज्यादा असर डाल सकती हैं। छोटी बात भी दिल पर लग सकती है। परिवार से जुड़ा कोई विषय मन में चलता रहेगा। काम में आपकी मेहनत साफ़ दिखेगी, लेकिन तारीफ थोड़ी देर से मिलेगी। किसी भरोसेमंद इंसान से बात करने से मन हल्का होगा। रात को नींद ठीक रहेगी। सिंह आज दिन थोड़ा व्यस्त हो सकता है। काम में रुकावटें आएंगी और मन दुखी हो सकता है। गुस्से में कोई फैसला लेने से बचें। दूसरों से ज़्यादा उम्मीद न रखें। धैर्य से काम लेंगे तो नुकसान नहीं होगा। शाम के बाद स्थिति धीरे-धीरे बेहतर होने लगेगी। तुला आज का दिन आपके पक्ष में रहेगा। अटके हुए काम आगे बढ़ेंगे और दिमाग साफ़ रहेगा। पैसों से जुड़ा कोई छोटा फायदा मिल सकता है। काम में फोकस अच्छा रहेगा। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन थकान महसूस हो तो आराम जरूर करें। दिन कुल मिलाकर संतोषजनक रहेगा। धनु आज मन दुविधा में रह सकता है। किसी फैसले को लेकर बार-बार सोचेंगे। रिश्तों में बात दबाने से बेहतर है साफ़ कह देना। काम में मन कम लग सकता है। खर्च बढ़ने के योग हैं, इसलिए हाथ थोड़ा रोककर रखें। शाम को स्थिति थोड़ी साफ होगी। मकर आज मेहनत और जिम्मेदारी दोनों ज़्यादा रहेंगी। काम का दबाव महसूस होगा, लेकिन आप संभाल लेंगे। किसी पुराने मुद्दे पर फिर से बात हो सकती है। गुस्से में बोले गए शब्द नुकसान कर सकते हैं, इसलिए संयम रखें। दिन के आखिर में राहत मिलेगी। कुम्भ आज कुछ नया सोचने या बदलने का मन करेगा। पुराने काम से ऊब महसूस हो सकती है। किसी दोस्त या जान-पहचान वाले से मदद मिल सकती है। बाहर जाने या छोटी यात्रा का योग बन सकता है। खर्च थोड़ा बढ़ेगा, लेकिन जरूरी काम पर होगा। कन्या आज काम और जिम्मेदारियां दोनों बढ़ी रहेंगी। टालमटोल करने से दबाव और बढ़ सकता है। परिवार में आपकी राय को महत्व मिलेगा। सेहत में हल्की थकान या शरीर भारी लग सकता है, खुद को आराम दें। दिन मेहनत भरा लेकिन संभलने वाला रहेगा। वृश्चिक आज ध्यान भटकने वाला दिन है। काम करते वक्त मन इधर-उधर जाएगा। किसी दोस्त या परिचित की परेशानी में साथ देना पड़ सकता है। पैसों के मामले में जोखिम से बचें। शाम को मन थोड़ा बेहतर होगा और तनाव कम होगा। मीन आज मन शांत और स्थिर रहेगा। चीजों को लेकर ज्यादा सोचने का मन नहीं करेगा। रिश्तों में अपनापन महसूस होगा। काम धीरे चलेगा, लेकिन तनाव नहीं रहेगा। कोई छोटी-सी खुशी या अच्छी खबर दिन बना सकती है।

आज नहीं तो कभी नहीं! साल की अंतिम चतुर्थी पर गणेश पूजा में इन गलतियों से बचें

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत हो या संकटों का निवारण, बप्पा का नाम सबसे पहले लिया जाता है. इस साल की आखिरी विनायक चतुर्थी कल यानी 24 दिसंबर 2025, बुधवार को मनाई जाएगी. चूंकि यह साल की अंतिम विनायक चतुर्थी है और बुधवार का दिन भगवान गणेश को ही समर्पित है, इसलिए इसका महत्व कई गुना बढ़ गया है. लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूजा के दौरान की गई छोटी सी चूक आपको शुभ फल से वंचित कर सकती है. विनायक चतुर्थी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि की शुरुआत 23 दिसंबर की दोपहर से हो जाएगी, लेकिन उदय तिथि की मान्यता के कारण व्रत और मुख्य पूजा 24 दिसंबर को ही की जाएगी.     चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 23 दिसंबर 2025, दोपहर से     चतुर्थी तिथि समाप्त: 24 दिसंबर 2025, दोपहर तक     पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: सुबह 11:19 AM से दोपहर 1:11 PM तक. गणेश पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां! तुलसी का प्रयोग वर्जित गणेश जी की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्तों का प्रयोग न करें. पौराणिक कथाओं के अनुसार, गणेश जी ने तुलसी को अपनी पूजा से वर्जित किया है. इसकी जगह उन्हें ‘दुर्वा’ (दूब घास) अर्पित करें. चंद्रमा के दर्शन से बचें विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को अशुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर झूठे कलंक लगने का भय रहता है. इसलिए शाम के समय सावधानी बरतें. खंडित मूर्ति की पूजा पूजा स्थान पर कभी भी ऐसी गणेश प्रतिमा न रखें जो कहीं से टूटी या चटक गई हो. खंडित मूर्ति की पूजा करने से घर में अशांति और दोष बढ़ता है. दिशा का ध्यान न रखना बप्पा की स्थापना करते समय ध्यान रखें कि उनका मुख दक्षिण दिशा की ओर न हो. पूजा के समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना श्रेष्ठ माना जाता है. तामसिक भोजन और क्रोध विनायक चतुर्थी के दिन घर में लहसुन, प्याज या मांस-मदिरा का प्रयोग बिल्कुल न करें. साथ ही, इस दिन किसी पर क्रोध न करें और न ही किसी को अपशब्द बोलें, नहीं तो मानसिक शांति भंग हो सकती है. कैसे करें सही विधि से पूजा? सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें. शुभ मुहूर्त में गणेश जी की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें. बप्पा को सिंदूर का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें. भगवान गणेश को 21 दुर्वा की गांठें और उनके प्रिय मोदक या लड्डू का भोग जरूर लगाएं. आखिर में गणेश चालीसा का पाठ करें और सपरिवार आरती उतारें.

खाने-सोने की गलत दिनचर्या डाल रही है सेहत पर असर, अभी करें सुधार

आपकी जीवनशैली पर वास्तु का गहरा असर पड़ता है। खाने से लेकर सोने तक वास्तु शास्त्र में हर चीज के लिए एक सही दिशा का वर्णन किया गया है, जिनका ध्यान रखने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्व माना जाता है। ऐसे में आपको भी इन बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। खाने के लिए सही दिशा वास्तु शास्त्र में खाना खाने के लिए पूर्व या उत्तर दिशा को सही माना गया है। अर्थात भोजन करते समय आपका मुख पूर्व या फिर उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। वास्तु शास्त्र में माना गया है कि ऐसा करने से पाचन में मदद मिलती है और आरोग्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही दक्षिण दिशा में भोजन करने से बचना चाहिए, क्योंकि वास्तु शास्त्र में इसे यम की दिशा माना गया है। ऐसे में इस दिशा में मुख करके भोजन करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य व मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वहीं अगर पश्चिम दिशा में भोजन किया जाए, तो इससे बीमारियों में वृद्धि होती है। सोने के लिए कौन सी दिशा है उचित वास्तु शास्त्र में माना गया है कि सोते समय आपका सिर दक्षिण या पूर्व की ओर होना चाहिए। ऐसा करने से आरामदायक नींद आती है, जिससे स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही उत्तर या फिर पश्चिम दिशा में सिर करके सोने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है और स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही वास्तु नियमों के अनुसार, घर के मुख्य द्वार के सामने नहीं सोना चाहिए और न ही दरवाजे की तरफ पैर करके सोना चाहिए। इन दिशाओं का भी रखें ध्यान वास्तु शास्त्र में पूजा आदि के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी (ईशान कोण) को सबसे उत्तम माना गया है। यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है और घर में दिव्यता लाती है। ऐसे में आपका मंदिर इसी दिशा में होना चाहिए। वहीं अगर आपका बेडरूम घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में है, तो इससे रिश्तों में स्थिरता और मधुरता आती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में सोने से दांपत्य जीवन खुशहाल बना रहता है।  

नववर्ष पर भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी, तिरुपति बालाजी मंदिर में वैकुंठ द्वार दर्शन की व्यवस्था

आंध्र प्रदेश के तिरुमला की पहाड़ियों पर स्थित तिरुपति बालाजी का मंदिर यानी भगवान विष्णु के अवतार श्री वेंकटेश्वर स्वामी के वैकुंठ द्वार दर्शन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. दरअसल, वैकुंठ द्वार के दर्शन 30 दिसंबर से 8 जनवरी तक किए जाएंगे, यानी श्रद्धालु ये दर्शन 10 दिनों तक कर सकेंगे. इसके लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं और दिन में तीन स्लॉट में दर्शन होंगे, जिनकी एंट्री हर बार अलग रास्ते से की जाएगी. इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा, भीड़भाड़ या अव्यवस्था का सामना न करना पड़े. इसी के तहत तिरुमला तिरुपति देवस्थानम(टीटीडी) ने वैकुंठ द्वार दर्शन के पहले तीन दिनों में तीन क्षेत्रों से निर्धारित समय के लिए श्रद्धालुओं को प्रवेश देने का निर्णय लिया है. इसके लिए, ई-डीआईपी सिस्टम के माध्यम से 30 दिसंबर (एकादशी), 31 दिसंबर (द्वादशी) और 1 जनवरी के लिए कुल 1.76 लाख श्रद्धालुओं को अग्रिम रूप से निर्धारित सर्व दर्शन टिकट आवंटित किए गए हैं. श्री वेंकटेश्वर स्वामीः 5 घंटे होंगे VIP दर्शन बताया गया है कि जिन श्रद्धालुओं के पास निर्धारित दर्शन टोकन हैं, उन्हें वैकुंठ द्वार के पहले दिन के 5 घंटे के वीआईपी दर्शन को छोड़कर पूरे समय दर्शन करने की अनुमति होगी. इस संदर्भ में, यह बताया गया है कि प्रतिदिन 60,000 से अधिक श्रद्धालुओं को कुल 14 स्लॉट में टोकन जारी किए गए हैं और उनके लिए तीन क्षेत्रों में प्रवेश मार्ग स्थापित किए गए हैं. टीटीडी ने कहा कि सुबह के स्लॉट में श्रद्धालुओं को कृष्णा तेजा सर्कल से, दोपहर के स्लॉट में श्रद्धालुओं को एटीजीएच से और रात के स्लॉट में श्रद्धालुओं को सिलातोरणम सर्कल से दर्शन करने की अनुमति होगी. टीटीडी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वैकुंठ द्वार दर्शन के संदर्भ में तीन दिनों तक बिना टोकन वाले श्रद्धालुओं को दर्शन करने की अनुमति नहीं होगी. पुलिस ने जारी की श्रद्धालुओं के लिए गाइडलाइंस     श्रद्धालु टीटीडी की ओर से निर्धारित समय सीमा के दौरान ही प्रवेश द्वारों पर पहुंचें.     टोकन, आधार कार्ड-पहचान दस्तावेज साथ ले जाना अनिवार्य है.     बताए गए प्रवेश मार्गों का ही पालन करें और रूट में कोई परिवर्तन नहीं करें.     पुलिस और टीटीडी कर्मियों द्वारा दिए गए आदेशों और निर्देशों का पालन करें.     श्रद्धालु ग्रुप में इकट्ठा न होकर शांति और सुरक्षा बनाए रखने में सहयोग करें.     यदि श्रद्धालुओं को कोई संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति दिखाई दे तो तुरंत निकटतम पुलिस को सूचित करें.  

पौष पूर्णिमा 2025: 2 या 3 जनवरी—कब मनाई जाएगी, शुभ समय और पूजा का पूरा विधान

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है, लेकिन पौष मास की पूर्णिमा का स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा के दिन दान, स्नान और सूर्य देव की उपासना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. साल 2026 की शुरुआत में ही पौष पूर्णिमा का महापर्व पड़ रहा है, जिसे लेकर लोगों में तिथि को लेकर कुछ उलझन है. आइए जानते हैं कि साल 2026 में पौष पूर्णिमा 2 जनवरी को है या 3 जनवरी को, और पूजा का शुभ मुहूर्त कब है. पौष पूर्णिमा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत और समाप्ति के समय के कारण उदयातिथि का महत्व होता है.     पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 02 जनवरी 2026 को शाम 06 बजकर 53 मिनट से.     पूर्णिमा तिथि समापन: 03 जनवरी 2026 को दोपहर 03 बजकर 32 मिनट पर. शास्त्रों के अनुसार, स्नान-दान और व्रत के लिए उदयातिथि को प्रधानता दी जाती है. चूंकि 3 जनवरी को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए पौष पूर्णिमा 3 जनवरी 2026, शनिवार को मनाई जाएगी. पौष पूर्णिमा की पूजा विधि ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें. सूर्य को अर्घ्य: स्नान के बाद “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें. व्रत का संकल्प: भगवान विष्णु जी के सामने व्रत का संकल्प लें. सत्यनारायण कथा: इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना या पढ़ना बहुत ही फलदायी होता है. चंद्र देव की पूजा: रात के समय चंद्रमा को दूध और जल का अर्घ्य दें. दान-पुण्य: पूजा के बाद ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को तिल, गुड़, कंबल या ऊनी वस्त्रों का दान करें. पौष पूर्णिमा के दिन तामसिक भोजन प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा से परहेज करना चाहिए और और सात्विक जीवन का पालन करना चाहिए. इन मंत्रों का करें जाप पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है.     विष्णु मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय     लक्ष्मी मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद पौष पूर्णिमा का महत्व पौष का महीना सूर्य देव का महीना माना जाता है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है. इसलिए इस दिन सूर्य और चंद्रमा का अद्भुत संगम होता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है. इसी दिन से प्रयागराज में माघ मेले के दौरान ‘कल्पवास’ की शुरुआत होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है. इस दिन किए गए स्नान, दान और व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है.

सफलता नहीं मिल रही? आचार्य चाणक्य के 5 सिद्धांत अपनाते ही करियर में आएगा बड़ा मोड़

अगर कड़ी मेहनत के बावजूद आपको करियर, बिजनेस या किसी इंटव्यू में सफलता नहीं मिल पा रही है तो आपको आचार्य चाणक्य की 5 खास बातों पर जरूर गौर करना चाहिए। आचार्य चाणक्य ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ 'चाणक्य नीति' में करियर में सफलता दिलाने वाले ऐसे ही 5 गुणों का जिक्र किया है। जिन्हें फॉलो करने से व्यक्ति के जीवन की दिशा बदलने के साथ उसे एक नई राह भी मिल सकती है। बता दें, चाणक्य नीति में बहुत सी ऐसी बातें दर्ज हैं जिन्हें अपने जीवन में उतारकर व्यक्ति खुशहाल सफल जीवन जी सकता है। बिना लक्ष्य के श्रम, मंजिल नहीं सिर्फ थकान देता है आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस व्यक्ति के पास सफलता हासिल करने के लिए स्पष्ट लक्ष्य नहीं होता है, उसकी मेहनत हमेशा बेकार हो जाती है। अगर आप एक ही तरह की नौकरी में बार-बार असफल हो रहे हैं, तो आपको रूक कर जरूर सोचना चाहिए कि क्या आप वाकई नौकरी के उसी क्षेत्र के बने हैं या आपकी मंजिल कुछ और है? गुस्से पर काबू रखें​ बात-बात पर गुस्सा करने वाले व्यक्ति को समाज में कोई भी पसंद नहीं करता है। ऐसे व्यक्ति की करियर ग्रोथ भी रूक जाती है। जरूरत से ज्यादा गुस्सा समाज में आपकी छवि खराब करता है। चाणक्य नीति में कहा गया है कि क्रोध इंसान की बुद्धि और मान-सम्मान दोनों को नष्ट कर देता है। समय खराब करने वाला व्यक्ति चाणक्य नीति के अनुसार समय व्यक्ति की सबसे बड़ी संपत्ति है। जो लोग करियर में सही समय पर सही निर्णय नहीं लेते, वो मौका चूक जाते हैं। असफलता मिलने पर ब्रेक लेकर एक ठोस रणनीति बनाएं कि आप कैसे लक्ष्य हासिल करने में सफल हो सकते हैं। मुश्किल समय में घबराने वाले लोग आचार्य चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति संकट के समय में धैर्य के साथ आगे बढ़ता रहता है वही जीवन में सफलता हासिल कर पाता है। करियर में मिली असफलता एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन उसके बाद खुद पर संदेह करना, आत्मविश्वास खो देना और दूसरों से अपनी तुलना करना व्यक्ति की सबसे बड़ी भूल है। निराश होने की जगह विश्लेषण करें कि सफलता की राह हासिल करने में आपकी तरफ से कहां कमी रह गई है। सम्मान करें​ चाणक्य नीति के अनुसार बड़ों का आशीर्वाद व्यक्ति के लिए सफलता की राह आसान बना देता है। ऑफिस में भी खुद से सीनियर व्यक्ति का दिल से सम्मान करें। सम्मान देने वाला व्यक्ति हर किसी का प्रिय बन जाता है। जो उसे सफलता हासिल करने में मदद करता है।

नए साल 2026 में खुशहाली चाहिए? घर की दिशा से लेकर सजावट तक जानें वास्तु टिप्स

आने वाले साल से पहले आप अपने घर में वास्तु नियमों के अनुसार, कुछ बदलाव लाकर सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ावा कर सकते हैं। इससे आपके लिए आना वाला साल खुशियों से भरा रहेगा। वास्तु के अनुसार, दिशाओं का ध्यान रखकर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाया जा सकता है। चलिए जानते हैं ऐसे ही कुछ टिप्स। रसोई में ध्यान रखें ये बातें वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि रसोई में अग्नि कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में भोजन पकाना चाहिए। ऐसे में आप स्टोव या गैस को इस दिशा में रख सकते हैं। अगर आप इसे उत्तर या पश्चिम दिशा में रखते हैं, तो इससे स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है। साथ ही किचन में छुरी-कांटे जैसी धारदार चीजों को कभी भी उल्टा करके नहीं रखना चाहिए। इन सभी नियमों की अनदेखी वास्तु दोष का कारण बन सकती है। इन दिशाओं का भी रखें ध्यान इसके साथ ही वास्तु शास्त्र में आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा), वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा), ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) और नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) से जुड़े नियम भी बताए गए हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी है। ईशान कोण में पूजा घर, वाटर टैंक या बोरिंग रखना शुभ होता है। वहीं आग्नेय कोण में इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि रखा जा सकता है। वायव्य कोण की बात करें तो आप इस दिशा में बेडरूम या गैरेज बनवा सकते हैं। वहीं अगर नैऋत्य कोण में कैश काउंटर, या मशीनें रखने से लाभ मिलता है। घर के बाहर करें ये चीजें वास्तु शास्त्र में माना गया है कि खराब व टूटी हुई वस्तुएं नकारात्मकता को बढ़ावा देती हैं। ऐसे में जितना जल्दी हो सके इन चीजों को घर से बाहर कर देना चाहिए। ऐसे में अपने घर में टूटा या खराब पड़ा इलेक्ट्रिक सामान और बंद घड़ी बिल्कुल भी नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इनसे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे घर में लड़ाई-झगड़े बढ़ सकते हैं।